Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - Printable Version

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RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर खुद भी तैयार होने के लिए अपने कमरे में चली गई आज बहुत दिन बाद उसे ऑफिस जाने का मौका मिला था वरना विनीत के डर से वह कुछ दिनों से ऑफिस नहीं जा पाई थी और घर में ही बैठे बैठे बोर भी हो रही थी और विनीत की वजह से डरी सहमी भी रहती थी। लेकिन जब राहुल ने बताया कि वीनीत का दिमाग ऊसने ठिकाने लगा दिया है तब उसका मन प्रसन्न हुआ विनीत से छुटकारा पाने की बातों से उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे कि उसे एक नई जिंदगी मिली हो। उसकी प्रसन्नता का ठिकाना ना था वह मन में गीत गुनगुनाते हुए आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होने लगी। 
अलका पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी संभोग के असीम सुख की प्राप्त कर करके एक अाह्लादक एहसास की वजह से उसकी खूबसूरती और उसके बदन का उठाव और कटाव दिन ब दिन ऊभरकर ओर भी ज्यादा उभरकर खूबसूरत हो गया था। 
अलका अपनी छातियों का उभार और अपने भरे हुए बदन को आईने में देखकर अपनी खूबसूरती पर खुद ही शरमा गई और गर्वित होने लगी। दिन ब दिन बढ़ती उसकी खूबसूरती का राज वो अच्छी तरह से जानती थी। वह जानती थी कि उसके बेटे के साथ जबरदस्त संतुष्टि भारी चुदाई की वजह से ही उसकी खूबसूरती दिन ब दिन निखरती जा रही थी। जेसे ही उसकी नजर उसकी खुद की बड़ी बड़ी चुचियों पर गई तो अपनी चुचियों के उभार को देख कर और उसकी खूबसूरती से वह खुद ही चौंधिया गई और वह अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों गोलाइयों पर रखे बिना ना रह सकी। एक बार अपनी दोनो चुचियों को अपनी हथेली में भरकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबा कर वह आईने में अपने रूप को देखने लगी और खुद ही शरमा कर मुस्कुरा दी।
उसकी नजर दीवार पर टंगे घड़ी पर गई तो झट से बिस्तर पर से अपना पर्श उठाई और कमरे से बाहर आ गई। वह घर से निकल कर जल्दी-जल्दी सड़क पर जाने लगी। अलका इस उम्र में भी क़यामत से कम नहीं लगती थी आज भी वह अपनी खूबसूरती के जलवे बिखेर रही थी। 
उसके बदन की बनावट और कटाव देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाता था। अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों को भी वह बराबर का टक्कर देती थी। इसका ताजा उदाहरण राहुल ने दोनों औरतों को अपनी मां अलका के लिए ठुकरा कर दे दिया था। 
अलका जल्दी-जल्दी मस्ती के साथ सड़क पर अपनी गांड मटकाते हुए चली जा रही थी। उसकी भरावदार गांड की थिरकन किसी को भी मदहोश कर देने में सक्षम थी। सड़क पर आते-जाते ऐसा कोई भी मर्द नहीं होगा जिसकी नजर अलका के मदभरे रस टपकाते बदन पर ना पड़े। आगे से आ रहे राहगीर की नजर सबसे पहले उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर ही जाती थी और पीछे से आ रहे राहगीर की नजर उस की भरावदार बड़ी-बड़ी मटकती गांड. पर। 
अलका अपनी मस्ती में कदम बढ़ाते हुए और अपनी गांड मटका के ऑफिस की तरफ चली जा रही थी आज बहुत दिनों बाद खुली सड़क पर इस तरह से चलने पर उसे राहत महसूस हो रही थी। ऑफिस जाते समय रास्ते में ही उसे याद आया कि राहुल का जन्मदिन आने वाला था और उसने उसे पूरी तरह से खुश करने का वादा किया था। अपने किए हुए वादे का मतलब वह अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह उस वादे को याद करके शरमाते हुए मन ही मन में मुस्कुरा दी। थोड़ी ही देर में वह अपने ऑफिस पहुंच गई आज खुशी-खुशी में ऑफिस का काम करके अपने मन को हल्का महसूस कर रही थी। 

धीरे-धीरे घड़ी की सुई अपनी धुरी पर घूमती रही और शाम का वक्त हो गया। सपने निश्चित समय पर ऑफिस छूट चुकी थी और अलंकार ऑफिस से निकल कर अपने घर की तरफ जा रही थी। सुबह तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन ऑफिस से छूटने के बाद उसके मन में फिर से विनीत नाम का भूत घूमने लगा उसे फिर भी नहीं कर नाम से ही चिंता होने लगी। अलका को विनीत के द्वारा दी गई धमकी बार-बार याद आने लगी। अलका मन ही मन में घबराने लगीं उसके मन में ढेर सारे सवाल ऊठने लगे। विनीत के बारे में सोचते हुए वह सड़क पर चली जा रहे थे उसे अब डर लगने लगा था क्योंकि बाजार नजदीक थी और वहीं पर अक्सर उससे मुलाकात हो जाती थी। उसके मन में यह शंका बनी हुई थी कि अगर कहीं विनीत नहीं माना और फिर से उसे धमकाने लगा और उसके साथ मनमानी करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा तो वह क्या करेगी, लेकिन राहुल नहीं तो उसे कहा था कि विनीत का दिमाग उसनें ठिकाने लगा दिया है अब वह उसे कभी भी परेशान नहीं करेगा और उसी के कहने पर तो मैं आज ऑफिस आई थी। यही सब खयाल रह-रहकर अलका के मन में उठ रहे थे और वह परेशान भी हो रही थी यही सब सोचते सोचते बाजार आ गया उसकी दिल की धड़कनें बढ़ रही थी और वह जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए बाजार से निकल जाना चाहती थी। 
वह मन ही मन भगवान से दुआ कर रही थी कि वीनीत उसे रास्ते में ना मिले और वह बिना किसी मुसीबत के अपने घर चली जाए , धीरे धीरे करके वह बाजार के अंतिम छोर पर पहुंच गई जहां पर बाजार खत्म होता था उसकी चिंता कुछ कम होने लगी मुझे लगने लगा कि वहां पर ही मैं अभी नींद से उसका सामना नहीं होगा लेकिन उसका सोचना ही था कि सामने से उसे वीनीत मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही अलका के दिल की धड़कने डर के मारे तेज हो गई। उसकी चाल कुछ धीमी हो गई ऐसा लग रहा था कि उसके पैर आगे बढ़ने से इंकार कर रहे हो धीरे धीरे विनीत करीब आ रहा था। अलका डर के मारे उसकी तरफ से अपनी नजरें फेर भी ले रही थी लेकिन रह रहकर उसकी नजरें बार बार वीनीत की तरफ चली जा रही थी। तभी कुछ करीब आया तो विनीत की नजर भी अलका के ऊपर पड़ गई उसकी नजर एक पल के लिए अलका के कामुक भरावदा़र बदन पर ही टिकी रह गई। अलका को और उसके बदन की खूबसूरती को देखकर विनीत के मन में लड्डू फूटने लगे और उसके मुंह में पानी आ गया। उसकी टांगों के बीच के हथियार में हरकत होने लगी। लेकिन तभी उसे राहुल के द्वारा दी गई शिकस्त के बारे में याद आ गया । उसे याद आ गया कि राहुल ने उसे कितना बेबस कर दिया था कि वह उसकी आंखों के सामने उसकी भाभी और उसकी होने वाली बीवी के साथ शारीरिक संबंध बना लिया और वह कुछ भी नहीं कर पाया। वह अच्छी तरह से समझ गया था कि राहुल से उलझना ठीक नहीं है। 
अलका सड़क के बाएं तरफ से जा रही थी और विनीत सड़क के बाएं तरफ से आ रहा था दोनों बिल्कुल करीब आमने सामने आने ही वाले थे कि दोनों की नजरें आपस में टकराई , अलका विनीत के नजर से नजर मिलते ही सहमं गई उसकी डर के मारे पसीने छूट गए एक डर की लहर उसके पूरे बदन में ऊपर से नीचे तक फैल गई। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। ना चाहते हुए भी घबराहट की वजह से उसके पांव ज्यो के त्यों वही ठिठक गए दोनों बिल्कुल करीब आ गए थे विनीत भी अलका की आंखों में झांकते हुए करते हुए बिल्कुल उसके करीब पहुंच गया था फर्क सिर्फ इतना था कि वह सड़क के ऊस ओर था और अलका इस और। 
अलका को लगने लगा कि राहुल की बातों का विनीत के ऊपर कोई असर नहीं हुआ है। उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी उसे यकीन हो गया कि वह करीब आ करके फिर से उसे धमकाएगा और अपने साथ सोने के लिए मजबूर करेगा वह सड़क पर बुत बने खड़ी होकर विनीत की तरफ ही देखे जा रही थी और विनीत भी उसी ही को घूर रहा था। विनीत एकदम आमने-सामने आ गया था लेकिन कभी विनीत अपनी नजर सामने की तरफ फेर लिया औअपनी मोटरसाइकिल एक्सीलेटर को बढ़ाकर तेजी से आगे निकल गया। 
अलका तो वहीं खड़ी खड़ी आश्चर्य से फटी आंखों से विनीत को सड़क पर दूर जाते देखती रह गई उसे यह सब एक चमत्कार सा लगने लगा। वह सड़क पर खड़ी होकर विनीत को तब तक देखती रही जब तक की वह आंखों से ओझल नहीं हो गया । पूरा खेल उल्टा पड़ गया था कुछ देर पहले अलका की दिल की धड़कन जो की बहुत ही तेज चल रही थी वह अब सामान्य होने लगी। विनीत को बिना कोई हरकत किए जाते देख कर उसकी जान में जान आ गई थी वह राहत सी महसूस कर रही थी। 
अलका को उसके सर से बहुत भारी बोझ हल्का होता नजर आ रहा था। उसे राहुल की कही हुई एक-एक शब्द पर यकीन होने लगा था वह अपने बेटे पर एकदम गर्वित हुए जा रही थी। राहुल पर उसे और ज्यादा प्यार होने लगा था सड़क पर खड़े खड़े ही उसने मन में निर्धारित कर ली की वह अपने बेटे को उसके जन्मदिन पर पूरी तरह से खुश कर देगी वह जो चाहेगा उसे सब कुछ देगी। 
कुछ ही देर पहले उसके चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आ रहे थे लेकिन इस समय उसके चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी। वह खुशी-खुशी अपने पैर अपने घर की तरफ बढ़ा दी। 

घर पर पहुंचकर वह आराम से कुर्सी पर बैठ कर राहत की सांस ली। उसे आज अपने घर में अच्छा महसूस हो रहा था। सब कुछ नया-नया सा बदला बदला सा लग रहा था। अगर राहुल घर पर मौजूद होता तो वह उसे कसके अपने सीने से लगा लेती उसे ढेर सारा प्यार करती आखिरकार उसने काम ही ऐसा कुछ कर दिया
था। विनीत जैसी मुसीबत से छुटकारा दिला कर राहुल ने अलका को बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाया था । अलका को इंतजार था राहुल के घर पर आने का क्योंकि उसे मालूम था वह इधर उधर घूम कर अपना टाइम पास करते रहता है इसलिए उसने झट से हाथ बहुत होकर तरोताजा हुई और रसोई में जाकर राहुल के मनपसंद का भोजन बनाने में जुट गई। 
जब तक राहुल आया तब तक खाना बन चुका था। सोनू कब से घर पर आकर अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अलका कुर्सी पर बैठ कर राहुल का इंतजार कर रही थी कि तभी राहुल घर में प्रवेश किया उसे देखते ही अलका कुर्सी पर से उठी और तुरंत आगे बढ़कर राहुल को अपने सीने से लगा ली , और लगी उसे चुमने चाटने लगी अपनी मां के इस व्यवहार को राहुल कुछ पल तक समझ ही नहीं पाया कि आखिरकार यह हो क्या रहा है। तभी अपने बेटे को बेतहाशा चूमते हुए अलका बोली।

बेटा तूने मुझे आज बहुत खुश कर दिया है तू नहीं जानता कि तूने मेरे सर से कितनी बड़ी मुसीबत को दूर किया है। मांग बेटा मांग तुझे जो मांगना है मुझ से मांग ले में तेरी सारी इच्छाओं को पूरी करूंगी। ईसलिए बेझिझक मांग ले। 
( अपनी मां की बात सुनकर राहुल को समझते देर नहीं लगी की ईतना ढेर सारा प्यार वीनीत से छुटकारा दिलाने की खुशी में है। ।।।।

अलका फिर से राहुल के गाल पर चुम्बनो का बौछार करते हुए बोली।

बोल बेटा तुझे क्या चाहिए तु जोे मांगेगा मैं तुझे वो दूंगी। ( राहुल अपनी मां की बात सुनकर बहुत खुश हुआ अपनी मां को खुश देखकर राहुल को बेहद खुशी हो रही थी। इसलिए राहुल खुश होता हुआ बोला।) 

मम्मी तुम खुश रहती है तू कितनी अच्छी लगती हो। और रही बात कुछ मांगने की तो कल मेरा जन्मदिन है बस कल के दिन अपना यह वादा याद रखना। 
( अपनी बेटी की बातें सुनकर अलका मुस्कुरा दी और एक बार फिर से उसे कस के अपने सीने से लगा ली . अलका की इस हरकत पर राहुल के बदन में उत्तेजना फेलने लगी। इसलिए वह बोला।) 

मम्मी मुझे जो चाहिए वह में कल अपने जन्मदिन पर मांग लूंगा लेकिन तुम्हारी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा होने लगा है। 
( अपने बेटे की बात सुनकर अलका मुस्कुरा दी उसे भी इस का आभास हो चुका था। अपनी टांगों के बीच वह अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस कर चुकी थी इसलिए वह भी चुदवासी हो चुकी थी। अपने बेटे की लंड खड़े होने वाली बात को सुनकर वह बोली।) 

तो देर किस बात की है बेटा डाल दे अपना लंड मेरी बुर में मेरी बुर भी तो तेरा लंड लेने के लिए पानी पानी हो गई है। 
( अलका की बात को सुनते ही राहुल का लंड ठुनकी लेने लगा। लेकीन वह एक खेद जताते हुए बोला।)

लेकिन मम्मी सोनू .,,,,, 

सोनू अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा है।( अलका राहुल की बात को बीच में ही काटते हुए बोली। अलका को भी बहुत ज्यादा ऊतावल मची हुई थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए। राहुल भी अपनी मां की जल्दबाजी को देखकर एकदम से जोश में आ गया। अलका के बदन में उत्तेजना और प्रसन्नता के भाव बराबर नजर आ रहे थे और इसी के चलते वह खुद ही वहीं पर ही कुर्सी पकड़कर झुक गई और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी यह राहुल के लिए इशारा था। वह ं अपनी गांड ऊचका कर अपनी नजरें घुमा कर राहुल की तरफ देखने लगी और उसे आंखों से इशारा करके अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाने का इशारा की,,,,, राहुल भी उत्तेजना से भर चुका था इसलिए वह भी एक पल की भी देरी किए बिना सीधे अपनी मां की साड़ी को पकड़कर एक झटके में ही कमर तक उठा दिया और पेंटी को नीचे जांघो तक सरका कर अपनी भी पेंट को खोलकर नीचे घुटनो तक सरका दिया। 
राहुल और अलका दोनों कामोतेजना के बहाव में बह़ते जा रहे थे। इस समय दोनों को इस बात का भी बिल्कुल भी फिक्र नहीं थी कि वह लोग ड्राइंग रूम में ही अपनी उत्तेजना को शांत करने में लगे हुए थे जहां पर किसी भी समय सोनु आ सकता था। लेकिन अलका आज बहुत खुश थी इसलिए वह राहुल को भी खुश करना चाहती थी इसलिए किसी भी चीज की फिक्र उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी। राहुल तो कुछ ही देर में अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर पूरी तरह से छा गया। राहुल अपनी मां की गरम सिसकारियों के साथ जोर जोर से धक्के लगाता हुआ चोदे जा रहा था। कुछ मिनटों की घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए। दोनों अपनी कामोत्तेजना को बड़े सफाई के साथ मिटा चुके थे। 
भोजन करते समय राहुल ने अपनी मां को कल के प्रोग्राम के बारे में बताया। कल के दिन अलका को छुट्टी रखनी थी। राहुल अपनी मां और सोनू के साथ घुमने ओर खरीदी करने का प्रोग्राम बना लिया था। कल वह अपनी मां का ब्रांडेड ब्रा ओर पेंटी के साथ साथ ट्रांशपेरेंट गाऊन भी दीलाना चाहता था., जिसके बारे मे ऊसने अपनी मां को कुछ भी नही बताया था। जो की ऊसकीमां के लिए सरप्राईज था।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

शाम के 4 बज रहे थे, में और मेरी तीनो दीदी इमरजेंसी वार्ड के बाहर बैठ कर माँ के होश आने जा इंतज़ार कर रहे थे तभी मेरे फोन पर संध्या का फोन आया । दूर जाकर मैंने फोन उठाया,तान्या दीदी समझ गई थी, वो मेरे साथ ही थी ।
संध्या-"हेलो सूर्या बेटा कहाँ है?
सूरज-"क्या हुआ बोलो माँ, में कंपनी में हूँ" 
संध्या-"तू कल से घर नहीं आया इसलिए पूछा"
सूरज-"माँ कंपनी के काम से बाहर एक मीटिंग में गया था" 
संध्या-"अच्छा बेटा, आज तो आएगा घर पर" 
सूरज-"माँ कंपनी का एक सेमीनार दिल्ली में है इसलिए आज रात में मुझे जाना पड़ेगा,चार पांच दिन में आ जाऊँगा" सूरज झूठ बोल देता है ताकि वो अपनी रेखा माँ का ख्याल रख सके ।
संध्या-" ओह्ह बेटा कितनी मेहनत करता है तू,चल कोई बात नहीं,अपना ध्यान रखना" फोन काट देता है सुरज, 
तान्या-"सूरज तू चिंता न कर,तू बस माँ का ख्याल रख" 
सूरज-"दीदी आप घर चली जाओ अब,माँ इंतज़ार कर रही होगी" 
तान्या-"में यही रुक जाती हूँ सूरज,माँ को कोई भी बहाना बना दूंगी"
सूरज-"नहीं दीदी,में अकेला ही काफी हूँ,आप जाओ" सूरज तान्या को भेज देता है । पूनम और तनु के पास आता है । पुनम और तनु सुबह से भूकी थी,इसलिए दोनों को घर भेज देता है । सूरज अकेला बाहर बैठा माँ के होश आने का इंतज़ार कर रहा था । इधर रेखा को होश आता है तो अपने आपको हॉस्पिटल के बेड पर पाती है । डॉक्टर रेखा के पास आती है ।
रेखा-"डॉक्टर मुझे क्या हुआ है"
डॉक्टर-"आप बेहोश क्यूँ हो गई थी?" 
रेखा-" मेरे पेट में दर्द हुआ था,और नीचे भी" रेखा संकुचित होकर बोलती है।
डॉक्टर-"आप सही से बताओ ताकि में आपका इलाज कर सकूँ" 
रेखा-" में नीचे अपनी योनि को साफ़ कर रही थी, योनि साफ़ करते समय में थोड़ी उत्तेजित हो गई थी,तभी मेरे पेट में और योनि में बहुत तेज दर्द हुआ,उसके बाद मुझे पता नहीं चला,शायद में बेहोस हो गई थी"डॉक्टर बड़े ध्यान से सुनती है ।
डॉक्टर-" मतलब तुम्हारा ओर्गास्म हो नहीं पाया"
रेखा-"ओर्गास्म का मतलब"
डॉक्टर-" आप झड़ नहीं पाई"
रेखा-"हाँ जी"रेखा शरमाती हुई बोली ।
डॉक्टर-"आपने आखरी बार सेक्स कब किया था" रेखा इस सवाल से शर्मा जाती है।
रेखा-"22 साल से" डॉक्टर यह सुनकर हैरान रह जाती है।
डॉक्टर-"ओह्ह्ह 22 साल तक आपने सेक्स ही नहीं किया" 
रेखा-"मेरे पति को मरे 22 साल हो चुके हैं" 
डॉक्टर-"ओह्ह्ह सॉरी, हस्तमैथुन किया आपने कभी इन 22 सालो में" 
रेखा-"हस्तमैथुन क्या,समझी नहीं" रेखा समझ नहीं पाती है ।
डॉक्टर-" मतलब कभी ऊँगली से अपने आपको शांत किया है?" रेखा को शर्म आ रही थी, लेकिन डॉक्टर के सामने मजबूरन बता देती है ।
रेखा-" हाँ किया है,पति के जाने के बाद" 
डॉक्टर-"कितने साल से ऊँगली नहीं की" 
रेखा-"21 साल हो चुके होंगे" डाक्टर हैरानी से रेखा को देखती है ।
डॉक्टर-" 21 साल तक आपने ऊँगली नहीं की,इसलिए आपको दर्द हुआ, योनि से निकलने बाला पानी आपकी नसों में जम चूका है,इसका निकलना बहुत आबश्यक है" रेखा डॉक्टर की बात बड़े ध्यान से सुनती है ।
रेखा-" क्या में ठीक नहीं हूँ अभी" 
डॉक्टर-"नहीं! आपके फिर से दर्द हो सकता है और आप बेहोस भी हो सकती हैं, आपकी नसों में जमा पानी निकलना बहुत जरुरी है,ये पानी या तो सेक्स करने से निकल सकता है या आप ऊँगली करो" डॉक्टर की यह बात सुनकर रेखा हैरान रह जाती है, 
रेखा-"में स सेक्स तो कर नहीं सकती,मेरे पति नहीं है, ऊँगली से कोसिस कर सकती हूँ" 
डॉक्टर-" ठीक है । लेकिन ऊँगली करने से पहले आपको में एक जैल क्रीम दूंगी,पहले उससे अपनी योनी के आसपास मसाज करना इससे आपकी नसे जल्दी खुल जाएगी,उसके बाद आप ऊँगली करके अपना पानी निकालना,आप मेक्सी को ऊपर कीजिए में आपको मसाज करने की प्रक्रिया समझाती हूँ" रेखा को बहुत शर्म आ रही थी, लेकिन मजबूर थी,मेक्सी को ऊपर उठा देती है, डाक्टर नीलम रेखा की बड़ी बड़ी झांटे देख कर गुस्सा करती है ।
डॉक्टर-"ये क्या है, आपने तो पूरा जंगल बना दिया है, अपनी योनि को साफ़ रखा करो, पहले अपने बाल साफ़ करबायो उसके बाद में मसाज करने की प्रक्रिया समझाती हूँ" डॉक्टर एक नर्स को बुलाकर रेखा के बाल साफ़ करने के लिए बोलती है । 
नर्स-' हमारे पास बाल साफ़ करने का रेजर नहीं है" 
डॉक्टर-"इनके साथ कौन आया है उन्ही से रेजर मंगबा लीजिए" 
रेखा-" मेरी बेटी बाहर होगी,उससे बोल दीजिए" रेखा को डर था की कहीं नर्स सूरज से रेजर न मंगवा ले इसलिए बेटी से मनवाने का सम्बोधन किया ।
डॉक्टर-" इनके साथ जो हैं उन्हें मेरी कैबिन में भेज दो" 
नर्स सूरज के पास आती है।
बाहर सूरज अकेला बैठा हुआ था ।

