Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
07-03-2018, 10:51 AM,
#1
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मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त


भाइयो रीत की लिखी हुई एक और कहानी ये आपको ज़रूर पसंदआएगी
'रीत बेटा उठो जल्दी देखो बाहर कितना उजाला हो चुका है और तुम हो कि सो रही हो'
मैं बेड के उपर ही कसमसाती हुई बोली 'उम्म्म मोम सोने दो ना'
मोम-मेरी प्यारी बच्ची स्कूल नही जाना क्या देख 7 बज गये है'
मैं बेड के उपर उल्टी लेटी थी और बेड के उपर ही घूम कर सीधी हो गई और बोली.
मे-मोम 7 ही तो बज़े है अभी तो एक घंटा बाकी है स्कूल जाने में.
मोम प्यार से मेरे सिर पे हाथ फेरती हुई बोली.
मम्मी-अरे तो क्या ऐसे ही उठ कर चली जाओगी स्कूल. चल जल्दी से उठ कर मूह धो ले और चाइ रख कर जा रही हूँ पी लेना.
मम्मी ने मेरा माथा चूमा और रूम से बाहर निकल गई.
मम्मी द्वारा इतने प्यार से उठाए जाने के कारण मेरा चेहरा मुस्कुराहट से खिल उठा. मैं कसमसाती हुई उठी और दोनो हाथ उपर करते हुए अंगड़ाई ली.
................
भले ही रीत सो कर उठी थी मगर इस हालत में भी बहुत खूबसूरत लग रही थी. मोम की तरह तराशा हुया उसका गोरा बदन और हर अंग की अपनी एक अलग ही ख़ासियत. देखने वाला यही कहता था कि 'खुदा ने ज़रूर इसे फ़ुर्सत में बनाया होगा'
अगर खुदा ने रीत को इतना हुस्न दिया था तो रीत ने भी उसे बहुत संभाल कर रखा हुआ था. उसने बहुत अच्छे तरीके से अपने आप को मेनटेन किया था. उसका बदन ना तो ज़्यादा भारी था और नही ज़्यादा हल्का बस जो अंग यहाँ से भारी होना चाहिए था वहाँ से भारी था और यहाँ से हल्का होना चाहिए था वहाँ से हल्का था. बस यही बात थी जो हर कोई उसको देखते ही दीवाना हो जाता था. लेकिन रीत इस सब से अंजान थी अभी तो जवानी ने उसकी लाइफ में पहला कदम ही रखा था. और जैसे ही उसकी जवानी की महक भंवरों के पास पहुँची तो भंवरे भी अपने स्वाभाव के मुताबिक़ उसके इर्द-गिर्द मंडराने शुरू हो गये थे मगर रीत इस सब से अंजान अपनी मस्ती में ही जी रही थी.
वो 18 साल की कच्ची कली थी जो कि खिलने के लिए तैयार थी. वो नज़दीक के गूव्ट. स्कूल में स्टडी कर रही थी.
..................
मैं बेड से उठी और वॉशरूम में घुस गई. थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर बाहर निकली और चाइ उठा कर अपने रूम से बाहर निकल गई और सीधा जाकर ड्रॉयिंग रूम में बैठ गई. मैने टीवी ऑन किया और साथ साथ चाइ की चुस्की लेने लगी.
मैं टीवी देख रही थी तभी मेरे कानो में एक आवाज़ सुनाई दी 'गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट'
मैने ने आवाज़ की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए जवाब दिया 'गुड मॉर्निंग भैया'
भैया-अरे बड़ी जल्दी उठ गई तू.
मे-ऐसे ही है जनाब हमे तो जल्दी उठना ही अच्छा लगता है.
भैया-बस बस बड़ी आई जल्दी उठने वाली वो तो शूकर करो कि मम्मी ने तुम्हे उठा दिया अगर मैं उठाने आता तो पूरी पानी की बाल्टी उपर फेंक कर उठाता तुम्हे.
मे-भैया अभी 7 ही तो बजे हैं.
भैया-मेडम ज़रा घड़ी में देखो 7:20 हो रहे हैं और तुम अभी तक नहाई भी नही हो. तुम रोज़ लेट उठती हो और रोज़ मुझे तुम्हे छोड़ कर आना पड़ता है. आज मैं नही जाने वाला.
मैने मिन्नत भरी निगाहों से देखते हुए कहा.
मे-प्लीज़ भैया ऐसा मत कहो.
भैया-नो नो मुझे तो कॉलेज जाना है मेरे पास टाइम नही है.
मैने अपनी कमर पे हाथ रखते हुए अकड़ कर कहा.
मे-भैया सीधी तरह से मान जाओ वरना मम्मी की सिफाराश लगवा दूँगी.
भैया-ओह हो हो बड़ी आई सिफाराश लगाने वाली आज कोई सिफाराश नही चलेगी.
सिफारिश वाला आइडिया फैल होता देख मैने फिरसे मूह लटकाते हुए कहा.
मे-मैं लेट हो जाउन्गी तो डाँट पड़ेगी क्लास में भैया और आपको अच्छा लगेगा ऐसा करके.
भैया-अरे अच्छा मुझे तो बहुत बहुत खुशी होगी अगर तुझे डाँट पड़ेगी. कम से कम सुबह जल्दी उठने का सोचोगी तो सही तुम.
मे-ओके अगर ऐसा है तो मुझे मत बुलाना.
तभी मम्मी किचन से बाहर आई और बोली.
मम्मी-रीत बेटा क्या हुआ.
मे-देखो ना मम्मी भैया मुझे स्कूल छोड़ने नही जा रहे.
मम्मी-हॅरी बेटा क्यूँ बच्ची को परेशान कर रहा है.
हॅरी-देखो ना मम्मी इसका रोज़ का काम है.
मम्मी-तो क्या हुआ इसका स्कूल तेरे कॉलेज के रास्ते में ही तो है तू छोड़ दिया कर इसे.
मे-मम्मी आपको नही पता है भैया को मुझे साथ लेजाने में शरम आती है.
मैने हंसते हुए कहा.
हॅरी-देखो देखो मम्मी कुछ ज़्यादा ही ज़ुबान चलने लगी है इसकी.
मम्मी-बस बस अब बंद करो अपनी बातें और रीत बेटा जल्दी से तैयार हो जा.
मे-ओके मम्मी.
हॅरी-चल चल अब जल्दी कर वरना मैं अकेला ही निकल जाउन्गा फिर आती रहना.
मैं जल्दी से उठी और भैया को चिड़ाती हुई अपने रूम की तरफ बढ़ गई.
7:45 वज रहे थे जब मैं रेडी होकर रूम से बाहर आई. इस बीच भैया मुझे पता ही नही कितनी दफ़ा आवाज़ दे चुके थे. मुझे रूम से निकलते देख वो बोले.
हॅरी-ओह गॉड कितना टाइम लगाती हो तुम तैयार होने में.
मे-अब आ तो गई भैया. जल्दी चलो.
भैया ने बाइक निकली और मैं पीछे बैठ गई और भैया ने बाइक दौड़ा दी.
हॅरी-अब ठीक से पकड़ कर बैठ जा आज इतनी तेज़ बाइक चाउन्गा कि तू कभी मेरे साथ नही बैठेगी.
मे-प्लीज़ भैया धीरे चलाओ नही तो पापा को बता दूँगी.
हॅरी-तू जिसे मर्ज़ी बता देना.
बाइक इतनी तेज़ थी कि. 20मिनट का रास्ता 10मिनट में पार कर दिया.
स्कूल पहुँच कर मैं उतरी और कहा.
मे-आज आपकी खेर नही घर पे.
भैया-अरे माइ स्वीतू ज़रा टाइम देख सिर्फ़ 5मिनट बाकी है तेरी क्लास में अगर मैं तेज़ ना चलाता तो हमे 20मिनट लग जाते और तुझे डाँट पड़ती.
मैं भैया की बात सुनकर खुश हो गई और उनकी गाल पे किस किया और क्लास की तरफ चल दी.
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07-03-2018, 10:52 AM,
#2
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
भैया को बाइ बोल कर मैं क्लास में पहुँची और सेधा जाकर अपनी फ़्रेंड महक के पास बैठ गई. महक मुझे देखते ही बोली.
महक-आ गई मेडम आप कभी जल्दी भी आ जाया करो.
मे-क्यूँ जल्दी आकर क्या करना होता है यहाँ.
महक-थोड़ी बहुत एक्सट्रा स्टडी हो जाती है.
मे-बस बस अच्छी तरह से जानती हूँ जो तू एक्सट्रा स्टडी करती है जल्दी आकर.
महक-तो तुम भी मेरे वाली एक्सट्रा स्टडी कर लिया करो कभी.
मे-स्कूल टाइम में जो स्टडी होती है मुझसे वो ठीक ढंग से नही हो पाती एक्सट्रा स्टडी की तो माँ की आँख.
महक-मेरे वाली एक्सट्रा स्टडी किया कर देखना कितनी आसान है वो.
मे-बस बस अब लेक्चर बंद कर आज तेरा लफंगा नही दिख रहा कहीं.
महक-अरे यहीं तो था पता नही कहाँ चला गया.
तभी रूम में एक लड़का एंटर हुया जिसका नाम था आकाश. मैने महक को कोहनी मारते हुए कहा.
मे-लो आ गये तुम्हारे मिस्टर. लफंगा जी.
आकाश हमारे टेबल के साथ में जो टेबल था नेक्स्ट रो में उसपे जाकर बैठ गया. उसी टेबल पे एक लड़का और बैठा था जिसका नाम तुषार था. आकाश और तुषार काफ़ी अच्छे दोस्त थे.
महक ने आकाश को देखकर स्माइल पास की और जवाब में आकाश ने भी महक को स्माइल की.
फिर हमारे टीचर क्लास में आए और पहला पीरियड स्टार्ट हो गया. जैसे तैसे करके पहले 5 पीरियड निकले और फिर रिसेस के लिए बेल हो गई. मैने अपना टिफेन उठाया और बाहर ग्राउंड में आकर बैठ गई. महक मेरे साथ बाहर नही आई थी और मैने उसे बाहर आने को कहा भी नही था. क्यूंकी मैं जानती थी कि वो क्लास में ही आकाश के साथ रहेगी और दोनो लैला-मजनू एक दूसरे को हाथ से खाना खिलाएँगे. ये इनका रोज़ का काम था. मैने खाना ख़तम किया और टिफेन उठा कर क्लास की तरफ चल पड़ी. जब मैं क्लास में एंटर होने लगी तो तुषार ने मुझे रोक दिया और कहा.
तुषार-रीत प्लीज़ अभी अंदर मत जाओ महक और आकाश अंदर है.
