Chudai Story अनोखी चुदाई - Printable Version

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Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

अनोखी चुदाई

साथियो एक और कहानी शुरू कर रहा हूँ ये कहानी भी आपको बहुत मज़ा देगी . हम बॉम्बे में रहते थे, 65 के शुरू में और दस साल तक रहे. 
वैसे तो हम, पहाड़ी इलाक़े के रहने वाले हैं. मेरा नाम जय और मेरी बीबी का सुमन. 
भाभी, मिनी जो की चाचा की बहू है.
मिनी का हसबैंड, अमन है.

मेरी बीबी, एक बेहद सुन्दर औरत है और बहुत ही मस्त और करारी फिगर है, उसकी.
कोई मर्द देखते ही, उस की गाण्ड में घुसेड़ने की सोचे और मिनी तो पूछो मत. 
देखते ही लण्ड हुंकार भरने लगे, किसी का भी. 
एक भरपूर “सुंदरता की मूरत” है, वो.
मिनी और अमन बॉम्बे में ही रहते हैं, काफ़ी सालों से. 
मैं और अमन, दोनों ही मीडियम साइज़ के अच्छे कद काठी वाले हैं और हर बात में विचार मिलते जुलते हैं.
मेरी बीबी, एक स्कूल में टीचर है और मिनी बैंक में काम करती है. 
तो शुरू करते हैं वहाँ से जब, मैं अपनी बीबी और बीबी की भाभी यानी मिनी के साथ शॉपिंग करने के लिए बड़ी मार्केट में आए थे और काफ़ी सारी आइटम्स खरीद ली.
अब हुआ यह की हम सामान ले कर, जैसे ही चले तो बारिश शुरू हो गई.
बरसात के दिन थे और इन दिनों, बॉम्बे में कभी भी बारिश आ जाती है.
इस मौसम का लोग मज़ा लेते हैं, घूमने और भीगने का.
हम बाहर निकलने की कोशिश में थे की बारिश, बहुत ही ज़ोर से होने लगी.
अचानक, भीड़ इतनी बढ़ गई की आदमी के साथ आदमी चिपक के खड़े हो गये और चलने की बिल्कुल भी जगह नहीं थी. 
बीबी की भाभी के हाथ में दो बैग थे और मेरे हाथ में, भी दो बैग थे.
बीबी के हाथ में, एक बैग था.
दोनों ही औरतें, कमीज़ और सलवार में थी. 
मैं इन के पीछे खड़ा था और संयोग से, ऐसा हुआ की भाभी के साथ चिपक गया था.
उन दिनों “छीना सिल्क” के कपड़े पहनने का बड़ा रिवाज था, औरतों में.
दोनों ने ही, छीना सिल्क की कमीज़ सलवार पहनी थी. 
मेरी बीबी के पीछे, एक मोटा सा सांड़ जैसा आदमी खड़ा हो गया था और मैं भी थोड़ा साइड में सरक गया था, भीड़ के धक्कों से.
इधर मैं, भाभी के पीछे आ गया था की एक धक्का लगा तो भाभी की गाण्ड से चिपक गया.
मेरा लण्ड, भाभी की गाण्ड से चिपकते ही गरम हो गया पर मैं चुप चाप खड़ा रहा.
तभी एक और धक्का लगा और मैं थोड़ा सा, साइड में हो गया.

थोड़ी देर के बाद, देखा तो भाभी के पीछे भी वैसा ही एक सांड़ सा आदमी चिपक के खड़ा हो गया है.
अब बारिश तो बंद होने का नाम नहीं ले रही थी और भीड़, बढ़ती ही जा रहा थी. 
एक के ऊपर, एक चढ़ा हुआ था.
मुझे यह समझते देर नहीं लगी की मेरी बीबी की गाण्ड में, वो आदमी मौका पा कर उंगली करने की कोशिश कर रहा है. 
बीबी, थोड़ा सा तिलमिलाई पर शांत खड़ी रही.
शायद भीड़ में, तमाशा नहीं करना चाहती थी.
मैं सोचा की सलवार पतली होने की वजह से, उस की उंगली बीबी की चूत मे आसानी से रगड़ खा रही होगी. 
अब मेरा बुरा हाल था, यह सब देख कर. 
वो पहला पल था, जब ये एहसास हुआ की आँखों के सामने बीवी की गाण्ड या चूत में उंगली करे तो लंड, हुंकार भरने लगता है.
आना तो वैसे, मुझे गुस्सा चाहिए था पर आ मज़ा रहा था.
खैर, इधर भाभी की भी हालत ऐसी ही थी.
वो भी बेचारी, इधर उधर हो रही थी.
अब मैंने देखा के पीछे वाला आदमी फटा फट भाभी की गाण्ड में, उंगली रगड़ रहा है और चूत में उंगली पहुँचाने की कोशिश कर रहा है. 
क्या करें, दोनों हाथ में बैग थे.
10 मिनट के बाद भाभी, बड़ी मशक्कत से मेरे साइड में आ गई पर शायद, उसे पता नहीं था की पीछे में हूँ.

भाभी बड़ी सुन्दर तो है ही लेकिन उस की गोल गाण्ड तो और भी कहर ढाती है तो कोई भी उंगली तो क्या लण्ड भी घुसेड देगा, उस की मदमस्त गाण्ड में. 
अब हूँ तो मैं भी मर्द, लंड का मारा. 
कई दिनों से में भी सोच रहा था की उस की गाण्ड में, उंगली करूँ तो कैसे.
बहुत सोचा पर आज तक इस का जवाब नहीं मिला की अगर, अपने पति या पत्नी से वफ़ा इतनी ज़रूरी होती है तो क्यूँ पराई नर या नारी को देख कर, लंड मचलता है या चूत गिलगिला जाती है.
अब ये तो ऐसा हुआ ना मिठाई की दुकान पर बैठा दिया जाए और कहा जाए की भैया जी, खा सिर्फ़ आप शक्कर पारे सकते हो.
सवाल तो ये भी कोई आपकी बीवी की गाण्ड में उंगली करे तो आपका खून खौलना चाहिए या लंड.
चलो जो भी हो, मौका था. 
इसलिए मैंने धीरे से, भाभी की चूत में उंगली डालने का ट्राइ कर लिया. 
उस समय, मुझे यकीन था की भाभी को नहीं पता था, पीछे कौन है. 
पता नहीं चल रहा था, भीड़ में कौन है.
शाम के सात, बजने जा रहे थे. 
मैंने सोचा, क्यूँ ना चान्स ले लूँ और देखूं की आगे क्या होता है.
अब बाहर का भैंसा सा आदमी मज़े ले रहा है तो मैं तो घर का ही हूँ.
इसलिए, मैं भी उंगली फिराने लगा और फिर रगड़ने लगा. 
कुछ ही पल में, उंगली तो सीधे उस की चूत से टकराई जो की अब तक गीली हो गई थी. 
जब मैंने उन्हें देखा था तो ऐसा लग रहा था की वो उस सांड़ से आदमी से परेशान हो रही हैं पर यहाँ तो चूत पनिया रही थी.



RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

अब क्या बोलूं, मेरा लंड भी तो मचल गया था अपनी धर्म पत्नी की गाण्ड को मसलते देख.
गौर ज़रूर कीजिएगा, मेरे सवाल पर जो मैंने उपर पूछा.
मर्दों का ही लंड नहीं औरतों की चूत भी मचल ही जाती है. 
कारण जो भी हो या मर्द जो भी हो.
खैर, गीली चूत का एहसास होते ही मैंने उंगली अंदर तक घुसेड दी. 
पैंटी तो शायद उन दिनों पहनी नहीं जाती थी. 

सिल्क के हल्के से कपड़े से, फ़ौरन ये एहसास हो गया बहुत गरम थी. 
“भाभी की चूत.”
अब समझा वो मोटा सांड़ सा आदमी, उस की चूत में ही फिंगरिंग कर रहा था. 
भाभी नीचे चड्डी तो पहनी नहीं थी, सलवार भी लगता था की या तो फटी हुई है या फिर छोटा सा होल है. 
किस्मत मस्त थी, जो मस्त तरह से उंगली चूत के अंदर बाहर हो रही थी.
सटा सट सटा सट.. ..
हाय!! उंगली पर बहता चूत का पानी, इससे मस्त कुछ उंगली पर लग ही नहीं सकता. 
उधर, मेरी बीबी की हालत भी और खराब लग रही थी और वो बड़ी मशक्कत से मेरी तरफ देख रही थी की जैसे, मैं उसकी मदद करूँ. 
अब ये समझना मुश्किल था की वो भी सही में परेशान है या उसकी चूत भी पनिया रही है.
दोनों की चूत में अच्छी तरह से, फिंगरिंग हो रही थी. 
मैंने भी सोचा, मज़ा लेने दो और देखते रहो, जो हो रहा है.
लेकिन फूटी किस्मत, भाभी वाला वो मोटा आदमी फिर भाभी के पीछे आ गया मुझे बड़ी चालाकी से धीरे से धक्का दे दिया. 
मैं चुप रहा और देखने लगा, तिरछी नज़रों से.
अब ये तो कह नहीं सकता – साले सांड़, मुझे मज़े लेने दे…
खैर, मेरी नज़र नीचे ही थी. 
वो मोटा, अब और अच्छी तरह से उंगली करने लगा. 
भाभी ने धीरे से, मेरी तरफ देखा तो मैंने आँख मार दी.. जैसे, कह रहा हूँ की मज़े कर लो.. 
लगभग 10 मिनट के बाद, बारिश थोड़ी बंद हुई तो भागे सब घर की तरफ. 