नर्स-" आपको डॉक्टर बुला रही हैं" सूरज डाक्टर के पास जाता है ।
सूरज-"क्या हुआ डॉक्टर साहब मेरी माँ अब कैसी है,उन्हें होश आ गया क्या" 
डॉक्टर-" आपकी माँ बिलकुल ठीक हैं,उन्हें होश आ चुका है" 
सूरज-"डॉक्टर मेरी माँ को हुआ क्या है,वो बेहोश क्यूँ हो गई" डॉक्टर सोचती है की इनको कैसे बताऊँ, काफी देर सोचने के बाद डॉक्टर बोलती है।
डॉक्टर-"आपकी माँ को गुप्त परेसानी है,हालाँकि मुझे बताना तो नहीं चाहिए चूँकि आप उनके बेटे हैं लेकिन फिर भी में आपको बता रही हूँ, 21 वर्ष से शारीरिक सम्बन्ध न बनाने के कारण उनकी नसों में पानी जाम हो गया है,पानी निकलना बहुत आवश्यक है, बरना उनकी जान भी जा सकती है" सूरज को यह सुनकर बड़ा अचम्भा होता है और शर्म भी आती है, लेकिन उनकी जान को खतरा है यह सुनकर डर भी जाता है ।
सूरज-"डॉक्टर साहब अब इसका इलाज क्या है? सूरज घबराता हुआ बोला।
डॉक्टर-" वैसे तो शारीरिक सम्बन्ध के द्वारा पानी निकलता तो बेहतर था लेकिन उनके पति तो है नहीं है,इसलिए उन्हें हस्तमैथुन करना होगा,और हस्तमैथुन से पहले तीन चार दिनों तक उन्हें योनी की मसाज करनी होगी,में आपको जैल क्रीम देती हूँ,और कुछ खाने की दवाइयाँ भी" सूरज बड़ी हैरानी से यह सब सुन रहा था,उसने कभी सोचा भी नहीं था की अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनेगा, सूरज को बड़ी शर्म आ रही थी,और बार बार माँ का चेहरा उसके सामने आ जाता था । 
सूरज-" डॉक्टर आप यह सारी बातें माँ को समझा दीजिए प्लीज़"
डॉक्टर-"मैंने उन्हें समझा दिया है,आप बाहर से एक रेजर और ब्लेड लाकर दे दीजिए,उनकी योनी पर बाल बहुत बड़े हैं, में नर्स से कह कर मसाज का तरीका समझा दूंगी ताकी वो घर आराम से मसाज कर सके" सूरज एक और झटका लगता है यह सुनकर, तभी उसके जहन में रेखा का नग्न तस्वीर आ जाती है जब उसने सुबह बॉथरूम में देखा था,वास्तव में माँ की योनी पर बहुत बड़े बाल हैं। सूरज तुरंत बाहर जाकर एक रेजर और ब्लेड के आता है । सूरज डॉक्टर की केबिन में जाता है तो डॉक्टर उसे दिखाई नहीं देती है, सूरज उसी इमरजेंसी बार्ड में जाता है जहाँ माँ भर्ती थी, सूरज दरबाजा खोल कर देखता है, रेखा अपने बेड पर लेटी थी, सूरज को बड़ा सुकून मिलता है,चूँकि सूरज नहीं चाहता था की माँ उसे देखे की उसका बेटा उसके योनि साफ़ करने के लिए रेजर लेकर आया है, और खुद शर्मिंदगी महसूस करे । सूरज जैसे ही दरबाजा खोलता है तभी नर्स सूरज को देख कर बोलती है ।
नर्स-" आप कहाँ थे इतनी देर से,डॉक्टर ने रेजर और ब्लेड लाने के लिए आपसे बोला था,आप अभी तक लाए नहीं" नर्स तेज आवाज़ में डांटती हुई बोली,सूरज घबरा जाता है की कहीं माँ सुन न ले,लेकिन रेखा तो सिर्फ आँखें बंद किए हुई कुछ सोच रही थी,जैसे ही नर्स सूरज को डांटती है रेखा आँखे खोल कर सूरज की तरफ देखती है और सूरज रेखा को देखता है,दोनों की आँखे एक दूसरे से टकराती है, सूरज शर्म की बजह से नज़रे घुमा लेता है और मन ही मन नर्स को गालियां देता है,इधर रेखा का शर्म की बजह से बुरा हाल था, रेखा बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी की उसका बेटा योनी के बाल साफ़ करने के लिए रेजर लेकर आया है ।
सूरज-"यह लीजिए रेजर और ब्लेड"सूरज जल्दी से निकलना चाहता था बार्ड से, सूरज रेजर देकर तुरंत बाहर निकल जाता है । और बाहर कुर्सी पर बैठ कर जोर से सांस लेता है । जीवन में पहली बार ग्लानी महसूस कर रहा था, न चाहते हुए भी माँ का चेहरा उसकी आँखों में घूम रहा था ।
इधर नर्स रेखा के पास आती है, रेखा की मेक्सी को उठाकर कमर से ऊपर कर देती है, रेखा की बालो से भरी चूत नर्स के सामने थी। भारी भरकम जांघे और बाहर निकली हुई गुदाज उसके जिस्म को आकर्षक और कामुक बना रही थी । 
नर्स-' आप दोनों टांगो को फैला कर फोल्ड करो" रेखा तुरंत नर्स के कहे अनुसार टाँगे फैला कर फोल्ड करती है । नर्स एक प्लास्टिक की शीट लेकर आती है और रेखा की गांड को उठाकर शीट बिछा देती है ताकि जिस बेड पर लेटी है वो गंदा न हो, रेखा अपनी सोच में डूबी हुई थी, उसने कभी सोचा भी नहीं था की अनजान डॉक्टर और नर्स के सामने उसे अपनी योनी का प्रदर्शन करना पड़ेगा,और ऊँगली करने पर मजबूर होना पड़ेगा, एक तरफ उसे अपनी योनिमैथुन की चिंता थी तो दूसरी तरफ सूरज की,क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में,कैसे नज़रे मिला पाउंगी में,इसी सोच में डूबी थी तभी नर्स एक शेम्पू लेकर आती है और रेखा की चूत पर लगा कर पानी का स्प्रे मारती है,और ब्रूस से पूरी योनी के बालो पर फिराती है,ब्रूस और पानी के स्पर्श से रेखा मचल जाती है,उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं,ब्रूस की नोक जब योनी की क्लिट पर रगड़ते हैं तो एक सुरसरी सी उठती,रेखा अपनी गांड को थोडा उचका देती,उसके जिस्म में गुदगुदी सी होने लगती है,योनी पर झाग का ढेर बन जाता है,नर्स रेजर लेकर योनी की खाल पकड़ कर आराम से बाल साफ़ करने लगती है, नर्स की उंग्लिया योनी के हर कोमल भाग पर जाती है जिससे रेखा को मजा आने लगता है, नर्स योनी के बाल साफ़ करके स्प्रे मारकर कपडे से साफ़ करती है, रेखा की योनी डबल रोटी की तरह फूली हुई उभर कर सामने आती है। रेखा खुद की योनी देख कर शर्मा जाती है ।
नर्स-" अब देखो अपनी योनी, कितनी चमक मार रही है,इसी तरह साफ़ रखा करो" नर्स योनी पर हाँथ स्पर्श करती हुई बोली। रेखा सिहर जाती है । और हाँ में सर हिला देती है ।
नर्स जैल क्रीम लेकर आती है। 
नर्स-" इस जैल को योनि के मुख्य भाग को छोड़ कर बाकी सब जगह लगा कर ऊँगली से रगड़ना है,ताकि आपकी नसे ढीली हो जाए,नसे ढीली होने के बाद अपनी योनी के के अंदर इस तेल से चिकना करके ऊँगली करनी है,आप समझ गई न" नर्स जैल क्रीम और एक तेल की सीसी दिखाती हुई बोली।
रेखा-"हाँ समझ गई" नर्स जैल क्रीम रेखा की योनी पर लगा कर उँगलियाँ फिराने लगती है, जैल बहुत ठंडा लग रहा था जिससे रेखा को बड़ा मीठा मीठा आनंद मिल रहा था और नर्स की उंगलिया भी मजा दे रही थी । नर्स को भी उंगलियो से मालिस करने में मजा आने लगता है, 
नर्स-" मेडम में आपको एक सलाह दे रही हूँ, आप किसी के साथ सेक्स कर लो, जल्दी ठीक हो जाओगी" रेखा सुन कर चोंक जाती है ।
रेखा-"नहीं में सेक्स नहीं कर सकती हूँ" 
नर्स-"मेडम एक बार में ही गर्मी निकल जाएगी,आपका जिस्म बहुत सुन्दर है,कोई भी एक बार नंगा देख ले तो बिना सेक्स किए रह नहीं पाएगा" रेखा अपनी तारीफ़ सुन कर खुश होती है।
रेखा-" मेरी उम्र 46 साल की है,अब इस उम्र में भला कोई सेक्स करता है"
नर्स-"मेडम आप 30-32 साल की लगती हो,और आपका बदन बहुत कामुक है,आज भी कोई लड़का आपको देख ले तो दीवाना हो जाएगा" 
रेखा-"नहीं जी! में विधवा हूँ,में सेक्स के बारे में सोच भी नहीं सकती, ऊँगली से ही काम चला लुंगी"रेखा साफ़ साफ़ मना कर देती है । नर्स मसाज करके बोलती है ।
नर्स-"दिन में तीन बार आपको ऐसे ही मालिस करनी है, अब आप घर जा सकती हो। नर्स सारी दवाइयाँ समझाती है। रेखा वार्ड से बाहर निकलती है सूरज बाहर ही बैठा था, सूरज जैसे ही रेखा की देखता है तो कुर्सी से खड़ा हो जाता है,रेखा भी बहुत शर्मा रही थी। 
सूरज-"घर चलें माँ" सूरज रेखा को देखते हुए बोलता है ।
रेखा-"हाँ चलो" सूरज और रेखा बाहर आकर अपनी गाडी में बैठ जाते हैं। सूरज गाडी चलाता है और रेखा बगल बाली सीट पर बैठी थी ।दोनों लोग खामोश थे ।

सूरज और रेखा खामोशी से बैठे अपनी अपनी सोच में डूबे हुए थे, सूरज अपनी माँ की इस विचित्र बिमारी को लेकर बड़ा असमन्जस में था और सोच रहा था की इसका उपचार कैसे हो, डॉक्टर के कहे अनुसार शारीरिक सम्बन्ध के द्वारा माँ का उपचार सम्भब है,और जल्दी ठीक हो सकती हैं,ऐसी स्तिथि में यदि पिता होते तो शायद माँ जल्द ठीक हो जाती,
मुझे पिताजी से बात कर लेनी चाहिए, इधर रेखा इस बात से दुखी थी की उसकी परेसानी और उसका उपचार सूरज को पता चल चूका है, और आज नर्स ने सूरज से रेजर और ब्लेड भी मंगवाया, क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में, तभी सूरज खामोशी तोड़ता है ।
सूरज-"माँ अब आपकी तबियत कैसी है?" रेखा अपनी सोच से बाहर निकलती है और सूरज की ओर देखते हुए बोली ।
रेखा-"मुझे क्या हुआ,में तो ठीक हूँ" रेखा हडबाड़ाती हुई बोली,
सूरज-"माँ आप बेहोश हो गई थी, में बहुत डर गया था" 
रेखा-" पता नहीं में कैसे बेहोश हो गई,लेकिन अब में ठीक हूँ बेटा" रेखा हँसते हुए बोली ।
सूरज-" डॉक्टर के कहे अनुसार सभी दवाई समय से लेना माँ" सूरज खुल कर नहीं बोल पाता है इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से अपनी बात कहता है,जिसे रेखा भलीं भांत समझ रही थी।
रेखा-" हाँ में दवाई समय से खाती रहूंगी" रेखा सर झुका कर अपनी बात कहती है ।
सूरज-" माँ सब ठीक हो जाएगा,आप परेसान मत होना,में सब ठीक कर दूंगा" सूरज की यह बात सुनकर रेखा असमंजस में पड़ जाती है,और प्रश्नवाचक की तरह सूरज की ओर देखने लगती है।
रेखा-" मतलब समझी नहीं में सूरज" 
सूरज-"कुछ नहीं माँ" सूरज बात को टाल ते हुए बोला।
रेखा-" सूरज कोई बात हो तो बोल,डॉक्टर ने क्या कहा तुझसे, मुझे कोई गंभीर बिमारी है क्या"रेखा परेसान मुद्रा में बोली ।
सूरज-"न नही माँ,आपको कोई बीमारी नहीं है,आप ठीक हो"सूरज एक सांस बोलता है,लेकिन सूरज की हकलाहट रेखा को पुनः सोचने पर मजबूर कर रही थी,उसे डर था की कहीं डॉक्टर ने मेरी हस्तमैथुन और शारीरिक सम्भोग को लेकर कोई बात तो नहीं बता दी है सूरज को। 
रेखा-" डॉक्टर ने तुझे क्या बताया मेरे बारे में,क्या परेसानी है मुझे" रेखा जानबूझ कर यह सवाल पूछती है,वो जानना चाहती थी की डॉक्टर ने उसे क्या बताया है,अब भला सूरज क्या बोलता अपनी माँ को, सूरज को बहुत शर्म आ रही थी।
सूरज-" डॉक्टर ने कहा की आप जल्दी ठीक हो जाओगी,बस आप अपना ध्यान रखना,दवाई समय से लेते रहना"सूरज की बात सुनकर रेखा को यकीन हो जाता है की शायद डॉक्टर ने मेरी बिमारी के बारे में सूरज को कुछ नहीं बताया है।
रेखा-"सूरज तुझसे एक बात करनी थी मुझे" 
सूरज-"हाँ माँ बोलो" 
रेखा-"पूनम की शादी के लिए कोई लड़का देख ले,उसकी उम्र हो गई है" 
सूरज-"हाँ माँ, में कोई अच्छा सा लडका देखूंगा" 
रेखा-" तू जिस कंपनी में काम करता है उसी में देख ले" सूरज सोचता है की माँ को अचानक दीदी की शादी की इतनी फ़िक्र क्यूँ पड़ गई,कहीं माँ ने आज सुबह मेरी और दीदी की चुदाई तो नहीं देख ली।
सूरज-" माँ अचानक शादी की इतनी फ़िक्र क्यूँ हो गई आपको,कोई बात है क्या" रेखा अब कैसे बताती की तेरी बहन ऊँगली से अपनी हवस शांत करती है ।
रेखा-"बात कुछ नहीं है बेटा, हर माँ को फ़िक्र होती है अपनी बेटी की, मुझे भी है" 
सूरज-"ठीक है माँ,में लड़का देखूंगा जल्द" 
रेखा-"अगर दो लड़के मिल जाए तो मे तनु की भी जल्द शादी कर दूंगी" 
सूरज-"ठीक है माँ,में जल्दी ही लड़का देख लूंगा" सूरज बेचारा मायूस हो जाता है।
रेखा-"तेरे पिता होते तो अब तक शादी कर दी होती" माँ मायूस होते हुए बोली।
सूरज-"माँ आपको पापा की याद आती है" 
रेखा-" आती भी है तो उससे क्या फर्क पड़ता है सूरज,जो इंसान है ही नहीं उसके बारे में क्या सोचना"रेखा उदास होती हुई बोली।
सूरज-" सॉरी माँ मैंने आपका दिल दुखाया" बात करते करते घर आ जाता है, पूनम और तनु दोनों खुश होकर रेखा को गले लगा लेती है ।


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रेखा के ठीक हो जाने से पूनम और तनु बहुत खुश थी,रात के समय पूनम सूरज के कमरे में आती है ।
सूरज-"अरे दीदी आप,अभी तक सोई नहीं" पूनम सूरज के पास आकर बैठ जाती है ।
पूनम-"सूरज डॉक्टर ने क्या बताया,माँ बेहोश क्यूँ हो गई थी" पुनम आते ही सूरज से सवालो की झड़ी लगा देती है। सूरज पूनम को सारी बात बता देता है,की माँ की नसों में पानी जम गया है,जिसे शारीरिक सम्भोग या हस्तमैथुन के जरिए निकाला जा सकता है, पूनम यह बात सुनकर चोंक जाती है।
पूनम-"सूरज क्यूँ न पापा को बुला लिया जाए,इस समय माँ को पापा की सख्त आवश्यकता है" पूनम की बात सूरज को सही लगती है।
सूरज-" दीदी में पापा से बात करू फोन से" सूराज जैसे ही यह बोलता है,तनु कमरे में आ जाती है। तनु सूरज की बात सुन लेती है ।
तनु-"सूरज किससे बात करने की कह रहा है तू" 
सूरज-"अरे दीदी आप" 
तनु-"माँ को क्या हुआ था यही पूछने आई में,पर तू कौनसे पापा की बात कर रहा है" 
पूनम-'तनु हमारे पापा जिन्दा है अभी तक" तनु जैसे ही ये बात सुनती है तो सुन्न रह जाती है ।
तनु-"सूरज क्या ये सही बात है,कहाँ है वो,और हमसे मिलने क्यूँ नहीं आए अब तक?" सूरज तनु को पूरी सच्चाई बता देता है,सूर्या से लेकर संध्या माँ और अमेरिका में पापा से मिलना,तनु यह सब सुनकर हैरान रह जाती है और सूरज को गले लगा कर रोने लगती है,पूनम प्यार से चुप करबाती है।
तनु-"सूरज मुझे पापा से बात करनी है" सूरज वीडियो कोल करता है ।

बीपी सिंह-"हेलो बेटा कैसे हो" 
सूरज-"पापा में ठीक हूँ,आप कैसे हो" 
पापा-"में ठीक हूँ बेटा, रेखा कैसी है,और पूनम और तनु कैसी हैं" 
सूरज-"सब ठीक है पापा, पूनम और तनु दीदी आपसे बात करना चाहती हैं" सूरज पूनम और तनु को अपने पास बुला कर मोबाइल के कैमरे के पास आता है, पूनम और तनु रोने लगती है अपने पिता को देख कर,पापा भी रोने लगते हैं,कई वर्षो बाद आज अपने पिता को देखा था।
पूनम-"पापा घर आ जाओ"
पापा-"बस बेटा जल्दी ही आऊंगा,मुझे सब की बहुत याद आ रही है, तुम्हारी माँ कैसी है" 
तनु-"पापा माँ ठीक नहीं है,आज माँ बेहोस हो गई थी" बीपी सिंह यह सुनकर डर जाता है।
पापा-"क्या हुआ उसे"
सूरज-"कुछ नहीं हुआ है पापा, माँ ठीक है" 
पापा-"बेटा अपनी माँ से मेरी बात करवा दे, रेखा को एक बार देखना चाहता हूँ" 
सूरज-"पापा मैंने माँ को अभी तक बताया नहीं है आपके बारें में" 
पापा-" तू अपनी माँ से बात कर,फिर मेरी बात करबा देना" 
सूरज-"ठीक है पापा, में माँ से बात करूँगा" सूरज फोन काट देता है, पूनम और तनु भी चाहती थी की अब माँ को सब बता देना चाहिए,इसलिए हम तीनो लोग माँ के कमरे में गए, माँ अपने कमरे में बैठी टीवी देख रही थी, हम तीनो लोग कमरे में गए।
रेखा-" अरे बेटा तुम सोए नहीं अभी तक"रेखा तीनो को एक साथ देख कर बोली ।
सूरज-"आपसे बात करनी थी मुझे" रेखा हैरत से सूरज को देखती है ।
रेखा-"हाँ बेटा बोल क्या बात है" 
सूरज-"पापा जिन्दा है" रेखा यह बात सुनकर स्तब्ध रह जाती है ।
रेखा-"तू पागल तो नहीं हो गया है" रेखा गुस्से से बोली ।
पूनम-"माँ सूरज सही कह रहा है पापा जिन्दा है"
सूरज-" में पापा से मिल चूका हूँ" सूरज सुरु से लेकर एन्ड तक पूरी कहानी सुनाता है,जिसे सुनकर रेखा रोने लगती है ।
सूरज अपने मोबाइल से पापा को वीडियो कॉल कर देता है, और रेखा को फोन देता है, अपने पति को देख कर रेखा रोने लगती है,बीपी सिंह भी रोने लगता है ।
बीपी सिंह-"रेखा मुझे माफ़ कर देना मुझे,तुझे बिना बताए मैंने संध्या से शादी की,मेरी मजबूरियां थी" 
रेखा-" आप घर आ जाइए, में आपसे नाराज़ नहीं हूँ"रेखा रोते हुए इतना ही बोल पाई, काफी देर तक दोनों लोग गिला शिकवा करते हैं। आज पूरा परिवार खुश था, रेखा सारी सच्चाई जानकार सूरज को गले लगा लेती है । 
रेखा-" तू बाकई में हीरो है सूरज,मुझे नाज़ है तुझ पर" रात काफी हो चुकी थी,इसलिए आज सब लोग रेखा के साथ ही बेड पर सो जाते हैं । 
सुबह 6 बजे रेखा की आँख खुलती है,आज रेखा बहुत खुश थी, रेखा सबको जगाती है,पूनम और तनु उठकर फ्रेस होने चले जाते हैं लेकिन सूरज अभी भी सोया हुआ था। रेखा सूरज के पास बैठ कर प्यार से उसके सर पर हाँथ फिराती है। रेखा को आज बड़ा प्यार आ रहा था सूरज पर,चूँकि आज जो खुशियाँ उसे मिली थी बह सब सूरज के कारण ही थी । रेखा झुक कर सूरज के माथे पर किस्स करती है । तभी रेखा का मोबाइल बजता है,रेखा फोन उठाकर देखती है तो खुश हो जाती है चूँकि फोन बीपी सिंह का था,रेखा फोन उठा कर बात करने लगती है। फोन की घंटी बजने के कारण सूरज जग चूका था लेकिन आलस्य के कारण लेटा रहा।
बीपी सिंह-"हेलो रेखा कैसी हो" 
रेखा-"में ठीक हूँ,आप कैसे हो" 
बीपी सिंह-" में भी ठीक हूँ रेखा,आज तेरी बहुत याद आ रही है,मन कर रहा है अब तेरे पास आ जाऊं" 
रेखा-"रोका किसने है आपको,आ जाओ"
बीपी सिंह-" बस कुछ दिन की परेसानी है,में अकेला ही दो कंपनी संभाल रहा हूँ,जल्दी ही सूरज को को सारी जिम्मेदारी दे दूंगा,उसके बाद में हमेसा तुम्हारे साथ रहूँगा" 
रेखा-" आपको कितना समय लग जाएगा आने में" 
बीपी सिंह-" बस 10-15 दिन लग सकते हैं,रेखा कल तुम बेहोस क्यूँ हो गई थी,डॉक्टर ने कि बताया तुम्हे,अगर कोई परेसानी हो तो अमेरिका आ जाओ,यहाँ अच्छे डॉक्टर को दिखा दूंगा" 
रेखा-"मेरी परेसानी डॉक्टर से ठीक नहीं होगी" 
बीपी सिंह-"मतलब ? क्या बताया डॉक्टर ने" रेखा सारी बात बता देती है,जिसे सुनकर बीपी सिंह भी हैरान रह जाता है,इधर सूरज भी माँ की बातें सुन लेता है।
बीपी सिंह-" ओह्ह्ह यह तो बहुत बड़ी परेसानी है,तुम वैसा ही करो जैसा डॉक्टर ने बोला है" 
रेखा-"हाँ वही करुँगी" इस प्रकार काफी देर बात करने के बाद रेखा फोन काट देती है ।
फोन काटने के बाद सूरज उठकर फ्रेस होने चला जाता है, रेखा कमरे का दरबाजा बंद करके मेक्सी उतार देती है,और जैल क्रीम निकाल कर अपनी योनी की मालिस करती है, मालिस करते समय कई बार रेखा की ऊँगली योनी और क्लिट से टकरा जाती है । रेखा उत्तेजित हो जाती थी,लेकिन योनी से पानी नहीं निकलता था। 
इस प्रकार तीन दिन निकल जाते हैं, रेखा पुरे दिन बीपी सिंह से बात करती,और समय निकाल कर अपनी योनी की मालिस करती,रेखा को अब योनी सहलाने में मजा आने लगा था । इधर सूरज संध्या के पास चला जाता है,संध्या और तान्या की दो दिन तक धमाकेदार चुदाई करता है । सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, रेखा भी आजकल बहुत खुश रहने लगी थी, रेखा अब चुदाई के बारे में सोचने लगी थी, कई बार रेखा फोन पर बीपी सिंह को बोल भी चुकी थी,की यदि आप होते तो मेरी बिमारी का ईलाज अच्छे से हो जाता, बीपी सिंह भी रेखा की इच्छा को भली भाँती से समझ जाता था और हस कर बात टाल देता था क्योंकि बीपी सिंह को शुगर और हार्ट की प्रॉब्लम थी जिसके कारण वो सेक्स नहीं कर सकता था,यह बात बीपी सिंह ने रेखा को नहीं बताई थी । बीपी सिंह अपनी इस परेसानी को लेकर चिंतित था उधर रेखा शारीरिक सम्भोग के सपने देखने लगी थी ।

