Hindi Sex Stories By raj sharma
07-17-2017, 11:39 AM,
#1
Hindi Sex Stories By raj sharma
Hindi Sex Stories By raj sharma

मेरी मौसी सास

मेरी उम्र छब्बीस वर्ष है, मेरी शादी को दो साल हो गये हैं,मेरी बीबी बहुत सुन्दर और मुझे बहुत प्यार करने वाली है, अब से लगभग छः महीने पहले मेरी बीबी मुझे अपनी एक मौसी के पास लेकर गई थी, उसकी मौसी दिल्ली में रहती है, तथा उनका काफी अच्छा घर परिवार है,कहने को तो वो मेरी बीबी की मौसी है लेकिन देखने में वो मेरी बीबी की बहन जैसी ही लगती है, उन्हें देख कर कोई नहीं कह सकता की वो शादी शुदा होंगी, वैसे भी वो मेरी बीबी से दो साल ही बड़ी है,


उनके अभी कोई बच्चा नहीं था शायद फेमिली प्लानिंग अपना रखी थी, उनके पति एक सरकारी फर्म में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम करते हैं, उनके पति हालांकि उम्र में मौसी से सीनियर हैं मगर बहुत ही आकर्षक और स्वस्थ ब्यक्ति हैं,

हमलोग फुर्सत निकाल कर मौसी के यहाँ गये थे, आराम से एक महिना गुजार कर आना था, मौसी हमें देख कर बहुत खुश हुवी, खास कर मेरी तो उन्होंने बहुत आव भगत की, हम पति पत्नी को उन्होंने उपर का बेडरूम दे रखा था,

उस दिन मैं सबरे उठा, तब मेरी बीबी गहरी नींद में सोई हुवी थी, मैनें काफी रात तक जो उसकी जम कर चुदाई की थी, अभी सूरज तो नहीं निकला था लेकिन उजाला चारों और फैल चुका था, मैनें ठंडी हवा लेने की गरज से खिड़की के पास जा कर पर्दा खिंच दिया, सुबह की धुंध चारों तरफ छाई थी, सीर निचा करके निचे देखा तो दिमाग को एक झटका सा लगा, नीचे लोन में मौसी केवल एक टाइट सी बिकनी पहने दौड़ कर चक्कर लगा रही थी,
उनके गोरे शरीर पर काली बिकनी ऐसे लग रही थी जैसे पूनम के चाँद पर काले रंग का बादल छा कर चाँद को और भी सुन्दर बना रहा हो,



बालों को उन्होंने पीछे कर के हेयर बेंड से बाँधा हुवा था, इसलिए उनका चौड़ा चमकीला माथा बहुत ही अच्छा दिख रहा था, बिकनी के बाहर उनकी चिकनी गोरी जांघें ऊपर कुल्हों तक दिख रही थी, भागने के कारण धीरे धीरे उछलती हुवी उनकी चूचियाँ तथा गोरी मखमली बाँहें और सुनहरी बगलें बहुत सुन्दर छटा बिखेर रही थीं, उन्हें देख कर मेरी नसों का खून उबाल खा गया, तभी वे मेरी खिड़की के निचे रुकी और झुकते और उठते हुवे कसरत करने लगी, वे जैसे ही झुक कर खड़ी होती उपर होने के कारण मुझे उनकी चूचियाँ काफी गहराई तक दिख जाती,

तभी जाने कैसे उन्होंने उपर नजर डाली और मुझे खिड़की पर खड़ा देख लिया, मैं हडबडा कर वहाँ से हटना चाहा, परन्तु उनके चेहरे पर मोहक मुस्कान देख कर मैं रुक गया, उन्हें मुस्कुराते देख कर मैं भी धीरे से मुस्कुरा दिया, तभी मैं चौंका वो मुझे इशारे से निचे बुला रही थी,

मेरा दिल जोर से धड़क गया, मैनें एक नजर अपनी सोती बीबी पर डाली, वो अभी भी बेखबर सो रही थी, फिर मैं निचे आ गया, मौसी जी लोन में ही जोगिंग कर रही थी,

"लोन में ही जोगिंग कर रही हैं मौसी जी " मैंने उनके पास जाकर कहा तो वे भी मुस्कुरा कर बोली,

" जो भी जगह जोगिंग के लिये उपयुक्त लगे वहीँ जोगिंग कर लो, तुम भी किया करो सेहत के लिये अच्छी होती है,"

" ठीक कह रही हैं आप " मैंने कहा,


वो फीर दौड़ पड़ी और मुझसे बोली " तो आओ मेरे साथ, कम ऑन "

मैं भी उनके साथ दौड़ने लगा, वे मुझसे जरा भी नहीं हिचक रही थी, मैं दौड़ते हुवे बहुत करीब से उनके महकते अंगों को देख रहा था,

" मौसा जी कहाँ हैं?" मैनें उनकी जाँघों पर नजर टीका कर पूछा,

" वे आज हैदराबाद गये हैं, कंपनी के काम से, सुबह जल्दी की फ्लाईट थी, शायद पांच छः दिन बाद लौटेंगे," उन्होंने जवाब दिया

ना जाने कयों मुझे तसल्ली के साथ साथ ख़ुशी भी हुई,

" आपका फिगर तो बहुत सुन्दर है मौसी जी " बहुत देर से दिमाग में घूमता ये सवाल आखिर मेरे मुंह से निकल ही गया,

मेरी आशा के विपरीत वे एकाएक रुक गई, मैं भी रुक गया, ये सोच कर की कहीं बुरा तो नहीं मान गई मेरा दिल धड़का, जबकि वे धीरे से मुस्कुरा कर मेरी आँखों में झाँक कर बोली,

" तुम्हारे शब्द लुभावनें हैं लेकिन अंदाज गलत है,"

" क्या मतलब," मैं चौंका,

" यदि मैं या मेरी हमउम्र लड़की तुमसे ये कहे की अंकल तुम्हारी पर्सनेल्टी बहुत अच्छी है तो तुम्हे कैसा लगेगा," मौसी जी ने मुझसे कहा,

" ओह...! " मेरे होंठ सिकुड़ गये, मैं उनकी बात का मतलब समझ गया था, क्योंकि वो मुझसे तो उम्र में छोटी थी, इसलिए उन्हें मेरा उनको मौसी जी कहना अच्छा नहीं लगा था, वैसे तो मुझे भी उनको मौसी जी कहना जरा अजीब सा लगता था लेकिन बीबी के रिश्ते के कारण मौसी नहीं तो और क्या कहता, यही बात उस वक्त मैनें उनसे कह दी,


" मैं भी आपको मौसी कहाँ कहना चाहता हूँ, मगर और क्या कहूँ,"

जवाब में वो शोखी से मुस्कुराई और मेरे बहुत करीब आकर मेरे सिने को अपने हांथों से थपथपा कर बोली

" वैसे तो मेरा नाम सुजाता है, मगर जो लोग मुझे पसन्द करते हैं वे सभी मुझे सूजी कहते हैं,"

" और जिन्हें आप पसन्द करती हैं उनसे आप खुद को सुजाता कहलवाना पसन्द करती हैं या सूजी," मैनें उनसे पूछा

वे मेरी बटन से छेड़छाड़ करती हुई मेरी आँखों में झाँक कर बोली " सूजी "

" यदि मैं आपको सूजी कहूँ तो?"

" नो प्रोब्लम, बल्कि मुझे ख़ुशी होगी " कह कर उन्होंने वापस दौड़ लगा दी,

मेरा दिल बुरी तरह धड़कने लगा, मौसी यानी सूजी मुझे अपने दिल की बात इशारों में समझा गई थी,उस समय मैनें खुद को किसी शहंशाह से कम नहीं समझा, सूजी थी ही इतनी सुन्दर की उसकी समीपता पाकर कोई भी अपने को शहंशाह समझ सकता था,



मैं मन में बड़ी अजीब सी अनुभूति लिये बेडरूम में आया, मेरी बीबी अभी अभी जागी थी,
वो बेड से उठ कर बड़े अचरज से मुझे देख कर बोली,

"कहाँ गये थे इतनी सुबह सुबह,"

" जोगिंग करने " मेरे मुंह से निकल गया

" जोगिंग " मेरी बीबी ने अचरज से अपनी आँखें फाड़ी,

" व ...वो मेरा मतलब है, मैं सुबह जल्दी उठ गया था ना इसलिये सोचा चलो जोगिंग की प्रेक्टिस की जाये, मगर सफल ना हो सका तो वापस चला आया," मैनें जल्दी से बात बनाई, मेरी बात सुन कर बीबी हंसी और बाथरूम में घुस गई,

फिर दो दिन निकल गये, मैं अपनी बीबी के सामने मौसी को मौसी जी कहता और अकेले में सूजी, इस बिच सूजी के ब्यवहार में आश्चर्य जनक परिवर्तन हुवा था, वो मेरे ज्यादा से ज्यादा करीब होने की कोशीश करती, बहुत गंभीर और परेशान सी दिखाई देती जैसे की मुझसे चुदवाने को तड़प रही हो, उसे चोदने के लिये तड़प तो मैं भी रहा था, मगर अपनी बीबी के कारण मैं उसे छिप कर बाहों में भर कर चूमने के सिवा कुछ ना कर सका, और आखिर परेशान होकर सूजी नें खुद ही एक दिन मौका निकाल लिया,


क्योंकि उनके पति को लौटनें में अब दो ही दिन रह गये थे, उनके पति के आने के बाद तो मौका निकालना लगभग नामुमकिन हो जाता, सूजी ने उस रात मेरी बीबी की कोफी में नींद की कुछ गोलियां मिला कर उसे पिला दी, थोडी देर में जब मेरी बीबी गहरी नींद में सो गई तो मैं फटाफट सूजी के बेडरूम में पहुँच गया,

वो तो मुझे मेरा इन्तजार करते हुवे मिली, मैनें झट उसे बांहों में भर कर भींच लिया और उसके चेहरे और शुर्ख होंठों पर ढेर सारे चुम्बन जड़ दिये, जवाब में उसने भी चुम्बनों का आदान प्रदान गर्मजोशी से दिया,

वो इस वक्त झीनी सी सफेद रंग की नाइटी में थी, जिसमें से उसका सारा शरीर नजर आ रहा था, मेरा खून कनपटीयों पर जमने लगा था, मैनें खिंच कर नाइटी को प्याज के छिलके की तरह उतार फेंका, पेंटी और ब्रा में कसे उसके दुधिया कटाव गजब ढा रहे थे, मैनें पहले ब्रा के उपर से ही उसकी कठोर चुचियों को पकड़ कर दबाया और काफी सख्ती दिखा दी,

" उफ ...सी...ई ...क्या कर रहे हो? सूजी के मुंह से निकला " ये नाजुक खिलौनें हैं इनके साथ प्यार से खेलो,"

मैनें हंस कर उन्हें छोड़ने के बाद पीछे हाँथ ले जा कर पेंटी में हाँथ घुसा दिया और उसके मोटे मुलायम चुतड के उभारों को मुट्ठी में भर लिया, इसी बिच सूजी ने मेरे पेंट के फूले हुवे स्थान पर हाँथ रख कर मेरे लंड को पकड़ा और जोर से भींच दिया,

" आह..." मैनें कराह कर अपना हाँथ उसकी पेंटी में से बाहर खिंच लिया, तब मुस्कुरा कर सूजी ने मेरा लंड छोड़ते हुवे कहा,

" क्यों जब तुम्हारे लंड पर सख्ती पड़ी तो मुंह से आह निकल गई और मेरे नाजुक अंगों पर सख्ती दिखा रहे थे,"

मैं भी उसकी बात सुन कर हंसने लगा, उसके बाद मैनें सूजी को और सूजी ने मुझे सारे कपड़े उतार कर नंगा कर दिया, और मैं उसके शरीर को दीवानगी से चूमने लगा,वो भी मेरे लंड को हाँथ में पकड़े आगे पीछे कर रही थी,

" वाह, काफी तगड़ा लंड है तुम्हारा तो,"



मैं उसकी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा तथा एक हाँथ से उसकी जांघ को सहलाते हुवे उसकी चिकनी चूत पर हाँथ फेरा, एकदम साफ़ चिकनी और फुली हुई चूत थी उसकी, एकदम डबलरोटी की तरह, उसके एक एक अंग का कटाव ऐसा था की फरिस्तों का ईमान भी डिगा देता, शायद नियमित जोगिंग के कारण ही उसका शरीर इतना सुन्दर था,

मैनें उसे बेड पर बिठा कर उसकी जांघें फैलाने के बाद उसकी खुबसूरत चूत को चूम लिया, और फीर जीभ निकाल कर चूत की दरार में फिराई तो उसने सिसकी भर कर अपनी जाँघों से मेरे सीर को अपनी चूत पर दबा दिया, मैनें उसकी चूत के छेद में जो की एकदम सिंदूर की तरह दहक कर लाल हो रहा था उसमें अपनी लम्बी नाक घुसा दी, उसकी दहकती चूत में से भीनी भीनी सुगन्ध आ रही थी


तभी सूजी ने मुझे उठाया, उत्तेजना के कारण उसका चेहरा बुरी तरह तमतमा रहा था
उसने मुझे उठाने के बाद कहा,

" अब मैं तुम्हारा लंड खाऊँगी,"

"खा लो,"
मैनें हंस कर कहा तो सचमुच जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और अपना मुंह फाड़ कर मेरा लंड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी, मेरी बीबी ने भी कभी इस तरह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर नहीं चूसा था, क्योंकि उसे तो घिन आती थी, इसी कारण जब आज सूजी नें मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसा तो एक अजीब से सुख के कारण मेरा शरीर अकड़ रहा था,

वो मेरे चूतडों को हांथों से जकडे हुवे अपना मुंह आगे पीछे करते हुवे मेरा लंड चूस रही थी, उसके सुर्ख होंठों के बिच फंसा मेरा लंड सटासट उसके मुंह में अन्दर बाहर हो रहा था, सूजी मुस्कुराती आँखों से मुझे ही देख रही थी, फिर एकाएक वो अपनी गर्दन जोर जोर से आगे पीछे चलाने लगी तो मुझे लगा की मैं उसके मुंह में ही झड़ जाउंगा, इसलिए मैनें उसका सीर पकड़ कर लंड को मुंह से निकालने की कोशिश की और बोला,