मैंने भाभी को कहा – आज कल, लोगों को शर्म भी नहीं आती है… 
तो उन्होंने, पहले मुझे ऐसा देखा जैसे मैंने उनकी कोई चोरी पकड़ी हो.
उस प्रतिक्रिया को, मैं समझ नहीं पाया.
वैसे औरत को तो भगवान भी नहीं समझ पाया.. मैं अदना सा, इंसान क्या हूँ.. 
खैर, कुछ देर बाद भाभी ने कहा – ऐसा ही होता है, हमारे देश में… मनचले आदमी, कोई मौका नहीं छोड़ते ऐसी भीड़ में… ऐसे चिपक चिपक कर खड़े हो जाते हैं, जैसे गुड से मक्खी चिपक गई हो…. शरीफ औरतों का ये हाल तो बॉम्बे में आम दिनों में भी होता रहता है, भीड़ भाड़ वाली जगहों पर… पर आज कुछ ज़्यादा ही हो गया… 
ये कहते ही, भाभी ने मेरी तरफ देखा.
बाहर आए तो बारिश फिर लग पड़ी, ज़ोर से और हम काफ़ी भीग गये. 
पानी कपड़ों से होते हुए, पैरों में निकलने लगा था.
मेरी बीबी और भाभी, दोनों ही बुरी तरह से भीग चुकी थीं और मैं भी. 
उन दोनों के कपड़े, पूरी तरह से बदन से चिपक गये थे. 
मैंने भाभी को, मज़ाक में कहा – अच्छी तरह से सफाई हो गई आज, बारिश में… बहुत मस्त लग रहीं हैं, आप दोनों ही…
तो वो बोली – अरे यार, पूरी ऊपर से नीचे तक ठंड लग गई… 
मेरी बीबी बोली – ठीक तो है ना, भाभी… अब और नहाना नहीं पड़ेगा….
दोनों की ही गाण्ड, एक दम से साफ़ दिखाई दे रही थी. 
चलते हुए, दोनों की “गाण्ड की फाँकें” अलग अलग हो रही थीं. 
दोनों ही, बार बार गाण्ड में घुसी हुई सलवार को बाहर खींच रही थीं.
देखने वालों को तो मज़ा आ रहा था, पर क्या कर सकते थे. 
मैं तो खुद ही, उनके पीछे पीछे चल रहा था.

एक और सवाल यूँ ही मन में आया, जब हम चुदाई करते हैं तो गाण्ड या दूध की खूबसूरती का खुल के मज़ा नहीं ले पाते.
गाण्ड की असली खूबसूरती देखनी है तो चलती हुई, औरत की नंगी हिलती हुई गाण्ड की देखो.
जब सिल्क के सलवार में चिपकी गाण्ड, इतनी मस्त लगती है तो नंगी लड़की चले तो आह !!!
हैं ना बात में, “दम.”
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने बीबी को धीरे से बोला – आज़ बहुत मनचले तुम्हारी दोनों की गाण्ड देख कर, ज़रूर मूठ मारेंगे… 
कमीने और हरामी टाइप के स्वाभाव से, मेरी भोली भाली बीवी भी थोड़ा मुझसे खुली हुई थी.
शादी के एक महीने के अंदर ही, मैंने उसको चूत, चुदाई यहाँ तक की गालियाँ भी सीखा मारी थी.
हमारे बीच, शराफ़त का कोई परदा नहीं था.
दोनों मियाँ बीबी, बिंदास जीते थे.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

सो, उसी बिंदास अंदाज़ में वो बोली – मारने दो ना… तुम्हें क्यूँ दुख हो रहा है… अभी मेरी नहीं, भाभी की गाण्ड के मज़े लो… मेरी तो कभी भी, फ़ुर्सत से नंगी देख लेना… 
मैं – आज़ तुम दोनों की गाण्ड बच गई, भीड़ में मरने से… पर मेरे से नहीं बच पाएगी, आज़… 
मेरी पत्नी – तुम्हारी है, जब चाहो दिल भर के मार लेना… लेकिन भाभी की कैसे मरोगे… आज तो बड़ा मचल रहा होगा… 
वो थोड़ी पीछे हुई और भाभी की गाण्ड देखी.
पूरी गाण्ड, साफ़ नज़र आ रही थी.
उफ्फ!! क्या मस्त लगती है, चलते वक़्त “लगभग” नंगी गाण्ड.
दोस्तो, ज़रूर देखना.. 
अपनी बीबी को, नंगी चला के.. 
गाण्ड देखते ही, मेरी बीबी मुस्कुराइ और बोली – यार, मस्त है भाभी की तो… तुम्हारा तो मचल रहा होगा… इसलिए पति परमेश्वर पीछे पीछे चल रहे हैं… लगाओ, कोई जुगाड़ लेने की… मज़ा आ जाएगा…
अब मैंने कहा – मेरे पर छोड़ दो… बस तुम, मेरी मदद करना… 
मेरी पत्नी – अरे, जैसा तुम बोलो जान… बस शर्त यही है आज ही पेलना होगा… आज़ बहुत गरम भी हो रही होगी, बारिश के ठंडे पानी में भीग कर… जो बोलो, मैं करूँगी… 

तभी भाभी पीछे मूडी और बोली – क्या बातें हो रही हैं, तुम दोनों पति पत्नी में…
मेरी बीबी, आँख मारते हुए बोली – रात का प्रोग्राम बना रहें हैं… और ज़ोर से हंस पड़ी… 
या तो भाभी समझ गई या नहीं, पर वो बोली – भाई, मुझे भी प्रोग्राम में शामिल कर लेना…
मेरी पत्नी – ज़रूर क्यों नहीं… तुम्हारे बिना तो प्रोग्राम अधूरा ही रह जाएगा… 
फिर, दोनों हंस पड़ी. 
बाकी रास्ते भर, दोनों के बीच खुसुर फुसुर और हँसी ठिठोली होती रही.
खैर, फिर हम घर पहुँचे कर कपड़े चेंज करने लगे.
खुले तो हम खैर, पहले से बहुत थे.
नहीं, मेरी बीबी ने भाभी को खोल तो खैर बहुत पहले से ही दिया था.
लेकिन आज ना जाने रास्ते में, उसने ऐसी क्या खिचड़ी पकाई की भाभी, तिरछी और मादक निगाह से मुझे देख रही थीं.
एक बात और, अब या तो मेरा वेहम था पर बीवी और भाभी की खुसुर फुसुर के कुछ देर बाद भाभी की गाण्ड बाकी रास्ते, कुछ ज़्यादा ही मटकने लगी थी.
अगर, कोई मौका था तो बस आज.
सो, मैंने फिर से चान्स मारा.
भले ही, बीबी से अभी बात नहीं हो पाई थी पर शायद हमारा आपस में ताल मेल, इस पूरी दुनिया के किसी भी पति पत्नी से बेहतर था.
तो, मैंने इशारों को समझा और डाल दी नौका, यौवन की नदी में. 

आख़िर भाभी को मैंने कहा – ऐसा पहले भी कोई तजुर्बा हो चुका है, क्या… 
भाभी बोली – बहुत बार होता है, ऐसे… बॉम्बे में यह नॉर्मल है… 
फिर थोड़ा पास आई और दाँत से होंठ काटते हुई बोलीं – कभी बस में तो कभी मार्केट में… उंगली करना… चू… … में… 
“चू” बस ये एक शब्द काफ़ी था.
बीबी ने जो भी किया पर अपना काम कर दिया था. 
अब बारी, मेरी थी.
बातें और शेखी, हमने आपस में कितनी भी मारी हो पर शादी के बाद ये पहला मौका था, जब हमारे पंचाट हक़ीकत का रूप लेने वाले थे. 
भाभी, अभी अकेली थी. 
मैंने पूरी हिम्मत को बटोरा और कहा – भाभी, एक बात बताओ… आप नीचे चड्डी नहीं पहनती…
वो बोली – आप ने भी चान्स ले लिया… लगता है… 
इसके बाद, भाभी ने जिस तरीके से अपनी जीभ अपने होंठ पर फिराई, मैंने सच बोलना ही सही समझा.
मैंने कहा – अब भाभी, मोटा सांड़ जैसा आदमी बार बार उंगली कर रहा है… मैं तो घर का हूँ और कम से कम, उससे तो अच्छा ही हूँ… 
बो बोली – मुझे पता चल गया था… 
मेरे हाथ को पकड़ कर, मेरी उंगली पकड़ते हुए वो बोली – तुम्हारी फिंगर पतली है और उस गैंडे की बहुत मोटी थी… देख सके या नहीं, औरत सब पकड़ लेती है… मैं समझ गई थी, आप ने भी आख़िर में .. .. घुसेड ही डाली, अपनी उं ग ली… मेरी “चू” में… वैसे, कैसा लगा था… आप को… 
मैं – बहुत गरम… अंदर से चिप चिपाई हुई थी… मेरी उंगली गरम हो गई थी… मैं तो उस आदमी पर गुस्सा हो रहा था… साला, हट ही नहीं रहा था…
भाभी – और अगर हट जाता तो आप क्या कर लेते… ??

अब मैं थोड़ा शर्मा गया और बोला – क्या करता… मैं भी उंगली करता और क्या… 
एक बात लिख लो दोस्तो, अगर औरत बेशर्मी पर आ गई तो अच्छे से अच्छे मर्द को चुटकी बजाते नंगा कर देती है. 
भाभी – थोड़ी देर और बारिश नहीं रुकती तो भो मोटा आदमी उंगली की जगह… … … अपना… … मो .. टा … “ल” .. .. “न” .. डालने की फिराक में था… क्यों की… उसका “ल” .. .. “न” .. मेरी “गा” .. .. “ड” (ये कहते हुए मतलब ल .. न और ग .. न, जिस तरह भाभी के होंठ घूम रहे थे काश मैं आपको ब्यान कर पता.) की दीवारों के अंदर घुसे जा रहा था…
मैं (धीरे धीरे बिंदास होता जा रहा था) – क्यूँ हाथ में पकड़ा था क्या, उसका – ल न .. … ड… 
तो तुरंत आँख मारते हुए, बोली – हाँ, बड़ा… मो .. टा और लम बा लगा था, मुझे… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

