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RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

कोमलप्रीत कौर के गरम गरम किस्से

भाग-३: मेरा प्यारा देवर

लेखिका : कोमलप्रीत कौर

भाग-२ (मेरी बिगड़ी हु‌ई चाल) से आगे....

पिछली गर्मियों की बात है जब मेरे पति की मौसी का लड़का विकास हमारे घर आया हु‌आ था। वो बहुत ही सीधा साधा और भोला सा है। उसकी उम्र करीब सत्रह-अठारह की होगी, मगर उसका बदन ऐसा कि किसी भी औरत को आकर्षित कर ले। मगर वो ऐसा था कि लड़की को देख कर उनके सामने भी नहीं आता था। मगर मैं उस से चुदने के लि‌ए तड़प रही थी और वो ऐसा बुद्धू था कि उसको मेरी जवानी दिख ही नहीं रही थी। मैं उसको अपनी गाण्ड हिला हिला कर दिखाती रहती मगर वो देख कर भी दूसरी और मुँह फेर लेता। मैं समझ चुकी थी कि यह शर्मीला लड़का कुछ नहीं करेगा, जो करना है मुझे ही करना है।

एक दिन सुबह के करीब नौ बजे का वक्त था। सास और ससुर चाय-नाश्ता करके तैयार हो गुरुद्वारे और खेतों के लिये निकल गये थे। मैं भी नहा-धो कर सज-संवर कर तैयार हुई। फिर नौकरानी से चाय लेकर जब उसके कमरे में ग‌ई तो वो सो रहा था मगर उसका बड़ा सा कड़क लौड़ा जाग रहा था। मेरा मतलब कि उसका लौड़ा पजामे के अन्दर खड़ा था और पजामे को टैंट बना रखा था।

लण्ड तो मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। मेरा मन उसका लौड़ा देख कर बेहाल हो रहा था। अचानक उसकी आँख खुल ग‌ई। वो अपने लौड़े को देख कर घबरा गया और झट से अपने ऊपर चादर लेकर अपने लौड़े को छुपा लिया। मैं चाय लेकर बैड पर ही बैठ ग‌ई और अपनी कमर उसकी टांगों से लगा दी। वो अपनी टाँगें दूर हटाने की कोशिश कर रहा था मगर मैं ऊपर उठ कर उसके पेट से अपनी गाण्ड लगा कर बैठ ग‌ई।

उसकी परेशानी बढ़ती जा रही थी और शायद मेरे गरम बदन के छूने से उसका लौड़ा भी बड़ा हो रहा था जिसको वो चादर से छिपा रहा था। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैंने उसको कहा- “विकास उठो और चाय पी लो!”

मगर वो उठता कैसे... उसके पजामे में तो टैंट बना हु‌आ था। वो बोला- “भाभी! चाय रख दो, मैं पी लूँगा।” 

मैंने कहा- “नहीं! पहले तुम उठो, फिर मैं जा‌ऊँगी।” 

तो वो अपनी टांगों को जोड़ कर बैठ गया और बोला- “ला‌ओ भाभी, चाय दो।”

मैंने कहा- “नहीं! पहले अपना मुँह धोकर आ‌ओ, फिर चाय पीना।”

अब तो मानो उसको को‌ई जवाब नहीं सूझ रहा था। वो बोला- “नहीं भाभी! ऐसे ही पी लेता हूँ, तुम चाय दे दो।”

मैंने चाय एक तरफ़ रख दी और उसका हाथ पकड़ कर उसको खींचते हु‌ए कहा- “नहीं! पहले मुंह धोकर आ‌ओ फिर चाय मिलेगी।”

वो एक हाथ से अपने लौड़े पर रखी हु‌ई चादर को संभाल रहा था और बैड से उठने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने उसको पूछा- “विकास! यह चादर में क्या छुपा रहे हो?” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

तो वो बोला- “भाभी कुछ नहीं है।”

मगर मैंने उसकी चादर पकड़ कर खींच दी तो वो दौड़ कर बाथरूम में घुस गया। मुझे उस पर बहुत हंसी आ रही थी। वो काफी देर के बाद बाथरूम से निकला जब उसका लौड़ा बैठ गया।

ऐसे ही एक दिन मैंने अपने कमरे के पंखे की तार डंडे से तोड़ दी और फिर विकास को कहा- “तार लगा दो।” 

वो मेरे कमरे में आया और बोला- “भाभी, को‌ई स्टूल चाहि‌ए... जिस पर मैं खड़ा हो सकूँ।” 

मैंने स्टूल ला कर दिया और विकास उस पर चढ़ गया। मैंने नीचे से उसकी टाँगें पकड़ लीं। मेरा हाथ लगते ही जैसे उसको करंट लग गया हो, वो झट से नीचे उतर गया। 

मैंने पूछा- “क्या हु‌आ देवर जी? नीचे क्यों उतर गये?” 

तो वो बोला- “भाभी जी, आप मुझे मत पकड़ो, मैं ठीक हूँ।” 

जैसे ही वो फिर से ऊपर चढ़ा, मैंने फिर से उसकी टाँगें पकड़ ली। वो फिर से घबरा गया और बोला- “भाभी जी, आप छोड़ दो मुझे, मैं ठीक हूँ।” 

मैंने कहा- “नहीं विकास, अगर तुम गिर गये तो...?” 

वो बोला- “नहीं गिरता.. आप स्टूल को पकड़ लीजिये...!” 

मैंने फिर से शरारत भरी हंसी हसंते हु‌ए कहा- “अरे स्टूल गिर जाये तो गिर जाये, मैं अपने प्यारे देवर को नहीं गिरने दूंगी...!” 

मेरी हंसी देख कर वो समझ गया कि भाभी मुझे नहीं छोड़ेंगी और वो चुपचाप फिर से तार ठीक करने लगा। 

मैं धीरे-धीरे उसकी टांगों पर हाथ ऊपर ले जाने लगी जिससे उसकी हालत फिर से पतली होती मुझे दिख रही थी। मैं धीरे-धीरे अपने हाथ उसकी जाँघों तक ले आ‌ई मगर उसके पसीने गर्मी से कम मेरा हाथ लगने से ज्यादा छुट रहे थे। वो जल्दी से तार ठीक करके बाहर जाने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली- “देवर जी, आपने मेरा पंखा तो ठीक कर दिया, अब बोलो मैं आपकी क्या सेवा करूँ?” 

तो वो बोला- “नहीं भाभी, मैं को‌ई दुकानदार थोड़े ही हूँ जो आपसे पैसे लूँगा।” 

मैंने कहा- “तो मैं कौन से पैसे दे रही हूँ, मैं तो सिर्फ सेवा के बारे में पूछ रही हूँ, जैसे आपको कुछ खिला‌ऊँ या पिला‌ऊँ?” 

वो बोला- “नहीं भाभी, अभी मैंने कुछ नहीं पीना!” और बाहर भाग गया। 

मैं उसको हर रोज ऐसे ही सताती रहती जिसका कुछ असर भी दिखने लगा क्योंकि उसने चोरी-चोरी मुझे देखना शुरू कर दिया। मैं जब भी उसकी ओर अचानक देखती तो वो मेरी गाण्ड या मेरी छाती की तरफ नजरें टिकाये देख रहा होता और मुझे देख कर नजर दूसरी ओर कर लेता। मैं भी जानबूझ कर उसको खाना खिलाते समय अपनी छाती झुक-झुक कर दिखाती, क‌ई बार तो बैठे-बैठे ही उसकी पैंट में तम्बू बन जाता और मुझसे छिपाने की कोशिश करता। 

मेरा खुद का हाल भी बहुत खराब था। वो जितना मुझसे दूर भागता, उसके लिये मेरी प्यास उतनी ही ज्यादा भड़क रही थी। उसके लण्ड की कल्पना करके दिन रात मुठ मारती। मैं तो उसका लौड़ा अपनी चूत में घुसवाने के लि‌ए इतनी बेक़रार थी, अगर सास-ससुर का डर न होता तो अब तक मैंने ही उसका बलात्कार कर दिया होता। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैं भूखी शेरनी की तरह उस पर नज़र रखे हुए मौके के इंतज़ार में थी। मगर जल्दी मुझे ऐसा मौका मिल गया। एक दिन हमारे रिश्तेदारों में किसी की मौत हो ग‌ई और मेरे सास ससुर को वहाँ जाना पड़ गया। 

मैंने आपने मन में ठान ली थी कि आज मैं इस लौन्डे से चुद कर ही रहूंगी... चाहे मुझे उसके साथ कितनी भी जबरदस्ती करनी पड़े, उसके कुँवारे लण्ड से अपनी चूत की आग बुझा कर ही रहुँगी। जो होगा बाद में देखा जायेगा। 

सास-ससुर के जाते ही विकास भी मुझसे बचने के लि‌ए बहाने की तलाश में था। पहले तो वो काफी देर तक घर से बाहर रहा। एक घंटे बाद जब मैंने उसके मोबा‌इल पर फोन किया और खाना खाने के लि‌ए घर बुलाया तब जाकर वो घर आया। 

उसके आने के पहले ही मैं फटाफट तैयार हुई। उसे रिझाने के लिये मैंने नेट का बहुत ही झीना और कसा हुआ सलवार-कमीज़ पहन लिया। मेरी कमीज़ का गला कुछ ज्यादा ही गहरा था उर उसके नीचे मेरी ब्रा की झलक बिल्कुल साफ नज़र आ रही थी। अपनी टांगों और गाण्ड की खूबसूरती बढ़ाने के लिये ऊँची ऐड़ी की सैंडल भी पहन ली और थोड़ा मेक-अप भी किया। फिर मूड बनाने के लिये शराब का पैग भी मार लिया। 

जब वो आया तो मैं अपना और उसका खाना अपने कमरे में ही ले ग‌ई और उसको अपने कमरे में बुला लिया। मगर वो अपना खाना उठा कर अपने कमरे की ओर चल दिया। मेरे लाख कहने के बाद भी वो नहीं रुका तब मैं भी अपना खाना उसके कमरे में ले ग‌ई और बिस्तर पर उसके साथ बैठ ग‌ई। 

वो फिर भी मुझसे शरमा रहा था। मैंने अपना दुपट्टा भी अपनी छाती से हटा लिया मगर वो आज मुझसे बहुत शरमा रहा था। उसको भी पता था कि आज मैं उसको ज्यादा परेशान करूँगी। 

मैंने उससे पूछा- “विकास.. मैं तुम को अच्छी नहीं लगती क्या...?” 

तो वो बोला- “नहीं भाभी, आप तो बहुत अच्छी हैं...!” 

मैंने कहा- “तो फिर तुम मुझसे हमेशा भागते क्यों रहते हो...?” 

वो बोला- “भाभी, मैं कहाँ आपसे भागता हूँ?” 

मैंने कहा- “फिर अभी क्यों मेरे कमरे से भाग आये थे? शायद मैं तुम को अच्छी नहीं लगती, तभी तो तुम मुझसे ठीक तरह से बात भी नहीं करते!” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

“नहीं भाभी, अभी तो मैं बस यूँ ही अपने कमरे में आ गया था.. आप तो बहुत अच्छी हैं…” 

मैंने थोड़ा डाँटते हुए कहा- “झूठ मत बोलो! मैं तुम को अच्छी नहीं लगती, तभी तो मेरे पास भी नहीं बैठते। अभी भी देखो कैसे दूर होकर बैठे हो? अगर मैं सच में तुम को अच्छी लगती हूँ तो मेरे पास आकर बैठो....!” 

मेरी बात सुन कर वो थोड़ा सा मेरी ओर सरक गया। 

यह देख कर मैं बिलकुल उसके साथ जुड़ कर बैठ ग‌ई जिससे मेरी गाण्ड उसकी जांघ को और मेरी छाती के उभार उसकी बाजू को छूने लगे। 

मैंने कहा- “ऐसे बैठते हैं देवर भाभियों के पास.... अब बोलो ऐसे ही बैठो करोगे या दूर दूर...?” 

वो बोला- “भाभी, ऐसे ही बैठूँगा मगर मौसी मुझसे गुस्सा तो नहीं होगी? क्योंकि लड़कियों के साथ ऐसे को‌ई नहीं बैठता।” 

मैंने कहा- “अच्छा अगर तुम अपनी मौसी से डरते हो तो उनके सामने मत बैठना। मगर आज वो घर पर नहीं है इसलि‌ए आज जो मैं तुम को कहूँगी वैसा ही करना।” 

उसने भी शरमाते हु‌ए हाँ में सर हिला दिया। 

अब हम खाना खा चुके थे, मैंने उसे कहा- “अब मेरे कमरे में आ जा‌ओ... वहाँ एयर-कन्डिशनर है! 

वो बोला- “भाभी, आप जा‌ओ, मैं आता हूँ।” 

उसकी बात सुन कर जब मैंने उसकी पैंट की ओर देखा तो मैं समझ ग‌ई कि यह अब उठने की हालत में नहीं है। 

मैंने बर्तन उठाये और रसो‌ई में छोड़ कर अपने सैंडल टकटकाती अपने कमरे में आ ग‌ई। थोड़ी देर बाद ही विकास भी मेरे कमरे में आ गया और बिस्तर के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैंने टीवी चालू किया और बिस्तर पर टाँगें लंबी करके बैठ ग‌ई और विकास को भी बिस्तर पर आने के लि‌ए कहा। 

वो बोला- “नहीं भाभी, मैं यहाँ ठीक हूँ।” 

मैंने कहा- “अच्छा तो अपना वादा भूल गये कि तुम मेरे पास बैठोगे...?” 

यह सुन कर उसको बिस्तर पर आना ही पड़ा! मगर फिर भी वो मुझसे दूर ही बैठा। मैंने उसको और नजदीक आने के लि‌ए कहा, वो थोड़ा सा और पास आ गया। मैंने फिर कहा तो थोड़ा ओर वो मेरे पास आ गया, बाकी जो थोड़ी बहुत कसर रहती थी वो मैंने खुद उसके साथ जुड़ कर निकाल दी। 

वो नज़रें झुकाये बस मेरे पैरों को ही ताक रहा था। मैंने अपनी एक टाँग थोड़ी उठा कर लचकाते हुए अपना सैंडल पहना हुआ पैर हवा में उसकी नज़रों के सामने मरोड़ा और बोली- “क्यों विकास! सैक्सी हैं ना?” 

ये शब्द सुनकर वो सकपक गया! “क.... क... कौन... भाभी!” 

मुझे हंसी आ गयी और मैं बोली- “सैंडल! अपने सैंडलों के बारे में पूछ रही हूँ मेरे भोले देवर...! बताओ इनमें मेरे पैर सैक्सी लग रहे हैं कि नहीं?” 

“जी..जी भाभी! बहुत सुंदर हैं...!” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

इसी तरह मैं बीच-बीच में उसे उकसाने के लिये छेड़ रही थी लेकिन वो ऐसे ही छोटे-छोटे जवाब दे कर चुप हो जाता। मेरा सब्र अब जवाब देने लगा था। मैं समझ गयी कि अब तो मुझे इसके साथ जबरदस्ती करनी ही पड़ेगी... पता नहीं फिर मौका मिले या ना मिले। अगर मैं बिल्कुल नंगी भी इसके सामने कड़ी हो जाऊँ तो भी ये चूतिया ऐसे ही नज़रें झुकाये बैठ रहेगा। 

टीवी में भी जब भी को‌ई गर्म नजारा आता तो वो अपना ध्यान दूसरी ओर कर लेता... मगर उसके लौड़े पर मेरा और उन नजारों का असर हो रहा था, जिसको वो बड़ी मुश्किल से अपनी टांगों में छिपा रहा था। 

मैंने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया और बोली- “विकास आज तो बहुत गर्मी है...” 

उसने बस सिर हिला हाँ में जवाब दे दिया। वैसे तो कमरे में ए-सी चल रहा था और गर्मी तो बस मेरे बदन में ही थी। 

फिर मैंने अपना दुप्पटा अपने गले से निकाल दिया, जिससे मेरे मम्मे उसके सामने आ गये, वो कभी-कभी मेरे मम्मों की ओर देखता और फिर टीवी देखने लगता। ए-सी में भी उसके पसीने छुटने शुरू हो गये थे। 

मैंने कहा- “विकास, तुमको तो बहुत पसीना आ रहा है, तुम अपनी टी-शर्ट उतार लो।” 

यह सुनकर तो उसके और छक्के छुट गये, बोला- “नहीं भाभी, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।” 

मैंने उसकी टी-शर्ट में हाथ घुसा कर उसकी छाती पर हाथ रगड़ कर कहा- “कैसे ठीक हो, यह देखो, कितना पसीना है?” और अपने हाथ से उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाने लगी... 

वो अपनी टी-शर्ट उतारने को नहीं मान रहा था, तो मैंने उसकी टी-शर्ट अपने दोनों हाथों से ऊपर उठा दी। वो टी-शर्ट को नीचे खींच रहा था और मैं ऊपर.. इसी बीच मैं अपने मम्मे कभी उसकी बाजू पर लगाती और कभी उसकी पीठ पर... और कभी उसके सर से लगाती... 

जब वो नहीं माना तो मैंने उसे जबरदस्ती बिस्तर पर गिरा दिया और... खुद उसके ऊपर लेट ग‌ई जिससे अब मेरे मम्मे उसकी छाती पर टकरा रहे थे और मैं लगातार उसकी टी-शर्ट ऊपर खींच रही थी। उसके गिरने के कारण उसका लौड़ा भी पैंट में उछल रहा था, जो मेरे पेट से कभी-कभी रगड़ जाता, मगर विकास अपनी कमर को दूसरी ओर घुमा रहा था ताकि उसका लौड़ा मेरे बदन के साथ न लग सके...। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

आखिर में उसने हर मान ली और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। 

अब उसकी छाती जिस पर छोटे-छोटे बाल थे मेरे मम्मों के नीचे थी.. मगर मैंने अभी उसको और गर्म करना चाहा ताकि मुझे उसका बलात्कार ना करना पड़े और वो खुद मुझे चोदने के लि‌ए मान जाये। 

मैं उसके ऊपर से उठी और रसो‌ई में गयी। मेरी साँसें तेज़ चल रही थी और चेहरा उत्तेजना से तमतमया हुआ था। मैंने शराब का एक पैग बना कर जल्दी से पिया तो कुछ अच्छा लगा। मैंने सोचा कि एक बार फिर रिझाने की कोशिश करके देखती हूँ क्योंकि कुँवारा लौंडा है... कहीं जबरदस्ती करने जल्दी ना झड़ जाये... सब चौपट हो जायेगा। 

फिर आ‌ईसक्रीम एक ही कप में ले आ‌ई। मेरे आने तक वह बैठ चुका था। मैं फिर से उसके साथ बैठ ग‌ई और खुद एक चम्मच खाकर कप उसके आगे कर दिया। उसने चम्मच उठाया और आ‌ईसक्रीम खाने लगा तो मैंने उसको अपना कंधा मारा जिससे उसकी आ‌ईस क्रीम उसके पेट पर गिर ग‌ई। मैंने झट से उसके पेट से ऊँगली के साथ आ‌ईस क्रीम उठा‌ई और उसी के मुँह की ओर कर दी। उसको समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ आज क्या हो रहा है। 

फिर उसने मेरी ऊँगली अपने मुँह में ली और चाट ली मगर मैं अपनी ऊँगली उसके मुँह से नहीं निकाल रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरी ऊँगली मुँह से बाहर निकाली। 

अब मैंने जानबूझ कर एक बार आ‌ईसक्रीम अपनी छाती पर गिरा दी जो मेरे बड़े से गोल उभार पर टिक ग‌ई। मैंने एक हाथ में कप पकड़ा था और दूसरे में चम्मच। 

मैंने विकास को कहा- “विकास यह देखो, आ‌ईसक्रीम गिर ग‌ई... इसे उठा कर मेरे मुँह में डाल दो।” 

यह देख कर तो विकास की हालत बहुत खराब हो गयी। उसका लौड़ा अब उससे भी नहीं संभल रहा था। उसने डरते हु‌ए मेरे हाथ से चम्मच लेने की कोशिश की मगर मैंने कहा- “अरे विकास, हाथ से डाल दो। चम्मच से तो खुद भी डाल सकती थी।” 

यह सुन कर तो वो और चौंक गया.. 

फिर उसका कांपता हु‌आ हाथ मेरे मम्मे की तरफ बढ़ा और एक ऊँगली से उसने आ‌ईसक्रीम उठा‌ई और फिर मेरे मुँह में डाल दी। मैंने उसकी ऊँगली अपने दांतों के नीचे दबा ली और अपनी जुबान से चाटने लगी। उसने खींच कर अपनी ऊँगली बाहर निकल ली तो मैंने कहा- “क्यों देवर जी दर्द तो नहीं हु‌आ..?” 

उसने कहा- “नहीं भाभी...!”.

मैंने कहा- “फिर इतना डर क्यों रहे हो...?”.

उसने कांपते हु‌ए होंठों से कहा- “नहीं भाभी, डर कैसा...?” 

मैंने कहा- “मुझे तो ऐसा ही लग रहा है...!” 

फिर मैंने चम्मच फेंक दी और अपनी ऊँगली से उसको आ‌ईसक्रीम चटाने लगी। वो डर भी रहा और शरमा भी रहा था और चुपचाप मेरी ऊँगली चाट रहा था। 

मैंने कहा- “अब मुझे भी खिला‌ओ....!” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

तो उसने भी ऊँगली से मुझे आ‌ईसक्रीम खिलानी शुरू कर दी। मैं हर बार उससे को‌ई ना को‌ई शरारत कर रही थी और वो और घबरा रहा था। आखिर आ‌ईसक्रीम ख़त्म हो ग‌ई और हम ठीक से बैठ गये। 

मैंने उसको कहा- “विकास, मैं तुम को कैसी लगती हूँ?” 

उसने कहा- “बहुत अच्छी!” 

तो मैंने पूछा- “कितनी अच्छी?” 

उसने फिर कहा- “बहुत अच्छी! भाभी....!” 

फिर मैंने कहा- “मेरी एक बात मानोगे..?”

उसने कहा- “हाँ बोलो भाभी...?”

मैंने कहा- “तुम्हारे साथ घुलामस्ती करने से मेरी कमर में दर्द हो रहा है, तुम दबा दोगे...?”

उसने कहा- “ठीक है...”

तो मैं उलटी होकर लेट ग‌ई... वो मेरी कमर दबाने लगा।

फिर मैंने कहा- “वो क्रीम भी मेरी कमर पर लगा दो!”

तो वो उठ कर क्रीम लेने गया तब मैंने अपनी कमीज़ उतार दी। अब तो मेरे मम्मे छोटी सी ब्रा में से साफ दिख रहे थे। यह देख कर विकास बुरी तरह से घबरा गया और बोला- “भाभी, यह क्या कर रही हो?”

मैंने कहा- “तुम क्रीम लगा‌ओगे तो कमीज उतारनी ही पड़ेगी... नहीं तो तुम क्रीम कैसे लगा‌ओगे?”

वो चुपचाप बैठ गया और मेरी कमर पर अपना हाथ चलाने लग। फिर मैं उसके सामने सीधी हो ग‌ई और कहा- “विकास रहने दो, आ‌ओ मेरे साथ ही लेट जा‌ओ।” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

उसने कहा- “नहीं भाभी! मैं आपके साथ कैसे सो सकता हूँ!”

मैंने कहा- “क्यों नहीं सो सकते...?”

तो वो बोला- “भाभी आप औरत हो और मैं आपके साथ नहीं सो सकता...!”

मैंने उसकी बाजू पकड़ी और अपने ऊपर गिरा लिया और कस कर पकड़ लिया। मैंने कहा- “विकास तुम्हारी को‌ई सहेली नहीं है क्या?”

उसने कहा- “नहीं भाभी....अब मुझे छोड़ो...!”

मैंने कहा- “नहीं विकास, पहले मुझे अपनी पैंट में दिखा‌ओ कि क्या है जो तो मुझ से छिपा रहे हो...?” 

वो बोला- “नहीं भाभी, कुछ नहीं है...!”

मैंने कहा- “नहीं मैं देख कर ही छोड़ूंगी.. मुझे दिखा‌ओ क्या है इसमें...!”

वो बोला- “भाभी, इससे पेशाब करते है... आपने भैया का देखा होगा...!”

मैंने फिर कहा- “मुझे तुम्हारा भी देखना है...!” और पैंट के ऊपर से ही उसको अपने हाथ में पकड़ लिया। हाथ में लेते ही मुझे उसकी गर्मी का एहसास हो गया।

विकास अपना लौड़ा छुड़ाने की कोशिश करने लगा मगर मेरे आगे उसकी एक ना चली! ना चाहते हुए भी उसने मुझे जबरदस्ती करने के लिये मजबूर कर दिया था।

फिर वो बोला- “भाभी अगर किसी को पता चल गया कि मैंने आपको यह दिखाया है तो मुझे बहुत मार पड़ेगी।”

मैंने कहा- “विकास, अगर किसी को पता चलेगा तो मार पड़ेगी... मगर हम किसी को नहीं बता‌येंगे।”

फिर मैंने उसकी पैंट की हुक खोली और पैंट नीचे सरका दी। उसका कच्छा भी नीचे सरका दिया... और उसका बड़ा सा लौड़ा मेरे सामने था.... इतना बड़ा लौड़ा मैंने आज तक नहीं देखा था।

मैं बोली- “विकास, तुम मुझसे इसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे मगर यह तो अपने आप ही बाहर भाग रहा है....”

विकास ने जल्दी से अपने हाथ से उसको छुपा लिया और पैंट पहनने लगा मगर मैंने खींच कर उसकी पैंट उतार दी और कच्छा भी उतार दिया। अब मैं और सब्र नहीं कर सकती थी और यह मौका हाथ से नहीं जाने दिया और उसका लौड़ा झट से मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

पहले तो वो मेरे सर को पकड़ कर मुझे दूर करने लगा मगर थोड़ी देर में ही वो शान्त हो गया क्योंकि मेरी जुबान ने अपना जादू दिखा दिया था। अब वो अपना लौड़ा चुसवाने का मजा ले रहा था। मैं उसके लौड़े को जोर-जोर से चूस रही थी और विकास बिस्तर पर बेहाल हो रहा था... उसे भी अपने लौड़ा चुसवाने में मजा आ रहा था। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। फिर उसके लौड़े ने अपना सारा माल मेरे मुँह में उगल दिया और मेरा मुँह उसके माल से भर गया। मैंने सारा माल पी लिया। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैं अपने हाथों को चाटती हु‌ई उठी और बोली- “विकास अब तुमको कुछ देखना है तो बता‌ओ? मैं दिखाती हूँ!”

उसने मेरे मम्मों की ओर देखा और बोला- “भाभी, आपके ये तो मैंने देख लि‌ए...!”

मैंने कहा- “कुछ और भी देखोगे...?”

उसने कहा- “क्या...?” 

मैंने उसको कहा- “मेरी कमर से ब्रा की हुक खोलो!”

तो उसने पीछे आकर मेरी ब्रा खोल दी। मेरे दोनों कबूतर आजाद हो गये। फिर मैं उसकी ओर घूमी और उसको कहा- “अच्छी तरह से देखो हाथ में पकड़ कर...!”

उसने हाथ लगाया और फिर मुझसे बोला- “भाभी, मुझे बहुत डर लग रहा है...!”

मैंने कहा- किसी से मत डरो! किसी को पता नहीं चलेगा! और जैसे मैं कहती हूँ तुम वैसे ही करो, देखना तुम को कितना मजा आता है...!”

फिर मैंने उसका सर अपनी छाती से दबा लिया और अपने मम्मे उसके मुँह पर रगड़ने लगी।

वो भी अब शर्म छोड़ कर मेरे मम्मों का मजा ले रहा था। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोलते हुए उसको कहा- “मेरी सलवार उतार दो!”

तो उसने मेरी सलवार उतार दी और मुझे नंगी कर दिया। मेरी ट्राउज़र सलवार की चौड़ी मोहरी की वजह से मेरी सैंडल भी उसमें नहीं अटकी। मैंने पैंटी तो पहनी ही नहीं थी। अब हम दोनों नंगे थे। मैंने उसको अपनी बाहों में लिया और अपने साथ लिटा लिया। फिर मैंने उसके होंठ चूसे और फिर मेरी तरह वो भी मेरे होंठ चूसने लगा। अब उसका डर कम हो चुका था और शर्म भी... 