" छ ...छोड़ दो सूजी डार्लिंग नहीं तो मैं तुम्हारे मुंह में ही पिचकारी छोड़ दूंगा,"

परन्तु इतना सुनने के बाद भी उसने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर नहीं निकाला बल्कि ना के इशारे में सीर हिला दिया, तो मैं समझ गया की वो मुझे अपने मुंह में ही झडवा कर मानेगी, उसने मेरे चूतडों को और जोर से जकड़ लिया और तेज तेज गर्दन हिलाने लगी, तो मैं चाह कर भी अपना लंड उसके मुंह से बाहर नहीं निकाल सका,
आखिर मैं उसके मुंह में झड़ गया और उसके उपर लद गया, मेरे वीर्य की पिचकारी उसके मुंह में छुट गई तो उसने गर्दन उपर निचे करना रोक दिया और मेरे लंड के सुपाड़े को किसी बच्चे की तरह निप्पल के जैसे चूसने लगी, सारा वीर्य अच्छी तरह चाट कर ही वो उठी और चटकारा लेकर मुझ से बोली,


" मजा आ गया जानेमन, बड़ा स्वादिष्ट रस है तुम्हारा,"

परन्तु अब तो मैं बेकार हो चूका था, मेरा लंड सिकुड़ कर आठ इंच से दो इंच का हो गया था,
मैनें उसे देख कर शिकायती लहजे में कहा,

" ये बात अच्छी नहीं है सूजी, तुमने मेरे साथ धोखा किया है,"

" अरे नहीं डार्लिंग धोखा कैसा, मैं अभी तुम्हारे लंड को दोबारा जगाती हूँ,"

कहने के बाद सूजी मेरा सिकुड़ा हुवा लंड हांथों में पकड़ कर उठाने की कोशिश करने लगी, भला वो अब इतनी जल्दी कहाँ उठने वाला था, मगर सूजी तो पूरी उस्ताद निकली,

उसने मुझे धकेल कर फर्श पर चित लिटाया और मेरी जाँघों पर चढ़ कर बैठ गई, तथा मेरे सिकुड़े हुवे लंड को पकड़ कर अपनी दहकती हुई चूत के छेद पर रगड़ने लगी, मैं भी उसकी चुचियों को दबाने लगा, उसकी चूचियां बड़ी सुन्दर और कठोर थी, जल्दी ही मेरे लंड में थोड़ा कड़ापन आ गया,


उसी समय सूजी ने मेरे थोड़ा कठोर हो चुके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और अंगूठे की सहायता से जबरदस्ती अपनी चूत में ठूंस लिया, चूत के अन्दर की गर्मी पाकर तो मेरा लंड एकदम से खडा होने लगा और चूत में पड़े पड़े ही सीर उठाने लगा,

सूजी ने लंड को बाहर नहीं निकाला बल्कि वो संभल कर लंड के उपर ही बैठ गई, मेरा लंड जितना तनता जा रहा था उतना सूजी की चूत की दीवारों को फैलाता हुवा अन्दर घुसता जा रहा था, एक समय ऐसा आया की सूजी को अपने घुटनों की सहायता से उपर उठाना पड़ा, क्योंकि मेरा लंड अब तो पहले से भी ज्यादा लम्बा और कड़ा होकर करीब आधा तक उसकी चूत की गहराई में पहुँच कर चूत के छेद को चौड़ा करके कस चूका था, लंड अभी भी धीरे धीरे उठ रहा था, उसे इस तरह बढ़ता देख कर सूजी सिसिया कर उठ गई और लंड का सुपाड़ा सट से बाहर आ गया, वो बोली,


" बा....बाप रे....ये तो बढ़ता ही जा रहा है,"

" इस पर बैठो ना सूजी," मैनें उसे दोबारा लंड पर बैठने के लिये कहा, मगर वो नकली हैरानी दिखाते हुवे बोली,

" ना....ना बाबा ना, इतने लम्बे और मोटे लंड को मेरी कोमल चूत कैसे सहन कर पाएगी, इसे तुम्हारा ये बम्बू जैसा लंड फाड़ देगा,"

अब मैं उठा और सूजी से बोला,

" लो कम ऑन सूजी, तुम कोई बच्ची नहीं हो जो मेरे लंड से इतना डर दिखा रही हो,"

सूजी तो फालतु में नाटक कर रही थी, मैं तो एक बार झड़ चूका था, इसलिए मुझे कोई जल्दीबाजी नहीं थी, मगर सूजी की चूत में आग तब से अब तक उसी तरह लगी हुई थी, वो चुदवाने के लिये बुरी तरह उतावली हो रही थी, ये उसके चेहरे से ही झलक रहा था,
सो इस बार वो कोई भी नखरा किये बिना चुपचाप अपने घुटनें और हथेलियाँ फर्श पर टिका कर जानवरों वाली कंडीसन में हो गई, यानि वो जानवरों वाली पोजीसन में वो पीछे से लंड चूत में डलवा कर चुदवाना चाहती थी,


मुझे भला क्या ऐतराज होता, मैं उसके पीछे आ गया, लेकिन उसके कुल्हे मेरे धड़ से बहुत निचे थे, इसलिये मैनें उसे पंजो पर खडा करके उसकी पोजीसन को ठीक किया, अब उसके कूल्हों का सेंटर ठीक मेरे लंड से मेल खा रहा था, मैनें उसकी टांगों को आगे बढ़ा कर उसके पेट से सटा दिया,

अब उसकी चूत काफी हद तक उभर कर पीछे की ओर निकल आई थी, सब कुछ जांच परख कर मैनें उसकी चूत के छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और उसके कुल्हे पकड़ कर मैं लंड अभी ठेलना ही चाहता था की उधर सूजी नें लंड अन्दर लेने के लिये अपने कूल्हों को पीछे की ओर ठेला और इधर मैनें धक्का मारा, दोनों तरफ के धक्कों के कारण लंड थोड़ा सा कसता हुवा सरसरा कर करीब आधा चूत के अन्दर चला गया,


सूजी के मुंह से सी...सी...ई...की आवाज निकली, उसने दोहरी होकर बदन ऐंठ दिया, मैं रुका नहीं और अपना पूरा लंड अन्दर ठेलता ही चला गया, हालांकि सूजी की चूत काफी कसी हुई थी और मैं जानता था की इस तरह सूजी को मेरे मोटे और लम्बे लंड से थोडी बहुत परेशानी हो रही होगी, मगर उतनी नहीं जितना की सूजी दिखा रही थी,

वो " ऊं ....आ ...आह.. करते हुवे अपना धड़ आगे बढाने लगी, जबकि मैंने उसकी कोई परवाह नहीं की और बहुत जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये, मुझे इम्प्रेस ना होते देख कर सूजी ने भी कराहना बंद कर दिया और मेरे लंड का स्वाद अपनी चूत से लेने में मगन हो गई,

मेरे लगभग हर धक्के पर सूजी जरा सा आगे सरक जाती, मेरा आठ नौ इंची लम्बा लंड जरूर उसकी अंतड़ियों में जाकर अड़ जाता होगा, मैं लंड को सट से बाहर खींचता और सड़ाक से अन्दर घुसेड़ देता, मेरे जोर के धक्कों के कारण ही सूजी अपनी जगह से तीन चार फीट आगे सरक गई थी, साथ में मैं भी आगे बढ़ता चला गया,


अब वो मस्ती में सिसकियाँ भर रही थी और मैं उसके कुल्हे पकड़ कर धका धक लंड से पेलम पेल मचाये हुवे था, सूजी मेरे तेज धक्कों के कारण खुद को रोक ना सकी और जल्दी ही उसकी चूत नें पानी छोड़ दिया, मस्ती में वो अपने कुल्हे मटकाते हुवे मेरे लंड पर अपनी चूत से निकले रस की फुहार फेंकने लगी,

पूरी तरह मस्ती से निबट कर उसके मुंह से " ब.....बस...बस करो," की आवाज निकली, मगर मैं अभी कहाँ बस करने वाला था, मैं तो एक बार उसके मुंह में पहले ही अपना पानी गिरा चुका था, इसलिये अब दोबारा झड़ने में मुझे काफी देर लगनी थी, अभी तो मेरे झड़ने का आसार दुर दुर तक नहीं था,

यूँ भी मैं एक बार झड़ने के बाद दोबारा जब भी चुदाई करता तो मेरी बीबी भी मुझसे पनाह मांगती थी, इसीलिए वो मुझसे दोबारा चुदवाने के लिये कभी जल्दी से हाँ नहीं भरती थी, यदि चुदवाती भी तो पहले अपने हाँथ के जरिये या बाहर ही बाहर मेरे लंड को अपनी चूत पर काफी देर तक रगड़ती, जब तक मैं और मेरा लंड चोदने के लिये पूरी तरह तैयार ना हो जाते, इतनी देर के बाद चुदाई करने पर भी मैं अपनी बीबी से हाँथ जुड़वा कर ही दम लेता,

पर यहाँ तो मामला ही उल्टा था, सूजी ने तो मेरा लंड दोबारा खड़ा करके तुंरत ही अपनी चूत में डलवा लिया था, इसलिये अभी तो मैं जल्दी से झड़ने वाला नहीं था, सो मुस्कुरा कर उसी ताकत से उसके कूल्हों पर चोट करते हुवे बोला,

" मेरी जान, मुझे अपने मुंह में पहले झडवा कर के गलती तुमने की है, अब भुगतो मैं क्या करूँ?"

वो बुरी तरह कराह कर बोली, " हा....हाँ...गलती हो गई...मगर फिलहाल मुझे छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है,"

" मैं अब नहीं छोड़ने वाला " मैं धड़ा धड़ धक्के लगाता हुवा बोला,

" प्लीज थोडी देर के लिये अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो," वो लगभग गिडगिडा कर बोली, " बस थोडी देर के लिये शान्त हो जाओ प्लीज "

मुझे उसपर दया आ गई, मैनें धक्के लगाने तो बंद कर दिये मगर लंड बाहर नहीं निकाला, उसके कूल्हों से सट कर हांफता हुवा बोला, " बस तुम औरतों में यही बात गलत है पहले तो मनमानी कर लेती हो फिर खुशामद करने लगती हो, तुम्हारा काम तो हो गया, अब मैं क्या करूँ?"

जवाब में वो कुछ देर सोचने के बाद बोली " अच्छा एक काम करो, मेरी गांड मार लो, अपना मुसल मेरी गांड में डाल लो "

" क्या...." मैं बुरी तरह चौंका, " क्या पागल हो गई हो, तुम्हारी गांड में लंड डालने से तो तुम्हें चूत से भी भयंकर दर्द होगा,"

" इसकी फ़िक्र तुम मत करो, अपने इस शैतान के बाप को मेरी चूत से निकाल कर मेरी गांड में डाल दो,"

वो खुद गांड मरवाने राजी थी तो मुझे भला क्या ऐतराज होता, मुझे तो मतलब मेरा काम पूरा होने से था, अब वो चाहे चूत हो गांड हो या मुंह, मुझे उससे क्या मतलब, तब मैनें सटाक से अपना लंड चूत से बाहर खिंचा, मेरा लंड चूत के पानी से भीगा हुवा था और चूत में पड़े रहने के कारण बहुत ही भयंकर नजर आ रहा था,

मैनें चूत के छेद से एक इंच उपर यानी गांड के गोल छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया और सूजी के कुल्हे पकड़ कर जोर लगाया, चूत के रस से चिकना सुपाड़ा गांड के छेद को फैला कर थोड़ा सा अन्दर घुस गया, मैं मन में सोच रहा था की सूजी के मुंह से चीख निकल जायेगी, परन्तु ऐसा नहीं हुवा, उसने सिर्फ सिसकी भर कर अपना सीर ताना, तब मैनें अपना पुरा लंड उसकी गांड में सरका दिया,

इस पर भी जब सूजी ने तकलीफ जाहिर नहीं की तो मैं समझ गया सूजी गांड मरवाने की आदि है, उसने सिर्फ कस कर अपने होंठ भींचे हुवे थे, फिर भी मैनें पूछा,

" तकलीफ तो नहीं हो रही है ना सूजी,"

" नहीं तुम धीरे धीरे चोदते रहो," उसने कहा तो मैं उसके गोल मटोल कुल्हे थपथपा कर धीरे से झुका और दोनों हाँथ निचे लाकर दोनों चुचियों को पकड़ कर उसकी गांड मारने लगा, थोडी देर बाद मैनें धक्के तेज कर दिये, मुझे तो उसकी चूत से अधिक उसकी गांड में अपना लंड कसा होने के कारण ज्यादा मजा आ रहा था, और जब मेरे धक्कों ने प्रचंड रूप धारण कर लिया तो सूजी एकदम से बोली,




" ...बस...अब अपना लंड मेरी गांड में से निकाल कर मेरी चूत में डाल दो,"

" क्यों " मैनें रुक कर पूछा,

" क्योंकि मैं तुम्हारा वीर्य अपनी चूत में गिरवाना चाहती हूँ,"

सुन कर मैं मुस्कुराया और अपना लंड गांड में से खिंच कर वापस उसकी चूत में घुसेड़ दिया, मैनें फीर जोर जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये थे, मगर इस बार सूजी को कोई परेशानी या दर्द नहीं हुवा था, बल्कि अब तो वो दुबारा मस्ती में भर कर अपने कुल्हे आगे पीछे ठेल कर मेरा पुरा साथ देने लगी थी, इतनी देर बाद भी मैं सूजी को मंजिल पर पहुंचा देने के बाद ही मैं झडा, सूजी भी कह उठी,

" मर्द हो तो तुम जैसा, एकदम कड़ियल जवान,"

" और औरत हो तो तुम जैसी एकदम कसी हुई," जवाब में मैनें भी कहा, फिर हम दोनों एक दुसरे की बाहों में समां गये,

मौसा जी को जहां दो दिन बाद आना था, दो दिन तो दूर की बात वो पुरे पांच दिन बाद आये,और उन पांच रातों का मैनें और सूजी नें भरपूर लाभ उठाया, सूजी हर रोज मेरी बीबी को नींद की गोलियां देकर सुला देती और हम दोनों अपनी रात रंगीन करते, मौसा जी के आने के बाद ही हमारा ये चुदाई का खेल रुका, इस बिच मौसी यानि सूजी बहुत उतावली रहती थी, वो मेरे एकांत में होने का जरा जरा सा बहाना ढुंढती थी,