मेरी बीबी, हमें पूरा वक्त दे रही थी.
मैंने पूछा – भाभी की कभी ऐसा एक्सपीरियेन्स हुआ है, पहले आप के साथ क्या… ?? आप तो बॉम्बे में ही रहती हैं, काफ़ी दिनों से…
वो बोली – एक बार हुआ है, ऐसा… वो भी मार्केट के अंदर वाली, तंग गली में… और तो और, बारिश के टाइम में ही… उस टाइम में, अपने हसबैंड के साथ थी और बहुत भीड़ हो गई थी… फिल्में देख देख कर, मुझे स्कर्ट पहनने की आदत थी, शुरू में… अमन (उसका हसबैंड) ने कहा भी था की मार्केट में जाने पर स्कर्ट मत पहना करो… मैं नहीं मानी, कहा – क्या फ़र्क पड़ता है… ?? कोई ऐसे थोड़े ही अंदर डाल देगा… अमन बोला – तेरी मर्ज़ी है, बाद में मत कहना मुझे… यह बॉम्बे है, यहाँ मुस्टंडे हाथ मे “ला..” मेरा मतलब है, अपना हाथ में ले के घूमते हैं… उस मार्केट में से, हम ने भी समान वगेरह लिया और फिर चल पड़े… बारिश का ही टाइम था, उन दिनों भी… भीड़, काफ़ी बढ़ गई… यहाँ तो कुछ आदमी, ऐसे टाइम का फ़ायदा उठाने के लिए ही घूमते हैं… बड़ी हिम्मत होती है, बन्दो में… किसी की “चू..” में तो किसी की “गा..” में उंगली कर देते हैं… वैसे पब्लिक में सीधा “ल..” “चू..” में डालना तो बहुत ही हिम्मत का काम है… (अभी भी उसके होंठ “चू..” “ल..” और “गा..” बोलते हुए, एकदम कातिलाना अंदाज़ में घूम रहे थे. जो मुझे ज़रूरत से ज़्यादा चिढ़ा और उकसा रहे थे.) मेरे पीछे, बहुत से आदमी थे… अचानक, एक काले से आदमी ने बड़ी ही चालाकी से, अमन को साइड में धकेल दिया… सांड़ सा था, देखने में पर उस की हिम्मत की तो दाद देनी पड़ेगी, मुझे… उस ने धीरे से स्कर्ट में नीचे हाथ डाला और मेरी चड्डी धीरे से साइड में कर के, अपनी उंगली मेरी “चू..” पर रखी और धीरे धीरे, टिकलिंग करने लगा… मेरे पास, इधर उधर होने की जगह नहीं थी… सो, मुझे पहले तो बड़ा गुस्सा आया पर क्या करती… चुप रह गई… अमन ने पहले ही कहा था, ड्रेस के बारे में… स्कर्ट मत पहनो… जल्दी ही, मुझे भी मज़ा आने लगा… चूत तो चूत है… अपना, पराया, छोटा, बड़ा, मोटा, पतला, काला, गोरा यहाँ तक की, रिश्ते नाते भी नहीं समझती… और तो और, ससूरी, ये भी नहीं देखती घर है या बाहर… ये भी नहीं सोचती की सुनसान नहीं, भीड़ भाड़ है… बस उंगली लगती नहीं की मचलना शुरू हो जाती है… वो आदमी भी बहुत चालू था क्यूंकी उस की नज़र बराबर केसू की साइड थी… और इतना शांत खड़ा था की पीछे मुड़ने पर, उस पर कोई शक ही ना हो… लगता था, उसका रोज़ का ही ये काम है… शाम के 8 बजने को थे, भीड़ बहुत ही ज्यादा बढ़ गई था… जब मैंने, कोई गुस्सा या प्रतिक्रिया नहीं दी और मेरी निगोडी चूत ने आ आन म म्मेरा मतलब “चू..” ने अपना “चुड़ द कड़ प ना..” दिखा दिया, अपना जूस उसकी उंगली को पीला कर तो वो आदमी मेरे साथ, एक दम से चिपक गया और जब उस ने महसूस क्या की मेरी “च च चू..” बहुत ज़्यादा ही गीली हो गई है तो पूरी उंगली अंदर कर दी… मैंने अपनी “गा..” पीछे कर के भींच दी और वो, इशारा समझ गया… कोई 2 3 बार अंदर बाहर करते ही, मेरी चू में दबाब बढ़ गया और और टंकी लीक हो गई… (उनमह…) अब उस आदमी ने तो फिंगरिंग बंद कर दी और ना जाने से, कैसे धीरे से अपना लंबा सा निकाल कर मेरी “गा न..” के नीचे रगड़ना शुरू कर दिया और अपने “ला न..” का टोपा, मेरी “चू ह त ह” (इश्स) को टच कराने लगा…
कुछ देर बाद, वो चूत में अंदर करने की कोशिश करने लगा… जब मैंने यह महसूस किया तो मेरे तो होश ही उड़ गये की यह भीड़ में क्या कर रहा है… तब मैंने सोचा की यह हरामी मानने वाला नहीं है… भरी पब्लिक में, बेइज़्ज़ती हो जाए इससे अच्छा है, जल्दी जल्दी चूत को ठंडक पहुँचा लूँ… और मैंने थोड़ा सा झुक के पीछे को धक्का मारा, जिससे उस का पूरा “ला” सररर से अंदर घुस गया… 
अब मैं बोल पड़ा – बस करो ना, भाभी…
भाभी – क्या… ??
मैं – ये “ला” “चू” का नाटक… इतना सुनने के लिए तो मैं कभी नहीं तडपा…
भाभी – सच्ची… क्या सुनने के लिए… ??
मैं – आपके मुँह से “चूत और गाण्ड”… अब बस भी करो ना, प्लीज़…
भाभी – ठीक है, बाबा… तो फिर, हाँ… उस का “ला न ड” मोटा “लू न ड” (उन्म इश्स) लौ डा भी ऊपर से गीला था सो सीधा ही, अंदर घुसता चला गया… मेरी “चू त ह” में… चिकनी चूत में… (आहस्स) 
मैं – ओह!! भाभी… सरे आम…
भाभी – हाँ… सरे आम… बीच बाज़ार… कम से कम, 200 लोगों के सामने… मेरी चूत की चुदाई हो रही थी… (आह हह)… फिर वो धीरे धीरे, धक्के मारने लगा, उस भीड़ में ही… यह मेरे पति को पता नहीं चला, शुरू में… लेकिन फिर अमन समझा की कुछ तो चल रहा है, इन दोनों में… कितने ही धीरे हो, हिल तो हम रहे ही थे… लेकिन तब तक वो मुझे चोद चुका था… क्यों की हरामी का लंड भले ही मोटा था पर 5 – 10 मरियल से धक्कों में ही भर दी, मेरी चूत अपने पानी से… मुझे अजीब सा लग रहा था, चिपचिपि हो रही थी, चूत… पर क्या करती… सब मेरी चड्डी में ही टिप टिप कर रहा था… कुत्ते की हिम्मत देखो, चलते हुए उस ने कहा – मेडम जी, मज़ा आ गया… 
मैंने कहा – कुत्ता, कहीं का… निकल, चुपचाप… 
अमन ने पूछा, रास्ते में – क्या हो रहा था और क्या कर रहा था, वो आदमी…

मैंने कहा – क्या होना था… फिंगरिंग कर रहा था, मेरी चूत में… 
उस ने कहा – वो तो होना ही था… लण्ड तो नहीं घुसेड़ा ना, अंगुली तक तो ठीक है… 
मैंने कहा – कोशिश कर रहा था, लेकिन पूरा नहीं गया… 
इस पर अमन ने कहा – मोटा था क्या, जो अंदर नहीं गया…
मैंने कहा – इतना मोटा नहीं था, लेकिन लंबा काफ़ी था… फिर तो तू पक्का चुद कर आ रही है… 
अमन भी मज़े लेने लगा था, मेरी बातों से… 
मैं – भाभी, एक बात तो बताओ… आप अमन से, ऐसी सब बातें कर लेती थीं…
भाभी – तो तुझे क्या लगता है, बस तू ही अपनी बीबी के साथ जिंदगी के मज़े ले सकता है…
मैं – नहीं नहीं, भाभी… ऐसा नहीं है… मैं तो बस…
भाभी – अब आगे बता दूं… या पप्पू ने उल्टी कर दी… 
मैं – अरे, नहीं नहीं… पप्पू तो सिर उठाए, सलामी दे रहा है…
भाभी – तो फिर अमन बोला – सच बताओ, मुझे… 
मैंने कहा – बहुत जल्दी है तो सुनो, पूरा अंदर तक घुसेड दिया था, जड़ तक… एक ही धक्के में और फिर हिला हिला के मुझे चोदा… उस के लण्ड का पानी, अब तक भी मेरी चूत में है और चिप चिप हो रहा है… 2 फीट दूर खड़े तुमको कुछ पता भी नहीं चला… भरे बाज़ार, नंगे लंड से चुदि तुम्हारी बीबी… अब घर चल के चुपचाप मूत की धार लगा देना, मेरी चूत में… 
अमन – मिनी, तू है ही ऐसी चीज़ जो भी देखता है अपने लण्ड पर हाथ फेरने लगता है… पर ये बात ग़लत है, मेरे सामने तो कभी चुदि नहीं… अकेले मज़े लेकर आ गई… ऐसे नंगे लंड से बिना प्रोटेक्शन के चुदना सही नहीं, जानू… मूत तो मैं दूँगा पर अकेले, कभी ऐसा मत करना… ठीक कपड़े पहन कर ही बाहर जाना… ये बॉम्बे है और यहाँ बहुत से डांस बार और कई रंडीखाने हैं… भरे बाज़ार चोदने वाला आदमी, कोई शरीफ तो होगा नहीं… चल, जो हुआ सो हुआ… आगे, ऐसा नहीं होना चाहिए… सड़क की कुतिया मत बन, बनना है तो “चुदाई की रानी” बन… मज़े ले, कोई मनाही नहीं… पर सुरक्षा पहले… एक तो तूने नंगा लंड लिया और उपर से भरे बाज़ार… जान, मैं तो हर हाल में तेरे साथ हूँ… पर लगता है, तुझे ही मुझ पर भरोसा नहीं…
मैं – ऐसा नहीं है, जान… बस मुझे चूत से टपकते उसके पानी से गुस्सा आ रही थी… मुझे माफ़ कर दो… तुम सही हो… पर क्या करती, शोर तो मचा नहीं सकती थी… सो मज़ा ही करना पड़ा… यह शुक्र था की मोटा, असल में बस दिखने भर का था, दो पल नहीं रोक पाया… नहीं तो फाड़ देता, मेरी चूत को… 
घर पहुँचे तो अमन ने फटा फट कपड़े उतारे, दो तीन ग्लास पानी पिया और कहा – आज मैं, तुझ को सबक सिखाता हूँ… मेरे कपड़े खींच कर उतार दिए और अपने लण्ड को दो तीन बार हिला कर, मेरी चूत पर अपनी गरम गरम धार लगा दी… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

