Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने चोद दिया
05-02-2019, 12:26 PM,
#1
Star  Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने चोद दिया
लेखिका:-मधु जैसवाल

मेरा नाम मधु है। मैं 29 साल की शादीशुदा हॉट, सेक्सी महिला हूँ, एकदम गोरी चिट्टी… अगर अंधेरे कमरे में भी चली जाऊँ तो रोशनी हो जाए।
मेरी फिगर 36-28-34 है जो किसी को भी घायल करने के लिए काफी है। आप लोग मेरी फिगर से समझ गये होंगे कि मैं कितनी बड़ी चुदक्कड़ हूँ।
मेरी यह फिगर आठ मर्दों की अथक मेहनत का परिणाम है।

मेरा एक तीन साल का बेटा है लेकिन मुझे आज तक यह पता नहीं चला कि मेरे बेटे का बाप इन आठों में से कौन है या फिर आठों ही मेरे बेटे का बाप हैं।

कहानी शुरू करने से पहले आप सभी पाठको से विनती है कि सारे पाठक मेरी टाईट चूची से दो दो बूंद दूध पी लें क्योंकि कहा जाता है कुछ करने से पहले मुँह मीठा करना चाहिए और लोग कहते हैं कि मेरा दूध काफी मीठा है। और हाँ, कोई भी दो बूंद से ज्यादा ना पिये, अगर सारा दूध आप लोग पी लेंगे तो मेरा बेटा भूखा रह जायेगा।

अब कहानी पर आती हूँ:


यह कहानी मेरी शादी से पहले की है, मेरा शरीर बचपन से ही भरा पूरा है। जब मैं सकूल में पढ़ती थी, तब मैं जवानी के दहलीज पर पहला कदम रखा और लोगों की गंदी नजर मेरी चूची और गांड पर पड़ने लगी थी। जब मैं दसवीं में पढ़ती थी, तभी से स्कूल के सारे लड़के मुझ पर मरते थे, लड़के ही नहीं, सारे टीचर भी मुझ पर फिदा थे।

मेरा मैथ शुरु से ही खराब था, इसका पूरा फायदा मैथ के टीचर उठाते थे, वे जानबूझ कर मेरे गालों को ऐंठ देते थे। जब भी वह मुझे अकेली देखते, मेरी गांड या चूची दबा देते!

मैं जैसे तैसे 12वीं पास करके कालेज गई।

तब तक मैं अच्छी खासी जवान हो गई थी, जिस गली से निकलती, लोग मुझे घूरते, आह भरते, गंदी-गंदी कमेंट देते।
मुझे अब यह अच्छी लगने लगी थी इसलिए मैं भी जानबूझ कर छोटे और टाईट कपड़े पहनने लगी थी।

मैं अपने कालेज की मॉडल कहलाती थी, मैं कालेज पढ़ने नहीं, गंदे कमेंट सुनने जाती थी। गंदे कामेंट सुन सुन कर मेरे अंदर की अन्तर्वासना जागने लगी थी, मैं अपने आप को जैसे तैसे संभाल पाती थी।

कालेज के कई लड़के मुझे चोदना चाहते थे लेकिन मैं किसी को भाव नहीं देती थी या यूँ कहें कि दिल को कोई भाया नहीं लेकिन एक लड़का था जिसका नाम संतोष था जिससे चुदना चाहती थी और वह भी मुझे चोदना चाहता था।
लेकिन हमारी बात भी ठीक से नहीं हो पाती थी, हमेशा एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते।

ऐसे करते-करते एक साल निकल गया।

एक दिन मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर से काल आई, जब मैंने फोन उठाया तो सामने से जबाब आया- हाय, मधु मैं संतोष!
नाम सुनते ही मैं चौक गई कि इसे मेरा नबंर कहाँ से मिला।
फिर उसने बताया कि मेरी सहेली से लिया।

धीरे-धीरे हमारी बात होने लगी, पूरा दिन हम फोन पर ही लगे रहते थे, अब कालेज में भी हम साथ घूमते रहते, हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई, हमें पता ही नहीं लगा, धीरे धीरे हम करीब आते गए।

हम कहीं भी शुरू हो जाते थे, चाहे वह कालेज हो या पार्क, बस हो या सुनसान रास्ता, बस मौके की तलाश में रहते थे, जहाँ मौका मिलता, मेरा बॉयफ़्रेंड चूमा चाटी, चूची दबाना, गांड दबाना, चूत मसलना शुरु कर देता पर अभी तक मैं चुदी नहीं थी। संतोष बहुत कहता था चूत चुदवाने के लिए… पर मैं नहीं मानती थी।

एक दिन मेरे पड़ोस में शादी थी, घर से दूर एक फार्म हाउस में थी, शादी में मम्मी, पापा और मैं जाने वाले थे पर अचानक पापा की तबीयत खराब हो गई।
तब मम्मी बोली- बेटा, तुम अकेली चली जाओ, मैं तुम्हारे पापा के पास रूकती हूँ!
मैं बोली- ठीक है।
और तैयार होने चली गई।

मैं एक छोटी सी ब्रा पेंटी और जींस टॉप पहन कर चली गई। वहाँ जैसे ही पहुँची, सारे दोस्त मुझे दुल्हन के कमरे में ले गये।
सब हँसी मजाक कर रहे थे, तभी एक दोस्त बोली- यार तुम यह क्या पहन कर आई हो?
मैं बोली- कितनी अच्छी तो है।

तब सब कहने लगी- कुछ हॉट पहन कर आती!
तभी एक सहेली ने छोटी सी स्कर्ट और टॉप लेकर आई और मेरी चूची ऐंठते हुई बोली- रानी, तू यह पहन ले।
मैं बोली- पागल हो गई हो क्या? यह पहनने से अच्छा तो मैं नंगी ही रहूँ।
सब बोली- यह आइडिया भी बुरा नहीं है।
और सब हँसने लगी।

जब बारात आने वाली थी तो सारी लड़कियों ने मिल कर मुझे जबरन मिनी स्कर्ट, टॉप और हाई हिल की सैंडल पहना दी, स्कर्ट इतनी काफी छोटी थी जिसकी वजह से काफी टाइट थी और इतनी छोटी थी कि अगर आगे कि ओर झुक गई तो मेरी गांड नंगी हो जाए और टॉप तो मानो किसी बच्ची का हो, लग रहा था कि चूचियाँ टॉप फाड़ कर बाहर आ जायेंगी।

कुल मिला कर कहूँ तो इन कपड़ो में पटाका लग रही थी।

पार्टी में कहीं भी जाती, सब मुझे वहाँ खा जाने वाली नजरों से देख रहे थे, ऐसा लग रहा था कि सब मिलकर मेरा जबर चोदन ना कर दें।
मैं सबकी नजरों से बचते बचाते एक साईड हो गई।

तभी एक पड़ोस के अंकल मेरे पास आये और बोले- बेटा कोई परेशानी है?
मैं बोली- नहीं अंकल!
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05-02-2019, 12:26 PM,
#2
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
फिर वे मेरे कान के पास आकर बोले- आज काँफी हॉट लग रही हो!

मैं यह बात सुनकर अवाक रह गई कि ये मेरे पापा के दोस्त हैं और ऐसी बातें कर रहे हैं।
अंकल जाते-जाते मेरी गांड दबा कर चले गये।

अंकल के गांड दबाने से मैं गर्म सी हो गई थी।

तभी बारात आ गई, सब डांस कर रहे थे, मुझसे भी जबरन डांस करवाने लगे।
बारात के कुछ लड़के मेरे साथ चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे या यूँ कहें कि भीड़ का फायदा उठा रहे थे।

मुझे भी काफी मजा आ रहा था, कोई चूची दबा देता तो कोई गांड!
एक ने तो हद कर दी, मेरी टॉप में हाथ डालकर चूचियाँ मसल दी। मैंने सोचा कि अगर मैं यहाँ रुकी तो ये लोग छोड़ेंगे नहीं!
मैं जैसे तैसे वहाँ से निकली।

मैं इतनी गर्म हो गई थी कि मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। पार्टी में जिसे भी मौका मिलता, चूची या गांड दबाते चलता।
मैंने सोचा कि खाना खाकर सो जाती हूँ, नहीं तो आज बच नहीं पाऊँगी।

मैं खाना खाने जैसे ही गई तो मेरी नजर संतोष पर पड़ी, उसने भी मुझे देखा और खुशी से भागते हुए मेरे पास आया और बोला- तुम भी आई हो!
और मुझे गले से लगा कर एक चुम्मी ली और बोला- यार, आज तो क्यामत ढा रही हो!
मैं बोली- अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या?