मैं इस बात को उस वक्त ठीक से नहीं समझ सका की सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है, क्या मौसा जी में कोई कमी है या वे इसे ठीक से चोद नहीं पाते? जबकि देखने भालने में वे ठीक ठाक थे,



सूजी मेरी इतनी दीवानी क्यों है? इसका जवाब मेरे दिमाग ने एक ही दिया की या तो वो मेरे लंड की ताकत से दीवानी हुई है या फिर मौसा जी उसे ढंग से चोद नहीं पाते होंगे, हम महिना भर वहाँ रहे, इस बिच हमने यदा कदा मौका देख कर चुदाई के कई राउंड मारे,

जब हम वहाँ से आने लगे तो सूजी ने मुझे अकेले में ले जाकर कहा,

" जल्दी जल्दी राउंड मारते रहना मुझे और मेरी चूत को तुम्हारे लंड का बेसब्री से इंतजार रहेगा,

मैनें इतनी चाहत का कारण पूछा तो उसने यही बताया की " वे " यानी की उसके पति उसे ठीक से चोद नहीं पाते, मेरा शक सही निकला, मौसा जी की कमी के कारन ही वो मेरी तरफ झुकी,

मेरा दिल भी उसे छोड़ कर जाने का नहीं कर रहा था, मगर मज़बूरी वश मुझे वापस आना पड़ा, आने के एक हफ्ता बाद ही मैं बीबी को बिना बत्ताये दुबारा सूजी के यहाँ पहुँच गया, वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई,

मैं इस बार चार दिन वहाँ रहा और चारों दिन सूजी को खूब चोदा, क्योंकि मौसा जी के ऑफिस जाने के बाद मैं और सूजी ही घर में रह जाते और खूब रंगरेलियां मनाते, अब तो मेरी बीबी का भी खतरा नहीं था, मौसा जी को भी हम पर कोई शक होने वाला नहीं था, क्योंकि रिश्ते के हिसाब से मैं सूजी का दामाद हूँ, मौसा जी भी मुझे दामाद जैसी इज्जत देते,



इसी का फायदा उठा कर मैं हर महीने सूजी के यहाँ जाकर पूरी मौज मस्ती करके आता था, हमारा ये क्रम पांच महिने तक चला, उसके बाद जब एक महिने पहले सूजी के यहाँ पहुंचा तो उसका ब्यवहार देख कर मैं बुरी तरह चौंका, वो मुझे देख कर जरा भी खुश नहीं हुई और ना ही मुझसे एकांत में मिलने की कोई कोशिश की, और जब मुझे बहुत ज्यादा परेशान देख कर मुझसे मिली तो उसके चेहरे पर सदाबहार मुस्कान की जगह रूखापन था, मैनें इसका कारण पूछा, और उसने जो कुछ मुझे बताया उसे सुन कर तो मेरे पैरों के निचे से जमीन ही निकल गई, उसने बताया की...

उसने मेरे से इस लिये नहीं चुदवाया की मौसा जी उसे ठीक से नहीं चोद पाते थे, सूजी मौसा जी से चुदवा कर पूरी खुश थी और वो मौसा जी से बहुत प्यार करती थी, उसने मुझसे सिर्फ इसलिए चुदवाया था की वो समझ गई थी की मौसा जी बच्चा पैदा करने में असमर्थ थे, उनके वीर्य में शुक्राणु या तो हैं नहीं या हैं तो बहुत कमजोर हैं, ये बात उसने अपना चेकअप करा कर जानी, क्योंकि जब उसमें कोई कमी नहीं थी तो जाहिर था की कमी मौसा जी में ही हो सकती थी, जबकि उसे और मौसा जी को बच्चे की बहुत चाहत थी, इससे पहले की मौसा जी ये बात जानें, गर्भवती होने के लिये मुझसे संबंध बना लिये, ताकि मौसा जी अपने बारे में जान कर हीन भावना से ग्रस्त ना हो जाएँ, अब वो गर्भवती हो चुकी है इसलिए वो उसके पास ना आया करे, अंत में उसने कहा मुझे तुमसे कोई लगाव नहीं है, अब इधर दुबारा फटकना भी मत,

मुझे दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया,


आपका दोस्त
राज शर्मा
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Reply
07-17-2017, 11:40 AM,
#2
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मम्मी – पापा का खेल

बबली मेरे पड़ोस मैं रहती थी. बचपन मैं हम एक खेल खेलते थे,
जिसका नाम था "घर-घर". उमर कोई यों ही 3-6 साल तक रहा करती
होगी. घर के किसी कोने मैं हम बच्चे लोग एक दो चदडार के सहारे
किसी बड़े पलंग के नीचे साइड से ढककर घर बनाते…फिर उसे
सजाते…छोटे छोटे खिलोनो से और ये खेल खेलते. दिन – दिन भर
खेलते रहते थे. खास तौर से गर्मियों की छुट्टियों मैं. एक बच्चा
डॅडी बनता…एक मम्मी बनती….और बाकी उनके बच्चे. फिर डॅडी ऑफीस
जाते…मम्मी खाना बनाती…..बच्चे स्कूल जाते….खेलने जाते……और वो सब
हम सब बच्चे नाटक करते….जैसा की अक्सर घर मैं होता था.अक्सर…
हम आस-पड़ोस के आठ-दस बच्चे इस खेल को खेला करते. पता नहीं उस
छोटी सी उमर मैं मुझे याद है , जब जब बबली मम्मी बनती थी और
मैं पापा, तो मुझे खेल मैं एक अलग सा आनंद मिलता था. सामने वाले
शर्मा जी की बेटी थी वो. शर्मा जी कोई बड़े अमीर तो ना थे, पर उनकी
बेटी, यानी की रिंकी…अपने गोरे-चिट रंग…और खूबसूरत चेहरे से,
शर्मा जी की बेटी कम ही लगती थी.

उस उमर मैं वो बड़ी प्यारी बच्ची थी. कौन जानता था की बड़ी होकर वो
सारी कॉलोनी पर कयामत ढाएगी! वो मेरी अच्छी दोस्त बनी रही , जिसकी
एक वजह ये भी थी की हम एक ही स्कूल मैं पड़ते थे. और धीरे
धीरे ज्यों ज्यों साल बीतने लगे….भगवान बबली को दोनो हाथों से
रंग रूप देने लगे….और दोस्तों रूप अपने साथ नज़ाकत…और कशिश
अपने आप लाने लगता है……खूबसूरत लड़की कुछ जल्दी ही नशीली और
जवान होने लगती है. बबली के 14थ जन्मदिन पर जब हम उसके स्कूल
और कॉलोनी के दोस्त उसे बधाई देने लगे……मैं एक कोने से छुपी और
चोरी चोरी की नज़रों से उसे देख रहा था. मेरी कोशिश ये थी कि
उसकी खूबसूरती को अपनी आँखों से पी लेने मैं मुझे कोई डिस्टर्ब ना
कर दे.वो एक मदहोश कर देने वाली गुड़िया की तरह लग रही
थी…….उसके हाव-भाव देख कर मेरी सारी नस तन गयी….करीब 18 बरस
का ये नौजवान लड़का अपनी झंघाओं के बीच मैं कुछ गरमी महसूस
कर रहा था….और मैने नीचे तनाव महसूस किया. बबली का गुदाज
जिस्म….अपने गोरेपन के साथ मुझे खींचता ले जा रहा था….उस नरम
त्वचा को छूने के लिए सहसा मेरे अंदर एक तड़प उठने लगी. कहीं
एकांत मैं बबली के साथ..केवल जहाँ वो हो और जहाँ मैं हूँ. और
फिर उस एकांत मैं नियती हमसे वो करवा दे जो की दो जवान दिल और
जिस्म नज़दीकी पा कर कर उठते हैं.

कुछ और समय बीता और बबली का शरीर और खिलने लगा…आंग बढ़ने
लगी और उसके साथ मेरा दीवानापन बढ़ने लगा…..एक सुद्ध वासना जो उसके
आंग आंग के कसाव, बनाव और उभरून को देख कर मुझे अपने आगोश
मैं लपेट लेती थी. तक़दीर ने मुझ पर एक दिन छप्पर फाड़ कर
खुशी दी. एक बार फिर मैने "घर-घर"का खेल खेला, पर करीब 15
बरस की जवान गदराई…भरपूर मांसल लड़की के साथ. केवल अपनी बबली
के साथ.

हुआ यूँ की फिर वही गर्मियों की छुट्टिया थी. बबली देल्ही जा रही
थी अपने अंकल के यहाँ. मैं भी देहली गया था किसी काम से. वापस
आते समय मैने सोचा की क्यों ना एक फोन कर के पूछ लूँ कि शायद
शर्मा जी का परिवार भी वापस चल रहा हो तो साथ साथ मैं भी
चलूं (दरअसल मैं बबली के साथ और दीदार के लिए मरा जा रहा
था.). फोन बबली ने ही उठाया और वो बड़ी खुश हुई की मैं वापस
जा रहा हूँ मुंबई, और बोली की वो भी चलेगी मेरे साथ. उसकी ज़िद के
आगे शरमजी झुक गये और इस तरह बबली अकेली मेरे साथ मुंबई चल
दी. हालाँकि वो घर पर अपने भाई के साथ रहती, पर मैं इस यात्रा से
बड़ा खुश था. मैने शताब्दी एक्स्प की दो टिकेट्स बुक की और हम
चले. मैने उसका परा ख़याल रखा और इस यात्रा ने हम दोनो को फिर
बहुत नज़दीक कर दिया. यात्रा के दौरान ही एक बार फिर घर –घर
खेलने का प्रोग्राम बना और बबली ने वादा किया की वो मेरे घर आएगी
किसी दिन और हम बचपन की यादें ताज़ा करेंगे. मैने महसूस किया की
वो अभी स्वाभाव मैं बच्चीी ही है..पर उसका जवान शरीर…..ग़ज़ब
मादकता लिए हुए था. हम बहुत खुल गये ढेर सी बाते की. उसने
मुझे यहाँ तक बताया की उसकी मम्मी उसे ब्रा नहीं पहने देती और इस
बात पर वो अपनी मुम्मी से बहुत नाराज़ है. मैने उससे पूछा की उसका
साइज़ क्या है.

उसने मेरी आँखों मैं देखा, "पता नहीं….."

कभी नापा नहीं. बबली बोली.

अच्छा गेस करो……. वो बोली.

मैने गेस किया – 34-18-35.

वाह…आप तो बड़े होशियार हो…..

अच्छा…. मेरा साइज़ बताओ?

लड़को का कोई साइज़ होता है क्या?

मैने कहा हां होता है……

तो फिर आप ही बताओ….मुझे तो नहीं पता

8 इंच….और 6 इंच

ये क्या साइज़ होता है…?

तुम्हे पता नहीं….?

नहीं…….वो बोली.

अच्छा फिर कभी बताऊँगा….!

नहीं अभी बताओ ना…प्लीज़ …..

अच्छा जब घर-घर खेलने आओगी तब बताऊँगा…..

प्रॉमिस?

यस प्रॉमिस.

इस यात्रा ने मेरा निश्चय पक्का कर दिया ….क्योंकि उसके बेइंतहा
सौंदर्या ने, उसके साथ की मदहोशी ने….उसके मांसल सीने को जब मैने
इतने नज़दीक से देखा……जीन्स मैं कसे उसके चौड़े गोल पुत्तों को
…उफफफफफ्फ़…मैं कैसा तड़प रहा था मैं ही जानता हूँ.

जल्द ही वो दिन आ गया…..मैं उस दिन घर पर अकेला था. बबली भी आ
गयी….लंच के बाद. मेरी त्यारी पूरी थी. एक बहुत सुंदर बीच ब्रा
और जी-स्ट्रिंग मैने खरीदी. एक नया जॉकी अंडरवेर अपने लिए या
कहूँ की उस दिन के लिए, जिसका मुझे किसी भी चीज़ से ज़्यादा इंतज़ार
था.

फिर उस दिन वो आई…लंच के बाद. वो सुबह टशन गयी थी, तब उसका
भाई ताला लगाकर कहीं चला गया था. कुछ और काम ना था तो वो
मेरे घर आ गई. उस दिन मैं भी अकेला था.क्या बताऊं जब दरवाजा
खोला और उसे खड़ा देखा तो मेरे बदन मैं एक झुरजुरी सी हो गई.
वो कमसिन हसीना मेरे सामने खड़ी थी.उन्नत तना हुई शर्ट मैं कसे
कसे बूब्स….वो गड्राया बदन….मेरी नस –नस फड़कने लगी. हम
बातचीत मैं खो गये. आख़िर वोही बोली चलो घर-घर खेलते
हैं…..जैसे हम बचपन मैं खेलते थे!

हां चलो…..बहुत मज़ा आएगा……देखते हैं बचपन का खेल अब खेलने
मैं कैसा लगता है……ठीक है…..तुम मम्मी …मैं डॅडी……

और हमारे बच्चे…? उसने हंसते हुए पूछा….

अरे हां….बच्चा तो कोई भी नहीं..है….तो फिर तो हम केवल पति
–पत्नी हुए ना अभी…..ना की मम्मी-डॅडी.

वो खुस हुई….हां ये ठीक है…..पति-पत्नी. आप मेरे पति और मैं
आपकी पत्नी. और आज हम पूरे घर के अंदर ये खेलेंगे…ना की किसी
कोने मैं…..

ओके….मैने कहा.

और हम पति-पत्नी की तरह आक्टिंग करने लगे. खेल सुरू हो गया. मैं
फिर उसकी खूबसूरती के जादू मैं डूबने लगा. मेरे शरीर मैं एक
खुशनुमा मादकता च्चाने लगी. उसके बदन को छूने …देखने के बहाने
मैं ढूँढने लगा. जैसे वो किचन मैं चाइ बनाने लगी…तो मैं
चुपके से पीछे पहुँच गया….और उसके बम्स पर एक चिकोटी काटी. वो
उच्छली…ऊऊ….क्या कर रहे हैं आप…..

अपनी खूबसूरत बीबी से छेड़ छाड़…..मैने मुस्कुराते हुए कहा.

वो वाक़ई मैं बेलन लेकर झूठ-मूठ मरने के लिए मेरे पीछे
आई….मैं दूसरे कमरे मैं भगा….उसने एक मारा भी…..