एक दिन सुबह के समय हम सब बैठ कर खाना खा रहे थे । रेखा के चेहरे पर मुस्कराहट थी,तनु और पूनम अपनी माँ को खुश देख कर बहुत ख़ुशी महसूस करती हैं । माँ की मुस्कराहट उन्हें चेहरे पर निखार बन कर चार चाँद लगा रही थी ।
तनु-"माँ क्या बात है आजकल आप बहुत खुश हो" 
पूनम-" पापा आने वाले हैं न इसलिए"यह सुनकर रेखा शर्मा जाती है । और साथ में मुझे भी बहुत शर्म आती है ।
रेखा-"चुप रहो तुम दोनों,कुछ भी बोलती रहती हो" 
सूरज-"माँ पापा सच में आ रहे हैं" 
रेखा-"कह तो रहे हैं,10 दिन बाद आने के लिए,यदी नहीं आए तो मुझे जाना पड़ेगा अमेरिका"यह सुनकर पूनम और तनु खुश हो जाती हैं।
तनु-"ओह्ह्ह माँ आप अमेरिका जाओगी,यह तो बड़ी ख़ुशी की बात है" तनु हँसते हुए बोली।
पूनम-"माँ आप अमेरिका किसके साथ जाओगी"
रेखा-"सूरज के साथ,अगर तेरे पापा नहीं आए तो जाउंगी" 
तनु-"माँ फिर तो आप अपने लिए अच्छी अच्छी ड्रेस खरीद लो, अब आप सफ़ेद साड़ियां मत पहना करो" 
पूनम-"हाँ माँ तनु ठीक कह रही है" 
रेखा-"सोच तो में भी रही हूँ आज कपडे खरीद लू और एक बार डॉक्टर से भी मिल आऊँ,डॉक्टर ने आज आने के लिए भी बोला था" 
पूनम-" माँ आप सूरज के साथ चली जाओ" 
सूरज-"हाँ माँ आप तैयार हो जाओ" रेखा अपने कमरे में जाकर तैयार होकर आ जाती है । 
सूरज गाडी निकालता है,रेखा बगल बाली सीट पर बैठ जाती है, सूरज गाडी दौड़ा देता है ।
सूरज-"माँ अब आपकी तबियत कैसी है?" 
रेखा-"ठीक है,पहले से आराम है" 
सूरज-" माँ आपने यह अच्छा फैसला लिया है पापा के पास जाने का"सूरज की इस बात पर रेखा सोचने लगती है, कहीं सूरज को पता तो नहीं चल गया की में क्यूँ जाना चाहती हूँ अमेरिका ।
रेखा-" अच्छा!""हसते हुए बोली।
सूरज-"माँ आप खुश रहती हो तो अच्छा लगता है" 
रेखा-"यह ख़ुशी तेरे कारण ही मिली है,गाँव में तो जिंदगी नर्क सी लगती थी,आज ऐसा लगता है जैसे स्वर्ग में हूँ" 
सूरज-" माँ वो बुरा वक़्त था,लेकिन अब हमेसा खुशियाँ ही आएगी" 
रेखा-"सूरज मेरी एक इच्छा है,पूरी करेगा?" रेखा सिरिअस होकर बोली,सूरज भी उत्सुकता के साथ बोला ।
सूरज-"हाँ माँ बोलो,में आपकी हर इच्छा पूरी करूँगा" रेखा सोचती हुई बोली ।
रेखा-"मुझे एक बार गाँव देखना है,ले चलेगा मुझे गाँव" सूरज यह सुनकर चोंकते हुए अपनी माँ को देखता है ।
सूरज-"कब चलना है गाँव?" 
रेखा-"कभी भी जब तेरे पास समय हो" 
सूरज-"आज चलें?" रेखा चोंक जाती है।
रेखा-"अभी" 
सूरज-"नहीं रात में 10 बजे निकलते हैं,सुबह 6 बजे पहुँच जाएंगे" 
रेखा-"ठीक है,आज रात में ही निकलते हैं"
सूरज-" पूनम और तनु दीदी को भी लेकर चलें?"
रेखा-"नहीं सिर्फ हम दोंनो,पूनम और तनु को ले जाना ठीक नहीं है,चौधरी का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ होगा" 
सूरज-"ठीक है माँ,हम दोनो ही चलते हैं" सूरज गाडी रोकता है मॉल के सामने, दोनों लोग मॉल में एक कपडे की दुकान पर जाते हैं। रेखा चार पांच साड़ियां और बाजू कट बाले ब्लाउज खरीदती है और साथ में पेटीकोट भी ।
सूरज-"माँ ये क्या आपने तो सिर्फ साड़ियां ही खरीदी हैं,अमेरिका बाले आपको देखकर हसेंगे,अच्छी सी ड्रेस ले लो" रेखा यह सुनकर सोच में पड़ जाती है ।
रेखा-"मैंने तो आज तक सिर्फ साड़ियां ही पहनी है,क्या अमेरिका में साडी नही पहनते हैं? फिर क्या खरीदू सूरज,तू ही बता" सूरज रेखा को ड्रेस बाली शॉप पर लेकर जाता है । और तीन चार तरह की फेसनेवल ड्रेस रेखा को दिलबाता है,और ओवरकोट जैसी,ब्लेजर भी खरीदता है, रेखा तो ड्रेस देख कर दंग रह जाती है की वो उन्हें पहनेगी कैसे,
रेखा-"सूरज यह ड्रेस तो बिलकुल मेक्सी जैसी हैं,इन्हें कैसे पहनूगी" 
सूरज-'माँ अमेरिका में तो इससे भी ज्यादा फेसनेवल कपडे पहनती हैं,ये तो फिर भी ठीक हैं" रेखा को बड़ा अजीब सा लग रहा था,ऐसी मोर्डन ड्रेस देख कर,लेकिन सूरज की बात मान लेती है,क्योंकि वो खुद चाहती थी अपने पति के सामने एक मोर्डन पत्नी बन कर रहें,चुकीं अमेरिका के माहोल और संस्कृति में यदि वो साडी पहनेगी तो शायद वहां के लोग मजाक न बनाए।
रेखा ड्रेस खरीद लेती है,सूरज रेखा के दो नायटी भी खरीद कर देता है,जो काफी हॉट थी, रेखा काफी शर्म महसूस कर रही थी । काफी कपडे खरीदनेके बाद रेखा ब्रा और पेंटी भी खरीदना चाहती थी लेकिन सूरज के कारण खरीद नहीं पा रही थी,लेकिन सूरज को पता थी की माँ ब्रा पेंटी जरूर खरीदेंगी इसलिए सूरज थोड़ी देर के लिए बाहर जाने का बहाना मार कर मॉल की दूसरी जगह जा कर खड़ा हो जाता है, जहाँ से सूरज माँ को देख सकता था लेकिन रेखा सूरज को नहीं देख सकती थी, रेखा ब्रा पेंटी की शॉप पर जाकर दो पेंटी और ब्रा लेती है, ब्रा पेंटी को बेग में रख कर शॉप के बाहर खड़ी सूरज का इंतज़ार करने लगती है। सूरज तुरंत रेखा के पास पहुँच जाता है ।
रेखा-"कहाँ था सूरज, अब चलें" कहीं न कहीं रेखा को समझ आ जाती है की सूरज ब्रा पेंटी की बजह से चला गया था,ताकि में निसंकोच खरीद सकूँ। सूरज की समझदारी देख कर रेखा मन ही मन खुश थी ।
सूरज-"हाँ माँ चलो" सूरज और रेखा जैसे ही आगे बढे, एक सेल्स गर्ल भागती हुई रेखा के पास आई,और रेखा को आवाज़ दी।
सेल्स गर्ल-" हेलो मेडम सुनिए" रेखा और सूरज रुक जाते हैं,रेखा घबरा जाती है चुकीं यह बही सेल्स गर्ल थी जिससे उसने अभी ब्रा पेंटी ली। सेल्स गर्ल पास आकर बोली ।
सेल्स गर्ल-" मेडम आपने ब्रा और पेंटी का पेमेंट नहीं किया" सेल्स गर्ल जैसे ही बोलती है,रेखा शर्म से पानी पानी हो जाती है,सूरज भी शर्मा जाता है,


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रेखा-"सॉरी में भूल गई"रेखा शर्म के कारण अपनी गलती क़बूल करते हुए आराम से बोली। सेल्स गर्ल रेखा और सूरज को साथ ले जाती है पेमेंट काउंटर पर ।सूरज जेब से क्रेडिट कार्ड निकालता है, पेमेंट काउंटर पर सेल्स गर्ल ब्रा और पेंटी का मूल्य बोलती है।
सेल्स गर्ल-"दो ब्रा 36 साइज़ की और दो पेंटी 40D साइज़ की,एक हज़ार रुपये हुए सर"सूरज अपनी माँ का साइज़ सुन कर शर्म से पानी पानी हो जाता है,लेकिन रेखा अपनी ब्रा का साइज़ सुनकर चोंक जाती है चूँकि उसने 38 साइज़ की ब्रा मांगी थी, रेखा विवस होकर बिना शर्म किए मजबूरन सेल्स गर्ल को बीच में रोकती हुई बोली। 
रेखा-" सुनिए मैंने 38 साइज़ माँगा था,आप 36 साइज़ बोल रही हैं" रेखा हिम्मत करके सूरज की मौजूदगी में बोलती है,और खुद शर्मिंदगी महसूस करने लगती है,इधर सूरज जब अपनी माँ की ब्रा का साइज़ सुनता है तो खुद मन में माँ के बूब्स याद आ जाते हैं जब उसने अपनी माँ को बाथरूम में बेहोसी की हालात में नग्न देखा था,सूरज को झटका लगता है,और अपनी सोच को धिक्कारता है ।
सेल्स गर्ल-"सॉरी मेंडम शायद मैंने भूल से 36 साइज़ की ब्रा दे दी,में एक बार कन्फर्म कर लेती हूँ,आप ब्रा दिखाइए" सूरज की की मौजूदगी में रेखा भी शर्म महसूस करते हुए ब्रा निकाल कर सेल्स गर्ल को देती है, सेल्स गर्ल ब्रा का पैकेट खोल कर निकालती है, सूरज एक आँख से ब्रा देखने लगता है, एक पिंक ब्रा और एक सफ़ेद ब्रा थी,जो साधारण औरते पहनती है,उन पर फूल पत्तियों की डिजाइन बनी हुई थी । सेल्स गर्ल ब्रा का साइज़ देखती है जिस पर 36 साइज़ ही लिखा था।
सेल्स गर्ल-" आपने सही बोला मेडम,दोनों ब्रा 36 की हैं,सॉरी मेडम में अभी 38 साइज़ की ब्रा लेकर आती हूँ" सेल्स गर्ल दोनों ब्रा ले जाती है,10 मिनट बाद ब्रा के तीन चार डिब्बा उठा कर रखती हुई बोली । ऐसा लग रहा था जैसे ब्रा की पूरी दूकान ही उठा लाई हो, रेखा ये देख कर हैरान थी,38 साइज़ की दो ब्रा लाने के बजाए तीन चार डिब्बा लाने की क्या आवश्यकता थी । सूरज और रेखा को एक के बाद एक झटका लग रहा था ।
सेल्स-" सॉरी मेडम, आपने जिस डिजाइन की ब्रा मांगी थी,उसमे 38 साइज़ की ब्रा ख़त्म हो गई हैं, में आपको 38 साइज़ में लेटेस्ट और न्यू ब्रांड की ब्रा दिखा देती हूँ" सेल्स गर्ल एक डिब्बा खोलती है जिसमे न्यू शार्ट ब्रा थी,जिनके कप बहुत छोटे थे, रेखा ऐसी ब्रा देख कर दंग रह जाती है,इस प्रकार की ब्रा उसने आज तक नहीं पहनी, सेल्स गर्ल दूसरी ब्रा दिखाती है जिसके कप जालीदार कपडे के थे ।
रेखा शर्म के कारण कुछ भी बोल नहीं पा रही थी।
सेल्स गर्ल-"मेडम ये जाली बाली ब्रा ले लीजिए,ये बहुत आरामदायक होती हैं, इनकी लास्टिक बहुत मजबूत होती है" सूरज ब्रा देख कर कल्पना करने लगता है, लेकिन तभी सूरज को याद आता है की ये मेरी माँ है । रेखा बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी इसलिए जल्दी से बोलती है ।
रेखा-" आप कोई भी दे दो,जल्दी करो प्लीज़" सेल्स गर्ल दो ब्रा पैक कर देती है, रेखा और सूरज को शान्ति मिलती है लेकिन तभी सेल्स गर्ल एक डिब्बा खोलती हुई बोली, जिसमे लेटेस्ट पेंटी थी,एक पेंटी दिखाती हुई बोली।
सेल्स गर्ल-" मेडम इन दोनों ब्रा के साथ यह पेंटी भी हैं" रेखा पेंटी देखती है,तो हैरान रह जाती है,पेंटी पूरी लास्टिक की थी,सिर्फ चूत बाले स्थान पर हलकी जाली लगी हुई थी,हॉट पेंटी को देख कर सूरज का मन विवस होकर कल्पना करने लगता है,और उसका लंड में सुरसुराहट सी होने लगती है। सूरज के मन और लंड में संघर्ष होने लगता है ।
सूरज दूसरी तरफ मुह कर लेता है,रेखा समझ जाती है सूरज शर्मिंदगी महसूस कर रहा था ।
रेखा-"आप दे दीजिए" सेल्स गर्ल ब्रा और पेंटी पैक करके दे देती है। पेमेंट गर्ल क्रेडिट कार्ड से पैसे काट कर क्रेडिट कॉर्ड सूरज को दे देती है । रेखा और सूरज तुरंत मॉल से निकल आते हैं, ऐसा लग रहा था जैसे कोई चुड़ैल उनके पीछे लग गई हो । 
रेखा सूरज की तरफ देखती है,सूरज के चेहरे पर शर्म के भाव थे, सूरज रेखा की तरफ देखता तो रेखा भी शर्म से नज़रे झुका लेती है। मॉल के बाहर निकलते ही सूरज को एक जनरल स्टोर की शॉप दिखाई देती है। 
सूरज-"माँ और कुछ खरीदना है क्या" सूरज खामोशी तोड़ते हुए बोला।
रेखा-"हाँ सूरज,थोडा मेकअप का सामन खरीदना है" सूरज उस जनरल शॉप पर ले जाता है और मेकअप का सारा सामन खरीद लेता है। रेखा ने कई सालो बाद आज मेकअप का सामन ख़रीदा था,चूँकि वो अब तक एक विधवा के रूप में जीती आई थी,आज वो पुनः अपने आपको एक सुहागन मेहसुस कर रही थी । सूरज शॉप से बाहर निकलता है तो सामने एक ज्वेलरी की शॉप दिखाई देती है । सूरज रेखा को उस शॉप में लेकर जाता है,रेखा हैरत से सूरज को देखती है ।
ज्वेलरी की शॉप पर आकर सूरज सोने का एक हार,अंगूठी,और चूड़ियाँ आर्डर करता है, रेखा तो हैरान थी ।
रेखा-"सूरज ये क्या कर रहा है तू,ये तो बहुत महंगे होंगे" सूरज हसते हुए अपनी माँ को देखता है ।
सूरज-" माँ आप अब पैसो की क्यूँ चिंता करती हो, अब आप अरबो रुपए की मालकिन हो, पापा ने मेरे बैंक खाते में करोडो रुपए डाले है, अब हम गरीब नहीं रहे माँ, अब आप दुनियां के सभी शौक पुरे कर सकती हो" रेखा यह सुनकर खुश होती है।
सूरज रेखा के लिए गहने खरीद लेता है,यदि रेखा यदि उन गहने को पहने तो रानी लगे। सूरज और रेखा सारा सामान गाडी में रखते हैं।
रेखा-"बेटा अब डॉक्टर के यहाँ चले या और भी कुछ बाकी रह गया है"रेखा हसते हुए बोली, लेकिन सूरज कुछ सोच रहा था। सामने उसे ब्यूटी पार्लर दिखाई देता है, सूरज रेखा को लेकर ब्यूटी पार्लर जाता है।
रेखा-"बेटा ये कौनसी दूकान है,यहाँ से क्या खरीदना है?" रेखा को नहीं पता था,ब्यूटी पार्लर में क्या होता है ।
सूरज-"माँ एक बार चलो तो अंदर, वो जैसा कहें वैसा करवाते रहना" सूरज अंदर जाकर ब्यूटीशियन से बोल देता है,की फेसियल,आई ब्रो, और हेयर कटिंग करो। 
ब्यूटीशियन रेखा की फेसियल करती है और आई ब्रो बनाती है,रेखा मासूम बच्ची की तरह बैठी यह सब करबाती रहती है, फेसियल और आई ब्रो करने के उपरान्त ब्यूटीशियन रेखा के बाल सेट करती है।
ब्यूटीशियन-"मेडम शीशे में देखिए,अपने आपको"रेखा जैसे ही शीशे में अपने आपको देखती है तो हैरान रह जाती है, रेखा नई लड़कियों को भी मात दे रही थी,ऐसा लग रहा था जैसे किसी कॉलेज की प्रोफ़ेसर हो।
रेखा-" थेंक्स" इतना कह कर रेखा जैसे ही बाहर आती है,सूरज अपनी माँ को देखता रहता है, उसे यकीन नहीं हो रहा था की ये माँ है मेरी, ऐसा लग रहा था जैसे पूनम की बड़ी बहन हो। रेखा खुद सूरज को देख कर शर्मा जाती है ।
सूरज-"woww माँ आप तो बहुत सुन्दर लग रही हो" रेखा शरमा जाती है ।
रेखा-"सूरज ये सब किसलिए किया" 
सूरज-"माँ अब आप शादी शुदा हो,अब आप पर वो कपडे और गहने बहुत अच्छे लगेंगे,देखना पापा के तो होश उड़ जाएंगे" सूरज की इस बात पर रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-"बस कर बेटा" रेखा मुस्कराती हुई नज़रे झुका लेती है शर्म से।
सूरज-" माँ आप शरमाते हुए और भी सुन्दर लगती हो" रेखा नज़रे उठाकर सूरज की और देखती है।
रेखा-"आज मुझे जितनी शर्म आई है उतनी तो कभी नहीं आई"रेखा शरमाते हुए बोली। सूरज समझ जाता है माँ का इशारा ब्रा और पेंटी बाली घटना से था ।
सूरज-" कोई बात नहीं माँ,ऐसा हो जाता है कभी कभी,सभी सेल्स गर्ल होती ही ऐसी हैं" सूरज नज़रे झुका कर बोला।
रेखा-"तेरे सामने इस तरह उन कपड़ो को नहीं दिखाना चाहिए था" रेखा ब्रा और पेंटी को कपडा कह कर संबोधित करती है । 
सूरज-"जो होता है अच्छे के लिए ही होता है माँ" 
रेखा-"मतलब समझी नहीं में" रेखा सूरज की बात का मतलब नहीं समझ पा रही थी।
सूरज-" व् व् वो माँ अगर सेल्स गर्ल आपको बुलाती नहीं तो 38 की जगह 36 पहनना पड़ता आपको" सूरज हिम्मत करके बोलता है,रेखा सूरज की इस बात को सुनकर शर्म से पानी पानी हो जाती है। और इस टॉपिक को ख़त्म करने के लिए बोलती है।
रेखा-"सूरज अब जल्दी चल डॉक्टर के पास भी जाना है" सूरज और रेखा गाडी में बैठ कर हॉस्पिटल पहुँच जाते हैं। रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है, सूरज बाहर खड़ा रहता है ।
डाक्टर-"आपने मालिस की तीनो समय?" 
रेखा-"हाँ" 
डॉक्टर-" अपने कपडे ऊपर करके अपनी योनी दिखाओ" रेखा अपना पेटीकोट ऊपर करके पेंटी उतार देती है,डॉक्टर ऊँगली से योनि देखने लगती है।
डाक्टर-" पहले से आपकी योनी ठीक लग रही है,आज और मालिस कर लो,कल से हस्तमैथुन करना तेल लगा कर" डॉक्टर रेखा की योनी में छोटी ऊँगली डालकर देखती है,तो उसे हलकी नमी दिखाई देती है ।
रेखा-"डॉक्टर में सेक्स करना चाहती हूँ,मेरे पति 10 दिन बाद आ रहें हैं" 
डॉक्टर-"यह तो बहुत अच्छी बात है,लेकिन 10 दिन बाद आ रहें हैं तब तक आप,ऊँगली से करो,में आपको दवाई देती हूँ,सुबह शाम टेबलेट खाती रहना,और आज रात में मसाज जरूर कर लेना" रेखा कपडे ठीक करके बाहर जाने लगती है।
डॉक्टर-" मेडम पांच मिनट रुकिए,में नर्स से दवाई भेजती हूँ आपकी बाली" 
रेखा-"ठीक है डॉक्टर,में बाहर बैठी हूँ" रेखा बाहर आकर सूरज के पास आती है, रेखा को बहुत तेज पिसाब लगी थी,इसलिए रेखा इधर उधर टॉयलेट देख रही थी । तभी उसे दूर टॉयलेट दिखाई देता है।
रेखा-"सूरज तू बैठ में अभी आई" जैसे ही रेखा जाती है,तभी नर्स सूरज के पास आकर टेबलेट देती है।
नर्स-"ये लीजिए रेखा जी की दवाई, मसाज करने से 20 मिनट पहले खिलानी है,इसे खा कर थोडा सा नशा हो जाएगा,मसाज करने के उपरान्त नींद आ जाएगी" सूरज तो भौचक्का रह गया यह सुनकर। नर्स चली जाती है, सूरज सोचता है की अब में माँ को कैसे बताऊंगा यह बात, तभी रेखा आ जाती है।
सूरज-'माँ बो नर्स ये टेबलेट दे गई हैं" 
रेखा-"अच्छा ला दे मुझे, लेकिन यह खानी कब है मुझे?" रेखा के इस प्र्शन से सूरज घबरा जाता है, सूरज किसे बताता अपनी माँ को की खाने के बीस मिनट बाद मसाज करनी है ।
सूरज-'माँ आप जाकर डॉक्टर से पूछ लो, मे यहीं बैठा हूँ" 
रेखा-"हाँ में पूछ कर आती हूँ,तू रुक" रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है,
रेखा-" डॉक्टर यह टेबलेट कब खानी है" रेखा के इतना बोलते ही नर्स बोल पड़ती है,।
नर्स-"अरे अभी बताया तो था उस लड़के को,योनी की मसाज करने से 20 मिनट पहले खानी है,इसको खाने के बाद थोडा सेक्स का नशा चढ़ेगा आपको,मसाज या ऊँगली के बाद नींद आ जाएगी" जैसे ही रेखा यह सुनती है की तो उसे झटका लगता है की नर्स ने सूरज को बता दिया दवाई कैसे खानी है। रेखा एक बार फिर शर्मसार हो जाती है खुद की नज़रों में, रेखा समझ जाती है की सूरज ने खुद शर्म के कारण मुझे नहीं बताया इसलिए उसने डॉक्टर से पूछने के लिए मुझे भेजा । रेखा बाहर निकल कर आती है, आज दिन भर की घटना चक्र को सोच कर उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, सूरज से नज़रे नहीं मिला पा रही थी । सूरज भी समझ जाता है। दोनों लोग घर आ जाते हैं।
पूनम और तनु रेखा की खूबसूरती देख कर हैरान रह जाती है। सूरज अपने कमरे में जाकर आज की सभी घटना केबारे में सोचता है। सोचते सोचते सूरज का लंड खड़ा हो जाता है,मसाज की बात सुन कर, सूरज ध्यान हटाने का प्रयत्न करता है और सो जाता है। शाम को 8 बजे नींद खुलती है । पूनम उसे जगाने आई थी।
पूनम-"सूरज उठ जा, आज तुझे माँ के साथ गाँव जाना है, माँ पूछ रही है, गांव जाएगा?" सूरज को याद आता है की आज रात में गाँव जाने का उसने वादा किया था ।
सूरज-"हाँ दीदी जाना है गाँव, माँ से कह दो,10 बजे" सूरज फ्रेस होकर नीचे जाता है।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