संतोष बोला- बम लग रही हो!
फिर संतोष बोला- चलो, घूम कर आते हैं।
मैं बोली- इतनी रात को कहाँ जायेंगे?
वह बोला- बाहर घूम कर आते हैं!

मैं समझ गई कि यह क्या चाहता है, मैं बोली- ठीक है, खाना खाकर चलते हैं।
वह बोला- आकर खा लेंगे!
और हम बाहर निकल गए।

थोड़ी दूर चलने पर एकदम सुनसान जगह मिलते ही मुझ पर टूट पड़ा, मेरे गालों कोम होंठों को काटने लगा।
मैं बोली- सब्र रखो, काट क्यों रहे हो?
वह चूची मसलते हुए बोला- सब्र अब नहीं होता जान!

फिर उसने मेरा टॉप उतार दिया।
मैं बोली- यह क्या कर रहे हो?
वह मेरी बात को अनसुना करते हुए मेरी चूची पीने लगा और एक हाथ से चूत में उंगली करने लगा।

चूत पर हाथ पड़ते ही मैं मदहोश हो गई, ऐसा लगा कि किसी ने जलते तवे पर पानी छिड़क दिया हो।
हम दोनों एक दूसरे में खो चुके थे, मेरी चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया।

फिर मैं थोड़ी सी संभली मगर संतोष आज पागल हो गया था। जैसे तैसे उसे होश में लाई… मगर वह मुझे चोदना चाहता था।
आज मैं भी मूड में थी लेकिन उसे तड़पा रही थी।
वह गिड़गिड़ाने लगा, बोला- प्लीज यार, आज चोदने दो, मौका भी है और जगह भी!

उसके बहुत कहने पर मान गई, मैं बोली- चोदोगे कहाँ?
वह बोला- जान तुम टेंशन मत लो, आज हम सुहागरात मनायेंगे।
मैं बोली- कुछ समझी नहीं कि तुम क्या कह रहे हो?
वह बोला- यार बस तुम पार्टी के पीछे वाले कमरे के पास पहुँचो, सब समझ जाओगी।

फिर हम फार्म हाउस पहुँचते ही अलग हो गये, मैं सबसे बचते बचते उस रूम के पास जाकर खड़ी हो गई।
तभी किसी ने मुझे पीछे से जकड़ लिया, मैं समझ गई कि संतोष है।
वह मेरी चूचियाँ मसलने लगा, मेरी गर्दन, गाल चूमने लगा।

मैं भी मदहोश होने लगी, मैं बोली- सब कुछ यहीं करोगे क्या?
तब तक एक हाथ से चूत मसलने लगा।
मैं बोली- छोड़ो भी अब!
बोल कर अपने आप को छुड़ाया।

जैसे ही मैं पीछे मुड़ी तो देखते ही मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई क्योंकि वह संतोष नहीं था।
वो अंकल थे।

मैं तो शर्म से एकदम लाल हो गई थी, मैं गुस्से में बोली- अंकल यह क्या कर रहे थे? आपको शर्म नहीं आती? मैं आपकी बेटी जैसी हूँ। अंकल बेर्शमी से बोले- जो तुम चाह रही थी मेरी जान!
और बोले- बेटी जैसी हुई तो क्या हुआ, हो तो एकदम हॉट माल!

मैं गुस्सा होकर जाने लगी, तब अंकल बोले- उस लड़के के साथ तो बीच सड़क पर मजे कर रही थी और मेरे छूने पर इतना गुस्सा?
मैं समझ गई कि अंकल ने सब कुछ देख लिया है।

फिर मैं थोड़ी सी ठंडी हुई और बोली- आप क्या बोल रहे हो, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा?
अंकल बोले- ठीक हैं रहने दो मैं तुम्हारे पापा को समझा दूँगा।

यह सुनते ही मैं डर गई और बोली- प्लीज अंकल, पापा को कुछ मत बताना।
इस पर अंकल बोले- ठीक है, नहीं बोलूँगा पर तुम्हें मेरी एक बात माननी पड़ेगी?
मैं बोली- ठीक है, पर करना क्या होगा?

अंकल बोले- जो तुम उस लड़के के साथ करने वाली थी वह अब मेरे साथ कर लो!
मैं बोली- आप क्या बोल रहे हो, मैं समझी नहीं?
अकंल बेर्शमी से बोले- मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।
मैं बोली- अंकल, आप यह क्या बोल रहे हो? मैं यह नहीं करवा सकती!
यह बोल कर मैं जाने लगी।

तब अंकल बोले- ठीक है, जाओ… मैं तुम्हारे पापा से बात कर लूँगा।
मैं यह सुनकर फिर से डर गई और बोली- प्लीज अंकल, ऐसा मत करो!
वे बोले- कभी नहीं बोलूँगा, बस एक बार मुझे अपनी चूत चोदने दे, इसके बाद मैं कभी तेरे रास्ते मैं नहीं आऊँगा, बस एक बार मुझे चोदने दे।

मैं ना चाहते हुए भी मान गई और बोली- अंकल, मुझे यह ठीक नहीं लग रहा है।
अंकल बोले- थोड़ी देर में सब ठीक लगने लगेगा!
और मेरी गांड पर चपत लगा कर हँसने लगे।
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05-02-2019, 12:26 PM,
#3
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है। चूत चुदवाने किसी से आई थी और जा किसी और के साथ रही थी।
अंकल बोले- मेरे साथ चलो!
मैं बोली- कहाँ?
वे बोले- बस साथ आओ!

मैं अंकल के पीछे पीछे चल दी, हम एक कमरे के आगे जाकर खड़े हो गये।
अंकल ने पहले चारों तरफ देखा कि कोई आ तो नहीं रहा… फिर अंकल ने जेब से चाबी निकाली और अंदर गये और मुझे झट से अंदर खींचकर दरवाजा बन्द कर लिया।

जैसे ही मैं उस रूम में गई, देखकर दंग रह गई, यह तो दूल्हा दुल्हन के सुहागरात मनाने वाला कमरा था, एकदम मनमोहक सजावट थी।
मैं बोली- अंकल, यह तो दूल्हा-दुल्हन के लिए है।
अंकल मुझे चूमते हुए बोले- हम भी तो वही काम करेगे जान!

अंकल मुझे खड़े खड़े बेतहाशा चूमने लगे, चूची दबाने लगे, चूत सहलाने लगे।
मैं भी अपनी शर्म छोड़कर अंकल का साथ देने लगी, सोचा कि जब चुदना ही है तो शर्म कैसी! मुझे गर्म तो मेरे यार ने ही कर दिया था। मुझसे अब बर्दाशत नहीं हो रहा था और चूत में एक अलग सी कुलबुलाहट थी। बस मन हो रहा था कि कोई ढंग से मेरी चूत चुदाई कर दे।

लेकिन अंकल को कुछ बोल भी नहीं सकती थी और अंकल इससे आगे बढ़ ही नहीं रहे थे, मैं अंदर ही अंदर वासना से जल रही थी लेकिन अंकल अभी भी मुझे गर्माने में ही लगे थे।
आखिरकार मुझे बोलना ही पड़ा, मैं बोली- अंकल जब यही सब और ऐसे ही करना था तो बाहर ही कर लेते, इस कमरे में आने की जरूरत क्या थी?