आआहह….तुम तो मारने वाली बीबी हो…..मैने शिकायत भरे स्वर मैं
कहा……देखना जो मेरी असली बीवी होगी ना….वो मुझसे पागलों की तरह
प्यार करेगी.

और आप….? आप उसे कितना प्यार करोगे….?

मैं…..आपने से भी ज़्यादा……दुनिया उसके कदमों मे रख दूँगा मैं…..

साच…? वो कितनी लकी होगी…..अच्छा आप उसे किस तरह पुकरूगे…?

मैं उसे हमेशा डार्लिंग कहूँगा…..

तो आज के लिए मुझे भी कहो ना….

ओके…..तो मेरी डार्लिंग बबली…..ये बेलन वापस रखो…..और नाश्ता
दो…..मुझे ऑफीस भी जाना है….

ओह…..हां अभी देती हूँ…..आप ऑफीस के लिए त्यार हो जाओ…

वो जैसे ही जाने लगी…मैने कहा एक मिनिट. वो रुकी. मैं आगे बड़ा ,
अचानक मैने उसे आपनी बाहों मैं उठा लिया…और ले चला….

आआहह….ऊओह…आप क्या कर रहे हैं……ऊओ..हह..और वो खिलखिलाई.

अपनी सुंदर सेक्सी पत्नी..को मैं ऐसे ही भाहों मैं उठा रखूँगा …..
डार्लिंग! मैने उसे उठा कर किचन तक ले गया….जिस्मों की ये पहली
मुलाकात बड़ी असरदायक थी. उसके दूधिया बूब्स की एक छोटी सी झलक
मिली जो उसने मुझे वहाँ पर देखते हुए देखा भी. झंघाओं का वो
स्पर्श…जब मैं उसे उठाए हुए था….धीरे धीरे उसके जिस्म से मेरी
छेड़ चाड बादने लगी. एक दो बार मैने उसे बाहों मैं भी भरा. वो
थोडा शरमाई भी..ज़्यादा नहीं…हल्की सी सुर्ख लाली …..गालों पर.

चलो आब ऑफीस जाओ…बहुत नटखट है ये मेरा पति…..सिर्फ़ शैतानिया
ही सुझति हैं आपको….वो बोली.

मैं झूठ-मूठ ऑफीस जाने का नाटक करने लगा (ये इस खेल का एक हिस्सा
होता था). ऑफीस जाने से पहले….मैं फिर उसके सामने खड़ा हो गया.

अब क्या है…..?

उसके कान मैं मैने कहा…….एक किस…..डार्लिंग, जो हर बीवी आपने पति
को ऑफीस जाने से पहले देती है.

और ये कहकर मैने उसे बाहों मैं भर लिया. वो
कसमसाई….छ्चोड़िए….क्या कर रहे हैं….बट अब मेरे होंठों ने….अपनी
प्यास भुझा ने की ठान ली थी. मैने उसे कसते हुए एक चुंबन उसके
दाहिने गाल पर जाड दिया…..सुंदर मदहोश कर देने वाला एक लंबा सा
किस. फिर उसे एक भरपूर नजऱ से देखा……उसके खूबसूरत चेहरे
को…दोनो मुस्कुराए…या मुस्कुराने की कोशिश की…..और फिर एक उनपेक्षित
चुंबन मैने उसके होंठो पर रख दिया. इस चुंबन ने जादू सा
किया. इसका प्रभाव ये हुआ की मेरे उठते हुए काम लंड ने इस चुंबन के
असर मैं आकर उसकी पेल्विस मैं एक चुभन दे डाली.ठीक वहीं
जहाँ…कुदरत ने उसका कर्म क्षेत्र बनाया है.

मैने एक बार उसके होंठ छोड़ दिए….कहा….तुम बहुत सुंदर हो
बबली….तुम जैसी ही बीवी तो चाहिए मुझे….. कितना सुंदर बदन है
तुम्हारा…..और एक बार फिर मैं उसके होंठ पीने लगा. एक लंबे
चुंबन के बाद….. उसने साथ नहीं दिया था…….मैने
पूछा….बबली….बुरा तो नहीं लगा?

नहीं…बिल्कुल नहीं…..आप तो किस करने मैं माहिर हैं!…. .वो नज़र
झुकाए ही बोली.

तो फिर तुमने क्यों नहीं किस किया मुझे…..?

मुझे नहीं आता …… आप सिख़ाओगे? अच्छा पर अभी आप ऑफीस जाओ……. वो
मुझे धक्का देने लगी.

अच्छा बाबा…जाता हूँ …..मैं हंसते हुए बोला.

मेरे लिए ऑफीस से वापस आते हुए क्या लाओगे…..?

एक गरमागरम किस…..

मारूंगी हां…..वो बनावटी गुस्से से बोली…..

मैं जाते हुए बोला…..अक्चा अक्च्छा मैं लाओंगा…..

थोड़ी देर के लिए मैं घर से बाहर गया. ऐसे ही नाटक करते हुए
मैं वापस भी आ गया. वो बेडरूम मैं थी. मैं चुपके से दूसरे
कमरे गया. उसके लिए मैने जो बीच ब्रा और जी-स्ट्रिंग पॅंटी खरीदी
थी वो पॅकेट निकाला……इन कपड़ों को चूमा. फिर जैसे की ऑफीस से
वापस आ गया……वापस बेडरूम मैं आ गया, जहाँ वो लेटी थी.

फिर यूँ ही खेल के कुछ और हिस्से चले…..फिर शाम भी हुई ….घूमने
गये….एसा करते करते हमारे खेल मैं रात आई…

इस खेल के डिन्नर के बाद…..? जब हमै रात मैं एक साथ सोना
था…उस समय उसने पूछा ….मेरे लिए क्या लाए…?

मैने पॅकेट उसके हाथ मैं दिया……देखो…..

क्या है….. वो ब्रा और पॅंटी निकालते हुए बोली……

वाउ….कितनी सुंदर है ये…..पर ये तो बहुत छोटी छोटी हैं…….

ब्रा और पॅंटी कोई बड़ी बड़ी होती हैं क्या…? मैं तो अपनी बीवी को ऐसी
ही पहनाओंगा….

पहनकर तो देखो…..

ओके….देखती हूँ…सच आप वाक़ई अच्छे पति हो आपको याद था की मुझे
ब्रा पहनना बहुत पसंद है? थॅंक यू…

थॅंक यू से काम नहीं चलेगा….पहनकर दिखना पड़ेगा……मैं भी तो
देखूं 34-18-35 के खूबसूरत जिस्म पर ये कैसे सुंदर लगते हैं….!

धात…स्ष…मैं कोई इन कपड़ों मैं आपके सामने आओंगी…?

क्यों भाई पति से शरमाओगी क्या? तो फिर दिखओगि किसे …डार्लिंग?
प्लीआसस्स्सीए! दिखाओ ना!

आच्छा ठीक है पर दूर से देखना पास ना आना. ओके?

ठीक है बाबा…तुम जाओ तो सही!

और ये क्या है…ये मेरा अंडरवेर है…..मैने आपना जॉकी उसके हाथ से
लेते हुए कहा….

वो दूसरे कमरे मैं चली गई…….मैने बिजली की फुरती से अपने कपड़े
निकाले और सिर्फ़ वो नया जॉकी का अंडरवेर पहन लिया….और मिरर के
सामने देखने लगा. जैसे की देख रहा हूँ कि ये अंडरवेर कैसा लगता
है. अंडरवेर बहुत सेक्सी था.फ्रंट मैं सिर्फ़ लंड को कवर करता
था.बाकी उस्मै बॉल तक सारे दिख रहे थे.

उसने आवाज़ दी ….मैं आऊ?

हां हां…डार्लिंग…मेरी जान आओ….!

वो थोड़ा शरमाती हुई आई…..अभी मैने उसके बदन की झलक ही देखी
थी की वो …वापस पलट गई….उउउइइइइमम्माआ……..!!!!!!!!!!!

मैं उसके पीछे लपका….और दूसरे कमरे मैं उसके सामने खड़ा हो गया.

एयाया….प्प्प..प्प्प नंगे क्यों हो गये…?

मैं….तो…तो..तो…अंडरवेर …पा…आ..आ..हहान..सीसी..आ….र्ररर देख रहा था….था…!

फिर हुमारे मुख मैं जैसे बोल अटक गये. मैं भी रोज एक्सर्साइज़ करता
था और मेरा बदन भी बड़ा गथीला था. वो मेरे जिस्म मैं खो गई
और मैं उसके उठाव –चढ़ाव- उतराव मैं. एक कमसिन अक्षत कौमार्या
मेरे सामने लगभग नग्न खड़ी थी. उस नयी जवानी भरे जिस्म पर वो
उठे हुए कसे कसे बड़े बड़े बूब्स….वो पतला सा पेट…..दुबली सी
कमनीया कमर….और फिर चौड़े नितंब……जी-स्ट्रिंग तो उसके उभरे हुए
गुलाबी चूत को भी पूरा नहीं धक पा रही थी.थोड़े थोड़े से रेशमी
बाल इधर उधर बिखरे थे.उसका वेजाइनल माउंड काफ़ी बड़े आकर का और
उभरा हुआ था…फूला फूला सा. और उसकी वो मादक झंघा….पतली लंबी
टांगे……बला की सेक्सी थी वो…फिल्म की हेरोयिन भी क्या उसके सामने
टिकेंगी…..मैं अचंभित सा कामुक दृष्टि से उसे यौं ही देखता
रहा….और कब मेरा लंड टंकार खड़ा हो गया …..मुझे खुद पता ना
चला.

पीछे….मम्मूउउद्दू तो….मैने अपना थूक अंदर घुटकते हुए कहा……

वो मूडी…..

आआआआआआआहहहहाहह…..व्वाअहह हह……

क्या ग़ज़ब का दिर्ष्या था….!दाग रहित गोरा धुधिया बदन….!उसके
बटक्स बिल्कुल डी शेप मैं थे…बड़े बड़े….पूरे नंगे…गस्टरिंग उनको
बिल्कुल भी नहीं ढक रही थी…..

मैने कहा…..बहुत कमसिन और खूबसूरत है तुम्हारा बदन मेरी
बबली….बहुत मादक और सेक्सी हो तुम….

आअप भी बहुत हॅंडसम और मसकुलीन हैं……..वो बोली….

उसकी नज़र मेरे तने हुए अंडरवेर पर थी. मेरा लंड जैसे की
अंडरवेर फाड़ देने को बेताब था.उसने अंडरवेर को एकदम 120 डिग्री
का तनाव दिया हुआ था…..और साइड से देखने पर मेरे टेस्ट्स…जो की
लगभग एग्स जैसे बड़े हैं….सॉफ दिख रहे थे….और साथ मैं मोटी
तनतनी शाफ्ट भी. जहाँ पर मेरे लंड का हेड अंडरवेर को छू रहा
था वहाँ अंडरवेर गीला हो गया था.

मैं आगे बड़ा…..वो पीछे हटने लगी…..चलते समय मेरा लंबा लंड
उप आंड डाउन हिल रहा था…मैने देखा उसकी नज़र वहीं पर थी. पीछे
जाते जाते वो दीवार पर चिपक गई….उसने एक मादक सी आंगड़ाई अपने
बदन को दी…..मेरे लंड ने प्री-कम की एक और बूँद उगली.

मैं जानती हूँ उस दिन आप मेल के किस साइज़ की बात कर रहे थे…..!

मैने उसे बाहों मैं लेते हुए कहा…..किस चीज़ के साइज़ की बात कर
रहा था मैं…?

आब तक मेरे हाथों ने उसकी कमर को पकड़ लिया था……

उसने अपने हाथ से मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को हल्का सा
पकड़ते हुए कहा ……. इसकी….! ये 8 इंच लंबा है…और 6 इंच मोटा
है…सर्कंफरेन्स मैं…..!

गुड…! किसने बताया …?

मेरी सहेली ने…..वो तो आपका ये देखना चाहती है…..!

तुम नहीं देखना चाहोगी?

उसने शरम से चेहरा नेरए सीने मैं छुपा लिया……मैने उसकी पीठ को
सहलाया….एक हाथ से उसके चेहरे पर से जुल्फ हठाते हुए उसके कानों
के नीचे…नरम गोस्त पर लजरता चुंबन दिया. मेरी उंगलियों ने ब्रा का
धागा खोल लिया……ब्रा गिर गई….नंगे बूब्स जैसे ही आज़ाद हुए उनके आकर
मैं बाडोतरी हुई और मेरे सीने पर उन्होने दस्तक दी. शायद नीचे
मेरा लंड और थोडा लंबा होकर थोडा और हार्ड हो गया. आब मेरे हाथ
उसके चुटटर सहला रहे थे.वो कामुक हो चुकी थी…..उसके और ज़्यादा
कठोर होते बूब्स इस बात की गवाही दे रहे थे.मैने ज्यों ही पॅंटी के
अंदर हाथ डाल कर उसके चुचि पर उंगली फिराई….उसके मुँह से आवाज़
निकली ….सस्स्स्सस्स म्‍म्म्ममम….राआअज

हन मुझे भी देखना है…आआ..आ…प्प..प्प…कककक…सीसी..आ..आ…..ळ्ळ्ळुउउउन्न्द्द… ..!

तो फिर मेरा अंडरवेर उतारो…!

वो झुकी घुटनो पर बैठ गई……और मेरा अंडरवेर उसने निकाल दिया.
लंड जैसे….की कोई शेर पिंजरे से आज़ाद हो गया हो….तुरंत ही उसने 3-4
प्रेकुं की बूँदें उगली…..

कैसा है…..

बड़ा गरम है…वो छूकर बोली….बाप रे कितना लंबा और मोटा है..पर
बहुत शानदार…..कितना बड़ा है आपका….और कितना मोटा….

किस करो ना…इसे…तुम्हे अच्छा लगा मेरी रानी..मैने उसके बालों मैं
हाथ फिरते हुए और अपने टेस्ट्स उसके होंठो पर रगड़ते हुए कहा.

उसने अपने होंठ पीछे बढ़ाए….और लंड के हेड को चूम लिया. फिर
थोडा रुककर एक और चुंबन उसका लिया….लंड दहाड़ उठा….और प्रेकुं की
चार बूंदे उसके होंठो पर गिरा दी…...

क्या तुम इसे चूसना पसंद करोगी……? इसकी पूरी लंबाई को?