अब मैंने, भाभी से पूछ ही लिया – भाभी, ये मूतने का क्या चक्कर है… ??
भाभी बोलीं – क्या, तुझे नहीं पता… मूत असल में “एंटीसेप्टिक” होती है… अगर कभी नंगे लंड से चुदना पड़े… तो मर्द को औरत से और औरत को मर्द से मूतवाना ज़रूर चाहिए…
मैं – पर ये आपको, कैसे पता… ?? 
भाभी – बताया था, अमन को एक रंडी ने… बिना कॉन्डोम के पैसे ज़्यादा लिए थे और मुतवाने की शर्त रखी थी… तब अमन ने कारण पूछा तो उसको उस रंडी ने बताया… 
मैं – ज़रूरी नहीँ, वो सच कह रही हो… रंडिया तो ना जाने, कितने लंड खाती हैं…
भाभी – तुझे मानना है तो मान ले, नहीं तो तेरी मर्ज़ी… अभी, ज्ञान मत ले… आगे सुनना है… 
मैं – हाँ भाभी… छोड़ो, वो सब… आप आगे बताओ…
भाभी – मूत कर, उसने अपने लंड पर थूक लगा कर मुझे घोड़ी की तरह बेंड किया और अपना लण्ड मेरी चूत पर रख कर ज़ोर का धक्का मारा की पूरा का पूरा जड़ तक अंदर घुस गया… फिर उसने बाहर निकाला और बिना पूछे ही, मेरी गाण्ड में पूरे ज़ोर से घुसेड दिया… ऐसा लगा की जैसे, गरम लोहे का डंडा डाल दिया हो… मैं चिल्लाती रही पर उस पर कोई असर नहीं हुआ… वो उस दिन, थोड़ा गुस्से में था… मैं कुछ नहीं कर सकी और चिल्लाती चिल्लाती, गाण्ड मरवाती रही… वैसे भी औरत की गाण्ड, सज़ा देने के लिए ही मारी जाती है… 
गाण्ड मारने के बाद, वो बोला – अब, ठीक है ना… उस आदमी का माल तो तेरी चूत से मूत के मैंने धो दिया… 

मैं अमन को कभी कभी ही गाण्ड मारने देती थी पर आज तो मज़बूर थी और उसे मौका मिल गया, मेरी गाण्ड मारने का.
सही बात तो ये है की उसका गुस्सा, गाण्ड मारने के लिए ही था…
फिर वो बोला – बहुत टाइट है, तेरी गाण्ड जानू… मज़ा आ गया… अगर अब तूने मार्केट जैसा काम फिर क्या तो मैं तेरी गाण्ड मार मार कर चौड़ी कर दूँगा… पंजाबी औरतों जैसी… 
उस दिन, पूरा दिन गाण्ड में दर्द रहा.
गाण्ड की शेप बिगड़ने के डर से उस दिन के बाद, मैंने वैसे कपड़े डालने बंद कर दिए और कमीज़ सलवार में ही बाहर जाती हूँ… लेकिन, यह लोग तो उस में भी नहीं छोड़ते, बस चान्स मिले तो सही… पर जय, आज तो बच गयीं हम दोनों ही… नहीं तो यह तो मोटे लण्ड वाले थे… फाड़ डालते… मुश्किल हो जाती, खड़े खड़े चुदना पड़ता और लोगों को भी कहीं अगर पता चल जाता की चुदाई हो रही है तो बड़ी मुश्किल में फँस जाती… बॉम्बे तो “माया नगरी” है… यहाँ तो तमाशा बहुत देखते है, लोग… आप को पता ही है की चुदाई तो आम है यहाँ… जहाँ जगह मिली नहीं की चढ़ गये… बस खड़े हैं, लण्ड ले कर… 
इतने में, मेरी घर वाली आ गई. 
बाथरूम से और भाभी चली गई, फ्रेश होने. 
मैं तो हैरान था, इतने वक़्त बेचारी ने किया क्या बाथरूम में.
आते ही और भाभी के जाते ही, उसने पूछा – क्या हुआ… ?? बात बनी… मैं तो सोच रही थी, तुम्हारा सीन चल रहा होगा… 
मैं – नहीं यार… बातों में ही, वक्त निकल गया… सॉरी…
घरवाली – अरे भोंदू महाराज… क्या तुम भी…
मैं – कोई बात नहीं… तुमने चिंगारी तो लगा ही दी है… जितना लोहा गरम हो, उतना ही अच्छा… 
घरवाली – यार, अच्छा मौका था आज… हुआ क्या… ??
मैंने कहा – खुल तो पूरी तरह गई है… पर अपनी आप बीती सुना रही थी… भीड़ में चुदने की… अच्छा, बहुत भीड़ थी, आज… तुम्हारा, कैसा रहा भीड़ में… बताओ ना… ??

वो बोली – क्या करती, यार… अच्छी बात यही हुई की उस ने अपना लण्ड नहीं घुसेड़ा… अपनी फिंगर से ही काम चला लिया… मैंने चड्डी नहीं पहनी थी, आज और मेरी सलवार भी नीचे से फटी हुई है… उस गैंडे की मोटी उंगली, छोटे लण्ड की तरह ही तो थी… सीधे चूत में ही जा रही थी और मैं भी गर्म हो रही थी… अब 10 मिनट से आगे पीछे कर रहा था, फिंगर को… मेरी चूत भी पानी से भर गई थी… हरामी, इस तैयारी में था की अपना डंडा अंदर कैसे कर दूँ… मैंने अपने हाथ पीछे किया तो पता चला की उस का लण्ड खड़ा है… मैं घबरा गई थी की अगर ऐसा करता है तो बड़ी मुश्किल होगी, इतना बड़ा घुसेगा कैसे… वो तो बारिश बंद हो गई, नहीं तो हम दोनों ही आज चुद चुकी होती… 
मैं – उधर भाभी की भी यही कहानी थी… चलो, तुम भाग गई… नहीं तो आज दो दो मर्द भरे बाज़ार चोद देते… 
घरवाली – दूसरा कौन… ??
मैं – यार, मैं अब चुप थोड़ी खड़ा रहता तुम्हारी चूत चुदते देख… मेरा तो फट ही जाता… 
घरवाली – हे भगवान… ये मेरा मर्द, पूरा बाबरा है…
मैं – तुम्हें मालूम है… हम तो सिर्फ़ बातें करते हैं… भाभी ने तो भीड में मरवाई है, अपनी चूत… और अमन भाई ने भी बहुत रडियों को चोदा है…
घरवाली – हाय, सच में… तुम कब चोदोगे… ?? 
तब तक, भाभी आ गई. 
मुझे समझ आ गया, मेरी बेचारी घरवाली ने कितनी देर बाथरूम में बिताई, सिर्फ़ मुझे मौका देने के लिए. 
फिर मैंने कहा – चलो, चाय पीते हैं… बनाओ, जल्दी से… 
दोनों ही चली गईं और किचन में दोनों बातें करने लगीं. 
बीबी बोली – ना बाबा ना… यह लोग बेशर्म थे… दूसरे के बीबी को तंग करतें हैं… 
भाभी बोली – मैंने तो चड्डी भी नहीं पहनी थी… नहीं तो आज़ खड़े खड़े ही चूत का छाबडा बन जाता… 
मेरी बीबी बोली – अपने कभी ऐसे मौके का फ़ायदा नहीं उठाया… लगता है की खूब मज़ा आ रहा था, उस की उंगली से… 
भाभी बोली – इतनी देर से बो सांड, आगे पीछे जो कर रहा था… चूत पानी पानी हो गई थी… मज़ा तो आना ही था… यार, कभी फ़ुर्सत में बताउंगी तुझे फ़ायदा उठाया की नहीं… वैसे एक बात बता, तू इतनी देर बाथरूम में क्या कर रही थी…
मेरी बीबी – आपकी चुदाई का इंतज़ार… बीच में आती तो तीनों मज़े लेते… पर मैं तो देखती हूँ की आप मस्त बतिया रहे हो…
भाभी – समझ तो मैं गई थी पर क्या करूँ, इतना उकसाया जय को पर उसने कोई शुरूवात ही नहीं करी… अब सीधे टाँगें खोल के तो बोल नहीं सकती थी ना की चोद मेरी चूत…
दोनों हँसने लगी… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

बीबी बोली – आज तो मेरा भी बहुत मन था… दोनों साथ में चुदती… हाय!! मेरी चूत में तो इतना भार लग रहा है, जैसे पत्थर रखे हो… उस साले ने भी अंदर तक उंगली डाल दी थी और आगे पीछे फटा फट कर रहा था… दो तीन बार तो मैंने महसूस किया की उस का लण्ड गाण्ड पर टच कर रहा है… मैं डर गई थी, कही रगड़ना शुरू ना कर दे… मेरा एक हाथ खाली था, सो थोड़ा मैंने पीछे किया तो पता चला की उस का डंडा खड़ा हुआ है… वो भी समझ गया था, इस को पता चल गया है… इन मर्दों का कोई भरोसा नहीं… जय तो इतना मरते हैं, मेरी चुदाई देखने को की डर लगता है कहीं कभी मेरे कपड़े ही ना फाड़ दें, किसी के सामने…
भाभी बोली – मज़ा तो तुझे भी बहुत आएगा, बन्नो… पति के सामने, जब किसी और मर्द को नंगा बदन दिखाएगी… इससे ज़्यादा मज़ा, शायद जिंदगी में कुछ नहीं… अपनी चूत मरे और अपने पति मज़े लें… तुझे मज़े नहीं आ रहे थे, जब जय वही था और पीछे से तेरी चूत में उंगली हो रही है… 
बीवी – भाभी… मज़ा तो आ रहा था पर बंद कमरे में होता तो अच्छे से होता… मेरी तो चूत फटी जा रही है, सोच कर… मूत कर आती हूँ…
भाभी – यहीं मूत ले… ये ले ग्लास… मैं भी तो देखूं, चूत से निकलती हुई मूत, कैसी लगती है… अपनी तो दिखती नहीं…
बीबी – क्या भाभी… आप भी… ऐसे ही देखो, मैं ग्लास में नहीं मूत सकती…
भाभी – चल तो मेरे मुँह में तो मूत सकती है… अमन की तो बहुत चखी है… ज़रा अपनी जमात की भी तो चखूँ… 
मेरी बीवी ने साड़ी उठाई और भाभी, उसकी चूत मसलने लगी.
दो पल नहीं लगे और मेरी बीबी की धार निकल गई और भाभी, पूरी की पूरी मुँह खोल के पीने लगी.