अंकल समझ गये कि मैं क्या चाहती हूँ, वे बोले- नहीं मेरी रानी, आज मैं तुम्हारे साथ इस सुहाग सेज पर सुहागरात मनाऊँगा।
मैं भी अब अंकल के साथ खुल सी गई थी, मैं बोली- अगर हम यहाँ सुहागरात मनायेंगे तो दूल्हा-दुल्हन कहाँ जायेंगे?
तब अंकल बोले- क्या बात है मेरी जान, अब तुम्हें चोदने में मजा आयेगा।

यह बोलकर अंकल ने मुझे गोद में उठाया और बोले- चलो जल्दी से हम सुहागरात मनाते हैं। हमारे बाद यह रूम किसी और के लिए भी बुक है।
यह बात बोल कर अंकल मुस्कुराने लगे और मुझे सुहागसेज पर पटक दिया।

सुहाग सेज पर गिरते ही मैं मदहोश होने लगी। ऐसे सुगन्धित फूले बिछे थे जो किसी को भी उत्तेजित करने के लिए काफी थे।

अब अंकल मेरे ऊपर सवार हो गये टॉप के ऊपर से ही मेरी चूची को काटने लगे।
मैं बोली- अंकल, ऐसे मत करो, टॉप फट जायेगी।
अंकल अब जोश में आ गये थे, उन्होंने जल्दी से मेरी टॉप निकाल दी।

टॉप निकलते ही मेरी चूची को देखकर पागल हो गये और चूची को ऐसे मसलने लगे कि जैसे आटा गूंथ रहे हों और ब्रा जल्दी खोलने के चकर में मेरी ब्रा की एक स्ट्रैप तोड़ दिया।

मेरी नंगी चूचियों को देखकर जैसे पागलों की तरह मसलने लगे, काटने लगे। मुझे दर्द भी हो रहा था थी और मजा भी आ रहा था।
अब बिना समय गवाँए उन्होंने मेरी स्कर्ट और पेंटी निकाल फेंकी, अब वे मेरी छोटी सी चिकनी चूत देखकर मानो पूरा पागल हो गये हों, वे जीभ से मेरी चूत चाटने लगे।

जीभ के चूत पर लगते ही मैं मदहोशी में बड़बड़ाने लगी, मेरे मुँह से मादक आवाज सुनते ही अंकल और तेज चाटने लगे।
मुझसे अब बर्दाशत कर पाना मुश्किल था और टाइम भी कम था, मैं अंकल से बोली- जो करना है, जल्दी करो… मेरे से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है और टाइम भी नहीं है।

अंकल ने घड़ी देखी तो 11:20 बज चुके थे, उन्होंने अपने कपड़े जल्दी से उतार दिये।
मैं उनका लंड देखकर डर गई, तकरीबन 8-9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा होगा।

मैं बोली- अंकल, मैं यह नहीं ले पाऊँगी।
अंकल बोले- एक बार लेकर तो देख मेरी रानी, अपने यार को भूल जायेगी।
अंकल ने मेरी टाँगें चौड़ी की और बिना कुछ लगाये लंड को मेरी नाजुक चिकनी चूत में पेल दिया।

मेरी तो जैसे जान निकल गई, मैं जोर से चिल्लाने, छटपटाने लगी लेकिन अंकल ने मेरे ऊपर ध्यान ना देते हुए एक और तेज झटका मारा और पूरा लंड डाल दिया, मैं दर्द के कारण रोने लगी, मेरी चूत से शायद खून निकल रहा था।
अंकल मेरे होंठों को चूसने लगे और धीरे धीरे चोदने लगे। करीब 10 मिनट बाद दर्द थोड़ा सी कम हुआ और थोड़ा थोड़ा मजा आने लगा और मैं भी अंकल का साथ देने लगी, मैं भी कमर उचका कर चूत चुदवाने लगी, अंकल के हर झटके का जबाब दे रही थी।

करीब दस मिनट बाद मैं झड़ने को आई, तब मैं बोली- अंकल और तेज… और तेज… फाड़ दो मेरी चूत को!

यह सुनकर अंकल ने स्पीड बढ़ा दी और मैं कुछ देर में झड़ गई।

अंकल भी थोड़ी देर बाद मेरी चूत गर्मागर्म वीर्य से भर कर मेरे ऊपर ही लेट गये।
थोड़ी देर बाद मैं अंकल को अलग कर के उठी तो दर्द के कारण मुझसे उठा नहीं जा रहा था, जैसे तैसे मैं उठी, उठते ही मेरी आँखें फटी रह गई।
मैंने देखा खून से बिस्तर लाल हो गया है, मेरी चूत से अभी भी वीर्य और खून निकल रहा था।

मुझे अपने इस हाल पर रोना आ रहा था, मैंने अंकल को हिला कर उठाया, अंकल भी खून देखकर थोड़े से डर गये और पूछने लगे- जान, तुम्हारी चूत कुंवारी थी क्या? इससे पहलेनहीं चुदी थी क्या?
मैं बोली- नहीं… वैसे भी अब पूछने का क्या फायदा? जब रो रही थी तब तो सुना नहीं।

अंकल मुझे गले से लगाकर बोले- थैंक यू जान, मेरे से सील तुड़वाने के लिए
और एक जोर की पप्पी लेकर बोले- चलो जान, बाथरूम में अच्छे से साफ कर देता हूँ।

मैं उठ कर खड़ी हुई लेकिन दर्द इतनी ज्यादा था कि चल भी नहीं पा रही थी।
जैसे तैसे अंकल बाथरूम ले गये और हम दोनों साफ हुए।

बाहर निकली तो अंकल स्कर्ट और टॉप दिये, मैंने पूछा- ब्रा, पेंटी कहाँ हैं?
तब अंकल ब्रा दिखा कर बोले- ये लो, ब्रा फट गई और पेंटी मैं अपने पास रखूंगा निशानी के लिए!

तभी अंकल की मोबाइल बजी, अंकल फोन पर बोल रहे थे- बस अभी आया!
फोन काटते ही अंकल बोले- जान, जल्दी से निकलो, शादी खत्म हो गई, जल्दी से कपड़े पहनो और निकलो, दूल्हा- दुल्हन आने वाले हैं।
मैंने जल्दी से स्कर्ट टॉप पहनी लड़खड़ाते रूम से निकल गई।
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05-02-2019, 12:26 PM,
#4
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
मैंने स्कर्ट तो जैसे-तैसे पहन ली.. लेकिन मेरी बड़ी चूचियां बिना ब्रा के टॉप में सैट ही नहीं हो रही थीं.. ऐसा लग रहा था कि चूचियाँ टॉप ना फाड़ दें।
इस पर हाई हिल की सैंडल पहन कर अभी एक कदम चलती कि मेरी गांड और चूची ऊपर नीचे होने लगतीं। फिर भी ना चाहते हुए मैं कमरे से निकल गई।


मेरी सहेली

कमरे से निकलते ही मैं सबकी नजरों से बचते हुए निकलने की कोशिश कर रही थी.. तभी मेरी सहेली आभा मिल गई।
उसने मुझसे पूछा- यार तुम इतनी देर से कहाँ थीं?

मैं कुछ बोलती इससे पहले मेरी चाल और कपड़े देखकर वो समझ गई कि मेरे साथ कुछ गलत हुआ है। वह मुझे अपने साथ कमरे में ले गई। चलते समय मेरी चूचियों की उछाल देखकर समझ गई कि मैं ब्रा नहीं पहने हूँ। रूम में पहुँचते ही उसने मुझसे सीधे-सीधे पूछा- किससे चुदवा कर आई हो रानी।

मैं उसकी बात को काटते हुए बोली- ऐसी बात नहीं है यार!
उसने बिना कुछ देखे मेरे टॉप ऊपर कर दिया। टॉप ऊपर होते ही मेरी चूचियों को मानो आजादी मिल गई हो।

मेरी चूचियों की दशा सारी दास्तान बयान कर रही थी। मेरी चूचियों पर अंकल ने कई जगह अपने दाँत चुभो दिए थे। जिसके निशान अभी बिल्कुल ताजे थे। फिर आभा ने पूछा- सच-सच बता किससे चुदी हो?