ऊओ…हां…आप कहते हो तो…ज़रूर…पर ये बहुत मोटा है मेरे मुँह
मैं जाएगा…?

हां कोशिश तो करो…

वो मेरी टाँगों से चिपक गई. उसने मेरे चुट्टर पकड़ लिए. उसके बूब्स
मेरी झंघाओ से घर्षण कर रहे थे. बबली ने तने हुए लंड के
हेड को अपने मुँह से पकड़ा और फिर पुश करते हुए…पूरा हेड पहले
अंदर ले लिया. मैं तड़प उठा….मैने उसका सिर पकड़ा और लंड को आगे
पुश किया….आधा लंड उसके मुँह मैं था. वो उसे अपने थूक से गीला
कर रही थी. फिर उसने उसे चूसना सुरू किया.मुँह के अंदर
बाहर….फिर उसने उसे निकालकर चाटा …शाफ्ट की लंबाई पूरी चाटी. मैं
स्वर्ग मैं था…थोड़ी देर बाद मैने उसे मना किया की वो आब मत करे.
वो उठ गई…

कैसा लगा आपको?

तुम बहुत अच्छा चूस्ति हो….आब मुझे अपनी चूत नहीं दिखावगी?

पहले आप एक वादा करो!

क्या…?

कि आज रात आप मेरे साथ सुहग्रात मनाओगे……मैने सुना है उस्मै
बड़ा मज़ा आता है! सुना है दूल्हा और दुल्हन सारी रात नंगे होकर
बिस्तर पर कोई खेल खेलते हैं….चुदाई का….फिर दूल्हा दुल्हन को अपने
बच्चे की मम्मी बना देता है….अपने लंड को दुल्हन की चूत मैं
डालकर…और इस मैं बड़ा मज़ा आता है….

तुम्हे किसने बताया..? मैने पूछा.

मेरी सहेलिओं ने क्लास मैं….

ओह….15 साल की उमर मैं ही तुम्हारी सहेलिया बड़ी होशियार हो गई हैं…

हां मेरी एक सहेली की दीदी की शादी हुई है ना अभी 2 महेने पहले.
तो उसकी दीदी ने उसे बताया की सुहग्रात मैं बड़ा मज़ा आया. इतना की
सारी रात मनाई. उसकी दीदी ने तो ये भी बताया की उसके जीजाजी ने उसकी
दीदी की चूत मैं अपने लंड से खूब वीएरया भरा और आब उसकी दीदी
मम्मी बन जाएगी. फिर एक दिन मेरी सहेली ने अपने जीजाजी से कहा की वो
उसके साथ भी मना दे सुहग्रात…..एक दिन वो सोई भी अपने जीजाजी के
साथ …पर जीजाजी उसके साथ चुदाई ना कर सके…..

क्यों?

वो अपना ये लंड मेरी सहेली के चूत मैं घुस्सा ना सके. मेरी सहेली
तदपकर रह गई…

अपनी सहेली को मेरे पास लेकर आना…कितनी उमर है तुम्हारी सहेली की?

14 साल…..आपके पास लाउन्गी तो आप उसके चूत मैं घुसा दोगे?आपका तो
इतना मोटा लंड है….

पगली ये लंड घुस्साना तो एक कला है ……हर मर्द थोड़े ही जानता
है…..खास तौर से कक़ची चूत छोड़ना आसान नहीं है…और कितनी
सहेलियाँ है तुम्हारी…..जो अपना कौमार्या लुटाना चाहती हैं?

सात – आठ…है…लेकिन किसी ने सुहग्रात नहीं मनाई..कभी …आप
मनाओगे ना आज मेरे साथ….मेरे दूल्हा बनकर…..?

हां ज़रूर…तुम्हारे इस मादक जिस्म की कसम मैं आज रात वो सुहग्रत
मनऊंगा तुम्हारे साथ …जैसी किसी लड़के ने किसी लड़की के साथ नहीं
मनाई होगी!

साच….? और फिर मेरे गर्भ को भी सींच देना….मैं आपको अपने
जीवन का पहला पुरुष मानकर अपने गर्भ मैं सबसे पहले आपके
वीरया की बूँद चाहती हूँ……आप दोगे ना?

हां मेरी रानी….क्यों नहीं….

तो फिर मैं आपके लंड के लिए अपना कौमार्या समर्पित करती
हूँ….!पर आप प्यार से करना मेरे साथ….मैं कच्ची कली हूँ
ना…..मेरी चूत बहुत टाइट है…..प्लीज़ धीरे धीरे चोदना मुझे
मेरे राजा……मेरे दूल्हे…..और वो मुस्कुरई…

उसने फिर जल्द ही अपनी पॅंटी उतार दी और पूरी नंगी खड़ी हो
गई…..मेरे तने लंड के सामने. मैने देखा… उसके चूत से रस बह रहा
था. वो पूरी तरह गीली थी. मैने उसे उठाया और बेडरूम मैं लाकर
उसे बिस्तर पर रख दिया. फिर उस पर चढ़ बैठा….उसके बूब्स चूसने
के लिए बेताब था मैं. हम जल्द ही गूँथ गये….दो जवान भूखे
जिस्म…जो आज पहली बार कॉम्क्रीडा करने जा रहे थे…! एक दूसरे पर
जैसे झपट पड़े….मैं उसके बूब्स बुरी तरह चूस रहा था…

उउउफ़फ्फ़…आ..हह..आआ..हह प्लीज़ थोड़ा धीरे….कतो ना…..उूउउइयौर
ज़ोर से चूसो…

दोनो बदन तप उठे. वो बुरी तरह तड़प उठी…..फिर मैने उसकी नाभि
से खेला….तो उसने मेरे सिर को अपने गुप्ताँग की तरफ धकेला….मैं
उसका इशारा समझ गया…तुरंत ही मेरे मुँह ने उसके उभरी हुई चूत
को किस किया और मैं फिर उसकी चूत को चाटने और पीने लगा. उसकी
झिर्री पर अपनी झीभ की नोक फिराते हुए…मैने उसके चूत के होंठ
खोलने चाहे….पर वो बेहद टाइट थे…फिर मैने वो इरादा छोड़ा और उस
झिर्री पर जीब की नोक फिराते हुए जीब को नीचे ले जाने
लगा….गुप्ताँग के नीचे चाटा कुरेदा….किस दिए…और फिर करते करते
जीब की नोक से उसके चुटटर के छेद को कुरेदने लगा. कभी मैं उसे
चाट लेता पूरी जीभ का चपटा भाग रखकर….मुझे मज़ा आ रहा था…वो
और ज़्यादा तड़पति जा रही थी…उसका बदन आब ज़ोर ज़ोर से उछल रहा
था. वो बहुत आवाज़ें भी निकाल रही थी…..पर मेरा घर बहुत बड़ा
है……उस शोर से मेरी कामग्नी और भड़क रही थी…सो मैने उसे और
तड़पाने लगा.

म्‍म्म्मायन्न…म्‍म्माआररर …ज्ज्जााूऊन्नननज्गगीइइइ …. प्प्प्ल्लीआसए.. मैं
उसकी ऊट मे उंगली डाल कर उसे थोड़ी ढीली करने की कोशिश कर रहा
था.. साथ ही जीभ से चाट रहा था.
मैने देखा की उसकी चूत से बहुत पानी निकल रहा है.. वो मेरे तने
हुए लंड को मसालने लगी .. मैं अब उसके पैरों को फैलाकर उसके बीच
मे बैठ गया.. और अपना लंड उसके चूत के दरार मे रगड़ने लगा.. वो
तड़प उठी.. राज.. मेरी चूत मे कुछ हो रहा है.. आग लग गयी
है.. मैने पास रखी पॉंड्स कोल्ड क्रीम की बॉटल से पूरी क्रीम अपने
लंड पर लगाया और उसकी चूत मे क्रीम डाल कर एक उंगली घुसाई..
बहुत टाइट थी उसकी गुलाबी ऊट.. वो सिहर उठी.. कहा दर्द हो रहा
है.. मैने कहा थोड़ा दर्द बर्दाश्त करो मेरी रानी.. अब लंड का मोटा
सूपड़ा उसकी चूत के छेद पर रखा और दबाया.. क्रीम की वजह से
लंड का सूपड़ा फिसलने लगा क्यूकी चूत टाइट थी. मैने फिर से लंड
को टीकाया और कमर टाइट करते हुए एक झटका दिया और वो चीख
पड़ी.. मैने उसके मुँह पर हाथ रखा.. और दूसरा धक्का दिया.. और
उसकी चूत ने खून की पिचकारी चला दी… उसने ज़ोर से मेरे हाथ मे काट
लिया जिससे मेरे हाथ से भी खून निकल आया.. उसकी आँखे बाहर निकल
आई और आँसू बहने लगे.. मैं उसे किस करने लगा…"राज …
निकाआआल्ल्ल लूऊओ…. मैं मर् जाउन्गी… ऊहह..माआआ. बहुत दर्द हो
रहा है…. मैने नीचे देखा मेरी चादर पूरी लाल हो गयी थी.. ये
देख कर मैं रुक गया लेकिन लंड बाहर नही निकाला.. उसका दर्द कम
होते ही मैने और एक धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे
डाल दिया और उसके होंठो को मेरे होंटो से पकड़ लिया .. वो
गगगगगगगगग…. करने लगी.. मेरी पकड़ मजबूत थी..करीब 3-4 मिनूट के
बाद उसका दर्द कम हुआ और मैने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर
करना शुरू किया.. उसे भी मज़ा आने लगा.. और 2 मिनूट मे ही वो झाड़
गयी.. मैने स्पीड बढ़ा दी.. अब वो भी मज़े लेने लगी.. ज़ोर से ..
मेरे दूल्हे राजा.. चोदो अपनी दुल्हन को अच्छे से चोदो.. आज तुमने
मेरी चूत फाड़ ही दी.. कितनी लकी हूँ मैं.. मेरी सहेली के जीजा से
तुम ज़्यादा अच्छे हो..आआआहह… ज़ोर से..मैं भी ज़्यादा रुकने की
पोज़िशन मे नही था.. मैने अब तूफ़ानी धक्के मारते हुए पूरे लंड को
बाहर खीच कर धक्के लगाने शुरू किए.. और फिर जड़ तक उसकी गुलाबी
चूत मे डाल कर मेरे लंड का पानी डाल दिया.. और उसकी चूंचियों
को चूमते हुए उसके उपर लेट गया..
हम दोनो तक गये थे.. इसलिए सो गये.. शाम को करीब 4 बजे उठे
.. दोनो बाथरूम गये और नहाए.. फिर वो शरमाती हुई.. अपने घर
चली गयी.. मैने देखा उसे चलने मे काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी..
दोस्तो कैसी लगी ये कहानी आपको
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07-17-2017, 11:40 AM,
#3
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मेरी नादान मोहब्बत