अब मैं उसके मुँह के ऊपर अपनी चूत रख कर बैठ ग‌ई और कहा- “जैसे मैंने तुम्हारे लौड़े को चूसा है तुम भी मेरी चूत को चाटो और अपनी जुबान मेरी चूत के अन्दर घुसा‌ओ।”

वो मेरी चूत चाटने लगा। उसको अभी तक चूत चाटना नहीं आता था मगर फिर भी वो पूरा मजा दे रहा था। मेरी चूत से पानी निकल रहा था जिसको वो चाटता जा रहा था और कभी-कभी तो मेरी चूत के होंठो को अपने दांतों से काट भी देता था जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उसका लौड़ा फिर से तन चुका था। 

अब मैं उठी और अपनी चूत को उसके लौड़े के ऊपर सैट करके बैठ ग‌ई, मेरी गीली चूत में उसका लौड़ा आराम से घुस गया पर उसका लौड़ा बहुत बड़ा था। थोड़ा ही अन्दर जाने के बाद मुझे लगने लगा कि यह तो मेरी चूत को फाड़ डालेगा।

शायद उसको भी तकलीफ हो रही थी, वो बोला- “भाभी, मेरा लौड़ा आपकी चूत से दब रहा है।”

मैंने कहा- “बस थोड़ी देर में ठीक हो जायेगा... पहली बार में सबको तकलीफ होती है।” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैंने थोड़ी देर आराम से लौड़ा अन्दर-बाहर किया। फिर जब वो भी नीचे से अपने लौड़े को अन्दर धकेलने लगा तो मैं भी अपनी गाण्ड उठा-उठा कर उसके लौड़े का मजा लेने लगी। अब तक वो भी पूरा गर्म हो चुका था, उसने मुझे अपने नीचे आने के लि‌ए कहा तो मैं वैसे ही लौड़े अन्दर लि‌ए ही एक तरफ़ से होकर उसके नीचे आ ग‌ई और वो ऊपर आ गया।

वो मुझे जोर-जोर से धक्के मारना चाहता था। उसका लौड़ा बाहर ना निकल सके इसलिये मैंने अपनी टांगों को उसकी कमर में घुमा लिया कैंची की तरह कस लीं। फिर वो आगे-पीछे होकर धक्के मारने लगा। मैं भी नीचे से उसका साथ दे रही थी, अपनी गाण्ड को हिला-हिला कर। उसके हर धक्के के साथ मेरी सैंडलों की ऊँची ऐड़ियाँ उसके चूतड़ों में गड़ जाती थीं।

काफी देर तक हमारी चुदा‌ई चलती रही और फिर हम दोनों झड़ गये और वैसे ही लेट रहे।

मेरी इस एक चुदा‌ई से अभी प्यास नहीं बुझी थी। इसलि‌ए मैंने फिर से विकास के ऊपर जाकर उसका गर्म करना शुरू किया मगर वो तो पहले से ही तैयार था। अब उसने को‌ई शर्म नहीं दिखा‌ई और मुझे घोड़ी बनने के लि‌ए बोल दिया।

मैंने भी उसके सामने अपनी गाण्ड उठा‌ई और सर को नीचे झुका दिया और फिर उसने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया। उसके पहले धक्के ने ही मेरी जान ले ली। उसका लौड़ा मेरी चूत फाड़ कर अन्दर घुस गया। मगर मैं ऐसी ही चुदा‌ई चाहती थी।

उस रात विकास ने मुझे तीन बार चोदा। मैं तो उससे गाण्ड भी मरवाना चाहती थी मगर वो एक बार मेरे मुँह में और तीन बार मेरी चूत में झड़ चुका था और उसमे अब हिम्मत बाकी नहीं थी। फिर सुबह-सुबह नौकरानी के आने का वक्त भी हो गया था और मेरे सास-ससुर भी वापस आने वाले थे इसलिये सोचा कि फिर मौका मिलेगा तो गाँड जरूर मरवा‌उँगी उससे।


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

कोमलप्रीत कौर के गरम गरम किस्से

भाग-४: बीच रात की बात

लेखिका : कोमलप्रीत कौर

भाग-३ (मेरा प्यारा देवर) से आगे....

यह बात तब की है जब हम अपनी कोठी की मरम्मत करवा रहे थे, जिसके लि‌ए बहुत सारे मजदूर लगे थे। उनमें से एक बिहारी मजदूर हमारी कोठी के पीछे बनी शेड के पास कमरे में रहता था। 

एक दिन सुबह मैं अपनी एक सहेली की बहन की शादी में लुधियाना गयी थी। हमारे गाँव से मुश्किल से घंटे भर का रास्ता है और दिन की शादी थी इसलिये शाम को अंधेरे से पहले ही वापस आने वाली थी तो ससुर जी के कहने पर उस दिन मैं अकेली ही होंडा सिटी ड्राइव करके गयी थी। शादी में कुछ सहेलियाँ तो मुझे बहुत अर्से के बाद मिली थी तो उन्होंने जोर दे कर मुझे रात के खाने के लिये रोक लिया। मैंने फोन करके ससुर जी को बता दिया कि मुझे आने में रात हो जायेगी और चिंता न करें। 

पंजाबी शादियों में पीना-पिलाना तो आम बात है। आज कल तो लड़कियाँ भी पीछे नहीं रहतीं। कुछ खुल्ले‍आम पैग लगाती हैं और जिनको रिश्तेदारों या बुजुर्गों की शरम होती है, वो कोक या जूस में शराब मिला कर मज़ा लेती हैं। वैसे तो आप सब जानते ही हैं कि मैं अपनी लिमिट के हिसाब से एक या दो पैग पी लेती हूँ मगर उस दिन कुछ ज्यादा ही हो गयी। हुआ ये कि सहेलियों के साथ मौज-मस्ती और नाच गाने में चार-पाँच पैग हो गये और नशे का कुछ खास एहसास भी नहीं हुआ। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

जब मैं वहाँ से रात के दस बजे निकल रही थी तब भी बहुत ही हल्का सा ही नशा था। पूरा भरोसा था कि कार चलाने में कोई दिक्कात नहीं होगी। लेकिन कार चलाते हुए आधे रास्ते, फगवाड़े के पास, ही पहुँची थी कि अचानक तेज़ नशा छाने लगा। रात के वक्त कुछ खास ट्रैफिक नहीं था और मैं हाई-वे पर नशे में बिना किसी चिंता के गाने सुनती हुई अपनी धुन में कार चला रही थी। उस दिन सुबह से चूत रानी की मुठ भी नहीं मारी थी तो नशे में अब चुत भी बिलबिलाने लगी थी। कार चलाते-चलाते ही एक हाथ से मैंने अपनी चूड़ीदार सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया और चूतड़ उचका कर सलवार और पैंटी जाँघों तक खिसका दीं... और फिर एक हाथ से स्टेरिंग संभाले हुए अपनी चूत सहलने लगी। 

खैर, कोई दुर्घटना नहीं हुई और मैं सही सलामत धीरे-धीरे घर पहुँची। रात के साढ़े-ग्यारह बज गये थे और कोठी में अंधेरा था। सास ससुर सो गये थे। मैंने कार लेजा कर कोठी के पिछले हिस्से में पार्क की। अपनी पैंटी और सलवार ठीक करके कार से उतरने लगी तो एहसास हुआ कि कितने नशे में थी। कार से उतर कर चलने लगी तो नशे में बुरी तरह डगमगा रही थी। साढ़े चार इंच ऊँची पेंसिल हील के सैंडल में मेरी चाल और ज्यादा बहक रही थी लेकिन इस वक्त मुझे सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर मेरे सास या ससुर उठ गये और इस हालत में देख लिया तो क्या होगा। मेरे पीने पर उन्हें कोई एतराज़ नहीं था लेकिन इतनी ज्यादा शराब पी कर नशे में धुत्त होना और उस पर ऐसी हालत में इतनी दूर से रात को कार चला कर आना तो उन्हें बेशक मंज़ूर नहीं होगा। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

इसलिये मैंने सोचा कि कोठी के दूसरी तरफ पीछे के दरवज़े से अंदर जाती हूँ ताकि किसी को मेरे आने का पता न चले। वैसे ही नशे में लड़खड़ाती मैं रास्ते में उस शेड की पास पहुँची जिसमें वो बिहारी मजदूर रहता था। मजदूर के कमरे में हल्की सी रौशनी हो रही थी। मैं उसके कमरे के पास पहुँची ही थी कि किसी ने मेरे ऊपर टार्च की ला‌इट मारी। 

अचानक आ‌ई इस ला‌इट से मईं चौंक उठी.... डर से मेरा बदन पसीने-पसीने हो रहा था... 

ला‌इट मेरी ओर आ रही थी... और मैंने अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा लिया.... मैं सोच रही थी कि कहीं कोई चोर लुटेरा तो नहीं है... क्योंकि मैंने उस वक्त कीमती गहने और कपड़े पहने हुए थे। 

ला‌इट मेरे पास पहुँच चुकी थी और फिर बंद हो ग‌ई। मुझे कुछ दिखा‌ई नहीं दे रहा था। किसी ने मेरे बालों को पकड़ लिया.... तो मेरी हल्की सी चीख निकल ग‌ई। फिर किसी ने मेरे होंठों पर होंठ रख दि‌ए और बेतहाशा चूसने लगा। मैं उसके बदन को अपने हाथ से दूर हटा रही थी और पहचानने की कोशिश कर रही थी कि यह कौन है। 

किसी मर्द की मजबूत बाँहों में कसती जा रही थी मैं... आखिर कौन है... मैं सोच-सोच कर पागल हो रही थी.... अब तक उसका हाथ मेरे मम्मों तक पहुँच चुका था। मैं अपने आपको छुड़ाने की कोशिश कर रही थी कि अचानक मेरा हाथ उसकी टार्च पर लगा। मैंने जोर से उसके हाथ से टार्च खींची और उसके चेहरे की तरफ करके आन कर दी...उफ़ यह....यह मजदूर......यह कहाँ से आ गया। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

ओह्ह्ह.... यह मेरे मम्मे ऐसे मसल रहा है जैसे मैं इसकी बीवी हूँ। मैंने उसे धक्का मारा और मेरे मुँह से आवाज निकली- “छोड़ो मुझे... क्या कर रहे हो...?” 

मगर मेरे धक्के का जैसे उस पर को‌ई असर नहीं हु‌आ। नशे की हालत में उसकी मजबूत बाँहों से निकल पाना मेरे लि‌ए मुश्किल था। उसने मुझ से टार्च छीन ली और बंद कर दी और बोला- “अरे रानी... तू इतनी रात को नशे में झूमती हुई इधर क्या कर रही है?” 

मेरी जुबान भी लड़खड़ा रही थी- “क्या.. बक..बक्क.. बकवास कर रहे हो?” 

मेरे इतना कहते ही उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और अपने कमरे की ओर चल दिया। वो मुझे अपने कमरे में ले गया और मुझे उठाये हु‌ए ही दरवाजे की कुण्डी लगा दी। फिर मुझे चारपा‌ई पर फेंक दिया... और खुद भी मेरे ऊपर ही गिर गया। 

मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा था कि मैं क्या करूं। मैं चुपचाप उसके नीचे लेटी रही और वो अपने लण्ड का दबाव मेरी चूत पर डाल रहा था और मेरे बदन को चाटने और नोचने लगा और बोला- “तो बता रानी.. दारू पी कर क्या करने आ‌ई थी इतनी रात को...?” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैं कुछ नहीं बोली....बस लेटी रही.....मुझे पता था कि आज मेरी चूत में यह अपना लौड़ा घुसा कर ही छोड़ेगा। मेर तो खुद का बदन गर्म हो रहा था। 

वो प्यार से मेरे बदन को चूमने लगा। अब तक मेरा दिल जो जोर-जोर से धड़क रहा था, शांत होने लगा और डर भी कम हो गया था। यही नहीं, उसकी हरकतों से मेरा ध्यान भी उसकी तरफ जा रहा था... 

उसके लण्ड का अपनी चिकनी चूत पर दबाव, मेरे मस्त मोटे चूचों को दबा रहा उसका हाथ, मेरी पतली कमर को जकड़ कर अपनी ओर खींच रहा उसका दूसरा हाथ और उसकी जुबान जो मेरे गुलाब की पंखड़ियों जैसे होंठों का रसपान कर रही थी। यह सब मुझको बहका रहा था। अब तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत भी उसका साथ दे रही थी। 

उसका लण्ड मुझे कुछ ज्यादा ही तगड़ा महसूस हो रहा था... पता नहीं क्यों… जैसे उसका लण्ड ना होकर कुछ और मोटी और लम्बी चीज़ हो। मेरी गर्मी को वो भी समझ चुका था...वो बोला- “जानेमन, प्यार का मजा तुम्हें भी चाहि‌ए और मुझे भी, फिर क्यों ना दिल भर के मजे लि‌ए जायें.. ऐसे घुट घुट कर प्यार करने से क्या मजा आ‌एगा।” 

मैं भी अब अपने आप को रोक नहीं सकती थी... लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल दी... फिर तो जैसे वो पागल हो कर मुझे चूमने चाटने लगा। मैं भी बहुत दिनों से रात-दिन मुठ मार-मार कर काम चल रही थी और लण्ड की प्यासी थी... मुझे भी ऐसे ही प्यार की जरूरत थी जो मुझे मदहोश कर डाले और मेरी चूत की प्यास बुझा दे। मैं भी उसका साथ दे रही थी। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। नीचे उसने लुंगी और कच्छा पहना हु‌आ था...उसकी लुंगी भी मैंने खींच कर निकाल दी। 

अब उसके कच्छे में से बड़ा सा लण्ड मेरी जांघों में घुसने की कोशिश कर रहा था। उसने भी मेरी कमीज़ नोच कर फाड़ते हुए उतार दी और वैसे ही मेरी सलवार के भी नोच-नोच कर चिथड़े करके उतार दी... अब में ब्रा और पैंटी और सैंडल में थी और वो कच्छे में। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मेरी ब्रा के ऊपर से ही वो मेरे मम्मों को मसलने लगा और फिर ब्रा को नोच दिया। अब मेरे मोटे-मोटे मम्मे उसके मुँह के सामने तने हु‌ए हिल रहे थे। उसने मेरे एक मम्मे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा। फिर बारी-बारी दोनों को चूसते हु‌ए, मसलते हु‌ए धीरे-धीरे मेरे पेट को चूमता हु‌आ मेरी चूत तक पहुँच गया। 

वो पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को चूम रहा था... मैंने खुद ही अपने हाथों से अपनी पैंटी को नीचे कर दिया और अपनी चूत को उठा कर उसके मुँह के साथ जोड़ दिया। उसने भी अपनी जुबान निकाली और चूत के चारों तरफ घुमाते हु‌ए चूत में घुसा दी। 

“अहहहा अहहहह!” मैंने भी अपनी कमर उठा कर उसका साथ दिया। काफी देर तक मेरी चूत के होंठों और उस मजदूर के होंठों में प्यार की जंग होती रही। अब मेरी चूत अपना लावा छोड़ चुकी थी और उसकी जुबान मेरी चूत को चाट-चाट कर बेहाल किये जा रही थी। 

अब मैं उसके लण्ड का रसपान करने के लि‌ए उठी... हम दोनों खड़े हो गये। मैं नशे में डगमगाने लगी तो उसने फिर से मेरे बदन को अपनी बांहों में ले लिया। मैं भी उसकी बांहों में सिमट ग‌ई। उसका बड़ा सा लण्ड मेरी जांघों के साथ टकरा रहा था जैसे मुझे बुला रहा हो कि आ‌ओ मुझे अपने नाजुक होंठों में भर लो। 

वो मजदूर अपनी टाँगें फैला कर चारपा‌ई पर बैठ गया। मैं उसके सामने अपने घुटनों के बल जमीन पर बैठ ग‌ई। उसके कच्छे का बहुत बड़ा टैंट बना हु‌आ था, जो मेरी उम्मीद से काफी बड़ा था। 

मैंने कच्छे के ऊपर से ही उसके लण्ड पर हाथ रखा... लेखिका : कोमलप्रीत कौर

“ओह्ह्ह...” मैं तो मर जा‌ऊँगी... यह लण्ड नहीं था... महालण्ड था... पूरा तना हु‌आ और लोहे की छड़ जैसा.... मगर उसको हाथ में पकड़ने का मजा कुछ नया ही था। मैंने दोनों हाथों से लण्ड को पकड़ लिया। मेरे दोनों हाथों में भी लण्ड मुझे बड़ा लग रहा था। 

मैंने मजदूर की ओर देखा, वो भी मेरी तरफ देख रहा था, बोला- “क्यों जानेमन, इतना बड़ा लौड़ा पहले कभी नहीं लिया क्या?” 

मैंने कहा- “नहीं... लेना तो दूर, मैंने तो कभी देखा भी नहीं।” नशे और उत्तेजना से मेरी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी। 

वो बोला- “जानेमन, इसको बाहर तो निकालो.. फिर प्यार से देखो.... और अपने होंठ लगा कर इसे मदहोश कर दो... यह तुमको प्यार करने के लि‌ए है.....तुमको तकलीफ देने के लि‌ए नहीं!” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मुझे भी इतना बड़ा लौड़ा देखने की इच्छा हो रही थी। मैंने उसके कच्छे को उतार दिया। उसका फनफनाता हु‌आ काले सांप जैसे लौड़ा मेरे मुँह के सामने खड़ा हो गया। ऐसा लौडा मैंने कभी नहीं देखा था... कम से कम ग्यारह-बारह इंच था या शायद उससे भी बड़ा। 

मैं अभी उस काले नाग को देख ही रही थी कि उसने मेरे सर को पकड़ा और अपने लौड़े के साथ मेरे मुँह को लगाते हु‌ए बोला... “जानेमन अब और मत तड़पा‌ओ... इसे अपने होंठो में भर लो और निकाल दो अपनी सारी हसरतें...!” 

मैंने भी उसके काले लौड़े को अपने मुँह में ले लिया। मेरे मुंह में वो पूरा आ पाना तो नामुमकिन था, फिर भी मैं उसको अपने मुँह में भरने की कोशिश में थी। ऊपर से वो भी मेरे बालों को पकड़ कर मेरे सर को अपने लण्ड पर दबा रहा था। जैसे वो मेरे मुँह की चुदा‌ई कर रहा था, उससे लगता था कि मेरी चूत की बहुत बुरी हालत होने वाली है। 

वो कभी मेरे चूचों, कभी मेरी पीठ और कभी मेरे रेशमी काले बालों में हाथ घुमा रहा था... मैं जोर-जोर से उसके लण्ड को चूस रही थी। फिर अचानक वो खड़ा हो गया और मेरे मुँह से अपना लण्ड निकाल कर मुझे नीचे ही एक चादर बिछा कर लिटा दिया। मैं सीधी लेट ग‌ई, वो मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और अपना लौड़ा मेरी चूत पर रख दिया। मेरी चूत तो पहले से ही पानी-पानी हो रही थी... अपने अन्दर लण्ड लेने के लि‌ए बेचैन हो रही थी... मगर मैं नशे में भी इतने बड़े लण्ड से डर रही थी। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

फिर उसने मेरी चूत पर अपने लण्ड रखा और धीरे से लण्ड को अन्दर धकेला। थोड़ा दर्द हु‌आ... मीठा-मीठा। फिर थोड़ा सा और अन्दर गया... और दर्द भी बढ़ने लगा। वो मजदूर बहुत धीरे-धीरे लण्ड को चूत में घुसा रहा था, इसलि‌ए मैं दर्द सह पा रही थी। 

मगर कब तक.... 

मेरी चूत में अभी आधा लण्ड ही गया था कि मेरी चूत जैसे फट रही थी। मैंने अपने हाथ से उसका लण्ड पकड़ लिया और बोली- “बस करो, मैं और नहीं ले पा‌ऊँगी...” 

वो बोला- “जानेमन, अभी तो पूरा अन्दर भी नहीं गया...और तुम अभी से...?” 

मैंने कहा- “नहीं और नहीं... मेरी चूत फट जा‌एगी!” 

उसने कहा- “ठीक है, इतना ही सही...!” 

और फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगा। मैं भी उसका साथ देने लगी। फिर वो आधे लण्ड को ही अन्दर-बाहर करने लगा, मेरा दर्द कम होता जा रहा था। मैं भी अपनी गाण्ड हिला-हिला कर उसका साथ देने लगी। साथ क्या अब तो मैं उसका लण्ड और अन्दर लेना चाहती थी। वो भी इस बात को समझ गया और लण्ड को और अन्दर धकेलने लगा। मैं अपनी टाँगें और खोल रही थी ताकि आराम से लण्ड अन्दर जा सके। 

मुझे फिर से दर्द होने लगा था। आधे से ज्यादा लण्ड अंदर जा चुका था। मेरा दर्द बढ़ता जा रहा था। मैंने फिर से उसका लण्ड पकड़ लिया और रुकने को कहा। वो फिर रुक गया और धीरे-धीरे लण्ड अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर के बाद जब मुझे दर्द कम होने लगा तो मैंने अपनी टाँगें उसकी कमर के साथ लपेट ली और अपनी गाण्ड को हिलाने लगी। वो समझ गया कि मैं उसका पूरा लण्ड लेने के लि‌ए अब तैयार थी। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

तभी उसने एक जोर का झटका दिया और पूरा लण्ड मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ दिया। 

“अहहहहा..आहहहहा..!” मेरी चींख निकलने वाली थी कि उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया। मेरे मुँह से “आहहहहा आहहहहहा” की आवाजें निकल रही थी। पूरा लण्ड अन्दर धकेलने के बाद वो कुछ देर शांत रहा और फिर लण्ड अंदर-बाहर करने लगा। इस तेज प्रहार से मुझे दर्द तो बहुत हु‌आ... मगर थोड़ी देर के बाद मुझे उससे कहीं ज्यादा मजा आ रहा था, क्योंकि अब मैं पूरे लण्ड का मजा ले रही थी जो मेरी चूत के बीचों-बीच अन्दर-बाहर हो रहा था। 

उसका लण्ड मेरी चूत में जहाँ तक घुस रहा था वहाँ तक आज तक किसी का लण्ड नहीं पहुँचा था.. ऐसा में महसूस कर सकती थी। मेरी चूत तब तक दो बार झड़ चुकी थी और बहुत चिकनी भी हो ग‌ई थी। इसलि‌ए अब उसका लण्ड फच-फच की आवाजें निकाल रहा था। मैं फिर से झड़ने वाली थी मगर उसका लण्ड तो जैसे कभी झड़ने वाला ही नहीं था। मैं अपनी गाण्ड को जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत के अन्दर तक चोट मार रहा था। मेरी चूत का पानी छूटने वाला था और मैं और उछल-उछल कर अपनी चूत में उसका लण्ड घुसवाने लगी। फिर मेरा लावा छूट गया और मैं बेहाल होकर उसके सामने लेटी रही, मगर उसके धक्के अभी भी चालू थे। 

फिर उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे घोड़ी बन जाने को कहा। मैं उठी और घोड़ी बन ग‌ई और अपने हाथ आगे पड़ी चारपा‌ई पर रख लि‌ए। वो मेरे पीछे आया और फिर से मेरी चूत में लण्ड घुसेड़ दिया... इस बार मुझे थोड़ा सा ही दर्द हु‌आ। उसने धीरे-धीरे सारा लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। मैंने अपने हाथ नीचे जमीन पर रख दि‌ए ताकि मेरी चूत थोड़ी और खुल जाये और दर्द कम हो। मैंने अपनी कमर पूरी नीचे की तरफ झुका दी। उसका लण्ड फिर से रफ़्तार पकड़ चुका था। मैं भी अपनी गाण्ड को उसके लण्ड के साथ गोल-गोल घुमा रही थी। जब लण्ड चूत में गोल-गोल घूमता है तो मुझे बहुत मजा आता है। मैं लण्ड का पूरा मजा ले रही थी। उसके धक्के तेज होने लगे थे जैसे वो छूटने वाला हो। 

मैं भी पूरी रफ़्तार से उसका साथ देने लगी ताकि हम एक साथ ही पानी छोड़ें। इस तरह से दोनों तेज-तेज धक्के मारने लगे। जिससे मेरी चूत में ही नहीं गाण्ड में भी दर्द हो रहा था... जैसे चूत के साथ-साथ गाण्ड भी फट रही हो। मेरा पानी फिर से निकल गया। 

तभी उसका भी ज्वालामुखी फ़ूट गया और मेरी चूत में गर्म बीज की बौछार होने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत के अन्दर तक घुसा हु‌आ था इसलि‌ए आज लण्ड के पानी का कुछ और ही मजा आ रहा था। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

हम दोनों वैसे ही जमीन पर गिर गये। मैं नीचे और वो मेरे ऊपर। उसका लण्ड धीरे-धीरे सुकड़ कर बाहर आ रहा था। मैं नशे में थी और मुझे नींद आने लगी थी… मगर वहाँ पर तो नहीं सो सकती थी। इसलि‌ए मैं उठने लगी। उसने मुझे रोका और पूछा- “रानी, कल फिर आ‌एगी या मैं तेरे कमरे में आ‌ऊँ?” 

मैंने कहा- “आज तो बच ग‌ई! कल क्या फाड़ कर दम लेगा?” 

उसने कहा- “रानी, आज तो चूत का मजा लिया, कल तेरी इस मस्त गाण्ड का मजा लेना है!” 

मैंने कहा- “कल की कल सोचूँगी!” 

मुझे पता था कि आज की चुदा‌ई से मुझ से ठीक तरह चला भी नहीं जायेगा तो कल गाण्ड कैसे चुदवा पा‌ऊँगी। मैंने देखा की मेरी नयी सलवार कमीज़ तो चिथड़े-चिथड़े हो गयी थी। ब्रा के भी हुक टूट गये थे। वो मेरे चूचों को फिर मसलने लगा। 

सिर्फ पैंटी ही ऐसी थी जो फटी नहीं थी। वो पैंटी पकड़ कर मुझे पहनाने लगा और फिर मेरी चूत पर हाथ घिसते हु‌ए मेरी पैंटी पहना दी। रात के अंधेरे में मैं ऐसे ही नंगी छिपछिपा कर कोठी के पीछे के दरवाजे से चुपचाप अपने कमरे तक पहुँच सकती थी। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

फिर वो मेरे बालों को सँवारने लगा, मेरे बालों में हाथ घुमाते हु‌ए वो मेरे मुँह और होंठों को भी चूम रहा था। फिर मैं वहाँ से सिर्फ पैंटी और सैंडल पहने ही बाहर आ ग‌ई और अपने कमरे की तरफ चल दी... मेरी चूत में इतना दर्द हो रहा था कि ऊँची ऐड़ी के सैंडल में चलते हुए कमरे तक मुश्किल से पहुँची मैं... और कुण्डी लगा कर सो ग‌ई.. अगले दिन भी मेरी चूत दर्द करती रही..

!!! क्रमशः !!!


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

कोमलप्रीत कौर के गरम गरम किस्से

भाग ५. चार फौजी और चूत का मैदान

लेखिका : कोमलप्रीत कौर

भाग-४ (बीच रात की बात) से आगे....

सर्दियों के दिन थे, मैं अपने मायके ग‌ई हु‌ई थी, मेरे भैया भाभी के साथ ससुराल गये थे और घर में मैं, मम्मी और पापा ही थे। उस दिन ठण्ड बहुत थी, मेरा दिल कर रहा था कि आज को‌ई मेरी गरमागरम चुदा‌ई कर दे। कईं बार चूत में केला और बीयर की बोतल डाल कर मुठ मार चुकी थी लेकिन चूत में चैन नहीं पड़ रहा था। मैं दिल ही दिल में सोच रही थी कि को‌ई आये और मेरी चुदा‌ई करे.. कि अचानक दरवाजे की घण्टी बजी। 

मैंने दरवाजा खोला तो सामने चार आदमी खड़े थे। एकदम तंदरुस्त और चौड़ी छातियाँ! 

फिर पीछे से पापा की आवाज आ‌ई- “ओये मेरे जिगरी यारो, आज कैसे रास्ता भूल गये?” 

वो भी हंसते हु‌ए अन्दर आ गये और पापा को मिलने लगे... 

पापा ने बताया कि “हम सब आर्मी में इकट्ठे ही थे.. एक राठौड़ अंकल, दूसरे शर्मा अंकल, तीसरे सिंह अंकल और चौथे राणा अंकल ! सभी एक्स आर्मी मैन हैं।” 

वो सभी मुझे मिले और सभी ने मुझे गले से लगाया। गले से क्या लगाया, सबने अपनी छाती से मेरे चूचों को दबाया। 

मैं समझ ग‌ई कि ये सभी ठरकी हैं। अगर किसी को भी ला‌इन दूँगी तो झट से मुझे चोद देगा। मैं खुश हो ग‌ई कि कहाँ एक लौड़ा मांग रही थी और कहाँ चार-चार लौड़े आ गये। पापा उनके साथ अन्दर बैठे थे और मैं चाय लेकर ग‌ई। जैसे ही मैं चाय रखने के लि‌ए झुकी तो साथ ही बैठे राठौड़ अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हु‌ए कहा- “कोमल बेटी.. तुम बता‌ओ क्या करती हो...?” 

मैं चाय रख कर राठौड़ अंकल के पास ही सोफे के हत्थे पर बैठ ग‌ई और अपने बारे में बताने लगी। साथ ही राठौड़ अंकल मेरी पीठ पर हाथ चलाते रहे और फिर बातों-बातों में उनका हाथ मेरी कमर से होता हु‌आ मेरे कूल्हों तक पहुँच गया। 

यह बात बाकी फौजियों ने भी नोट कर ली सिवा‌ए मेरे पापा के। फिर मम्मी की आवाज आ‌ई तो मैं बाहर चली ग‌ई और फिर कुछ खाने के लि‌ए लेकर आ ग‌ई। जब मैं झुक कर नाश्ता परोस रही थी तो उन चारों का ध्यान मेरे मम्मों की तरफ ही था और मैं भी उनकी पैंट में हलचल होती देख रही थी। 

अब फिर मैं राठौड़ अंकल के पास ही बैठ ग‌ई ताकि वो भी मेरे दिल की बात समझ सकें। मगर वो ही क्या उनके सारे दोस्त मेरे दिल की बात समझ गये। वो सारे मेरे गहरे गले में से दिख रहे मेरे कबूतर, मेरी गाण्ड और मेरी मदमस्त जवानी को बेचैन निगाहों से देख रहे थे और राठौड़ अंकल तो मेरी पीठ से हाथ ही नहीं हटा रहे थे। 

फिर मैं रसो‌ई में उनके लि‌ए खाना बनाने में मम्मी की मदद करने लगी। बीच में ही मम्मी ने मुझे कहा- “पुत्तर! घर में महमान आये हैं... तू भी खाने के पहले मुँह हाथ धो कर कुछ अच्छे कपड़े पहन कर तैयार हो जा।” 

मम्मी ना भी कहती तो मै तो उन चारों को लट्टू करने के लिये तैयार होने ही वाली थि। मैंने चुन कर झीनी सी सबसे गहरे गले वाली कमीज़ और कसी हुई चुड़ीदार सलवार पहन ली। अपने मम्मों को मैंने चुन्नी से ढक लिया जिससे मम्मी को शक ना हो। 

हमने उनके पीने का इंतजाम ऊपर के कमरे में कर दिया। शराब के एक दौर के बाद सबने खाना खा लिया। 

फिर मैंने और मम्मी ने भी खाना खाया और फिर मम्मी तो जाकर लेट ग‌ई। मम्मी ने तो नींद की गोली खा‌ई और सो ग‌ई पर मुझे कहाँ नींद आने वाली थी... घर में चार लौड़े हों और मैं बिना चुदे सो जा‌ऊँ! ऐसा कैसे हो सकता है....? 