आभा मेरी पक्की सहेली थी.. हम दोनों आपस में सब कुछ शेयर करती थीं। इसलिए मैंने उसे सब कुछ बता दिया।
मेरे बताते ही वह जोर-जोर से हँसने लगी और बोली- आज मेरी लाड़ो की फिर से नथ उतर गई.. वह भी एक बूढ़े के लंड से..
यह बोलकर वो फिर से मजे लेते हुए हँसने लगी।

उसने मेरी स्कर्ट खोल कर फटी हुई चूत देखी।
तब मैं बोली- यार ये सब छोड़.. कहीं से ब्रा-पैन्टी की जुगाड़ कर.. नहीं तो आज ये लोग मुझे छोड़ेंगे नहीं।
फिर आभा बोली- रूक.. मैं देखती हूँ।
उसने कहीं से ढूँढ कर मुझे एक ब्रा दी और बोली- सिर्फ यही है।

मैंने यह सोचकर पहन ली कि कम से कम चूचियां तो काबू में आएगी।

कपड़े पहनकर हम दोनों खाना खाने पहुँचे। वहाँ 2-4 लोग ही थे। फिर आभा बोली- तू तब तक खाना खा मैं मैरिज हॉल में हो कर आती हूँ।
मैं बोली- क्यों.. अभी शादी नहीं हुई हैं क्या?
इस पर आभा बोली- नहीं यार.. अभी तो शुरू ही हुई है। तू खाकर वहीं पहुँच जाना।

मैं समझ गई कि अंकल को ब्रा-पैन्टी ना देना पड़े। इसलिए झूठ बोलकर जल्दी से निकाल दिए।

वेटर मेरे चूतड़ और चूची घूरने लगे

क्योंकि रात के 2 बजने वाले थे। मैं जैसे ही खाना खाने पहुँची.. तो सारे वेटर मुझे ही घूर रहे थे।

मैं प्लेट में खाना लेकर एक साईड में हो गई लेकिन सारे वेटर मेरी उठी हुई गांड को ही घूरे जा रहे थे।

तभी अचानक मेरा ब्वॉयफ्रेंड संतोष आ गया.. वह थोड़ा गुस्से में था। भला हो भी क्यों ना.. मैं उसका लंड खड़ा करवा कर अपनी चूत की गर्मी कहीं और शांत कर आई थी।
संतोष गुस्से में बोला- कहाँ थीं यार.. मैं तुम्हें कब से ढूंढ रहा हूँ।

अब मैं उससे क्या बोलूँ.. मेरी समझ में नहीं आ रहा था.. सच उसे बता नहीं सकती थी।
मैं थोड़ी आलस से बोली- यार सुहागसेज सजाते-सजाते बहुत थक गई हूँ।
उसे क्या पता था कि मैं सुहागसेज सजा कर नहीं.. बल्कि सुहागसेज पर सुहागरात मना कर आई हूँ।

फिर संतोष बोला- यार मैं कब से हाथ में लंड लिए तुम्हारी राह देख रहा था और तुम किसी और की सुहागसेज सजा रही थी।
अब तक मैं खाना खा चुकी थी।

फिर संतोष बोला- चलो अब हम अपनी सुहागरात मनाते हैं।
यह कहते हुए संतोष मुझे एक कोने में लाकर मुझे स्मूच करने लगा, वो मुझे चूमते हुए मेरी चूचियां भी मसलने लगा।

वहाँ से सब मेहमान जा चुके थे.. सिर्फ वेटर ही बचे थे। मेरे मना करने पर भी संतोष नहीं रूक रहा था लेकिन उसे रोकना जरूरी था। क्योंकि मैं अब चुदने के लायक नहीं बची थी.. अभी भी मेरी चूत दर्द दे रही थी।

संतोष अब मेरे टॉप में हाथ डालकर मेरे मम्मों को पागलों की तरह मसल रहा था।

तभी एक वेटर आया और संतोष से बोला- देखो भाई.. यहाँ ये सब मत करो हम लोगों से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.. कहीं और चले जाओ.. नहीं तो हम लोग मिलकर इस साली का जोरदार चोदन कर देंगे।

मैं यह बात सुनकर डर गई और संतोष से बोली- चलो.. यहाँ से चलते हैं।
हम वहाँ से चल दिए।

तब संतोष बोला- चलो कमरे में चलते हैं.. अब हम सुहागरात मनाएंगे।

मैंने मना कर दी.. मैंने सोचा अगर मैं इसके साथ कमरे में गई.. तो यह मेरी लाल पड़ीं चूचियों और चुदी हुई चूत देखकर सब कुछ समझ जाएगा। लेकिन संतोष मानने को तैयार ही नहीं था.. वह पागलों की तरह जिद करने लगा।

फिर मैं उससे आग्रह करते हुए बोली- प्लीज आज छोड़ दो.. हम दोनों फिर कभी सुहागरात मनाएंगे।
लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं था। वो बोला- यार आज क्यों नहीं.. आज मूड भी है और मौका भी है।
मैं बोली- यार तुम समझ क्यों नहीं रहे हो।
वह थोड़े गुस्से में बोला- ठीक है.. नहीं करूँगा.. पर ये बताओ आज तुम चुदना क्यों नहीं चाहती.. आखिर बात क्या है.
अब मैं क्या बोलूँ.. मेरी कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था।

तभी मेरे दिमाग की बत्ती जली।
मैं बोली- यार मेरे पीरियड शुरू हो गए हैं।
संतोष ये सुनकर चौंक गया और बोला- अचानक पीरियड कैसे शुरू हो गए?
मैं बोली- यकीन नहीं है तो हाथ लगाकर देख लो.. मैं अभी ही खून साफ करके आई हूँ।
फिर वह थोड़ा शांत हुआ और बोला- यार अब मेरा क्या होगा?
मैं चुप रही।
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05-02-2019, 12:26 PM,
#5
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
बॉयफ़्रेंड ने मेरी गांड मार ली

वह फिर बोला- चल चूत नहीं मार सकता.. लेकिन गांड तो मार सकता हूँ।
यह बोलकर उसने मेरी गांड मसल दी।

मैं यह सुनते ही डर गई और सोचने लगी कि अभी मेरी चूत में अंकल का लंड गया तो दर्द से चल नहीं पा रही हूँ.. अगर इसका लंड मेरी गांड में गया तो मैं खड़ा भी नहीं हो पाऊँगी।

मैंने मना कर दिया। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। उस पर मानो साक्षात कामदेव सवार थे। तब तक हम फार्म हाउस के बाहर आ चुके थे। वह मुझे साईड में ले जाकर मुझ पर हावी हो गया। वो मेरे होंठ, गाल, गर्दन चूम कम रहा था और काट ज्यादा रहा था। मेरी चूचियों को तो ऐसे दबा रहा था कि चूचियां नहीं.. किसी बस का हॉर्न हों।

मैं भी अब गर्म होने लगी थी और मैं भी उसका साथ देने लगी। वह कभी मेरी चूचियों को दबाता.. तो कभी गांड मसलता।
मेरी अन्तर्वासना फिर से जागने लगी।

अब वह मेरे टॉप को ऊपर करके मेरी चूचियों को पीने लगा। मैं भी उसका लंड सहलाने लगी।
फिर संतोष बोला- यार.. अब चलो भी कमरे में.. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

गर्म तो मैं भी काफी हो गई थी या यूँ कहें कि फिर से चुदने को तैयार हो गई थी। लेकिन मैं उसके साथ कमरे में नहीं जा सकती थी.. अगर जाती तो मेरी पोल खुल जाती।

फिर मैं बोली- यार कमरे में नहीं.. मेरी सारी सहेलियां आई हैं। अगर किसी ने देख लिया तो समस्या हो जाएगी।
तो संतोष ने बोला- फिर कहाँ किया जाए?
मैं बोली- आज रहने दो.. कल चोद लेना।