रात के 10 बजे,
रेखा अपने कमरे में गाँव जाने के लिए तैयार हो रही थी, आज रेखा ने नई बनारसी साडी पहनी थी, और आज लाए हुए गहने भी पहनती है, रेखा आज बहुत सुन्दर लग रही थी।तभी पूनम कमरे में आती है, अपनी माँ की सुंदरता देख कर हैरान रह जाती है।
पूनम-"वाह्ह्ह्ह् माँ आप तो महारानी लग रही हो" रेखा शरमाती हुई बोली ।
रेखा-"अच्छा,पूनम तू एक काम कर दे, एक बेग में मेरी नायटी रख दे,यदि रात में मुझे रुकना पड़ा तो कम से कम पहन कर तो सो जाउंगी,और ब्रा पेंटी भी" 
पूनम-"ठीक है माँ,एक बेग में रख देती हूँ" पूनम एक बेग में नायटी और ब्रा पेंटी रख देती है।
रेखा-" बेटा मेरी दवाई भी रख देना" पूनम रेखा की सभी दवाई रख देती है, रेखा तैयार हो चुकी थी।
सूरज भी तैयार होकर नीचे आया,सूरज जैसे ही रेखा को देखता है तो चोंक जाता है,रेखा बहुत सुन्दर लग रही थी,बिलकुल बाहुबली की माहेष्मती जैसी, सूरज को इस तरह घूर कर देखने से रेखा शर्मा जाती है। 
रेखा-"अब चलें सूरज" सूरज अपनी सोच से बाहर निकलता है।
सूरज-"हाँ माँ चलो" रेखा और सूरज गाडी में बैठ जाती है, पूनम और तनु बेग और जरुरत का सामन गाडी में रख देती हैं। रेखा सूरज के बगल बाली सीट पर बैठी थी, सूरज गाडी चलाता है। रात में हाईवे पर सूरज को बड़ा मजा आ रहा था गाडी चलाने में, सूरज शीशा लगा कर ए सी चला देता है। गाडी में लाइट जल रही थी ।
रेखा खामोशी से बैठी थी, सूरज एक दो बार रेखा के चेहरे को देखता, रेखा को पता थी की सूरज उसे देख रहा था,रेखा को आज बड़ा अच्छा भी लग रहा था सूरज भी आज अपनी माँ की सुंदरता में खो सा गया था, उसके मन में कोई गलत विचार नहीं था,अपनी माँ के प्रति,लेकिन आज दिन में मॉल में घटी घटना और पार्लर पर माँ के बूब्स का साइज़ बताना,उसके बाद नर्स के द्वारा अपनी माँ की मसाज बाली बात को सुनना उसे बड़ा अटपटा सा लगा, सूरज का ध्यान माँ के प्रति बढ़ गया था,सूरज हाईवे पर गाडी आराम आराम चला रहा था,तभी रेखा ख़ामोशी तोड़ती हुई बोली।
रेखा-"थेंक्स बेटा" सूरज रेखा की तरफ देखता है।
सूरज-"थेंक्स किस लिए माँ?" 
रेखा-" तूने मेरी गाँव जाने की इच्छा पूरी की इसलिए" 
सूरज-"माँ यह तो मेरा फर्ज है, अपनी माँ के लिए में कुछ भी कर सकता हूँ" 
रेखा-" तूने जितना मेरे लिए किया है उतना तो कोई भी बेटा अपनी माँ के लिए नहीं कर सकता है" 
सूरज-"अरे माँ मैंने क्या किया है" 
रेखा-" मुझे मेरा सुहाग तूने लौटा दिया,इससे बड़ी ख़ुशी मेरे लिए क्या होगी,अब बस तेरे पापा घर आ जाए" 
सूरज-"माँ आप फिकर मत करो,पापा अगर नहीं आएँगे तो में आपको अमेरिका लेकर जाऊँगा" 
रेखा-"थेंक्स बेटा, और हाँ आज के लिए भी थेंक्स" सूरज रेखा की तरफ हैरानी से देखता है।
सूरज-"आज के लिए थेंक्स,आज मैंने ऐसा क्या किया" 
रेखा-" मेरे साथ मार्केट गया,शॉपिंग करवाई,और ब्यूटी पार्लर लेकर गया,गहने भी दिलवाए,इतना कुछ तूने किया मेरे लिए" 
सूरज-" अरे माँ आज जो ड्रेस खरीदी थी,वो आपने पहन कर देख ली क्या" 
रेखा-"अभी नहीं" 
सूरज-'ओह्ह माँ एक बार पहन कर तो देख लेती,छोटे और टाइट निकले तो बदल तो सकते हैं" 
रेखा-"हाँ यह बात तो ठीक है,घर पहुँच कर पहन कर देखूंगी, ये मॉल बाले गड़बड़ी कर देते हैं,साइज़ बदल देते हैं" रेखा को ब्रा बाली बात याद आ जाती है,जो आज मॉल में 38 की जगह 36 दे दी थी,सूरज भी समझ जाता है यह बात।
सूरज-'हाँ माँ सही बात है,वैसे माँ आप वो ड्रेस पहनोगी तो बहुत मोर्डन लगोगी" 
रेखा-"कौनसी ड्रेस जो तूने दिलवाई है वो कपडे" 
सूरज-"हाँ माँ,आप पहनोगी तो बहुत खूबसूरत लगोगी"रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-" पर मुझे तो बड़ी शर्म आएगी,मैंने ऐसे कपडे आज तक नहीं पहने" 
सूरज-"अरे माँ आप जब अमेरिका जाओगी उन कपड़ो को पहन कर तो आपको शर्म नहीं आएगी,क्योंकि वहां सभी औरते ऐसे ही कपडे पहनती है" 
रेखा-" हाँ ये बात तो ठीक है,तेरे पापा तो कह रहे थे मुझसे फोन पर की अमेरिका में लोग बहुत शार्ट कपडे पहनते हैं" 
सूरज-" माँ आप भी अमेरिका जाकर शार्ट कपडे पहनोगी" रेखा सोचने लगती है ।
रेखा-"अगर तेरे पापा लाएंगे शार्ट कपडे तो पहनने पड़ेंगे" सूरज यह सुनकर उछल जाता है,और कल्पना करने लगता है की माँ हॉट ड्रेस में कैसी लगेगी।
सूरज-" वाह्ह्ह्ह् माँ मेरी तो उत्सुकता बढ़ गई"
रेखा-"मतलब?" 
सूरज-" में भी देखूंगा आपको उन कपड़ो में,आप कैसी लगोगी" रेखा यह सुनकर चोंक जाती है,और शरमा जाती है।
रेखा-" तेरे सामने नहीं पहन पाउंगी में ऐसे कपडे,मुझे खुद शर्म आएगी उन्हें पहनने में" रेखा शरमा कर बोली।
सूरज-"अरे माँ इसमें शर्म कैसी,आखिर वो कपडे ही तो हैं" 
रेखा-" जिन कपड़ो में आधे से ज्यादा तन दिखाई दे,वो कपडे पहनना,न पहनने के बराबर ही होते हैं" 
सूरज-"लेकिन माँ आज उन्ही कपड़ो का चलन है" 
रेखा-" हाँ चलन तो है लेकिन में अब लड़की नहीं हूँ, 44 वर्ष की औरत हूँ, क्या मुझ पर ऐसे कपडे अच्छे लगेंगें" 
सूरज-"अरे माँ आप औरत लगती ही कहाँ हो,ऐसा लग रहा है जैसे पूनम दीदी की बड़ी बहन हो,औरआज तो आप वैसे भी बहुत सुन्दर लग रही हो" रेखा खुद की तारीफ़ सुन कर शरमा जाती है।
रेखा-"झूठा कही का,मेरा दिल रखने के लिए बोल रहा है तू" 
सूरज-"अरे सच में माँ,आज आप बहुत सुन्दर लग रही हो,ऐसा लग रहा है जैसे नए नवेली दुल्हन हो, नई नई शादी हुई हो आपकी" रेखा आँखे फाड़े सूरज को देखती है।
रेखा-"चुप कर,शहर में आकर बहुत बड़ी बड़ी बातें सीख गया है तू" 
सूरज-" सच बोल रहा हूँ माँ,में तो सोच रहा था पापा आएँगे तो आपकी दुबारा शादी करवाऊंगा,बहुत बड़ी पार्टी होती घर में" 
रेखा-"क्या शादी मेरी,ओह्ह्ह सूरज तू पागल है" 
सूरज-"सच में माँ,पापा आते तो शादी करवाता दुबारा,फिर आप अमेरिका जाती तो ज्यादा अच्छा लगता" 
रेखा-" अच्छा शादी करके अमेरिका क्यूँ?" 
सूरज-" हनी......? सूरज बोलते हुए रुक जाता है,चूँकि अचानक गलती से ही बोल जाता है। रेखा समझ जाती है सूरज हनीमून बोलने बाला था।
रेखा-"क्या हनी... समझी नहीं में,साफ़ साफ़ बोल,रुक क्यूँ गया" रेखा अनजान बनती हुई बोली।
सूरज-"हनीमून" सूरज डरते हुए बोल ही देता है।
रेखा-"ओह्ह्ह सूरज, तू पागल है,कुछ भी बोल देता है" रेखा शर्म से पानी पानी हो रही थी। 
सूरज-"सॉरी माँ" 
रेखा-"चल कोई बात नहीं" रेखा हसते हुए बोली, रेखा को बहुत तेज पिसाब लगती है, लेकिन शर्म के कारण सूरज से बोल नहीं पाई थी,लेकिन अब ज्यादा तेज लगती है तो सूरज से गाडी रोकने के लिए बोलती है। 
रेखा-"सूरज थोड़ी देर के लिए गाडी रोकना" 
सूरज-'क्या हुआ माँ,कोई परेसानी है क्या"
रेखा-"मुझे पिसाब लगी है" सूरज गाडी रोकता है, रेखा गाडी के साइड में ही मूतने लगती है, एक तेज सिटी की आवाज़ आती है,सूरज के कान खड़े हो जाते हैं,सूरज खिड़की के साइड शीशे में देखता है तो उसे माँ बैठी हुई दिखाई देती है, सूरज अपनी नज़र घुमा लेता है । थोड़ी देर बाद रेखा आती है।
रेखा-"सूरज मुझे नींद आ रही है अब" 
सूरज-'माँ आप पीछे बाली सीट पर जाकर सो जाओ" रेखा पीछे बाली सीट पर जाकर लेट जाती है, लेकिन नींद नहीं आती है,चूँकि बनारसी साडी पहनने के कारण चुभ सी रही थी,ऊपर से बहुत सारे गहने पहने हुए थी, रेखा सीट पर बैठ जाती है, सूरज फ्रंट शीशे से देखता है।
सूरज-" क्या हुआ माँ,आप लेटी नहीं" 
रेखा-"इस साडी में नीद नहीं आ रही है"
सूरज-"कोई मेक्सी पहन लो,इस साडी को उतार कर रख दो,गाँव पहुँचने में 7 घंटे लगेंगे,तब तक आप सो जाओ" सूरज की बात रेखा को सही लगती है,लेकिन साडी उतार कर मेक्सी पहने कैसे,यही सोच रही थी, रेखा पीछे सीट से अपना बेग उठाती है,और अपनी मेक्सी निकालने लगती है,लेकिन मेक्सी की जगह उसे नायटी मिल जाती है जो आज सूरज ने दिलाई थी,रेखा बेग में फिर हाँथ डालकर देखती है तो नई बाली शार्ट ब्रा पेंटी निकल आती हैं,जो जालीदार ब्रा पेंटी थी,शायद पूनम ने धोखे से रख दी थी। सूरज फ्रंट शीशे से सब देख रहा था । सूरज की धड़कन बढ़ गई थी यह देख कर। इधर रेखा सोचती है की सूरज के सामने यह नायटी कैसे पहने।
सूरज-"क्या हुआ माँ,मेक्सी पहन लो" सूरज पीछे मुड़ कर देखता है, रेखा ब्रा पेंटी बेग में रख देती है।
रेखा-"पूनम ने धोखे से मेक्सी की जगह ये नायटी रख दी,अब इसको कैसे पहनू" 
सूरज-'मेक्सी और नायटी में ज्यादा फर्क नही है माँ, आप पहन लो, में गाडी की लाइट बंद कर देता हूँ" सूरज लाइट बंद कर देता है, रेखा को सुकून मिलता है,रेखा साडी और गहने उतार कर पीछे बाली सीट पर रख देती है, अब रेखा ब्लाउज और पेटीकोट में थी,रेखा का ब्लाउज बहुत टाइट था इसलिए ब्लाउज उतारने लगती है,रेखा की नज़र सूरज की तरफ थी,लेकिन अँधेरे में उसे कुछ दिखाई नही दे रहा था। रेखा ब्लाउज उतार कर नायटी पहन लेती है,और फिर एक हाँथ कमर पर ले जाकर पेटीकोट भी उतार देती है । रेखा ने नायटी पहन तो ली थी लेकिन उसे खुद पता नहीं चल रहा था,की नायटी में वो कैसी लग रही है ।

रेखा ने चलती गाडी के अँधेरे में नायटी पहन तो ली,लेकिन नायटी पहन कर कैसी लगती है,यह इच्छा उसके मन में प्रवल हो रही थी, अँधेरे में ही रेखा अपने बदन पर हाँथ फिरा कर नायटी को महसूस कर रही थी, नायटी का कपडा बहुत कोमल और हल्का था,ऐसा लग रहा था जैसे उसका समूचा जिस्म नग्न हो,इतना आरामदायक कपडा पहने के बाद उसको बड़ा सुकून मिल रहा था, रेखा हाँथ से जिस्म को मुयायना करते करते दोनों जांघो के बीच हाँथ चला जाता है,चूत के ऊपर स्पर्श करते ही उसे याद आता है की आज उसे मालिस करनी थी,और टेबलेट भी खानी थी। लेकिन सूरज के होने के कारण मालिस कैसे करे यह चिंता का विषय उसके मन में प्रश्नवाचक की तरह चल रहा था, डॉक्टर के कहे अनुसार यदी योनी से पानी नहीं निकला तो गंभीर परिणाम का सामना उसे करना पड़ेगा,इसलिए यह इलाज जरूर करना है, तभी रेखा सोचती है की गाडी में इतना अँधेरा है,जब मुझे ही अपना बदन दिखाई नहीं दे रहा है तो भला सूरज कैसे देख सकता है मुझे।
रेखा निश्चय कर लेती है की कुछ भी हो जाए मालिस तो करनी पड़ेगी और उससे पहले दवाई खानी पड़ेगी। रेखा काफी सोच विचार करने के पश्चात फैसला ले पाती है, रेखा की पेंटी बहुत टाइट थी इसलिए रेखा पेंटी को उतार देती है ताकि आसानी से मालिस कर सके। रेखा को दुबारा पिसाब भी लग आई थी,रेखा सोचती है पहले पिसाब कर लू उसके बाद दवाई खाऊँगी और मालिस करुँगी । रेखा अपने मोबाइल में समय देखती है जिसमे 11:30 बज रहे थे । गाडी में मोबाइल के जलते ही रौशनी हो जाती है तो सूरज बोलता है ।
सूरज-" क्या हुआ माँ,नायटी पहन ली क्या,आपने बढ़ी देर लगा दी पहनने में" 
रेखा-'नायटी तो बहुत पहले ही पहन चुकी में,बस तू थोड़ी देर के लिए गाडी रोक दे" सूरज समझ जाता है माँ के लिए पिसाब लगी है। सूरज गाडी रोकता है हाइवे की साइड पर । 
सूरज-"क्या हुआ माँ,फिर से पिसाब लगी है?" सूरज के मुह से पिसाब शब्द सुन कर रेखा के तनबदन में हलचल सी होती है, रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-"हाँ" रेखा गाडी से उतर कर बाहर आती जाती गाड़ियों की लाइट में अपनी नायटी देखती है तो हैरान रह जाती है, नायटी उसके जिस्म से चुपकी हुई थी,उसके 38 के बूब्स और चौड़ी गांड का उभार बना हुआ था, रेखा अपने बूब्स की तरफ देखती है जो आधे से ज्यादा बूब्स फुले हुए नंगे दिखाई दे रहे थे,लाल ब्रा भी साफ़ दिखाई दे रही थी, और निचे देखती तो नायटी सिर्फ उसके घुटनो तक ही थी,जिसमे उसकी टाँगे और पिंडलियां साफ़ गोरी गोरी चमक रही थी, रेखा खुद में एक हॉट सेक्सी और कामुक औरत को देख रही थी, इधर सूरज जब साइड के शीशे से अपनी माँ को देखता है तो हैरान रह जाता है, सूरज का लंड आज अपनी ही माँ को देख कर झटके मारने लगता है,सूरज के साथ आज ऐसा पहली बार हुआ था उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था, सूरज अपनी सोच और हवस को धिक्कारने क प्रयास करता है और अपनी नज़रे साइड के शीशे से हटा लेता है, लेकिन उसका लंड सूरज के मन पर हावी हो जाता है,किसी ने सच ही कहा है लोग हवस में अंधे हो जाते हैं,आज सूरज का भी यही हाल था, सूरज की नज़रे फिर से शीशे से जस टकराई लेकिन इस बार सूरज को तेज झटका लगता है । रेखा अपनी नायटी ऊपर कर रही थी, सूरज को रेखा की भारी भरकम गांड दिखाई देते हैं, ऐसा लग रहा था जैसे दो मटके आपस में जुड़े हो, रेखा मूतने बैठ जाती है,जिससे रेखा की गांड उभर कर बाहर आ जाती है,और एक तेज सिटी आवाज़ खुले शांत वातावरण में गूंजने लगती है। रेखा खुद अपनी ही चूत से निकली सिटी की आवाज़ सुन कर शर्मसार हो जाती है, चूँकि उसे इतना तो यकीं हो जाता है की सिटी की तेज आवाज़ सूरज के कानो तक जरूर गई होगी। 
इधर सूरज अपनी नज़रे शीशे से हटा कर गाडी की लाइट जला देता है,तभी फ्रंट शीशे में उसे पीछे की सीट पर अपनी माँ की पेंटी दिखाई दी, सूरज पीछे मुड़ कर पेंटी को देखने लगता है,सूरज को फिर से एक बार झटका लगता है की उसकी माँ नायटी के अंदर नंगी है,सूरज का मन कर रहा था एक बार पेंटी को उठाकर देखे,लेकिन सूरज की मर्यादा उसे ऐसा करने नहीं देती है। रेखा पिसाब करके आती है और पानी की बोतल से अपने हाँथ धोती है,रेखा जैसे ही सीट पर पड़ी अपनी पेंटी देखती है तो फिर से शर्मा जाती है,भुलवस् छोड़ जाने की गलती स्वीकार करते हुए तुरंत उठाकर बेग में रख देती है,रेखा को यकीन था इस पर सूरज की नज़र जरूर गई होगी,चूँकि गाडी में लाइट जल रही थी।
रेखा-"सूरज लाइट क्यूँ जलाई तूने,लाइट बंद कर दे"
सूरज गाडी दौडा देता है हाइवे पर लेकिन लाइट बंद नहीं करता है ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

सूरज-' माँ यह तो बही नायटी है जो आज मॉल से खरीदी थी" पीछे मुड़ कर नायटी की ओर इशारा करता है ।
रेखा-"हाँ बही है सूरज" 
सूरज-"बहुत अच्छी है' 
रेखा-"क्या?" 
सूरज-"नायटी बहुत अच्छी है,आप पर जम रही है" 
रेखा-" अच्छा,लेकिन मुझे अच्छी नहीं लग रही है" 
सूरज-'क्यूँ माँ?' 
रेखा-"ये नायटी कमरे में पहनने के लिए होती है और में यहाँ तेरे सामने पहनी हूँ,मुझे तो बहुत शर्म आ रही है" 
सूरज-"माँ आप गाडी के अंदर हो,और मुझसे कैसी शर्म" 
रेखा-" अगर किसी ने तुझे और मुझे इस नायटी में देख लिया तो लोग क्या समझेंगे,एक माँ अपने बेटे के साथ कैसे कपडे पहने हुए बैठी है" 