ये इनका रोज़ का काम था हर रोज़ रिसेस में खाना खाने के बाद आकाश और तुषार सभी स्टूडेंट्स को रूम से बाहर निकाल देते थे. इन दोनो से सभी डरते थे और चुप चाप बाहर निकल जाते थे. और फिर अंदर शुरू होता था महक और आकाश का लिपटना-च्चिपटना. जितनी देर तक आकाश और महक अंदर होते थे तो तुषार बॉडी-गार्ड बनकर रूम के गेट पे खड़ा रहता था. स्टूडेंट तो कोई अंदर आता नही था बस डर होता था तो सिर्फ़ किसी टीचर के आ जाने का. और इसी सिलसिले में तुषार बॉडी-गार्ड बन कर खड़ा रहता था.
और आज जब मुझे तुषार ने रोका तो मैने थोड़ी शरारत करने की सोची.
मे-मुझे अंदर जाने दो मुझे टिफेन बॅग में रखना है.
तुषार-लाओ मैं रख देता हूँ तुम्हारे बॅग में.
मे-मैं तुम्हे क्यूँ दूं तुमने बॅग में से कुछ निकाल लिया तो चुप चाप मुझे अंदर जाने दो.
तुषार-मैने कहा ना तुम अंदर नही जा सकती.
तुषार ने थोड़ा गुस्से में कहा तो मैं खड़ी खड़ी ही काँप गई. मैने थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए थोड़ा उचे स्वर में कहा ताकि मेरी बात महक और आकाश तक भी जा सके.
मे-ओके तो अब मैं प्रिन्सिपल सर के पास जा रही हूँ अब वो ही मुझे रूम के अंदर लेकर जाएँगे.
मेरा आइडिया काम कर गया और जैसे ही मैं वहाँ से चलने को हुई तो महक की आवाज़ मुझे सुनाई दी.
महक-अरे रीत.....रीत प्लीज़ सुनो तो.......
मैने पीछे घूम कर देखा तो महक अपने कमीज़ को अपने उरोजो के पास से ठीक करती हुई बाहर आई और पीछे पीछे आकाश पॅंट की ज़िप लगाता हुया बाहर निकला. महक मेरे पास आई और बोली.
महक-पागल हो गई है क्या तू.
मैं उसे देखकर हँसने लगी और मुझे हंसते देख उसने कहा.
महक-हंस क्यूँ रही है.
मे-में किसी के पास नही जाने वाली थी. मैं तो बस तुम लोगो को बाहर निकालना चाहती थी.
और मैं फिरसे हँसने लगी. मैने उसका हाथ पकड़ा और ग्राउंड की तरफ ले गई.
महक-क्या मिला तुझे ये सब करके. अच्छे ख़ासे मज़े आ रहे थे सारा मूड ऑफ कर दिया.
मे-ओह हो तो मुझे भी बताओ कैसे मज़े कर रही थी तुम उस लफंगे के साथ.
महक-तुझे ही भेज देती हूँ अंदर जा खुद ही करले जो मज़े करने है.
मे-तौबा तौबा भगवान बचाए ऐसे मज़े से.
मैने अपने कानो को हाथ लगाते हुए कहा.
महक-देखना जब किसी के प्यार में पड़ गई ना तब पूछूंगी तुझसे.
मे-नो वे ऐसा दिन कभी नही आएगा.
महक-आएगा मेरी जान बहुत जल्द आएगा. वो तुषार है ना तेरे बारे में पूछता रहता है मुझसे.
मे-वो बॉडी-गार्ड. उसको बोलना भूल जाए मुझे.
महक-अरे वो तो बोलता है कि तू उसके सपनो में आती है.
मे-देखना एक दिन सपने में ही चाकू लेकर जाउन्गी और मार डालूंगी उसे.
महक-तेरा कुछ नही हो सकता.
मे-तेरा तो बहुत कुछ हो गया है ना चल अब नेक्स्ट पीरियड स्टार्ट होने वाला है.
रिसेस के बाद वाले 4 पीरियड बड़ी मुश्क़िल से बीते और फिर आख़िरकार छुट्टी हुई तो मैं और महक बॅग उठाकर स्कूल के नज़दीक वाले बस स्टॉप के उपर आ गई. यहाँ बस स्टॉप तो था मगर सिर्फ़ नाम का कियुंकी बस तो यहाँ रुकती नही थी और ऑटो थे जो यहाँ के लोगो का आना-जाना आसान करते थे. एक ऑटो को महक ने हाथ दिया और ऑटो के रुकते ही मैं और महक ऑटो में बैठ गई और ऑटो रोड पे दौड़ने लगी. मेरा गाओं आने पर मैं ऑटो से उतर गई और महक अभी ऑटो में ही थी क्यूंकी उसका गाँव आगे था.
मैं घर आई और मैने टीवी ऑन किया और सेट मॅक्स पे आइपीएल का मुंबई व/स पुणे का मॅच देखने लगी. सचिन मेरा फेव. था और उसका मॅच देखना मैं कभी नही भूलती थी.

क्रमशः......................
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07-03-2018, 10:52 AM,
#3
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
मैं टीवी पे मॅच देख रही थी. मुंबई की हालत काफ़ी अच्छी थी पूरी पकड़ बना रखी थी अपने पंजाबी पुत्तर भज्जी ने मॅच के उपर. फिर मम्मी ने मुझे चाइ का कप दिया और खुद भी मेरे साथ बैठ कर चाइ पीने लगी. मुझे मॅच में पूरा इंटेरेस्ट लेते देख वो बोली.
मम्मी-क्या बीच में घुस जाएगी टीवी के मैं तेरे पास बैठी हूँ कोई बात तो कर.
मे-मम्मी आप भैया से कर लेना जो बातें करनी है मुझे तो मॅच देखना है.
मम्मी-यहाँ पे क्यूँ बैठी है बात लेकर ग्राउंड में ही चली जा.
मम्मी थोड़े गुस्से से बोली मगर मैने ध्यान नही दिया. इतने में भैया भी कॉलेज से वापिस आ गये और आते ही मेरे सर पे हाथ मारते हुए बोले.
हॅरी-आ गई स्वीटू तू स्कूल से.
मैं मॅच में इतना खोई हुई थी कि उनकी बात पे ध्यान ही नही दिया. मम्मी मेरी इस हरकत से गुस्से में आ गई और मेरे हाथ से रिमोट छीन कर चन्नल चेंज कर दिया.
मैं इतराती हुई बोली.
मे-मम्मी........प्लीज़ वहीं पे लगाओ.
मम्मी-चुप चाप अपने रूम में जाकर पढ़ाई कर सारा दिन टीवी में ही घुसी रहती है.
मे-आपको क्या लगता है कि अगर आप चन्नल चेंज कर देंगी तो मैं मॅच नही देख पाउन्गी. मैं जा रही हूँ गुलनाज़ दीदी के पास मॅच देखने.
मम्मी-हां जा जा कम से कम गुल बेटी तुझे कोई अकल की बात तो सिखाएगी.
मैं अपने घर से बाहर निकली और अपने ताया जी के घर की तरफ चल पड़ी.
......................
उनका घर हमारे घर के साथ वाला ही था. उनके घर में ताया जी और ताई जी थे जो कि बहुत ही अच्छे थे और उनकी एक बेटी थी गुलनाज़ न्ड एक गुलनाज़ दीदी से छोटा बेटा था जिसका नाम था जावेद. ताया जी और ताई जी की तरह वो दोनो भी बहुत ही अच्छे थे. ख़ास तौर पे नाज़ दीदी वो मुझे बहुत प्यार करती थी. वैसे तो मैं अपने सारे परिवार की चहेती थी मगर गुलनाज़ दीदी मुझे सबसे ज़्यादा प्यार करती थी. गुलनाज़ दीदी सुंदरता की मूरत थी. उनकी सुंदरता और उनके सुभाव की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम थी. जब वो कुछ कहने के लिए अपने होंठ खोलती तो ऐसा लगता जैसे उनके मूह से गुलाब के फूल गिर रहे हो और उनके मीठे मीठे बोल जैसे फ़िज़ा में सुंगंध घूल देते थे. सच कहूँ तो गुलनाज़ दीदी जितनी सुंदर थी उस से कही ज़्यादा अच्छी इंसान थी वो.
....................
जैसे ही मैं नाज़ दीदी के घर के सामने पहुँची तो मुझे सामने से आकाश आता दिखाई दिया. नाज़ दीदी के घर के आगे वाला घर आकाश का ही था. जैसे ही मेरी नज़र उस से मिली तो उसने मुझे स्माइल की मगर मैं उसकी स्माइल का कोई जवाब ना देते हुए नाज़ दीदी के घर में घुस गई.
अंदर जाते ही मैं ज़ोर ज़ोर चिल्लाने लगी.
मे-नाअज़ डीडीिईईई...........दीदी कहाँ हो आप........
मेरी आवाज़ सुनकर ताई जी किचन से बाहर निकली और बोली.
ताई जी-अरे रीतू क्यूँ शोर मचा रही है.
मे-ताई जी नाज़ दीदी कहाँ हैं.
ताई जी-वो अपने रूम में है.
मैं सीधा नाज़ दीदी के रूम में जाकर घुस गई. नाज़ दीदी बेड पे बैठी किताब पढ़ रही थी. वो एलएलबी करती थी और बस हमेशा पढ़ती रहती थी. मुझे देखते ही वो बोली.
गुलनाज़-अरे स्वीटू आप यहाँ आज हमारी कैसे याद आ गई.
मे-दीदी रोज़ तो आपके पास आती हूँ मैं.
नाज़-वो तो ठीक है मगर आज आपके तेवर कुछ तीखे लग रहे हैं.
मे-हां दीदी वो आप जल्दी से टीवी ऑन करो.
नाज़-ओह तो बच्ची मॅच देखने आई है यहाँ.
मे-आपको कैसे पता चला.
नाज़-आप जब भी ऐसे तीखे तेवर लेकर यहाँ आती हो तो मुझे पता होता है कि घर में चाची जी ने आपको डांटा होगा और आप यहाँ चली आई मॅच देखने.
मे-ओह हो अब बातें मत करो जल्दी से टीवी ओन करो.
दीदी ने टीवी ऑन किया और मैने रिमोट उठकर सेट मॅक्स लगा दिया.
स्कोर्कार्ड को देखकर दीदी बोली.
नाज़-आज तो लगता है आपकी मुंबई जीत जाएगी.
दीदी जानती थी कि मेरा फेव. क्रिकेटर सचिन है.
मे-लगता तो है दीदी.
फिर मैं वहाँ बैठकर मॅच देखने लगी. मुंबई की बॅटिंग आ गई और उन्हे सिर्फ़ 130 का टारगेट मिला. लेकिन ये क्या मुंबई के 3 विकेट सिर्फ़ 2 रन्स पे ही आउट हो गये.