वह नहीं माना और बोला- यार गांड ही तो मारनी है। यहीं झुको.. मैं यही तुम्हारी गांड मारता हूँ।
मैं बोली- यहाँ नहीं यार.. अगर किसी ने देख लिया.. तो मैं बरबाद हो जाऊँगी।

फिर संतोष मुझे फार्म हाउस से दूर एकदम सुनसान जगह पर सड़क के किनारे एक बिल्डिंग की आड़ में ले गया। वो पूरे रास्ते मुझे मसलते हुए ले गया, मैं भी बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी।

संतोष बोला- अब यहाँ तो चुद लो.. यहाँ कोई नहीं आएगा।
मैं भी गर्म हो ही गई थी, मैं बोली- ठीक है.. जो करना है जल्दी करो।

मेरे बोलते ही संतोष ने मेरा पर्स निकाल कर नीचे गिरा दिया और मेरा टॉप उतारने लगा। मैं बोली- टॉप क्यों उतार रहे हो यार.. गांड ही तो मारनी है.. स्कर्ट ऊपर करके मार लो।

लेकिन वह नहीं माना और उसने मेरा टॉप उतार दिया और साथ में ब्रा भी खींच कर निकाल दी। मेरी चूचियों के नंगे होते ही वह अंधेरे में ही पागलों की तरह मेरे रसीले मम्मों को पीने लगा और काटने लगा।

मुझे ऐसा लग रहा था कि यह आज मेरी चूचियों को काट कर ले जाएगा। कभी वह मेरे गाल चूसता.. तो कभी होंठ चूसता.. तो कभी चूचियों को भंभोड़ता।

मैं इतनी गर्म हो गई कि मेरी चूत फिर से पानी छोड़ने वाली थी। मेरे से अब मेरी चुदास बर्दाश्त नहीं हो रही थी।
मैं बोली- संतोष जल्दी कर लो.. आभा मुझे ढूंढ रही होगी।

संतोष अब मेरी स्कर्ट उतारने लगा।
मैंने नहीं उतारने दी, मैं बोली- यार स्कर्ट ऊपर करके कर लो ना..

वह मान गया फिर मुझे दीवार के सहारे झुका दिया। मेरे झुकते ही मेरी गांड नंगी हो गई। संतोष मेरी गांड को सहलाने लगा.. फिर वह मेरी गांड चाटने लगा।
मैं बोली- क्या कर रहे हो यार?

उसने मेरी बात को नहीं सुना.. अब वो और तेज-तेज चाटने लगा।
वो मेरी गांड को चाट कम रहा था और काट ज्यादा रहा था। उसके काटने से मुझे भी दर्द कम.. और मदहोशी ज्यादा छा रही थी जैसे कि मैं अपने बस में ना थी। मैं अपने आप बड़बड़ाने लगी थी।

मैं संतोष से बोली- जान.. जल्दी करो अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
मुझे मजे के साथ में गांड मराने को लेकर थोड़ा डर भी लग रहा था क्योंकि मुझे अपनी फटी हुई चूत याद आ जाती थी।

संतोष ने अपना पैन्ट नीचे किया और लंड बाहर निकाला। संतोष अब मेरे सामने आया और बोला- इसे चाट कर गीला करो।

मैंने मना कर दिया.. तो वह बोला- यार अगर सूखा डाल दिया तो तेरी गांड फट जाएगी और तुम्हें दर्द भी बहुत होगा।
मैं डर गई और सोचने लगी कि चूत फटी तो ठीक से चल नहीं पा रही हूँ और अगर गांड फट गई तो खड़े भी नहीं हो पाऊंगी।

इसलिए ना चाहते हुए भी मैं उसका लंड चूसने के लिए राजी हो गई। ये तो बिल्कुल अंकल के लंड जैसा ही था। संतोष मेरे मुँह में लंड डालकर आगे-पीछे करने लगा जैसे वह मेरे मुँह की चुदाई कर रहा हो।

मुझे लंड की वजह से उल्टी जैसे हो रही थी इसलिए मैंने लंड को निकाल दिया।
संतोष समझ गया कि मुझे अच्छा नहीं लगा इसलिए उसने जिद नहीं की।
Reply
05-02-2019, 12:27 PM,
#6
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
अब उसने मुझे झुका कर मेरी गांड पर अपना लंड सैट किया और थोड़ा जोर से धक्का मारा.. लेकिन उसका लंड अन्दर नहीं गया। आखिर अभी गांड की सील पैक थी।

फिर संतोष बोला- बेबी दीवार सही से पकड़ लो।
उसने मेरी गांड पर थूक लगाया और फिर एक बार लंड सैट किया।

इस बार उसने मेरी गांड पकड़ कर जोर से धक्का लगाया और उसका मोटा लंड मेरी गांड में थोड़ी सी अन्दर चला गया। मुझे दर्द होने लगा।
संतोष ने फिर एक जोर का धक्का दिया, इस बार लंड ने शायद आधा रास्ता तय कर लिया था।

मैं दर्द से चिल्लाने लगी.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने गांड में गरम सरिया डाल दिया हो। मैं अपने आपको उससे अलग करने के लिए आगे की ओर खिसकी.. लेकिन उसने मेरी कमर को पकड़ कर गांड में से अपना लंड निकलने नहीं दिया, वो मेरे साथ आगे बढ़ने लगा।
जैसे आप लोगों ने सड़क पर कुत्ता और कुतिया की चुदाई देखी होगी, ऐसे ही कुछ हाल मेरा था, मैं भी कुतिया की तरह सड़क पर गांड मरवा रही थी।

अभी मैं कुछ सम्भलती.. इससे पहले संतोष ने एक और तेज झटका मारा और अपना पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया। अब मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगी, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी गांड सुन्ऩ हो गई हो।
मैं गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज यार छोड़ दो.. मैं मर जाऊँगी, बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन शायद उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा, वह अपनी धुन में था, वह मेरी गांड में अपना मूसल लंड आगे-पीछे किए जा रहा था।

कुछ देर बाद मुझे थोड़ी सी राहत सी मिली मेरा दर्द कम हुआ और मैं थोड़ा अच्छा महसूस करने लगी।

दो-चार बम पिलाट धक्कों के बाद अब मुझे भी मजा आने लगा। संतोष ने भी अपनी स्पीड को बढ़ा दिया।
अब मुझे गांड मरवाने में बहुत मजा आने लगा, मैं बोलने लगी- आह्ह.. और तेज और तेज चोदो.. फाड़ दो मेरी गांड को।

हम दोनों गांड चुदाई का भरपूर आनन्द ले रहे थे, तभी मेरे फोन की घंटी बजी, मेरा पर्स तो नीचे पड़ा था। किसी तरह अंधेरे में ही टटोलते हुए मैंने पर्स ढूँढ लिया और फोन निकाला, मैंने देखा- मॉम फोन कर रही हैं।

मैं पूरे जोश में चुदवा रही थी। मैंने सोची पहले ठीक से चुदवा लूँ.. फिर फोन कर लूंगी।

अभी घंटी बंद हुए कुछ पल ही हुए थे कि तभी मॉम ने फिर से फोन कर दिया।
मैंने संतोष को रोका और गांड में लंड लिए हुए थोड़ी सीधी हुई और फोन उठाया।

मॉम बोलीं- कहाँ हो बेटा?
मैं बोली- शादी में ही हूँ।

उन्हें क्या पता कि उनकी बेटी अभी थोड़ी देर पहले सुहागसेज पर सुहागरात मना कर आई है और अब बीच सड़क पर कुतिया की तरह गांड मरवा रही है।

फिर मॉम बोलीं- बेटा, वीडियो कालिंग कर और थोड़ी सी शादी दिखा।

वीडियो कालिंग की सुनकर मैं डर गई और सोचा- अब क्या दिखाऊँ कि उनकी बेटी किस तरह गांड मरवा रही है।
मैं बात कर रही थी और संतोष धीरे-धीरे मेरी गांड मार रहा था।

फिर मैं बहाना बना कर बोली- मॉम मैं बाथरूम में हूँ। मैरिज हॉल में पहुँच कर बात करती हूँ।
यह कहकर मैंने फोन काट दिया और संतोष से कहा- जल्दी करो।