सूरज-'अरे माँ लोगो की चिंता क्यूँ करती हो,लोगो का तो काम ही है गलत सोचना,और वैसे भी गाडी के शीशे काले हैं,बाहर को कोई व्यक्ति आपको कैसे देख सकता है,और देख भी लेगा तो उसे क्या पता आप मेरी माँ हो" रेखा को झटका लगता है यह सुन कर।
रेखा-" मतलब में लगती नहीं हूँ तेरी माँ" 
सूरज-" माँ इस नायटी को पहनने के बाद आपकी उम्र 30-35 की ही लग रही है,आप इस उम्र में भी लड़की लग रही हो" रेखा सुन कर शर्मा जाती है,इस दुनिया में एक तारीफ़ ही ऐसी चीज है जो सबको अच्छी लगती है। रेखा आज मन ही मन खुश थी अपनी तारीफ़ सुन कर। 
रेखा-" आजकल तू बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लग गया है" 
सूरज-"माँ अब में बड़ा हो गया हूँ" 
रेखा-" अच्छा तो अब तेरी भी जल्दी ही शादी करबानी पड़ेगी मुझे" सूरज शरमा जाता है ।
सूरज-"मेरी शादी नहीं माँ,अभी तो आपकी शादी करबानी है मुझे पापा से" रेखा शर्मा जाती है ।
रेखा-"धत् पागल,मेरी तो पहले से ही शादी हो रखी है तेरे पापा से"
सूरज-"माँ 22 साल से आप पापा से अलग रही हो,अब दुबारा मिलन होगा आपका" रेखा मिलन की बात सुनकर शरमा जाती है,सूरज ऐसे प्रशन करेगा उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी ।
रेखा-"दुबारा मिलन? समझी नहीं?" 
सूरज-"ओह्ह्ह माँ दोबारा मिलन का मतलब आप पापा से दोबारा मिलोगी, तो आपको कैसा लगेगा" रेखा गलत समझ बैठी थी,उसे लगा मिलन का आशय सम्भोग से है।
रेखा-" में बता नहीं सकती सूरज की मुझे कैसा लगेगा,में खुद उस पल का इंतज़ार कर रही हूँ,जब तेरे पापा मेरे सामने होंगे" 
सूरज-" वाह्ह्ह्ह् माँ आप तो बहुत उत्सुक हो पापा से मिलने के लिए,आप चिंता न करे में आपका मिलन करबाउंगा" 
रेखा-" हाँ मुझे पता है,तूने तो मेरी शादी और हनीमून तक की सोच रखी है" 
सूरज-" माँ सही तो सोचा है" 
रेखा-"अब ज्यादा बातें न बना,मुझे दवाई खानी है" रेखा टेबलेट निकाल कर पानी से खा लेती है।
सूरज-"माँ तुमने अभी तक टेबलेट खाई नहीं" सूरज को याद आता है की नर्स ने कहा था टेबलेट खाने के बाद उत्तेजना महसूस होगी,और मसाज भी करनी है। सूरज जैसे ही यह सोचता है उसका लंड पुनः झटके मारने लगता है । इधर रेखा भी गलती से टेबलेट की बोल देती है,उसे शर्म महसूस होती है क्योंकि सूरज को पता है,टेबलेट खाने के बाद मुझे मसाज भी करनी है । लेकिन अब कर भी क्या सकती है,टेबलेट तो वो खा चुकी थी, अब मजबूरन मसाज तो करनी ही पड़ेगी।
रेखा-" हाँ भूल गई थी, अब तू लाइट बंद कर दे,मुझे सोना है" सूरज लाइट बंद कर देता है गाडी में अँधेरा हो जाता है । रेखा पूरी सीट पर लेट जाती है, और टांगो को फोल्ड कर लेती है,क्योंकि रेखा की लंबाई अधिक थी,सीट की कम थी ।
सूरज अपने मन में सोचता है की माँ मसाज करेगी या न करेगी, हो सकता है मेरी बजह से माँ की हिम्मत न पड़े, सूरज बहुत उत्सुक था, इधर रेखा को टेबलेट खाकर नशा सा चढ़ने लगता है,रेखा अपने पैर आपस में रगड़ती है और जांघ सिकोड़ने लगती है, गाडी में अँधेरे का फायदा उठा कर रेखा उंगलियो पर जैल क्रीम निकाल कर नायटी के अंदर हाँथ डालकर चूत के आसपास लगा कर सहलाने लगती है, चूत के आसपास सहलाने से आज रेखा को अलग ही मजा आ रहा था,रेखा की चूत पर हलके हलके बाल उग आए थे,रेखा को बड़ा मजा आ रहा था,रेखा की उत्तेजना बढ़ती जस रही थी,तभी गाडी एक गड्ढे से गुज़रती है,एक हलकी धचकी के कारण रेखा की ऊँगली चूत की क्लिट से रगड़ जाती है,चूत और ऊँगली की रगड़ से रेखा को मजा आ जाता है, आज पहली बार उसे चूत पर ऊँगली रखने से करेंट सा लगा और उत्तेजना हवस बढ़ने लगती है, रेखा चूत में एक ऊँगली डालकर सहलाने लगती है, रेखा चूत में ऊँगली घुसाने का प्रयत्न करती है,ऊँगली थोड़ी ही घुस पाई थी तभी एक तेज धचकी लगती है और एक तेज सिसकी के साथ ऊँगली चूत में प्रवेश हो जाती है,सिसकी इतनी कामुक थी की सूरज के कानो तक आह्ह्ह्ह की आवाज़ पहुंची, सूरज के कान के साथ साथ लंड भी सतर हो जाता है, उसे समझने में देर नहीं लगती है की माँ हस्तमैथुन कर रही हैं। सूरज फ्रंट के शीशे से देखने का प्रयास करने लगता है, लेकिन गाडी में अँधेरा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इधर रेखा हवस में भूल जाती है सूरज गाडी चला रहा है,वो अपनी चूत को घिसे जा रही थी, एक ऊँगली चूत में आराम आराम अंदर बाहर हो रही थी।
सूरज कभी सामने देखता तो कभी फ्रंट शीशे में देखने का प्रयास करता और कभी कभी एक हाँथ से लंड को मसल देता, तभी एक गड्डा आता है और तेज धचकी के साथ रेखा की सिसकी की आवाज़ आती है, अब सूरज समझ चूका था माँ दवाई के कारण नशे में है, और उंगलिया चूत में हैं,जब धचकी लगती है तो सिसकी निकल जाती है, अब सूरज जानबूझ कर एक तेज धचकी लगता है इससे रेखा की चूत में उंगली तेजी से रगड़ती है,और सिसकियाँ निकलने लगती हैं, रेखा की उत्तेजना तेजी से बढ़ चुकी थी,अब रेखा स्वयं ही चूत में तेज तेज ऊँगली करने लगती है, उसकी साँसे उखाड़ने लगती हैं,सिसकियाँ तेज हो जाती हैं, रेखा गांड को उठा ऊँगली से रगड़ती है,तभी रेखा का जिस्म ऐंठने लगता है और एक तेज सिसकी के साथ उसकी चूत की बंद नशे खुल जाती हैं,एक तेज पिचकारी के साथ पानी की टंकी खुल जाती है, ऐसा लग रहा था जैसे पानी की बाढ़ सी आ गई हो, रेखा नशे में थी,उसे कोई होश ही नहीं था,वो सुकून से सो जाती है। इधर रेखा की कामुक सिसकियाँ सुन कर सूरज के लंड से भी पानी निकल जाता है ।

सूरज के लंड से बहुत सारा पानी निकला था जिसके कारण उसका कच्छा भीग चूका था, सूरज गीले कच्छे की बजह से बैठने में दिक्कत महसूस करता है, सूरज एक सुनसान जगह पर गाडी रोक कर अँधेरे में अपनी पेंट निकालता है, और उसके बाद कच्छा उतार कर अपने रुमाल से अपने लंड को साफ़ करता है, रेखा चैन की नींद सो रही थी, वर्षो बाद आज ऊँगली करने के बाद सम्भोग जैसा सुख प्राप्त हुआ था रेखा को, गाडी में अँधेरा होने का भरपूर फायदा उठाया था रेखा ने,इधर सूरज भी अँधेरे का फायदा उठा कर अपना गिला कच्छा उतार कर पेंट पहन लेता है और गाडी चलाने लगता है, सूरज का मन कर रहा था एक बार अपनी माँ को देखे,लेकिन एक भय उसके मन में था की कहीं माँ उसे देख न ले, और कही न कहीँ माँ प्रति अच्छी सोच भी रखता था, सूरज का गाडी जरूर चला रहा था लेकिन बार बार उसका ध्यान माँ अपनी माँ पर था,न चाहते हुए भी उसे बार बार याद आता है की माँ कैसे सिसकियाँ लेकर ऊँगली कर रही थी और अंतिम स्खलन के बाद कैसे सिसकारी मारते हुए झडी थी, सूरज ने अपनी आँखों से भले ही न देखा हो लेकिन उसने उन सिसकियों को अच्छे से सुना, तभी सुरज को याद आता है माँ यदि झड़ी है तो उसका पानी जरूर निकला होगा, डाक्टर के कहे अनुसार माँ का स्खलन और पानी निकलना बहुत जरुरी है, लेकिन बेचारा सूरज अपनी माँ की योनि कैसे देखे।
सूरज काफी देर सोचने के बाद निस्चय करता है की वो जरूर देखेगा, सूरज अपनी माँ को आवाज़ लगाता है, 
सूरज-"माँ माँ...... माँ"लेकिन रेखा कोई आवाज़ नहीं देती है तो सूरज को यकीन हो जाता है की माँ गहरी नींद में सो रही है। सूरज लाइट जलाने की सोचता है उसे डर भी था की कहीं माँ जग न जाए,सूरज के हाँथ कॉंपने लगते हैं,सूरज कपकपाते हांथो से लाइट जला कर जैसे ही पीछे सीट पर अपनी माँ पर नज़र डालता है तो चोंक जाता है,रेखा की नायटी उसकी कमर पर थी और दोनों जांघें उसे नंगी दिखाई देती हैं, झांघे फोल्ड होने के कारण सूरज अपनी माँ की चूत नहीं देख पाता है, सूरज की धड़कन तेजी से धड़कने लगती है, सूरज डर के कारण लाइट बंद कर देता है, सूरज का ध्यान गाडी चलाने में नहीं था उसे बार बार अपनी माँ की भारी भरकम झांघे याद आने लगती हैं। सूरज अपने मन को काबू में करता है और गाडी तेजी से दौड़ाने लगता है, गाडी चलाते चालते सुबह के 5:30 बज चुके थे, तभी एक धचकी लगने के कारण रेखा की नींद खुलती है, रेखा जैसे ही अपने अधनंगे जिस्म को देखती है तो झटका सा लगता है, रेखा को याद आता है उसने टेबलेट खाने के बाद अपनी योनि में उंगली की थी,और पानी सा निकला था,हालांकि रेखा नशे में थी लेकिन थोडा बहुत उसे ध्यान था । रेखा अपनी नायटी को ठीक करते हुए बैठती है,रेखा की चूत से निकला कामरस सूख चूका था,लेकिन थोडा बहुत गाडी की सीट पर लगा हुआ था, रेखा बेग से अपनी पेंटी निकाल कर सीट साफ़ करती है।
रेखा का जिस्म हल्क़ा सा लगता है, रेखा इस बात से खुश थी की उसकी नशे खुल चुकी है,नसों में जमा पानी निकल गया,अब सेक्स करने में या हस्तमैथुन करने में कोई परेसानी नहीं आएगी, रेखा एक अंगड़ाई लेती है तभी सूरज को पता चल जाता है माँ जग गई है, इधर हलकी हलकी रौशनी भी होने लगी थी ।
सूरज-" माँ आप जग गई" 
रेखा-"हाँ सूरज मेरी तो नींद पूरी हो गई" 
सूरज-"माँ आज नींद कैसी आई"यह सुन कर रेखा चोंक जाती है। रेखा सोचने लगती है की कहीं सूरज को पता तो नहीं चल गया रात मैने ऊँगली की, या सूरज ने लाइट जला कर मुझे नग्न तो नहीं देख लिया। 
रेखा-" बहुत अच्छी नींद आई, सूरज अब मुझे यह साड़ी पहननी है, 10 मिनट के लिए गाडी कहीं रोक दे" सूरज गादी रोक देता है, रेखा साडी उठाती है,लेकिन गाडी में खड़े होने की जगह नहीं थी, 
रेखा पहले नायटी उतार कर पेटीकोट और ब्लाउज पहन लेती है ।
रेखा" में गाडी में साडी नहीं पहन पा रही हूँ" 
सूरज-" गाडी से बाहर जाकर पहन लो माँ, अभी तो अँधेरा ही है,और रोड भी सुनसान है" रेखा तुरंत बाहर निकल कर साडी पहन लेती है। 
चूँकि सुनसान रास्ता था, इस रोड पर लोग कम ही निकलते हैं, रेखा को फ्रेस भी होना था,इसलिए पानी की बोतल लेकर फ्रेस होने एक झांडिओ में चली जाती है, इधर सूरज को बहुत तेज पिसाब लगी थी, सूरज गाडी से निकल कर उसी जगह के सामने पिसाब करने लगता है जहाँ उसकी माँ बैठी थी, सूरज को नहीं पता था यहाँ माँ बैठी है,लेकिन रेखा सूरज को आते देख लेती है और घबरा जाती है,तभी सूरज अपनी पेंट की ज़िप खोल कर अपना मूसल बाहर निकालता है,पिसाब तेज आने की बजह से उसका लंड तना हुआ था, रेखा सूरज का लंड देख कर हैरान रह जाती है,इतना बड़ा लंड आज से पहले उसने नहीं देखा था, गोरा चिट्टा लाल सुपाडा लंड देख कर रेखा की धड़कन तेज हो गई,चूँकि 22 साल बाद आज उसने लंड देखा था वो भी अपने बेटे का, सूरज पिसाब करने लगता है,और रेखा सूरज को मूतते हुए देख रही थी, सूरज जब पिसाब कर लेता है तो उसका लंड झटके मार कर रही बची बुँदे त्यागता है, रेखा को बड़ी शर्म आती है और अपनी नज़रे घुमा लेती है, सूरज पिसाब करने के बाद,पास में लगे नल से हाँथ धोकर गाडी में बैठकर रेखा का इंतज़ार करने लगता है, इधर रेखा भी फ्रेस होकर नल पर मुह हाँथ धोकर आती है और गाडी में बैठ जाती है।
रेखा-"सूरज अभी कितना समय लगेगा गाँव पहुँचने में" रेखा अपने बेग से टोबेल निकाल कर मुह साफ़ करते हुए बोली।
सूरज-"बस एक घंटे में हम गाँव पहुँच जाएंगे" 
रेखा अपने बेग से क्रीम लिपस्टिक निकाल कर लगाती है, और तैयार होकर बैठ जाती है। 
गाँव के मोड़ पर आते ही सूरज बोलता है।
सूरज-"माँ घर की चाबी लाइ हो न" 
रेखा-"हाँ सूरज चाबी लाइ हूँ, सीधे घर चलते हैं पहले" सूरज का घर रोड पर ही था, सूरज अपनी गाडी घर के बाहर खड़ी कर देता है, रेखा घर का दरबाजा खोलती है, और दोनों लोग अपने घर में प्रवेश करता है, सूरज और रेखा दोनों की यादें ताज़ी हो जाती हैं, अपने घर में आकर एक सुकून सा मिलता है, रेखा आँगन में देखती है,तभी उसे कुल्हाड़ी दिखाई देती है जिससे सूरज और रेखा लकड़ी काटने जाते थे,और उसी कुल्हाड़ी से चौधरी के आदमी हरिया के दो टुकड़े किए थे सूरज ने, उस कुल्हाड़ी पर अभी तक लाल खून लगा हुआ था जो सूख चूका था। सूरज और रेखा उस कुल्हाडी को देखते हैं।
सूरज-"क्या हुआ माँ,लकड़ी काटने चले क्या" सूरज मजाक के लहजे में बोला।
रेखा-" हाँ चलेंगे,लेकिन लकड़ी काटने नहीं,घूमने चलेंगे" 
सूरज-"ठीक है माँ" रेखा कमरे का ताला खोल कर साफ़ सफाई करती है, सूरज चारपाई बिछा कर लेट जाता है,रात भर जागने के कारण सो जाता है, इधर रेखा साफ़ सफाई में जुटी हुई थी ।
इधर गाँव में जब सूरज और रेखा गाडी से उतरते हैं,तो गाँव का एक आदमी देख लेता है, वो आदमी सीधे चौधरी के घर जाकर बोलता है।
आदमी-" चौधरी साहब चौधरी साहब मैंने अभी सूरज को देखा है,उसके साथ कोई महारानी भी है साथ में" चौधरी यह सुन कर आग बबूला होते हुए उठता है।
चौधरी-"धनुआ,रमुआ,पपुआ सब आओ रे,जल्दी चलो,हरिया का कातिल सूरज आ गया है, बहुत दिनों से उसी की तलाश थी हमें,आज आया है ससुरा,काट के रख देंगे" चौधरी अपने पालतू आदमियो को आवाज़ मारता है और अपनी रायफल उठाकर अपने आदमियों के साथ चल देता है गाँव की तरफ। चौधरी को आग बबूला देख कर सभी गाँव बाले पुछते हैं क्या बात है?
चौधरी-"सुना है वो हरिया का कातिल सूरज गाँव में वापीस आ गया है,आज उससे बदला लेना है" पुरे गाँव में आग की तरह यह खबर पहुँच जाती है की सूरज वापिस गाँव में आ गया है। गाँव के सभी लोग एकत्रित होकर चौधरी के साथ सूरज के घर पहुंचते हैं, जैसे ही बाहर शोर की आवाज़ रेखा के कानो में पहुँचती है तो रेखा घबरा कर सूरज को जगाती है।
बाहर दरबाजे पर चौधरी लात मारता है तो दरबाजा बहुत तेज से आवाज़ करता है, सूरज घबरा कर उठता है और सीधे कुल्हाड़ी पकड़ता है।
सूरज कुल्हाड़ी लेकर दरबाजे की और भागता है।
जैसे ही दरबाजा खोल कर बाहर खड़े लोगों की भीड़ देखता है और साथ में चौधरी को तो समझ जाता है ये चौधरी की करतूत है, सूरज दहाड़ते हुए बोलता है ।
सूरज-"किसने दरबाजा पर इतनी तेज दस्तक दी? सूरज दहाड़ता हुआ बोला,गाँव के लोग सूरज को इतने अच्छे कपड़ो में देख कर चोंक जाते हैं, तभी चौधरी बोलता है ।
चौधरी-"देखो कैसे सीना ताने खड़ा है ये गाँव बालो,हरिया का कातिल है ये,अब इसकी लाश जाएगी यहाँ से" चौधरी के आदमी जैसे हो सूरज को पकड़ने आते हैं,सूरज कुल्हाड़ी लेकर तान देता है।
सूरज-'जिसको अपनी मौत से प्यार नहीं है वो मुझे मारने आ सकता है,भूल गए हरिया के दो टुकड़े,अबकी बार चार टुकड़े करूँगा,आओ आगे" हरिया के आदमी डर जाते हैं, तभी रेखा भागती हुई सूरज के पास आती है, रेखा को अच्छी साडी और गहनो में देख कर गाँव की सभी औरते और पुरुष चोंक जाते हैं, 
रेखा-"सूरज रुक जा,किसी का खून मत बहा,चौधरी को क्या समस्या है,में बात करती हूँ इससे" रेखा गुस्से से चौधरी की और देखती है,तभी गाँव के सरपंच लोग आगे आते हैं।
सरपंच-"रेखा तुम्हारे पति ने चौधरी से 80हजार का कर्जा लिया था,तुमने मूल चूका दिया लेकिन उसकी ब्याज नहीं दी,और सूरज ने हरिया को जान से मार दिया,तुम दोनों चौधरी के दोषी हो" सरपंच की आवाज़ के साथ सब बोलने लगते हैं ।
रेखा-"मेरे पति ने चौधरी से मात्र 10हजार का कर्जा लिया था,और उन्होंने वो कर्जा चूका दिया,ये चौधरी अब तक झूठ बोल कर हमसे पैसे ऐंठता रहा" 
चौधरी सच्चाई सुन कर हैरान रह जाता है ।
चौधरी-"क्या सबूत है इसके पास", सरपंच भी सबूत मांगते हैं ।
रेखा-"सबूत है मेरे पास,मेरे पति जिन्दा हैं,उन्हें कई बार मारने की कोसिस की चौधरी ने,और मेरा घर भी इसी ने बिगाड़ा है" सूरज अपने पिता को वीडियो कोल करता है, बीपी सिंह को देख कर चौधरी और गाँव बाले देख कर हैरान रह जाते हैं।
बीपी सिंह सारी सच्चाई बता देता है,चौधरी की पोल खुल चुकी थी,
सरपंच-'सूरज तुमने हरिया को क्यूँ मारा" रेखा बीच में बोल पड़ती है।
रेखा-" सरपंच जी हरिया को इस लिए मारा क्यूंकि उसने मेरे साथ और मेरी बेटियो के साथ बत्तमीजी की,पूरा गाँव जानता है हरिया कैसा आदमी था, गाँव की हर औरत को बुरी नज़र से देखता था,ऐसे आदमी को मार कर मेरे बेटे ने पुरे गाँव पर अहसान किया है' गाँव के सभी लोग इस बात से सहमत हो जाते हैं,चौधरी भागने लगता है खुद की पोल खुलने के कारण लेकिन सूरज उसे पकड़ लेता है ।
सूरज-"सरपंच जी अब गलती इस चौधरी की निकली है तो अब इसे आप कौनसी सजा दोगे, या आप भी चौधरी के टुकड़ो पर भोकने आए हो", सरपंच शर्मिंदा होते हुए सूरज से माफ़ी मांगता है,और पूरा गाँव भी सूरज के पक्ष में खड़ा हो जाता है ।
सरपंच-'इस चौधरी ने पुरे गाँव को ब्याज पर कर्जा देकर दुगने पैसे बसूले हैं,इसने पुरे गाँव का जीना हराम कर दिया है,इसे भी सजा सूरज ही देगा,सूरज तुम इसे कोई भी सजा दो,पूरा गाँव आपके साथ है" 
सूरज चौधरी के गाल पर तमाचा मारता है,और कुल्हाड़ी उठा कर सूरज पर तान देता है तभी चौधरी की बेटी और पत्नी भागती हुई सूरज के पैरो में गिर जाते हैं। चौधरी की बेटी जैसे ही सूरज को देखती है तो हैरान रह जाती है, सूरज भी हैरान रह जाता है, 
चौधरी की बेटी-" सूर्या जी आप?