मैं ऊपर के कमरे में चली ग‌ई, वहाँ पर फ़िर शराब का दौर चल रहा था। मुझे देख कर पापा ने तो मुझे जा कर सो जाने के लि‌ए बोला, मगर सिंह अंकल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने साथ सटा कर बिठा लिया और बोले- “अरे यार, बच्ची को हमारे पास बैठने दे, हम इसके अंकल ही तो हैं!” तो पापा मान गये और फिर सिंह अंकल मुझे बोले – “आओ हमारे साथ भी एक पैग लगाओ!” मैंने मुस्कुरा कर हामी भरी तो उन्होंने खुद शराब का एक बड़ा पैग बना कर मुझे पकड़ा दिया और उसके बद सारे अंकल मुझे फ़ौज की बातें सुनाने लगे। 

फिर हम सभी शराब पीते रहे। मैं तो पहला ही पैग बहुत धीरे-धीरे पी रही थी, मगर वो सभी पापा को बड़े-बड़े पैग दे रहे थे और खुद छोटे-छोटे पैग ले रहे थे। मैं समझ ग‌ई कि वो चारों पापा को जल्दी लुढ़काने के चक्कर में हैं। 

फिर सिंह अंकल ने भी अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया। वो मेरी पीठ पर बिखरे मेरे बालों में हाथ घुमाने लगे। जब मेरी तरफ से को‌ई विरोध नहीं देखा तो वो मेरी गाण्ड पर भी हाथ घुमाने लगे। पापा का चेहरा हमारी तरफ सीधा नहीं था मगर फिर भी अंकल सावधानी से अपना काम कर रहे थे। 

फिर वो मेरी बगल में से हाथ घुसा कर मेरी चूची को टटोलने लगे मगर अपना हाथ मेरी चूची पर नहीं ला सकते थे क्योंकि पापा देख लेते तो सारा काम बिगड़ सकता था। उधर मेरा भी बुरा हाल हो रहा था। मेरा भी मन कर रहा था कि अंकल मेरे चूचों को कस कर दबा दें। फिर मैंने अपनी पीठ पर बिखड़े बाल कंधे के ऊपर से आगे को लटका दि‌ए जिससे मेरा एक मम्मा मेरे बालों से ढक गया। 

सिंह अंकल तो मेरे इस कारनामे से खुश हो गये। उन्होंने अपना हाथ मेरी बगल में से आगे निकाला और बालों के नीचे से मेरी चूची को मसल दिया। मेरी आह निकल ग‌ई... मगर मेरे होंठों में ही दब ग‌ई। 

मैं भी टाँग पर टाँग रख कर बैठी थी और बीच-बीच में सिंह अंकल की टाँग पर घुटने के नीचे प्यार से अपने सैंडल से सहला रही थी। हमारी हरकतें पापा के दूसरे दोस्त भी देख रहे थे मगर उनको पता था कि आज रात उनका नंबर भी आ‌एगा। अब मेरा मन दोनों मम्मे एक साथ मसलवाने का कर रहा था। मैं बेचैन हो रही थी मगर पापा तो इतनी शराब पी कर भी नहीं लुढ़क रहे थे। मेरा भी दूसरा पैग चल रहा था और नशा छाने लगा था। 

मैं दूसरा पैग खतम करके उठी और बाहर आ ग‌ई और साथ ही सिंह अंकल को बाहर आने का इशारा कर दिया और पापा को बोल दिया- “मैं सोने जा रही हूँ।” 

मैं बाहर आ‌ई और अँधेरे की तरफ खड़ी हो ग‌ई। थोड़ी देर में ही सिंह अंकल भी फ़ोन पर बात करने के बहाने बाहर आ गये। मैंने उनको धीमी सी आवाज दी। वो मेरी तरफ आ गये और आते ही मुझको अपनी बाँहों में भर लिया और मेरे होंठ अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे। फिर मेरे बड़े-बड़े चूचे अपने हाथों में लेकर मसल कर रख दि‌ए। मैं भी उनका लौड़ा अपनी चूत से टकराता हु‌आ महसूस कर रही थी और फिर मैंने भी उनका लौड़ा पैंट के ऊपर से हाथ में पकड़ लिया। 

अभी पांच मिनट ही हु‌ए थे कि पापा बाहर आ गये और सिंह अंकल को आवाज दी- “ओये सिंह! यार कहाँ बात कर रहा है इतनी लम्बी.. जल्दी अन्दर आ....!” 

तो सिंह अंकल जल्दी से पापा की ओर चले गये। अँधेरा होने की वजह से पापा मुझे नहीं देख सके। मैं वहीं खड़ी रही कि शायद अंकल फिर आयेंगे मगर थोड़ी देर में ही राणा अंकल बाहर आ गये और सीधे अँधेरे की तरफ आ गये जैसे उनको पता हो कि मैं कहाँ खड़ी हूँ। शायद सिंह अंकल ने उनको बता दिया होगा। 

आते ही वो भी मुझ पर टूट पड़े और मेरी गाण्ड, चूचियाँ, जांघों को जोर-जोर से मसलने लगे और मेरे होंठों का रसपान करने लगे। वो मेरी कमीज़ को ऊपर उठा कर मेरे दोनों निप्पल को मुँह में डाल कर चूसने लगे। मैं भी उनके सर के बालों को सहलाने लगी। 

तभी शर्मा अंकल की आवाज आ‌ई- “अरे राणा तू चल अब अन्दर, मेरी बारी आ ग‌ई!” अचानक आ‌ई आवाज से हम लोग डर गये। हमें पता ही नहीं चला था कि को‌ई आ रहा है। 

फिर राणा अंकल चले गये और शर्मा अंकल मेरे होंठ चूसने लगे। मेरे मम्मे, गाण्ड, चूत और मेरे सारे बदन को मसलते हु‌ए वो भी मुझे पूरा मजा देने लगे। शर्मा अंकल ने पजामा पहना था। मैंने पजामे में हाथ डाल कर उनके लण्ड को पकड़ लिया। खूब कड़क और लम्बा लण्ड हाथ में आते ही मैंने उसको बाहर निकाल लिया और नीचे बैठ कर मुँह में ले लिया। 

शर्मा अंकल भी मेरे बालों को पकड़ कर मेरा सर अपने लण्ड पर दबाने लगे। मैं उनका लण्ड अपने होंठों और जीभ से खूब चूस रही थी। वो भी मेरे मुँह में अपने लण्ड के धक्के लगा रहे थे। फिर अंकल ने अपना पूरा लावा मेरे मुँह में छोड़ दिया और मेरा सर कस के अपने लण्ड पर दबा दिया। मैंने भी उनका सारा माल पी लिया। उनका लण्ड ढीला हो गया तो उन्होंने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाल लिया और फिर मेरे होंठों को चूसने लगे और फिर बोले- “मैं राठौड़ को भेजता हूँ...!” और अन्दर चले गये। 

फिर राठौड़ अंकल आ गये। वो भी आते ही मुझे बेतहाशा चूमने लगे। मगर मैंने कहा- “अंकल ऐसा कब तक करोगे?” 

वो रुक गये और बोले- “क्या मतलब?” 

मैंने कहा- “अंकल, मैं सारी रात यहाँ पर खड़ी रहूँगी क्या? इससे अच्छा है कि मैं चूत में केला डाल कर सो जाती हूँ।” 

तो वो बोले- “अरे क्या करें, तेरा बाप लुढ़क ही नहीं रहा! हम तो कब से तेरी चूत में लौड़ा घुसाने के लि‌ए हाथ में पकड़ कर बैठे हैं!” 

मैंने कहा – “तो को‌ई बात नहीं... मैं जाकर सोती हूँ! केले से ही काम चला लुँगी!” मैंने आगे बढ़ते हु‌ए कहा। मैं हल्के नशे में थी और चूत की बेचैनी अब सहन नहीं हो रही थी। 

अंकल ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- “बस तू पांच मिनट रुक... मैं देखता हूँ वो कैसे नहीं लुढ़कता!” और अन्दर चले गये। 

फिर पांच मिनट में ही राणा और राठौड़ अंकल बाहर आये और बोले- “चल छमक-छल्लो! तुझे उठा कर अन्दर लेकर जा‌एँ जा खुद चलेगी?” 

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि पापा इतनी जल्दी लुढ़क गये। फिर राणा अंकल ने मुझे गोद में उठा लिया और मुझे अन्दर ले गये। पापा सच में कुर्सी पर ही लुढ़के पड़े थे। 

मैंने कहा- “पहले पापा को दूसरे कमरे में छोड़ कर आ‌ओ।” 

तो राणा और राठौड़ अंकल ने पापा को पकड़ा और दूसरे कमरे में ले गये। फिर शर्मा और सिंह अंकल ने मुझे आगे पीछे से अपनी बाँहों में ले लिया और मुझे उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया। शर्मा अंकल मेरे होंठों को चूसने लगे और सिंह अंकल मेरे ऊपर बैठ गये। तभी राणा और राठौड़ अंकल अन्दर आये और बोले- “अरे सालो, रुक जा‌ओ, सारी रात पड़ी है! इतने बेसबरे क्यों होते हो, पहले थोड़ा मज़ा तो कर लें!” 

वो मेरे ऊपर से उठ गये और मैं भी बिस्तर पर बैठ ग‌ई। मैंने कहा- “थैंक्स अंकल, आपने मुझे बचा लिया, नहीं तो ये मुझे को‌ई मजा नहीं लेने देते...!” 

फिर राणा अंकल ने पांच पैग बनाये और सब को उठाने के लि‌ए कहा। मैं पहले ही दो बड़े पैग पी चुकी थी और ठीक-ठाक नशे में थी इसलिये मैंने नहीं उठाया तो अंकल बोले- “अरे अब नखरे छोड़ो और पैग उठा लो। चार चार फौजी तुमको चोदेंगे। नहीं तो झेल नहीं पा‌ओगी....!” 

नशे में अगर कोई ज्यादा पीने के लिये ज़ोर दे तो काबू नहीं रहता। मैंने भी पैग उठा लिया और पूरा पी लिया। राणा अंकल ने फिर से मुझे पैग बनाने को कहा तो मैंने सिर्फ चार ही पैग बना‌ए। राणा अंकल बोले- “बस एक ही पैग लेना था?” 

तो मैंने कहा- “नहीं!... अभी तो चार पैग और लुँगी!” 

मैं राणा अंकल के सामने जाकर नीचे बैठ ग‌ई। अंकल की पैंट खोल कर और उतार दी। वो सभी मेरी ओर देख रहे थे। फिर मैंने अंकल का कच्छा नीचे किया और उनका सात-आठ इंच का लौड़ा मेरे सामने तन गया। 

फिर मैंने अंकल के हाथ से पैग लिया और उनके लण्ड को पैग में डुबो दिया और फिर लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मैं बार-बार ऐसा कर रही थी। राणा अंकल तो मेरी इस हरकत से बुरी तरह आहें भर रहे थे। मैं जब भी उनका लण्ड मुँह में लेती तो वो अपने चूतड़ उठा कर अपना लण्ड मेरे मुँह में धकेलने की कोशिश करते। 

मैंने जोर-जोर से उनके लण्ड को हाथों और होठों से सहलाना जारी रखा और फिर उनके लण्ड से वीर्य निकल कर मेरे मुँह पर आ गिरा। मैंने अपने हाथ से सारा माल इक्कठा किया और पैग में डाल दिया और उनका पूरा जाम खुद ही पी लिया। अब मैं काफी उत्तेजना और नशे में थी। इस हालत में अब शराब पीने पर मेरा कोई बस नहीं था। 

फिर मैं राठौड़ अंकल के सामने चली ग‌ई। वो लुंगी पहन कर बैठे थे। मैंने उनकी लुंगी खींच कर उतार दी और फिर उनका लण्ड भी शराब में डाल-डाल कर चूसने लगी। उनका वीर्य भी मैंने मुँह में ही निगल लिया और उनका पैग भी। 

फिर सिंह अंकल, जो कब से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, उनका लण्ड भी मैंने अपने हाथों में ले लिया और उन्होंने मेरी कमीज को उतार दिया। अब मैं सलवार और ब्रा में थी.. फिर उन्होंने मेरी ब्रा को भी खोल दिया और मेरे दोनों मम्मे आजाद हो गये। उन्होंने अपना लण्ड दोनों मम्मों के बीच में नीचे से घुसा दिया। उनका लण्ड शायद सबसे लम्बा लग रहा था मुझे। उनका लण्ड मेरे मम्मों के बीचों-बीच ऊपर मेरे मुँह के सामने निकल आया था। 

मैंने फिर से अपना मुँह खोला और उनका लण्ड अपने मुँह में ले लिया। वो अपने लण्ड और मेरे मम्मों के ऊपर शराब गिरा रहे थे जिसको मैं साथ-साथ ही चाटे जा रही थी। मैं अपने दोनों मम्मों को साथ में जोड़ कर उनके सामने बैठी थी और वो अपनी गाण्ड को ऊपर नीचे करके मेरे मम्मों को ऐसे चोद रहे थे जैसे चूत में लण्ड अन्दर-बाहर करते हों।... और जब उनका लण्ड ऊपर निकल आता तो वो मेरे गुलाब जैसे लाल होंठों घुस जाता और उसके साथ लगी हु‌ई शराब भी मैं चख लेती। 

आखिर वो भी जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मैं समझ ग‌ई कि वो भी झड़ने वाले हैं। मैंने उनके लण्ड को हाथों में लेकर सीधा मुँह में डाल लिया। अब उनका लण्ड मेरे गले तक पहुँच रहा था और फिर उनका भी लावा मेरे मुँह में फ़ूट गया। वीर्य गले में से सीधा नीचे उतर गया। 

अब शर्मा अंकल ने मुझे उठा लिया और मुझे बैड पर बिठा कर मेरी सलवार उतार दी। वो मेरी जांघों को मसलने लगे। फिर राठौड़ अंकल ने मेरी पैंटी उतार दी। अब मैं मादरजात नंगी थी... बस पैरों में ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे। सिंह अंकल भी मेरे सर की तरफ बैठ गये और मेरे मुँह में शराब डाल कर पिलाने लगे। 

मैंने सभी के लण्ड देखे… सारे तने हु‌ए थे। 

शर्मा अंकल का नंबर पहला था। मैं उठी और शर्मा अंकल को नीचे लिटा कर उनके लण्ड पर अपनी चूत टिका दी और धीरे-धीरे उस पर बैठने लगी। शर्मा अंकल का पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया। मैं उनके लण्ड को अपनी चूत में चारों ओर घुमाने लगी। फिर मैं ऊपर नीचे होकर शर्मा अंकल को चोदने लगी। शर्मा अंकल भी मेरी गाण्ड को पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे कर रहे थे और अपनी गाण्ड भी नीचे से उछाल-उछाल कर मुझे चोद रहे थे। मेरे उछलने से मेरे चूचे भी उछल रहे थे जो राणा अंकल ने पकड़ लि‌ए और उनके साथ खेलने लगे। 

फिर राणा अंकल ने मुझे आगे की तरफ झुका दिया और खुद मेरे पीछे आ गये जिससे मेरी गाण्ड उनके सामने आ ग‌ई और वो अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसाने लगे। मगर उनका लौड़ा मेरी कसी सूखी गाण्ड में आसानी से नहीं घुसने वाला था। फिर उन्होंने और जोर से धक्का मारा तो मुझे बहुत दर्द हु‌आ जैसे मेरी गाण्ड फट ग‌ई हो। मैं उनका लण्ड बाहर निकालना चाहती थी मगर उन्होंने नहीं निकालने दिया और फिर मुझे भी पता था कि दर्द तो कुछ देर का ही है। 

वैसा ही हु‌आ, थोड़ी देर में ही उनका पूरा लण्ड मेरी सूखी गाण्ड में था। दोनों तरफ से लग रहे धक्कों से मेरे मुँह से “आह आह” की आवाजें निकल रही थी। फिर राठौड़ अंकल ने मेरे सामने आकर अपना तना हु‌आ लण्ड मेरे मुँह के सामने कर दिया। मैंने उनका लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। 

जब राणा अंकल मेरी गाण्ड में अपना लण्ड पेलने के लि‌ए धक्का मारते तो सामने खड़े राठौड़ अंकल का लण्ड मेरे मुँह के अन्दर तक घुस जाता। मेरी “आह आह” की आवाजें कमरे में गूंजने लगी। मेरा बुरा हाल हो रहा था। उनका लण्ड मेरी गाण्ड में और भी अन्दर तक चोट कर रहा था। फिर उनका आखरी धक्का तो मेरे होश उड़ा गया। उनका लण्ड मेरी गाण्ड के सबसे अन्दर तक पहुँच गया था। मुझ में और घोड़ी बने रहने की ताकत नहीं बची थी। मैं नीचे गिर गयी मगर राणा अंकल ने मेरी गाण्ड को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उनके वीर्य का एक-एक कतरा मेरी गाण्ड में ना उतर गया। 

मैं बहुत थक ग‌ई थी। हम सभी ने एक-एक पैग और लगाया। मेरी गाण्ड अभी भी दर्द कर रही थी मगर मैं इतने सारे पैग ले चुकी थी और नशे में इतनी धुत्त थी कि सब कुछ अच्छा-अच्छा ही लग रहा था। 

मैं अंकल राठौड़ के आगे उनकी जांघों पर सर रख के लेट ग‌ई और उनके लण्ड से खेलने लगी। सिंह अंकल मेरी टांगो की तरफ आकर बैठ गये। मैंने अपनी टांगे सिंह अंकल के आगे खोल दी और अपना सर राठौड़ अंकल के आगे रख दिया। 

सिंह अंकल मेरे ऊपर आ गये और अपना लण्ड मेरी चूत के ऊपर रख कर धीरे-धीरे से अन्दर डाल दिया और फिर अन्दर बाहर करने लगे और झड़ ग‌ए। 

फ़िर राठौड़ अंकल ने मुझे अपने नीचे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरी चूत चोदने लगे। मेरी टांगों को उठा कर उन्होंने ने भी मुझे पूरे जोर से चोदा। फिर उन्होंने ने मेरी गाण्ड को भी चोदा और मेरी गाण्ड में ही झड़ गये। मैं कितनी बार झड़ चुकी थी, मुझे याद भी नहीं था। 

मेरा इतना बुरा हाल था कि अब मुझसे खड़ा होना भी मुशकिल लग रहा था। मैं वहीं पर लेट ग‌ई। हम सभी नंगे ही एक ही बिस्तर में सो गये। फिर अचानक मेरी आँख खुली और मैंने समय देखा तो सुबह के तीन बजे थे। 

मैंने अपने कपड़े उठाये और बिल्कुल नंगी ही नीचे आने लगी। मगर सीढ़ियाँ उतरते वक्त मेरी टांगें नशे में बुरी कांप रही थी और चूत और गाण्ड में भी दर्द हो रहा था। नशे में बिल्कुल चूर थी और ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में नंगी ही लड़खड़ती हुई कमरे तक आयी। रास्ते में तीन-चार बार लुढ़की भी। 

सुबह मैं काफी देर से उठी और मुझ से चला भी नहीं जा रहा था। इसलि‌ए मैं बुखार का बहाना करके बिस्तर पर ही लेटी रही। जब अंकल जाने लगे तो वो मुझसे मिलने आये। पापा और मम्मी भी साथ थे, इसलि‌ए उन्होंने मेरे सर को चूमा और फिर जल्दी आने को बोल कर चले गये। 

मगर मैं पूरा दिन और पूरी रात बिस्तर पर ही अपनी चूत और गाण्ड को पलोसती रही।

!!! क्रमशः !!!


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

कोमलप्रीत कौर के गरम गरम किस्से

भाग ६. कॉलेज़ के गबरू

लेखिका : कोमलप्रीत कौर

भाग-५ (चार फौजी और चूत का मैदान) से आगे....

यह बात तब की है जब मेरी सासु जी जालंधर के एक अस्पताल में दाखिल थी और मेरे ससुर जी भी रात को उनके पास ही रहते थे। मैं सुबह घर से खाना वगैरह लेकर बस में जाती थी। वैसे तो मैं ड्राइविंग जानती थी लेकिन अस्पताल में और उसके आसपास पार्किंग की बहुत ही दिक्कत थी। एक दिन मैं सुबह जब बस में चढ़ी तो बस में बहुत भीड़ थी, जिनमें ज्यादा स्कूल और कॉलेज के लड़के थे। 

उस दिन मैंने गहरे गले वाला सफ़ेद और गुलाबी रंग का पटियाला सलवार कमीज़ पहन रखा था और हमेशा की तरह पैरों में सफ़ेद रंग के ही काफी ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे। जहाँ पर मैं खड़ी थी वहां पर मेरे आगे एक बूढ़ी औरत और मेरे पीछे एक लड़का था। कुछ देर बाद उस लड़के ने अपना लण्ड मेरी गाँड से लगा लिया। बस में इतनी भीड़ थी कि ऐसा होना आम था और किसी को पता भी नहीं चल सकता था। यह तो मुझे और उस लड़के को ही पता था। 

मेरी तरफ से को‌ई विरोध ना देख कर लड़के ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ा। मेरे बदन में एक करंट सा दौड़ गया। मुझे लण्ड के स्पर्श से बहुत मजा आया! और आता भी क्यों ना? लण्ड होता ही मजे के लि‌ए है.. खासकर मेरे लि‌ए...। लड़के का लण्ड सख्त हो चुका था और बेकाबू भी होता जा रहा था क्योंकि अब उसकी छलांगे मेरी गाण्ड महसूस कर रही थी। उस दिन मैंने पैंटी भी नहीं पहनी थी और कॉटन की पटियाला सलवार के नीछे मेरी गाँड बिल्कुल नंगी थी। इसके अलावा ऊँची ऐड़ी के सैंडल की वजह से मेरी बड़ी गाँड और भी ज्यादा पीछे की ओर उभरी हुई थी। जब भी बस में कहीं धक्का लगता तो मैं भी उसके लण्ड पर दबाव डाल देती। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

हम दोनों लण्ड और गाण्ड की रगड़ा‌ई के मजे ले रहे थे। अब बस जालंधर पहुँच चुकी थी और सब बस से उतर रहे थे, मुझे भी उतरना था और उस लड़के को भी। बस से उतरते ही लड़का पता नहीं कहाँ चला गया। मेरी चूत मेरा चुदने का मन कर रहा था, मगर वो लड़का तो अब कॉलेज चला गया होगा, यह सोच कर मैं उदास हो ग‌ई। 

अब मुझे अस्पताल जाना था। मैं बस स्टैंड से बाहर आ ग‌ई और ऑटो में बैठने ही वाली थी कि वही लड़का बा‌ईक लेकर मेरे पास आकर खड़ा हो गया। मैं उसे देख कर हैरान हो गयी। वो बोला- “भाभी जी आ‌ओ, मैं आपको छोड़ देता हूँ।” 

पहले तो मैंने मना कर दिया, मगर फिर उसने कहा- “आप जहाँ कहोगी मैं वहीं छोड़ दूँगा!” 

वैसे भी लड़का इतना सैक्सी था कि उसको मना करना मुश्किल था। तो मैं उसकी बा‌ईक की सीट पर उसके पीछे बैठ ग‌ई। उसकी बा‌ईक में पैर रखने के लिये सिर्फ एक छोटा सा खूँटा था तो मैंने उस खूँटे पर अपना एक सैंडल टिका लिया और उस टाँग पर अपनी दूसरी टाँग चढ़ा कर बैठी थी और सहारे के लिये मैंने उसके कंधे पर हाथ रख लिया। सीट की ढलान की वजह से मैं उससे सटी हुई थी और जब उसने बाइक की स्पीड बढ़ा दी तो मुझे सहरे के लिये उसकी कमर में अपनी दोनों बाँहें डालने पड़ीं। बीच-बीच में मैं उसकी टाँगों के बीच में भी हाथ फिरा कर उसके सख्त लण्ड का जायज़ा ले लेती थी। 

रास्ते में उसने अपना नाम अनिल बताया। मैंने भी अपने बारे में बताया। थोड़ी आगे जाकर उसने कहा- “भाभी अगर आप गुस्सा ना करो तो यहीं पास में से मैंने अपने दोस्त से कुछ किताबें लेनी थी...!” 

मैंने कहा- “को‌ई बात नहीं, ले लो...” लेखिका : कोमलप्रीत कौर

फिर आगे जाकर उसने एक बड़े से शानदार घर के आगे बा‌ईक रोकी। गेट खुला था तो वो बा‌ईक और मुझे भी अंदर ले गया। उसका दोस्त सामने ही खड़ा था। वो दोनों मुझसे थोड़ी दूर खड़े होकर कुछ बातें करने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे चोदने की बातें कर रहे हों। काश यह दोनों लड़के आज मेरी चुदा‌ई कर दें! बस में और फिर बा‌ईक पर अनिल को खुल्ले‌आम सिगनल तो मैंने दे ही दिया था। 

फिर अनिल ने अपने दोस्त से मिलवाया। उसका नाम सुनील था। सुनील ने मुझे अंदर आने को कहा मगर मैंने सोचा कि सुनील के घर वाले क्या सोचेंगे। इसलि‌ए मैंने कहा- “नहीं मैं ठीक हूँ!” और फिर अनिल को भी जल्दी चलने को कहा। 

तो अनिल मुझसे बोला – “भाभी जी, दो मिनट बैठते हैं, सुनील घर में अकेला ही है।” 

यह सुनकर तो मैं बहुत खुश हो ग‌ई कि यहाँ पर तो बड़े आराम से चुदा‌ई करवा‌ई जा सकती है। मैं उनके साथ अंदर चली ग‌ई और सोफे पर बैठ ग‌ई। सुनील कोल्ड ड्रिंक लेकर आया और हम कोल्ड ड्रिंक पीते हु‌ए आपस में बातें करने लगे। 

अनिल मेरे साथ बैठा था और सुनील मेरे सामने। वो दोनों घुमा फिरा कर बात मेरी सुन्दरता की करते। अनिल ने कहा- “भाभी, आप बहुत सुन्दर हो, जब आप बस में आ‌ई थी तो मैं आपको देखता ही रह गया था!” 

मैंने कहा- “अच्छा तो इसी लि‌ए मेरे पास आकर खड़े हो गये थे?” 

अनिल बोला- “नहीं भाभी, वो तो बस में काफी भीड़ थी, इस लि‌ए...” 

फिर मुझे वही पल याद आ गये जो बस में गुजरे थे इसलि‌ए मैं शरमाते हु‌ए चुप रही। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

फिर अनिल बोला- “भाभी वैसे बस में काफी मजा था... मेरा मतलब इतनी भीड़ थी कि सर्दी का पता ही नहीं चल रहा था!” 

मैंने शरमाते हु‌ए कहा- “हाँ...! वो... वो... तो है...” मैं समझ ग‌ई थी कि वो क्या कहना चाहता है। 

उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे हाथ पर रख दिया और बोला- “भाभी अब काफी सर्दी लग रही है, अब क्या करूँ?”

उसका हाथ पड़ते ही मैं शरमा ग‌ई और बोली- “क क.. क्या... क्या.. कर.... करना.. है... गर्मी चाहि‌ए तो पैग-शैग लगाओ....” 

अनिल- “भाभी, मगर मुझे तो वो ही गर्मी चाहि‌ए जो बस में थी...” 

मैं शरमाते हु‌ए अपने बाल ठीक करने लगी। मेरा शरमाना उनको सब कुछ करने की इजाजत दे रहा था। अनिल ने मौके को समझा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दि‌ए। 

मैंने आँखे बंद कर ली और सोफे पर ही लेट ग‌ई। अनिल भी मेरे ऊपर ही लेट गया! अब सारी शर्म-हया ख़त्म हो चुकी थी… 

अनिल ने मेरे होंठ अपने मुँह में और मेरे चूचे अपने हाथों में पकड़ लि‌ए थे। मेरी आँखें बंद थी। इस वक्त सुनील पता नहीं क्या कर रहा था मगर उसने अभी तक मुझे नहीं छु‌आ था। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

अनिल मेरे होंठों को जोर जोर से चूस रहा था, मैंने हाथ उसकी कमर पर ढीले से छोड़ रखे थे… 

फिर सुनील मेरी सर की तरफ आ गया और मेरे गोरे-गोरे गालों और मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा। मेरी आँखें अब भी बंद थीं। 

वो दोनों मुझसे प्यार का भरपूर का मजा ले रहे थे... कभी अनिल मेरे होंठ चूसता तो कभी सुनील। 

अनिल ने मेरी पजामी और कमीज उतार दी। फिर सुनील ने ब्रा भी उतार दी... पैंटी तो पहनी ही नहीं हुई थी। 

मैं बिलकुल नंगी हो चुकी थी। बस गले में सफ़ेद मोतियों की माला, कलाइयों में चूड़ियाँ और पैरों में ऊँची ऐड़ी के सैंडल। दोनों मुँह खोले मेरी साफ-सुथरी और शेव की हुई चिकनी चूत ताकने लगे। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

वासना में मेरी साँसें तेज़ चल रही थीं और आगे बढ़ने से पहले मैंने उनसे कहा – “क्यों ना शराब एक-एक पैग लगा लें! फिर और भी मज़ा आयेगा!” तो दोनों लड़के हैरान हो गये। अनिल बोला- “भाभी आप को शराब पीनी है?” मैंने मुस्कुराते हुए गर्दन हिला कर हामी भरी तो सुनील बोला – “शराब! भाभी… वो भी इतनी सुबह?” 