यह सुनते ही उसने अपनी स्पीड को बढा़ दिया। मैं भी उसका साथ देने लगी। करीब 10-15 मिनट बाद ही वो झड़ गया, उसने मेरी गांड में अपना गर्मागर्म वीर्य छोड़ दिया।

वो बोला- मेरी जान आज तुम्हारी गांड मारकर मजा आ गया। अब तुम्हारे पीरियड खत्म होते ही तुम्हारी चूत की सील तोडूंगा।
मैं कुछ नहीं बोली.. उसे क्या पता था कि चूत की सील मैं तुड़वा चुकी हूँ।

उसने जैसे ही अपना लंड मेरी गांड से निकाला.. वीर्य धीरे-धीरे निकल कर मेरी जांघों के बीच आने लगा।
मैं सीधी हो गई और संतोष को बोली- तुमने गांड तो मार ली.. अब अपना वीर्य तो साफ करो।

संतोष बोला- यार किस चीज से साफ करूँ.. अन्दर ही रहने दो.. कोई नहीं देखेगा। यह कह कर उसने मेरी स्कर्ट को नीचे कर दिया। फिर उसने मुझे ब्रा और टॉप पहनाया। अब मुझसे दर्द के कारण चला नहीं जा रहा था। फिर भी मैं किसी तरह लड़खड़ाते हुए चलने लगी।

अब हम फिर से फार्म हाउस पहुँच गए और दोनों अलग हो गए। मैंने अपनी चाल सही की और अपनी गांड में अपने ब्वॉयफ्रेंड का वीर्य लेकर मैरिज हॉल की तरफ चल दी।

आगे मेरे साथ क्या हुआ.. यह अगली कहानी में बताऊँगी। अगली चुदाई मेरी किसने की और कहाँ की।
मैं मेरे ब्वॉयफ्रेंड का वीर्य अपनी गांड में लेकर भूखे शेरों के बीच घूम रही थी।
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05-02-2019, 12:27 PM,
#7
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
पिछली कहानी को पढ़ने के बाद आप लोगों को तो पता ही है कि मैं अपनी गांड में अभी भी ब्वॉयफ्रेंड का वीर्य लेकर पार्टी में घूम रही थी। वीर्य की धार अब टपकते हुए मेरी जांघों के बीच आ गई थी.. और धीरे-धीरे नीचे की ओर आ रही थी। शायद वीर्य के कारण मेरी गांड के होल के पास स्कर्ट भी गीली हो गई थी। लेकिन इस बात को लेकर मैं थोड़ी सी भी चितिंत नहीं थी।


अब दो लंड लेने के बाद मैं बेशर्म हो चुकी थी।

मैं काफी थक गई थी.. पूरा बदन दर्द से टूट रहा था। भला टूटे भी क्यों ना.. एक ही दिन में चूत और गांड दोनों की सील तुड़वा चुकी थी। अब बस मेरा शरीर आराम चाह रहा था.. मन हो रहा था कि जाकर सो जाऊँ।
लेकिन मॉम से वीडियो कॉल भी करनी थी। इसलिए मैरिज हॉल की ओर चल दी। थोड़ी देर में मैं मैरिज हॉल में पहुँची और मॉम को शादी की वीडियो दिखा दी।

शादी भी खत्म होने वाली ही थी इसलिए मैंने सोचा कि जाकर सो जाती हूँ।
तभी एक छोटी सी लड़की मेरे पास आई और बोली- दीदी, आपको वह दीदी बुला रही हैं।
उसने अपने हाथ का इशारा दुल्हन की ओर करते हुए कहा।

अब तक वीर्य की धार मेरी जांघों से नीचे आ गई थी। फिर भी मैंने चलते-चलते दोनों टांगों से आपस में रगड़ कर वीर्य को पोंछ लिया ताकि कोई देख ना पाए। संतोष के वीर्य से एक अजब सी सुगंध आ रही थी।

मैं अपनी सहेली के पास आकर जैसे तैसे बैठ गई, शादी खत्म हो चुकी थी, सब लोग मेरी सहेली को उठा कर कमरे की तरफ ले गए.. साथ ही मुझे भी उसके साथ चलने को बोले।

मैंने मना कर दिया और कहा- आप लोग जाओ.. मैं जीजू के पास ही हूँ।
मैंने सोचा कि इन लोगों के जाते ही मैं सोने चली जाऊँगी।

सारे लोग दुल्हन को लेकर चले गए, मैं और आभा जीजू के साथ थी और मेरी गांड से निकलते वीर्य की महक थी।

आभा किसी और से बात करने लगी। इस समय मैं और जीजू अकेले थे। आभा के साइड होते ही जीजू मेरे से बोले- साली साहिबा बहुत हॉट लग रही हो। काश तुम मुझे शादी के पहले मिल गई होतीं.. तो अभी हम पति-पत्नी होते।

मैं इठलाते हुए बोली- अच्छा जी.. लाइन मार रहे हो।
वह मुझे खा जाने वाली नजरों से घूर रहे थे और मुझसे सेक्सी बातें कर रहे थे। तभी बातों-बातों में उनकी नजर मेरी गांड के होल के पास पहुँच गई।

तब वह बोले- ये दाग कहाँ से लगवा कर आई हो?
मैं बोली- कौन सा दाग?

तब तक उन्होंने बिना बताए मेरी गांड पर हाथ लगा दिया। उनका हाथ मेरी गांड पर लगते ही वह सब कुछ समझ गए और मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने मेरी गांड दबा दी।

मैं कुछ बोलती.. इससे पहले वो ही बोले क्या बात है साली साहिबा.. मैंने जिस काम के लिए शादी की है.. वह काम तो तुमने बिना शादी के ही कर लिया।
फिर मैं चुटकी लेते हुए बोली- यह काम करने के लिए शादी की क्या जरूरत है? आपने भी तो किसी के साथ यह काम किया होगा।
मैं भी बेशर्मों की तरह बात कर रही थी।

जीजू बोले- किया तो बहुतों के साथ है.. पर आज तक तुम जैसी माल के साथ नहीं कर पाया।
जीजू इस खेल के पक्के खिलाड़ी लग रहे थे।

फिर जीजू बेशर्मी से बोले- चुदाई के बाद रस साफ कर लिया करो। लोगों को दिक्कत हो जाती है।
मैं यह बात सुनकर दंग रह गई कि मैं इन्हें अभी ठीक से जानती भी नहीं हूँ और यह कैसी बात कर रहे हैं।

उन्होंने फिर से मेरी गांड मसल दी। मैंने सोचा कि यार मैं किस गलत जगह आ गई हूँ.. जिसे देखो सारे मेरे साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और मेरी चुदाई का प्लान बना रहे हैं।

फिर जीजू बोले- एक बात बोलूँ.. बुरा तो नहीं मानोगी?
मैं बोली- नहीं मानूंगी.. बोलो।
फिर जीजू बोले- यार मधु, मेरे साथ एक बार चुदवा सकती हो?
मैं गुस्से में बोली- जीजू आप पागल हो गए हो क्या?