मैं अपने सर पे हाथ मारती हुई बोली.
मे-ओह तेरी ये क्या हो गया.
नाज़-आपकी मुंबई की हालत पतली हो गई और क्या.
आख़िरकार मॅच ख़तम हुआ और मुंबई हार गई. मैं लटका सा मूह लेकर वहाँ से जाने लगी तो नाज़ दीदी बोली.
नाज़-आप बस मॅच देखने आई थी स्वीटू मेरे पास नही बैठोगी.
मैं दीदी के पास बेड पे जाकर बैठ गई और बोली.
मे-नही दीदी आप जब भी मेरे पास होती हो तो मुझे बहुत अच्छा लगता है.
नाज़-मुझे भी आप की ये चुलबुली सी हरकते बहुत अच्छी लगती हैं स्वीतू और बताओ आपकी स्टडी कैसी चल रही है.
मे-ब्स चल रही है दीदी.
नाज़-रीतू बच्चे ध्यान से पढ़ा कर और अच्छे मार्क्स लेकर पास होना है आपको.
मे-क्या दीदी आप भी ना मेरी मम्मी बन जाती हो. और ये क्या 'आप-आप' लगा रखी है आपने. मैं कितनी छोटी हूँ आपसे मुझे 'तुम' कहा करो प्लीज़.
नाज़-अरे स्वीटू एक मैं ही तो हूँ जो आपको इज़्ज़त से बुलाती हूँ. बाकी घर वाले तो आपको गलियाँ ही देते हैं.
मे-ये बात तो है दीदी तभी तो मैं भी आपसे कितना प्यार करती हूँ.
गुलनाज़ दीदी ने मेरे फोर्हेड पे किस की और मैने उनके चीक्स पे किस करते हुए उन्हे बाइ बोला और अपने घर में आ गई.
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07-03-2018, 10:53 AM,
#4
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
गुलनाज़ दीदी के घर से वापिस आने के बाद मैं अपने रूम में गयी और पढ़ने के लिए किताब उठाई मगर मेरा दिल पढ़ने में नही लगा और मैने बुक बंद की और अपने घर की छत पे चली गई और टहलने लगी. शाम का मौसम था थोड़ा थोड़ा अंधेरा आसमान में आने लगा था हवा भी ठंडी चल रही थी जिस से सीने को ठंडक पहुँच रही थी. काफ़ी देर तक मैं वहाँ टहलती रही और फिर जब काफ़ी अंधेरा हो गया तो मैं नीचे आ गई. मम्मी खाना बना रही थी और भैया टीवी देख रहे थे. मैं भैया के पास जाकर बैठ गई. मुझे देखते ही भैया बोले.
हॅरी-स्वीटू कहाँ थी तू.
मे-उपर छत पे थी भैया.
हॅरी-ओके जा मम्मी की हेल्प करा जाकर किचन में.
मे-उम्म्म भैया मैं बहुत थकि हुई हूँ.
हॅरी-थक कैसे गई तू कोई काम तो किया नही तूने दिन भर में.
मे-नही भैया वो मेरी पीठ में दर्द है.
हॅरी-बहाने-बाज़ कब तक मम्मी के हाथ की खाती रहेगी. शादी के बाद देखूँगा तुझे जब सारा दिन किचन में ही गुज़र जाएगा तेरा.
मे-तब की तब देखेंगे. फिलहाल तो मम्मी के सर पे ऐश करलू.
हॅरी-करले बच्चू जितनी ऐश करनी है. पापा को बोल कर लड़का ढूँढते हैं तेरे लिए.
मे-भैया पहले आपको मेरे लिए भाभी ढूँढनी पड़ेगी फिर मेरी शादी की बात करना.
तभी मम्मी बाहर आई और बोली.
मम्मी-किसकी शादी की बात करनी है रीतू.
मे-भैया की.
मम्मी-हां अब तो करनी पड़ेगी.
हॅरी-मम्मी आप भी इस नटखट के साथ मिल गई. अभी मुझे पढ़ना है जब शादी का टाइम आएगा मैं खुद बता दूँगा.
मे-भैया कहीं पहले से तो नही ढूँढ रखी मेरी भाभी.
हॅरी-देखो मम्मी ये बिगड़ती जा रही है.
मम्मी-अरे बुद्धू वो मज़ाक कर रही है. तू जानता तो है इसे.
तभी पापा भी आ गये और फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया और फिर सब अपने अपने रूम में चले गये. मैने थोड़ी देर पढ़ाई की और फिर घोड़े बीच कर सो गई. सुबह फिरसे मम्मी ने मुझे उठाया और मैने फ्रेश हो कर चाइ पी और जल्दी से स्कूल के लिए रेडी हो गई. आज भैया को पापा के साथ कहीं जाना था इसलिए मुझे आज बस से जाना पड़ा. वैसे तो बस स्टॉप पे बस कोई रुकती नही थी लेकिन सुबह के टाइम एक बस आती थी जो सभी गाओं में रुक कर जाती थी. और हमारे स्कूल के भी काफ़ी स्टूडेंट उसमे जाते थे. मैं जब स्टॉप पे पहुँची तो देखा आकाश वहीं पे खड़ा था. महक इसी बस से आती थी इसी लिए शायद आशिक़ मियाँ भी बस के आने का ही इंतेज़ार कर रहे थे. मैं जाकर बस स्टॉप पे खड़ी हो गई. एक दो लोग और खड़े थे वहाँ पे मुझे देखते ही आकाश मेरे पास आया और बोला.
आकाश-हाई रीत कैसी हो.
मे-ठीक हूँ तुम बताओ.
आकाश-आज तुम बस से क्यूँ जा रही हो हॅरी कहाँ है.
मे-उसे आज जाना है कही पे.
आकाश-ओके. वो कल कुछ देखा तो नही तुमने.
मे-कब.
आकाश-मुझे और महक को क्लास रूम में.
मे-नही नही मैने नही देखा.
आकाश का ये बात पूछना मुझे कुछ अच्छा नही लगा.
आकाश-थॅंक गॉड तुमने नही देखा. वैसे पता है हम क्या कर रहे थे.
आकाश के इस सवाल ने मुझे एकदम से चौंका दिया. मैने थोड़ा गुस्से में कहा.
मे-मुझे नही पता.
और मैने अपने नज़रे दूसरी और करली.
आकाश-देखना चाहोगी हम क्या करते हैं.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया. वो आगे कुछ बोलता उस से पहले ही बस आ गई और मैं गॉड का थॅंक करती हुई बस की तरफ बढ़ गई. धीरे धीरे सभी बस में चढ़ने लगे. मैने जब बस में चढ़ने के लिए अपनी एक टाँग उठा कर बस की सीढ़ी पे रखी तभी किसी ने मेरे नितंबों के बीच की दरार में तेज़ी से उंगली फिरा दी. पहली बार किसी मर्द की उंगली अपने नितंबों के बीच पा कर मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया. मैने पीछे मूड कर देखा तो वो आकाश ही था. मैं उसे गुस्से से घूरती हुई बस में चढ़ गई और आकाश भी मेरे पीछे बस में चढ़ गया. बस में भीड़ देख कर मेरा दिल घबराने लगा क्यूंकी मैं जानती थी कि ये कमीना भीड़ का फ़ायदा ज़रूर उठाएगा. तभी मुझे महक दिखाई दी वो मुझसे 3-4 लोग छोड़कर खड़ी थी. उसने मुझे पास आने का इशारा किया और मैं उन लोगो को साइड करती हुई महक के पास जा पहुँची. मैने चेहरा घुमा कर आकाश की तरफ देखा तो बेचारे का चेहरा ऐसे लटका हुआ था जैसे भगवान ने उसे लंड ना दिया हो. मैं उसे मुस्कुराते हुए उंगूठा दिखा कर चिडाने लगी जैसे कि बहुत बड़ी मात दे दी हो मैने उसे. मैने महक का हाल पूछा और बातें करते करते अगला स्टॉप आ गया. मेरी बदक़िस्मती थी कि जो लोग मेरे और आकाश के बीच खड़े थे वो तीनो उतर गये और आकाश दाँत निकालता हुआ बिल्कुल मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया. उसने महक को 'हाई' बोला और फिरसे एक उंगली सलवार के उपर से मेरे नितंबों की दरार में फिराने लगा. मेरे मूह से एक हल्की सी आह निकली जो कि बस के चलने की वजह से हो रहे शोर में ही खो गई. आकाश की उंगली को मेरे नितंबों ने दरार के बीच जाकड़ रखा था. ये सब उत्तेजना के मारे हो रहा था मैं ना चाहते हुए भी उत्तेजित हो गई थी और खुद ही थोड़ा पीछे को हट गई थी शायद मैं आकाश की उंगली को अच्छे से फील करना चाहती थी. मुझे पीछे हट ता देख आकाश ने अपना चेहरा मेरे कान के पास किया और कहा.
आकाश-मज़ा आ रहा है ना तुम्हे.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया. तभी हमारा स्कूल आ गया और मैने गॉड का थॅंक्स किया और बस से उतर गई.
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07-03-2018, 10:53 AM,
#5
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
बस से उतरकर मैं और महक क्लास की तरफ चल पड़ी. चलते हुए मुझे अपनी योनि के पास कुछ गीलापन महसूस हो रहा था. मैने महक को क्लास में जाने को बोल कर खुद सीधा वॉशरूम में जाकर घुस गई. अंदर जाते ही मैने सलवार खोल कर थोड़ा नीचे की तो देखा मेरी रेड कलर की पैंटी के उपर मेरी योनि से निकले कम की वजह से एक गीलेपन का निशान पड़ा हुया था. जो कि उस कामीने आकाश की मेहरबानी थी. फिरसे मेरे दिमाग़ में आकाश की बस वाली हरकत घूमने लगी. मुझे ऐसा लगने लगा जैसे अब भी आकाश की उंगली मेरे नितंबों की दरार में घूम रही है मेरे पूरे शरीर में एक तूफान सा मच गया. मैने एकदम से खुद को संभाला और ख्यालों की दुनिया से बाहर आई और मुस्कुराते हुए अपने सर पे हाथ मारते हुए कहा.
मे-ये मैं क्या सोच रही थी.
मैने जल्दी से सलवार पहनी और वॉशरूम से बाहर निकल गई और क्लास की तरफ चल पड़ी. क्लास में जाकर देखा तो आकाश मेरी सीट पे बैठा था महक भी उसके साथ अपनी सीट पे ही बैठी थी. आकाश ने अपना हाथ उसकी पीठ के पीछे से घुमा कर उसकी कमर पे रखा हुआ था. मैं उनके पास गई और कहा.