सूरज को अपनी आँखों पर विस्वास नहीं हो रहा था,सूरज के हाँथ से कुल्हाड़ी गिर जाती है।
सूरज-"गीता तुम?" चौधरी की बेटी गीता जो शहर में MBA की पढाई करने के बाद सूर्या की कंपनी में नोकरी कर रही थी,गीता चौधरी की बेटी है यह बात वो नही जानता था,और गीता भी बचपन से होस्टल में रह कर शहर में पढ़ी लिखी है ।चौधरी और गाँव के सभी लोग हैरान रह जाते हैं की सूरज और गीता एक दूसरे को जानते हैं।
गीता-"ये चौधरी मेरे पिता हैं, इन्हें माफ़ कर दो" गीता हाँथ जोड़ कर बोली,सूरज का दिल पसीज जाता हैं,चूकीं गीता ने उसकी बहुत मदद की जब तान्या का एक्सिडेंट हुआ और कंपनी को आगे बढ़ाने में गीता ने सूरज के साथ दिन रात मेहनत की।
चौधरी-"तुम सूरज को कैसे जानती हो गीता"
गीता-"ये सूर्या इंडस्ट्रीज के मालिक हैं,में इनकी ही कंपनी में नोकरी करती हूँ" चौधरी और पूरा गाँव यह सुन कर हैरान रह जाते हैं।
चौधरी-"बेटा मुझे माफ़ कर दे,आज के बाद में कोई गलत काम नहीं करूँगा"
रेखा-"बेटा माफ़ कर दे इसे" सूरज चौधरी को छोड़ देता है, चौधरी का घमंड टूट चूका था।
सरपंच-"बेटा गाँव में अशिक्षा के कारण लोग मुर्ख बनते आए हैं, लेकिन तुमने चौधरी जैसे व्यक्ति का चेहरा उजाकर कर दिया,हम सब तुम्हारे बहुत आभारी हैं" 
सूरज-"आज के बाद इस गाँव में कोई अशिक्षित नहीं रहेगा,में इस गांव में एक स्कूल बनबाऊंगा" 
गाँव के लोग बहुत खुश होते हैं। 
गाँव का एक व्यक्ति-" बेटा हम लोगों के पास पैसे नहीं हैं तो अपने बच्चे को पढ़ाएंगे कैसे"
सूरज-" में इस गाँव में कंपनी की शाखा खोलूंगा,सबको रोजगार दूंगा" गाँव के सभी लोग खुश हो जाते हैं,गाँव के सभी लोग सूरज और रेखा की आवभगत करते हैं, गाँव केलोग सूरज और रेखा को अपने घर खाना भी खिलाते हैं। सुबह से शाम तक सूरज और रेखा गाँव के सभी लोगो से मिलते हैं, सूरज और रेखा थक चुके थे,इसलिए दोनों लोग घर पर आ जाते हैं, सूरज और रेखा के साथ गीता भी थी, गीता सूरज को अकेले में बुला कर पूछती है।
गीता-"सूर्या जी मुझे अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है की आप तो सूर्या हैं,फिर आपको सूरज कह कर क्यूँ बुला रहें हैं,और आपकी माँ तो संध्या हैं" सूरज गीता को पूरी कहानी सुनाता है की उसके पिता ने दो शादी की हैं,दोनों उसकी माँ है ।
काफी समय बाद गीता अपने घर चली जाती है,अब सूरज और रेखा घर में बैठे हुए थे।
रेखा-" सूरज आज में बहुत खुश हूँ,जिस गाँव के लोग मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया करते थे,आज बही लोग मेरी सेवा कर रहे थे" 
सूरज-" हाँ माँ,इस देश में गरीब होना अभिशाप जैसा है,जब हम गरीब थे तब ऐसा लगता है हमारा हमदर्द कोई नहीं है इस गाँव में,आज पूरा गाँव हमें अपना सा लगता है" 
रेखा-"बेटा तूने बहुत अच्छा सोचा है इस गाँव में स्कूल खुल जाएगा तो इस गाँव की तरक्की हो जाएगी,और कंपनी खुलने के बाद इस गाँव के गरीबो को रोजगार मिल जाएगा" काफी देर बात चीत के बाद रेखा गाँव के उसी जंगल में घुमने के लिए सूरज को बोलती है, सूरज और रेखा अपनी गाड़ी से घूमने निकल जाते हैं जहाँ वो दोनों कभी अपनी आजीविका चलाने के लिए लकड़ी काटने जाया करते थे ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

सूरज और रेखा जंगल के उसी स्थान पर जाते हैं जहाँ उन दोनों ने लकड़ी काटी थी, सूरज अपनी गाडी खड़ी करके जंगल में घूमने लगते हैं, घूमते घूमते दोनों लोग काफी काफी आगे तक निकल जाते हैं, मौसम भी सुहावना था,बारिश जैसा मौसम बना हुआ था, रेखा बहुत खुश थी इस खुली आज़ादी में घूम कर,सूरज भी खुश था रेखा को देख कर, दोनों माँ बेटे पिछली यादों में इतने खो जाते हैं की रात हो जाती है ।
रेखा-" सूरज ऐसा लगता है जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मुझे मिल गई हो, ये सारी खुशियाँ सिर्फ तेरे कारण हैं" रेखा सूरज को गले लगा लेती है,सूरज भी रेखा को कस कर गले लगता है, आज सूरज को एक अलग ही अहसास होता है,रेखा के बदन की खुशबु सूरज को बड़ी अच्छी लग रही थी, सूरज भी कस कर गले लगाकर रेखा के गालो पर किस्स करने बाला होता है,रेखा भी सूरज के गाल पर किस्स करने के लिए अपना सर घूमाती है,दोनों लोग एक साथ किस्स करने के कारण दोनों के लिप्स एक दूसरे के लिप्स से टकरा जाते हैं, दोनों के जिस्म में करेंट सा दौड़ जाता है, दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठ से रगड़ जाते हैं, सूरज और रेखा दोनों को ही अच्छा लगता है,लेकिन शर्म के कारण दोनों लोग एक दूसरे से अलग हो जाते हैं।
सूरज-"सॉरी माँ, गलती से हो गया" 
रेखा-" क्या" 
सूरज-'आपके होंठो पर किस्स"
रेखा-"कोई बात नहीं तू मेरा बेटा, तू तो मुझे किस्स कर सकता है,मुझे अच्छा महसूस हुआ" 
सूरज-" माँ पहले कभी किया है लिप्स किस्स"रेखा शर्मा जाती है यह सुन कर।
रेखा-" नहीं कभी नहीं" सूरज यह सुनकर हैरान रह जाता है।
सूरज-"मतलब पापा रोमांटिक नहीं थे" सूरज हसते हुए बोला, रेखा इस बात से शर्मा जाती है,
रेखा-"हमारे समय में यह सब नहीं चलता था,आज कल फिल्में देख कर लोग यह सब सीख गए हैं" 
सूरज-" हाँ माँ,लेकिन अब तो सुरुआत लिप्स किस्स से ही होती है"अचानक सूरज के मुह से निकल जाता है,रेखा यह सुन कर हैरान रह जाती है,सूरज का मतलब था सेक्स करने से पहले सुरुआत लिप्स किस्स से ही होती है । सूरज भी अपनी कही बात पर शर्मा जाता है ।
रेखा-"कैसी सुरुआत सूरज,समझी नहीं"रेखा जानबूझ कर अनभिज्ञ बनने का नाटक करती हुई बोली,लेकिन सूरज शर्मिंदगी महसूस करता है,क्या बताए अपनी माँ को ।
सूरज-"प्यार की सुरुआत माँ,फिल्मो में ऐसा दिखाया जाता है"सूरज बात घुमा देता है। तभी तेज बारिश होने लगती है
रेखा-" ओह्ह्ह प्यार,अच्छा अब जल्दी चल बहुत देर हो गई है, अँधेरा हो गया,और अब ये बारिश भी होने लगी है" सूरज और रेखा गाडी की तरफ चल देते हैं, वियावान जंगल में अँधेरा हो चूका था, धीरे धीरे बारिश भी बहुत तेज हो गई थी,रेखा की साडी भीग चुकी थी,और बदन पर चुपक गई थी, रेखा सूरज का हाँथ पकड़ कर चल रही थी, तभी तेज बिजली कड़की रेखा डर जाती है, रेखा सूरज का हाँथ कस कर दबा देती है, 
सूरज-'माँ देखो न बारिश में कितना मजा आ रहा है" 
रेखा-" हाँ बारिश में मजा तो बहुत आ रहा है लेकिन मुझे बिजली के कड़कने से डर लगता है" 
सूरज-"अरे माँ डर क्यूँ रही हो,में हूँ न तुम्हारे साथ" रेखा-"तुझे बारिश में मजा आ रहा है,सारे कपडे भीग गए,अब शहर कैसे जाएंगे,और तू तो कपडे भी नहीं लाया है" 
सूरज-'माँ आप तो नायटी पहन कर चली जाओगी,लेकिन मुझे परेसानी है,कोई बात नहीं कोई जुगाड़ कर लूंगा" सूरज मोबाइल की टोर्च जला कर चल रहा था, गाडी के नजदीक आ जाते हैं,रेखा को बहुत तेज पिसाब लगी थी,रोक पाना मुश्किल हो गया था।
रेखा-" सूरज मुझे बहुत तेज पिसाब लगी है" यह सुनकर सूरज के बदन में उत्तेजना महसूस होती है।
सूरज-"में चला जाता हूँ,आप यहीं कर लो"
रेखा-"नहीं सूरज मुझे डर सा लग रहा है,तू यहीं रह" यह सुन कर सूरज को झटका लगता है।
सूरज-"ठीक है माँ कर लो"
रेखा-"अरे मोबाइल की टोर्च तो बंद कर,और पीछे घूम जा" सूरज मोबाइल की टोर्च बंद करके पीछे घूम जाता है,रेखा तुरंत बैठ जाती है और एक तेज सिटी की आवाज़ के साथ मूतने लगती है, सिटी की आवाज़ तेज थी,ऐसा लग रहा था इस वियावान जंगल में किसी ने बांसुरी बजा कर रागिनी छेड़ दी हो,बड़ी ही सुरीली आवाज़ थी,सूरज का लंड भी झटके मारने लगा था ।रेखा को भी शर्म आ रही थी,रेखा को तेज पिसाब आने के कारण रुक रुक कर पिसाब निकलती है और बार सिटी बजती है।
सूरज के मन में आता है,माँ से मजाक किया जाए।
सूरज-"माँ जल्दी चलो,ऐसा लग रहा है जंगल में कोई है" रेखा यह सुन कर घबरा जाती है।
रेखा-"तुझे कैसे पता सूरज,कोई है"
सूरज-"माँ आपने आवाज़ नहीं सुनी,कोई सिटी बजा रहा है"रेखा यह सुनकर शर्मा जाती है ।
रेखा-"ओह्ह सूरज कोई नहीं है,यह तो मेरे पिसाब की आवाज़ है पागल" रेखा हसते हुए बोली,और बोलने के बाद शर्मा जाती है, पहले से रेखा सूरज के साथ खुल चुकी थी ।
सूरज-"ओह्ह माँ इतनी तेज सिटी की आवाज़,ऐसा लगा जैसे किसी ने बांसुरी बजाई हो,में तो चोंक गया था,भला इतनी रात में कौन है जो सुरीली आवाज़ में सिटी मार रहा है", सूरज की बात पर रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-"तू बहुत बिगड़ गया है,तेरी बातें सुन कर मुझे बहुत शर्म आती है सूरज" 
सूरज-"अरे माँ सच बोल रहा हूँ" बारिश तेज होने लगती है ।
रेखा-"अब देर हो रही है चलो" सूरज और रेखा दोनों आगे बाली सीट पर बैठ जाते हैं,सूरज गाडी स्टार्ट करता है और लाइट जला देता है, रेखा अभी भी सूरज की कही गई बातों को सोच कर मन ही मन हस रही थी। लाइट जलते ही रेखा सूरज की ओर देखती है तो हँसने लगती है,सूरज को समझ नहीं आ रहा था माँ क्यूँ हस रही है।

सूरज-" माँ क्यूँ हँस रही हो, क्या हुआ"
रेखा-" तेरे होंठो पर मेरी लिपस्टिक लग गई है" रेखा हसते हुए बोली, सूरज फ्रंट शीशे से देखता है,उसके होंठ पर लाल लिपस्टिक लगी हुई थी।
सूरज-" ओह्ह माँ यह किस्स करते समय लग गई"
रेखा-"साफ़ कर ले,किसी ने तुझे देखा तो पता नहीं क्या सोचेंगे", 
सूरज-"क्या सोचेंगें माँ?" रेखा शरमाती हुई बोली।
रेखा-" लोग सोचेंगे,किसी के साथ इसका चक्कर चल रहा है" 
सूरज-" किसी के साथ क्यूँ लोग तो आपके साथ सोचेंगे" 
रेखा-"लेकिन में तो तेरी माँ हूँ" 
सूरज-"लोगों को क्या पता की आप मेरी माँ हो,सब तो यही सोचेंगे की आपके साथ ही मेरा चक्कर चल रहा है" 
रेखा-"पागल ही होगा जो ऐसा सोचेगा,में अधेड़ उम्र की हूँ और तू जवान है" 
सूरज-"माँ आप अधेड़ लगती कहाँ हो,ऐसा लगता है जैसे आप फिर से जवान हो गई हो" रेखा शर्मा जाती है खुद की तारीफ़ सुन कर।
रेखा-" ओह्हो मतलब में अभी जवान लगती हूँ तुझे,चल अब ज्यादा तारीफ़ मत कर और ये लिपस्टिक का दाग साफ़ कर ले" रेखा के इतना बोलते ही सूरज फ्रंट शीशे में देख कर अपनी जीव्ह से होंठो पर लगी लिपस्टिक चाट कर साफ़ कर देता है, यह देख कर रेखा के जिस्म में गुदगुदी होने लगती है । आज पहली बार रेखा को अपनी चूत से रिश्ता हुआ पानी महसूस होता है।
रेखा-'यह क्या किया तूने सूरज" 
सूरज-"माँ बहुत टेस्टी है आपके होंठो की लिपस्टिक" 
रेखा-"तू पागल है सूरज,अब जल्दी चल न,मेरे कपडे भीग चुके हैं,घर चल कर उतारना भी है"
सूरज गाडी दौडा देता है,कुछ ही समय में सूरज और रेखा घर आ जाते हैं,लेकिन बारिश अभी रुकी नहीं थी, बहुत तेजी से पानी बरस रहा था।
रेखा-"ओह्हो ये बारिश भी आज होनी थी"रेखा दरबाजा खोल कर घर में प्रवेश करती है।
सूरज-" माँ कितना तो अच्छा मौसम हो गया है,आज गर्मी भी तो बहुत थी, मेरा तो मन कर रहा है नहा लू बारिस में"सूरज अंदर आकर दरबाजा बंद कर देता है,मोबाइल और पर्स बरामडा में बिछी चारपाई पर रख कर बारिश में भीगने लगता है। मन तो रेखा का भी कर रहा था नहा ले।
रेखा-" बारिश में भीगना तो मुझे भी अच्छा लगता है लेकिन साडी में नहीं,ये बनारसी साडी का बजन बहुत होता है,भीग कर और ज्यादा हो जाता है" रेखा बरामडा में खड़ी थी । 
सूरज-" साडी उतार कर नहा लो माँ,आज बैसे भी हमने नहाया नहीं है"
रेखा-" मुझे शर्म आती है सूरज,तू ही नहा ले"
सूरज-"अरे माँ ब्लाउज और पेटीकोट में कैसी शर्म,और अँधेरा भी है,मुझसे कैसी शर्म माँ" रेखा गहने साडी उतार कर चारपाई पर रख देती है। साडी उतारते ही रेखा का बदन हल्का हो गया था,अब तक ऐसा लग रहा था जैसे किसी कैद में हो, भीगने के कारण 
रेखा का पेटीकोट गांड से चुपक गया था, रेखा आँगन में खड़ी होकर बारिश के तेज पानी में नहाने लगती है,बारिश की बुँदे रेखा के ब्लाउज के अंदर पड़ती तो ऐसा लगता जैसे किसी ने उसके बूब्स को टच किया हो, रेखा के जिस्म में गुदगुदी दी हो रही थी, सूरज रेखा को अँधेरे में महसूस कर पा रहा था, 
रेखा-"सूरज तू कपडे क्यूँ पहना है उतार दे न" 
सूरज-'माँ में सिर्फ शर्ट उतार देता हूँ, पेंट नहीं",सूरज शर्ट उतार देता है,पेंट नहीं उतारता है क्यूंकि अंदर कच्छा नहीं पहना था। 
रेखा-"पेंट भी उतार दे,तू तो कच्छा पहन कर नहा सकता है" 
सूरज-'माँ में आज कच्छा पहनना भूल गया था" रेखा यह सुनकर चोंक जाती है, 
रेखा-"ओह्हो तू तो भुलक्कड़ है,चल कोई बात नहीं,वैसे अगर तू चाहे तो पेंट उतार कर नहा सकता है,अँधेरे में वैसे भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है" 
रेखा खुद अँधेरे का फायदा उठाकर,अपनी जांघे साफ़ कर रही थी पेटीकोट उठाकर,
सूरज-"ठीक है माँ"सूरज अपनी पेंट भी उतार देता है,सूरज का लंड खड़ा था,रेखा को बड़ा अजीव सा लग रहा था,उसका बेटा नग्न हो चूका था, रेखा अँधेरे में सूरज को देखने का प्रयास कर रही थी लेकिन देख नहीं पा रही थी,आज सूरज को उसने मूतते हुए उसका लंड देखा था,तब से उसे एक अलग ही नशा सा था, रेखा आज सूरज की ओर आकर्षित होती जा रही थी,आज उसकी चूत में अजीब सी खुजली मच रही थी, रेखा अपना पेटीकोट उठाकर चूत पर ऊँगली फिराती है,रेखा की चूत गीली थी, रेखा बारिश के पानी से अपनी चूत साफ़ करने लगती है,रेखा समझ नहीं पा रही थी,बेटे की बजह से चूत गीली क्यूँ हो रही है।
सूरज और रेखा मूसलाधार बारिश का मजा ले रहे थे,तभी बिजली कड़कती है और रौशनी हो जाती है।
रेखा अपना पेटीकोट ऊपर किए हुए थी,सूरज की नज़र रेखा की भारी भरकम गांड पर पड़ती है, बाहर निकली हुई गदराई गांड को देख कर सूरज के जिस्म में उत्तेजना बढ़ जाती है,पहली बार सूरज का मन अपनी माँ पर फ़िदा हो जाता है,इधर बिजली कड़कने से रेखा मुड़ जाती है,रेखा की नज़र सीधे सूरज के खड़े लंड पर पड़ती है। रेखा अपना पेटीकोट छोड़ कर सूरज के खूंखार खड़े लंड को तब तक देखती है जब तक बिजली कड़कती है, सूरज तुरंत अपने लंड पर हाँथ रख कर छुपा लेता है, बिजली कड़कना बंद हो जाती है और पुनः आँगन में अँधेरा हो जाता है ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

रेखा और सूरज शर्मसार महसूस कर रहे थे, दोनों लोग खामोशी से अपनी सोच में डूबे हुए थे, रेखा आज अपने पति को बहुत मिस्स कर रही थी,यदि आज होते तो वह वीना चुदाई के रह न पाती, सूरज भी सोचता है यदि वह आज घर होता तो पूनम या तनु दीदी को चोद देता। 
रेखा-" नहा लिया या और नहाएगा?" अचानक रेखा ख़ामोशी तोड़ते हुए सामान्य व्यवहार करते हुए बोली,जैसे कुछ हुआ ही न हो।
सूरज-"हाँ माँ,अब चलो" रेखा बरामडा में आकर खड़ी हो जाती है।
रेखा-" सूरज मेरी नायटी तो गाडी में रखी है,अब बारिश में कैसे लाऊँ,यहाँ लेकर आई तो भीग जाएगी" 
सूरज-"माँ भीगे कपडे यहीं उतार दो,गाडी में जाकर नायटी पहन कर बैठना में थोड़ी देर में आ जाऊँगा" 
रेखा-"में नंगी जाऊं क्या"अचानक रेखा बोलती है।
सूरज-"ब्रा और पेंटी तो पहनी होगी आपने"आज पहली बार सूरज अपनी माँ के वस्त्रो के नाम लेता है,जिसे सुन कर रेखा की चूत गीली हो जाती है।
रेखा-"नहीं सिर्फ ब्रा पहनी हूँ" 
सूरज-"ओह्ह्ह मतलब आप भी अपनी कच्छी पहना भूल गई,आप भी भुलक्कड़ हो माँ" रेखा के तनबदन में उत्तेजना बढ़ने लगती है।
रेखा-" मुझे बार बार पिसाब आती है,इसलिए नहीं पहनी"रेखा झूठ बोलती हूँ,रात में ऊँगली करते समय उतारी थी,यह बात सूरज जानता है।
सूरज-"बार बार पिसाब क्यूँ आती है माँ,कोई परेसानी तो नहीं है,डॉक्टर ने जो टेबलेट दी है कहीं उसकी बजह से तो नहीं आती है बार बार पिसाब",सूरज अँधेरे में अपना लंड सहलाने लगता है ।
रेखा-"पता नहीं सूरज" 
सूरज-" अच्छा ठीक है माँ,आप कपडे उतार कर जाओ,भीगे कपडे पहन कर गाडी में जाओगी तो सीट भी भीग जाएगी" रेखा अपना पेटीकोट और ब्लाउज ब्रा उतार देती है,सभी गीले कपडे चारपाई पर रख कर जाने लगती है।
रेखा-"सूरज में जा रही हूँ गाडी में"
सूरज-"कपडे तो उतार दो"
रेखा-"कपडे तो मैंने उतार दिए" यह सुन कर सूरज का लंड झटका मारता है,इस समय दोनों माँ बेटे बिल्कुल नग्न थे ।
सूरज-"ठीक है माँ आप जाओ,में भी कोई पुराना कपडा ढूंढ कर पहन लूंगा" रेखा जाने लगती है,अभी भी तेज बारिश हो रही थी, रेखा बीच आँगन में ही पहुँच पाई थी,तभी बिजली तेजी से कड़की पुरे आँगन में रौशनी ही रौशनी हो जाती है,सूरज की नज़र रेखा की गांड और पुरे बदन पर पड़ी,रेखा लम्बी थी,उसका कमर पतली और गांड मोटी थी।
बिजली कड़कने से रेखा डर जाती है और वापिस भागती है,सूरज रेखा को वापिस आते हुए देखता है,रेखा की चूचियाँ हिलती है,गोरे बदन पर उसकी हलकी काली चूत दिखाई दे जाती है, रेखा जैसे ही आँगन की तरफ आती है बिजली कड़कना बंद हो जाती है,एक दम अँधेरा हो जाता है,रेखा बिजली के कड़कने से बहुत डर गई थी,रेखा बारामदे में आकर सूरज से लिपट जाती है, तेजी से दोनों के जिस्म टकराने से रेखा की चूचियाँ सूरज की छाती से मसल जाती है,सूरज का खड़ा लंड रेखा की चूत में घुस जाता है, रेखा की चुत को फाड़ते हुए लंड रेखा की बच्चेदानी तक चला जाता है,लंड चूत में ऐसे घुसा जैसे किसी ने चाक़ू पेट में घोंपा हो,रेखा की चीख निकल जाती है।
रेखा-"आःह्ह्ह्हूफ्फ्फोह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् स स सुरआज्ज्ज्" रेखा की 22 साल से अनचुदी चूत खुल चुकी थी,सूरज का लंड चूत से रगड़ते हुए अंदर घुसा जिससे रेखा को मजा और दर्द साथ साथ हुआ । रेखा सूरज के नंगे शारीर पर ऐसे चुपकी थी उसमे हवा भी पास न हो, सूरज रेखा की गांड पर हाँथ रख कर मसल देता है। 
रेखा-"सूरज निकाल इसे,मुझे दर्द हो रहा है"सूरज चरम स्खलन पर तो बहुत पहले से ही था,जैसे ही लंड चूत से खिसका कर निकालता है,लंड से एक तेज धार के साथ सूरज चूत में झड़ जाता है,झड़ते समय सूरज रेखा को कस कर पुन गले लगा लेता है,जैसे ही सूरज जा पानी रेखा अपनी चूत में महसूस करती है,रेखा सूरज को हटा देती है।

सूरज-"सॉरी माँ" रेखा जानती थी इसमें सूरज की गलती नहीं है,वो खुद बिजली कड़कने के डर से सूरज से आ लिपटी और उसका खड़ा लंड चूत में घुस गया। ये सब अँधेरे का दोष है।
रेखा-"सूरज ये जो भी हुआ इसमें किसी की गलती नहीं है,लेकिन अब में क्या करू?"
सूरज-"समझा नहीं माँ" 

रेखा-"तेरा पानी अंदर चला गया,अगर में तेरे बच्चे की माँ बन गई तो क्या होगा???????