मैं यह बोल कर जाने लगी तो जीजू ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोका और बोले- सॉरी यार.. मैं तुम्हारी इस गर्म जवानी को देखकर पागल हो गया था.. इसलिए ये सब बोल दिया.. मुझे माफ कर दो।

फिर हम दोनों बातें करने लगे। बात क्या कर रहे थे वो मुझ पर लाइन मार रहे थे और मौका देखते ही मेरे इधर-उधर हाथ लगा देते थे।
थोड़ी देर कुछ लोग आए और जीजू को ले गए.. मैं बाल-बाल बची।

फिर मैं भी आभा के साथ सोने चली गई, रूम में जाते ही आभा मुझसे बोली- साली तूने तो गांड भी मरवा ली।
यह बोलते हुए आभा ने मेरी स्कर्ट ऊपर कर दी और मेरी गांड की हालत देखकर बोली- साली आज तू पूरे मूड में है क्या.. अब गांड कहाँ से मरवा कर आई हो.. और किससे?
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05-02-2019, 12:28 PM,
#8
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
आभा बोली- तू साली चुदक्कड़ बनती जा रही है। एक ही रात में चूत और गांड दोनों की सील तुड़वा लीं।

उसने फिर से मेरा टॉप और ब्रा निकाल दी, मैंने भी उसको पूरी नंगी कर दिया, उसने भी मेरी स्कर्ट उतार दी। हम दोनों अब पूरी नंगी हो गई।

आभा मेरी चूची, चूत और गांड देखकर छेड़ने लगी, बोली- चुदक्कड़ रानी.. आज तो तू रण्डी बन गई।
मैं बोली- साली मैं तो आज बनी हूँ.. तू तो साली न जाने कितनों के लंडों का स्वाद ले चुकी है।

ऐसे ही हम दोनों गंदी-गंदी बातें करते हुए एक-दूसरे को उंगली करते-करते नंगी ही कब सो गए.. पता ही नहीं लगा।

फिर सुबह-सुबह मेरे फोन की घंटी बजी। मैंने नंगे ही उठ कर फोन ढूँढा और देखा तो मॉम फोन कर रही थीं।
मैंने फोन रिसीव किया तो मॉम बोलीं- कब तक आओगी बेटा?
मैं बोली- मम्मा अभी तो सोई हुई थी, थोड़ी देर में आऊँगी।
यह कहकर मैंने फोन काट दिया।

समय देखा तो सुबह के 9 बज चुके थे। फिर मैंने आभा को उठाया और हम साथ में फ्रेश हुए। फिर मैं जीन्स और टॉप जो घर से पहन कर आई थी उसे पहन कर तैयार हो गई।

मैं बोली- चल एक बार साक्षी (दुल्हन) से मिल लेते हैं.. फिर चलेंगे।
आभा बोली- तू मिल ले.. मुझे कहीं जाना है।
मैं बोली- कहाँ जाएगी.. साथ चलते हैं ना?

फिर आभा बोली- यार तुम तो रात भर में दो बार चुदवा चुकीं.. मैंने कुछ बोला.. अब मैं जा रही हूँ.. होटल में मेरा ब्वॉयफ्रेंड इतंजार कर रहा है।
फिर मैं बोली- अरे वाह.. क्या बात है.. जाओ और उसके लंड से अपनी चूत की गर्मी शांत करवा ले.. मुझे क्या पड़ी है कि तुझे रोकूँ।
वह हँसने लगी और मुझे ‘बाय..’ बोल कर चली गई।

मैं साक्षी के कमरे में चली गई.. वहाँ तो पहले से ही बहुत लड़कियाँ थीं।
मुझे जीजू ने देखा और ऐसे खुश हुए जैसे वो मेरे लिए ही बेताब थे।

मैं अन्दर गई और सबके साथ हँसी-मजाक करने लगी। धीरे-धीरे सब जाने लगे, मैंने भी साक्षी को बोला- यार अब मैं भी चलती हूँ।
साक्षी बोली- तू रूक यार.. कुछ काम है।

मैं रुक गई कुछ देर में सारे लोग चले गए। जीजू भी बाथरूम गए थे।
फिर मैं बोली- बोल क्या काम है?
वह बोली- यार मुझे नहाना है।
मैं बोली- तो इसमें मैं क्या करूँ? तू जीजू के साथ नहा ले और साथ में उधर ही चुदवा भी लेना।

साक्षी बोली- यही तो नहीं करवा सकती यार।
मैं बोली- क्यों?
साक्षी बोली- यार मैं पीरियड में हूँ। मुझे नहाने में कम से एक घंटा लग सकता है। तब तक तुम इनके साथ रह लेना।
मैं बोली- सच बोल रही हो?
वह बोली- हाँ यार.. सही में बोल रही हूँ।

मैं बोली- तेरी ये खूनी होली खत्म कब होगी?
वह बोली- तीन-चार दिन के बाद।
मैं बोली- तो रात में तो जीजू ने गांड की तो बैंड बजा दी होगी?
साक्षी बोली- नहीं यार, मैं गांड नहीं मरवाती।

मैं बोली- यानि सुहागरात में कुछ नहीं हुआ? लो बेचारे जीजू शादी के बाद भी अपने घरवाली को चोद नहीं पाए।
साक्षी बोली- तू भी तो साली है.. आज तू ही उनको घरवाली का सुख दे दे।
यह कह कर वो हँसने लगी।

मैं भी हँसते हुए बोली- सोच ले? अगर मैं घरवाली बन गई.. तो तू कहाँ जाएगी?
वह बोली- मैं तेरी सौतन बन जाऊंगी।
हम दोनों हँसने लगी।

तभी जीजू बाथरूम से बाहर निकले और बोले- क्या बात है.. कोई हमें भी तो बताओ.. आखिर क्यों हँसा जा रहा है?
जीजू को देखते ही मेरी हँसी और निकल गई, मैं सोच रही थी कि बेचारा शादी के बाद भी पत्नी की चूत का सुख नहीं ले पाया।
मैंने अपनी हँसी को जैसे-तैसे रोका।

साक्षी बोली- यार आप लोग बात करो.. मैं नहा कर आती हूँ।
वो जाते-जाते एक कंटीली मुस्कान दे गई।

इस समय मैं और जीजू रूम में अकेले थे, मैं तभी समझ गई कि जीजू अब मुझे पक्का चोदेंगे।
मैं भी मन बना चुकी थी कि अगर जीजू ने छेड़ा.. तो उनके साथ उसी सुहागसेज पर मैं सुहागदिन मनाऊँगी.. जिस पर मैंने कल रात को भी अंकल के साथ सुहागरात मनाई थी।

मैं सोफे पर बैठ गई और अपने गोद में तकिया रख लिया। जीजू भी मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गए और मुझे निहारने लगे, मेरी नंगी जांघों पर ऐसे नजर गड़ाए हुए थे.. जैसे बगुला मछली के लिए गड़ाए रहता है।

मैं बोली- ऐसे क्या घूर रहे हो जीजू?
जीजू बेशर्मी से बोले- तुम चूत तो दोगी नहीं.. इसलिए तुम्हारी नंगी जांघों को ही घूर कर खुश हो रहा हूँ।

मैं जानबूझ कर बोली- जीजू कितने गंदे हो आप.. रात भर अपनी बीवी को चोद कर हटे हो.. और अभी मेरे पर लाइन मार रहे हो।
जीजू बोले- कहाँ यार.. पूरी रात मैं इसी सोफे पर सोया हूँ। तुम्हारी सहेली ने हाथ तक लगाने नहीं दिया।
मैं बोली- झूठे.. मुझे पता है.. पूरी रात आपने साक्षी को सोने नहीं दिया होगा।
जीजू बोले- ऐसी मेरी किस्मत कहाँ है? यार.. साक्षी पीरियड में है.. और साली ने गांड पर भी हाथ भी लगाने नहीं दिया।

अब आगे मेरी चुदाई कैसे होती है उसका किस्सा लिखूँगी।
Reply
05-02-2019, 12:28 PM,
#9
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
अब तक आपने पढ़ा..
साक्षी जिसकी सुहागरात मन ही नहीं पाई थी क्योंकि वो मासिक धर्म से गुजर रही थी.. और उसके पति यानि जीजू मुझे चोदने के चक्कर में थे।
अब आगे..

मैं बोली- सच बोल रहे या मेरे साथ मजाक कर रहे हो?
हालांकि मैं तो सब कुछ जानती थी, फिर भी जीजू को तड़पा रही थी।
जीजू बोले- अगर मेरी बात पर यकीन नहीं हो तो साक्षी से पूछ लो।

फिर मुझे एक शरारत सूझी। मैं उठी और जीजू के पास गई और उनके गाल को उमेठते हुए अफसोस जताते हुए बोली- मेरे प्याले बेचारे जीजू..