मे-ये मेरी सीट है उठो यहाँ से.
महक-रीतू जब तक टीचर नही आ जाते तब तक तुम प्लीज़ आकाश की सीट पे बैठ जाओ.
मे-मुझे नही बैठना किसी की सीट पे.
महक-प्लीज़ स्वीतू मेरी प्यारी सिस है ना तू प्लीज़ जा ना यार.
मैं गुस्से से उनके पास से चलकर आकाश की सीट पे जाकर बैठ गई. वहाँ पे पहले से ही तुषार बैठा हुया था. मेरे बैठते ही वो बोला.
तुषार-हाई रीत.
मे-हेलो.
तुषार-आज तुम जल्दी कैसे आ गई.
मे-वो आज मैं बस से आई हूँ इसलिए.
तुषार-ओके ओके. वो रीत एक बात पुछु.
मे-नही रहने दो और प्लीज़ चुप चाप बैठे रहो.
मैं पहले से ही गुस्से में थी उपर से तुषार का बच्चा सवाल पे सवाल किए जा रहा था.
तुषार-ओके जैसे तुम्हारी मर्ज़ी.

मैने आकाश और महक की तरफ देखा. महक मेरी तरफ बैठी थी जबकि आकाश दूसरी तरफ था. आकाश का हाथ ही मुझे दिख रहा था जो कि महक की कमर पे घूम रहा था. क्लास में ज़्यादा स्टूडेंट नही थे. बस हमारे अलावा 2-4 स्टूडेंट्स ही थे और वो अपनी बातों में लगे हुए थे. मैने देखा अब आकाश ने महक का कमीज़ थोड़ा उपर सरका दिया था. जिसकी वजह से महक की कमर का और पेट का थोड़ा सा हिस्सा नंगा हो गया था और आकाश का हाथ अब उस नंगे हिस्से पे ही घूम रहा था. एक भी दफ़ा महक ने उसका हाथ वहाँ से हटाने की कोशिश की मगर आकाश के मज़बूत हाथ को वो हिला तक नही पाई. आख़िरकार वो भी उसके स्पर्श का मज़ा लेने लगी. फिर आकाश का हाथ नीचे जाने लगा और महक के नितंबों की साइड पे घूमने लगा और नितंबों और बेंच के बीच घुसने का रास्ता तलाश करने लगा. मेरी नज़र तो जैसे उसकी हरकतों के उपर ही अटक गई थी. आकाश की हरकतें देखकर मैं गरम हो गई थी और मुझे इतना भी ख्याल नही रहा था कि तुषार मुझे ये सब देखते हुए देख रहा है. मैने देखा अब महक थोड़ा सा उठी और आकाश ने झट से अपना हाथ उसके नीचे कर दिया और महक फिरसे नीचे बैठ गई. लेकिन अब वो बेंच पे नही बल्कि आकाश के हाथ के उपर बैठी थी. महक आकाश के हाथ के उपर धीरे धीरे अपने चूतड़ हिला रही थी. आकाश महक को कुछ कह रहा था लेकिन क्या कह रहा था ये हम तक सुनाई नही दे रहा था. महक ने आकाश की बात सुन ने के बाद ना में सर हिलाया. पता नही शायद वो कुछ करने से मना कर रही थी लेकिन आकाश नही मान रहा था. थोड़ी देर बाद महक एक बार फिर से उठी और आकाश ने भी अपना हाथ नीचे से निकाल लिया और उसने अपना हाथ महक की पीठ पे रखा और नीचे को सरकाते हुए अपना हाथ सीधा उसकी सलवार में डाल दिया उसका हाथ आसानी से महक की सलवार के भीतर घुस गया. इसका मतलब था कि महक की सलवार खुल चुकी थी. महक एक दफ़ा फिर से बैठ गई थी और आकाश का हाथ उसके नितंबो के नीचे था लेकिन इस दफ़ा वो सलवार के उपर से नही था बल्कि सलवार के अंदर से महक के नंगे नितंबों के उपर था. महक फिरसे अपने चूतड़ उसके हाथ पे रगड़ने लगी थी. महक को ऐसा करते देख मेरा पूरा शरीर काम अग्नि में जल उठा था और मुझे पता ही नही चला था कि कब मैं भी अपने नितंबों को महक की तरह बेंच पे रगड़ने लगी थी लेकिन मुझे मज़ा नही आ रहा था जबकि महक के चेहरे से सॉफ झलक रहा था कि उसे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं उसी तरह से अपने नितंब बेंच के उपर रगड़ रही थी तभी तुषार ने अपना चेहरा मेरे कान के पास किया और कहा.
तुषार-खाली बेंच पे रगड़ने से मज़ा नही आएगा रीत. महक की तरह हाथ भी तो लो नीचे.
उसकी बात सुनकर मैं एकदम से चौंक गई और अपने नितंबों को रगड़ना बंद कर दिया और मैं बुरी तरह से शरम-सार हो गई थी.
तुषार ने फिरसे मेरे कान में कहा.
तुषार-रीत एक बार मेरा हाथ नीचे लेकर फिर रगडो देखना कितना मज़ा आएगा.
मैं उसकी बात का कोई जवाब देने की हालत में नही थी. एक मन कर रहा था कि उसकी बात मान लूँ और एक मन था कि रीत सम्भल जा. मैं सोच ही रही थी कि तुषार का हाथ मेरे नितंबों की साइड पे आकर उनके नीचे जाने का रास्ता तलाशने लगा था. अब मैं आपा खो चुकी थी और मुझे पता ही नही चला कि कब मैं थोड़ा उपर उठी और तुषार का हाथ मेरे नीचे आया और मैं उसके उपर बैठ गई.
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07-03-2018, 10:56 AM,
#6
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
तुषार के हाथ को जैसे ही मैने अपने नितंबों के नीचे महसूस किया तो मेरे पूरे शरीर में मस्ती की एक लहर सी दौड़ गई. लेकिन अब मैं अपने नितंबो को उसके हाथ के उपर हिला नही रही थी क्यूंकी मुझे बहुत शरम आ रही थी ये सोच सोच कर कि मैं तुषार के हाथ के उपर बैठी हूँ. तुषार की उंगलियाँ मुझे अपने पीछे वाले छेद के उपर महसूस हो रही थी. मुझे हिलते ना देख तुषार ने फिरसे मेरे कान में कहा.
तुषार-अब महक की तरह हिलो भी देखना कितना मज़ा आएगा.
मैने थोड़ा थोड़ा खुद को उसके हाथ के उपर हिलाना शुरू कर दिया और फिर मेरी स्पीड बढ़ती गई और मैं अच्छे से अपने नितंब उसके हाथ पे रगड़ने लगी. मैं बेकाबू हो चुकी थी और मेरे पूरे शरीर में मस्ती भर गई थी. मेरी योनि ने एक बार फिरसे रस टपकाना शुरू कर दिया था. तुषार का एक हाथ मेरे नितंबों के नीचे था और उसका दूसरा हाथ अब मेरी जांघों पे घूमने लगा था. उसकी हरकतों ने मुझे मदहोश कर दिया था और मैं उसके हाथों की कठपुतली बन चुकी थी. जाँघो के उपर घूम रहा उसका हाथ अब मेरी योनि की तरफ बढ़ चुका था. मेरे अंदर एक आग सी लगी हुई थी जो बहुत तेज़ी से मेरी योनि की तरफ बढ़ती हुई महसूस हो रही थी. जैसे ही उसका हाथ मेरी योनि के उपर पहुँचा तो मैने अपनी जांघों को कस कर भींच लिया मेरी आँखें अपने आप बंद हो गई और मेरी साँसें तेज़ तेज़ चलने लगी और मेरे अंदर की आग मेरे कम के रूप में मेरी योनि में से बाहर निकल गई. मैने अपने नितंबों को उसके हाथ पे घिसना अब बंद कर दिया था और मैं अपने दोनो हाथों से उसका हाथ जो की मेरी योनि पे था उसे बाहर निकालने लगी थी. जब तुषार ने अपना हाथ वहाँ से हटाया तो मैने देखा कि मेरी योनि से निकलने वाला कम उसके हाथ के उपर भी लगा हुआ था. जिसे देखकर मैं बुरह तरह से शरमा गई मैने थोड़ा सा उपर उठकर तुषार का हाथ अपने नीचे से निकाल दिया. तुषार से आँखें मिलाने की मेरी हिम्मत नही हो रही थी. मैने चुपके से उसकी तरफ देखा तो वो उस हाथ को चाट रहा था जो कि थोड़ी देर पहले मेरी योनि पे लगा हुआ था. उसने धीरे से मुझसे पूछा.
तुषार-मज़ा आ गया रीत तुम्हारी योनि का पानी बहुत टेस्टी है. तुम्हे मज़ा आया ना.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और नज़रें नीची कर मुस्कुराने लगी.
अब मैं वहाँ से उठना चाहती थी और वॉशरूम में जाना चाहती थी. मैने महक और आकाश की तरफ देखा वो दोनो अब भी वैसे ही लगे हुए थे. मैं ये सोच कर घबराने लगी कि कही इन्होने मुझे तुषार के साथ ये सब करते देख तो नही लिया. मैं आकाश की सीट से उठी और क्लास से बाहर निकल गई और सीधा वॉशरूम में जाकर घुस गई मैने अपनी सलवार खोल कर नीचे की तो देखा मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी. मैने सलवार उतार दी और फिर पैंटी भी उतारकर वहीं एक कोने में फेंक दी और जल्दी से वापिस सलवार पहन कर वॉशरूम से निकल गई. जब में क्लास में पहुँची तो हमारे टीचर क्लास में आ चुके थे. मैं जाकर अपनी सीट पे बैठ गई आकाश अपनी सीट पे जा चुका था. मेरा बिल्कुल भी मन नही लग रहा था पढ़ाई में. जैसे तैसे पहला पीरियड ख़तम हुआ. नेक्स्ट पीरियड आज फ्री था क्यूंकी मथ्स की मॅम आज नही आई थी. मैने महक को लाइब्ररी चलने को कहा लेकिन उसने मना कर दिया. मैं अकेली ही उठ कर लाइब्ररी में चली गई. वहाँ कुछ और स्टूडेंट्स भी बैठे थे. मैने एक किताब उठाई और एक कोने में जाकर बैठ गई और पढ़ने लगी. थोड़ी देर बाद मुझे तुषार लाइब्ररी में दिखाई दिया. वो सीधा आकर मेरे साथ वाली कुर्सी पे बैठ गया. मैं कुर्सी के उपर बैठी थी और सामने लगे टेबल जो कि मेरे ब्रेस्ट्स तक आता था उसके उपर बुक रख कर पढ़ रही थी. तुषार ने अपने दोनो हाथों में मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला.