मैं भी थोड़ा गुस्सा होते हुए बोली – “क्यों! अगर इतनी सुबह मेरे साथ ये सब मज़े कर सकते हो तो शराब में क्या बुरायी है... शराब से मज़ा दुगना हो जायेगा।” 

अनिल परेशान होते हुए बोला- “भाभी हमने तो पहले कभी पी नहीं है...” 

“पीते नहीं पर पिला तो सकते हो!” मैंने थोड़ा ज़ोर दिया तो अनिल ने कहा – “पर इतनी सुबह शराब कहाँ मिलेगी?” 

सुनील बोला – “मिल जायेगी! मेरे चाचा जी के कमरे में मिलेगी... मैं ले कर आता हूँ!” फिर वो भगता हूआ अंदर गया और बैगपाइपर व्हिस्की की आधी भरी बोतल ले आया और एक काँच का ग्लास आधा भर कर मुझे पकड़ा दिया। मेरी हँसी छूट गयी- “ये तो पूरा पटियाला पैग ही बना दिया तुमने...!” 

सुनील झेंपते हुए बोला- “सॉरी भाभी! मैंने कहाँ कभी पैग बनाया है पहले... लाइये मैं कम कर देता हूँ!” 

“रहने दे... अब तूने पटियाला पैग बना ही दिया तो अब पी लुँगी... चीयर्स!” – मैं मुस्कुराते हुए पैग पीने लगी। “किसी को चोदा तो है ना पहले कि वो भी मुझे ही सिखाना पड़ेगा?” मैंने पैग पीते हुए बीच में हंसते हुए पूछा! 

तो अनिल बोला- “क.. क.. की तो नहीं है पर हमें सब पता है!” 

“हाँ भाभी... हमने ब्लू-फिल्मों में सब देखा है और फिर आप भी तो गाइड करेंगी!” सुनील भी बोला। 

मैं तो बस मज़ाक कर रही थी मगर मन ही मन में खुश हो रही थी कि मुझे दो कुँवारे लण्ड चोदने क मिल रहे थे। पैग खत्म करके मैंने ग्लास एक तरफ रख कर फिर मैं सोफे पर घुटनों के बल बैठ ग‌ई और सुनील की पैंट उतार दी.. उसका लौड़ा उसके कच्छे में फ़ूला हु‌आ था। मैंने झट से उसका लौड़ा निकाला और अपने हाथों में ले लिया और फिर मुँह में डाल कर जोर-जोर से चूसने लगी। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसका लौड़ा चूस रही थी और अनिल मेरे पीछे आकर मेरी चूत चाटने लगा। अनिल जब भी अपनी जीभ मेरी चूत में घुसाता तो मैं मचल उठती और आगे होने से सुनील का लौड़ा मेरे गले तक उतर जाता। 

सुनील भी मेरे बालों को पकड़ कर अपना लौड़ा मेरे मुंह में ठूंस रहा था। फिर सुनील का वीर्य निकल गया और मैंने सारा वीर्य चाट लिया। उधर अनिल के चाटने से मैं भी झड़ चुकी थी। इतनी देर में मुझ पर शराब का मस्ती भरा हल्का नशा चढ़ चुका था। 

अब अनिल का लौड़ा मुझे शांत करना था। अनिल सोफे पर बैठ गया और मैं अनिल के आगे उसी की तरफ मुंह करके उसके लौड़े पर अपनी चूत टिका कर बैठ ग‌ई। उसका लोहे जैसा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया। “आहहह!” मुझे दर्द हु‌आ मगर मैंने फिर भी उसका पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसा लिया। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

मैं ऊपर-नीचे होकर उसके लौड़े से चुदा‌ई करवा रही थी और सुनील मेरे मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था। 

अनिल भी नीचे से जोर-जोर से मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसेड़ रहा था। इसी दौरान मैं फ़िर झड़ ग‌ई और अनिल के ऊपर से उठ ग‌ई मगर अनिल अभी नहीं झड़ा था तो उसने मुझे घोड़ी बना लिया और अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में ठूंस दिया। 

उफ़! यह बहुत मजेदार चुदा‌ई थी! 

अनिल ने मेरी गाण्ड में छः-सात ज़ोरदार धक्के लगाये तो मेरी इच्छा दोहरी चुदाई का मज़ा लेने की हुई। इसलिये मैंने अनिल को लिटाया और मैं उसके लौड़े पर बैठ गयी। अब अनिल मेरे नीचे था और मैं अनिल का लौड़ा अपनी गाण्ड में लि‌ए उसके पैरों की ओर मुंह कर के बैठी थी। मैंने इशारा किया तो सुनील मेरे सामने आ कर बैठ गया और अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसाने लगा। मैं अनिल पर उलटी लेट ग‌ई और सुनील ने मेरे ऊपर आकर अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। लेखिका : कोमलप्रीत कौर

उफ़! अब तो मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मेरा दिल चिल्लाने को कर रहा था मगर थोड़ी ही देर में चुदा‌ई फिर शुरू हो ग‌ई। मैं दोनों के बीच चूत और गाण्ड की प्यास एक साथ बुझा रही थी और वो दोनों जोर-जोर से मेरी चुदा‌ई कर रहे थे। 

मैं दो बार झड़ चुकी थी… फिर अनिल भी झड़ गया और उसके बाद सुनील भी झड़ गया। हम तीनों थक हार कर लेट गये। फिर मैंने अपने कपड़े पहने। हल्का सा नशा अभी भी था मगर मैंने पानी पिया और हस्पताल चली ग‌ई। 

हस्पताल से निकलने के बाद शाम को और पूरी रात को मैं अकेली ही होती थी इस लि‌ए वो अनिल और सुनील दोनों शाम को मुझे हस्पताल से सुनील के घर ले जाते। सुनील के घर वाले दिल्ली गये हुए थे इसलिये कोई पूरी आज़ादी थी। मेरे साथ वो भी शराब पीने लगे। हम तीनों मिलकर ब्लू-फिल्म देखते, शराब पीते और फिर वो दोनों मिलकर सारी रात मेरी चुदा‌ई करते। सुबह मैं तैयार होकर हस्पताल आ जाती और वो दोनों कॉलेज इसी तरह पाँच दिन चुदा‌ई चलती रही और फिर सासु ठीक होकर घर आ ग‌ई तो उन दोनों लड़कों के साथ चुदा‌ई भी बंद हो ग‌ई।

!!! क्रमशः !!!

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 by  » 14 Dec 2014 19:27
[size=small][size=large][color=#8000bf]कोमलप्रीत कौर के गरम गरम किस्से

भाग ७. जब कुत्ते ने मुझे चोदा

लेखिका : कोमलप्रीत कौर

भाग-६ (कॉलेज़ के गबरू) से आगे....

जैसे कि अपनी पिछली कहानियों में बता चुकी हूँ कि मेरा नाम कोमल प्रीत कौर है और मेरे पति आर्मी में मेजर है। उनकी पोस्टिंग दूर-दराज़ के सीमावर्ती इलाकों पर होती तहती है और इसलिये मैं अपनी सास और ससुर के साथ जालंधर के पास एक गाँव में रहती हूँ जहाँ हमारी पुश्तैनी कोठी और काफी ज़मीन-जायदाद है। मैं बहुत ही चुदक्कड़ किस्म की औरत हूँ। मेरी चुदाई की प्यास इतनी ज्यादा है कि दिन में कम से कम आठ-दस बार तो मुठ मार कर झड़ती ही हूँ।

मेरी उम्र तीस की है। मैं स्लिम और सैक्सी बदन की मालकिन हूँ। मेरी लम्बाई वास्तव में हालांकि पाँच फुट तीन इंच है पर दिखने मैं पाँच फुट सात इंच के करीब लगती हूँ क्योंकि मुझे हर वक्त ऊँची ऐड़ी की चप्पल सैंडल पहनने का शौक है। मेरा गोरा बदन, बड़े-बड़े गोल मटोल चूतड़ (३६) और उसके ऊपर पतली सी कमर (२८) और फ़िर गठीले तने हुए गोल गोल मम्मे (३४) और मेरी कमर के ऊपर लहराते मेरे चूतड़ों तक लंबे काले घने बाल किसी का भी लंड खड़ा करने के लिये काफी हैं। मगर फ़िर भी जब मैं अपने हुस्न के नखरे और अपनी कातिलाना अदायें बिखेरती हूँ तो बुढ्ढों के भी लंड खड़े होते मैंने देखे हैं। मैंने कईयों से चुदाई भी करवाई है जिसमें से कुछ किस्से पिछली कहानियों में बता चुकी हूँ।

जैसे कि आपको पता है कि रात को बेडरूम में शराब की चुस्कियाँ लेते हुए मुझे कंप्यूटर पर वयस्क वेबसाइटों पर नंगी ब्लू-फिल्में देखते हुए मुठ मारने की आदत है। ऐसे ही एक दिन मैं जब इंटरनेट पर ब्लू-फिल्में देखने के लिये सर्च कर रही थी तो एक वेबसाइट पर कुत्ते के साथ चुदाई की क्लिप मिली जिसमें दो औरतें कुत्ते के लण्ड से चुदवा रही थीं। इसे देख कर मैं बहुत उत्तेजित हो गयी और सोडे की बोतल चूत में घुसेड़ कर खुब मुठ मारी। फिर मेरा भी दिल करने लगा कि मैं भी हमारे कुत्ते रॉकी से चुदाई करवा के देखूँ। मगर घर में सास और ससुर के होते ये होना मुश्किल था।

रॉकी ज्यादातर मेरे ससुर जी के साथ ही रहता था। रात को भी उनके कमरे में ही सोता था। वैसे भी कुत्ते से चुदाई का कोई तजुर्बा तो था नहीं इसलिए रॉकी से जल्दबाज़ी में तो चुदाई हो नहीं सकती थी। रॉकी को किसी तरह फुसला कर अपनी इस कामुक इच्छा को अंजाम देने के लिये मुझे पूरी प्राइवसी की जरूरत थी। अपनी वासना में बहक कर फिर भी मैं मौका देख कर कभी-कभी रॉकी को प्यार से पुचकारती और उसके लंड वाली जगह पर हाथ लगा देती तो रॉकी भी एक बार चिहुंक उठता। मैं तो कुत्ते के लंड कि इतनी प्यासी थी कि मेरा मन हर वक्त रॉकी के लंड वाली जगह पर ही टिका रहता। हर रोज़ रात को इंटरनेट पर कुत्तों से औरतों की चुदाई की फिल्में देख कर मुठ मारने लगी और दिन में कईं बार बाथरूम में या बेडरूम में जा कर रॉकी के बारे में सोचते हुए मुठ मारती।

फिर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया। मेरे सास और ससुर को कुछ दिनों के लिये कहीं रिश्तेदारों में जाना था। वो दोपहर घर से करीब तीन बजे निकले और फ़िर मैंने भी जल्दी-जल्दी घर का काम निपटाया। रॉकी उस दिन सुबह से हमारे खेत पर था। मैंने खेतों की देखभाल करने वाले नौकर को फोन करके रॉकी को घर वापस लाने के लिये कह दिया। वो बोला कि कुछ जरूरी काम निपटाने के बाद करीब दो घंटे में रॉकी को घर छोड़ जायेगा। मुझे बहुत गुस्सा आया और एक बार तो मन किया कि खुद ही कार ले कर वहाँ जाऊँ और रॉकी को ले आऊँ। मगर फिर मैंने सोचा कि क्यों ना रॉकी को आकर्षित करने के लिये इतनी देर मैं थोड़ा सज-संवर कर तैयार हो लूँ। हालाँकि कुत्ते के लिये सजने संवरने का ख्याल बेकार का था लेकिन फिर भी मैंने नहा-धो कर अच्छा सा सलवार-कमीज़ और हाई हील के सैंडल पहने और मेक-अप भी किया।

तैयार होने में करीब एक घंटा ही निकला और रॉकी के आने में अभी भी करीब एक और घंटा बाकी था। मुझसे तो उत्तेजना और बेचैनी में इंतज़ार ही नहीं हो रहा था। कुछ और सूझा नहीं तो व्हिस्की का पैग पीते हुए मैं लैपटॉप पर कुत्ते से चुदाई की फिल्म देखने लगी। तीन औरतें दो कुत्तों के साथ चुदाई का मज़ा ले रही थीं। उनमें एक रॉकी कि तरह ही भूरा ऐल्सेशन कुत्ता था और दूसरा बड़ा सफेद कुत्ता शायद लैब्राडोर था। वो तीनों औरतें उनके लंड चूस रही थीं और अपनी चूत भी चटवा रही थीं। फिर उनमें से एक औरत अपनी चूत में कुत्ते का लंड लेकर चुदवाने लगी और एक औरत दूसरे कुत्ते से गाँड मरवाने लगी। मैंने अपनी पजामी में हाथ डाल कर चूत सहलाना शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे बाद वो फिल्म खत्म हुई। इस दौरान मेरी चूत तीन बार झड़ी। अब तक मैंने व्हिस्की के दो पैग पी लिये थे और मुझ पे शराब की सुहानी सी खुमारी छा गयी थी। अपनी पिछली कहानियों में मैं ज़िक्र कर चुकी हूँ कि मुझे चुदाई से पहले शराब पीना अच्छा लगता है मगर शराब मैं इतनी ही पीती हूँ कि मुझे इतना ज्यादा नशा ना चढ़े कि मैं खुद को संभाल ना सकूँ। वैसे कईं बार ज्यादा भी हो जाती है।

अगले आधे घंटे में मैंने शराब का एक छोटा पैग और पिया। फिर खेत पे काम करने वाले नौकर ने घंटी बजायी तो रॉकी को अंदर लेकर मैंने दरवाजे को लॉक किया और रॉकी को पुचकारती हुई अपने बेडरूम में ले गयी और उसका भी दरवाजा बंद कर दिया। पहले तो मैंने उसके साथ बहुत प्यार किया और कपड़े उतारे बगैर ही उसे अपने बदन से चिपकती रही। रॉकी भी अपनी जुबान निकाल कर मुझे इधर उधर चाटने लगा। उसकी खुरदरी जुबान जब मेरी गर्दन के ऊपर चलती तो बहुत मज़ा आता। मैं नीचे ही टाँगें फैला कर उसके सामने बैठ गयी और फ़िर अपनी कमीज़ को उतार दिया। मेरे बूब्स मेरी ब्रा में से बाहर आने को थे।

मैंने रॉकी का मुँह पकड़ कर अपने मम्मों की तरफ़ किया तो वो सूँघ कर धीरे-धीरे से अपनी जुबान मेरे मम्मों के ऊपरी हिस्से पर रगड़ने लगा। ‘आअहहह’ क्या एहसास था उसकी खुरदरी जुबान का। वो ब्रा के बीच भी अपना मुँह डालने की कोशिश करता मगर ब्रा टाईट होने के कारण उसका मुँह अंदर नहीं जा पाता था। मगर उसकी जुबान थोड़ी सी निप्पल को छू जाती तो मेरे तन बदन में और भी बिजली दौड़ जाती।

अब मैंने अपनी ब्रा के हुक पीछे सो खोल दिये और फ़िर ब्रा को भी उतार दिया। रॉकी अब इन खुले कबूतरों को देख कर और भी तेजी से निप्पल पर अपनी जुबान चलाने लगा। वो अपनी पूँछ को बड़े अंदाज़ से हिला रहा था। मैं उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगी और फ़िर अपना हाथ उसके लंड कि तरफ़ ले गयी। जब मैंने रॉकी का लंड हाथ में पकड़ा तो शायद वो परेशान हो गया और जल्दी से मुढ़ कर मेरे हाथ की तरफ़ लपका। मैंने उसका लंड छोड़ दिया मगर मुझे उसके लंड की जगह वाला हिस्सा काफी सख्त लगा। रॉकी फ़िर से मेरे निप्पल को चाटने लगा। अब मैंने अपनी पजामी (सलवार) जो मेरी टाँगों से चिपकी हुई थी, उसका नाड़ा खोलना शुरू किया तो रॉकी पहले से ही मेरी पजामी को सूँघने लगा।

मैंने अपने चूतड़ उठा कर अपनी पजामी को नीचे किया और फ़िर अपने सैंडल पहने पैरों से निकाल कर अलग कर दिया। मेरी पैंटी पर चूत वाली जगह पर मेरी चूत का रस लगा हुआ था। रॉकी इसे तेजी से सूँघने लगा और फ़िर मैं खड़ी हो गयी और मैंने अपनी पैंटी भी उतार फेंकी। अब मैं बिल्कुल नंगी थी और बस पैरों में काले रंग के ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। मेरी चिकनी चूत को देख कर रॉकी मेरी टाँगों में मुँह घुसाने लगा और मेरी जाँघों पर अपनी जुबान से चाटने लगा।

एक तो पहले से ही शराब का नशा था और रॉकी की हरकतों से तो मैं और ज्यादा मदहोश हुई जा रही थी। मैं बेड के किनारे पर बैठ गयी और अपनी टाँगें फैला दी। रॉकी के सामने मेरी चूत के होंठ खुल गये जिसमें रॉकी ने जल्दी से अपनी जुबान का एक तगड़ा वार किया और मैं सर से पाँव तक उछल पड़ी। मुझे इतना मज़ा तो किसी मर्द से चूत चटवा कर भी नहीं आया था जितना मज़ा रॉकी मेरी चूत चाट कर दे रहा था। जब रॉकी अपनी जुबान को मेरी चूत पर ऊपर नीचे करता और उसकी जुबान मेरी चूत के दाने से टकराती जिसके कारण मैं भी अपनी चूत को मसलने लगी और मेरी चूत में से मेरे चूत-रस की एक तेज धार निकल कर रॉकी की जुबान पर गिरी। रॉकी को तो जैसे मलाई मिल गयी हो। वो और भी तेजी से चूत को चाटने लगा और अपनी जुबान को चूत के अंदर तक घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। मैंने देखा रॉकी का लंड भी थोड़ा सा बाहर दिखायी दे रहा था और मुझसे भी अब और सब्र नहीं हो रहा था।

मैं ज़मीन पर ही कुत्तिया की तरह घुटनों के और अपने हाथों के बल बैठ गयी ताकि रॉकी मुझे कुत्तिया समझ कर मेरे पीछे से मेरे ऊपर चढ़ जाये। मगर वो तो मेरी साइड में से होकर मेरी चूत को ही चाटने की कोशिश कर रहा था। मैं कुत्तिया की तरह चल कर घूम गयी और अपनी चूत पीछे से उसके सामने कर दी। वो फ़िर से मेरी चूत को चाटने लगा। रॉकी पालतू कुत्ता था और उसने पहले कभी किसी कुत्तिया को नहीं चोदा था और चुदाई का उसे कोई तजुर्बा नहीं था। काफी देर के बाद भी जब वो मेरे ऊपर नहीं चढ़ा तो मैं अपने पैरों पर गाँड के बल बैठ गयी और मैंने उसके दोनों अगले पाँव पकड़े और उनको अपनी कमर के साथ लपेट लिया और फ़िर से आगे की ओर झुक गयी। इससे वो मेरी कमर पर आ गया, मगर उसका लंड अभी मेरी चूत तो क्या टाँगों से भी नहीं छू रहा था। मैं आगे से और नीचे झुक गयी और ज़मीन पर अपना सर लगा कर रॉकी के दोनों पाँव आगे को खींच लिये, जिससे अब रॉकी का लंड मेरी चूत के साथ टकरा गया। रॉकी को भी ये अच्छा लगा और वो भी अपनी कमर हिला-हिला कर अपना लंड मेरी चूत के इधर-उधर ठोकने लगा और अपने अगले पैरों से मेरी कमर को कस के पकड़ लिया। मगर उसका लंड अभी मेरी चूत में नहीं घुसा था।

मैं अपना एक हाथ पीछे लायी और रॉकी का लंड अपनी उंगलियों में हल्का सा पकड़ लिया। उसके लंड का अगला हिस्सा बहुत पतला महसूस हो रहा था। मेरी उंगलियों के स्पर्श से रॉकी को शायद ऐसा लगा कि उसका लंड मेरी चूत में घुस गया है तो वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा और अपने अगले पाँव से मुझे अपनी ओर खींचने लगा। इतने तेज झटकों से मेरे हाथ से भी लंड इधर उधर हो रहा था और चूत में नहीं जा रहा था। मगर फ़िर अचानक रॉकी का लंड सही ठिकाने पर टकराया और तेजी से मेरी चूत में करीब दो इंच तक घुस गया। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों से ऐसे टकराया जैसे कोई तेज धार वाला चाकू मेरी चूत में घुस गया हो। इस वार ने मेरा तो बैलेंस ही बिगाड़ कर रख दिया। मैंने जल्दी से लंड को छोड़ा और अपना हाथ आगे ज़मीन पर लगा कर गिरते-गिरते बची। उधर रॉकी भी मुझे अपनी ओर खींच रहा था तो उसका भी सहारा मिल गया। मगर इतनी देर में रॉकी का एक और धक्का लगा और उसका लंड दोबारा मेरी चूत की दीवारों से रगड़ता हुआ पहले से भी ज्यादा अंदर घुस गया। मेरे मुँह से फ़िर ‘आह’ की आवाज़ निकल गयी।

मैं समझ गयी कि कुत्ता तो मुझे कुत्ते की तरह ही चोदेगा। इसलिये मैं झट से संभल गयी और अगले वार के लिये तैयार भी हो गयी। रॉकी ने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल के फ़िर से लंड को मेरी चूत में घुसेड़ दिया। मैंने भी अपनी चूत को हिला कर लंड के धक्के सहने के लिये अड्जस्ट कर लिया। रॉकी के हर वार से मुझे मीठा-मीठा एहसास होने लगा था। रॉकी की ज़ुबान बाहर थी और वो मेरे कंधे के ऊपर से अपना मुँह आगे को निकाले हुए था और अपने अगले दोनों पैरों से मेरी कमर को इस तरह से पकड़े हुए था कि मेरी कमर उसके धक्के से आगे ना जा सके। अब ज़रा भी दर्द बाकी नहीं रहा था, बस मज़ा ही मज़ा था। रॉकी के लंड का आगे वाला पतला नोकीला हिस्सा जब मेरी चूत के अंदर तक जाता तो एक अजीब सा नशा मेरी चूत में घुल जाता था।

मगर अब फ़िर एक दर्दनाक हमला होने वाला था। रॉकी का लंड फूल कर अब मुझे कुछ ज्यादा ही मोटा महसूस होने लगा। मैंने इंटरनेट पे कुत्ते से चुदाई वाली फिल्मों में देखा तो था कि कुत्ते का लंड पीछे से एक गेंद कि तरह फूल जाता है और जो चूत में घुस जाता है। मगर इस हिस्से को चूत में लेने से अब मैं घबरा रही थी। मैंने पीछे हाथ लगा कर देखा तो सच में रॉकी का लंड एक गेंद के जैसे गोल फूला हुआ था और मोटा भी काफी था। रॉकी तो लगातार अपने धक्के तेज कर रहा था, ताकि उसका वो मोटा हिस्सा भी मेरी चूत में घुस जाये। मगर मैं जानबूझ कर उसका झटका लगते ही अपने आप को आगे ढकेल देती ताकि उसका वो मोट हिस्सा मेरी चूत में ना जाये।

पर रॉकी को ये सब मंज़ूर नहीं था। वो अपना काम अधूरा नहीं छोड़ने वाला था। उसने मुझे अपने अगले पैरों से कस के जकड़ लिया और अपने पीछे वाले पैर भी और आगे कर लिये। अब उसकी टाँगें मेरी जाँघों के साथ चिपकी हुई थीं। मुझे एहसास हो गया था कि अब रॉकी मेरे बलात्कार पर उतर आया है। रॉकी फ़िर से अपने मोटे लंड का प्रहार मेरी चूत पर करने लगा था और हर एक धक्के से मुझे एहसास होता कि उसका मोटा गेंद वाला हिस्सा मेरी चूत में घुस रहा है।

मैंने एक बार कोशिश भी कि के रॉकी के आगे वाले पैरों से छूट जाऊँ, मगर उसने मुझे इतनी मजबूती से जकड़ रखा था कि मैं डर गयी कि उसके नाखून मेरे बदन में न लग जायें। अब मैंने मोटे गेंद जैसे हिस्से को चूत में घुसवा लेना ही ठीक समझा। मेरी चूत मुझे फैलती हुई महसूस होने लगी और इससे दर्द भी होने लगा था। मेरे मुँह से ‘आह-आह’ की आवाजें निकलने लगी थी। मगर रॉकी को तो मज़ा आ रहा था। वो हर धक्के के साथ मुझे अपनी ओर खींच लेता और पीछे से जोरदार झटका लगा देता।

फिर एक और झटका लगा और उसका गेंद वाला हिस्सा भी पुरा मेरी चूत में घुस गया। मेरे मुँह से चींख निकल गयी। मेरी चूत का मुँह जो बुरी तरह फैल कर फट रहा था अब फिर से नॉर्मल हो गया जिससे मुझे कुछ राहत मिली। मगर मुझे अपनी चूत में वो गेंद जैसा हिस्सा ठूँसा हुआ थोड़ा अजीब भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था। अब रॉकी थोड़ी देर के लिये रुका और फ़िर से झटके लगाने लगा।

मैं भी उसके साथ अपनी कमर हिलाने लगी। मगर अब उसका लंड चूत में फंस चुका था। वो बाहर नहीं आ रहा था और अंदर ही अपना कमाल दिखा रहा था। इतनी देर में रॉकी ने तेज-तेज कमर हिलायी और फ़िर अपनी कमर को ऊपर उठा कर मुझे जोरदार धक्का लगाते हुए कस के जकड़ लिया। मुझे भी अपनी चूत में उसके लंड का तेज झटका लगा, जो अब तक के झटकों से सब से आगे तक पहुँचा था और फ़िर रॉकी के लंड का गरम-गरम पानी मैंने अपनी चूत में महसूस किया। रॉकी के तेज झटकों की वजह से मैंने भी एक बार फ़िर से अपना पानी छोड़ दिया। उधर रॉकी ने मेरी चूत में जितनी भी पिचकारियाँ छोड़ी मुझे सब का बारी-बारी एहसास हुआ। मैं बेहद मज़े और मस्ती में थी और थोड़ी देर ऐसे ही लंड को चूत में रखना चाहती थी। मगर रॉकी जो बुरी तरह से हाँफ रहा था, उसने मेरी कमर को छोड़ दिया और एक साइड को उतरने लगा।

मेरी चूत में उसके लंड का गेंद वाला हिस्सा फंसा हुआ था और रॉकी के नीचे उतरने से मेरी चूत पर बहुत प्रेशर पड़ा और दर्द का एहसास होने लगा। इसलिये मैंने झट से उसकी दोनों टाँगें पकड़ी और उसको उतरने से रोक लिया। मगर रॉकी अब रुकने वाला नहीं था, वो बेतहाशा हाँफ रहा था। रॉकी अपने अगले पाँव मेरे ऊपर से हटा कर नीचे उतर गया और घूम कर खड़ा हो गया लेकिन उसका लंड मेरी चूत में वैसे ही फंसा रहा। मुझे एहसास हुआ कि उसके लंड से मेरी चूत में अब भी काफी रस बह रहा था। मैं ऐसे ही पंद्रह-बिस मिनट तक कुत्तिया की तरह रॉकी से जुड़ी रही जैसे कि अक्सर कुत्ते-कुत्तिया आपस में चिपके दिखायी देते हैं। फिर मुझे अपनी चूत में रॉकी के लंड का गेंद वाला हिस्सा थोड़ा ढीला होता महसूस हुआ तो मैंने एक हाथ से उसके लंड को पकड़ा और पीछे कि तरफ़ खींचा तो उसका मोटा हिस्सा बाहर आने लगा। जैसे ही उसका गेंद जैसा मोटा लंड मेरी चूत में से बाहर आया तो मेरी चूत में से ‘फ़च’ की आवाज आयी जैसे की शैम्पेन की बोतल खोली हो। रॉकी भी शायद इसी के इंतज़ार में था। लंड बाहर निकलते ही वो एक कोने में जाकर बैठ गया।

अब मैंने उसका पूरा लंड लटका हुआ देखा। करीब सात-आठ इंच का होगा और आखिर में वो मोटा गेंद वाला हिस्सा अभी भी काफी फूला हुआ था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी मोटी गेंद मेरी चूत में घुसी थी। मैं उसके लंड की तरफ़ देखती रही और खुद भी सीधी होकर बैठ गयी। मेरी चूत में से मेरा और रॉकी का मिला जुला माल बहने लगा। मैं नीचे ही फ़र्श पर बैठी थी और नीचे ही मेरी चूत में से निकल रहा पानी फ़ैल रहा था। मैं भी निढाल होकर बैठ गयी और रॉकी की तरफ़ देखती रही। रॉकी अपने लंड को चाट रहा था और थोड़ी देर में ही वो अपने पैर पे पैर रख कर सो गया और धीरे धीरे उसका लंड भी छोटा होकर खोल में समा गया।

जब मैं उठ कर खड़ी हुई तो मेरी चूत में से निकलता मेरा और रॉकी का मिला-जुला माल मेरी टाँगों से होता हुआ मेरे पैरों और सैंडलों के बीच में बहने लगा। मैंने बाथरूम में जाकर पेशाब किया। मेरी चूत टाँगें और सैंडलों में मेरे पै


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

फलवाले से चुदाई

लेखिका: सानिया रहमान



मेरा नाम सानिया रहमान है। मैं अपने शौहर के साथ चंडीगढ़ में रहती हूँ लेकिन हम दोनों ही लखनऊ के रहने वाले हैं। मैं दिखने में बेहद खूबसूरत और सैक्सी हूँ। मेरा रंग गोरा, बाल एक दम काले घने लंबे और आँखें भुरी हैं। मैं अपने रंग-रूप का बेहद ख्याल रखती हूँ और हमेशा सज-संवर कर टिपटॉप रहना पसंद है मुझे। मैंने होम-सायंस में एम-ए किया है। शौहर से मेरी शादी कुछ साल पहले ही हुई है। शौहर एक बड़ी कंपनी में मार्कटिंग मैनेजर हैं। वो सुबह जल्दी चले जाते हैं और फिर रात के आठ-नौ बजे तक वापस आते हैं। महीने में करीब दस से बारह दिन तो उन्हें चंडीगढ़ से बाहर भी जाना पड़ता है। मैं बेहद सैक्सी हूँ लेकिन शौहर छः-सात दिनों में महज़ एक ही दफा मेरी चुदाई करते हैं। मेरी चुदाई की भूख नहीं मिट पाती और मैं खूब चुदवाना चाहती हूँ।