भाभी – मज़ा आ गया, यार… मूत है या एसिड… बड़ी कुत्ती चीज़ है ये चूत की आग… जितना मज़ा लो, उतना ही कम है… मुझे तो इंतजार है जब अपन दोनों, जय के मुँह में मुते… (अन्महह..)
बीवी – भाभी, अब मत आग लगाओ ना ज्यादा…
भाभी बोली – आज, जय तो यह सब देख रहा था… मैंने उन की तरफ देखा तो उसने इशारा किया की खड़े रहो… अब क्या कर सकते हैं…
दो लड़कियों को एक दूसरे के ऊपर मूतता देख, मेरा लंड हिलोरे मारने लगा था.
यून्हीं ही दिमाग़ में आया, क्या खूबसूरती बक्शी है ऊपर वाले ने लड़कियों को.
इनकी हर चीज़ देखने में, अपना ही मज़ा है.
खाने के बाद, हमने सोने का प्रोग्राम बनाया.
अब तो हम बहुत खुल गये थे सो कोई प्राब्लम नहीं थी. 
लेकिन फिर भी, मैंने बीबी को बोला – तुम दोनों सो जाओ… मैं अकेला सोता हूँ… 
भाभी तुरंत बोली – नहीं… तुम दोनों, साथ में सो जाओ… मैं अकली सोती हूँ… रोज़ सेब खाने से, डॉक्टर की ज़रूरत नहीं पड़ती… और आज तो दोनों सेब, इतने पक गये हैं की तुमने नहीं खाए तो सड़ जाएँगें… 
भाभी का इशारा, मेरी बीबी के “मम्मे” की तरफ था.
फिर लगभग एक घंटे बाद, मैं बीबी के ऊपर चढ़ गया. 
उस ने खुद ही, सलवार खोल दी और तुरंत नंगी हो गई. 
थोड़ी चुम्मा चाटी और सेब खाने के बाद, चुदाई शुरू हो गई.
बड़े लोगों की कहावत थोड़ी अलग हो जाती है –
“एक चुदाई का दौर रोज़ करो और डॉक्टर को बाइ बाइ करो !!”
फ़चा फ़च की आवाज़, आने लगी थी. 
बीबी की चूत से रस धार बह रही थी, जो चुदाई का मधुर संगीत पैदा कर रही थी.
और इधर मैं, जानमुझ कर थपा ठप कर रहा था.
भाभी हमारी आवाज़ और बातें सुन रही थीं.
मैंने अपनी बीबी से कहा – भाभी सुन रही हैं, हमारी आवाज़… 
जैसा मुझे अंदाज़ा था, भाभी जाग रही थी और फट से बोली – जीजा जी, कोई बात नहीं… ज़ोर लगा के चोदो, दीदी को आज तो… वैसे भी आज, बहुत गरम है… 
मैंने हंसते हुए कहा – आज तुम दोनों मोटे लण्ड से चुद नहीं पाईं… नहीं तो मज़ा आ जाता…


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

बीबी की चूत, आज इतनी गरम थी की चूत के अंदर लंड के जाने से जो घर्षण हो रहा था, उससे मेरा लंड जलन मार रहा था.
इतनी गरमी, औरत की चूत में बहुत कम ही आती है.
और जब इतनी गरम चूत हो, औरत बीच सड़क में भी चुदवा मारे.
सो मैंने, मौका देखते हुए कहा – भाभी, नींद नहीं आ रही है तो आ जाओ… कोई बात नहीं है, मैं दोनों को संभाल लूँगा… 
भाभी धीरे से बोली – अपनी बीबी से आज्ञा ले ली क्या… ?? 
मेरी बीबी तो जैसे, इंतजार में ही बैठी थी.
तुरंत बोली – अब तुझे नींद तो आएगी नहीं, जब तक तेरी चूत में गुल्ला नहीं घुसेगा… आ जा तू भी, देख ले अपने जीजा का लौड़ा… मैं तो वैसे भी ना जाने कब से मरी जा रही हूँ, इनका लंड अपने सामने किसी की चूत में घुसते देखने के लिए… पर हाँ कमरे के सारी लाइट जला ले… यही एक शर्त है… मंजूर है तो फटाफट आ जा…
भाभी फट से लाइट जला कर आ गई और बैठ गई बेड पर. 
मेरा लंड, अभी भी बीवी की चूत में था.
भाभी ने आते ही, लण्ड दिखाने को कहा. 
मेरे निकालते ही, उन्होने चूत के रस से पूरी तरह सने मेरे लंड पे हाथ रखा तो बोली – वाह, क्या डंडा पाया है… दीदी के तो मज़े है… इतना मोटा लण्ड पा कर तो दीदी क बल्ले बल्ले हो गई… जीजा जी, आज तो फाड़ देना… बड़ी गरमी है, मेरी चूत में… 
मेरी बीबी बोली – हाँ, है तो काफ़ी तगड़ा… शुरू में तो चीखें निकलती थी और यह चोदते भी खूब थे… शादी के कुछ दिन बाद तो एक बार, रात को मुझे नंगी किया, रात भर चोदा और फिर सुबह उठते ही चालू हो गये… पाखाने में भी मेरे साथ गये… दाल चावाल बनवा लिए और फिर शुरू हो गये… रात से शुरू हुई चुदाई, पूरे दिन चली और दूसरी रात भी जारी रही… दो रात और एक दिन में, मैं कितनी बार चुदि इसकी गिनती भी नहीं है… 
फिर मेरी बीबी, मुझसे बोली – अब दिखा दिया हो तो घुसेड दो, अंदर… नहीं तो चूत, दबाब से ही फट जाएगी…
मैंने तुरंत बीबी की चूत में, लंड को पेल दिया. 
आज तो उसकी चूत से जैसे “जलवामुखी” फट पड़ा था.
दो तीन झटके के बाद ही, उसने मुझे धक्का दिया और मेरे लंड पर चढ़ कर बैठ गई.
भाभी के सामने ही पूरी नंगी, खूब जोश में उचक उचक कर मेरे लंड पर कूद रही थी.
उसकी नरम नरम गाण्ड, मेरी जांघों पर पड़ रही थी और उसकी चूत से लगातार सफेद गाड़ा पानी मेरे लंड से बहते हुए, मेरे गुल्लों पर जा रहा था.
भाभी देखती जा रही थी और तकिये को इतनी बुरी तरह भींच लिया था की अगर वो इंसान होता तो अभी तक साँस छोड़ चुका होता.. 
साफ दिख रहा था, भाभी काफ़ी गरम हो गई थी, बीबी को चुदते देख कर.
तभी बीबी ने उचकते उचकते ही, चूत को ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया और एक बेहद तेज़ मूत की धार छोड़ी जो सीधे मेरे चेहरे पर आई और फिर लंड पर सवार हो गई.
उसने चोदते चोदते, ऐसा दो तीन बार लिया. बस मूत की एक धार छोड़ी और आख़िरी बार निढाल हो कर गिर पड़ी.
ऐसा उसने, पहली बार किया था.
चुदाई के दौरान, मुताई.
मेरे सीने से लेकर मेरा चेहरा, उसकी दो तीन धार में ही सन गया.
उसके गिरते ही, भाभी ने मेरा लंड दबोच लिया और एक हाथ से मेरा सुपाड़ा और दूसरे से गुल्लों को इतनी बुरी तरह भींचा की मैं एक कराह के साथ छूट पड़ा.
भाभी बहुत ही बुरी तरह, गरम हो चुकी थीं.
मेरे मूठ से सना हुए हाथ की चारों उंगली भाभी ने अपनी टाँगों के बीच अपनी चूत में फसाई और कस के अपनी चूत भींच ली और फिर अपनी चूत पर दो तीन चपाट लगाई.
फिर मैंने गौर किया की उन्होने सलवार के अंदर ही “मूत” दिया है.
मूठ निकालने के बाद भी, मैं भाभी को नंगी देखने के लिए मचल रहा था.
खास तौर से, उनकी नंगी गाण्ड.
उनको नंगी करा कर, मैं उनको चलवाना चाहता था और उनकी मटकती हुई नंगी गाण्ड को जी भर के निहारना चाहता था. 
लेकिन जबरदस्त चुदाई से, मेरी बीबी निढाल होकर आँखें बंद कर पड़ी थी.
वहीं बीबी की चूत की भयंकर गरमी और भाभी के सामने, उसको चोदने से मेरी हिम्मत जवाब दे गयी थी.
हालाकी छोड़ने के बाद भी लंड अभी भी हिलोरे मार रहा था, जो थोड़ा अजीब था क्यूंकी अक्सर मेरा लंड गुफा से मुरझा के ही निकलता था.
इधर भाभी ने भी शायद उतेज्ना से आँखें बंद कर ली थीं और निढाल पड़ी थीं.
फिर थोड़ा आराम कर के, मैं उठा और भाभी को चोदने का प्रोग्राम बनाया. 
जब तक मैं नहा कर आया, भाभी और मेरी बीबी लेटे लेटे आपस में बातें कर रही थीं.
मेरा लंड साला, अभी भी खड़ा था.
सो, जब मैं पहुँचा तो बीवी बोली – क्या बात है.. ?? कोई जड़ी बूटी खा ली क्या, जो आज लिंग महाराज बैठने का नाम ही नहीं ले रहे…
मैंने बोला – जब इतनी खूबसूरत लड़कियाँ हों तो जड़ी बूटी की किस गान्डू को ज़रूरत पड़ेगी…
अचानक, भाभी बोली – तुम दोनों ने कभी “पी” कर चुदाई की है…
बीबी बोली – नहीं… ये कहाँ करते हैं, ड्रिंक…
भाभी – कभी कभी तो लगभग दुनिया का हर मर्द ही पीता है… मैं नहीं मानती… बीयर तो पीते ही होंगें…
मैं – नहीं भाभी, अभी तक तो नहीं पी… पर चुदाई में कोई भी नया फ़ॉर्मूला अपनाने को तैयार हूँ… बशर्ते मज़ा आए…
भाभी – मज़ा… अरे पूछो ही मत… 10 मिनिट में निकालने वाला मर्द, आधे घंटे से पहले नहीं झड़ता… गाली गलोच वाली एकदम “बिंदास चुदाई” होती है…
मेरी बीबी – आप और अमन ने करी है… ??
भाभी – हर हफ्ते…
मेरी बीबी – सच में… क्या अभी कोई दुकान ना खुली होगी… ??
मैं – गाली गलोच… यानी आप एक दूसरे को गाली देते हो…
भाभी – हाँ !! करके देखना… ना मज़ा आए तो बोलना… मैंने तो बीयर पी कर अमन की पूरी मूत मुँह लगा कर पी ली थी… क्या पटक पटक कर चोदता है, अमन पीने के बाद… कभी कभी तो बदन जवाब दे जाता है पर नियत नहीं… 
मेरी बीबी – क्या यार, भाभी… क्यूँ चूत फाड़ रही हो…
अब तक मेरी बीबी, मेरे लंड को सहलाने लगी थी.
भाभी की नज़रे, बराबर मेरे लंड पर ही थीं.
मेरी बीबी की मेरे लंड पर हाथों की हरकत बता रही थी की वो धीरे धीरे, बहुत गरम हो रही है.
यहाँ मैं भाभी की गाण्ड देखने के लिए, मचला जा रहा था.
फिर भाभी भी उठ कर करीब आ गई और मेरे ग़ुल्लों को सहलाने लगी.
दोनों लड़कियाँ, मेरे लंड से खेल रही थी और तभी भाभी मेरी बीबी के होंठों को चूमने लगी और अपने दूसरे हाथ से मेरी बीबी के नंगे दूध दबाने लगी.
इधर मेरी बीबी ने मेरे लंड से हाथ हटा लिया और दोनों हाथों से भाभी के मम्मे मसलने लगी.
अब मेरा सब्र जवाब दे गया और मैंने भाभी का कुर्ता फाड़ दिया.
मेरी बीबी ने भी फटा हुआ कुर्ता नीचे किया और ब्रा के ऊपर से ही, अपना मुँह भाभी के दूध पर लगा दिया.
मैंने बीबी को हटाया और भाभी की खड़ा करके उनकी ब्रा भी ज़ोर से खींच दी, जिससे उसका हुक टूट गया और उनके नंगे चुचे मेरी आँखों के सामने आ गये.
उफ्फ !! मेरी बीबी की तरह उनके मम्मे भी एकदम गोल थे.
हाँ, निप्पल थोड़े से बड़े थे क्यूंकी मेरी बीबी के निप्पल एकदम छोटे से थे.
भाभी के निप्पल के आस पास, भूरे रंग की एक गोल रेखा थी.
दो मिनिट तक, बस मैं उनके दूध निहारता रहा और इतने में मेरी बीबी भाभी का नाडा खोलने लगी.
मैंने अब भाभी को पलटा और नाडे के पास जहाँ से सलवार थोड़ी सी पहले से ही फटी रहती है, वहाँ से उनकी सलवार को भी फाड़ डाला.
उनकी नंगी, गोरी और एकदम चिकनी गाण्ड मेरी आँखों के सामने थी.
मैंने दोनों हाथों से उनकी गाण्ड को ज़ोर से भींच लिया और बहुत देर तक दबाया.
तब तक मेरी नंगी बीबी, भाभी के सामने आ गई और दोनों एक दूसरे के दूध दबाने लगी, निप्पल चूसने लगी और कभी, एक दूसरे के होंठ चूमने लगी. 
मेरे हाथ तो जैसे भाभी की गाण्ड से, चिपक ही गये थे.