रेखा-"ये बहुत गलत हुआ सूरज,ऐसा नहीं होना था,मुझे डर है में कहीं प्रेग्नेंट न हो जाऊं,अगर ऐसा हो गया तो में कहीं मुह दिखाने के लायक नहीं रह पाउंगी" रेखा की आँख में आंसू थे।
सूरज-"माँ आप परेसान न हो,में मेडिकल से कुछ दवाइयाँ ले आऊंगा" 
रेखा-" अब जल्दी चल,मुझे दर्द हो रहा है"रेखा गाडी में जाकर नायटी पहनती है । सूरज भी अपने भीगे कपडे पहन कर गाडी दौड़ा देता है,रेखा गुमसुम सी पिछली सीट पर लेट जाती है।
रेखा को आज बहुत ग्लानी महसूस हो रही थी,जाने अनजाने में ही अपने बेटा का लंड अपनी योनी में घुसबा चुकी थी, हालांकि रेखा और सूरज दोनों लोग एक दूसरे से खुल जरूर चुके थे लेकिन सम्भोग के बारे में किसी ने नहीं सोचा, रेखा की योनी से सूरज का वीर्य रिस कर बाहर निकल रहा था,और योनी में जलन हो रही थी,रेखा को डर था कहीं गर्भाती न हो जाए, रेखा गंदे कपडे से अपनी योनी साफ़ करती है,रेखा को दर्द होने के कारण नींद नहीं आ रही थी।
इस प्रकार सुबह दोनों लोग शहर पहुँच जाते हैं।
सूरज-"माँ सीधे फ़ार्म हॉउस चले"
रेखा-"नहीं पहले हॉस्पिटल चल,मुझे दर्द हो रहा है", सूरज सीधे हॉस्पिटल जाता है,हॉस्पिटल पहुँचते ही रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है,सूरज बाहर गाडी में ही बैठा था,
रेखा-"डॉक्टर मेरी योनी में बहुत दर्द और जलन हो रही है" 
डॉक्टर-"क्या हुआ"
रेखा-"सेक्स करने के कारण"डॉक्टर बेड पर रेखा को लेटने के लिए बोलती है,रेखा लेट जाती है,डॉक्टर रेखा की योनी को देखती है तो हैरान रह जाती है,योनी के आसपास खून लगा हुआ था,और योनी के अंदर लण्ड के रागडने के कारण पूरी योनी छील चुकी थी,पूरी योनी लाल थी।
रेखा-" ओह्ह्ह आपकी योनी तो बुरी तरह से घायल हो चुकी है,ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने मोटा डंडा डाला हो,क्या बाकई में आपकी योनी में लंड घुसा है?"रेखा को बहुत शर्म आती है,डॉक्टर कॉटन से योनी की सफाई करती हुए बोली।
रेखा-"हाँ डॉक्टर,22 साल बाद इसमें घुसा है"
डॉक्टर-" वैसे आप बहुत भाग्यशाली भी हो,आपके पति का बहुत बड़ा लंड है,पहली बार घुसा है,इसलिए दर्द हुआ आपको,दो चार बार सेक्स करने के बाद आपकी योनी भी खुल जाएगी,अपने पति से कहना आराम आराम डाला करें, में क्रीम देती हूँ,अंदर लगाने के लिए" डॉक्टर क्रीम लगती है योनी में,और कुछ दवाइयाँ और क्रीम भी देती है ।
रेखा के मन में एक शंका थी प्रग्नेंट न हो जाए,रेखा डॉक्टर से पूछती है।
रेखा-" डॉक्टर में प्रेगनेंट तो नहीं हो जाउंगी,बिना कंडोम के सेक्स किया है' डॉक्टर योनी में एक ऊँगली डालकर बच्चेदानी का मुह चेक करती है।
डॉक्टर-"घबराओ नहीं बच्चेदानी का मुह बंद है,आप प्रग्नेंट नहीं होगी"रेखा बहुत खुश होती है,उसकी चिंता समाप्त हो चुकी थी। रेखा बाहर आकर गाडी में बैठ जाती है। 
सूरज-"क्या कहा डॉक्टर ने माँ" सूरज बहुत चिंतित था।
रेखा-' सब ठीक है,घर चल"रेखा के व्यवहार में थोडा परिवर्तन आ चूका था,सूरज फ़ार्म हॉउस पहुँचता है, रेखा अपने कमरे में चली जाती है, पूनम अपने बाथरूम से निकल कर आती है। तनु कॉलेज गई हुई थी, आज सूरज का दिमाग खराब था रात बाली घटना के कारण, सूरज गाडी लेकर संध्या माँ के पास जाता है, संध्या सूरज को गले लगा लेती है।
संध्या-'आ गया मेरा बच्चा,तुझे अपनी माँ की याद नहीं आती है,कंपनी के काम से इधर उधर घूमता रहता है" 
सूरज-"माँ अब आ गया हूँ न,अब कुछ दिन तक कहीं नहीं जाऊँगा, तान्या दीदी कहाँ है?"
संध्या-'तान्या कंपनी चली गई,हम दोनों अकेले हैं,आज बुझा दे मेरी प्यास बेटा, कई दिनों से प्यासी है मेरी चूत"संध्या मेक्सी उठाकर चूत दिखाते हुए बोली,संध्या एक हाँथ से सूरज का लंड मसल देती है,सूरज का लंड खड़ा हो जाता है,सूरज संध्या की मेक्सी उतार देता है और कमरे में बेड पर पटक देता है,सूरज खुद अपने सारे कपडे उतार कर,संध्या की जांघे चौड़ी करके चूत चाटने लगता है, तभी सूरज को संध्या में रेखा दिखाई देती है, सूरज अपना लंड संध्या की चूत में डालकर चोदने लगता है, सूरज कप ऐसा लग रहा था जैसर वो रेखा को चोद रहा है, सूरज तेज तेज धक्के मारता है ।
संध्या-"आःह्ह्ह्हूफ्फगफगोह्ह्ह् सूरज आज तुझे क्या हो गया है, मेरी चूत का भुर्ता बना दिया,मजा आ रहा है बेटा चोद मुझे" सूरज संध्या को घोड़ी बनाता है और अपना लंड गांड के छेद में डालकर धक्का मारता है,संध्या तड़प उठती है।
संध्या-"ओह्ह्ह्हफ़्फ़्फ़् ये क्या किया तूने सूर्या,मेरी गांड फाड़ेगा क्या,लंड निकाल मेरी गांड से", लेकिन सूरज रुकता नहीं है, गांड में आधा लंड डालकर चोदने लगता है, सूरज को ऐसा लग रहा था जैसे वो रेखा की गांड मार रहा है,कुछ ही देर में झड़ जाता है, संध्या की हालात ख़राब हो गई थी, संध्या बाथरूम में जाती है और सफाई करने के बाद कमरे में आती है। 
संध्या-" आज तुझे क्या हुआ सूर्या,बिना बताए ही मेरी गांड मार ली,बहुत दर्द हो रहा है,अब आज के बाद ऐसा मत करना" 
सूरज-" माँ आज आपकी गांड मारने का बहुत मन था इसलिए आधा ही लंड डाल कर किया,पूरा लंड डालता तो आपकी गांड फट जाती है" हँसते हुए बोला सूरज।
तभी सूरज के फोन बजता है,रेखा फोन उठाती है तो चोंक जाती है,फोन बीपी सिंह का था।
सूरज को फोन देती है, सूरज समझ जाता है। सूरज बीपी सिंह से बाहर जाकर बात करता है, बात करने के बाद सूरज संध्या के पास आता है, संध्या नाराज़ थी।
संध्या-'तू जानता है ये कौन है?"
सूरज-'हाँ माँ जानता हूँ,ये मेरे पिता हैं और तान्या दीदी भी जानती हैं"
संध्या-"वो पिता कहलाने के लायक नहीं हैं सूरज' 
सूरज-"ऐसा क्या किया उन्होंने माँ,आपने इतनी बडी सजा क्यूँ दी उन्हें,22 साल से वो घुट घुट कर मर रहें हैं,आपको जरा सा भी तरस नहीं आया उनपर" 
संध्या-" वो पहले से शादीशुदा थे,उन्होंने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया,यह बात उन्होंने मुझे नहीं बताई,उनकी पहली पत्नी से भी तीन बच्चे थे उनको धोका दिया है उन्होंने" 
सूरज-"माँ धोका तो किस्मत ने उन्हें दिया,बो आपसे शादी नहीं करना चाहते थे,आपके पिता ने मजबूर किया था उन्हें,मरते वक़्त वादा वचन लिया था आपके पिताजी ने उनसे" संध्या यह बात सुनकर चोंक जाती है।
संध्या-" तू कैसे जानता है ये सब, उनकी पहली पत्नी और बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी" 
सूरज-"झूठ बोला था आपसे किसी ने,उनकी पहली पत्नी और बच्चे आज भी जिन्दा हैं"संध्या चोंक जाती है,हैरानी से सूरज की ओर देखती है।
संध्या-',क्या जिन्दा हैं,तुझे कैसे पता,रेखा नाम था उनकी पत्नी का"
सूरज-" हाँ माँ सब जिन्दा हैं, में सूर्या नहीं हूँ माँ सूरज हूँ" 
संध्या-"ये तू क्या बोल रहा है सूर्या,तू पागल हो गया है क्या" सूरज संध्या को पूरी बात समझाता है,संध्या रोने लगती है।
सूरज-"माँ में पहली बार शहर आया था,मंदिर में जब शंकर के गुंडे आपको मार रहे थे तब मैंने आपको बचाया,आप मुझे ही सूर्या समझ बैठी,तान्या दीदी के साथ जब में अमेरिका गया तब पता चला वो मेरे भी पिता हैं" संध्या सूरज को गले लगा लेती है,रोने लगती है, सूरज संध्या को शांत कराता है ।
संध्या-"रेखा कहाँ है बेटा, में उनसे मिलना चाहती हूँ"
सूरज-"वो फ़ार्म हॉउस पर हैं", 
संध्या-"तूने अब तक बताया क्यूँ नहीं की तू सूर्या नहीं सूरज है"
सूरज-" माँ में आपको हमेसा खुश देखना चाहता था इसलिए"संध्या सूरज को किस्स करती है।
संध्या-"मेरे लिए तो तू ही सब कुछ है,मेरा सूर्या सूरज सब तू है,अब मुझे रेखा के पास ले चल" सूरज संध्या को लेकर फ़ार्म हॉउस ले जाता है।

सूरज संध्या को लेकर जैसे ही फ़ार्म हॉउस पहुंचा, पूनम और रेखा डायनिंग टेवल पर बैठ कर खाना खा रही थी, पूनम और रेखा सूरज और साथ में संध्या को देख कर हैरत में पड़ जाती हैं।
सूरज-'दीदी देखो कौन आया है?" 
पूनम-'ये संध्या माँ है हमारी?"संध्या चोंक जाती है, रेखा खड़ी हो जाती है और संध्या को हैरत से देखती है।
संध्या-"हाँ बेटा में तुम्हारी माँ ही हूँ"रेखा पूनम को गले लगा लेती है। रेखा हाँथ जोड़ कर संध्या को नमस्ते करती है, संध्या रेखा को गले लगा लेती है ।
तभी तनु कॉलेज से आ जाती है। तनु भी समझ जाती है ये संध्या माँ है ।
संध्या सबको गले लगा लेती है ।
संध्या-" थेंक्स सूरज तुमने रेखा दीदी से मिलवा कर आज मेरा बोझ हलका कर दिया, में हमेसा इनके बारे में सोचती थी, आज में बहुत खुश हूँ" 
संध्या सूरज को गले लगा लेती है ।
सूरज-"माँ आज के बाद हम सब साथ साथ रहेंगे" 
संध्या-"हाँ बेटा हम सब साथ रहेंगे, सब लोग चलो घर" रेखा भी बहुत खुश थी।
सूरज-"माँ अब आप पापा को भी माफ़ कर दो"
संध्या-"ठीक है बेटा, तेरे पापा का फोन आया था क्या कह रहे हैं वो"
सूरज-"पापा 3 दिन बाद आ रहें हैं" सभी लोग यह सुन कर बहुत खुश थे ।
रेखा अभी भी सूरज से बात नहीं कर रही थी,रेखा के जहन में रात बाली बात चल रही थी। 
इस प्रकार सभी लोग संध्या के साथ एक ही घर में रहने लगते हैं । तान्या पूनम और तनु में गहरी दोस्ती हो गई थी, इधर संध्या और रेखा भी आपस में बहुत घुलमिल गई । 


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

4 चार हो चुके थे आज बी पी सिंह इंडिया मतलब घर आ रहे थे, सभी लोग बहुत खुश थे।
रेखा और संध्या रसोई में मनपसंद खाना बना रही थी, रेखा सबसे ज्यादा खुश थी क्यूंकि उसकी चूत में चुदवाने की हवस बढ़ चुकी थी,रेखा की चूत भी अब ठीक हो चुकी थी, आज रेखा जी भर के चुदवाना चाहती थी,लेकिन संध्या भी साथ में है,वो भी उनकी पत्नी है,बराबर की हकदार है,दोनों की चुदाई एक साथ कैसे हो सकती है यही सोच रही थी । इधर संध्या सूरज से चुदने के लिए बेकरार थी उसे बीपी सिंह में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, आज चार दिन से संध्या ने सूरज का लंड नहीं लिया था, और यह हाल लगभग पूनम तान्या तनु तीनो का यही हाल था ।सब सूरज से चुदना चाहती थी बस पतिवृथा नारी रेखा को छोड़ कर। 
वो वक़्त भी आ जाता है जब सूरज बीपी सिंह को एअरपोर्ट से रिसीव करके घर ले आता है ।

रेखा और संध्या दोनों बीपी सिंह के गले लग जाती है,
रेखा-"आप कैसे हो"
बीपी सिंह-"में ठीक हूँ रेखा,मुझे तो लगा था में अकेले ही तड़प तड़प कर मर जाऊँगा,सूरज की बजह से मुझे दोबारा एक नई जिंदगी मिल गई"
बीपी सिंह संध्या के आगे हाँथ जोड़ता है।
बीपी सिंह-"संध्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया अब में बहुत खुश हूँ,मुझे मेरा परिवार मिल गया" संध्या गले लग जाती है।
बीपी सिंह की आँखों में आंसू आ जाते हैं, पूनम और तनु भी अपने पापा के गले लग जाती हैं, इस प्रकार फेमिली ड्रामा सुबह से लेकर शाम तक चला, सभी लोग बैठ कर खाना खाते हैं,और बहुत सारी बाते करते हैं ।
अब रात में सोने की तयारी होती है, बीपी सिंह अपने कमरे में जाता हैं जहाँ संध्या और रेखा सोती थी । संध्या रेखा के पास आकर कहती है ।
संध्या-",दीदी आप उनके साथ सो जाओ,में सूरज के रूम में सो जाती हूँ"
रेखा-"दीदी आप सो जाओ,में कहीं और सो जाउंगी"
संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ, और हाँ ज्यादा तेज आवाज़े मत निकालना, बरना मेरी हालात ख़राब हो जाएगी"
रेखा-"मतलब समझी नहीं"
संध्या-" दीदी वो सेक्स आराम से करना"रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-"तो आप ही चली जाओ"
संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ"यह कह कर संध्या रेखा को भेज देती है और खुद सूरज के कमरे में आकर अपनी मेक्सी उतार कर नंगी हो जाती है और सूरज से लिपट कर लेट जाती है ।
सूरज-"क्या हुआ माँ,आज आप पापा के पास नहीं गई",
संध्या-"मुझे तो सिर्फ तू चाहिए,मेरी चूत में सिर्फ तेरा ही लंड घुसेगा और किसी का नहीं",संध्या सूरज का लोअर उतार कर मुह में लेकर चूसने लगती है, सूरज भी चार दिन से चूत का प्यासा था, सूरज और संध्या 69 की पोजीसन में आकर एक दूसरे का अंग चाटने चूसने लगते हैं, संध्या सूरज के ऊपर लेट कर मुह में लंड डालकर चुस्ती है और सूरज के मुह पर संध्या की चूत थी,सूरज अपनी जीव्ह घुसेड़ कर चूत चाटता है, काफी देर तक चाटने के बाद सूरज उठ कर संध्या की चूत में लंड घुसेड़ कर चोदने लगता है ।
इधर रेखा बीपी सिंह के कमरे आकर अपने पति से लिपट कर लेट जाती है, बीपी सिंह रेखा को बहुत प्यार करता है लेकिन चोदता नहीं है, रेखा इंतज़ार करती है की उसका पति उसे चोदे लेकिन बीपी सिंह सो जाता है, रेखा को लगता है शायद सफ़र करने की बजह से थक गए होंगे इसलिए सो गए, थोड़ी देर बाद रेखा अपनी चूत को ऊँगली से शांत करके सो जाती है, इधर सूरज दो बार संध्या को चोद कर सो जाता है, सुबह सबकी आँख खुलती है सब लोग फ्रेस होकर डायनिंग टेवल पर आते हैं, संध्या और रेखा किचेन में थे ।
संध्या-"रात क्या हुआ दीदी,आपने बताया नहीं" संध्या मजे लेते हुए बोली।
रेखा-"कुछ नहीं हुआ,वो बहुत थके हुए थे जल्दी सो गए" रेखा शरमाती हुई बोली।
संध्या-"ओह्ह्ह दीदी,कोई बात नहीं आज कोसिस करना" 
आज पुरे दिन सभी लोग बीपी सिंह के साथ मार्केट शॉपिंग करने जाते हैं।
रात 11 बजे फिर से रेखा कमरे में जाती है लेकिन बीपी सिंह बेचारा अपनी हार्ट और शुगर की दवाई खा कर गहरी नींद में सो चूका था। रेखा बेचारी फिर से ऊँगली से अपने आपको शांत करती है ।
इधर संध्या सूरज से चुदवाती है। 
दूसरे दिन सुबह बीपी सिंह अचानक अमेरिका से फोन आने के कारण चला जाता है ।
सुबह सभी लोग अपने अपने काम पर चले जाते हैं।
पूनम तान्या के साथ कंपनी जाने लगी थी,तनु अपने कॉलेज जाती है ।
रेखा के जिस्म की प्यास दिन व् दिन बढ़ती जा रही थी। दो तीन दिन ऐसे ही बीत जाते हैं। एक दिन रेखा चुदवाने के लिए अमेरिका जाने का मन बना लेती है । बीपी सिंह अमेरिका की दो टिकेट भेज देता है । रात के दस बजे फ्लाइट थी। रेखा सूरज से जाकर बोलती है, आज कई दिन रेखा सूरज बात करती है ।
रेखा-'सूरज आज अमेरिका जाना है" सूरज चोंक जाता है।
सूरज-'कितने बजे जाना है माँ"
रेखा-"आज रात दस बजे फ्लाइट है,तैयार हो जाना"इतना कह कह कर रेखा चली जाती है।
रेखा तैयारी में जुट जाती है, रात ठीक 9 बजे सूरज और रेखा एअरपोर्ट जाकर अपनी फ्लाइट में बैठ जाते हैं। फ्लाइट में भी रेखा ज्यादा बात नहीं करती है सूरज से। दुसरे दिन शाम पांच बजे दोनों अमेरिका पहुंचते हैं, एअरपोर्ट पर हेलिना उन्हें रिसीव करने आती है । (हेलिना को सूरज एक बार चोद चूका था,हेलिना बीपी सिंह की कंपनी में चीफ सेक्रेटरी की नोकरी करती है) हेलिना शार्ट ड्रेस पहनी थी,जिसमे उसकी आधे से ज्यादा बूब्स बाहर दिखाई दे रहे थे,और निचे शार्ट स्कर्ट,हेलिना सूरज को देख कर गले लगा लेती है, और एक किस्स करती है । रेखा ये सब देख कर चोंक जाती है । हेलिना दोनों को गाडी में बैठा कर घर ले जाती है। बीपी सिंह उनका इंतज़ार ही कर रहा था, रेखा इतनी बड़ी हवेली देख कर दंग रह जाती है । बहुत ही सुन्दर घर था । बहुत से नोकर चाकर घर की साफ़ सफाई में जुटे हुए थे । सभी लोग फ्रेस हो जाते हैं।
रात के समय में सूरज अपने कमरे में जाता है और रेखा अपने कमरे में। रेखा आज बीपी सिंह के कमरे में जाते ही एक नायटी पहन लेती है और अंदर ब्रा पेंटी उतार देती है ।
आज रेखा अपने पति को उकसाने का पूरा इंतज़ाम कर चुकी थी ।
सूरज संध्या को लेकर जैसे ही फ़ार्म हॉउस पहुंचा, पूनम और रेखा डायनिंग टेवल पर बैठ कर खाना खा रही थी, पूनम और रेखा सूरज और साथ में संध्या को देख कर हैरत में पड़ जाती हैं।
सूरज-'दीदी देखो कौन आया है?" 
पूनम-'ये संध्या माँ है हमारी?"संध्या चोंक जाती है, रेखा खड़ी हो जाती है और संध्या को हैरत से देखती है।
संध्या-"हाँ बेटा में तुम्हारी माँ ही हूँ"रेखा पूनम को गले लगा लेती है। रेखा हाँथ जोड़ कर संध्या को नमस्ते करती है, संध्या रेखा को गले लगा लेती है ।
तभी तनु कॉलेज से आ जाती है। तनु भी समझ जाती है ये संध्या माँ है ।
संध्या सबको गले लगा लेती है ।
संध्या-" थेंक्स सूरज तुमने रेखा दीदी से मिलवा कर आज मेरा बोझ हलका कर दिया, में हमेसा इनके बारे में सोचती थी, आज में बहुत खुश हूँ" 
संध्या सूरज को गले लगा लेती है ।
सूरज-"माँ आज के बाद हम सब साथ साथ रहेंगे" 
संध्या-"हाँ बेटा हम सब साथ रहेंगे, सब लोग चलो घर" रेखा भी बहुत खुश थी।
सूरज-"माँ अब आप पापा को भी माफ़ कर दो"
संध्या-"ठीक है बेटा, तेरे पापा का फोन आया था क्या कह रहे हैं वो"
सूरज-"पापा 3 दिन बाद आ रहें हैं" सभी लोग यह सुन कर बहुत खुश थे ।
रेखा अभी भी सूरज से बात नहीं कर रही थी,रेखा के जहन में रात बाली बात चल रही थी। 
इस प्रकार सभी लोग संध्या के साथ एक ही घर में रहने लगते हैं । तान्या पूनम और तनु में गहरी दोस्ती हो गई थी, इधर संध्या और रेखा भी आपस में बहुत घुलमिल गई । 
4 चार हो चुके थे आज बी पी सिंह इंडिया मतलब घर आ रहे थे, सभी लोग बहुत खुश थे।
रेखा और संध्या रसोई में मनपसंद खाना बना रही थी, रेखा सबसे ज्यादा खुश थी क्यूंकि उसकी चूत में चुदवाने की हवस बढ़ चुकी थी,रेखा की चूत भी अब ठीक हो चुकी थी, आज रेखा जी भर के चुदवाना चाहती थी,लेकिन संध्या भी साथ में है,वो भी उनकी पत्नी है,बराबर की हकदार है,दोनों की चुदाई एक साथ कैसे हो सकती है यही सोच रही थी । इधर संध्या सूरज से चुदने के लिए बेकरार थी उसे बीपी सिंह में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, आज चार दिन से संध्या ने सूरज का लंड नहीं लिया था, और यह हाल लगभग पूनम तान्या तनु तीनो का यही हाल था ।सब सूरज से चुदना चाहती थी बस पतिवृथा नारी रेखा को छोड़ कर। 
वो वक़्त भी आ जाता है जब सूरज बीपी सिंह को एअरपोर्ट से रिसीव करके घर ले आता है ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