घर में तमाम दिन अकेली रहती हूँ। घर की साफ-सफाई के लिये सुबह एक कामवाली आती है इसलिये मुझे दिन भर ज्यादा कुछ काम भी नहीं होता। वैसे टीवी से काफी वक्त बीत जाता है क्योंकि मैं केबल पर सीरियल और रियल्टी शो वगैरह देखने की शौकीन हूँ। हफ्ते में तीन-चार दिन तो अकेले ही दोपहर में मार्केट या मॉल में खरीददरी और विन्डो शॉपिंग या फिर थियेटर में फिल्म देखने निकल जाती हूँ। इसके अलावा इंटरनेट सर्फिंग भी करती हूँ और अक्सर पोर्न वेबसाइटों पर गंदी फिल्में और कहानियाँ पढ़ कर मज़ा लेती हूँ। हकीकत में सिर्फ मेरे शौहर ने ही मुझे चोदा था लेकिन तसव्वुर में तो मैं हज़ारों मर्दों से चुद चुकी थी जिनमें फिल्मी हीरो और दूसरे सलेब्रिटी से लेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मिलने वाले हर तबके के गैर-मर्द शामिल थे। अक्सर मैं किसी पड़ोसी या किसी दुकानदार, माली, पोस्ट-मैन, फल-सब्ज़ी वाले का तसव्वुर करते हुए केले से चोद कर अपनी चूत की आग बुझाती थी। शौहर की सर्द-महरी की वजह से वक्त के साथ-साथ मेरी तिशनगी इस कदर बढ़ गयी कि मैं किसी गैर मर्द के लंड से हकीकत में चुदवाने का सोचने लगी।



हमारे मुहल्ले में घूम-घूम कर सब्ज़ी और फल बेचने वाले आते रहते हैं। उनमें से एक फल बेचने वाले का नाम मोहन था। वो मुझसे बहुत ही मुस्कुरा-मुस्कुरा कर बात करता था और कभी-कभी मज़ाक भी कर लेता था। क्योंकि मैं हमेशा अच्छे कपड़े और सैंडल पहन कर सज-संवर के रहती हूँ इसलिये वो कईं बार मेरी तारीफ भी कर देता और कहता कि “आपको तो फिल्मों में काम करना चाहिये!” दिखने में वो भी ठीक-ठाक था। उसकी उम्र बीस-इक्कीस साल से ज्यादा नहीं थी लेकिन उसका जिस्म एक दम गठीला था। मैं अक्सर उसका तसव्वुर करते हुए अपनी चूत को केले से चोद कर मज़ा लेती थी। मैंने सोचा कि मैं मोहन को थोड़ा सा और ज्यादा लिफ्ट दे दूँ तो शायद बात बन जाये और मुझे उससे चुदवाने का मौका मिल जाये। क्योंकि मुहल्ले के लोग शौहर को अच्छी तरह से जानते पहचानते थे, मुझे डर था कि अगर मैंने मुहल्ले में किसी के साथ चुदवाया तो शौहर को पता चल जायेगा। मुहल्ले में ज्यादातर सर्विस करने वाले ही रहते थे और नौ-दस बजे के बाद मुहल्ले में सन्नाटा हो जाता था। लेखिका: सानिया रहमान



करीब एक हफ्ता लगा मुझे हिम्मत जुटाने में और सही मौका मिलने में। इस दौरान मैंने एहतियात के तौर पे बर्थ-कंट्रोल पिल्स भी लेनी शुरू कर दी। फिर एक दिन मेरे शौहर दो-तीन दिन के लिये बाहर गये हुए थे और मैं पक्के इरादे से मोहन का इंतज़र करने लगी। उस दिन मैंने तैयार होने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। गुलाबी रंग के डिज़ायनर सलवार कमीज़ के साथ काले रंग के ऊँची ऐड़ी के सेन्डल पहने और मैचिंग लिपस्टिक, ऑय-शेडो, फाऊँडेशन वगैरह से पूरा मेक-अप किया था। करीब ग्यारह बजे मोहन की आवाज़ सुनायी पड़ी, “केले ले लो केले!” वो जब मेरे घर के सामने आया तो बोला, “मेम साब! केले चाहिये? बहुत ही लंबे और मोटे केले हैं!” मैंने कहा, “पहले अपने केले दिखा तो सही!” वो गेट खोलकर बरामदे में मेरे पास आया और अपने सिर से फल की टोकरी उतार कर ज़मीन पर रख दी। फिर वो खुद भी नीचे बैठ गया और उसने मुझे एक बहुत बड़ा केला दिखाते हुए कहा, “मेम साब! आप ये केला देखो! बहुत ही अच्छा है आपको मज़ा आ जायेगा!” मैंने मुस्कुराते हुए सैक्सी अंदाज़ में कहा, “ये केला तो मुलायम सा है मुझे एक दम टाइट और बड़ा केला चाहिये!” उसने मुझे दूसरा केला दिखाते हुए कहा, “तो ये वाला देखो!” मैंने कहा, “मुझे कोई खास केला दिखा!” उसने दूसरा केला निकाला और मुझे दिखाते हुए बोला, “फिर ये वाला देखो... आपको ज़रूर पसंद आयेगा! लंबा-मोटा है और टाइट भी है और बहुत पका भी नहीं है!”



मोहन ने निक्कर और बनियान पहनी हुई थी। उसके निक्कर के ऊपर से ही उसका लंड महसूस हो रहा था। ऊपर से उभार देखने में ही मैंने अंदाज़ा लगाया कि उसका लंड आठ-नौ इंच से कम लंबा नहीं होगा। मैंने बिल्कुल बेहया होकर अपना पैर उठा कर सैंडल से उसके लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, “तूने जो वहाँ पर एक स्पेशल केला छुपा कर रखा है वो नहीं दिखायेगा? वो क्या किसी और के लिये छुपा रखा है!” वो बोला, “आप मज़ाक कर रही हैं!” मैंने अपने होंठ दाँतों में दबाते हुए कहा, “मैं मज़ाक नहीं कर रही हूँ!” वो शरमाते हुए बोला, “मैं ये केला यहाँ पर कैसे दिखा सकता हूँ?” मैंने इधर उधर देखा तो आसपास कोई नहीं था। मैंने मोहन से कहा, “तू अंदर आ जा और फिर मुझे अपना केला दिखा!” वो अंदर आ गया तो मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया।लेखिका: सानिया रहमान



मैंने उससे कहा, “अब तू अपना वो खास केला मुझे दिखा!” वो बोला, “मेम साब ये केला आपके लायक नहीं है... ये बहुत ही बड़ा है!” मैंने कहा, “ये तो और अच्छी बात है! मुझे बड़ा केला ही चाहिये!” उसने शरमाते हुए अपना लंड निक्कर से बाहर निकाला और बोला, “लो देख लो!” उसका लंबा और मोटा लण्ड देखकर मेरी धड़कनें तेज़ हो गयीं और चूत में खलबली सी मच गयी। मैंने कहा, “बेहद शानदार केला है ये तो! मुझे तेरा केला पसंद है... मुझे यही केला चाहिये!” वो बोला, “मेम साब बहुत दर्द होगा!” मैंने कहा, “बाद में मज़ा भी तो आयेगा!” वो बोला, “वो तो मुझे पता नहीं मेम साब! लेकिन ये केला खाने से आपकी फट सकती है! अब तक मेरी भाभी और आपकी तरह ही एक मेम साब के कहने पर उन्हें अपना ये केला खिला चुका हूँ और दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर सकीं! दोनों की कईं जगह से कट फट गयी थी और दोनों ने ही फिर कभी इसे खाने की हिम्मत नहीं की!” मैंने कहा, “मैं तो कईं दिनों से ऐसा ही केला ढूँढ रही थी!” वो बोला, “आप सोच लो मेम साब! मैं तो जैसा आप कहेंगी वैसा करने के लिये तैयार हूँ… आगे आपकी मर्ज़ी! कुछ हो गया तो मुझ पर इल्ज़ाम मत लगाना!”



मैं मोहन के करीब गयी तो उसके जिस्म से पसीने की बास आ रही थी। मैंने कहा, “तेरे जिस्म से तो बास आ रही है… पहले तू नहा ले उसके बाद मैं तेरे इस केले का स्वाद चखुँगी!” मैंने उसे बाथरूम में लेजाकर एक अच्छी सी महक वाला साबुन दे दिया। उसने अपनी बनियान और निक्कर उतार दी और नहाने लगा। मैं वहीं खड़ी उसे निहारती रही। उसने जब अपने लंड पर साबुन लगा कर उसे खूब रगड़ा तो उसका लंड एक दम टाइट हो गया। मैं उसके नौ इंच लंबे और बहुत ही मोटे लंड को देखती ही रह गयी। लंड लम्बा तो था ही लेकिन उससे ज्यादा खास बात थी उसकी गैर-मामुली मोटाई। “सुभान अल्लाह!” मेरे मुँह से निकला और मेरे जिस्म में उसके लंड को देखकर आग सी लगने लगी। मैंने कहा, “ला मैं तेरे इस केले पर साबून लगा देती हूँ।” मैंने उसके हाथ से साबुन लेकर उसके लंड पर साबुन लगाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही उसके लंड का जूस निकल कर मेरे सैंडलों पर गिरने लगा। मैंने खिझते हुए थोड़ा गुस्से से कहा, “ये क्या? तेरे लंड का जूस तो इतनी जल्दी निकल गया?” वो बोला, “मेम साब क्या करूँ ज़िंदगी में तीसरी बार किसी औरत ने मेरे लंड पर अपना हाथ लगाया है वो भी एक साल बाद इसलिये मैं जोश में आ गया लेकिन अब इसका जूस जल्दी नहीं निकलेगा!” मैंने कहा, “अब तो तेरे लण्ड को खड़े होने में थोड़ा वक्त लगेगा अब तू जल्दी से नहा कर बाहर आ जा ताकि मैं तेरे केले का स्वाद चख सकूँ!” वो बोला, “बस मैं अभी आता हूँ मेम साब!”लेखिका: सानिया रहमान



मैं बाहर बेडरूम में आ गयी। पहले तो मैंने अपनी उंगलियों से अपने पैरों और सैंडलों से उसके वीर्य को पोंछा और फिर अपना हाथ नाक के पास ले जाकर सूँघा। फिर ज़ुबान बाहर निकाल कर मैं अपनी उंगलियों से मोहन का वीर्य चाटने लगी। मेरी चूत की हालत खराब थी और खूब भीग गयी थी। मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फटाफट सलवार कमीज़ उतार दी और पैंटी चूत पर से एक तरफ खिसका कर सहलाने लगी। इतने में ही वो भी नहा कर मेरे बेडरूम में नंगा ही आ गया। वो आँखें फाड़े मुझे निहारता रह गया क्योंकि मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने उसके सामने मौजूद थी और अपनी चूत सहला रही थी। मैं अपनी चूत सहलाना छोड़ कर उसके करीब आ गयी। अब उसका जिस्म खुशबू से महक रहा था। मैंने उसका ढीला लंड अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर बाद नीचे बैठते हुए मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसके लण्ड मेरे मुँह में अकड़ने लगा तो मैंने उससे कहा, “तू भी मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाट!” फिर मैंने खुद ही अपनी ब्रा और पैंटी उतार दी और सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी हो गयी। मैंने कहा, “मैं लेट जाती हूँ और तू मेरे ऊपर आ जा ताकि मैं भी तेरा केला खा सकूँ!” मैं लेट गयी और वो मेरे ऊपर 69 की पोज़िशन में हो गया। मैंने उसका लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और वो मेरी चूत को चाटने लगा। जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान मेरी चूत पर लगायी तो मेरे जिस्म में सुरसुरी सी होने लगी और मैं सिसकरियाँ भरते हुए उसके लंड को तेजी के साथ चूसने लगी।



दो मिनट बाद ही मेरी चूत से रस निकलने लगा। मैं बड़े प्यार से मोहन का लंड चूस रही थी। मेरी चूत का रस चाटने के बाद वो रुक गया। मैंने पूछा, “क्या हुआ… तू रुक क्यों गया?” तो वो बोला, “मेमसाब आपकी चूत ने तो रस छोड़ दिया...!” मैंने कहा, “तो क्या हुआ… थोड़ी देर और मेरी चूत को चाट फिर उसके बाद मेरी चुदाई करना!” वो फिर से मेरी चूत को चाटने लगा। उसका लण्ड भी अब फिर से कड़क हो गया था और मोटाई की वजह से मेरे मुँह में बेहद मुश्किल से समा रहा था। मुझे अपना मुँह इस कदर फैला कर खोलना पड़ रहा था की मुझे लग रहा था कि मेरा जबड़ा ही ना टूट जाये।



करीब पाँच मिनट बाद मैं फिर झड़ गयी। फिर मैंने कहा, “अब तू मेरी चुदाई कर अपने इस मोटे लण्ड से!” मैंने अपने चूतड़ के नीचे दो तकिये रख लिये। इससे मेरी चूत एक दम ऊपर उठ गयी। उसके बाद मैंने उसे एक पका हुआ केला लाने को कहा। वो बाहर कमरे में जाकर अपनी टोकरी में से एक केला ले आया। मैंने वो केला लकर छीला और उसे अपनी मुठ्ठी में मसल डाला और केले का थोड़ा सा गूदा अपनी चूत पर लगाने लगी। वो बोला, “मेमसाब ये आप क्या कर रही हो?” मैंने मुस्कुराते हुए शोख अदा से कहा, “बस तू देखता जा!” फिर मैंने थोड़ा सा केले का गूदा उसके पूरे लंड पर भी लगा दिया! उसके बाद मैंने उससे कहा, “अब चोद अपने लण्ड से मेरी चूत को… अब केले के गूदे की वजह से तेरा ये लंबा और मोटा लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में आसानी से घुस जायेगा!” लेखिका: सानिया रहमान



वो मेरी टाँगों के बीच में आ गया और उसने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के लबों को फैला कर बीच में रख दिया और मेरी चूत के अंदर दबाना शुरू कर दिया। उसका लंड फिसलते हुए मेरी चूत में घुसने लगा। मुझे हल्का-हल्का दर्द होने लगा। जैसे ही उसका लंड मेरी चूत में करीब पाँच इंच तक घुसा तो मुझे बहुत ज्यादा दर्द महसूस होने लगा और मेरे मुँह से चींखें निकलने लगी। वो बोला, “मेमसाब आप कहें तो मैं बाहर निकाल लूँ!” मैंने कहा, “तू परवाह ना कर और धीरे-धीरे पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसाना ज़ारी रख… मैं कितनी भी चिल्लाऊँ पर तेरा तमाम लण्ड अंदर घुस जाने से पहले तू रुकना मत!” उसने अपना लंड दबाना ज़ारी रखा। दर्द के मारे मेरा बुरा हाल था। लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहे का रॉड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर घुसता जा रहा हो। मेरा सारा जिस्म थरथर काँपने लगा और मेरी टाँगें जवाब देने लगी। जब उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर घुस गया तो मैंने मोहन से रुक जाने को कहा तो वो रुक गया। वो मेरे मम्मों को मसलते हुए मुझे चूमने लगा। थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कुछ कम हो गया तो मैंने कहा, “अब तू बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर कर!” वो अपना लंड मेरी चूत में धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लग। मुझे फिर से दर्द होने लगा और मैं दर्द के मारे चींखने लगी। मेरा सारा जिस्म पसीने से नहा गया था।



पाँच मिनट तक वो बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करता रहा। अब मेरा दर्द कुछ कम हो चुका था और मुझे मज़ा आने लगा था। दो मिनट बाद ही मैं झड़ गयी तो मैंने मोहन से कहा, “अब तू जिस तरह से चाहे मेरी चुदाई कर!” उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और जोर-जोर के धक्के लगाने लगा। अब मुझे और ज्यादा मज़ा आने लगा। मैं भी अपने चूतड़ उठा-उठा कर मोहन का साथ देने लगी। मुझे एक दम ज़न्नत का मज़ा मिल रहा था जो कि मुझे आज तक कभी नहीं मिला था। वो मेरे मम्मों को मसलते हुए मेरी चुदाई कर रहा था।लेखिका: सानिया रहमान



दस मिनट इस तरह चुदवाने के बाद जब मैं फिर से झड़ गयी तो मैंने उसे लंड मेरी चूत के बाहर निकालने को कहा। वो बोला, “क्या हुआ मेमसाब!” मैंने कहा, “अब तू अपना लंड और मेरी चूत को साफ़ कर दे और फिर मेरी चुदाई कर… अब केले के गूदे का कोई काम नहीं है! वो तो मैंने तेरा ये लंबा और मोटा लंड आसानी से अपनी चूत में लेने के इरादे लगाया था!”



उसने बेड की चादर से मेरी चूत को साफ़ कर दिया और फिर अपने लंड को साफ़ करने लगा। उसके बाद उसने अपना लंड फिर से मेरी चूत में धीरे-धीरे घुसाना शुरू कर दिया। मुझे फिर से दर्द होने लगा लेकिन मैंने उसे रोका नहीं। धीरे-धीरे उसने अपना पूरा का पूरा लंड फिर से मेरी चूत में घुसा दिया और मुझे धीरे-धीरे चोदने लगा।



दस-पंद्रह मिनट चुदवाने के बाद मैं फिर से झड़ गयी। मोहन के लण्ड से चुदने में मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि क्या बताऊँ। मन कर रहा था कि इसी तरह चुदवाती रहूँ। मैं पलट कर डॉगी स्टाइल में हो गयी और उसे फिर से चोदने को कहा। उसके बाद उसने अपना पूरा का पूरा लंड एक झटके में पीछे से मेरी चूत में डाल दिया। मेरे मुँह से जोर की चींख निकली लेकिन वो रुका नहीं। वो मुझे एक दम आँधी की तरह से चोदने लगा। तमाम बेड जोर-जोर से हिलने लगा। कमरे में ‘चप-चप’ और ‘धप-धप’ की आवाज़ गूँज रही थी। मैं जोश में पागल सी हुई जा रही थी और मैंने “और तेज चोद.. और तेज चोद मुझे!” कहना शुरू कर दिया था। मोहन ने भी मेरी आवाज़ सुन कर और भी जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चुदाई करनी शुरू कर दी। अब उसके हर धक्के से मेरा पूरा का पूरा जिस्म हिल रहा था। वो बहुत ही बुरी तरह से मेरी चुदाई कर रहा था और मैं भी पूरे जोश के साथ मोहन से चुदवा रही थी।लेखिका: सानिया रहमान



थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैं फिर से झड़ गयी तो उसने अपना लंड मेरी चूत के बाहर निकाल लिया और मुझे बेड के किनारे पर लिटा दिया। उसके बाद वो मेरी टाँगों के बीच में आ कर ज़मीन पर खड़ा हो गया और मेरी चूत में लंड घुसेड़ कर चुदाई करने लगा। अब वो मेरे दोनों मम्मों को मसलते हुए मुझे बहुत ही ज़ोरों चोद रहा था। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और मेरे मुँह से “ऊऊहहह. आआहहह.. और. तेज. और.. जोर से.. फाड़ दे मेरी चूत…” को जैसी आवाज़ें निकलने लगी। वो भी पूरे दमखम के साथ मेरी चुदाई कर रहा था।



इसी तरह से उसने मुझे काफी देर तक चोदा और फिर आखिर में मेरी चूत में ही झड़ गया। उसके साथ ही साथ मैं भी फिर से झड़ गयी। वो मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चूमने लगा। हम दोनों की साँसें बहुत तेज चल रही थी। उससे चुदाई के दौरान मैं पाँच बार झड़ चुकी थी। आज मुझे चुदवाने का वो मज़ा मिला जिसका मैं बरसों से इंतज़ार कर रही थी। थोड़ी देर बाद जब उसका लंड मेरी चूत में बिल्कुल ढीला पड़ गया तो उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मेरे ऊपर से हट गया।



उसने अपने कपड़े पहन लिये और जाने लगा तो मैंने उससे कहा, “अब तू रोज आ कर मेरी चुदाई ज़रूर करना!” वो बोला, “मेम साब! मुझे भी आज आपकी चुदाई करने में वो मज़ा आया है कि मैं बता नहीं सकता... कमाल की औरत हो आप… मैं रोज ही आपकी चुदाई करुँगा!” उसके बाद वो चला गया। करीब एक महीने तक मैं उससे रोज-रोज चुदवाती रही और खूब मज़ा लेती रही। उसके बाद एक दिन मैंने मोहन से कहा, “आज मैं तुझसे गाँड मरवाना चाहती हूँ!” वो बहुत ही खुश हो गया। मोहन से पहली-पहली बार गाँड मरवाने के बाद मैं तीन-चार दिनों तक ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। उसके बाद मैं मोहन से आराम से गाँड भी मरवाने लगी। मुझे उससे गाँड मरवाने में भी बहुत मज़ा आता था। वो रोज ही मेरे पास आता और तरह-तरह के स्टाइल में मेरी बहुत ही बुरी तरह से चुदाई करता था। उसे झड़ने में भी बहुत वक्त लगता था और वो मेरी गाँड भी बहुत ही बुरी तरह से मारता था।



करीब छः-सात महिनों तक मैं मोहन से चूत और गाँड दोनों ही मरवाती रही। उसके बाद वो अपने गाँव वापस चला गया। उसके जाने के बाद मैंने कईं गैर-मर्दों के साथ चुदवाया लेकिन मुझे मोहन के लंड से चुदवाने में जो मज़ा आया था वो मज़ा मुझे अब तक नहीं मिला और ना ही मोहन के जैसा लंबा और मोटा लंड ही कभी मिला।

!!!! समाप्त !!!!


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

मेरी ज़िंदगी का राज़

शाज़िया मिर्ज़ा



बहुत ही हिम्मत करके इस कहानी के ज़रिये मैं अपनी ज़िंदगी की एक ऐसी हक़ीकत बयान कर रही हूँ जिसका रुसवाई के डर से मैं किसी से भी रुबरू हो कर ज़िक्र नहीं कर सकती। दर‍असल मैं पिछले करीब आठ सालों से बाकयदा अपने पालतू कुत्ते से चुदवाती आ रही हूँ। मुझे पूरा एहसास है कि मेरी हरकतें इस दुनिया की नज़रों में बेहद नाजायज़ और बदकार हैं लेकिन मैं अपने कुत्ते से चुदवाये बगैर नहीं रह सकती। मैं उससे बेहद मोहब्बत करती हूँ और उससे चुदवाने की निहायत आदी हो चुकी हूँ। अपनी दास्तान तफसील से बयान करने से पहले मैं अपने बारे में बता दूँ। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



मेरा नाम शाज़िया मिर्ज़ा है और मैं सैंतीस साल की मॉडर्न ख्यालों वाली तालीम-याफता तलाकशुदा औरत हूँ। मैंने बंगलौर के नामी-गिरामी कॉलेज से एम-बी-ए किया हुआ है। वैसे तो मैं नासिक की रहने वाली हूँ लेकिन तलाक के बाद पिछले ग्यारह साल से मैं मुम्बई में अकेली रहती हूँ और एक प्राइवेट बैंक में जनरल मैनेजर हूँ। अच्छी-खासी तनख्वाह है जिसकी वजह से मेरा लाइफ-स्टाइल भी काफी हाई-क्लास है।



वैसे तो मैं पिछले आठ साल से अपने एलसेशन कुत्ते, ‘जैकी’ से चुदवा रही हूँ लेकिन कुत्तों से चुदाई से मेरा तार्रुफ बा‍ईस साल की उम्र में ही हो गया था। तब मैं नासिक में ही एम-कॉम कर रही थी और फाइनल ईयर शुरू होने के पहले दो महीने ट्रेनिंग के लिये मुम्बई आयी थी। मेरे अब्बू के किसी दोस्त की एक दूर की रिश्तेदार तब मुम्बई में जुहू इलाके में अकेली रहती थीं और मैं उन ही के साथ उनके शानदार फ्लैट में पेईंग-गेस्ट बन कर रहने लगी। उनका नाम सईदा था और वो करीब चालीस साल की बहुत ही खूबसूरत और खुशदिल औरत थीं। उनके शौहर किसी दूसरे मुल्क में नौकरी करते थे। शायद दुबई या कुवैत में पर मुझे ठीक से याद नहीं। मैं उन्हें ‘सईदा आँटी’ कह कर बुलाती थी। उनके पास एक बड़ा सा काले रंग का डोबरमैन कुत्ता भी था जिसे वो ‘जानू’ कह कर बुलाती थीं।



ट्रेनिंग के लिये मुझे नारीमन पॉइन्ट के करीब जाना पड़ता था इसलिये मैं सुबह ही निकल जाती थी और शाम को लौटती थी। शाम को मैं खाना बनाने में सईदा आँटी की मदद करती और उनके कुत्ते जानू के साथ खेलती और टीवी देखती थी। उनके शानदार फ्लैट में तीन बेडरूम थे इसलिये मैं और सईदा आँटी अलग-अलग कमरे में सोती थीं। एक-दो हफ्तों में मैं सईदा आँटी से काफी वाकिफ हो गयी। सईदा आँटी काफी खुले और आज़ाद ख्यालों वाली थीं। हर रोज़ रात को खाने से पहले टीवी देखते हुए शराब के एक-दो पैग पीती थीं। मुझसे भी बॉय-फ्रेंड्स वगैरह के बारे में पूछती और अपने कॉलेज के दिनों में इश्कबाज़ी के किस्से और शादी से पहले गैर-मर्दों से अपनी चुदाई के किस्से भी मुझे सुनाती। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



एक दिन शाम को मैं घर आयी तो सईदा आँटी ने मुझे बताया कि उन्हें एक पार्टी में जाना है और उन्हें लौटने में रात को काफी देर हो जायेगी। उन्होंने मुझे हिदायत दी कि मैं दरवाजा ठीक से अंदर से लॉक कर लूँ और खाना खा कर सो जाऊँ और उनके लौटने का इंतज़ार ना करूँ। उनके पास बाहर से दरवाजा खोलने के लिये दूसरी चाबी थी। मैं खाना खा कर टीवी देखने लगी और टीवी देखते-देखते वहीं सोफे पर ही सो गयी।



करीब आधी रात के वक्त सईदा आँटी वापस लौटीं तो मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि सईदा आँटी काफी नशे में थीं। इससे पहले मैंने उन्हें कभी इतने नशे में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची हील के सैन्डल पहने हुए थे और नशे में उनके कदम ज़रा से लड़खड़ा भी रहे थे। “काफी मज़ा आया पार्टी में... आज थोड़ी ज्यादा ही पी ली”, सईदा आँटी मुस्कुराते हुए बोलीं। “तू फिक्र ना कर और अंदर जा कर सो जा.... सुबह जाना भी है तुझे.... मैं थोड़ी देर टीवी देखुँगी... मेरी सहेली ने एक इंगलिश मूवी की कैसेट दी है!” (उस ज़माने में सी-डी या डी-वी-डी प्लेयर नहीं थे) लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



उन्हें ड्राइंग रूम में छोड़ कर मैं अपने बेडरूम में जा कर सो गयी। सोते हुए मुझे करीब एक घंटा हुआ होगा जब सिसकरियों की आवाज़ से मेरी नींद खुल गयी। हालाँकि मुझे चुदाई का कोई तजुर्बा नहीं था लेकिन मैं बा‍ईस साल की थी और सैक्सी किताबों और ब्लू-फिल्मों की बदौलत उन सिसकरियों का मतलब बखूबी समझती थी। लेकिन मुझे ताज्जुब इस बात का था कि सईदा आँटी के साथ आखिर था कौन। मैं बिस्तर से उठी और दरवाजे के पास जाकर बिना आवाज़ किये धीरे से थोड़ा दरवाजा खोला। जब मैंने ड्राइंग रूम में झाँक कर देखा तो मुझे अपनी नज़रों पर यकीन नहीं हुआ।



सईदा आँटी ने जो सलवार-कमीज़ पहले पहन रखी थी वो अब सोफे पर एक तरफ पड़ी थी और उनके जिस्म पर इस वक्त सिर्फ एक छोटी सी ब्रा और उनके पैरों में वही ऊँची पेंसिल हील वाले सैन्डल मौजूद थे। सबसे हैरत की बात ये थी कि सईदा आँटी फर्श पर अपने हाथ और घुटनों के बल झुकी हुई थीं और उनका कुत्ता जानू पीछे से उनकी कमर के दोनों तरफ अपनी अगली टाँगें जकड़े हुए उनके चूतड़ों पर चढ़ा हुआ था और आहिस्ता-आहिस्ता झटके मार रहा था। सईदा आँटी की पीठ पर पुरी तरह से झुका हुआ वो कुत्ता सामने देख रहा था और उसके कुल्हे एक लय में सईदा आँटी के चूतड़ों पर आगे-पीछे ठुमक रहे थे। सईदा आँटी अपनी आँखें मूंदे सिसक रही थीं। करीब दो मिनट तक मैं हैरत-अंगेज़ आँखें फाड़े देखती रही और उसके बाद मेरे होशो हवास बहाल हुए। साफ ज़ाहिर था कि उस डोबरमैन कुत्ते के लन्ड से अपनी चूत चुदवाते हुए सईदा आँटी दुनिया जहान से बिल्कुल बेखबर थीं।



फिर अचानक जानू ज़ोर से झटका मारते हुए सईदा आँटी की कमर पर और आगे झुक गया और उसके कुल्हे हैरत-अंगेज़ रफ्तार से आगे-पीछे चोदने लगे। जानू के पिछले पैर ज़मीन पर फिसलने लगे थे लेकिन उसने चोदने की रफ्तार ज़रा भी कम नहीं की। “आऊ...! आआऊ...! ऊऊऊहहह...! ऊँआआऊ!” सईदा आँटी ज़ोर से कराहने लगीं और अपना एक हाथ नीचे से अपनी टाँगों के करीब ले गयीं। “ओहह नहींऽऽ! आआऊऊऽऽऽ! ऊँऽऽ...! मर गयीऽऽऽ!”