हेलो दोस्तो मैं आपका दोस्त राज शर्मा एक और नयी कमसिन कली की चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ अब ये फ़ैसला तो आप ही करेंगे कहानी आप सब को कैसी लगी दोस्तो कोमेंट देना मत भूलना
मेरी उम्र करीब 32 साल है मैं एक प्राइवेट कोम्पनी मैं मेनेज़र हूँ एक दिन शाम को ऑफीस से जल्दी घर जा रहा था.रास्ते मे अचानक एक बोल्ल मेरे सिने पर लगी.मेने नजर उठा कर देखा तो एक घर की छत पर एक 15 साल की लड़की ओर एक 10 साल का लड़का खड़े थे,जो की शायद खेल रहे होगे ओर उनकी बोल्ल मुझे आकर लगी.मेने वो बोल उठाई ओर उनकी तरफ फैंकते हुए कहा की ध्यान रखकर खेलो, किसी को लग जाएगी.वो कुछ भी नही बोले.ओर मेरी तरफ देखते रहे.फिर मे जाने लगा.काफ़ी दूर जाकर मेने सोचा की क्या बात हो सकती हे ये बच्चे मुझे बड़े गोर से देख रहे थे.इसी कशमकश मे मेने पलट कर देखा,तो मेने पाया की वो दूर से अभी तक भी मुझे देख रहे थे.फिर मे चला गया.ओर अपने घर आकर अपने कामो मे मशरूफ हो गया.दूसरे दिन मे रात को 9 ब्जे वही से निकला , तो मेने देखा की वो 15 साला लड़की छत पर खड़ी किसी का इन्तिजार कर रही थी.मेने गुज़रते हुए एक बार उसकी तरफ देखा, तो पाया की वो बड़े ही गोर से मेरी तरफ देख रही हे.मुझे एसा महसूस हुआ की शायद वो मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.खैर मे चुप चाप वाहा से चला गया.मेने इस बात को नॉर्मल ही लिया.तीसरे दिन ऑफीस मे ज़्यादा काम होने की वजह से मे रात 11 बजे फारिग हुआ.ओर घर की तरफ जाने लगा.तो मेने देखा की वही लड़की छत पर बैठी मेरा इन्तिजार कर रही है.मैं हेरत भरी निगाहो से उसे देखता हुआ चला गया.अब रात को मेरा सोना भी दुश्वार हो गया.सोचता रहा की ये लड़की जिसकी उम्र मुझसे आधी भी नही हे,ये क्यू मेरा इन्तिजार करती है ? आख़िर क्या बात है,ये रोजाना मुझे मोहब्बत भरी निगाहो से क्यू देखती है.ओर ये क्या चाहती हे.इन्ही ख़यालो मे मैं कब नींद की आगोश मे चला गया मुझे पता भी नही चला.इस तरह ये सिलसिला कई माह तक चला मे रोजाना ऑफीस से घर को जाता ओर देखता रास्ते मे वही लड़की अपने घर की छत पर मेरा इन्तिजार कर रही होती.उसे ये भी मालूम था की शुक्रवार को मेरी छुट्टी रहती है इसलिए वो शुक्रवार को इन्तिजार नही करती.मुझे भी पता नहीं क्या हो गया की गुज़रते हुए मे उसकी छत पर ना चाहते हुए भी ज़रूर देखता. एक बार रात को मे ऑफीस से लॉट रहा था तो मेने उस लड़की की छत पर देखा मुझे वो नजर नहीं आई.फिर मेरी नज़र उसके घर के दरवाजे पर पड़ि , मेने देखा की वो दरवाजे पर खड़ी शायद मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.मुझे आता देख कर वो मेरी तरफ आने लगी.ओर मेरे पास आकर एक लेटर मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोली की ये लो, ये आपके लिए है.मेने पूछा की ये क्या हे ? तो वो बोली की इसे घर जाकर पढ़ना सब समझ मे आ जाएगा.मेने कुछ सोच कर वो लेटर लेलिया.ओर चलने लगा.घर पहुचते ही मेने जल्दी से उस लेटर को खोला ओर देखा , तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई , उसमे लिखा था '' ए अजनबी इंसान, जब से आपको देखा है आप ही के ख़यालो मे गुम हू.जिस दिन आपका दीदार न्ही होता वो दिन मेरी जिंदगी का सब्से बेकार दिन होता है.रोजाना आपके दीदार से अपनी आँखो की प्यास बुझाती हू.ओर आपके दीदार के लिए दिन भर रात के आने का इन्तिजार करती हू.हर वक्त आपके ख़यालो मे गुम रहती हू, खाना पीना खेलना कुछ भी अछा न्ही लगता.इसे मे क्या कहूँ , मोहब्बत का नाम दुगी तो शायद आपको बुरा लग जाए.की आपकी ओर मेरी उम्र मे बहुत ज़्यादा फरक है.मगर प्यार उम्र को न्ही देखता , दिल को ओर उसके ज़ज्बात को देखता है.मे न्ही जानती की आप मुजसे मोहब्बत करेगे या न्ही मगर मे आपसे बेहद मोहब्बत करने लगी हू.अगर मुझे अपनी मोहब्बत के काबिल समझो तो मेरे लेटर का जवाब ज़रूर देना.ये लेटर पढ़कर मे सोचता ही रह गया , ये नादानी है या प्यार ? वो लड़की अभी तक बच्ची है,फिर उसने ये सब केसे किया क्यू किया.इसी तरह सोचते सोचते मुझे नींद आगाई.ये प्यार न्ही बलकी ये तो बचपना है,नादानी है.मेने सोचा की करू भी तो क्या करूँ.फिर इसमे मुझे अपनी भी कुछ ग़लतिया नजर आई,वो ये की क्यू मे रोजाना वाहा से गुज़रता हू.ओर क्यू मेरी नज़र उसे देखती है.मुझे अपने उपर सरमींदगी महसूस हुई.फिर मेने सोचा की इसको समझना चाहिए.मेने एक जवाबी लेटर लिखा जिसमे मेने उससे अकेले मे मिलने की ख्वाहिश का इज़हार किया.वो पढ़कर बहुत खुश हुई.ओर मिलने को राज़ी हो गई.एक पार्क मे हम दोपहर के वक्त मिले.मेने उसे कहा की देखो अभी तुम बहुत छोटी हो, तुम्हारी इन सब चीज़ो की उम्र न्ही है.तो वो बोली की प्यार उम्र न्ही देखता.मेने कहा की जिसे तुम प्यार का नाम देती हो वो प्यार न्ही , बलकी नादानी हे, बचपना है.वो बोली की आप मुजसे प्यार करते है या न्ही मे न्ही जानती , मगर मे आपसे अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत करती हू.मेने उसे हर तरीक़े से समझने की कोशिशे की मगर वो कम उम्र लड़की मेरी हर बात का जवाब देकर मुझे खामोश कर देती.आख़िर मे मेने कहा की आज के बाद मे उस रास्ते से न्ही गुजरगा, जहा तुम रहती हो.वो बोली की मे फिर भी इन्तिजार करूगी.फिर वो चली गई.ओर मे भी घर आ गया.मे हर वक्त यही सोचता रहता की इसकी नादानी इसकी जिंदगी बर्बाद कर देगी, ये बच्ची समझने के लिए बिल्कुल तय्यार न्ही.मे कई दिन तक उस रास्ते से न्ही जाता जहा पर उसका घर आता था.फिर मेरे एक दोस्त ने एक दिन मुजसे कहा की यार घर जाते हुए मे रास्ते मे एक लड़की को छत पर उदास उदास बैठा देखता हू,वो रोजाना जेसे किसी के इन्तिजार मे आँखे बिछाए बैठी रहती है.रात को 12 ब्जे तक वो एसे ही अपने घर की छत पर बैठी नीचे देखती रहती है.ये सुनकर मेरा दिल पासिज़ गया , ओर आँखो से आँसू बहने लगे.मे समझ गया की ये वो ही नादान लड़की हे , ओर वो मेरा इन्तिजार करती रहती है.उस दिन मे भी उसी रास्ते से निकला , मुझे आता देख कर वो खुशी से झूमने लगी.मेने उसकी उदास आँखो मे एक नई चमक देखी.उस मंज़र को मे बयान न्ही कर सकता की उसकी खुशी का आलम क्या था.मेने एक नजर देखा फिर नज़रे नीची करके चला गया.मगर ये सारा मामला मेरा पीछा न्ही छोड़ रहा था.बार बार ना चाहते हुए भी ख़याल उसकी तरफ चले जाते.दूसरे दिन मे स्कूटेर प्र कही जा रहा था , ओर इन्ही ख़यालो मे गुम सोचता हुआ जा रहा था , की अचानक एक टॅक्सी से टकरा गया.ओर मेरा एक हाथ ज़ख्मी हो गया.दर्द ज़्यादा होने की व्जाह से डॉक्टर ने हाथ पर पट्टी बाँध दी थी.दूसरे दिन मे रात ऑफीस से उसी रास्ते से गुजरा , तो देखा की वो लड़की छत पर उसी तरह