रेखा और संध्या दोनों बीपी सिंह के गले लग जाती है,
रेखा-"आप कैसे हो"
बीपी सिंह-"में ठीक हूँ रेखा,मुझे तो लगा था में अकेले ही तड़प तड़प कर मर जाऊँगा,सूरज की बजह से मुझे दोबारा एक नई जिंदगी मिल गई"
बीपी सिंह संध्या के आगे हाँथ जोड़ता है।
बीपी सिंह-"संध्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया अब में बहुत खुश हूँ,मुझे मेरा परिवार मिल गया" संध्या गले लग जाती है।
बीपी सिंह की आँखों में आंसू आ जाते हैं, पूनम और तनु भी अपने पापा के गले लग जाती हैं, इस प्रकार फेमिली ड्रामा सुबह से लेकर शाम तक चला, सभी लोग बैठ कर खाना खाते हैं,और बहुत सारी बाते करते हैं ।
अब रात में सोने की तयारी होती है, बीपी सिंह अपने कमरे में जाता हैं जहाँ संध्या और रेखा सोती थी । संध्या रेखा के पास आकर कहती है ।
संध्या-",दीदी आप उनके साथ सो जाओ,में सूरज के रूम में सो जाती हूँ"
रेखा-"दीदी आप सो जाओ,में कहीं और सो जाउंगी"
संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ, और हाँ ज्यादा तेज आवाज़े मत निकालना, बरना मेरी हालात ख़राब हो जाएगी"
रेखा-"मतलब समझी नहीं"
संध्या-" दीदी वो सेक्स आराम से करना"रेखा शर्मा जाती है।
रेखा-"तो आप ही चली जाओ"
संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ"यह कह कर संध्या रेखा को भेज देती है और खुद सूरज के कमरे में आकर अपनी मेक्सी उतार कर नंगी हो जाती है और सूरज से लिपट कर लेट जाती है ।
सूरज-"क्या हुआ माँ,आज आप पापा के पास नहीं गई",
संध्या-"मुझे तो सिर्फ तू चाहिए,मेरी चूत में सिर्फ तेरा ही लंड घुसेगा और किसी का नहीं",संध्या सूरज का लोअर उतार कर मुह में लेकर चूसने लगती है, सूरज भी चार दिन से चूत का प्यासा था, सूरज और संध्या 69 की पोजीसन में आकर एक दूसरे का अंग चाटने चूसने लगते हैं, संध्या सूरज के ऊपर लेट कर मुह में लंड डालकर चुस्ती है और सूरज के मुह पर संध्या की चूत थी,सूरज अपनी जीव्ह घुसेड़ कर चूत चाटता है, काफी देर तक चाटने के बाद सूरज उठ कर संध्या की चूत में लंड घुसेड़ कर चोदने लगता है ।
इधर रेखा बीपी सिंह के कमरे आकर अपने पति से लिपट कर लेट जाती है, बीपी सिंह रेखा को बहुत प्यार करता है लेकिन चोदता नहीं है, रेखा इंतज़ार करती है की उसका पति उसे चोदे लेकिन बीपी सिंह सो जाता है, रेखा को लगता है शायद सफ़र करने की बजह से थक गए होंगे इसलिए सो गए, थोड़ी देर बाद रेखा अपनी चूत को ऊँगली से शांत करके सो जाती है, इधर सूरज दो बार संध्या को चोद कर सो जाता है, सुबह सबकी आँख खुलती है सब लोग फ्रेस होकर डायनिंग टेवल पर आते हैं, संध्या और रेखा किचेन में थे ।
संध्या-"रात क्या हुआ दीदी,आपने बताया नहीं" संध्या मजे लेते हुए बोली।
रेखा-"कुछ नहीं हुआ,वो बहुत थके हुए थे जल्दी सो गए" रेखा शरमाती हुई बोली।
संध्या-"ओह्ह्ह दीदी,कोई बात नहीं आज कोसिस करना" 
आज पुरे दिन सभी लोग बीपी सिंह के साथ मार्केट शॉपिंग करने जाते हैं।
रात 11 बजे फिर से रेखा कमरे में जाती है लेकिन बीपी सिंह बेचारा अपनी हार्ट और शुगर की दवाई खा कर गहरी नींद में सो चूका था। रेखा बेचारी फिर से ऊँगली से अपने आपको शांत करती है ।
इधर संध्या सूरज से चुदवाती है। 
दूसरे दिन सुबह बीपी सिंह अचानक अमेरिका से फोन आने के कारण चला जाता है ।
सुबह सभी लोग अपने अपने काम पर चले जाते हैं।
पूनम तान्या के साथ कंपनी जाने लगी थी,तनु अपने कॉलेज जाती है ।
रेखा के जिस्म की प्यास दिन व् दिन बढ़ती जा रही थी। दो तीन दिन ऐसे ही बीत जाते हैं। एक दिन रेखा चुदवाने के लिए अमेरिका जाने का मन बना लेती है । बीपी सिंह अमेरिका की दो टिकेट भेज देता है । रात के दस बजे फ्लाइट थी। रेखा सूरज से जाकर बोलती है, आज कई दिन रेखा सूरज बात करती है ।
रेखा-'सूरज आज अमेरिका जाना है" सूरज चोंक जाता है।
सूरज-'कितने बजे जाना है माँ"
रेखा-"आज रात दस बजे फ्लाइट है,तैयार हो जाना"इतना कह कह कर रेखा चली जाती है।
रेखा तैयारी में जुट जाती है, रात ठीक 9 बजे सूरज और रेखा एअरपोर्ट जाकर अपनी फ्लाइट में बैठ जाते हैं। फ्लाइट में भी रेखा ज्यादा बात नहीं करती है सूरज से। दुसरे दिन शाम पांच बजे दोनों अमेरिका पहुंचते हैं, एअरपोर्ट पर हेलिना उन्हें रिसीव करने आती है । (हेलिना को सूरज एक बार चोद चूका था,हेलिना बीपी सिंह की कंपनी में चीफ सेक्रेटरी की नोकरी करती है) हेलिना शार्ट ड्रेस पहनी थी,जिसमे उसकी आधे से ज्यादा बूब्स बाहर दिखाई दे रहे थे,और निचे शार्ट स्कर्ट,हेलिना सूरज को देख कर गले लगा लेती है, और एक किस्स करती है । रेखा ये सब देख कर चोंक जाती है । हेलिना दोनों को गाडी में बैठा कर घर ले जाती है। बीपी सिंह उनका इंतज़ार ही कर रहा था, रेखा इतनी बड़ी हवेली देख कर दंग रह जाती है । बहुत ही सुन्दर घर था । बहुत से नोकर चाकर घर की साफ़ सफाई में जुटे हुए थे । सभी लोग फ्रेस हो जाते हैं।
रात के समय में सूरज अपने कमरे में जाता है और रेखा अपने कमरे में। रेखा आज बीपी सिंह के कमरे में जाते ही एक नायटी पहन लेती है और अंदर ब्रा पेंटी उतार देती है ।
आज रेखा अपने पति को उकसाने का पूरा इंतज़ाम कर चुकी थी ।

रेखा मेक्सी पहन कर अपने कमरे में जाती है, बीपी सिंह कमरे में बैठा लेपटोप पर अपने बिजनेस से सम्बंधित कार्य करने में व्यस्त था। बीपी सिंह बिना रेखा को देख कर बोलता है ।
बीपी सिंह-'रेखा तुम सो जाओ,में जरुरी काम कर रहा हूँ, समय लगेगा" रेखा फिर से आज मायूस हो जाती है, रेखा ने सोचा अमेरिका जाकर अपनी 22 साल की प्यास बुझाएगी, लेकिन आज फिर से बेचारी मन मार कर रह जाती है ।
रेखा-"मुझे भी नींद नहीं आ रही है, आप अपना काम कर लो,जब तक में ऊपर घूम कर आती हूँ" 
बीपी सिंह-"ठीक है रेखा घूम आओ"बीपी सिंह बिना देखे ही बोलता है, रेखा की उम्मीदें टूट चूकी थी, रेखा कमरे से निकल कर ऊपर छत पर जाती है, रेखा जैसे ही ऊपर आती है उसे सूरज खड़ा दिखाई देता है, सूरज को देखते ही रेखा चोंक जाती है। इधर सूरज भी रेखा को देख कर चोंक जाता है।
सूरज रेखा के पास आकर खड़ा हो जाता है।
सूरज-'क्या हुआ माँ,आप अभी तक सोई नहीं" 
रेखा-"नींद"रेखा बस इतना ही बोलती है ।
सूरज-"कैसा लगा अमेरिका आकर"
रेखा-"ठीक है"
सूरज-"माँ आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो,किस बात पर नाराज़ हो" 
रेखा-" नहीं! में तुझसे नाराज़ नहीं हूँ" 
सूरज-'फिर आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो,उस रात गाँव में जो हुआ में उसकी माफ़ी मांग चूका हूँ, अँधेरे के कारण गलती से हो गया"
रेखा-"मुझे उस काली रात की याद मत दिला सूरज, उस रात जो हुआ वो नहीं होना था" 
सूरज-" माँ उस दिन जो हुआ,गलती से हुआ फिर आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो" 
रेखा-"में उस रात की घटना भूल नहीं पा रही हूँ सूरज,इसलिए में बात नहीं करती हूँ,जब भी में तुझे देखती हूँ मुझे बही पल याद आ जाता है,में क्या करू सूरज?" रेखा की आँख में आंसू थे,सूरज रेखा को गले लगा लेता है।
सूरज-"माँ चुप हो जाओ,में आपको रोता हुआ नहीं देख सकता हूँ" रेखा को आज बड़ा सुकून सा मिलता है सूरज को के गले लगने से।
रेखा-" में तुझसे नाराज़ नहीं हूँ सूरज,कुछ ही समय के इस परिवर्तन को समझ नहीं पा रही हूँ,उलझ सी गई हूँ" 
सूरज-"क्या बात है माँ,कोई परेसानी हो तो मुझे बताओ" 
रेखा-"कुछ नहीं सूरज" 
सूरज-"माँ बताओ" रेखा कुछ देर सोचने के बाद बोलती है ।

रेखा-"सूरज मुझे एक बात सच बताएगा" 
सूरज-"हाँ माँ बोलो" 
रेखा-"उस रात तू उत्तेजित हो गया था मुझे देख कर"रेखा गाँव उस रात की बात छेड़ती है जब सूरज का लंड अचानक गले लगने के कारण रेखा की चूत में घुस जाता है और सूरज उत्तेजना में रेखा की गांड मसलते हुए पल भर में ही झड़ जाता है । सूरज सोचने लगता है की माँ को अब क्या जवाब दे ।
सूरज-"हाँ माँ,लेकिन इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,हालात ऐसे बन गए थे की में भी मजबूर हो गया" 
रेखा आँखे फाड़े सूरज को देखती है ।
रेखा-"कोई बेटा अपनी माँ को देख कर कैसे उत्तेजित हो सकता है" 
सूरज-" माँ आप हो ही इतनी सुन्दर,कोई आपको उस समय देखता तो उत्तेजित हो जाता"
रेखा-'क्या में बाकई में सुन्दर हूँ,मुझे देख कर कोई भी उत्तेजित हो सकता है" 
सूरज-"हाँ माँ बिलकुल हो सकता है" रेखा सोचती है की उसका बेटा उत्तेजित हो सकता है तो उसके पिता उत्तेजित क्यूँ नहीं हो रहें हैं ।
रेखा-" तेरे पापा मेरी तरफ देखते भी नहीं है,और तू कह रहा है में बहुत सुन्दर हूँ", 
सूरज-"क्या पापा आपको देख भी नहीं रहे हैं, मतलब अभी कुछ हुआ नहीं है" रेखा हैरानी से सूरज को देखती है ।
रेखा-" कुछ हुआ नहीं है मतलब,क्या कहना चाहता है" 
सूरज-"कुछ नहीं माँ,बस ऐसे ही मुह से निकल गया" सूरज शर्मा गया।
रेखा-" में जानती हूँ,तू क्या कहना चाहता था,ऐसा कुछ नहीं हुआ है, तेरे पापा को अपने बिजनेस के काम से फुरसत ही नहीं है" रेखा मायूस होती हुई बोली।
सूरज-"माँ इसमें पापा का कोई दोष ही नहीं है,आप थोडा मोर्डन कपडे पहनो,पापा खुद अपने आपको रोक नहीं पाएंगे" रेखा सूरज की इस बात पर शर्मा जाती है ।
रेखा-"मतलब मेरे कपडे ठीक नहीं है" सूरज ऊपर से लेकर निचे तक रेखा को देखता है ।
सूरज-"माँ साडी छोड़ कर मोर्डन ड्रेस पहनो,और ये बाबा आज़म ज़माने की मेक्सी को छोड़ कर हॉट और शार्ट नायटी पहनो,फिर देखना पापा कैसे आपके आगे पीछे भागेंगे" रेखा सूरज को देख कर मुस्कराई फिर शर्मा गई ।
रेखा-" मुझे शर्म आती है सूरज ऐसे कपडे पहनने में"
सूरज-"अरे माँ यहाँ अमेरिका में कैसी शर्म,आपने हेलिना आंटी को नहीं देखा,कैसे हॉट ड्रेस पहनी हुई थी,वो तो आपकी उम्र की हैं, अमेरिका में कैसी शर्म" रेखा का मूड ठीक हो गया था सूरज से बात करके।
रेखा-" तेरे सामने कपडे पहनने में शर्म आएगी मुझे"
सूरज-" मुझसे कैसी शर्म माँ,में तो आपको देख चूका हूँ"अचानक सूरज के मुह से निकल जाता है,रेखा फिर से शरमाती है ।
रेखा-"वो तो अचानक तूने गाँव में देख लिया था,बिजली चमकने की बजह से" रेखा शरमाती हुई बोली।
सूरज-"उससे पहले भी देख चूका हूँ माँ"रेखा चोंक जाती है ।
रेखा-"कब?"
सूरज-"जिस दिन आप बाथरूम में बेहोश हुई थी,और उस दिन जब हम गाडी से गाँव जा रहे थे" 
रेखा-"लेकिन उस दिन तो मैंने नायटी पहन रखी थी,फिर कैसे देखा"रेखा हैरान थी ।
सूरज-" आप गहरी नींद में सो चुकी थी,आपकी नायटी कमर पर थी" रेखा समझ जाती है उस दिन रेखा ने अपनी चूत में उंगली की थी,झड़ने के बाद ही सो गई थी।
रेखा-" ओह्ह्ह तूने लाइट जलाई थी गाडी में"
सूरज-" सॉरी माँ,आप की चीख सुनकर मैंने लाइट जलाकर देखा था"सूरज बात बदल देता है ।
रेखा-"तूने सच में देखा था"
सूरज-"हाँ माँ,लेकिन कुछ देख नहीं पाया था"
रेखा-"ओह्ह फिर तो अच्छा किया"
रेखा-"चल अब सो जा,बहुत रात हो गई है" रेखा औए सूरज दोनों नीचे आ जाते हैं,रेखा और सूरज का कमरा बराबर में ही था। रेखा अपने कमरे में जाने बाली थी,तभी सूरज रेखा को रोकता है।
सूरज-" माँ इस मेक्सी को उतार देना शायद पापा उत्तेजित हो जाएं"सूरज मुस्करा कर बोलता है। रेखा शर्मा जाती है ।
रेखा-'हट बदमाश,अपनी माँ से ऐसी बात करता है"रेखा मुस्करा कर अपने कमरे में चली जाती है,
कमरे में जाते ही उसे फिर झटका लगता है उसके पति खर्राटे मार कर सो रहे थे, रेखा बेचारी बेड पर लेट कर अपनी मेक्सी को उठा देती है, रेखा को बिना ऊँगली किए नींद नहीं आती है,यह उसका रोज का काम बन चूका है ।
रेखा जैसे ही अपनी चूत पर ऊँगली रखती है तो चोंक जाती है,उसकी चूत पहले से बहुत गीली थी,
रेखा-"(मन में) ये क्या सूरज से बात करते करते ये कब गीली हो गई"
रेखा उंगली करने लगती है तभी उसके जहन में सूरज आ जाता है और उसका मोटा लंड, रेखा जब ऊँगली अंदर बाहर करती है तो ऐसा लग रहा था जैसे सूरज का मोटा लंड चूत में अंदर बाहर हो रहा है, रेखा तेजी से ऊँगली चलाने लगती है और एक सिसकी के साथ झड़ जाती है,झड़ते समय रेखा के मुह से "ओह्ह्ह्ह ससुराज" निकलता है। रेखा सफाई करके सो जाती है ।
सुबह 7 बजे आँख खुलती है ।

रेखा की नींद सुबह 7 बजे खुलती है, बीपी सिंह फ्रेस होकर नास्ता करने नीचे जा चुका था, रेखा को रात की बात याद आती है जब वो ऊँगली करते समय सूरज को याद कर रही थी,और उसके नाम से ही झड़ गई। रेखा हैरान थी की उसने सूरज के बारे में कैसे सोच लिया, रेखा को बहुत ग्लानी महसूस होती है । रेखा के मन में सूरज का लंड पुनः आते ही झकझोरती हुई उठी और बाथरूम में जाकर शॉवर के नीचे नाहने लगी । इधर सुबह सूरज उठकर टहलने चला गया था, घर आते ही नहा कर फ्रेस हो गया। अमेरिका आकर उसे कोई काम धंधे की टेंसन नहीं थी,इसलिए अपने कमरे में आकर लेपटोप चला कर टाइम पास करने लगता है ।
इधर रेखा फ्रेस होकर नीचे डायनिंग टेवल पर आती है,घर में खाना बनाने बाली सभी नोकरानी अंग्रेजिन ही थी, उनकी ड्रेस भी शार्ट थी । रेखा आँखे फाड़े उन लड़कियों को ही देखती है।
रेखा आते ही बीपी सिंह को गुड़ मॉर्निंग बोलती है ।
बीपी सिंह-"रेखा जग गई तुम" 
रेखा-"हाँ जग गई, आप कहीं जा रहे हो क्या?" 
बीपी सिंह-"हाँ रेखा,आज जरुरी मीटिंग है,इसलिए जल्दी जाना है" रेखा उदास हो जाती है ।
बीपी सिंह-"उदास मत हो मेरी जान,बस कुछ दिन की परेसानी है,सभी कंपनी को सूरज के हवाले कर दूंगा,फिर हम दोनों हमेसा एक साथ रहेंगे" बीपी सिंह रेखा को गले लगाते हुए बोला।
रेखा-"मुझे आज आपके साथ मार्केट जाना था,कुछ कपडे खरीदने" 
बीपी सिंह-" में सूरज से बोल देता हूँ,सूरज ने यहाँ की मार्केट देखी है" रेखा सूरज के साथ शर्म की बजह से नहीं जाना चाहती थी,लेकिन अब मॉर्केट सूरज के साथ जाना उसकी मज़बूरी बन चुकी थी।
रेखा-" रहने दीजिए में फिर कभी कपडे खरीद लूंगी"
बीपी सिंह-"चली जाओ रेखा, और हाँ थोड़े मोर्डन कपडे खरीद लेना,जब तक अमेरिका में हो तब तक साडी मत पहनो" 
रेखा-"ठीक है जी"
बीपी सिंह-" में सूरज से बोल देता हूँ, हेलिना को साथ भेजता हूँ" बीपी सिंह फोन करता है हेलिना को और घर आने के लिए बोलता । बीपी सिंह सूरज को बोलता है कमरे में जाकर ।
बीपी सिंह-"सूरज बेटा तुम अपनी माँ के साथ मार्केट चले जाना" 
सूरज-"ठीक है पापा" बीपी सिंह कंपनी चला जाता है, रेखा सूरज के कमरे में आती है ।
सूरज-"अरे माँ आप आओ बैठो" सूरज बेड से खड़ा होकर स्वागत करते हुए बोला। रेखा बेड के सामने पड़े सोफे पर बैठ जाती है ।
रेखा-"तेरे पापा कुछ कह कर गए हैं क्या"
सूरज-'हाँ माँ, पापा आपके लिए कपडे खरीदने के लिए बोल कर गए हैं, मार्केट कब चलना है?"
रेखा-"जब तेरा मन हो तब"
सूरज-" माँ अभी चलें कहीं घूमने,आते समय मॉल से कपडे खरीद लेंगे" 
रेखा-" मन तो मेरा भी कर रहा है अमेरिका घूमने का, में तैयार होकर आती हूँ" रेखा जाने के लिए खड़ी होती है,तभी सूरज रोकता है ।


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