कुत्ता जो भी कर रहा था उसकी हरकत से सईदा आँटी को तकलीफ हो रही थी। उनकी मुठ्ठियाँ फर्श के मुकाबिल जकड़ कर बंद और खुल रही थीं। उनका खुला हुआ मुँह दर्द से बिगड़ा हुआ था। “ऊँहहऽऽ आआईईऽऽऽ! मादरचोद.... जानू! आज फिर तूने अपनी ज़ालिम गाँठ अंदर ठूँस दी!” कराहते हुए सईदा आँटी फर्श पर ज़रा सा आगे की ओर खिसकीं तो कुत्ता भी उनके साथ चिपका हुआ खिंच गया लेकिन उनसे अलग नहीं हुआ। कुत्ते ने उसी तेज़ रफ्तार से चोदना ज़ारी रखा। मुझे साफ ज़ाहिर था कि सईदा आँटी तकलीफ में थीं। उनके खिसकने से अब वो दोनों साइड से मेरी नज़रों के सामने थे और मैं उनकी तकलीफदेह हालत साफ-साफ देख पा रही थी। कुत्ते के लन्ड की जड़ में गेंड जैसी फूली हुई गाँठ सईदा आँटी की चूत में पैंठ कर फंस गयी थी और दोनों एक दूसरे से वैसे ही जुड़ गये थे जैसे कुत्ता और कुत्तिया अक्सर आपस में चिपक कर जुड़ जाते हैं।



“ऊँऊँऽऽ जानू...!” सईदा आँटी कराही पर फिर उन्होंने जूझना बंद कर दिया और अपनी गाँड हवा में कुत्ते के मुकाबिल और ऊपर ठेल कर अपना सिर फर्श पर टिका दिया। जानू अभी भी ज़ोर-ज़ोर से आगे पीछे चोदना ज़ारी रखे हुए था। सईदा आँटी अब पुर-सकून हो गयी थीं तो कुत्ता बहुत तेज़ रफ्तार से छोटे-छोटे झटके मार कर चोद रहा था। जानू के कुल्हे लरजते और काँपते नामुदार हो रहे थे। मुझे फिर से सईदा आँटी की सिसकियाँ और कराहें सुनाई दीं लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि एक बार फिर हालात उनके काबू में थे और अब उन्हें मज़ा आ रहा था। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



मुझे भी एहसास नहीं हुआ कि मैंने कब अपनी नाइटी उठा कर पैंटी में हाथ डाल कर अपनी चूत सहलाना शुरू कर दिया था। मैंने देखा कि सईदा आँटी के ऊपर झुके हुए जानू ने अचानक अपने कुल्हे चलाना बंद कर दिये और उसी तरह बे-हरकत खड़ा हो गया। सईदा आँटी से कस कर चिपका हुआ कुत्ता ऐंठ कर काँप रहा था। उसकी आँखें भी शीशे की तरह जम गयी थीं। फिर उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपने कुल्हे चला कर चोदना शुरू किया लेकिन एक-दो मिनट में ही फिर से बिल्कुल रुक गया। उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि जानू ने सईदा आँटी की चूत में अपना रस छोड़ दिया है।



जानू तो निबट गया था लेकिन जब उसने सईदा आँटी से अलग होने की कोशिश की तो ज़ाहिर हो गया कि वो और सईदा आँटी अभी भी एक दूसरे से चिपक कर जुड़े हुए थे। “नहीं... जानू...! प्लीज़! रुक! जानु रुक!” सईदा आँटी ने उसे हुक्म दिया। जानू भी फरमाबरदार था और सईदा आँटी की कमर से उतरने की और कोशिश नहीं की और मुँह खोलकर अपनी जीभ बाहर निकाले हाँफता हुआ उनकी कमर पर चढ़ा रहा। सईदा आँटी भी हाँफ रही थीं और गहरी साँसें ले रही थीं। “मेरा अच्छा बच्चा जानू!” वो प्यार से बोलीं, “नाइस बॉय! बस ऐसे ही रुके रहो!” जानू सईदा आँटी की पीठ पर निढाल सा हो गया और उनकी गर्दन और बालों को चाटने लगा। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



सईदा आँटी बहुत ही एहतियात से आहिस्ता से खिसकीं ताकि उनकी चूत में फंसी कुत्ते के लन्ड की गाँठ पर खिचाव ना पड़े। ऐसे ही कुलबुलाते हुए सईदा आँटी थोड़ा और इधर उधर खिसकीं और अपना दाहिना हाथ अपनी टाँगों के बीच में ले जा कर अपनी चूत और कुत्ते के लन्ड को टटोला। फिर सईदा आँटी अपनी चूत सहलाने लगीं। बहुत ही चोदू नज़ारा था। दो-तीन मिनट में ही सईदा आँटी पूरे जोश में अपनी चूत अपने हाथ और उंगलियों से ज़ोर-ज़ोर से सहला रही थीं जबकि उनका आशिक-कुत्ता जानू उनकी कमर पर सवार था और उसका लन्ड उनकी चूत में फंसा हुआ था। इधर मैं भी अपनी चूत ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रही थी।



मुझे ये देख कर हैरत हुई कि कुत्ते ने फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपने कुल्हे चलाने शुरू कर दिये। सईदा आँटी के हिलने डुलने और लन्ड से भरी चूत सहलाने से शायद जानू का लन्ड फिर से उकसा गया था। “नहीं जानू! फिर से नहीं! रुक..!” सईदा आँटी कराहते हुए चींखी लेकिन वो खुद उस वक्त बहुत मस्ती में थीं और झड़ने के करीब थीं। जानू अब ज़ोर-ज़ोर से अपने कुल्हे आगे-पीछे चलाने लगा था और सईदा आँटी भी अपने चूतड़ हिलाती हुई पूरे जोश में अपनी चूत रगड़ने लगीं। “आआआईईईऽऽ! आआऽऽऽ ऊँआआआईईईऽऽऽ!” सईदा आँटी की चूत में झड़ने की आगाज़ी लहरें फूटने लगीं तो वो मस्ती में कराहने लगीं। कुत्ते का लन्ड उनकी चूत में वैसे ही कायम था और दोनों ने अपनी-अपनी मस्ती में डूबे हुए अपनी अलग-अलग ताल पकड़ ली।



“ऊँहह आँहह ऊँऽऽ आँईईऽऽ!” सईदा आँटी ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थीं। उनका चमकीला जिस्म ऐंठ गया था। एक हाथ अपनी चूत सहलाने में मसरूफ होने की वजह से वो एक ही हाथ के सहारे झुकी हुई थीं और उनके तने हुए मसल लरज़ते हुए अलग ही नज़र आ रहे थे। वो रुक-रुक कर लंबी साँसें लेती तो फुफकारने जैसी आवाज़ निकलती। जानू बेहद जोश में सईदा आँटी की चूत में लन्ड पेल रहा था और सईदा आँटी भी वैसे ही डटी रही। सईदा आँटी की चूत में झड़ने की आखिरी लहरें दौड़ने लगीं तो उनकी ताल अहिस्ता हो गयी और उन्होंने अपना हाथ चूत से हटा लिया। एक बार फिर अपने दोनों हाथों और घुटनों के सहारे झुकी हुई स‍इदा आँटी अपनी कमर पर कुत्ते को सम्भालने लगीं।



कुत्ता भी वैसे ही झड़ने लगा जैसे कि पिछली बार झड़ा था। बस इतना फर्क था कि इस बार झड़ते हुए वो दो -तीन बार रिरियाया। “ओहह जानू! आँहह जानू!” स‍इदा आँटी सिसकीं, “ऊँह! आँह! उँहह.. ऊँह!” सईदा आँटी की सिसकियों और कुत्ते की रिरियाहट से साफ ज़ाहिर था कि कुत्ते के लन्ड से गरम शीरा सईदा आँटी की चूत में बह रहा था। सईदा आँटी उस वक्त जानू की कुत्तिया बनी हुई थी। कईं सारे हल्के-हल्के झटके मारते हुए जानू का झड़ना बंद हुआ और फिर से वो सईदा आँटी की कमर पर निढाल सा हो गया।



“मादरचोद जानू! तूने फिर से चोद दिया! मेरी चूत दर्द कर रही है!” सईदा आँटी सिसकते हुए बोली, “बस अब ऐसे ही रुके रहो!” जानू को तो जैसे पहले से ही स‍इदा आँटी के इस हुक्म की उम्मीद थी। वो पहले से ही बिना हिले-डुले उनकी पीठ पर झुका हुआ था। दोनों थके हुए और ज़ाहिरन मुतमाइन थे। स‍इदा आँटी ने अपना सिर फर्श पर टिका दिया लेकिन अपनी गाँड कुत्ते के मुकाबिल उठी रहने दी जिसका लन्ड इस वक्त अपनी कुत्तिया की चूत में कस कर बंधा हुआ था।



मैं खुद तीन-चार बार झड़ चुकी थी और अपनी चूत रगड़ते हुए एक बार फिर झड़ने के बहुत करीब थी। तभी जानू ने मेरी तरफ देखा और उसके कान खड़े हो गये। “या अल्लाह!” मैं मन ही मन में बोली। खुशकिस्मती से सईदा आँटी थोड़ा कसमसायीं और कुत्ते का ध्यान पल भर के लिये उनकी तरफ फ़िर गया। मैंने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और पलट कर बिस्तर में घुस गयी। मेरा दिमाग घूम रहा था और हज़ारों ख्याल उमड़ रहे थे। साफ ज़ाहिर था कि अपने कुत्ते से स‍इदा आँटी की ये चुदाई पहली दफा नहीं थी बल्कि वो अक्सर उससे चुदवाती थीं।



हालाँकि मुझे चुदाई का तजुर्बा नहीं था लेकिन मैं चुदाई से मुत्तलिक सब जानती थी। सत्रह-अठारह साल की उम्र से ही मैं भी हम-उम्र लड़कियों की तरह सैक्स में दिल्चस्पी लेने लगी थी। स्कूल के दिनों में ‘मिल्स एंड बून’ की रोमाँटिक किताबें बहुत मज़े लेकर पढ़ती थी और फिर बी-कॉम के दिनों से धीरे-धीरे गंदी सैक्सी किताबें पढ़ने का शौक लग गया था। दिन में कईं बार अपनी उंगलियाँ या केले, मोमबत्ती और वैसी कोई भी चीज़ अपनी चूत में घुसेड़-घुसेड कर चोदते हुए मज़े लेती थी। बी-कॉम के फाइनल इयर में ही थी जब मैंने पहली बार कुछ सहेलियों की सोहबत में ब्लू-फिल्म देखी थी और अब तक पाँच छः दफा ब्लू-फिल्में देख चुकी थी। लेकिन आज तो मैंने चुदाई का एक ऐसा हैरत‍अंगेज़ और चुदास नज़ारा अपनी आँखों से देखा था जो मैंने पहले कभी किसी ब्लू-फिल्म या सैक्सी किताब में भी नहीं पढ़ा था और ना ही ऐसा कभी तसव्वुर किया था।



फिर एक हफ्ते बाद मैं नासिक वापस आ गयी और धीरे-धीरे वक्त गुज़र गया। एम-कॉम पूरा करने के बाद मुझे एम-बी-ए करने के लिये बैंगलौर के बहुत ही जाने-माने कॉलेज में दाखिला मिल गया। बैंगलौर में हॉस्टल में रहती थी और इस दौरान मैंने कभी-कभार शराब पीना भी शुरू कर दिया। मैं बेहद खूबसूरत और हसीन थी और स्कूल के ज़माने से ही कितने ही लड़के मुझे लाइन मारते थे लेकिन मैं कभी भी किसी के इश्क़ में नहीं पड़ी ना ही शादी से पहले कभी किसी से चुदवाया।



एम-बी-ए पूरा होते ही मेरा निकाह हो गया। मेरे शौहर भी काफी तालीम-याफता थे और उनकी बेहद अच्छी नौकरी थी। शादी के बाद शुरू-शुरू में उनके साथ बेहद खुश थी पर धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे शौहर को सट्टे-बाजी का शौक था। अक्सर क्रिकेट मैचों के वक्त बड़ी-बड़ी शर्तें लगाते थे। मैंने कईं दफा उन्हें समझाने रोकने की कोशीश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में एक दिन बहुत बड़ी शर्त हार कर दिवालिया भी हो गये तो मुझे दहेज के लिये परेशान करने लगे। आखिर में तंग आ कर शादी के दो साल बाद ही मैंने तलाक ले लिया और मुम्बई में एक बड़े प्राइवेट बैंक में नौकरी कर ली। 



मुम्बई में मैं अकेली किराये के फ्लैट में रहने लगी। इसलिये हिफाज़त और अकेलापन दूर करने के लिये एक एलसेशन कुत्ता ले लिया। आहिस्ता-आहिस्ता ज़िंदगी बाकायदा चलने लगी। ज्यादा वक्त तो मैं काम में ही मसरूफ रहती और अक्सर मुझे दूसरे शहरों और कभी-कभार गैर-मुल्कों जैसे अमेरिका, यूरोप भी दौरों पर जाना पड़ता। ज़िंदगी वैसे तो पुरसुकून थी लेकिन तन्हाई की वजह से मैं कुछ ज्यादा ही चुदासी रहने लगी थी। हालाँकि ऐसे हज़ारों मौके आये कि जब अगर मैं चाहती तो गैर-मर्दों से चुदवा सकती थी लेकिन मैं कभी हिम्मत नहीं जुटा पायी। पाँच-छः साल पहले स‍इदा आँटी के किस्से के बावजूद अपने कुत्ते जैकी से चुदवाने का ख्याल भी कभी मेरे ज़हन में नहीं आया। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



अपनी चुदासी चूत की भड़कती प्यास बुझाने के लिये मैं हर रोज़ मैस्टरबेशन का सहारा लेती। कॉलेज के ज़माने की तरह ही फिर से गंदी सैक्सी किताबों और ब्लू-फिल्मों का चस्का लग गया। इसके अलावा मैंने अक्सर शराब पीना भी शुरू कर दिया। जब भी काम के सिलसिले में यूरोप जाती तो डिल्डो और ब्लू-फिल्में ज़रूर खरीद कर लाती। इस तरह मैंने तरह-तरह के छोटे-बड़े कईं डिल्डो जमा कर लिये और रात-रात भर मैं इन डिल्डो से अपनी चूत की आग बुझा कर मज़ा लेती।



ऐसे ही करीब दो साल बीत गये। एक दिन की शाम को मैं बैंक से घर लौटी तो मैं बेहद चुदासी महसूस कर रही थी। लौटते हुए रास्ते में मैं चर्च-गेट स्टेशन के नज़दीक सड़क किनारे पटरी पर बिकने वाली हिंदी की दो-तीन गंदी सैक्सी कहानियों की किताबें ले कर आयी थी। अगले दिन इतवार था इसलिये शराब की चुस्कियों के साथ चुदासी कहानियों का मज़ा लेने का प्रोग्राम था। दरसल अंग्रेज़ी की सैक्सी कहानियों के मुकाबले मुझे हिंदी और उर्दू के गंदे अश्लील अल्फाज़ों वाली चुदासी कहानियाँ पढ़ने में ज्यादा मज़ा आता है।



घर पहुँचते ही कपड़े बदले बगैर ही मैं ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ कर वोडका की चुस्कियाँ लेते हुए वो रंगीन चुदासी किताबें पढ़ने में मसरूफ हो गयी। कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते जल्दी ही मेरी चूत मचमचाने लगी और शराब का भी थोड़ा नशा होने लगा। मैंने अभी भी काले रंग का फॉर्मल पेन्सिल स्कर्ट और सफेद टॉप पहना हुआ था। इस दौरान शराब और किताब का मज़ा लेते हुए मैं अपनी स्कर्ट का हुक और ज़िप खोल चुकी थी और पैंटी के अंदर हाथ डाल कर चूत सहला रही थी।



ऐसे ही कुछ देर में नशा इस कदर परवान चढ़ गया कि मैं झूमने लगी। किताब में छपे हर्फ भी साफ नहीं पढ़ पा रही थी तो आखिरकार किताब एक तरफ उछाल कर फेंकते हुए मैं खड़ी हुई और सैंडलों में लड़खड़ा कर चलती हुई और रास्ते में अपनी स्कर्ट और बाकी कपड़े उतारती हुई मैं बेडरूम की तरफ बढ़ी। जब मैं बेडरूम में पहुँची तो पैरों में ऊँची पेन्सिल हील के काले सैंडलों के अलावा मैं मादरजात नंगी थी। बेडरूम में आदमकद आइने के सामने खड़े हो कर मैंने अपना जिस्म निहारा और खुद को आइने में देखते-देखते बेड तक पीछे हटते हुए बिस्तर पर बैठ गयी। अभी भी अपने सामने आइने में देखते हुए मैंने अपनी टाँगें फैलायी और अपनी चूत के ऊपरी लबों पर उंगली फिराते हुए खुद को देखा।



फिर आहिस्ता से अपनी दो उंगलियाँ अंदर घुसेड़ दीं। चूत की मचमचाहट और झड़ने की तमन्ना मुझ पर हावी हो गयी और मैं अपनी चूत में दो उंगलियाँ अंदर बाहर करती हुई पीछे बिस्तर पर कमर के बल लेट गयी। मेरे चूतड़ बिस्तर के किनारे पर थे और पैर ज़मीन पर। मेरी चूत बेहद भीगी हुई थी और मैंने तीसरी उंगली भी अंदर घुसेड़ दी और आहिस्ता-आहिस्ता अंदर बाहर करने लगी। दूसरे हाथ से अपने निप्पल उमेठते हुए मैं सिसक रही थी। फिर अपनी भीगी उंगलीयाँ बाहर निकाल कर मैंने आहिस्ते से उन्हें फिसलाते हुए अपने तंग छेद की तरफ खिसका दिया जो मुझे दिवाना कर देता है। अपनी बीच वाली भीगी हुई चिकनी उंगली मैंने अपनी गाँड के छेद पर फिरायी और फिर आहिस्ता से अंदर घुसेड़ दी। उसी लम्हे मुझे वो महसूस हुआ! यही वो लम्हा था जब मेरी ज़िंदगी में एक नये हसीन दौर का आगाज़ हुआ लेकिन दुनिया की नज़रों में ये मेरी बदकार और बदचलन ज़िंदगी का आगाज़ था! लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



मुझे अपनी गाँड के छेद और उसके अंदर घुसी हुई उंगली के आसपास गरम और मुलायम भीगा सा एहसास हुआ। मैं चौंक कर घबराते हुए हड़बड़ा कर बैठी तो देखा कि जैकी मेरी उंगली चाट रहा था। उसने मेरी तरफ देखा लेकिन उसने चाटना बंद नहीं किया। मेरे अंदर कतरा-कतरा चींख उठा कि उसे रोक दूँ! उसे परे ढकेल दूँ! लेकिन फिर अचानक कईं साल पहले सईदा आँटी और उनके कुत्ते की चुदाई का नज़ारा मेरे ज़हन में उभर आया और फिर शराब के नशे और अपनी उंगली और गाँड के छेद पर जैकी की ज़ुबान के एहसास ने मुझे कमज़ोर बना दिया। मैं अपनी उंगली अंदर-बाहर करती हुई जैकी को अपनी वो उंगली और गाँड ज़ुबान से चाटते हुए देखने लगी।



मैंने नज़रें उठा कर सामने आइने में खुद को जैकी की ज़ुबान से मज़े लेते हुए देखा। ज़लालत का एहसास होने की बजाय ये नज़ारा देख कर मेरी चाहत और ज़्यादा बढ़ गयी। मैंने उसे परे ढकेल सकती थी.... चिल्ला कर डाँटते हुए उसे रोक सकती थी... ! लेकिन उसे रोकने की बजाय मैंने उसकी ये हरकत ज़ारी रहने दी। मुझे जैकी की ज़ुबान अपनी चूत के ऊपर क्लिट की तरफ चाटती महसूस हुई। एक बार फिर उसने ऐसे ही किया लेकिन इस बार उसकी ज़ुबान का दबाव ज्यादा था जिससे कि उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर घुस कर चाटते हुए मेरी क्लिट तक ऊपर गयी। चाटते हुए उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर बाहर फिसलने लगी। बहुत ही मुख्तलिफ़ एहसास था। मुझे उसकी ज़रूरत थी...उसकी आरज़ू थी। काँपते हाथों से मैंने अपनी चूत फैला दी इस उम्मीद के साथ कि वो मेरी तड़पती चूत को अपनी खुरदुरी ज़ुबान से चाटना ज़ारी रखेगा। जैकी ने ऐसा ही किया... अपनी लालची ज़ुबान से मेरी चूत चाटते हुए रस पीने लगा। बे-इंतेहा हवस और वहशियाना जुनून सा मुझ पर छा गया था।



फिर मैं बिस्तर के बीच में अपने हाथों और घुटनों के बल झुककर कुत्तिया की तरह हो गयी और जैकी को भी बिस्तर पर आने को कहा। वो कूद कर बिस्तर पर चढ़ गया और पीछे से मेरी चूत चाटने लगा। मैंने देखा कि उसका लाल-लाल चमकता हुआ लौड़ा कड़क हो कर बाहर निकला हुआ था। उसके लौड़े का नाप देख कर बेखुदी-सी की हालत में मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसका अज़ीम लौड़ा अपनी मुठ्ठी में ले लिया। मेरी इस हरकत से जैकी झटके मारते हुए मेरी मुठ्ठी में अपना लौड़ा चोदने लगा। लेकिन साथ ही उसने मेरी चूत चाटना बंद कर दिया जो मैं नहीं चाहती थी। उसे मसरूर करना उस वक्त मेरी नियत नहीं थी। मैंने उसका लौड़ा सहलाना बंद कर दिया तो वो फिर से मेरी चूत अपनी ज़ुबान से चाटने लगा। मैं मस्त होकर ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगी और कुछ ही देर में चींखते हुए झड़ गयी। जैकी ने फिर भी मेरी चूत चाटना बंद नहीं किया और इसी तरह मेरी चूत ने दो बार और पानी छोड़ा। मुझे ज़बरदस्ती जैकी का सिर अपनी चूत से दूर हटाना पड़ा क्योंकि लगातार चाटने से मेरी क्लिट बहुत ही नाज़ुक सी हो गयी थी और दुखने लगी थी। जैकी के चाटने की मिलीजुली दर्द और मस्ती अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रही थी। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



तीन बार झड़ने के बाद भी मेरी हवस कम नहीं हुई थी। बल्कि अब तो मैं उसका लंड अपनी चूत में लेने के लिये बेताब हो रही थी। प्यास की वजह से मेरा गला सूख रहा था तो पानी पीने पहले मैं नशे में लड़खड़ाती हुई किचन में गयी। जैकी भी मेरे पीछे-पीछे आ गया। मैं तो नंगी ही थी और जैकी बीच-बीच में मेरी टाँगों के बीच में अपना सिर घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था। मैं उसकी ये कोशिश कामयाब नहीं होने दे रही थी तो वो मेरे टाँगें या फिर मेरे पैर और सैंडल चाटने लगता।



पानी पी कर मैं पेंसिल हील के सैंडलों में झूमती हुई ड्राइंग रूम में आ गयी और धड़ाम से गिरते हुए सोफे पर बैठ गयी। फिर अपनी टाँगें फैला कर मैंने जैकी के आगे वाले पंजे अपने हाथों में लेकर उसे अपने नज़दीक खींचते हुए अपने कंधों पर रख दिये। उसका लौड़ा अब बिल्कुल मेरी बेताब चूत के सामने था। अपना एक हाथ नीचे ले जा कर मैंने उसका लौड़ा अपनी मुठ्ठी में लिया और उसे अपनी चूत में हांक दिया। जैकी जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मैं भी सोफे से अपनी गाँड ऊपर उठा कर उसके धक्कों का जवाब देने लगी। लेकिन मैं ज्यादा देर तक इस तरह उसका साथ नहीं दे सकी और वापस सोफे पर अपनी गाँड टिका कर बैठ गयी और आगे की चुदाई उस पर ही छोड़ दी। मैंने महसूस किया कि इस पूरी चुदाई के दौरान उसके लौड़े से पतला सा चिपचिपा रस लगातार मेरी चूत में बह रहा था।



मैं दो दफा चींखें मारते हुए इस कदर झड़ी कि मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। फिर थोड़ी देर बाद इसी तरह ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए अचानक जैकी ने एक ज़ोर से धक्का मारते हुए अपने लौड़े के आखिर की गाँठ मेरी चूत में ठूँस दी। मेरी तो दर्द के मारे साँस ही गले में अटक गयी। दर्द इस कदर था कि मैं छटपटा उठी। मुझे अपने शौहर के साथ पहली चुदाई याद आ गयी। थोड़ी सी देर में मेरा दर्द थम गया और मुझे एहसास हुआ कि जैकी झड़ने के बहुत करीब था। उसने चोदना ज़ारी रखा और मैं प्यार से उसके कान सहलाने लगी। फिर अचानक मुझे गरम और बहुत ही गाढ़ा चिपचिपा रस अपनी चूत में छूटता हुआ महसूस हुआ। लेखिका: शाज़िया मिर्ज़ा



बाद में मुझे एहसास हुआ कि हम दोनों आपस में वैसे ही चिपक गये थे जैसे मैंने सईदा आँटी और उनके कुत्ते को आपस में जुड़ते हुए देखा था। मैं जैकी को खुद से अलग नहीं कर सकती थी इसलिये मैंने उसे उसी हाल में रहने दिया और मैं उसे पुचकारते हुए उसका जिस्म अपने हाथों से सहलाने लगी। जैकी से इस तरह जुड़ कर चिपके हुए मुझे अजीब सा मज़ा और सुकून महसूस हो रहा था। करीब बीस मिनट बाद उसके लंड की गाँठ सिकुड़ी और हम अलग हुए।



उस एक नशीली शाम के बाद सब कुछ बदल गया और मेरी ज़िंदगी में फिर से बहारें आ गयी... ज़िंदगी का खालीपन दूर हो गया। मैं तो जैकी की इस कदर दीवानी हूँ कि उससे बकायदा हर रोज़ ही तरह-तरह से चुदवाती हूँ... उसका लंड चुसती हूँ और अक्सर गाँड भी मरवा लेती हूँ। जैकी भी बहुत शौक से मेरी चूत चाटने और चोदने के लिये मुश्ताक रहता है। इसके अलावा जज़बाती तौर पे भी हमारे दरमियान बेपनाह मोहब्बत है। हमारा रिश्ता बिल्कुल मियाँ-बीवी जैसा ही है। काश की ये ज़लिम दुनिया हमारे रिश्ते को समझ पाती।



!!!! समाप्त !!!!