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

उफ़!! भाभी की गाण्ड बीबी से बड़ी थी और थोड़ी ज़्यादा मांसल थी.
इतनी चिकनी और मुलायम थी की मेरी उंगलियाँ दबाने और मसलने पर उनकी गाण्ड में धँसी जा रही थीं.
जी भर के उनकी गाण्ड दबाने के बाद, मैं थोड़ा पीछे हटा और खींच के एक चाटा दिया उनकी गाण्ड पर.
उनकी गाण्ड पूरी हिल गई और फिर अपना लंड, मैं उनकी गाण्ड पर मारने लगा.
फिर मैंने अपना लंड, भाभी की दो पोन्द की दरार में फसाया और हाथ डाल कर आगे से अपनी बीबी की गाण्ड दबोच ली और अपनी बीबी की गाण्ड दबाते हुए, भाभी की गाण्ड की दरार में अपना लंड रगड़ने लगा.
मेरे हाथ आगे करके बीबी की गाण्ड दबोचने से, भाभी हम दोनों पति पत्नी के बीच बुरी तरह जकड़ गई.
उनकी नरम गाण्ड, मेरी जांघों पर रगड़ खा रही थी और साथ में बीबी की गाण्ड मसलने से, मैं ज़्यादा देर रुक नहीं पाया और फूच फूच करके मेरा लंड पानी छोड़ने लगा.
जैसे ही, मेरे लंड से मलाई निकलना चालू हुई भाभी पलटी और घुटनों पर बैठ कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और पीछे से मेरी गाण्ड पकड़ कर अपने मुँह को चोदने लगी.
यहाँ मेरी बीबी नीचे से मेरे ग़ुल्लों को मुँह में भरने लगी.
मेरे मूठ की आख़िरी बूँद तक, भाभी ने अपने मुँह में भर ली और फिर तुरंत मेरी बीबी के होंठ चूमने लगी.
मेरा लंड, भाभी ने पूरा निचोड़ लिया था और वो पूरा मुरझा गया.
पर दोनों लड़कियों के सिर पर सवार वासना देख कर, मैं अंदर से खुद को रोक नहीं पा रहा था.
अब तक भाभी और मेरी बीबी टाँगें चौड़ी करके बैठ गई थीं और एक दूसरी की चूत को, आपस में रगड़ रही थीं.
मुझे अब भाभी के नंगी चूत के दर्शन हो रहे थे, जो एकदम सॉफ थी.
मेरी बीबी केँची से बालों को सॉफ करती थी पर भाभी की चूत पर एक बाल नहीं था.
ये बात ज़रूर थी की हल्की हल्की झांटों से झाकति मेरी बीबी की चूत एकदम गोरी थी, वहीं भाभी की चूत का रंग उनके बाकी गोरे बदन के मुक़ाबले थोड़ा दबा हुआ था.
लेकिन एकदम चिकनी चूत, कयामत ढा रही थी.
मुझे इतना मज़ा आ रहा था की दूसरे दिन, अगर मैं मर भी जाता तो मुझे अफ़सोस ना होता.
मेरा लंड, अब भाभी की चूत के लिए पूरा तैयार था. 
तभी मेरी बीबी बोली – बड़ी साफ़ सूत्री रखती है, अपनी चूत को…
मिनी भाभी बोली – पगली, हमेशा तैयार रखती हूँ… 
फिर बीबी बोली – ले जय, पेश है तेरे लिए एकदम चिकनी चूत… फाड़ दे इसे आज… चोद अपनी बीबी के सामने, इस छीनाल चूत को… कब से तड़फ़ रही हूँ, अपने हाथ से तेरा लंड किसी और चूत में घुसाने को… पूरी कर दे, अपनी बीबी की हसरत… जल्दी आ… 
मैंने भी देर नही की. 
मन तो बहुत था की भाभी की चूत को जी भर के निहार लूँ, कुछ देर चाट लूँ पर बीबी की खुशी के लिए, भाभी की टाँगे फ़ौरन अपने कंधे पर रखीं उनकी चूत पर एक थपकी मारी और अपना लण्ड उस की चूत पर रखा. 
मेरी बीबी ने फ़ौरन, मेरा लंड पकड़ा और भाभी की चूत पर रगड़ने लगी और फिर अपने हाथ से ही एक ज़ोर से धक्का मारा और मैंने अपनी गाण्ड हिला कर पूरा 8 इंच का लंड अपनी बीबी के सामने अपनी भाभी की चिकनी चूत में अंदर कर दिया.
बीबी ने बोला – देख, पूरा घुसा की नहीं… 
मैंने कहा – एक दम फिट बैठ गया है, जानू… 
इधर भाभी की गाण्ड फट गई, जब मैंने एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसेड दिया और फिर बिना रुके दे दना दन चोदने लगा. 
बीबी ज़ोर से ज़ोर से अपनी चूत को रगड़ने लगी और बोली – उनमह: जितना ज़ोर है लगा… अंदर बाहर होता हुआ दिखा, मुझे इसकी चूत में… और ज़ोर से…
भाभी, मेरी बीबी से बोली – चुप कर, बहन की लौड़ी… बड़ा तगड़ा है, जीजा लण्ड… मज़ा आ रहा है लेकिन चूत फट गई है, यहाँ… एक दम छीलता हुआ जा रहा है, मेरी चूत को… 
मेरी बीबी बोली – क्यूँ, अब क्यूँ तिरछी हो रही है… ले ले अंदर तक… तेरी चूत तो एक नंबर की चुड़क्कड़ है, रांड़… ले मेरी चूत चाट… 
और ये कहते हुए, मेरी बीबी भाभी के मुँह के ऊपर बैठ गई और अपनी चूत ऊपर से रगड़ते हुए उसके मुँह के आगे पीछे ऊपर नीचे करने लगी.
मैं भाभी को चोद रहा था, मेरी बीबी के मम्मे दबा रहा था और भाभी, मेरी बीबी की चूत चाट रही थी. 
इतना जोश, पहले कभी नहीं आया था मुझे.
मेरी बीबी, अपनी भाभी को मुझसे चुदवा रही थी. 
भाभी भी खूब मज़ा ले रही थी, अपनी गाण्ड उचका उचका कर.
भाभी की हालत, अब खराब हो गई थी. 
ऊपर से बीबी का अपनी चूत चटवाने का तरीका भी अच्छा था. 
तभी मेरी बीबी ने चूत से मूत की धार छोड़ दी और भाभी ने मुँह खोल लिया.
मेरी बीबी, भाभी के मुँह के ऊपर ही बैठी थी.
उसकी मूत की पूरी धार, सीधे भाभी के मुँह में जा रही थी.
ये देख कर, मुझे भी नहीं रहा गया और मैं छोड़ने ही वाला था की भाभी ने चूत पीछे खींची और सीधी धार, मेरे लंड पर लगा दी अपनी एसिड जैसी मूत की.
अजीब बात ये हुई की उनकी मूत की धार, मेरे लंड पर गिरते ही मेरा लंड बोल गया और अपना पानी छोड़ दिया. 
फिर भाभी बोली – जय जी, संभाल के रखना इस मूसल को… मेरी चूत का सुराख चौड़ा कर दिया, आज तुम्हारे लण्ड ने… मुझे नहीं लगता किसी औरत को इतना मज़ा आया होगा जितना मुझे आया आज, तुम दोनों के साथ… मेरा तो जाने, कितनी बार निकल गया… बहुत ज़ोर से चोदा, जीजा आपने… आप के भाई इधर नहीं हैं नहीं तो देखते ही पता चलता की चूत ढीली हो गई है…
मेरी बीबी बोली – अमन का लण्ड, इतना मोटा और लंबा नहीं है क्या… ??
तो भाभी बोली – उन का लंबा तो इतना है पर मोटा थोड़ा कम है…
बीबी फिर बोली – कुछ भी कहो, आज मेरी बरसों की हसरत पूरी हो गई…
भाभी बोली – चाहो तो कभी, एक्सपीरियेन्स कर लेना… 