बैठी है.उसकी नज़र मेरे हाथ पर पड़ी , जिसपर पट्टी बँधी हुई थी.वो दौड़कर नीचे आई.ओर चुप चाप मेरे पीछे पीछे चलने ल्गी.फिर एक सुनसान जगह देखकर उसने कहा की रुकिये तो………… मे रुका.उसने पूछा की ये चोट केसे आई.मेने कहा की कल आक्सिडेंट हो गया था.ये सुनकर उसके चहरे का रंग उड़ गया.ओर बोली की ज़्यादा चोट तो न्ही आई ? तो मेने गुस्से मे कहा की ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है.ओर मे गुस्से मे जल्दी जल्दी कदम बढ़ाता हुआ चला गया.मेने महसूस किया की वो रोटी हुई वापस चली गई.मुझे घर जाकर अपनी बात का बेहद दुख हुआ.मेने सोचा की यार मेने क्यू उस मासूम लड़की का दिल दुखा दिया , मुझे एसा न्ही करना चाहिए था.फिर मेने एक लेटर उसके नाम लिखा जिसमे मेने उससे कल वाली बात की माफी माँगी,ओर सोचा की कल ऑफीस से वापस आते वक्त उसे देदुगा.दूसरे दिन जब मे ऑफीस से उस रास्ते से गुजरा , तो ये देख कर मेरे होश उड़ गये की उस लड़की के हाथ पर भी पट्टी बँधी हुई थी.मे कुछ सोचता हुआ कुछ दूर गया , मेने पीछे किसी के कदमो की आहट सुनी.पलट कर देखा तो वो लड़की खड़ी थी.मेने उससे पूछा की ये तुम्हारे हाथ को क्या हो गया ? तो वो बदी मासूमियत से बोली की मेरी वजाह से आपका आक्सिडेंट हुआ , इसी लिए आज मेने अपने हाथ को भी ज़ख्मी कर लिया.ये सुनकर मेरे तो हवाश ही जाते रहे.फिर वो बोली की इन हाथो को मेने इसलिए भी ज़ख्मी किया हे ताकि मुझे अपने महबूब की तकलीफ़ का अहसास हो सके.मेने उससे कहा की ये पागलपन हे , वो बोली की न्ही ये सच्चा प्यार हे.फिर मे चला गया.पर रात भर उसकी दीवानगी मेरी आँखो के सामने घूमती रही.मे क्या करू इस नादान लड़की का ? इसको हर तरीक़े से समझा कर देख लिया मगर इसके दिमाग़ मे कुछ आता ही न्ही.अगर ये इसी तरह करती रही तो , मे भी बदनाम हो जाउन्गा ओर इसका तो पता न्ही क्या होगा.मेने ये फेसला किया की इसके मा बाप से बात करनी चाहिए शायद वो इसकी बीमारी का इलाज़ कर सकें.मे हिम्मत करके दिन मे उसके घर गया ओर उसके अम्मी पापा से हाथ जोड़कर कहने लगा की आप मुझे ग़लत मत समझना , ओर मेरी बातो का बुरा मानने के बजाय उस पर गोर करना.फिर मेने उनको सारी कहानी बता दी.मेरी बाते सुनने के बाद उसके पापा बोले की शुक्रिया जनाब , की आपने हमें वक्त पर सब कुछ बता दिया ,वरना हम तो बदनाम हो जाते.वो मेरी बतो का बिल्कुल बुरा न्ही माने.ओर मुझे बा इज़्ज़त विदा किया.मुझे दरवाजे तक पहुचा कर वो अंदर गये ओर जाते ही उन्होने उस लड़की को बुरी तरह से मारना सुरू किया.वो लड़की बे तहाशा रो रही थी, ओर कह रही थी की पापा आप मुझे जान से मार दे मगर मे उस शख्स से मोहब्बत करती रहूगी.ओर उसके मा बाप उसे मारते रहे.मे अपने घर चला गया.मगर मुझे बहुत ज़्यादा दुख हो रहा था , की मे कैसा जालिम हू की जो मेरे लिए अपनी जान की भी फ़िक़र न्ही कर रही मे उसे उसके मा बाप से पिटवा रहा हू , जेसे की मे ही उसे अपने से मोहब्बत करने की सज़ा दिला रहा था.मेरा दिल बहुत दुखी हुआ.लेकिन मे भी तो क्या करता , वो लड़की जिसकी उम्र मुजसे आधी है जो मेरी मोहब्बत मे पागल हुए जा रही थी.उसे रास्ता दिखाने के लिए , ओर उसे इस बीमारी ओर नादानी से बचाने के लिए मजबूर होकर मुझे ये कदम उठाना पड़ा.खैर फिर मेने उस रास्ते से गुज़रना ही छोड़ दिया.काफ़ी दिन गुजर गये.मेरे घर वालो ने मेरी मँगनी भी कर दी , मगर ना जाने क्यू वो नादान लड़की का मासूम चेहरा हर वक्त मेरी नज़रो के सामने घूमता रहता.रात को सोता तो उसका मेरी खातिर अपने हाथ को ज़ख्मी करना , मेरी खातिर अपने घर वालो से मार खाना ये सब मुझे याद आता , ओर मेरी आँखो से आँसू बहने लगते.क्या कोई किसी से इतनी मोहब्बत कर सकती हे जितनी उस नादान ने मुजसे की.ना जाने क्यू मेरा दिल उसकी तरफ खिचने लगा.उसके लिए मेरे दिल मे भी इतना सारा प्यार उमड़ आया.कुछ भी हो उस लड़की ने मुजसे सच्चा प्यार किया है.इसी तरह सोचते हुए दिन गुजरने लगा.ओर मे ना चाहते हुए भी उस नादान की तरफ खिचता चला गया..ओर मे भी उससे मोहब्बत करने लगा.एक दिन मे ऑफीस मे काम कर रहा था , इतने मे उसी लड़की का बाप मुझे तलाश करता हुआ आया , ओर बोला की बाबूजी जरा बाहर आना.मे डर गया की क्या हो गया , ओर मे उसके साथ बाहर गया.बाहर आकर उसने बताया की मेरी बेटी को ना जाने केसे पता चल गया की आपकी माँगनी हो गई हे , उसे इस बात का बहुत ही ज़्यादा सदमा पहुचा.ओर उसने खाना पीना सब छोड़ दिया , इस वजाह से उसकी हालत बहुत ज़्यादा खराब हो गई.हमने उसे हॉस्पिटल मे अड्मिट करवाया है.बेहोशी मे आपको ही याद कर रही हे , डॉक्टर्स ने कहा की इस शख्स का यहा होना बेहद ज़रूरी है , वारना इसकी हालत ठीक न्ही हो सकेगी.ये बाते सुनकर मे फॉरन उनके साथ हॉस्पिटल गया.ओर अपनी उस नादान आशिक़ा को देखा.वो बेहोश थी.उसकी हालत देख कर मेरी आँखो मे आँसू आ गये , ओर मेने सोचा की अगर मेने इतना ज़्यादा चाहने वाली इस नादान महबूबा का दिल तोड़कर किसी ओर से शादी की , तो मे खुद कभी भी अपने आपको माफ़ न्ही कर पाऔगा.ओर मे बेतहाशा रोने लगा.उस लड़की के मा बाप मुझे तसल्ली देने लगे.फिर मे चला गया.ओर मेने अपनी मंगेतर को फ़ोन किया ओर उसे बुलाया.वो फॉरन चली आई.हमने काफ़ी देर तक बाते की , ओर मेने उसे सारी कहानी बताई ओर पूछा की अब तुम ही बताओ मे क्या करू ? इस नादान की मोहब्बत मुझे अपनी करीब खींचती है.इसका ये हाल मुजसे देखा न्ही जाता.अगर मेने इससे मूह मोड़ा तो शायद ये मर जाएगी.ओर अगर मेने मँगनी तोड़ी तो घर वाले न्ही मानेगे.मे क्या करूँ ? तो मेरी मंगेतर बोली की आप फ़िक़र ना करें सब ठीक हो जाएगा.इस लड़की से ज़्यादा मोहब्बत करने वाली आपको पूरी दुनिया मे न्ही मिलेगी.शायद यही आपके लिए बनी है ,ओर इसे इस बात का अहसास भी हो चुक्का हे.ये लड़की नादान न्ही हे बलकी ये तो बहुत बड़ी आशिक़ा है.ओर इस तरह के आशिक़ बहुत ही क्म पेदा होते है.आप मँगनी की फ़िक़र ना करें , कोई बहाना करके मे खुद मँगनी तोड़ दुगी.मे उसकी बाते सुनकर कुछ संभला.ओर उसका बहुत शुक्रिया अदा किया.फिर मे उसे लेकर हॉस्पिटल गया.वहाँ उसने उस नादान आशिक़ा को देखा , ओर उसके पास जाकर उसके कदम चूमे,ओर रोने लगी.मेने कहा की क्यू रो रही हो ? तो मंगेतर बोली की मेने इसकी आँखो मे प्यार का वो समंदर देखा हे , जो लैला की आँखो मे मजनू के लिए था ,ये बात मेने किताब मे पढ़ी थी.फिर मेने अपनी मंगेतर को रुखसत किया.ओर उस लड़की के मा बाप से बात की.'' अगर आपको कोई एतराज़ न्ही हो तो मे आपकी इस लड़की से शादी करना चाहता हू.ये सुनकर लड़की का बाप बोला की साहब हमें अपनी बेटी की खुशी चाहिए ओर ये दुनिया मे सिर्फ़ आपके साथ रहकर ही खुश रह सकती है.मेने उनसे अपने लिए उस लड़की का हाथ माँग कर रिश्ता पक्का कर दिया.अब मूज़े सिर्फ़ इस बात की फ़िक़र थी की मे अपने घर वालो को केसे मनाउन्गा .2 दिन बाद मेरी मा का फ़ोन आया वो बोली की तेरी मँगनी तेरी मंगेतर ने तोड़ दी हे , वो कहती हे की वो किसी ओर लड़के से प्यार करती हे.ये सुनकर मेरी आँखो से खुशी के आँसू छलक उठे.फिर मे अपने मा बाप के पास गया ओर उनको मेने पूरी बात बताई.पहले तो वो तेयार न्ही हुए की लड़की की उम्र ज़्यादा क्म है.ओर मेरी उम्र उससे कई ज़्यादा.पर मेने उनको उसकी चाहत के बारे मे बताया , तो वो आख़िर मान गये.आख़िर मेरी शादी उस नादान लड़की से तय हो गई.अभी उसकी उम्र इस वक्त 17 साल की थी ओर मेरी 30 साल.धूम धाम से हमरी शादी भी हुई. वो इतनी खुश थी की जेसे उसे दुनिया की सब्से बड़ी दोलत मिल गई है.लोग हमारे जोड़े को देख कर बड़े हैरत जदा थे.मेने ये फेसला किया की मे एक साल तक सुहाग रात न्ही मनाउन्गा , क्यू की वो अभी क्म उम्र है.इस एक साल मे उसने मेरी जो खिदमत की मे ब्यान न्ही कर सकता.जिस तरह की बीवी के बारे मे मे सोचता था , उससे कई गुना ज़्यादा बेहतर मेने उसे पाया.आज मे अपने आपको बेहद खुश नसीब समझता हू , कि मुझे ऐसी बीवी मिली.मेरी ओर उसकी पसंद बिल्कुल एक है.हर चीज़ मे हमरी पसंद मिलती हे.चाहे खाना पीना हो , कपड़े खरीदना हो या घूमना फिरना हो , हर जगह हमरी पसंद मिलती है.आज मुझे इस बात का पूरा पक्का य्कीन हो गया है कि यही वो लड़की हे जिसे मेरे लिए बनाया गया है.उसने मुजसे इतनी मोहब्बत की है जितनी किसी ने किसी से ना की हो.हम एक पल की जुदाई भी बर्दाश्त न्ही कर सकते.एक दिन मेने उससे पूछा की तुमने अपने हम उम्र लड़को के बजाय मुझे क्यू पसंद किया ? तो उसने बड़ी मासूमियत से ये जवाब दिया की मे जब भी आपको देखती थी , मुझे दिल मे ये अहसास होता था की यही वो इंसान हे जिनको मेरे लिए बनाया गया हे.इतना कहकर वो चुप हो गई.ओर मे उसकी तेज़ नज़र ओर रूहानी मोहब्बत पर हैरत जदा होने लगा.दोस्तो , मेने अपनी शादी के बाद 1 साल तक बीवी के होते हुए भी सब्र किया , ओर उसके साथ सुहाग रात न्ही मनाई.उस 1 साल मे हम दोनो एक दूसरे के दिल के इतने करीब आ गये की एक दूसरे की चाहत मे डूब गये.एक दूसरे को अछी तरह समझने मे कमियाब रहे, फिर जाकर हमने अपनी सुहाग रात मनाई.क्यू की मे न्ही चाहता था की मे अपने मज़े के लिए अपनी जान से ज़्यादा चाहने वाली बीवी को इस कम उम्र मे तकलीफ़ दू.इसी व्जाह से हमने 1 साल सब्र किया.ओर 1 साल के बाद ज्ब हम करीब से मिले , उस वक्त दिलो मे जो अहसास ओर जो मज़ा पाया , वो मज़ा जल्द बाजी करके न्ही पा सकते थे
मुझे आज भी याद है हमारी सुहाग रात के दिन जब वो रात को मेरे पास आई तो मैं उसके मासूम चेहरे को देखता ही रह गया उसने घूँघट डाल रखा था और उसके हाथ मैं दूध का एक गिलास था उसने दूध का गिलास मेज पर रख दिया और मेरे पैर पूजने के लिए जैसे ही झुकी मैने उसे अपने सीने से लगा लिया आज एक साल की प्यास मैं अपने प्यासे सिने से लगाकर बुझा लेना चाहता था मैं बेतहासा उसके चेहरे को चूमने लगा मेरे होंठ उसके होंठो से चिपक गये ओर मेरी जीभ उसके मुँह मैं किलोल करने लगी उसने भी मुझे अपनी छाती से चिपका लिया ओर उसके हाथ मेरी पीठ पर कसते चले गये अब उसने मेरे चुम्बनो का जवाब देना शुरू कर दिया था..मै अपनी जीभ उसके मुह के अन्दर घुमाया ..तो उसने भी अपनी जीभ मेरे मुह मे डाल दी उसकी गरम जीभ..अआह्ह..मै चूसने लगा.. . तेज़ सांसे लेने से उनकी भापूर गुदाज़ और उन्नत छाती ऊपर नीचे हो कर मेरे अन्दर के उबलते लावे मे और उबाल पैदा कर रही थी . मैंने अपनी पैंट , कमीज़ और बनियान उतर दी . उसने आँख खोलकर मेरी बालों से भरी छाती को देखा..फ़िर मैंने उसके सीने से उसकी साड़ी का आँचल हटा दिया..और उसके उभारों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाया..मै अभी भी उसका चुम्बन कर रहा था...उसके मुह से सिस्कारी निकली..आह्ह इश स्.स्.स्.स्.स्.स्...और उसने साड़ी पूरी निकलने मे मेरी मदद की
मैं अपनी इस मासूम पत्नी की अदाओं पर कुर्बान हो गया अब मेरा एक हाथ ठोस चुचियो पर था मैं धीरे धीरे उन्हें दबाने लगा और मेरा दूसरा हाथ उसके मांसल चूतड़ को सहलाने लगा उसका शरीर तपने लगा मैने उसका ब्लाउज उतार दिया ब्रा मैं से झाँकती उसकी चुचियाँ मानो हिमालय की दो पर्वत श्रंखलाएँ खड़ी हों मैं दीवाना हो चुका था मैने अपने मुँह से चुचियो को चूमना शुरू कर दिया अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो चुकी थी आहह मेरे राज मैं आसमान मैं उड़ रही हूँ ये तुमने मुझे क्या कर दिया है मेरे अंदर इतनी आग क्यू जल रही है ओह्ह्ह्ह्ह्ह्हराज मेरे राज्ज्जज्ज मेरी इस आग को बुझाओ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह वरना ये आग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग मुझे जला देगी अब मैने उसे बेड पर लिटा दिया उसके पेटिकोटऔर पॅंटी उसके बदन से निकाल कर एक तरफ फैंक दिए मैने उसकी चूत को चूमना शुरू किया तो वह तड़पने लगी मैने अपनी जीभ उसकी चूत मैं घुसा दी मेरी जीभ ने जैसे उसकी चूत किलोल करनी शुरू की उसने मेरे सिर को अपने हाथो से पकड़ लिया ओर अपनी चूत पर दबाने लगी वह मासूम कली से फूल बनने की राह पर चल पड़ी थी वह बुरी तरह तड़प रही थी अब मैने भी देर करना उचित नही समझा मैं उसे और तड़पाना नहीं चाहता था मैं उसके उपर आ गया उसकी चूत भट्टी की तरह जल रही थी इस भट्टी की आग को सिर्फ़ एक ही चीज़ बुझा सकती थी वो था हर औरत का प्यारा हर औरत का लाड़ला वो था लंड उसकी चूत बुरी तरह लंड की याद मैं आँसू बहा रही थी तड़प रही थी लंड को उस पर दया आनी ही थी मैने अपना लंड निकाल कर उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया वह बुरी तह से तड़पने लगी सिसकारिया निकालने लगी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे राज्ज्जज्ज मुजसे अब और बर्दास्त नहीं होता ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज्ज्जज्ज्ज
मैं मार जाउन्गि प्लीज़ मेरी इस आग को बुझा दो कुच्छ करो राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
मुझे अब और मत तडपा ओ अब मुझसे सहन नहीं होता मैने उसकी चूत पर अपने लॅंड का निशाना साधा ओर धीरे से एक धक्का मारा लंड का मुँह उसकी चूत मैं जाकर फँस गया उसके मूह से एक जोरदार चीख निकली और वह बुरी तरह से सिर को इधर उधर पटकने लगी उसने मुझे दूर हटाने की कोशिश की लकिन मैने उसे अपनी बाँहो मैं जाकड़ लिया मैने अपने लंड का दबाब थोडा सा ओर बढ़ाया मेरा लंड उसकी छूट मैं 2इंच घुस तक घुस चुका था उसकी दर्द की वजह से आँखे बाहर निकल आई मैने उसकी चुचियो को सह लाना शुरू किया एक चुचि का निप्पल अपने मुँह मैं लेकर चूसने लगा और एक हाथ से उसकी दूसरी चुचि को हल्के हल्के दबाने लगा थोड़ी देर मैं उसका दर्द कम हो गया मैने उसके होंठो को अपने होंठो मैं ले लिया और उन्हे लोलीपोप की तरह चूसने लगा ओर दो लगातार धक्को मैं लंड उसकी चूत मैं जड़ तक पहुँचा दिया लकिन दर्द से उसका चेहरा सफेद पड़ गया मैने उसकी चुचियो को सहलाया और उन्हे चूसने लगा और लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा थोड़ी देर मैं उसको भी मज़ा आने लगा हाय मेरे राज तुमने तो मुझे मार ही डाला था मैने उसे समझाया पहली बार जब लंड चूत मैं अपना रास्ता बनाता है तो थोड़ा दर्द होता ही है अब मैने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी वह भी पूरा साथ देने लगी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मुझे जिंदगी भररर ऐसे हीईईई प्यार करते रहो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज मैं उड़ रही हूँ राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मुझे चोदो और ज़ोर से छोड़ो आहह मैं नहियीईईईईईईईईईई जानती थी इसमे इतना मज़ा है आहह मेरे राज आहह मैने कहा मेरी जान मैं तुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करता रहूँगा हम दोनो की चुदाई अब पूरे उफान पर थी कोई भी हार मानने को त्य्यार नहीं था हम दोनो एक दूसरे को चूमते सहलाते प्यार की दुनियाँ मैं बहुत आगें बढ़ चुके थे अपनी मंज़िल की ओर जा रहे थे और हमें मंज़िल मिली एक चरम आनंद के साथ दोनों एक साथ मंज़िल पर पहुँचे और एक दूसरे की बाँहो मैं शांत होकर लेट गये इस तरह हमने उस रात पाँच बार अलग अलग आसनो से चुदाई की दोस्तो सुहाग रात का हमने भरपूर मज़ा लिया
.आज हमारी शादी को 5 साल हो चुके हैं हमारे एक लड़का भी हे जो 2 साल का हे.बहुत ही प्यारा , बिल्कुल अपनी मा जेसा.ओर आज भी हम दोनो मिया बीवी मे उतनी ही मोहब्बत बरकरार है जितनी शादी से पहले थी.इन 5 सालो मे कभी भी मेरी बीवी ने मेरा दिल न्ही दुखाया.ना कभी मेने उसे डांटा.ये है मेरी नादान मोहब्बत जिसने मुझे अपने इश्क़ मे अपनी चाहत मे उम्र भर के लिए बाँध लिया. मेरी कहानी अगर आपको पसंद आए तो अपनी बीवियो को ज़रूर सुनाना. ओर मुझे मेल्स के ज़रिए बताना.
दोस्तो कहानी कैसी लगी अब इस कहानी का यहीं एंड होता है फिर मिलेंगे एक ओर नयी कहानी के साथ
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07-17-2017, 11:40 AM,
#4
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मेहन्दी वाली रात दुल्हन के साथ