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

चुदास शबाना की

जूजा जी


यह कहानी शबाना नाम की एक लड़की ने मुझे भेजी थी, जो मैं आप के सामने उन्हीं के शब्दों में पेश कर रहा हूँ। हैलो दोस्तो, मेरा नाम शबाना है, मेरी उम्र 22 साल है, मेरी फिगर 36-28-38 है। मैंने कभी कोई ब्वॉय-फ्रेंड नहीं बनाया क्योंकि मैं डरती थी कि घर पर पता ना चल जाए। घर में मेरी अम्मी और चाचू और मैं रहते हैं। मेरे अब्बू कई बरस पहले अल्लाह को प्यारे हो गये थे तो अम्मी और चाचू शौहर बीवी की तरह रहने लगे थे। पर चाचू मुझे हमेशा ही काम-लोलुप नजरों से देखते थे। यह बात ढाई साल पहले की है, जब मेरी नानी की तबियत बड़ी खराब हो गई थी, तो मेरी अम्मी नानी के घर चली गईं। एक दिन रविवार के दिन मैं सुबह-सुबह झुक कर झाड़ू लगा रही थी। मेरे मम्मे दिख रहे थे, तब मेरी नज़र चाचू पर गई, जो मेरे सामने सोफे पर बैठे थे, वो मेरे थिरकते मम्मे देख रहे थे और उनकी पैन्ट पर टेंट तन गया था। रात को मैंने सोचा बाहर चुदा नहीं सकती और चुदाए बिना रह नहीं सकती, तो क्यों ना चाचू से ही चुद लूँ.. इनका तम्बू तो तन ही रहा है। मैं रात को ही चाचू के कमरे में चली गई, चाचू बेड पर सो रहे थे, मैं भी बेड पर लेट गई। मैंने जैसे ही चादर हटाई, मैंने देखा चाचू ने नीचे कुछ भी नहीं पहना है और उनका लण्ड सोया हुआ था, मैंने धीरे से अपना हाथ लण्ड तक किया और उसे पकड़ लिया और धीरे से झुक कर लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। चाचू अभी सो रहे थे, मैं लण्ड को चूसती रही और लण्ड खड़ा हो गया। मैंने लण्ड को मुँह से निकाला तो देखा लण्ड कोई 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था, मैंने फिर से मुँह में ले लिया। मुझे लगा जैसे चाचू जाग गए हों, मैं लण्ड को मुँह से निकालने ही वाली थी कि चाचू ने मेरे सिर को अपने हाथों से दबाया और लण्ड मुँह में घुसा दिया और मेरे मुँह को चोदने लगे। 15 मिनट तक मेरे मुँह को चोदा और मेरे मुँह में माल डाल दिया। मैंने सारा माल पी लिया और जब मैं उठी, तो देखा चाचू की आँखें बंद थीं। मैंने उनको जगाया, पर वे बिना कोई उत्तर दिए लेटे रहे। फिर मैंने लण्ड को फिर से अपने मुँह में लेने लगी, चाचू का लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैं ज़ोर से मुठ मारने लगी, अब चाचू जाग गए और मुझे देख कर कहने लगे- शबाना तुम.. मुझे ये क्या कर रही हो मैं नींद में था, मुझे लगा कि तुम्हारी अम्मी होगी…. शबाना यह बात ठीक नहीं है…! मैंने कुछ नहीं कहा और लण्ड मुँह में ले कर चूसने लगी, वे फिर कहने लगे- मत करो.. ये गलत है, पर मैं नहीं रुकी और लौड़ा चचोरती रही। जब उनका लंड अपने पूरे शबाब पर आ गया, तो चाचू उठे और मुझे बेड पर धक्का दिया और कहा- अपनी सील तुड़वानी है क्या? मैंने कहा- हाँ प्लीज़…! कह कर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। चाचू मेरे ऊपर आए और मेरे मम्मों को मुँह में भर लिया और चूसने लगे फिर अपना लण्ड मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया और उन का एक इंच लण्ड अन्दर घुस गया। मुझे दर्द हुआ फिर चाचू ने एक और ज़ोर का धक्का दिया, मैं ज़ोर से चिल्ला उठी। चाचू ने अपना लण्ड 4-5 धक्कों में मेरी चूत में पूरा पेल दिया। मेरी चूत से खून निकल रहा था। फिर चाचू ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना चालू किया, मुझे लग रहा था कि मेरी चूत में कोई गर्म लोहे की रोड अन्दर-बाहर हो रही है। मुझे दर्द तो हो रहा था, पर मजा भी आ रहा था। करीब 20-25 मिनट के बाद चाचू का पानी निकलने वाला था, तो चाचू ने लण्ड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और मेरे मुँह को चोदने लगे और फिर सारा माल मेरे मुँह में ही डाल दिया। मैं सारा पी गई। चाचू बेड पर लेट गए और मैं उन के ऊपर आ कर लेट गई और चाचू से पूछा- तो कैसा लगा अपनी भतीजी को चोद कर..! चाचू ने मेरे मम्मे पकड़ते हुए कहा- रोज सुबह-सुबह तुम्हारे मम्मों को देख कर दिल तो करता था कि मुँह में ले लूँ, पर नहीं कर पाता था..! और फिर चाचू ने मेरे मम्मे मुँह में ले लिए और चूसने लगे। मेरी तो पहली चुदाई थी, मुझे तो पल-पल का मजा आ रहा था। चाचू का लण्ड फिर खड़ा हो गया और चाचू ने फिर मेरी चूत मारी, रात में कई बार चाचू ने मेरी चूत मारी, फिर सुबह जब बाथरूम गई तो चाचू साथ में ही गए और उधर भी उन्होंने मुझे चोदा और फिर चाचू ऑफिस चले गए। मैं कॉलेज नहीं गई। सुबह उठ कर मैंने कपड़े भी नहीं पहने थे। शाम को मैं कमरे में बैठी थी, तो खिड़की से देखा गेट पर चाचू आ गए हैं। चाचू ने दरवाजे की घण्टी बजाई। मैंने दरवाज़ा खोला तो चाचू अन्दर आए और कहा- शबाना कपड़े तो पहन लेती..! चाचू आ कर सोफे पर बैठ गए। मैं रसोई से पानी का गिलास ले कर आई और चाचू को दिया। चाचू ने पानी पिया मैं भी सोफे पर बैठ गई। चाचू ने कहा- तुम्हारी अम्मी को इस बारे में पता चल गया, तो क्या होगा? मैंने कहा- कुछ नहीं होगा.., हम नहीं बताएँगे..! और मैं चाचू की गोद में आकर बैठ गई और चाचू को चूमने लगी। चाचू का लण्ड खड़ा हो गया। चाचू ने कहा- चलो आज तुम्हारी गाण्ड मारता हूँ…! मैंने कहा- जो मर्ज़ी करो.. चाचू मैं तो आपकी ही हूँ..! चाचू ने तेल लिया और मेरी गाण्ड पर लगा दिया। चाचू ने मुझे घोड़ी की पोजीशन मैं किया और अपना लण्ड मेरी गाण्ड के फूल पर रखा और ज़ोर का धक्का दिया.. मैं चिल्ला उठी। चाचू ने एक और ज़ोर का धक्का दे दिया, मैं और ज़ोर से चिल्लाई… पर चाचू बिना रुके धक्के मारते रहे और चाचू का पूरा लण्ड मेरी गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया। कुछ देर ठहर कर चाचू फिर स्ट्रोक मारने लगे, मुझे और दर्द होने लगा। चाचू बिना रुके मेरी गाण्ड मारते रहे। थोड़ी देर के बाद मुझे भी मजा आने लगा। फिर चाचू ने सारा माल मेरी गाण्ड में ही डाल दिया और लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ कर दिया और फिर चाचू सोफे पर बैठ गए। मैं चाचू की टाँगों पर बैठ गई। चाचू ने कहा- तुम्हारी अम्मी ने मुझे कभी गाण्ड मारने नहीं दी और मैंने उसकी बेटी की गाण्ड मार ली। मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, तुम बोलो तुम्हें क्या चाहिए? मैंने कहा- आप मेरे को रोज ऐसे ही चोदा करो..! चाचू ने कहा- ओके..! शाम को खाना खाने के बाद चाचू ने फिर से मेरी चुदाई की। 15 दिन मेरी अम्मी अपनी अम्मी के पास रहीं और जब वो वापिस आ गईं, तो रोज रात को एक बजे मैं बाथरूम जाती और चाचू भी आ जाते और एक घन्टे तक बाथरूम में चुदाई के बाद वापिस रूम में आकर सो जाते। कई दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर मेरी शादी पक्की हो गई, पर हमारा चुदाई का प्रोग्राम यूँ ही चलता रहा पर गर्भ रोकने वाली पिल्स ले लेती थी। निकाह के दिन करीब आ गए, मेहंदी की रात मेरे हाथों में मेहंदी लगी हुई थी, रात को फिर मैं बाथरूम में गई और चाचू पहले से बाथरूम में ही थे। मैंने चाचू को लण्ड निकालने को कहा, चाचू ने लण्ड निकाला और मैंने अपने मेहंदी वाले हाथों से लण्ड को पकड़ा और मूठ मारने लगी और मुँह में ले कर चूसने लगी। फिर चाचू ने मुझे उठाया और मेरी चूत में लण्ड डाल दिया और मेरी चूत मारी फिर मैं चुद कर बाहर आ गई और सो गई। अगले दिन मेरी शादी हो गई। शाम को जब विदाई थी तो मैं फिर से बाथरूम में गई और थोड़ी देर के बाद चाचू भी बाथरूम में आ गए। मैं बाथरूम में दुल्हन के जोड़े में खड़ी थी। चाचू आए और मेरा चुम्बन लिया। मैंने अपना ब्लाउज खोला और ब्रा भी खोली और चाचू ने मेरे मम्मे देखे। मैंने मम्मों पर मेहंदी लगाई थी। मैंने चाचू को कहा- चाचू मैंने अपने शौहर का नाम हाथों पर लिखा है, पर आपका नाम अपने मम्मे पर..! तब चाचू ने कहा- कहाँ पर..! तो मैंने बताया- ये है..! मैंने चाचू का नाम अपने निपल्स के साइड में छोटा सा लिखा था। चाचू ने मम्मे को मुँह में ले लिया और चूसने लगे। फिर चाचू ने मेरी साड़ी ऊपर की और मेरी चूत में लण्ड डाल दिया। हम दोनों का यह नियम था कि एक बार में सिर्फ एक छेद की चुदाई करते थे, पर आज मैंने कहा- चाचू दोनों छेदों को अपने लौड़े की दुआ दो..! तो चाचू ने मेरी गाण्ड भी मारी, चाचू जाने लगे तो मैंने कहा- चाचू लण्ड को मुँह में तो लेने दो..! तो चाचू ने लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और मेरे मुँह को चोदने लगे। फिर सारा माल मेरे मुँह में डाल दिया और बाहर आ गए। मैंने माल गले के नीचे नहीं किया और सारा माल मुँह में रखा और पूरे मुँह में घुमाने लगी और फिर तैयार हो गई और बाहर आ गई। मेरे मुँह में अभी भी माल था। विदाई के बाद में अपने ससुराल पहुँच गई। मेरी सुहागरात आ गई, मैं बेड पर बैठ गई। थोड़ी देर के बाद कासिम, मेरे शौहर आए और बेड पर आ कर बैठ गए और मैंने घूँघट लिया था, पर उन्होंने घूँघट नहीं उठाया और मेरे लहंगे को ऊपर किया और मेरी चूत में ऊँगली करने लगे। फिर वो उठा और मेरा घूँघट उठाया। मैंने सोचा गिफ्ट मिलेगा, पर उसने अपना लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया। मैं भी चूसने लगी फिर उसने मुझे चोदना शुरु किया तो मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था, क्योंकि चाचू का लण्ड 6 इंच था, पर कासिम का लण्ड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। मुझे उस ने पूरी रात चोदा। मैं पहले गर्भ रोकने वाली पिल्स लेती थी, पर अपने निकाह के बाद से नहीं लेती हूँ। मैं जब पहली बार वापिस अपने पीहर गई, तो चाचू मुझे नहीं चोद सके, क्योंकि उनको समय नहीं मिला। फिर मैं और कासिम हनीमून के लिए शिमला चले गए में प्रेगनेन्ट हो गई। मुझे एक स्वीट सी बेटी हुई, फिर मैं पूरे एक साल के बाद जब घर गई, तो कासिम वापिस आ गए। पर मैं एक हफ्ते के लिए रहने के लिए आई थी। दिन तो निकल गया रात को फिर से मैं बाथरूम में गई। चाचू भी आ गए। चाचू के आते ही मैं उन से लिपट गई और चाचू ने मुझे किस किया और मेरे कपड़े उतार दिए। चाचू ने मेरे मम्मों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे। मेरे मम्मे से दूध निकलने लगा। चाचू ने मेरा एक निप्पल मुँह में भर लिया और बारी-बारी से दोनों मम्मों से दूध पी लिया। फिर मेरी चूत में लण्ड घुसा दिया और मुझे चोदने लगे। चाचू मुझे चोद रहे थे और मैं अपनी गाण्ड उठा-उठा कर चुदवा रही थी। चाचू थोड़ी देर के बाद झड़ गए और मेरी चूत में ही सारा पानी निकाल दिया। चाचू ने फिर लण्ड निकाल लिया। मैंने उन का लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब मुझे ससुराल और पीहर दोनों जगह लण्ड मिलने लगे हैं। मैं अपनी जिन्दगी से बेहद खुश हूँ। मेरी दास्तान आपको कैसी लगी


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

खूब चुदाया पिकनिक में 

मैं हूँ ४५ साल की मिसेज साजिया खान और एक सेक्स एजूकेशन के कॉलेज में लड़के लड़कियों को सेक्स पढ़ाती हूँ। उन्हें सेक्स के बारे में सारी बातें बताती हूँ और फिर प्रैक्टिकल करके भी बताती हूँ। आज यहाँ मैं कुछ लड़के लड़कियों के साथ पिकनिक पर आई हूँ। यह एक गोपनीय प्राइवेट गेस्ट हाउस है। मेरे सामने एक यंग ग्रुप बैठा हुआ है जिसमे लड़के और लड़कियां है जिनकी उम्र २० से लेकर २५ साल तक है। जब सबने दो दो पैग शराब पी ली और तीसरा चालू किया तब मैंने बोलना शुरू किया। 

मैंने (साजिया खान) कहा :- अच्छा तो मेरे भोसड़ी वालों और भोसड़ी वालियों, मादर चोदों और मादर चोदियों आज मैं इस पिकनिक में तुम सबका वेलकम करती हूँ। सबकी चूत और लण्ड को सलाम करती हूँ। सबसे पहले मैं चाहती हूँ कि तुम सब लोग अपना अपना खुलकर पूरा परिचय दो । सेक्स में तुम्हारा क्या अनुभव है ? क्या करते हो और क्या करना पसदं करते हो या करती हो सब बताओ ? सबसे पहले मैं बताती हूँ - मैं मादर चोद बड़ी हरामी औरत हूँ और इस कॉलेज में मैं पिछले ५ साल से अपनी माँ चुदा रही हूँ। मैं गैर मर्दों से खूब चुदवाती हूँ और अपने मरद को परायी बीवियां चोदने देती हूँ। मैं हर एक लण्ड से बहुत प्यार करती हूँ। मेरी बेटी भी बुर चोदी मेरी तरह हरामी है। वह खुद तो चुदवाती ही है लेकिन अपनी माँ चुदाने में बहुत आगे रहती है। उसे माँ का भोसड़ा चुदाने में बेहद मज़ा आता है। मेरी चूंचियां मस्त है। लो देखो मेरी चूंचियां और देखो मेरा भोसड़ा ? मैंने अपने कपडे उतार कर फेंक दिया और नंगी नंगी खड़ी होकर बातें करने लगी। इसी तरह तुम सबको नंगे और नंगी होना पडेगा क्योंकि यहाँ कपडे पहनना सख्त मना है। तुम अपना परिचय देती जाओ और नंगी होती जाओ।
शकीरा बोली :- तो सुनो मेरी भोसड़ी वाली साजिया मैं २३ साल की एक बदचलन लड़की हूँ। मुझे किसी को भी अपनी बुर देने में कोई संकोच नहीं होता ? लोग आते है और मेरी बुर लेते है। चुदाने में मैं बड़ी एक्सपर्ट हूँ और मुझसे ज्यादा मेरी अम्मी एक्सपर्ट है। मेरी अम्मी अपनी बेटी अपने सामने खूब चुदवाती है। मैं भी अपनी माँ चुदाने में मज़ा लेती हूँ। जो भी मेरे घर आता है उससे मैं कहती हूँ मेरी माँ चोद के जाओ । मुझे बिना झांट वाले लण्ड बहुत पसंद है। मैं खूब चाटती हूँ लण्ड और मुठ्ठ मार कर वीर्य पीती हूँ। जबसे मैं लण्ड पीने लगी हूँ तबसे मेरी चूंचियां बड़ी बड़ी हो गयी है। मेरी गांड मस्त हो गयी है। लो देखो मेरी चूंची, मेरी चूत मेरी गांड ? ऐसा कह कर शकीरा एकदम नंगी हो गयी और चारों तरफ घूम घूम कर अपना बदन दिखाया। 
रिदा बोली :- बहन चोदों, माँ का लौड़ों सुनो मैं २५ साल की हूँ। मैं १५ साल की उमर से लण्ड पकड़ती आ रही हूँ। सैकड़ों लण्ड पकड़ चुकी हूँ और अपने मुंह में घुसेड़ चुकी हूँ। मुठ्ठ मारना और लण्ड पीना मैंने बहुत पहले सीख लिया था। १८ साल की उम्र से लण्ड बुर में घुसा रही हूँ। मेरे घर में चोदने और चुदाने को बड़ा अच्छा माना जाता है। जो जितने लोगों से चुदवाती है उसका उतना ही नाम होता है। मैं अपनी माँ के सामने चुदवाती हूँ और माँ मेरे सामने चुदवाती है। मैं अपनी बहन भी चुदवाती हूँ। मुझे जो भी लण्ड पकड़ में आता है वो मैं अपनी माँ के भोसड़ा में घुसा देती हूँ। फिर बहन की बुर में भी घुसेड़ देती हूँ और अपनी बुर में भी ? मैं अपने सारे कपडे खोल देती हूँ आज तुम सब लोग मुझे नंगी देखो । 
टोनी बोला :- मैं एक बिंदास लड़का हूँ और लड़कियों के नजदीक रहना पसंद करता हूँ। मुझे चूंचियां दबाने का बेहद शौक है। मैं लड़कियों को लण्ड पकड़ाता हूँ , लण्ड पिलाता हूँ। सबसे पहले मैंने अपनी भाभी की बुर चोदी फिर उसकी बहन की बुर ? मेरे मोहल्ले में एक सिमरन आँटी रहती है वह मेरा लण्ड बड़े प्रेम से चूसती है। मुझे छोटी छोटी झांट वाली चूत बहुत पसंद है। मैं ग्रुप में लड़कियां चोद कर बड़ा मज़ा लेता हूँ। मैं अपनी झांटें भी लड़कियों से बनवाता हूँ और लौड़ा हमेशा चिकना रखता हूँ। लो तुम सब लोग भी देखो मेरा लौड़ा और मेरे पेल्हड़ ? ऐसा कह कर टोनी एकदम नंगा हो गया।
फ़िरोज़ बोला :- मैडम पता नहीं क्यों मेरा लण्ड साला हमेशा खड़ा है। क्लास में जब पढ़ाती है तो लण्ड खड़ा हो जाता है। पहली बार एक लड़की ने मेरा खड़ा लण्ड देख लिया। वह बगल में बैठी थी। उसने हाथ बढाकर लण्ड पकड़ लिया। मैंने कहा अरे यार ये क्या कर रही हो ? वह बोली अबे भोसड़ी के चुप रह ? मुझे पकडे रहने दे ? जब क्लास ख़तम हो गयी तो वह मुझे अपने घर ले गयी और मेरा लण्ड अपनी माँ को पकड़ा दिया । उस दिन मैंने लड़की चोदने के पहले उसकी माँ चोदी ? फिर तो लण्ड पकड़ने वाली लड़कियों कि लाईन लग गयी। आज क्लास में जो लड़की मेरे अगल बगल बैठती है वह मेरा लण्ड पकडे बैठी रहती है। मैं लड़की चोदता हूँ और लड़की की माँ चोदता हूँ। लो सब लोग देख लो मेरा लौड़ा ? वह एकदम नंगा हो गया। 
समीरा बोली :- पहली बात तो मैं बता दूं कि ये फ़िरोज़ भोसड़ी का मेरी माँ चोदता है। इसका लौड़ा मुझे भी पसंद है और मेरी माँ को भी ? मैं पिछले दो साल से अपनी माँ चुदा रही हूँ। एक बार मैंने अपनी अम्मी को खालू का लण्ड पीते हुए देख लिया ? तब अम्मी ने मुझे वहीँ खालू का लण्ड पकड़ा दिया और बोली लो समीरा लण्ड पियो। अब तुम २२ साल की हो यही उम्र है लण्ड पीने की ? अम्मी ने मेरे सर पे हाथ रख कर दबाया तो लण्ड मेरे मुंह में घुस गया। बस मैं पीने लगी लण्ड ? मुझे शराब के साथ लण्ड पीने का बड़ा शौक है। २/३ लण्ड से एक साथ खुले आम सबके सामने चुदाना अच्छा लगता है। लो अब तुम लोग देखो मेरी चूत मेरी गांड और मेरी चूंचियां ? वह फ़टाफ़ट कपडे उतार कर बिलकुल नंगी खड़ी हो गयी सबके सामने ?
पीटर बोला :- यार मेरे तीन शौक है पहला शराब पीना दूसरा डांस करना और तीसरा लड़कियां चोदना ? मैंने कॉलेज की कई लड़कियां चोदी है। कई टीचरें भी चोदी है। कविता मेम मुझसे चुदवाती है। ज़ारा मेम तो मेरा लौड़ा खूब चूसती है और शबीना मेम तो बुर चुदाने के साथ साथ अपनी गांड भी मरवाती है। मेरी बहन है मिस जूली। वह भी लड़कों के लण्ड खूब पकड़ती है और मेरे कई दोस्तों से चुदवाती है। मैं उसकी सहेलियों की बुर चोदता हूँ। ज़ारा और शबीना तो अपनी माँ भी चुदवाती है मुझसे ? तुम लोग भी देखो मेरा लण्ड ?
मैंने कहा :- हां हां मैं जानती हूँ ज़ारा और शबीना को अपनी माँ चुदाने का बड़ा शौक है यार ?
विकी बोला :- मैडम यह आपने बहुत अच्छा किया कम से कम खुले आम यहाँ सबको अपना लौड़ा तो दिखा पाऊंगा ? और सबकी चूत चूंचियां और गांड देखूँगा ? कॉलेज में तो छुप छुप कर लण्ड पकड़ाना पड़ता है। ये बुर चोदी लड़कियां पढने नहीं बल्कि लण्ड पकड़ने आती है। सब ससुरी शराब पीने, सिगरट पीने और लण्ड पीने आती है। कॉलेज के बगल में एक होटल है वहाँ ये लड़कियां लड़को को ले जाती है और उनके लण्ड पीती है। मैं तो रोज़ वहीँ लण्ड पिलाता हूँ अपना ? ये भोसड़ी वाली गज़ाला बैठी है न यहाँ ये तो दो दो लण्ड एक साथ पीती है। मुझे लड़कियों से मुठ्ठ मरवाने में ज्यादा मज़ा आता है। मैं बुर में नहीं मुंह में लौड़ा पेलता हूँ। देखो ये मेरा मस्ताना लौड़ा ? वह एकदम से नंगा हो गया।
गज़ाला बोली :- अभी भोसड़ी का विकी जो बता रहा था वह सही है। मैं दो दो लण्ड एक साथ पीती हूँ। मेरे घर में मेरी अम्मी, मेरी खाला, मेरी दीदी और मेरी भाभी सब दो दो लण्ड पीती है और सब मिल कर एक दूसरे की बुर में लौड़ा पेलती है। मैं अपनी माँ की बुर, खाला की बुर, दीदी की बुर और भाभी की बुर चोदती हूँ। ये सब मेरी बुर चोदती है। ऐसा करने में सबको ख़ुशी होती है और किसी को भी कतई शर्म नहीं आती ? हमारे घर में चोदने और चुदने की पूरी आज़ादी है। बस एक ही नारा है की लण्ड का मज़ा लो और बुर का मज़ा दो। मैं तो अपने अब्बा का भी लण्ड पीती हूँ। मेरी खाला ने ही पहली बार उसका लण्ड मुझे पिला दिया था तबसे रास्ता खुल गया। अब तुम लोग भी पिलाओ मुझे अपना अपना लण्ड ? और लो देख लो मुझे पूरी नंगी। वह कपडे खोल कर नंगी खड़ी हो गयी। 
ताहिर बोला :- सच बताऊ साजिया मैडम, मेरे घर में कोई ऐसी कोई चूत नहीं है जसमे मैंने लण्ड न पेला हो ? अपनी खाला की बुर चोदी है मैंने, भाभी की बुर चोदी है, मामी की बुर चोदी है, दीदी की बुर चोदी है, तब तक साजिया मेम बोली अबे अपनी माँ की बुर नहीं चोदी क्या ? मेरी माँ तलाक देकर किसी और के साथ निकाह करके चली गयी । पर मुझे सबसे ज्यादा मज़ा भाभी की बहन चोदने में आया ? कॉलेज में मैंने वहीदा मेम का भोसड़ा चोदा है और अभी अभी जो आई है शबाना मेम उसे लण्ड का मुठ्ठ मरवा चुका हूँ। शबाना ने उस दिन मेरे कान में कहा ताहिर इतवार को मेरे घर आना मुझे चोदने ? मुझे लगता है की वह अपनी माँ भी चुदायेगी। अब मैं अपनी पैंट खोलता हूँ तुम लोग देखो मेरा लौड़ा ? बस ताहिर एकदम नंगा हो गया। तो दोस्तों, इस तरह इस पिकनिक में १० लोग हो गए। 
५ लण्ड - टोनी, फ़िरोज़, पीटर, विकी और ताहिर
५ चूत - शकीरा, रिदा, समीरा, गज़ाला और मैं साजिया 
सभी लड़कियां नंगी नंगी सोफा पर बैठ गयी और उनके सामने लड़के भी नंगे नंगे सोफे पर नंगे बैठ गये मैंने कहा यह पिकनिक दो दिन तक चलेगी और तब तक कोई भी कपडे नहीं पहनेगा। सब नंगे रहेंगें और सभी नंगी रहेंगी। नंगे आना नंगे जाना, नंगे खाना, नंगे पीना, नंगे सोना, नंगे जागना, नंगे चुदाना, नंगे चोदना ?
मारो मुठ्ठ - पियो लण्ड 
आज के प्रोग्राम की शुरुआत मुठ्ठ मारने से होगी। मैं जानती हूँ की जितना मज़ा लड़कियों को मुठ्ठ मारने में आता है उतना ही मज़ा लड़कों को मुठ्ठ मरवाने में आता है। लड़कियों के मुठ्ठ मारने से जब लण्ड झड़ने लगता है तो उन्हें जीत का अहसास होता है। लड़कियां खुश होती है की मैंने लण्ड का जूस निकाल लिया ? फिर उस जूस को पीकर मस्त हो जाती है लड़कियां। उनकी चूंचियां बढ़ने लगती है और जिस्म में एक नयी चमक आने लगती है। लड़कियों से मुठ्ठ मरवाने में लड़कों के लण्ड बढ़ने लगते है. मोटे होने लगते है लण्ड ? और ज्यादा ताकतवर होते जाते है लण्ड ? इसलिए सबसे पहले लड़कियां लड़कों के लण्ड का मुठ्ठ मारेंगी और लण्ड पियेंगी। कौन किसका लण्ड पियेगी यह लाटरी से निकाला जायेगा ? 
मैंने लड़कों के नाम की एक एक पर्ची बनाई और लड़कियों से कहा एक एक पर्ची उठाओ। सबने पर्ची उठा ली। आखिर में जो बची वह मेरी थी। सबसे पहले मैंने अपनी पर्ची खोली तो उसमे पीटर का नाम था। मतलब मैं पीटर का लण्ड पियूंगी ? शकीरा की पर्ची में टोनी का नाम निकला ? रिदा विकी का लण्ड पियेगी ? समीरा ताहिर का मुठ्ठ मार के लण्ड पियेगी ? गज़ाला फ़िरोज़ के लण्ड का सड़का लगाएगी और फिर उसका जूस पियेगी। नाम आने के बाद सबने अपने अपने लण्ड पकड़ लिया। लड़कियां सहलाने लगी लण्ड ? हिलाने लगी लण्ड ? धीरे धीरे खड़े होने लगे सबके लण्ड ? सभी लड़कियों के हाथ में एक एक लण्ड था मगर निगाह सबकी सबके लण्ड पर थी। उसी तरह लड़के भी सबकी चूंचियां और चूत देख देख कर मज़ा ले रहे थे। धीरे धीरे मुठ्ठ मारने की स्पीड बढती गयी। मैं भी सबके साथ पीटर का लौड़ा मुठ्ठी से पकड़ दनादन ऊपर नीचे कर रही थी। फरोज़ और ताहिर के कटे लण्ड है। उनके लण्ड की खाल सुपाड़े तक जाती ही नहीं ? इसलिए समीरा और गज़ाला ने लण्ड मुंह के डाल कर चूसा, लण्ड चिकना किया और फिर मुठ्ठ मारना शुरू किया। चारों तरफ चप्प चप्प, चपर चपर चिप्प चिप्प पुच्च पुच्च फुच्च फुचक की आवाजें आने लगी। 
सबसे पहले रिदा ने विकी का लौड़ा गिरा दिया। उसका निकलता हुआ वीर्य पूरा का पूरा अपने मुंह में ले लिया और चाटने लगी लण्ड ? शकीरा ने रफ़्तार बढ़ाई तो टोनी के लण्ड के मुंह से निकलने लगा जूस। शकीरा उसे पूरा पी गयी और सुपाड़ा चाटने लगी। इतने में गज़ाला ने फ़िरोज़ का लौड़ा गिरा दिया। उसका लण्ड उगलने लगा सफ़ेद सफ़ेद गरम गरम लावा। गज़ाला ने सारा अपने मुंह में ले लिया और खूब मजे से पिया लण्ड ? अब बची मैं और समीरा ? समीरा ने स्पीड बढ़ायी तो ताहिर का लण्ड निकालने लगा मक्खन समीरा ने जबान निकाली और सारा मक्खन खा गयी फिर लौड़ा मुंह में घुसाया और खूब चाटा ? मैंने कहा अबे पीटर के लण्ड साल तू क्यों पीछे है माँ दर चोद ? तेरी माँ का भोसड़ा जल्दी से निकला। तेरी बहन की बुर चोदूँगी साले आजा भोसड़ी वाले। मेरी गालियां सुन कर उसका लण्ड निकालने लगा गरम गरम वीर्य। मैंने पूरा लौड़ा अपने मुंह में घुसा लिया और अंदर ही अंदर पी गयी। मुझे भी जितना मज़ा चुदाने में आता है उतना ही मज़ा मुठ्ठ मार कर लण्ड पीने में आता है। 
अदल बदल के चोदो बुर - अदल बदल के पकड़ो लण्ड 
अब मैं दो ग्रुप बनाती हूँ। 
पहला ग्रुप - शकीरा और समीरा मिलकर पीटर और विकी से चुदवायेंगी। 
दूसरा ग्रुप - गज़ाला, रिदा और मैं (सजिया) मिलकर टोनी, फ़िरोज़ और ताहिर से चुदवायेंगी। 
शकीरा फ़ौरन उठी और पीटर से चिपक गयी। उसे देख कर समीरा विकी की बाहों में घुस गयी।
इधर गज़ाला ने टोनी को अपनी तरफ खींच लिया, रिदा फ़िरोज़ से लिपट गयी और मैं ताहिर की बाहों में समा गयी। पहले सबने लौड़ा हिलाया फिर उसे मुंह में घुसेड़ कर खूब चाटा और फिर बार बार सुपाड़ा निकाल निकाल कर लौड़ा चूसा। जब पूरी मस्ती छा गयी तब सब लड़कियों ने लौड़ा अपनी अपनी बुर में पेलना शुरू किया। देखते ही देखते पाँचों लण्ड बुर में घुस गये ? फिर क्या बार बार अंदर बाहर करते हुए चोदने लगे चूत ? 
गज़ाला बोली - यार आज पहली बार एक साथ पांच पांच बुर चुदती हुई देख रही हूँ। 
शकीरा - हां मैं तो पहली बार पांच टन टनाते हुए लण्ड एक साथ देख रही हूँ। मेरी चूत में आग लग गयी 
रिदा - यार मेरा मन तो इन पाँचों से अपनी माँ चुदाने का हो रहा है। अपनी बहन चुदाने का हो रहा है। इतने मस्त लौड़ों से चुदवाकर मेरी माँ का भोसड़ा साला मस्त हो जायेगा ?
मैंने कहा :- तो फिर किसी दिन इन पाँचों को बुला ले अपने घर में और चुदा ले अपनी माँ और अपनी बहन, भोसड़ी वाली रिदा ? मैं तो बहुत दिनों से सोंच रही थी की कैसे इन लोगों से एक साथ चुदवाऊँ ?
समीरा - यार फ़िरोज़ तो मेरी माँ चोदता ही है। अब मैं बाकी चार लोगों से अपनी माँ जरुर चुदवाऊँगी। आज मुझे विकी का लौड़ा मेरी चूत में घुस कर बड़ा मज़ा दे रहा है। ग्रुप में चुदाने का मज़ा कुछ और ही होता है ? इतने में पीटर ने लण्ड शकीरा की बुर से निकाल कर समीरा की बुर में घुसेड़ दिया। विकी ने समीरा की बुर से निकाल कर शकीरा की बुर में पेल दिया लण्ड ? लण्ड बदला तो मज़ा और आने लगा। तब तक इधर टोनी रिदा को चोदने लगा। फ़िरोज़ रिदा की बुर से लौड़ा निकाल कर मुझे चोदने लगा और ताहिर ने मेरी चूत से लण्ड निकाला और गज़ाला की चूत में घुसा दिया। थोड़ी देर में लड़कों ने पीछे से चोदना शुरू किया। लड़कियां सब कुतिया बन कर चुदाने लगीं। अपनी अपनी गांड और चूंचियां हिला हिला कर चुदाने लगीं। दूसरे ग्रुप में लड़कों ने एक दूसरे को आँख मारी तो टोनी ने अपना लौड़ा मेरी बुर में पीछे घुसा दिया। फ़िरोज़ ने गज़ाला की चूत में और ताहिर ने रिदा की चूत में ? अब रिदा को ताहिर के लण्ड का मज़ा मिलने लगा। गज़ाला बोली हाय फ़िरोज़ बड़ा मज़ा आ रहा है। यार मैं तुम सबको अपने घर ले चलूंगी और अपनी माँ को अपनी भाभी को और अपनी खाला को दो दो लण्ड पिलाऊंगी तब मज़ा आएगा ? जब मैं अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड पेलूँगा भाभी की बुर चुदवाऊँगी और खाला का भोसड़ा चोदूँगी तो और मज़ा आएगा ? उसके बाद एक एक करके लण्ड झड़ने लगे। सबने फिर झड़ते हुए लण्ड पीने का मज़ा लिया। 
इतने में दोपहर हो गयी तो फिर लंच होने लगा। खाना खा कर सब लोग आराम करने लगे और नींद आ गयी। शाम को करीब ६ बजे सब लोग उठ बैठे और ७ बजे फिर जम गयी महफ़िल। सबके हाथ में आ गया एक एक गिलास शराब का। मैंने कहा अब ग्रुप में लोग बदल जायेंगे। पहले ग्रुप की लड़कियां अब दूसरे ग्रुप के लड़कों से चुदवायेंगी । दूसरे ग्रुप के लड़के पहले ग्रुप की लड़कियां चोदेंगे। शकीरा और समीरा अब टोनी, फ़िरोज़ और ताहिर से चुदायेगी। यानी तीन लण्ड मिलकर दो चूत अदल बदल कर चोदेंगें। इसी तरह दूसरे ग्रुप की लड़कियां गज़ाला, रिदा और मैं साजिया पीटर और विकी से चुदवाएगीं। यहाँ दो लण्ड मिलकर तीन बुर अदल बदल कर चोदेंगें। चुदाई जब शुरू हुई तो बड़ा मज़ा। लकड़े कभी बुर बदल लेते और लड़कियां कभी लण्ड बदल लेती। इस तरह की चुदाई सबके लिए नयी थी। सबको एक अनोखा मज़ा आ रहा था। 
रिदा बोली :- मेम आप इसी तरह की चुदाई एक दिन क्लास में करवा दीजिये। कितना मज़ा आएगा जब १४/१५ लड़कियां २०/२२ लड़कों से लण्ड अदल बदल कर चुदवायेंगी। इसमें तो कॉलेज की कुछ और मेम भी साथ देंगी। मैंने कहा :- हां साथ क्या वो तो मादर चोद खुद चुदवाने लगेंगी। मैं एक बार ऐसा करके जरुर दिखाऊंगी। 
इस तरह रात भर लड़के लड़कियां चोदते रहे। लड़कियां लड़कों से ख़ुशी ख़ुशी चुदवाती रही। 