मैंने झुक कर उन्हें अपनी चूचियों के दीदार करवा दिए और मैं जाने लगी।
जीजू भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने मुझे खींचते हुए अपने गोद में बिठा लिया और बोले- मेरी ड्रीम गर्ल.. अपने आशिक को छोड़ कर कहाँ जा रही हो?
यह बोलकर उन्होंने मुझे कसकर गोद में तेजी से दबा लिया।

मैं कसमसाते हुए बोली- छोड़ो जीजू.. यह क्या कर रहे हो?
हालांकि मुझे भी मजा आ रहा था।
जीजू बोले- यार सोफे पर तुम बैठोगी ही.. इससे बढ़िया है कि मेरी गोद में ही बैठो.. कम से कम किसी का तो भला होगा।
फिर मैं बोली- अच्छा जी किसी का भला करने के चक्कर में कहीं मेरे साथ कुछ बुरा ना हो जाए।


जीजू मेरी जांघों को सहला रहे थे, वो मेरी गर्दन पर गर्म साँस छोड़ते हुए बोले- मेरी रानी.. इस प्यासे को एक बार अपनी इस गर्म जवानी का रस पीने का मौका दे दो।

जीजू अब पूरी तरीके से गर्मा गए थे, मेरी गर्दन पर गर्म-गर्म साँसें छोड़ रहे थे.. जिससे मैं भी मदहोश होने लगी थी।

अब जीजू का का लंड नीचे एकदम टाईट हो चुका था और उनका सख्त हो चुका लंड मेरी गांड में चुभ रहा था। मैं भी अब चुदने के लिए अन्दर से एकदम तैयार हो गई थी लेकिन मैंने अपने आपको संभाला और जीजू से जबरदस्ती अलग हो गई।

जीजू बोले- क्या हुआ मेरी जान.. कितना ज्यादा मजा आ रहा था।
फिर मैं एक्टिंग करते हुए बोली- नहीं जीजू.. ये गलत है.. मैं यह सब नहीं करवा सकती।
जीजू बोले- इसमें गलत क्या है? यार साली तो वैसे भी आधी घरवाली होती है।
मैं बोली- हाँ पर आधी होती है.. पूरी नहीं।

इस पर जीजू बोले- यार जीजू समझ कर ना सही.. ब्वॉयफ्रेंड समझ कर ही चुदवा लो। वैसे भी जब से तुम्हें देखा है.. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। बस एक बार मुझे चोदने का मौका दो। यह बोल कर वह बहुत ज्यादा गिड़गिड़ाने लगे।

मैं बोली- ठीक है.. लेकिन इससे मेरा क्या फायदा होगा?
जीजू बोले- तुम बोलो.. तुम्हें क्या चाहिए.. गाड़ी, बंगला, रूपए, डायमंड सैट.. बोलो क्या चाहिए?
मैं बोली- यह सब मेरे पास पहले से ही है।
जीजू बोले- फिर क्या चाहिए मेरी रानी..
ये बोलकर उन्होंने मेरे गालों का एक चुम्बन ले लिया।

मैं बोली- चूत के बदले चूत।
जीजू बोले- मैं कुछ समझा नहीं.. खुल कर बताओ और जल्दी बताओ।
मैं बोली- मैं तुमसे एक शर्त पर चूदूंगी। कि साक्षी को भी किसी और से चुदना पड़ेगा।

जीजू ने बिना समय गंवाए ‘हाँ..’ कर दिया और बोले- तुम जिससे चाहो साक्षी को चुदवा लेना.. मैं कभी नहीं रोकूंगा।

मैं तो बस जीजू को टेस्ट कर रही थी। लेकिन जीजू तो मेरे हुस्न के चक्कर में बिल्कुल पागल हो गए थे, वे अपनी बीवी को दूसरों से चुदवाने के लिए भी तैयार हो गए थे।
Reply
05-02-2019, 12:28 PM,
#10
RE: Porn Kahani चली थी यार से चुदने अंकल ने ...
जीजू बोले- बस अब तुम मेरे से चुदवा लो।
मैं बोली- ठीक है.. लेकिन कहाँ?
तो जीजू बोले- इसी सुहाग-सेज पर रानी।
मैं बोली- यहाँ नहीं.. कोई आ जाएगा।
जीजू बोले- कोई नहीं आएगा रानी.. सब जानते हैं कि ये ‘न्यू-कपल’ का कमरा है।

मैं बोली- साक्षी तो बाथरूम में है.. वह आ गई तो?
जीजू झट से उठे.. उन्होंने बाथरूम की कुण्डी को बाहर से लगा दी और बोले- वह एक घंटे से पहले नहीं आने वाली है। तब तक हम निपट लेंगे।
मैं बोली- ठीक है.. लेकिन जो करना है.. जल्दी करो.. मुझे भी जल्दी घर जाना है।

जीजू अब बिना समय गंवाए मुझे अपनी बाँहों की गिरफ्त में लेकर बेताहाशा मेरे गालों को चूमने लगे.. मेरे होंठों को ऐसे चूस रहे थे.. जैसे कि होंठ ना हों.. कोई लेमनचूस की गोली हों।

फिर जीजू ने बिना समय गंवाए मेरे टॉप और ब्रा को उतार दिया। मेरी बड़ी सी दूधिया चूचियों को देखकर बिल्कुल बेकाबू हो गए। मेरी चूचियों पर अभी भी अंकल के दाँतों के निशान थे.. जो मेरी चूचियों पर चार चाँद लगा रहे थे।

जीजू मेरी एक चूची को दाँतों से काटे जा रहे थे और एक चूची को बुरी तरह से मसले जा रहे थे। मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था।

फिर मैं कराहते हुए जीजू से बोली- जीजू काटो मत यार.. निशान पड़ जाएगा।
जीजू बोले- साली रण्डी.. पूरी चूची तो पहले से ही कटवा कर आई है, अब मेरे काटने से दिक्कत हो रही है? साली छिनाल.. चुदक्कड़ ना जाने कहाँ-कहाँ से चुदवा कर आई हो और मेरे सामने नखरे कर रही हो।

मुझे ऐसी गाली पहले किसी ने नहीं दी थी पर इस समय सुनकर अच्छी लग रही थी।
अब जीजू उठे और मेरी जींस खोलने लगे।

मैं बोली- जीजू अपने कपड़े भी तो उतारो।

यह सुनते ही उन्होंने झट से अपने कपड़े उतार दिए। जैसे ही मैंने उनका लंड देखा.. मैं तो देखकर ही पागल हो गई कि किसी भारतीय का इतना भयानक लंड कैसे हो सकता है।
जीजू का लंड करीब 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा होगा।

जीजू मुझसे लंड चूसने के लिए बोले.. पर मैंने मना कर दिया। फिर उन्होंने मेरी जीन्स उतार दी और मेरी नंगी चूत को देखकर उनके भी होश उड़ गए।

वह सब कुछ भूलकर मेरी चूत खाने लगे। मुझे जीजू के दाँत चुभ रहे थे लेकिन उस समय मैं बिल्कुल मदहोश थी। करीब 10 मिनट तक वह मेरी गुलाबी चूत को चाटते ही रहे।
अब मैं झड़ने वाली थी और मैं बड़बड़ाने लगी थी- आह्ह.. और तेज जीजू..

तभी जीजू उठकर खड़े हुए और मेरी चूत में ढेर सारी क्रीम लगा कर उंगली चूत के अन्दर-बाहर करने लगे और मैं उसी वक्त झड़ गई।

अब जीजू ने मुझे उठाकर बिठा दिया और वे अब भी एक हाथ से मेरी चूत में उंगली कर रहे थे। साथ ही वो एक हाथ से मेरी चूची से दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे।

वे अपने होंठों से मेरे होंठों का रस चूस रहे थे। मुझे जीजू का ये अंदाज बहुत पंसद आया। मैं फिर से गर्माने लगी थी। अब जीजू ने मुझे फिर से लिटा दिया और अपने लंड पर ढेर सारी क्रीम लगा कर लंड को हिलाने लगे और उन्होंने मेरी चूत पर निशाना लगा दिया।
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