बीबी बोली – हाँ हाँ, देख लेंगे… ले आना, एक दिन… फिर चारों साथ में ही, चुदाई के मज़े लेंगे… 
अब तक तो हम तीनों ही, घुल मिल गये थे. 
काफ़ी गप्पें चलीं और सभी, अपने अपने अनुभव बताने लगे. 
किसी ना किसी मज़ेदार या यादगार चुदाई के.. 
दूसरे दिन मैं, ड्यूटी पर चला गया और वो दोनों ही अपनी आप बीती एक दूसरे को सुनाने लगी थी.
मिनी बोली – दीदी, आप अपना कोई एक्सपीरियेन्स बताओ ना… 
मेरी बीबी बोली – भाभी, शादी से पहले मैंने चुदाई नहीं करवाई थी… पर पता सब था, मुझे की चुदाई कैसे होती है… मैंने अपनी बड़ी दीदी को जीजा से अपनी चूत चुदवाते देखा था… जीजा जी, दीदी की टाँगे कंधे पर रख कर कैसे चोद रहे थे, मैंने देख लिया था… और दीदी कैसे धक्के मार रही थी, नीचे से पूरा का पूरा लण्ड, अंदर ले कर…. मुझे जब भी चान्स मिलता था, मैं दीदी की चुदाई देखना नहीं भूलती थी… उन दिनों, हम सब एक साथ ही रहते थे… जीजा का लण्ड, आम साइज़ का ही था… कोई “6 – 7” इंच… लेकिन काफ़ी था, दीदी की चूत की खुजली बुझाने के लिए… बहुत चोदते थे जीजा, दीदी को… और दीदी भी अपनी गांड उचका उचका कर चुदती थीं… शादी के बाद ही, मुझे पता चला की कितना मज़ा आता है चुदाई में…


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

फिर मेरी बीबी बोली – अब भाभी आप भी तो कोई आप बीती घटना सूनाओ… अगर आप, किसी दूसरे से चुदी हो तो… अलग ही मज़ा आता है, दूसरे की चुदाई के बारे में सुनने में… 
भाभी बोली – अब तुझसे शरमाना क्या… सुनाती हूँ… एक घटना, जो की बहुत ही अलग और ना भूलने वाली हुई थी, मेरे साथ… यह घटना हमारे अपने घर में हुई थी, जो की मेरे ऊपर आ कर ख़तम होती है, अब तक… आगे क्या होगा वो तो बाद में, वक्त ही बताएगा… ऐसा हुआ, मेरे साथ जब मैं घर (मायके) छुट्टी पर थी… मैं ज्यादातर अकेले ही, मायके जाती हूँ… पति काम की वजह से, कई बार साथ नहीं आ पाते… हमारे गाँव में काफ़ी खेती बाड़ी है और खेती का बहुत काम रहता है और वो भी ज़्यादातर बारिश के मौसम में तो हम सब घर के सदस्य, खेतों में खेती का और घास काटने का काम करवाते हैं, नौकरों से और खुद भी, कुछ ना कुछ करते रहते है… हमारी ज़मीन, खेत थोड़ी दूरी पर भी है जहाँ पर हम फसल और सब्जियाँ वगेरह पैदा करते हैं… यह सब काम, दूसरे किराए के आदमी करते रहते हैं और मां की सहायता करते हैं… पिता जी रिटाइर्ड थे, आर्मी से… जल्द ही, चल बसे थे… लगभग पाँच साल, घर आने के बाद… हमारे एक नौकर है – “भीमा” जो की खेतों में काम करता है और करवाता है और हमारी मां की मदद करता है… घर के सदस्य की तरह है, वो और बहुत काम भी करता है… 12 साल का था, जब आया था हमारे घर… पिता जी ही लाए थे, उसे अपने साथ की घर का काम काज करता रहेगा… अब तो हट्टा कट्टा बदन और लंबा चौड़ा आदमी हो गया है… लेकिन देखने में, सुंदर लगता है… भीमा, लंबा चौड़ा सा है और कोई 24 साल की उम्र है, उसकी, अच्छा हट्टा कट्टा बदन है उसका अब… हम उसे भीमा इसी कर के भी कहते हैं… भरोसेमंद और ईमानदार है… अब तो समझो, वो घर का सदस्य ही बन गया है… दूसरे मजदूरों से काम लेता रहता है और खुद भी काम में, मस्त रहता है… हर वक़्त मां और घर वालों की सेवा में रहता है… हमारे घर मैं, परिवार के मेंबर अलग अलग अपने अपने घर में रहते हैं, जो के मां बाप ने बनवा दिए हैं… घर, कोई 1 किलो मीटर की दूरी से है… खेत के… 
हमारे घर के सदस्य –
नरेश – भाई… 10 साल बड़ा है, मेरे से… गाँव में ही काम करता है, एक सीनियर ऑफीसर है… सीधा सादा आदमी है… बिज़ी रहता हैं, अपने ही काम में… अच्छी तगड़ी डील डोल है, उन की और जिम वगेरह भी करते रहते हैं…
भाभी, निशा – नरेश की वाइफ, लेक्चरर है… बड़ी सुन्दर और गोरी है… बड़े और गोल बूब्स… चौड़ी, मटकती गाण्ड वाली हैं… थोड़ा सीरीयस रहती हैं… अपना घर है, सो अलग से रहती है, अपने हसबैंड के साथ और एक बच्चा है 6 साल का… जो उस ने अपनी मां के पास चोदा है, पढ़ने के लिए…
ऋतु, बहन – 3 साल बड़ी है, मेरे से… बैंक में ऑफीसर है… गोरी, सुन्दर, थोड़ी सी मोटी है… गोल है लेकिन गाण्ड बहुत… लंबे बाल… हमेशा मुस्कुराती रहती है… अब तक बच्चा पैदा नहीं किया, उसने… मस्त रहती हैं… 
राकेश – उन का पति… जो की एक कंपनी में डाइरेक्टर हैं… बहुत अच्छी कद काठी है और आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक हैं… कोई औरत देख ले तो बस मर मिटे, उन पर… वैसे भी वो “दिल फैंक आदमी” हैं… हंस मुख हैं इसलिए कहीं ना कहीं, टांका लगा ही लातें हैं… ऋतु दीदी को इन की हरकतों का कुछ ना कुछ पता है… लेकिन वो भी मस्त रहतीं हैं… अपने लोगों जैसी ही है… साथ में चुदाई भी कर लें दोनों मिँया बीबी किसी और औरत के साथ, जैसे हमने की तो भी पूरे मज़े ही लेंगें…
एक नौकरानी भी रख ली है ऋतु ने, उस का नाम कुकी है… जो हमारे नौकरों के घर में अलग से रहती है… यह घर, मां के घर के साथ ही है… भीमा और उस की खास बनती है पर दोनों एक दूसरे से अलग रहते हैं… मां की नज़र भी कुकी पर हमेशा रहती है क्यों की वो बेचारी विधवा है…
मां – 46 साल की, बहुत सुंदर, सुडौल औरत हैं… गाँव की हैं, मेहनती शरीर है… सो, 35 की सी लगती हैं… इस उम्र में भी किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाई, उन्हें देख कर… अब वो ख़ास कर, घर पर ही रहती हैं… कुकी की देख भाल में ही, रहतीं हैं… नौकरानी, कोई 26 साल की औरत है… जो मां के साथ, कोई 3 साल से है और “विधवा” है… एक दम मस्त बॉदी है, उस की… बहुत सुन्दर है… ग़रीब घर की है… मां के साथ, खुश रहती है… मां का घर, गाँव से थोड़ा सा बाहर है, खेत के थोड़ा पास… बहुत बड़ा है…
पिता की मौत के बाद, भीमा थोड़ा उदास हो गया था और चुप चाप ही रहता था… भीमा को मां ने अलग से छोटा सा एक कमरा और बाथरूम के साइड वाला घर दिया है… उस के आगे पीछे, कोई नहीं है और ना किसी को अब तक उस की जात पात का ही पता है… जब तक पिता जी थे, सब कुछ ठीक सा रहता था और सब उनके हाथ में रहते थे… फिर, मां की हुकुमकारी चलने लगी थी और अब तक चल रही है… सब उन की सुनते हैं… नौकरानी मां का सारा काम और सेवा करती है और मां, उस का ख़याल भी रखती है…
खैर, अब कहानी पर आती हूँ – 
उस दिन, शाम का टाइम था… 
थोड़ा सा, अंधेरा सा होने लगा था. 
बरसात के दिन थे और खेत, थोड़े दूरी पर थे.
मां और भाभी और दूसरे लेबर, चले गये थे. 
मैं और भीमा चलने वाले थे, क्यूंकी बडेल आ रही थी की अचानक ज़ोर की बारिश शुरू हो गई और हम दौड़ कर, एक ब्रशक़ (पेड़) के नीचे खड़े हो गये. 
मैं लगभग तुरंत ही, सारी भीग गई थी और भीमा भी भीग गया था.
पूरा भीग जाने से, पानी सिर से नीचे पैरों तक जा रहा था. 
मैंने उस दिन, सलवार कमीज़ पहन रखी थी.
तभी मुझे, बहुत ज़ोर का पेशाब लगा तो मैंने भीमा को कहा की साइड में चले जाओ… 
वो बोला – ठीक है, बीबी जी… 