तुषार-रीत तुम्हे पता है तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हे देखकर तो कोई साधु संत भी तुम पर मोहित हो जाए.
मैं उसकी बातें सुनकर अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी.
उसने आगे कहा.
तुषार-रीत शायद तुम्हे महक ने बताया होगा कि मैं तुम्हे पसंद करता हूँ. पहले मेरी हिम्मत नही होती थी तुमसे कुछ कहने की लेकिन आज क्लास में तुमने मेरा साथ दिया तो मुझे लगा कि तुम भी मुझे चाहती हो.
आइ लव यू रीत.
मैं कुछ नही बोल पा रही थी मुझे कुछ ना बोलते देख वो फिरसे बोला.
तुषार-मुझे पता है रीत तुम मेरी बातों का जवाब देने की हालत में नही हो. आज घर जा कर अच्छे से सोचना और अगर तुम्हारी हां हुई तो कल सुबह जल्दी आ जाना और मुझे यहाँ लाइब्ररी में आकर मिलना मैं यहीं तुम्हारा इंतेज़ार करूँगा.
फिर उसने मेरे हाथ को चूमा और उठ कर वहाँ से बाहर निकल गया.
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करू. फिर मैने सोचा कि इस मामले में अगर घर जा कर ही सोचा जाए तो ज़्यादा बेटर रहेगा.
फिर मैं वहाँ से उठी और अपनी क्लास में जाकर बैठ गई क्यूंकी नेक्स्ट पीरियड अब शुरू होने वाला था.
पूरा दिन बड़ी मुश्क़िल से निकला और आख़िरकार स्कूल ऑफ होने के बाद मैं और महक बस स्टॉप की तरफ चल पड़े. मुझे खामोश देखकर महक बोली.
महक-रीतू आज तू बड़ी चुप चाप सी है क्या बात है.
रीत-कुछ नही महक बस थोड़ा सर दर्द कर रहा है.
मैं उसे अभी कुछ बताना नही चाहती थी. मैने एक ऑटो को रोका और मैं और महक उसमे बैठ कर घर की तरफ निकल पड़े.
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07-03-2018, 10:56 AM,
#7
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
मैं घर पहुँची, खाना खाया और फिर टीवी देखने लगी. टीवी पे चेनेई सूपर किंग्स का रॉयल चॅलेनजर्स के साथ मॅच चल रहा था. चेन्नई सुपर किंग टीम एकदम फुद्दु थी मुझे बिल्कुल भी अच्छी नही लगती थी वो टीम. आज मैं रॉयल चेलेन्जर के साथ थी क्योंकि उसमे इंडिया का सूपर स्टायलिश बॅट्स्मन विराट कोहली जो खेल रहा था. वो भी मुझे बहुत पसंद था और इस क़दर तक पसंद था कि मैं कभी-2 सोचती थी कि 'काश मुझे विराट एक बार जमकर किस करे तो मज़ा आ जाए'
अब क्या करे वो था ही इतना हॅंडसम. मैं कुछ देर बेत कर मॅच देखती रही. विराट और क्रिस पूरा धमाल मचा रहे थे. फोर'स आंड सिक्सस की बरसात हो रही थी लेकिन मेरा दिल आज मॅच में इंट्रेस्टेड नही था.


मैने टीवी ऑफ किया और अपने रूम में जाकर घुस गई. आज मेरे साथ स्कूल में जो कुछ भी हुया सब कुछ मेरे सामने घूमने लगा. पहले बस में आकाश का टच और फिर क्लास में महक और आकाश को देखकर गरम होना और तुषार के साथ बहक जाना. ये सब सोचते ही मेरे पूरे शरीर में मस्ती भरने लगी. मैं मन ही मन सोचने लगी की आज जो मज़ा आया था वो एहसास सचमुच बहुत बढ़िया था. आकाश की उंगली का मेरे नितंबो के उपर घूमना और तुषार के हाथ के उपर अपने कोमल और मुलायम नितंब रखना एक शानदार अनुभव था जो कि मुझे रोमांचित कर रहा था.

फिर तुषार की कही बातें मेरे दिमाग़ में घूमने लगी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं करूँ तो क्या करू. तुषार ने मुझे प्रपोज किया था मगर मैं उसे क्या जवाब दूं मेरी समझ से बाहर था. मैं खुद से ही सवाल जवाब कर रही थी.
क्या मुझे उसे हाँ बोल देनी चाहिए?

नही नही रीत ये ठीक नही है तुझे अभी पढ़ना है.
मगर महक भी तो मज़े कर रही है?
हां मुझे भी थोडा बहुत तो मज़ा करना चाहिए.
बस ऐसे ही बेकार की बातें मेरे दिमाग़ में घूम रही थी मगर मैं किसी नतीज़े के उपर नही पहुँच पा रही थी.

अचानक मम्मी की आवाज़ ने मुझे इन ख़यालों से बाहर निकाला. मम्मी मुझे चाइ पीने के लिए बुला रही थी. मैं अपने रूम से निकली और मम्मी के साथ बैठकर चाइ पीने लगी. छाई पीने से मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया. मैने सोचा क्यूँ ना इस बारे में महक से बात की जाए. वैसे भी वो मेरी बेस्ट फ़्रेंड थी हर बात मैं उसी के साथ शेर करती थी और फिर ये बात तो उसे बताना बेहद ज़रूरी था. मैने मम्मी का मोबाइल उठाया. मेरे पास अपना मोबाइल नही था इसलिए मुझे जब भी ज़रूरत होती थी तो मैं मम्मी का फोन ही यूज़ करती थी. मैं मोबाइल और चाइ लेकर छत पे जाने के लिए सीडीयाँ चढ़ने लगी. मम्मी ने पीछे से आवाज़ देते हुए पूछा.
मम्मी-रीतू किसे फोन करना है.
मे-मम्मी महक को करना है मुझे स्कूल का कुछ काम पूछना है उस से.
मम्मी-ओके बेटा.
मैं छत पे पहुँची और जल्दी से महक का नंबर. डाइयल किया. 2-3 रिंग के बाद महक ने उठाया और कहा.
महक-हाई स्वीतू कैसी है आज मुझे कैसे याद किया.
मे-मैं ठीक हूँ मिक्कु . वो बस ऐसे ही तुम्हारा हाल चाल पूछने के लिए किया था.
महक-अरे बता ना क्या बात है अच्छी तरह से जानती हूँ तुझे मैं कोई बात तो ज़रूर है.
मे-वो मिक्कुा ऐक्चुली मुझे तुमसे कुछ पूछना था.
महक-तो पूछ ना क्या पूछना है.
मे-वो.....मिक्कुै....वो.....उस.......
महक-तू कुछ बोलती है या मैं फोन रखू.
मे-नही नही मिक्कुै यार वो...उस तुषार ने मेरे बारे में क्या कहा था तुमसे.
महक-ओह हो तो मेडम को तुषार के बारे में पूछना है. बात क्या है...
मे-यार तू बता ना प्लीज़.
महक-ओके ओके यार उसने तो मुझे यही कहा था कि मैं उसकी तेरे साथ सेट्टिंग करवा दूं. तुझे पसंद करता है वो. तुझे कुछ कहा उसने.
मे-हां यार उसने मुझे प्रपोज किया आज.
महक-हाए मैं मर जावा. कूडीए तूने मुझे बताया क्यूँ नही स्कूल में.
मे-वो यार बस टाइम ही नही मिला.
महक-अच्छा चल छोड़ ये बता तूने क्या सोचा है.
मे-यार उसी के लिए तो तुझे फोन किया है तू ही कुछ बता ना प्लीज़.
महक-अरे स्वीतू प्रपोज तुझे किया है मैं क्या बताऊ तुझे.
मे-यही कि वो कैसा लड़का है तू तो उसे अच्छे से जानती है.
महक-ह्म्म्म्म लड़का तो एकदम फट्टू है. फटाफट हां बोल दे उसे.
मे-मिक्कु यार मुझे बहुत डर लग रहा है.
महक-ओह हो तो मेरी स्वीतू डरने भी लगी उस दिन तो बड़ी बोल रही थी कि तुषार के सपने में जाकर ही तुषार का क़तल कर दूँगी.
मे-मिक्कुत छोड़ ना पुरानी बातें यार. ये बता कि क्या वो सही है मेरे लिए.
महक-सही ही नही एकदम पर्फेक्ट है वो तेरे लिए. स्मार्ट है हॅंडसम है हां उसकी बॉडी मेरे आकाश जितनी नही है. लेकिन बंदा एकदम पर्फेक्ट है. वैसे भी तेरी इस क़ातिलाना जवानी को मसल्ने के लिए तुषार या आकाश जैसे मर्द की ही ज़रूरत है.
मे-मिक्कु् प्लीज़ स्टॉप ना...
महक-रीतू यार मैं तो मज़ाक कर रही हूँ.
मे-पता है मुझे अच्छा अब फोन रखती हूँ. मुझे कुछ सोचने दो अब.
महक-अरे सोचना क्या है कल सुबह फाटाक से जाकर उसके सीने से लग जाना.
मे-बस बस अपनी अड्वाइज़ अपने पास ही रख. ओके डार्लिंग मैं रखती हूँ.
महक-ओके बाइ स्वीतू.
मेरी चाइ ऐसे ही हाथ में ठंडी हो चुकी थी. नीचे जाने के लिए मैं घूमी तो देखा आकाश अपनी छत पे खड़ा मुझे घूर रहा था. पहले मेरी पीठ उसकी तरफ थी इसलिए मुझे वो दिखाई नही दिया था. मुझे देखकर उसने गंदी सी स्माइल पास की मगर मैं उसे जीभ निकाल कर ठेंगा दिखाते हुए नीचे उतर गई.

पूरी रात मैं बे-चैन रही और सोचती रही कल क्या होगा. अब मैं फ़ैसला कर चुकी थी कि तुषार को हां बोल दूँगी. लेकिन मेरे हां बोलने के बाद तुषार मेरे साथ क्या करेगा यही सोच कर मैं घबरा रही थी. जैसे तैसे रात ख़तम हुई और एक नया उजाला हुआ. मैं फटाफट उठ कर तैयार हो गई और ब्रेकफास्ट करते वक़्त भैया से कहा कि अब मैं बस से ही स्कूल चली जाया करूँगी.
मेरी बात सुनकर भैया थोड़े हैरान से होते हुए बोले.
हॅरी-क्या हुया स्वीतू मुझसे नाराज़ हो गई हो क्या.
मे-भैया केसी बात करते हो आप. वो तो मेरी फ़्रेंड महक रोज़ बस से आती है उसने मुझे बोला था कि तू मेरे साथ चला कर.
हॅरी-आर यू श्योर ना.
मे-ओफ़कौर्स भैया.