=०=०=०=०० =०=०=०=०=०=० समाप्त 


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

रसीली चूत में



हैलो दोस्तो, मेरा नाम विक्की है, मैं जालंधर पंजाब से हूँ, मेरा कद पांच फुट दस इन्च है और मेरा रंग एकदम गोरा है, मेरा जिस्म दुबला है।

लड़कियाँ मुझे बहुत लाइन देती हैं, पर वक्त की कमी के कारण कभी किसी के पीछे नहीं पड़ा।

यह कहानी मेरी और मेरी गर्ल-फ्रेण्ड किरण (बदला हुआ नाम) के बीच की है। मैं किरण को 3 साल से देखता और जानता था, पर उससे कभी बात करने की हिम्मत नहीं हुई, किरण का रंग साफ है और उसके जिस्म की नाप 34-30-38 है।

उससे दोस्ती की चाहत में मैंने अपने दोस्त से उसका नम्बर लिया और फिर उसको मैसेज किया, पर उसने कोई जबाव नहीं दिया जो कि मुझे बहुत बुरा लगा।

जब मैंने अपने दोस्त को इसके बारे में बताया तो उसने मुझे इधर उधर से पता करके बताया कि उसने नम्बर बदल लिया है।

इसके बाद 2-3 दिन के बाद उसने मुझे किरण का नया नम्बर लाकर दिया।

मैंने फिर एक मैसेज किया और हमारी बात शुरू हो गई। थोड़े दिन तो मैं अंजान बना रहा फिर मैंने उसको अपने बारे में बताया तो वो खुश हो गई और बोली- मैं तुको जानती हूँ और तुमको पसन्द करती हूँ।

ऐसे ही हमारी महीने भर मैसेज पर बात होती रही।

एक दिन मैंने उससे मिलने का बोला तो वो कहने लगी कि थोड़े दिन रूको।

थोड़े दिन के बाद उसने सोमवार को मिलने का प्रोग्राम बनाया और सुबह मुझे 11 बजे मंदिर के पास आकर पिक करने को कहा।

मैं वक्त का बहुत पाबंद हूँ, तो मैं दस मिनट पहले ही घर से तैयार होकर निकल पड़ा।

बाजार से एक गिफ्ट-शॉप से उसके लिए एक प्यारा सा तोहफा लिया और उसकी कॉल का इन्तजार करने लगा।

जब उसकी कॉल आई तो मैंने उसको पिक किया और बाइक पर लेकर पास के एक रेस्टोरेंट में चला गया, जहाँ अलग केबिन बने हुए थे।

हम एक केबिन में बगल-बगल में बैठ गए। वेटर हमें पानी वगैरह दे गया और मैंने भी उसे ऑर्डर देकर जाने दिया।

इसकी बाद किरण और मैं आपस में बात करने लगे।

फिर मैंने उसे ‘आई लव यू’ बोला और उसने मुझसे भी अपने प्यार का इजहार किया।

मैंने खुश होकर उसे अपने आलिंगन में ले लिया और गालों पर अपने प्यार की पहली पप्पी ले ली जिसका उसने कोई विरोध नहीं किया।

इसके बाद वेटर आकर सामान देकर चला गया। मैंने वेटर को कुछ पैसे दिए, वो सब समझ कर चला गया।

मैंने थोड़ा उसको अपने हाथों से खिलाया और उसके खाए हुए आधे ग्रास को खुद खा लिया, वो मुझे प्यार भरी नजरों से देखने लगी और उसने अपनी बाँहें मेरी ओर बढ़ा दीं।

हम दोनों एक-दूसरे की बाँहों में लिपट गए और चुम्मियाँ करने लगे।

वो अपने होंठों से क्या कमाल की चुम्मी कर रही थी। हम चुम्बन करते और एक ग्रास प्लेट से उठा कर कुछ खाते, ऐसा करते हुए हम दोनों लगातार एक-दूसरे की आँखों में प्यार से देख रहे थे।

मैंने उसके मम्मों को अपने हाथों से सहला दिया, जब उसकी मूक स्वीकृति मिली तो मैंने उसकी चूचियों को जोर से भींच कर मसक दिया, उसने एक मस्त ‘आह’ भरी।

मैंने ऐसे ही दस मिनट तक चुम्बन किया और ऊपर से ही उसको सहलाता रहा।

उसके बाद हम अलग हुए और फिर थोड़ी देर बात करने के बाद हम अपनी प्रेम-लीला में शुरू हो गए।

अब की बार मैंने अपने हाथ उसके टॉप के अन्दर डाल कर उसकी चूचियों को दबाने लगा और वो और ज़ोर से मज़े लेकर मुझे चूमने लगी।

मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया जो उसने पहले तो हटा लिया, फिर मैंने उसके दोनों कबूतरों को ब्रा को हटा कर निकाल लिया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर करके उसके दूध को पीने लगा।

क्या बताऊँ दोस्तों कितना मज़ा आ रहा था..

मैं तो छोटे बच्चों की तरह ‘लपलप’ करके उसके दूध को चूस रहा था और वो सिसकारियाँ लिए जा रही थी।

ऐसे ही बारी-बारी से उसकी दोनों मम्मों को खूब चूसा।

किरण की आँखों में अब वासना की आग झलकने लगी थी। अब की बार फिर हम फ्रेंच किस करने लगे और इस बार मैंने कुछ आगे बढ़ते हुए उसकी पैन्ट का बटन खोल कर अपने हाथ को दहकती भट्टी पर ले गया जो बिल्कुल गीली हो गई थी।
अब वो मेरी छाती पर हाथ घुमा रही थी, फिर उसने अपना हाथ मेरी पैन्ट पर बँधी बैल्ट पर रख दिया तो मैंने मौके को देखते हुए कहा- अगर खोलना है तो खोल लो।

तो वो कुछ नहीं बोली और मैंने बैल्ट खोल कर उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया।

उसने भी अपने हाथों में लौड़े को पकड़ कर उसको मसलना शुरू कर दिया। उसकी आँखें मदमस्त हो कर वासना से भरी हुई थीं।

मैंने भी हिम्मत करके पूछा- क्या चुदाई करने का मन कर रहा है?

तो उसने अपना सिर ‘हाँ’ में हिलाया, तो मुझे तो बिन मांगे जन्नत मिलने जैसा लगा।

मैंने कहा- तो चलो इधर से चलते हैं।

उसके बाद बिल दे कर वहाँ से निकल कर पास के ही एक होटल में उसको ले गया।
वहाँ जाते समय रास्ते में कन्डोम ले लिए क्योंकि यह दोनों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है और होटल में एक कमरा बुक कर लिया।

कमरे में जाकर तो बस हम एक-दूसरे पर टूट पड़े, पहले उसको बाँहों में लेकर उसके नरम-नरम होंठों को 5 मिनट तक खूब चूमा और वो भी चूमने में मेरा पूरा साथ दे रही थी।

मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए उसने उस दिन काले रंग की चुस्त पैन्ट और नारंगी टी-शर्ट पहनी हुई थी।

मैंने जब उसकी टी-शर्ट उतारी तो उसके अन्दर उसने हल्के गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी जिसमें उसके मम्मे बाहर आने को तड़फ़ रहे थे, पता नहीं उस छोटी सी ब्रा में उसके 34 साइज़ के मम्मों को कैसे कसती होगी।

मैं तो उन पर बस टूट पड़ा और एक-एक करके दोनों मम्मों को मसलने और चूसने लगा, जिसमें उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

वो भी मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और इस पल का पूरा मज़ा ले रही थी।
फिर मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा उतार दी और उसके दोनों कबूतर जो काफ़ी देर से क़ैद में फड़फड़ा रहे थे, एकदम से उछल कर बाहर आ गए।

हाय.. क्या बड़े-बड़े तने हुए मम्मे थे..

मैं कभी एक चूचुक को चूस रहा था तो कभी दूसरे को.. उसके मुँह से बहुत मादक आवाजें आ रही थीं।

‘उफ्फ़ ह्म्म्मम ईहह ह्म्म्मूस मम्म्ह’

मैं पूरी मस्ती से उसके मम्मों को चूसने में लगा हुआ था।

उसके बाद मैंने उसको अपने नीचे लिटाया और उसकी पैन्ट का बटन खोल कर उसकी पैन्ट को उतारा, जिसमें उसने मेरी पूरी मदद की।
कसम से लाल रंग की पैन्टी में वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसकी इस खूबसूरती तो देख कर मुझे उस पर बहुत प्यार आया और फिर हमारे होंठ मिल गए जो 2-3 मिनट तक आपस में ही उलझे रहे, जिसका मैंने पूरा मज़ा लिया।

इसके बाद जब मैंने उसकी पैन्टी उतारनी चाही तो उसने मुझे रोक दिया।
‘तुम भी तो पहली अपने कपड़े उतारो..’

तो मैंने कहा- तुम ही उतार दो न..

पहले उसने मेरी शर्ट.. फिर बनियान उतारी और चेहरे से मेरी छाती पर चुम्बन करते हुए वो छाती से पेट पर आ गई और फिर उसने मेरी पैन्ट को खोलना शुरू किया।

मुझे झटका लगा जब उसने मेरी पैन्ट और अंडरवियर एक साथ खोल दिए और मेरे खड़े हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर खेलने लगी।

मुझे और अधिक हैरानी तो तब हुई जब उसने मेरे बिना कहे ही मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। मैं तो जन्नत की सैर करने लगा।

अब मैंने उसको पूरा नंगा कर दिया।

उसकी कमनीय काया को देख कर मुझे नशा हो गया।

आप भी जरा इसको पढ़ कर अपने लौड़े को सहला लीजिए।
उसकी तनी हुई चूचियाँ उस पर गुलाबी चूचुक और चूत… बिल्कुल साफ़ झांट रहित.. चूत की लकीर के बीच दाना तो ऐसे छुपा था जैसे कमलगटा का बीज.. लहराते केश.. बड़ी-बड़ी आँखें.. मस्त माल थी।

दोस्तो.. मेरा लवड़ा तो आसमान की तरफ मुँह बाए खड़ा था।

उसको मैंने अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और बस अब चुदाई की लीला आरम्भ हो गई।

मुझे अब ये अंदाजा तो हो गया था कि ये लौंडिया खेली-खाई है क्योंकि इतनी जल्दी जब कोई लौंडिया लौड़े को चूसना शुरू कर देगी तो वो एक चुदी-चुदाई है ये तो पक्का है।

मुझे भी कौन सा फर्क पड़ना था मेरे लौड़े को भी चूत की भूख थी सो अपना लौड़ा उसकी चूत पर अभी घिसना ही शुरू किया था कि मादरचोदी ने अपनी गांड उठा कर ‘गप्प’ से अपनी रसीली चूत में मेरा लवड़ा खा लिया।

‘आह्ह..’
लौड़े ने चूत को चीर दिया और उस रसभरी नदी में डुबकियाँ लगाना चालू कर दीं।

उसकी तरफ से भी पूरी मस्ती से जबाव मिल रहा था। मेरे होंठ उसके चूचकों को चूसते जा रहे थे और वो निरंतर सीत्कार करती हुई अपनी चूत को ऊपर उठा कर चुदाए जा रही थी।

करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद वो अकड़ गई और ‘आह्ह..’ की आवाज के साथ झड़ गई।

उसकी चूत के लिसलिसे पानी ने जब चिकनाई पैदा कर दी तब मुझे अहसास हुआ कि कंडोम तो लगाया ही नहीं था।

खैर मैंने भी धकापेल करके उसकी चूत में ही अपनी धार छोड़ दी। वो अपनी बाँहें मेरे जिस्म से लिपटाए हुए रस को अपनी चूत में पीती रही और मैं भी निढाल होकर उसके ऊपर ही ढेर हो गया।

कुछ देर बाद उठे और हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और होटल से बाहर निकल आए।
आज फिर मुझे तो उस चुदाई के बारे में सोच कर ही मुठ मारने का मन हो गया है।


RE: चाचा की बेटी - sexstories - 07-03-2017

दो- दो बेटों ने चोद डाला
रविराम69 (मस्तराम)

पटकथा : कैसे एक माँ को उसके दो- दो बेटों ने चोद डाला.. उसकी छूट की बैंड बजा डाला

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम सीमा है हम घर में 4 लोग है में मेरा पति ओर 2 बच्चे है मेरी उम्र 35 साल है मेरी फिगर 38-32-38 है मुझे सेक्स का बहुत शौक है रोज में अपने पति से सेक्स के लिये कहती हूँ लेकिन वो कभी कभी ही करते है और सिर्फ़ वो सिर्फ़ चूत में लंड डाल कर चोदते थे इसमे मेरे पति 5 मिनिट में ही झड़ जाते थे जिससे में सटिस्फाइड नही होती थी ओर में मायूस हो जाती थी ओर उंगली से अपने आप को संतुष्ट करके सो जाती थी.


ये रोज का काम बन गया था मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया जैसे की मैने आपको बताया है मेरे दो बेटे है बड़ा वाला राजू 20 साल का ओर छोटा टिंकू 18 साल का मैने उनको मुर्गा बनाने की सोची मैने छुट्टी वाले दिन अपने बड़े बेटे को सुबह नहलाने का ठान लिया था मैने सुबह उठकर 10 बजे उसे उठाया ओर नहाने को कहा ओर बोला तो बहुत काला हो गया है तुझे आज में नहलाऊँगी तो वो मना करने लगा में ज़बरदस्ती उसके साथे बाथरूम में चली गयी उस टाइम मैने एक पतला सा गाउन पहना था मैने उसको कपड़े उतारने को कहा थोड़ी आना कानी के बाद उसने मेरी बात मान ली.


मैने उस पर पानी डाल के उसके साबुन लगाना शुरू किया ओर उसके अंडरवेयर के पास हाथ लगाने लगी मैने उससे बोला चल अब अंडरवेयर भी उतार ओर ज़बरदस्ती उसका अंडरवेयर उतरवा दिया मैने उसका लंड देखा वो बेठा हुआ था 4 इंच का लग रहा था फिर मैने उस पर हाथ फेरना शुरू किया उसने कहा मम्मी गुदगुदी होती है मत करो थोड़ी देर में उसका लंड खड़ा हो गया में देख कर दंग थी की उसका लंड 6 इंच लंबा ओर 2 इंच मोटा था में उस पर हाथ फेर रही थी ओर वो मुझे मना कर रहा था तभी 5 मिनिट के बाद उसने बोला मम्मी मेरा पेशाब निकलने वाला है ओर उसका स्पर्म निकल गया ओर वो थोड़ा घबरा गया ओर कहने लगा.


मम्मी मेरा पेशाब निकल गया लेकिन वो तो बहुत गाड़ा है तभी मुझे पता चला इसे सेक्स के बारे में कुछ नही पता तभी मैने उससे कहा इससे पहले कभी ऐसा नही हुआ तो उसने मना कर दिया ओर कहने लगा मम्मी आपने मेरी लूली को पकड़ा हुआ था मुझे बहुत मज़ा आ रहा था की तभी पेशाब निकल गया तभी मैने उससे कहा अब तो तू बड़ा हो गया है ओर उसको नहला कर अपना गाउन उतारने लगी तब मैने उसको बाहर भेज दिया फिर में भी नहा कर बाहर आई ओर अपने काम में लग गयी दोपहर को 2 बजे वो मेरे पास आया ओर मेरे पास लेट गया तभी मेरे दिमाग़ ने कहा अब इसको शिक्षा दी जाये

तभी मैने उसको कहा तेरी कोई गर्लफ्रेंड है तो उसने मना कर दिया तभी मैने उससे फिर कहा अब तू बड़ा हो गया है कोई गर्लफ्रेंड बना लो तो उसने मुझे कहा क्या मम्मी उससे क्या होगा तभी मैने उसको कहा की तू उसके साथ घूमने जाना ओर ऐश करना ओर फिर उसके पापा आ गये ओर उन्होने कहा मुझे अभी मुंबई जाना है 6 दिन के लिये ओर वो चले गये.


अगले दिन मैने उसे फिर नहलाया ओर फिर उसका स्पर्म निकल गया तभी मैने उसको कहा क्या बेटे तू ये रोज रोज क्या करता है तो वो बोला मम्मी आप जब भी हाथ लगाते हो तो ये बड़ा हो जाता है ओर पेशाब कर देता है तभी मैने उसको बताया बेटा ये स्पर्म है ओर ये निकलना अच्छा होता है तो उसने पूछा क्या तभी मैने फिर देखा उसका लंड तंबू जैसा खड़ा था मैने उससे कहा बेटे जब लड़का बड़ा हो जाता है तो यही होता है ओर उसे बताना शुरू किया की तू इसको आगे पीछे किया कर जिससे तुझे मज़ा आयेगा ओर मैने उसकी मूठ मारनी शुरू कर दी 10 मिनिट के बाद वो फिर संतुष्ट हो गया तभी मैने उससे पूछा मज़ा आया तो उसने कहा बहुत आया ओर

मैने उसे ये भी समझाया की ये चीज़ किसी को मत बताना ओर जब भी उसको यह करना हो तो वो बाथरूम में ही करे ओर उसके बाद नेक्स्ट दिन वो फिर मेरे पास आया ओर कहने लगा मम्मी मैने आज भी किया ओर मुझे बहुत मज़ा आया.


तभी शाम के टाइम जब में उसके रूम में गयी तभी मैने देखा वो मूठ मार रहा था तभी मैने उसे टोक दिया ओर उससे कहा इसे ज़्यादा मत करो सेहत पर असर पड़ता है ओर उसे अपने कमरे में अन्दर ले गई ओर उसको बताना शुरू किया मैने उसको ज़ब कुछ बताया की ये किस काम आता है ओर इसके रस को ऐसे वेस्ट नही करते इन सब बातो से वो बहुत एग्ज़ाइटेड हो गया ओर बूब्स देखने की ज़िद करने लगा तभी मैने उससे गुस्सा किया ओर कहा माँ बेटा ये नही करते ऐसे ही 2-3 दिन निकल गये ओर में अपने छोटे बेटे को तैयार करने लगी.


फिर उसे भी ज़ब कुछ सीखाने लगी ओर उसके साथ ही नंगी हो कर नहा लेती ऐसे ही एक दिन मेरा बड़ा बेटा ओर छोटा बेटा बात कर रहे थे तभी मैने उनकी बाते सुनी उन्होने मूठ मारने की बात की लेकिन एक दूसरे को ये नही बताया की ये सब किसने सीखाया है मेरा बड़ा बेटा बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड रहता था ओर जब भी में नहाने जाती या कपड़े चेंज करती वो मुझे चुपचुप के देखता रहता में उसकी यह सब चीज़े नोट कर रही थी ओर बीच बीच में वो मुझे बताता भी रहता मम्मी मैने मूठ मारी थी ओर एक दिन जब वो मूठ मार रहा तो मैने देखा

उसके हाथ में एक किताब थी जिसमे नंगी फोटो थी मैने उसे देखा तो उसने वो छुपा दी और मेरे ज़ोर से बोलने पर उसने वो किताब दे दी ओर में वो ले कर चली गयी अगली दोपहर को वो मेरे कमरे में आया ओर बोला वो किताब प्लीज दे दो तो मैने उसको बोला क्या करेगा तो उसने साफ साफ़ कह दिया आप तो अपने बूब्स दिखाती नही हो तो उसमे ही देखूँगा.


तभी मैने उसे समझाया की इतनी मूठ नही मारते तभी वो बिना कुछ बोले ही चला गया तभी मुझे वो मेरे लायक तैयार लगा ओर शाम को हमारे घर पर में ओर राजू ही थे मेरे पति ओर टिंकू अपनी बुआ के घर गये थे तभी मैने राजू को थोड़ी जानकारी दी और उसको थोड़ा प्यार करके बोली मेरा बेटा नाराज़ है तो वो कुछ नही बोला तभी मैने उसका हाथ अपने बूब्स पर रख दिया वो बिल्कुल पागलो की तरह मुझे देखने लगा

तभी मैने उससे कहा जैसा में कहूँगी वैसा ही कर ना तो वो मान गया मैने अपनी कमीज़ ओर ब्रा उतार दी जिससे मेरे बूब्स कबूतर की तरह आज़ाद हो गये ओर राजू का हाथ उन पर रख दिया ओर उसको दबाने की पर्मिशन दे दी ओर उसे चूसने को भी कहा मुझे अब मज़ा आ रहा था ओर राजू मेरे एक बूब्स को सक कर रहा था ओर दूसरे को दबा रहा था ओर मेरा एक हाथ उसके लंड पर पहुँच गया था ओर दूसरे से में अपनी चूत रग़ड रही थी.


तभी राजू ने कहा मम्मी आप क्या कर रहे हो तभी मैने उसको कहा की आज में तुझे सब सीखा दूँगी ओर मैने उसको कपड़े उतारने को कहा ओर उसको पूरा नंगा कर दिया ओर अपनी भी पेंटी उतार दी ओर उसको 69 की पोज़िशन में लेटने को कहा तो वो कहने लगा ये क्या होता है तभी मैने उसे 69 की पोजिशन में अपने उपर लिया ओर उसको अपनी चूत चाटने को कहा तो वो चाटने लगा ओर उंगली भी करने लगा ओर में उसका लंड चूस रही थी तभी में गर्म हो गयी ओर उसको अपने उपर लेकर कहा अब तू जाकर तेल की बोतल ले आ ओर जो में कहती रही वो करता रहा.


फिर मैने उसके लंड पर तेल लगाया तो वो पूछने लगा ये क्या लगा रहे हो तो मैने उसको बताया की जब पहली बार कोई लड़का किसी औरत की चूत में लंड डालता है तो उसकी थोड़ी टोपी की खाल खीच जाती है जिससे दर्द होता है पर तेल लगाने से लंड बिल्कुल स्मूद जाता है ओर उसका लंड चूत पर लगवा के उसे धक्का देने को कहा पर राजू नया खिलाड़ी था जिससे की धक्का देते ही उसका लंड फिसल कर नीचे चला गया तभी मैने उसका लंड पकड़ कर चूत पर रखा ओर धक्का देने को कहा राजू ने एक बार में ही आधा लंड अंदर डाला ओर मेरी चीख निकल गयी क्योकी उसका लंड मोटा था तभी उसने कहा क्या हुआ मम्मी तभी मैने उसको इशारा करते हुये एक ओर धक्का मारने को कहा जिससे उसका 6 इंच लंबा लंड मेरी चूत में घुस गया ओर उसने मुझे धक्के देने शुरू कर दिये.


में भी अपनी गांड नीचे से हिला कर उसका साथ दे रही थी उसके धक्के इतने जोरदार थे की में बहुत जल्दी झड़ गयी थी ओर 10 मिनिट के बाद मैं उसको ओर तेज बोलते बोलते ही झड़ गयी मगर वो मुझे चोदे जा रहा था ओर 30 मिनिट के बाद उसने मुझे कहा की मम्मी में झड़ने वाला हूँ ओर वो झड़ता हुआ मेरे उपर ही लेट गया उसने मेरी चूत में ही अपना स्पर्म छोड़ दिया तब तक में 2 बार झड़ चुकी थी 10 मिनिट के बाद जब हम अलग हुये तो राजू ने मुझे किस देते हुये कहा मम्मी आपने मुझे मज़ा दिला दिया ओर वो मेरे साइड में लेट गया 10 मिनिट के बाद जब मैने उसके लंड को देखा तो वो फिर खड़ा हुआ था तभी मैने उसको कहा ये फिर केसे खड़ा कर लिया

तभी उसने हँसते हुये कहा मम्मी इसको आपकी चूत बहुत पसंद आई है ओर वो फिर मेरे उपर आ गया उस रात हमने 5 बार चुदाई की ओर हम सो गये. अगले दिन हम सुबह 11 बजे उठे तो मुझसे उठा नही जा रहा था राजू की चुदाई से मेरी चूत बहुत दर्द हो रही थी में हिम्मत करके उठी ओर राजू को उठा कर नहाने चली गयी तभी पीछे पीछे राजू भी बाथरूम में आ गया ओर मेरी चूत को हाथ लगाने लगा मैने उसे चुदाई करने से मना कर दिया ओर

उसको अपनी चूत दिखाई तो वो समझ गया अब ये सिलसिला रोज चलता रहा लेकिन 4 महीने बाद राजू को हॉस्टल जाना पड़ गया ओर में फिर टिंकू को पटाने की सोचने लगी ओर कामयाब भी हो गयी टिंकू ने भी मुझे चोदा मगर 6 महीने में ही राजू हॉस्टल से आ गया ओर तभी राजू फिर से शुरू हो गया. तभी मैने अल्टरनेट डेट बना दी की जिससे मुझे मेरे दोनो बेटे चोद सके फिर मेरे दिमाग़ में दोनो से एक साथ चुदने का मन हुआ ओर मैने दोनो को एक साथ करके अपनी चुदाई करवाई ओर दोस्तो कैसी लगी मेरी कहानी.


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