RE: Chudai Story अनोखी चुदाई - sexstories - 07-16-2018

मैं पेशाब कर रही थी तो देखा की वो साइड से, मुझे चोरी से देख रहा था. 
फिर वो भी इसी समय, साइड में खड़ा हो कर मूतने लगा था.. मेरे से नज़रें, बचा कर.. 
लेकिन तभी, मेरी नज़र उस के लण्ड पर चली गई.
वाह !! क्या लोडा है… – मैंने कहा, अपने मन में.
काला, मोटा, “घोड़े जैसा” लग रहा था. 
उस का लण्ड, खड़ा हो गया था. 
शायद, उस को मेरी मूतते वक्त गाण्ड और चिपके कपड़े देख कर लण्ड में करेंट आ गया था और बिचारा खड़ा हो गया था. 
मूतने के बाद भी, मेरे कपड़े भी ऐसे ही थे की ऊपर से मेरी गाण्ड की दरार अलग अलग दिखाई दे रहीं थीं ओर ऊपर से उठे हुए बूब्स. 
भीगने से सलवार, गाण्ड के दरार में घुस रही थी, जिसे मैं बार बार बाहर खींच रही थी और भीमा, यह सब देख रहा था.
तभी मेरा, दिमाग़ घूम गया उस की निक्कर में खड़ा लण्ड देख कर. 
उस ने निक्कर पहन रखी थी और उस में से, उस का लण्ड अब सामने दिखाई दे रहा था. 
लंबा, एकदम उठा हुया.
मैं उस से मज़ाक वगेरह करती रहती थी और लोग भी, वहाँ जानते थे की मैं बॉम्बे से हूँ सो थोड़ी “खुले विचारों” की हूँ. 
खैर, मैंने उस से कहा – चलो, चलें… भीग तो गये ही हैं…
वो बोला – थोड़ा और रुक जाओ, बीबी जी… बारिश रुक जाएईगी, कुछ समये में… 
मैं रुक गई और उस की तरफ, देखती रही.
मेरी चूत से तो उस वक्त, “आग” निकलने लगी थी.
तू तो जानती है की मुझे तो बॉम्बे की हवा लगी हुई तो थी ही तो मैंने उस से मज़ाक में पूछा – क्यूँ रे भीमा, शादी नहीं करनी है क्या… जिंदगी भर ऐसे ही सांड बन कर, घूमता रहेगा…
तो वो बोला – बीबी जी… आप कुछ करो ना, मेरे लिए… 
मैंने मज़ाक में ही कहा – चल बता… कैसी लड़की चाहीए… 
तो वो, बोला – बिल्कुल, आप जैसी… 
मैं – चल, साले कुत्ते… कुछ भी कहता है, तू… 
मैं, थोड़ी सहम गई. 
क्या कहती, पूछा जो मैंने ही था. 
क्यों, मेरी जैसी ही.. – मैं बोली.. 
वो बोला – आप बहुत अच्छी हैं और सुन्दर भी… 
फिर, मैं बोली – चल, एक बात बता… कोई मिली नहीं, अब तक जो तेरा काम कर दे… 
वो अनपढ़ तो है ही. 
फट से बोला – इधर उधर, कभी कभी कोई मिल जाती है और काम चल जाता है… 
मैंने कहा – क्या बोला… 
भीमा – हाँ, बीबी जी… हैं, दो तीन मेहीर… कभी कभी, चान्स लग जाता है, अगर वो बुलाए तो… 
मैं – वो कैसे… 
तो वो बोला – उन्होंने, मुझे फँसा लिया है… 
मैं – अच्छा, फिर तो तुम्हारा कम चल रहा है ना… शादी की क्या ज़रूरत है…
भीमा – बीबी जी, अपनी चीज़ अपनी ही होती है ना… ऐसे, कब तक रह सकता हूँ…
मैंने कहा – क्यूँ नहीं रे… अलग अलग माल, तेरे लण्ड को ठंडा करने को मिल रहा है… (गाँव में लंड और चूत बोलने से, कोई ताजुब नहीं करता.) शादी कर के, क्या नया लेगा तू… जो चाहिए, मिल रहा है ना… 
भीमा – हाँ, बीबी जी… पर घर वाली तो घर वाली ही होती है ना… दूसरे का क्या, कभी मिली तो कभी नहीं… अब खड़ा तो कभी भी हो जाता है…

मैं – वाह रे, भीमा… बड़ी बड़ी बातें कर लता है तू, आज कल… लगता है, कोई पट्टी पड़ा रही है… टांका तो नहीं भिड़ा रखा, कहीं… अच्छा अच्छा, चलो बताओ कौन है, वो… मुझे भी तो, पता चले ना… फिर सोचेंगे, तेरे बारे में भी…
तो वो बोला – नहीं बीबी जी… यह नहीं बता सकूँगा… 
मैं – तुम्हें 1000 रुपए दूँगी… तब भी नहीं… 
वो बहुत खुश हो गया और बोला – बुरा मत मानना, आप… वो कुकी अपनी नौकरानी है, जो मेरे साथ कभी कभी मज़े लेती रहती है…
मैं – वो कैसे फँस गई रे, तेरे साथ… उस पर तो मां की 24 घंटे, नज़र रहती है… 
भीमा – हुआ ऐसे की मां चार दिनों के लिए, अपनी बहन के यहाँ गई थी… मैं और कुकी घर का कामकाज देख रहे थे… एक दिन, रात को कुकी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया… मैंने देखा की कुकी है… सोचा, शायद कुछ काम होगा… लेकिन जैसे ही, मैंने दरवाजा खोला, वो सीधी अंदर आ गई और कहा की मुझे डर लग रहा है… 
मैंने कहा – क्यों.. ?. क्या हुआ .. ?. 
तो वो बोली – मुझे नहीं पता… मैं यहीं सो जाती हूँ… 
मेरे पास एक ही बिस्तरा है, सो मैंने कहा – ठीक है… मैं नीचे सो जाता हूँ, तू ऊपर सो जा…
वो बोली – ठीक है…
मैं नीचे बिस्तर लगा के, सो गया. 
कोई 20 25 मिनट के बाद, वो मेरे बिस्तर पर आ गई और बिना झिझके सीधे मेरे लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगी.
मैंने कहा – यह क्या कर रही है, तू… 
वो बोली – भीमा, मैं तेरे लण्ड की दीवानी हो गई हूँ… भरी जवानी में, विधवा हो गई… अब मुझसे सहन नहीं होती रे, इस “चूत की आग”… बड़ी मुश्किल से, आज मौका मिला… दुबारा मिले ना मिले… 
मैं डर गया की यह क्या कर रही है.
मैंने पहले कभी, यह सब नहीं किया था. 
ऊपर से, मां का डर. 
वो नहीं मानी और बोली – बहन चोद… सारी शर्म लिहाज़ छोड़ कर, तेरे पास आई हूँ… दुबारा जिंदगी में, ऐसा मौका मिले नहीं मिले… ज़्यादा नौटंकी मत मार… नहीं तो, मां जी से बोल दूँगी तूने मेरा बलात्कार करने की कोशिश की… और वो मेरे लण्ड को दोनों हाथों में ले कर, ऊपर नीचे करने लगी. 
मैं डर भी गया और मुझे, बड़ा मज़ा भी आ रहा था. 
फिर उस ने मेरे लंड पर थोड़ा तेल लगाया और पूछा – कभी, किसी को चोदा है तूने… 
मैंने कहा – नहीं… 
तो वो बोली – चल, मैं सिखाती हूँ तुझे की लण्ड और चूत का यह “खेल” कैसा होता है… तेरे पास तो बड़ा मोटा और लम्बा खिलाड़ी है… यह तो कई औरतो की चूत फड़ेगा… तू साला, नीरा चूतिया है… 
उस की बातें सुन कर, मेरा लण्ड फुल तन गया था.
और फिर बीबी जी, उस ने अपने कपड़े खोल दिए और मेरे भी. 
मैंने औरत को कभी “नंगी” नहीं देखा था सो, उसके पूरी नंगी होते ही मेरा पहला मूठ निकल पड़ा. 
वो बोली – लगता है, पहली बार नंगी औरत देख रहा है… कोई बात नहीं, ऐसा होता है… चल, एक काम कर मेरी चूत में उंगली कर जिस से थोड़ी खुल जाए… 5 साल से नहीं चुदी हूँ… और मेरी इन चुचियों को चूस… साला, मेरा मर्द, चूत में घुसेड के लंड का स्वाद लगा कर चला गया… इससे अच्छा तो ना चोदता… 
मैंने कहा – क्यों…
तो वो बोली – शेर के मुँह, एक बार खून लग जाए तो वो आदमख़ोर बन जाता है… 5 साल से, सब्जियों से काम चला रही हूँ… आज जा के मौका मिला है… और वो, मेरे लंड पर बैठ गई.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. 


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