हॅरी-ओके जैसे तेरी मर्ज़ी.
मैने ब्रेकफास्ट किया और अपना बॅग उठा कर बस स्टॉप की तरफ चल पड़ी. आकाश कल की तरह ही वहाँ पे खड़ा था. मुझे देखते ही उसका चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा. मैने एक दफ़ा उसकी तरफ देखा फिर नज़र दूसरी ओर कर ली और जाकर उस से थोड़ी दूरी पे खड़ी हो गई. जैसी मुझे उम्मीद थी वो चुंबक की तरह मेरे पास खिचा आया और बिल्कुल मेरे पास आकर बोला.
आकाश-हाई रीत डार्लिंग कैसी हो.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और दूसरी तरफ नज़र किए खड़ी रही.
आकाश-क्यूँ नखरे कर रही हो डार्लिंग कल बस में तो खूब मज़े ले रही थी और शरमा क्यू रही है आज भी तो तू मज़े लेने ही आई है.
मे-बंद करो अपनी बकवास मुझे महक ने बुलाया था मैं इसलिए आई हूँ.
हालाँकि ये बात सच थी कि मैं दुबारा इसी लिए आज बस में जाना चाहती थी ताकि आकाश आज फिर मेरे साथ छेड़-छाड़ करे. शायद उसकी छेड़-छाड़ में मुझे मज़ा आने लगा था. मैने उसे झूठ बोल दिया था कि में महक के कहने पे बस से जाने के लिए आई हूँ. फिर भी जितना हो सके मैं उस से बचना ही चाहती थी.
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07-03-2018, 10:57 AM,
#8
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
गुलनाज़ दीदी के घर में घुसते ही मैं उन्हे आवाज़ देने लगी. तभी जावेद भैया अपने रूम में से निकले और बोले.
जावेद-ओये रीतू कहाँ रहती है तू बड़े दिनो बाद देखा आज तुम्हे.
मे-मैं तो यही होती हूँ भैया आप ही गायब रहते हो.
जावेद-आज कैसे आना हुआ.
मे-गुलनाज़ दीदी कहाँ है उनसे मिलना है मुझे.
जावेद-गुल अपने रूम में होगी. जा जाकर मिल ले उसे.
मैं गुलनाज़ दीदी के रूम में चली गई. दीदी हमेशा की तरह अपने बेड पे बैठ कर पढ़ाई कर रही थी. मैं उनके पास गई और बेड पे चढ़ते हुए उन्हे बाहों में भरते हुए पीछे की तरफ गिरा दिया. मेरी इस हरकत से झुंझलाते हुए दीदी बोली.
गुल-ओये रीतू तू सीधी तरह से गले नही मिल सकती क्या.
जवाब में मैं सिर्फ़ हँसते हुए दाँत दिखाने लगी.
गुल-अब हँस रही है देख मेरी बुक के उपर कैसे घुटने टिका कर बैठी है अगर फट जाती तो.
मे-तो अब आपकी बुक आपको मुझ से ज़्यादा प्यारी है.
गुल-बच्ची प्यार की बात नही है. अब आप बड़ी हो गई हैं थोड़ा ढंग से पेश आया करो.
मे-मैं तो ऐसी ही रहूंगी.
गुल-तो रहो जैसी रहना है मुझे क्या.
मे-ओह हो मेरी दीदी को गुस्सा भी आता है. वैसे दीदी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो.
सच में गुलनाज़ दीदी आज बहुत खूबसूरत लग रही थी. उन्होने ब्लॅक कलर का सलवार कमीज़ पहना था जो की उनके उपर बहुत फॅब रहा था.
गुल-ओह हो अब हमारी रीतू मक्खन लगाना भी सीख गई.
मे-नही दीदी सच में अगर विश्वाश नही होता तो आप मार्केट का चक्कर लगाकर आओ फिर देखने लड़के कैसे आहें भरेंगे आपको देखकर.
गुल-चुप कर बदमाश बहुत बोलने लगी हो तुम.
मेरी नज़र बार बार गुल दीदी के उरोजो के उपर जा रही थी जो कि काफ़ी बड़े बड़े थे. लगभग 34डी साइज़ था उनका. मैने थोड़ा झीजकते हुए उनके उरोजो की तरफ इशारा करते हुए दीदी से पूछा.
मे-दीदी आपके ये इतने बड़े कैसे हो गये.
मेरी बात सुनकर दीदी एकदम से चौंक गई और मेरा कान पकड़ते हुए बोली.
गुल-किस से सीखी तुमने ये सब बातें लगता है अब तुम्हारे स्कूल में जाना पड़ेगा मुझे.
मे-दीदी मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी.
गुल-ऐसे कैसे पूछ रही थी आप.
मैने अपने उरोजो को पकड़ते हुए कहा.
मे-अब देखो ना दीदी मेरे ये कितने छोटे हैं और आपके कितने बड़े. क्या आपने किसी से खिचवाए हैं दीदी.
गुल-चुप कर पागल कही की. अरे पगली ये नॅचुरल होता है जैसे जैसे आपकी एज बढ़ेगी तो ये भी बढ़ते जाएँगे.
मैने शरारत में कहा.
मे-नही दीदी मुझे तो अभी बड़े करने है ये.
गुल-अरे ओह पागल लड़की तेरे उरोज तेरी एज के हिसाब से बड़े है. जब तू मेरी एज में आएगी तो देखना मेरे उरोजो से भी बड़े हो जाएँगे ये.
मे-वाउ क्या सच में ऐसा होगा दीदी.
गुल-यस चलो अब मुझे पढ़ने दो. वैसे भी अंधेरा हो गया है या तो यही सो जाओ आप वरना घर पे जाओ जल्दी चाची जी फिकर कर रही होंगी.
मे-ओके दीदी. बाइ.
मैं दीदी के घर से बाहर निकली तो बाहर काफ़ी अंधेरा हो चुका था. मैं अपने घर की तरफ चलने लगी. आचनक मुझे पीछे से किसी ने मज़बूती के साथ दबोचा और एक हाथ मेरे मूह पे रखते हुए मुझे एक साइड में खीचते हुए ले गया. गुलनाज़ दीदी के घर के साथ साथ एक गली मुड़ती थी वो मुझे वही पे ले गया और गली में जाकर उसने मुझे दीवार के साथ सटा दिया. मैं जी तोड़ कोशिश कर रही थी उस से छूटने की मगर बहुत मज़बूती से उसने मुझे थाम रखा था. अब मेरा चेहरा दीवार की ओर था वो बिल्कुल मेरे पीछे मेरे साथ सट कर खड़ा था. उसका एक हाथ मेरे मूह पे था तो दूसरा हाथ मेरे पेट पे था जिसकी वजह से वो मुझे मजबूती से पकड़े हुए था. उसने अपना चेहरा मेरे कानो के पास किया और कहा.
'हाई डार्लिंग कब से तुम्हारा वेट कर रहा हूँ'

आवाज़ को सुनते ही मैं पहचान गई कि ये आकाश था. मुझे थोड़ी राहत मिली ये सुन कर कि ये आकाश ही है. लेकिन उसकी हरकत पे अब मुझे गुस्सा आने लगा था. उसने मेरे मूह पे से हाथ हटा लिया और दोनो हाथ मेरे पेट पे फिराने लगा. मैने गुस्से से उसे कहा.
मे-आकाश ये क्या बदतमीज़ी है छोड़ो मुझे.
आकाश-बड़ी मुश्क़िल से हाथ लगी हो अब कैसे छोड़ दूं तुझे.
मे-देखो आकाश हद होती है बेशर्मी की. मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी.
आकाश-मैने कॉन सा तुम्हे उम्मीद रखने को कहा था.
अब उसने मेरी टी-शर्ट को तोड़ा उपर उठा दिया था और उसके हाथ मेरे नंगे पेट पे घूमने लगे थे और उसके होंठ मेरी गर्दन पे घूम रहे थे. मेरे शरीर में उसकी छेड़-छाड़ की वजह से करंट उठने लगा था.
मैने एक दफ़ा फिरसे उसे मिन्नत भरे स्वर में कहा.
मे-आकाश प्लीज़ तुम समझते क्यूँ नही अगर किसी ने देख लिया तो बहुत बदनामी होगी मेरी.

आकाश-कोई नही आएगा इस अंधेरे में डार्लिंग तुम बस मज़े लो.

अब उसका एक हाथ मेरी योनि पे चला गया था और वो उसे लोवर के उपर से मसल्ने लगा था. मैं अब पिघलने लगी थी और हल्की हल्की सिसकारियाँ मेरे मूह से निकल रही थी. उसके होंठ मेरे होंठों तक आना चाहते थे लेकिन मैं अपने होंठों को दूसरी तरफ कर लेती थी. शायद मैं नही चाहती थी कि वो मेरे होंठ चूसे या शायद ये जगह सही नही थी इस सब के लिए.

तभी हमारे कानो में किसी के कदमो की आवाज़ आई. शायद कोई उसी तरफ आ रहा था. आवाज़ को सुनते ही जैसे ही आकाश की पकड़ मुझ पर थोड़ी ढीली हुई तो मैं एकदम से उसकी गिरफ से निकल गई और भागती हुई घर में आ गई.
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07-03-2018, 10:58 AM,
#9
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
आकाश से बचकर में घर में आ गई और घर आकर मुझे थोड़ी राहत मिली. मैने भैया न्ड मम्मी-पापा के साथ मिलकर खाना खाया और अपने रूम में जाकर सो गई.
सुबह हुई तो मैं बिस्तेर से उठ गई. आगे जिस रीत को हिला हिला कर उठाना पड़ता था वो आज खुद ही उठ गई थी. मम्मी मेरे रूम में आई और मुझे उठी हुई देखकर हैरान होती हुई बोली.
मम्मी-आज ये ग़ज़ब कैसे हो गेया. मेरी रीतू आज खुद ही उठ गई.
मैने मम्मी को हग किया और उनके गाल पे किस करती हुई बोली.
मे-आज से रीतू अपने आप ही उठेगी.
मम्मी ने भी जवाब में मेरे फोर्हेड पे किस की और कहा.
मम्मी-बहुत अच्छे मेरी स्वीतू. चल बाहर आकर नाश्ता कर ले.
मे-आप तैयार रखो मैं रेडी होकर आती हूँ.
मम्मी-आज कहाँ जाना है तुझे.
मे-स्कूल जाना है मम्मी और कहाँ.
मम्मी-ओये रीतू आज सनडे है.
मे-क्या...?
मम्मी-और नही तो क्या तू कैसे भूल गई सनडे को.
मेरे दिमाग़ में आया अरे आज तो सचमुच सनडे है.
मे-हां मम्मी आज तो सनडे ही है.
फिर मैं और मम्मी ड्रॉयिंग रूम में आकर बैठ गये और चाइ पीने लगे. हॅरी भैया भी हमारे पास आकर बैठ गये और मम्मी ने उनको भी चाइ दी. फिर मुझे कुछ याद आया और मैने भैया से कहा.
मे-भैया आज मुझे मार्केट जाना है.
हॅरी-क्या काम है तुझे.
मे-भैया मुझे बुक्स लेनी है.
हॅरी-तो जाकर ले आ.
मे-नही मैं आपके साथ जाउन्गी.
हॅरी-मेरे पास टाइम नही है.
मे-आज सनडे तो है भैया प्लेज चलो ना.
मम्मी-हॅरी बेटा जाओ बच्ची के साथ.
हॅरी-पर मम्मी....
मम्मी-पर... वर कुछ नही तू रीतू को लेकर जाएगा तो बस लेकर जाएगा.
हॅरी-ओके जैसा आप कहें.
और भैया उठ कर अपने रूम में चले गये. मैने देखा जाते वक़्त भैया का चेहरा थोड़ा मुरझाया हुया था. मैने अपनी चाइ ख़तम की और उठ कर भैया के रूम की ओर चल पड़ी. क्यूंकी भैया को मैं उदास नही देख पाती थी. उनके रूम का दरवाज़ा खुला ही था. मैं अंदर गई तो देखा भैया फोन पे किसी के साथ बात कर रहे थे. उनकी पीठ मेरी तरफ थी.
मैं चुपके के उनके पास गई और बातें सुन ने लगी.
हॅरी-करू यार तू समझती क्यूँ नही मुझे अपनी रीतू के साथ मार्केट जाना है आज.
इतना बोल कर भैया चुप हो गये शायद दूसरी तरफ से कोई कुछ बोल रहा था.
हॅरी-नही करू यार आज नही आ पाउन्गा समझा कर तू बच्ची थोड़े ना है.
फिर भैया चुप हो गये और फिर एकदम से बोले.
हॅरी-अरे करू करू सुन तो......
और फोन कट गया या शायद करू मेडम ने काट दिया.
फोन कट होते ही भैया मेरी तरफ घूमे और मुझे देखते ही उनके होश उड़ गये.
हॅरी-अरे रीतू...तुम यहाँ कब आई.
मैने अपनी कमर पे हाथ रखते हुए भैया को घूरते हुए पूछा.
मे-भैया ये करू कॉन है.
भैया अंजान बनते हुए बोले.
हॅरी-क.क.क.कौन करू....मैं किसी क.क.करू को नही जानता.
मे-ज़्यादा होशियार मत बनो सीधे-2 बताओ वरना मैं मम्मी को बताने चली कि भैया किसी करू से बात कर रहे थे.
और मैं वहाँ से चलने को हुई तो भैया ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने बेड पे बिठा लिया और कहा.
हॅरी-नही नही रीतू मम्मी को कुछ मत बताना प्लीज़ यार.
मे-तो मुझे बताओ माजरा क्या है.
हॅरी-रीत यार करुणा मेरी गर्ल-फ़्रेंड है.
मे-ओह वाउ यानी कि मेरी भाभी.
हॅरी-हां हां तेरी भाभी.
मे-तो क्या बोल रही थी मेरी भाभी.
हॅरी-यार हमने आज मिलने का प्रोग्राम बनाया था मगर आज मुझे तुम्हारे साथ जाना है जब मैने ये सब उसे बताया तो वो नाराज़ हो गई और फोन काट दिया.
मे-ऐसा किया उन्होने. ज़रा दुबारा लगाओ फोन मैं बात करती हूँ.
हॅरी-नही नही रहने दे रीत अब.
मे-आप लगाते हो या जाउ मम्मी के पास.
हॅरी-रुक रुक लगाता हूँ मेरी माँ.
भैया ने भाभी का नंबर. मिलाया और मुझे फोन दे दिया. उधर से भाभी ने फोन उठाया और कहा.
करू-हां अब क्या है.
मे-हेलो हेलो इतना गुस्सा और वो भी रीत के सामने.
भाभी हड़बड़ाते हुए.
करू-सॉरी सॉरी रीत मुझे लगा हॅरी का फोन होगा.
मे-कोई बात नही. नमस्ते भाभी.
करू-नमस्ते रीतू. कैसी हो तुम.
मे-एकदम पर्फेक्ट आप बताओ मेरे भैया पे गुस्से क्यूँ हो रही थी आप.
करू-नही नही रीत वो तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रही थी मैं.
मे-अच्छा अब ध्यान से सुनो आप. मैं और भैया मार्केट आ रहे हैं और ठीक 10 बजे पे आप भी मार्केट पहुँच जाना क्यूंकी मुझे अपनी भाभी को देखना है.
करू-यस ये हुई ना बात मेरा भी चिलकोजू से मिलने का बहुत मन कर रहा था और आज तो अपनी ननद से भी मिल लूँगी मैं.
मे-ये चिलकोज़ू कॉन है.
करू-हॅरी और कॉन. मैं प्यार से उसे चिलकोज़ू ही बुलाती हूँ.
मे-अरे वाह. ओके तो मैं और चिलकोज़ू आ रहे हैं आपसे मिलने.
करू-ओके रीतू.
भैया हमारी बातें सुन कर मुस्कुरा रहे थे.
मैने उन्हे फोन देते हुए कहा.
मे-चिलकोज़ू जी अब जल्दी से रेडी हो जाओ.
हॅरी-रीतू तू भी अब करू की बोली बोलने लगी.
मे-भाभी चिलकोज़ू बुलाती हैं तो कोई प्रॉब्लम नही मैं बुलाती हूँ तो जनाब को गुस्सा आ रहा है.
अब जल्दी से रेडी होकर बाहर आओ.
10 बजे मैं और भैया बाइक पे मार्केट के लिए निकल पड़े. मैने आज वाइट कलर का टाइट पाजामी सूट पहना था. जब मैं और भैया घर से निकले तो आकाश अपने दोस्तो के साथ वहीं खड़ा था. जब हम उसके पास से गुज़रे तो मैने जान बुझ कर अपनी एक टाँग उठाकर दूसरी के उपर रख ली ताकि अपने टाइट पाजामी में क़ैद गोरी जाँघ आकाश को दिखाकर उसे जला सकूँ.
Reply
07-03-2018, 10:58 AM,
#10
RE: Sex Story मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त
मैं और भैया मार्केट पहुँच चुके थे और मैने एक बुक शॉप से जो बुक्स लेनी थी वो भी ले ली थी. अब मुझे भूख लगी तो मैने भैया को कुछ खिलाने के लिए बोला. भैया ने बाइक स्टार्ट की मुझे पीछे बिठाया और हम पास में ही एक बहुत ही अच्छे रेस्टौरेंट में जाकर बैठ गये. हमने जूस ऑर्डर किया और करूँ भाभी का वेट करने लगे. भैया ने फोन करके भाभी को उसी रेस्टौरेंट पे आने को बोला था. हमने जूस ख़तम ही किया था कि एक बहुत ही सुंदर लड़की अपनी स्कॉटी स्टॅंड पे लगाकर हमारी तरफ आने लगी. जैसे ही वो हमारे पास आई तो भैया ने उठ कर उसे हग किया और कहा.
हॅरी-रीतू ये है तुम्हारी भाभी करुणा.
मैने भी उठ कर भाभी को गले लगाया और उन्हे बैठने के लिए कहा. वो हमारे साथ ही बैठ गई और भैया ने भाभी से पूछा.
हॅरी-कुछ पियोगी करू.
करू-यस तुम्हारा खून.
भाभी की बात सुनते ही मुझे हँसी आ गई.
हॅरी-अब क्या हुआ यार.
करू-मुझे ये बताओ तुमने मना क्यूँ किया था मिलने से.
हॅरी-करू यार अब छोड़ भी पुरानी बातें देख रीतू तुझसे मिलने आई है.
मैने देखा भैया मेरा नाम लेकर डाँट से बचना चाहते थे.
मे-नो नो भाभी हम बाद में मिलेंगे पहला आप भैया का खून पियो जी भर के.
मेरी इस बात से भाभी और भैया दोनो मुस्कुराने लगे और भाभी हँसती हुई बोली.
करू-हॅरी ये बिल्कुल वैसी ही है जैसा तुमने बताया था. एकदम क्यूट सी गुड़िया.
अब भाभी को क्या पता था कि उनकी इस क्यूट सी गुड़िया ने कैसे अपने जलवे दिखाकर आकाश के होश उड़ा रखे हैं.
हॅरी-हां करू ये हमारे घर में सबसे प्यारी है शादी के बाद तुझे भी इसका पूरा ख़याल रखना पड़ेगा.
करू गुस्से से भैया को देखते हुए बोली.
करू-शादी तो तभी होगी जब तुम बात आगे बढ़ाओगे. एकदम घोन्चु हो तुम.
मैं 'घोन्चु' वर्ड सुनते ही फिरसे हँसने लगी और धीरे से कहा.
मे-भैया का दूसरा नाम 'घोन्चु'
भैया को मेरी कही ये बात सुन गई और वो बोले.
हॅरी-रीतू तू भी इसके साथ मिल गई.
करू-मेरी ननद है वो मेरा ही साथ देगी.
हॅरी-तुम्हारी ननद बाद में है पहले मेरी बेहन है वो समझी.
करू-अरे तो जल्दी से अपने पेरेंट्स से बात करो ना शादी की ताकि ये रीतू मेरी ननद बने और में इसे जी भर के प्यार करू.
भाभी की बात सुनते ही मेरे दिमाग़ में घंटी बजी 'कहीं करू भाभी लेज़्बीयन तो नही'
हॅरी-करू यार मुझे समझ नही आ रहा मैं कहाँ से बात शुरू करू मम्मी पापा के साथ.
करू-मुझे नही पता मैने भी तो अपने मम्मी पापा से बात की है अब तुम क्यूँ नही कर रहे हो.
अब मैने उन्हे रोकते हुए कहा.
मे-अटेंशन प्लीज़. इस मामले में मैं आपकी हेल्प कर सकती हूँ.
मेरे मूह से ये बात सुनते ही वो दोनो अपनी कुर्सी' उठाकर बिल्कुल मेरे पास आ गये और भाभी उत्सुकता के साथ बोली.
करू- वो कैसे रीत. वैसे मुझे पता है मेरी स्वीतू ही ये काम कर सकती है.
हॅरी-हां हां स्वीतू बता ना कैसे.
मे-आप लोग शादी की टेंशन छोड़ दो.
मेरी बात सुनते ही भाभी बोली.
करू-ये लो भाई घोन्चु और बेहन महा घोन्चु. अरे पागल अगर टेंशन ही छोड़ दी तो शादी कैसे होगी.
मे-ओह हो भाभी पूरी बात तो सुनो. मेरा मतलब था कि शादी की बात मैं करूँगी घर में आप टेंशन मत लो मगर मेरी भी एक शर्त है.
करू-अरे तू बोल ना मुझे सारी शर्तें मंज़ूर है.
मे-देखो देखो कितनी जल्दी है शादी की.
करू-जब तेरे सामने ऐसी सिचुयेशन आएगी ना तब पूछूंगी तुझसे.
मे-ओक ओके अब शर्त सुनो.
'मुझे एक मोबाइल चाहिए वो भी महंगा वाला'
करू-अरे बस इतनी सी बात. पक्का रहा तेरी भाभी तुझे मोबाइल दिलाएगी.
मे-ओके तो फिर कुछ दिन सबर करो. जल्दी ही गुड न्यूज़ मिलेगी आपको.
करू भाभी ने मेरी गालों पे किस करते हुए कहा.
करू-तू सचमुच कमाल की है रीतू.
हॅरी-रीतू यार ध्यान से बात करना घर पे.
मे-भैया आप जानते तो हो मुझे. वैसे भी भाभी अब मुझे पसंद आ गई हैं अब तो ये ही मेरी भाभी बनेगी.
करू-ओके तो चलो अब सबसे पहले रीतू को मैं फोन दिलाउन्गी.
हॅरी-छोड़ ना करू मैं दिला दूँगा इसे.
करू-ऐसे कैसे अपनी ननद को मोबाइल के रूप में पहला गिफ्ट मैं ही दूँगी.
फिर हम एक मोबाइल की शॉप में गये और मैने काफ़ी मोबाइल्स देखे और आख़िर में नोकिया न97 मुझे पसंद आ गया और उसके साथ टाटा डोकोमो का कनेक्षन मैने ले लिया. करू भाभी ने बिल पे किया और हम वहाँ से निकलकर फिरसे रेस्टौरेंट में आ गये. बहुत भूख लग रही थी हमने वहाँ से लंच किया और फिर भाभी और मैने मोबाइल. नंबर एक्सचेंज किए और मैं और भैया भाभी को बाइ बोल कर घर की तरफ निकल पड़े.
रास्ते में भैया ने मुझसे पूछा.
हॅरी-कैसी लगी तुम्हारी भाभी.
मे-बहुत अच्छी भैया अब तो वो ही मेरी भाभी बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए.
हॅरी-सम्भल कर बात करना मम्मी पापा से.
मे-फिकर नोट भैया मम्मी पापा को तो मैं एक चुटकी में मना लूँगी.
हॅरी-काश ऐसा ही हो.
ऐसे ही बातें करते करते हम घर पहुँच गये. मैने अपना नया मोबाइल. मम्मी को दिखाया तो वो हैरान होते हुए बोली.
मम्मी-ये किसने दिलवाया.
मे-भैया ने अपनी पॉकेट मनी में से.
मैने झूठ बोल दिया.
तभी पापा वहाँ पे आए और मम्मी ने उन्हे गुस्से से कहा.
मम्मी-देखो हॅरी ने इसे मोबाइल. दिला दिया. क्या ज़रूरत थी इसकी.
पापा-अरे कोई बात नही एक ना एक दिन तो इसे मोबाइल लेना ही था.
मैने खुश होकर मोबाइल. उठाया और अपने रूम में चली गई.
मैं अपने रूम में देर रात तक न्यू मोबाइल से छेड़ चाड करती रही. कभी किसी फंक्षन को खोल देती तो किसी को बंद कर देती. आख़िरकार 12 वजे के करीब मुझे नींद आई और मैं घोड़े बीच कर सो गई. सुबह जल्दी उठी और जल्दी जल्दी नहा धो कर रेडी हो गई. नाश्ता वगेरा करने के बाद मैने अपना मोबाइल उठा कर बॅग में रखा. मोबाइल बॅग में रखते हुए मुझे भैया ने देख लिया और कहा.
हॅरी-ओये रीतू मोबाइल का स्कूल में क्या काम ला पकड़ा मुझे घर आकर ले लेना.
मे-भैया प्लीज़ आज लेजाने दो मुझे अपने फ्रेंड्स को दिखाना है प्लीज़.
हॅरी-ओके मगर सिर्फ़ आज कल इसे घर पे ही छोड़ के जाना.
मैं खुश होते हुए
मे-थॅंक यू भैया. यू आर बेस्ट इन वर्ल्ड.
हॅरी-ठीक है ठीक है जा अब लेट हो जाएगी.
मैने अपना बॅग उठाया और बस स्टॉप की तरफ चल पड़ी.
वहाँ रोज़ की तरह मजनू पहले से ही मेरे इंतेज़ार में था. मैं आकाश से थोड़ी दूरी पे जाकर खड़ी हो गई और वो आदत के मुताबिक मेरे पास आ गया और बोला.
आकाश-हाई रीत डार्लिंग बड़ी खुश दिखाई दे रही हो बात क्या है.
मे-तुम्हे इस से मतलब.
आकाश-राम राम इतना गुस्सा. वैसे उस रात गली में मज़ा आया ना.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया.
आकाश-वैसे कल कहाँ गई थी हॅरी के साथ निखर कर माशा अल्लाह वाइट चुरिदार में कयामत लग रही थी तुम.
आकाश के मूह से तारीफ सुन कर मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई.
मुझे कुछ ना बोलते देख वो झुझलाते हुए बोला.
आकाश-यार इतना तो मैं जानता हू कि तू मेरी छेड़-छाड़ में मज़ा तो खूब लेती है मगर ये नखरा क्यू दिखा रही हो.
मैने उसे घूरते हुए देखा और कहा.
मे-ओये मिस्टर. एक बात ध्यान से सुन लो मैं अब तुषार की गर्ल फ़्रेंड हूँ. मुझे अब दूर रहा करो समझे.
आकाश-मुझे पता है तुषार ने तुझे पटा लिया है.
मैने हैरान होते हुए पूछा.
मे-तुम्हे कैसे पता.
आकाश-मेरा सबसे अच्छा दोस्त है वो मुझे सब पता है कि कैसे उसके हाथ के उपर तूने अपनी गान्ड रखकर मज़े लिए थे उसके साथ.
उसकी बात सुनकर मैने गुस्से से कहा.
मे-शट अप एडियट.....बिल्कुल भी तमीज़ नही तुम्हारे अंदर.
मैने दूसरी तरफ चेहरा घुमा कर खड़ी हो गई. तभी मुझे बस आती हुई दिखाई दी. मैं जल्दी से बस में चढ़ गई. आकाश आज मेरे नज़दीक ही खड़ा था बस एक और लड़का हमारे बीच खड़ा था. मैने देखा वो लड़का मेरे साथ चिपकने की कोशिश कर रहा था. मैने आकाश की तरफ देखा तो वो भी इस बात को नोट कर रहा था. आचनक मेरे मन में शरारत सूझी और मैं खुद ही थोड़ा पीछे को हट कर उस लड़के से सट कर खड़ी हो गई. मेरे ऐसा करने से उसकी हिम्मत बढ़ गई और उसने एक हाथ अपने पेनिस पे लेजा कर उसको ठीक मेरे नितुंबों के बीच सेट कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. मैने आकाश को देखो तो वो हमारी तरफ ही देख रहा था और उसके चेहरे पे गुस्सा आसानी से देखा जा सकता था. मुझे आकाश को इस हालत में देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था. उस लड़के का पेनिस मुझे बिल्कुल अपने नितंबों के बीच महसूस हो रहा था. मैं आकाश को और जलाने के लिए आकाश को देखकर मुस्कुराती हुई अपने नितंब उसके पेनिस पे इधर उधर करने लगी थी. आकाश की तो आँखें गुस्से में लाल हो चुकी थी. अब उस लड़के के हाथ मेरे दोनो नितंबों के उपर फिरने लगे थे और वो उन्हे ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा था. मेरा शरीर भी अब गरम होने लगा था. मैं लगातार अपने नितंब उसके पेनिस पे इधर उधर कर रही थी. आचनक उसने बहुत ज़ोर से मेरे नितंबों के उपर के मुलायम मास को अपनी हथेलियों में जाकड़ लिया. मेरे पूरे शरीर में मस्ती और दर्द की मिलीजुली लहर दौड़ गई और मेरे मूह से हल्की चीख भी निकल गई. फिर उसने मेरे नितंबों को छोड़ दिया मैने पीछे देखा तो उसने अपने पेनिस वाली जगह को ज़ोर से पकड़ रखा था शायद उसका कम पॅंट में ही निकल गया था. मैने आकाश की तरफ देखा तो वो मुझे ही घूर रहा था. मैने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए एक आँख दबा दी. नेक्स्ट स्टॉप हमारा स्कूल ही था जैसे ही बस रुकी तो मैं जल्दी से नीचे उतर गई और महक आगे बैठी थी इसलिए वो पहले ही नीचे उतर गई थी. मैं और महक क्लास की तरफ चल पड़े. क्लास में जाकर मैने महक को अपना न्यू मोबाइल दिखाया जिसे देखकर वो बहुत खुश हुई. हम अपने मोबाइल. नंबर. एक्सचेंज कर रहे थे तभी आकाश अंदर आया और मेरे हाथ में मोबाइल देखकर बोला.
आकाश-ये किसका फोन है.
महक-आकाश रीत ने नया लिया है.
आकाश-वाउ तो अब पार्टी तो बनती है.
मे-बिल्कुल बोलो क्या खाना है.
आकाश अपने होंठों पे जीभ फिराते हुए.
आकाश-कुछ मीठा हो जाए.
महक-पार्टी की बात बाद में करना पहले रीत अपना नंबर. तो लिखवा मुझे.
मैं महक को नंबर. लिखाने लगी तो आकाश ने भी मुझसे नंबर. ले लिया. उसने ये कहा कि उसे नोट्स वगेरा पूछने होंगे तो वो पूछ लेगा. महक के सामने मुझे अपना नंबर. उसे देना ही पड़ा.
फिर मेरी आँखें तुषार को क्लास में ढूँडने लगी. वो वहाँ दिखाई नही दिया. मुझे लगा कि शायद वो लाइब्ररी में ही होगा. मैने लाइब्ररी में जाकर देखा तो वो वही बैठा था. मैं उसके पास गई और उसे अपना न्यू फोन दिखाया तो वो भी बहुत खुश हुआ और उसने भी मेरा नंबर. ले लिया. लाइब्ररी में 3-4 रॅक बने हुए थे जिनमे बुक्स रखी गई थी. तुषार ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे रॅक्स के बीच जो खाली जगह होती है वहाँ ले गया.,
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