हल्लो दोस्तो कैसे हैं आप सब मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक बार फिर आपके लिए एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ आशा करता हूँ पहली कहानियो की तरह ये कहानी भी आपको पसंद आएगी
ये बात है 9 एप्रिल 2009 की जब हमारे मुहल्ले मे एक लड़की की शादी थी क्योंकि हमारी मुहल्ले मे सब से बनती है इस लिए उन्हो ने हमे भी इन्वाइट किया था हम सब भी गये थे उस रात मेहन्दी की रसम थी जेसा की आप सब जानते हो की मेहन्दी की रस्म मे सब कितने फ्री हो जाते हें ओर हर तरहा का मज़ाक चलता है मैं भी सब के साथ काफ़ी मज़ाक कर रहा था इसी तरहा से वो फंक्षन ख़तम हो गया ओर ये कोई 12 बजे का टाइम हो गा मैं अपने घर आगया बाकी घर वाले अभी उन्ही के घर थे मैं ने घर आ कर कपड़े चेंज किए ओर अपनी शॉर्ट पहन कर अपने मोबाइल अपनी गर्ल फ्रेंड से बात करनी शुरू कर दी. मे अपने रूम मे बैठा बातें कर रहा था ओर अपने पीसी पर सेक्स मूवी देख रहा था मेरे रूम की सेट्टिंग ऐसी है की जब डोर ओपन करो तो राइट हॅंड पर पीसी रखा है. मैं अपनी गर्ल फ्रेंड से हमेशा सेक्सी बातें करता हूँ उस रात भी हम सेक्सी बातें कर रहे थे की मे ने अपनी शॉर्ट उतार दी ओर मेरा लंड फुल खड़ा था ओर मे सेक्शी मूवी देख रहा था .मेरे रूम मे कोई भी नही आता था इस लिए मुझे कोई टेन्षन नही थी . ये कोई रात के एक बजे का टाइम था मुझे नही पता की घर वाले कब वापिस आए मे अपने रूमकी लाइट बंद करके सेक्स मूवी देख रहा था ओर मेरा लंड फुल खड़ा था ओर मे अपने हाथ से मूठ मार रहा था लेकिन मेरा दिल नही कर रहा था मे ने अपनी गर्ल फ्रेंड को कहा की बस बहुत हो गया मुझे अब नींद आरही हे बाकी कल को करें गे वो नही मानी ओर हम फ़ोन सेक्स करने लगे मुझे बोहत प्यास लग रही थी मे पानी पीने क लिए उठा ओर जब मे ने डोर की तरफ़ देखा तो मेरे तो होश ही ओर गये वो लड़की जिस की मेहन्दी थी वो खड़ी थी ओए सेक्स मूवी देख रही थी मुझे देख कर वो फॉरन चली गई ओर मैं घबरा गया कही ये किसी को बता ना दे मे ने फॉरन फोन बंद किया ओर डोर की तरफ़ गया वो मेरे साथ वाले रूम मे चली गई थी मुझे नही पता था की वो हमारे घर मे आई हुई है वो तो उस ने बाद मे बताया था की उन के घर मे गेस्ट्स बोहत ज़ियादा आए हें इस लिए वो हमारे घर आगाई थी सो जब वो साथ वाले रूम मे चली गई तो मे भी ईज़ी हो गया ओर पानी पीने लगा पानी पी कर मे बाथरूम मे से फ्रेश हो कर आया मे काफ़ी चितित था की क्या हो गा फिर मे ने सोचा की जो हो गा देखा जाए गा ओर सेक्स मूवी देखने लगा मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था कि अचानक मुझे लगा कि कोई मेरे रूम का डोर खोल रहा है मे फॉरन उठा ओर डोर के पीछे जा कर खड़ा हो गया कि अचानक डोर खोला ओर अनु(नेम चेंज्ड) अंदर आई अभी वो थोड़ी ही सेक्स मूवी देख पाई थी कि मे ने उस को पकड़ा ओर अंदर खींच लिया वो एक दम घबरा सी गई ओर कहने लगी कि मुझे माफ़ कर दो मे आइन्दा कभी ऐसा नहीं करू गी लेकिन मेरा दिल उस पर खराब हो चुका था वो शर्म क मारे नज़रे नहीं उठा पा रही थी एक तो परी जेसा मासूम चेहरा ओर उस पर इतनी शर्म मे ने उस को कहा कि
तुम क्या देख रहीं थी तो उस ने कहा वो फिल्म जो तुम देख रहे थे मे ने कहा की सब को बता दूं गा कि तुम चुप चुप कर ये सब देखती हो तो उस ने कहा क प्लीज़ किसी को मत बताना कल मेरी शादी है प्लीज़ मत बताना मे ने कहा कि नहीं बताउ गा तो वो कुछ रेलेक्स हो गई ओर जाने लगी तो मे ने कहा कि एक बात पूंच्छू तो उस ने कहा क पूच्छो तो मैने कहा कि तुम्हें ये सब केसा लगा तो उस ने डरते डरते कहा - अछा लगा तब मे ने कहा ,, तो चलो साथ मे बैठ कर देखते हैं तो उस ने कहा थॅंक्स फिर हम दोनो साथ मे ही नीचे कार्पिट पर बैठ कर मूवी देखने लगे मेरा लंड फुल खड़ा था वो बड़े गोर से सेक्शी मूवी देख रही थी मेरा उस के साथ सेक्स करने का कोई इरादा नहीं था क्योंकि मे जानता था कि कल उस की शादी है ओर उस को बोहत प्राब्लम हो सकती हे लेकिन अब होनी को कॉन टाल सकता है अचानक मेरे दिमाग़ मे शैतान जाग गया ओर मेरा कंट्रोल ख़तम होने लगा मे वहाँ से उठ कर बाथ रूम मे गया ओर पेशाब कर के वापिस आया तो देखा वो अपनी चूत को मसल रही है मैं आराम से उस के पीछे जाकर बैठ गया ओर अपना हाथ उस की चूत पर रखा तो उस ने जल्दी से हाथ हटा लिया ओर कहने लगी , ये क्या कर रहे हो तो मे ने कहा जो तुम कर रही हो वही कर रहा हूँ तो वो उठ कर जाने लगी तो मे ने उसे अपने सिने से लगा लिया ओर उस के होंटो पर अपने होंठ रख दिए ओर उसे किस करने लगा वो मुझ से छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन मे ने उसे बोहत ज़ोर से पकड़ रखा था कुछ देर इसी तरहा किस करने के बाद वो भी मेरा साथ देने लगी ओर मे ने उसे हल्का छोड़ दिया उस ने अपने दोनो हाथ मेरी गर्दन के पीछे रखे ओर मुझे ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी मुझे अब बोहत मज़ा अरहा था मेने अपनी ज़ुबान उस के मुँह मे डाल दी ओर वो मेरी ज़ुबान को सक करने लगी मुझे बड़ा मज़ा अरहा था मेने अपने हाथ उस की गंद पर रखे ओर उसे सहलाने लगा वो ओर ज़ोर से मेरी ज़ुबान सक करने लगी फिर मे ने अपना एक हाथ उस की शलवार के अंडर डाला ओर उस की गंद पर फेरा ओर उस की चूत पर रखा तो उस ने मुझे ज़ोर के साथ अपनी बाँहों मे जाकड़ लिया फिर मे ने उसे कहा वो नीचे बैठ जाए वो नीचे बैठ गई ओर मे ने अपने रूम का डोर लॉक किया ओर उस के पास आ कर बैठ गया ओर उसे किस करने लगा ओर एक हाथ से उस के बूब्स प्रेस करने लगा हम दोनो को बोहत मज़ा अरहा था मे ने उस का हाथ पकड़ा ओर अपने लंड पर रख दिया उस ने मेरे लंड को ज़ोर से पकड़ लिया फिर मे ने उस की कमीज़ उतार दी उस ने पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी उस के बॉंब्स 34 साइज़ के थे मे ने उनको ब्रा के उपेर से ही अपने मुँह मे लेने लगा फिर मे ने ब्रा की हुक भी खोल दी तो उस के बिल्कुल गोल शेप बॉंब्स मेरे सामने थे मे ने उसे लिटाया ओर उस के बॉंब्स को सक करने लगा उस के मुँह मे से सिसकियाँ निकल रही थी मैं उस के बॉंब्स को पागलों की तरहा सक कर रहा था वो मेरे बालों मे अपने हाथ फेर रही थी थी फिर मे ने एक हाथ उस की शलवार के अंदर डाला ओर उस की चूत पर रखा तो उस ने मुझे ज़ोर से जाकड़ लिया फिर मे ने अपनी एक उंगली उस की चूत मे कर दी जो कि बोहत ही गर्म थी उस की चूत बिल्कुल साफ थी ऐसा लग रहा था जेसे आज ही साफ की हो मुझे बोहत मज़ा अरहा था फिर मे ने उठ कर अपने सारे कपड़े उतारे ओर उस की शलवार भी उतार दी अब हम दोनो एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे थे उस ने मेरे लंड को पकड़ा ओर हाथ मे ले कर उसे प्यार करने लगी ओर फिर उस ने नीचे हो कर अपने होंठ मेरे लंड पर रखे ओर लंड को सक करने लगी मे ने भी एक हाथ से उस की गंद ओर दूसरे से उस के बूब्स मसालने लगा मुझ से ओर वेट नही हो रहा था मे ने उसे सीधा किया ओर 69 पोज़िशन मे होने को कहा उस की चूत पर जब मे ने अपनी ज़ुबान रखी तो मुझे ऐसा लगा क जेसे मे जन्नत मे पोहन्च गया दोस्तो इतनी गर्म चूत थी क्या बताउ मुझे सच मे बोहत मज़ा अरहा था उस की चूत से पानी बह रहा था जिसे मे किसी सदिओं के पियासे की तरहा पी रहा था कि अचानक उस ने अपनी चूत का सारा पानी छोड़ दिया जिसे मे खुशी खुशी पी गया लेकिन वो किसी भूखी की तरहा मेरे लंड को सक कर रही थी मुझे मेरे लंड मे तकलीफ़ महसूस हो रही थी फिर मे खड़ा हुआ और चेर पर बैठ गया ओर उस के बालों को पीछे से पकड़ कर उस को कहा , अब मेरे लंड को सक करे वो मेरे लंड को सक करने लगी मुझे बड़ा मज़ा अरहा था फिर मे ने उस के मुँह मे ही अपनी मनी छोड़ दी उस ने सारी की सारी पी ली ओर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.
)फिर मे ने उसे लिटाया ओर उस की गंद के नीचे एक पिलो रखा ओर उस के बॉंब्स सक करने लगा वो फिर से गर्म हो गई थी वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी फिर मे ने उस की टाँगो को अपने कंधो पर रखा ओर आगे को हुआ तो उस की चूत मे से आवाज़े आ रही थी मे ने उस के बॉंब्स सक क्र रहा था उस ने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा ओर नीचे से हिलने लगी मे ने अपने होंठ उस के होंठो पर रखे ओर उस के होंठ चूसने लगा वो बोहत बेचेन हो रही थी फक्किंग के लिए मेने लंड को आराम आराम से उस की चूत मे किया वो अपने हाथो से मेरी कमर को सहला रही थी फिर मेने एक ज़ोर दार धक्का मारा जिस से उस की चूत की सील टूट गई ओर मेरा लंड उस की चूत की गहराइयों मे पोहन्च गया था वो बुरी तरहा तड़प रही थी उस की आँखों मे आँसू आ गये थे उस ने अपने नाख़ून मेरी कमर मे गाढ दिए थे मुझे भी काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी फिर मेने आहिस्ता2 उस की चूत मे धक्के मारने शुरू कर दिए फिर थोड़ी देर मे उस ने भी अपनी गंद उपेर उठाना शुरू कर दी फिर मे ने उस के होंठ छोड़े तो वो कहने लगी तुमने तो मुझे मार ही दिया था कोई इतनी बे दरदी से भी चोद्ता है क्या , मेने उसे कहा फर्स्ट टाइम ऐसे ही होता है फिर मे ने उसे कहा कि मेरे उपेर बैठे तो उस ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत को मेरे लंड पर रखा ओर उपरनीचे होने लगी साथ मे वो आआहहाअ आआहहाअ आआहहाा ऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआहहााआआ की आवाज़ें निकल रही थी वो आराम आराम से मेरे लंड पर बैठ रही थी लेकिन मुझ से सब्र नही हो रहा था मे ने नीचे से एक धक्‍का लगाया ओर उस ने एक चीख मार दी ऊऊऊऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई हााआआययययययययईई म्‍म्म्ममममममाआआआरररर गई वो मेरे लंड पर गिर पड़ी थी ओर मेरा लंड उस की बच्चेदानि को टच कर रहा था मे ने उसे समझाया किस तरहा इस तरीक़े मे फक्किंग करते हें मे उस के बॉंब्स को पकड़ कर उन से खेल रहा था ओर वो मेरे लंड के उपेर नीचे हो रही थी उस ने कहा वो डिस्चार्ज होने वाली है फिर मे ने उसे उसी तरहा नीचे लिटा लिया ओर उस की टाँगो को खोल कर उस की चूत मे अपना लंड डाल कर उस की चुदाई करने लगा मुझे भी लग रहा था मे भी डिसचार्ज होने वाला हूँ तो मे ने उसे कहा मे भी फारिग होने वाला अनु उस ने अपनी टाँगे मेरी कमर के पीछे बाँध लें ओर उसनेअपने हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया ओर नीचे से अपनी गंद उठा उठा कर फक्किंग करने लगी मे भी फुल स्पीड से उसे चोद रहा था और उस के होंठो पर किस कर रहा था हम दोनो की स्पीड काफ़ी तेज़ थी फिर एक दम उस ने अपना पानी छोड़ दिया मुझे ऐसे लगा क जेसे मेरे लंड को किसी ने पकड़ लिया है मेने बोहत कोशिश की किमैं अभी डिस्चार्ज ना हूँ लेकिन मे खुद पर कंट्रोल ना रख सका ओर उस की चूत मे ही फारिग हो गया ओर सारा वीर्य उस की चूत मे ही छोड़ दिया ओर उस के उपेर ही गिर गया हम दोनो पसीने मे नहा रहे थे ओर ज़ोर ज़ोर से सांस ले रहे थे मेरा लंड अबी भी उस की चूत मे था मे ने उस के बॉंब्स से खेलना शुरू कर दिया तो उस ने कहा तुम ने आज मुझे सब से बड़ी खुशी दी है मैं हमेशा तुम्हारी एहसान मंद रहू गी फिर मे उस के उपेर से उठा ओर उस की चूत की तरफ़ देखा तो उस मे से खून पानी की तरहा बह रहा था मे ने अपना लंड उस के मुँह कर आगे कर दिया वो समझ गई कि क्या करना है उस ने मेरा लंड चूस चूस कर साफ कर दिया फिर मे ने उस की पेंटी से उस की चूत को साफ किया फिर वो ब्रा पहनने लगी तो मे ने उस से कहा
वो ये ब्रा मुझे दे दे तो उस ने वो ब्रा मुझे दे दी मे ने उसे पेन दिया और कहा इस पर कुछ लिख दो तो उस ने डेट ओर अपने साइन कर दिए और कपड़े पहन कर खड़ी हो गई मे ने उसे दीवार क साथ लगाया ओर उस की गर्दन पर किस करने लगा वो सीधी हुई ओर हम फ्रेंच किस करने लगे .उस के बाद वो चली गई ओर मे सोने लगा लेकिन मुझे नींद नही आ रही थी कुछ देर क बाद मेरे रूम का दरवाज़ा खुला तो मेने देखा अनु अंदर आई उस ने लाइट ऑन की ओर रूम लॉक किया ओर मेरे उपेर आ कर लेट गई ओर मेरे होंठो पर किस करने लगी मैं भी उसे किस करने लगा फिर हम दोनो ने अपने कपड़े उतारे ओर एक दूसरे के पूरे जिसम को चूमने लगे फिर 69 की पोज़िशन मे अगये ओर एक दूसरे को सक करने लगे फिर मे ने उसे सीधा किया ओर उस की टाँगें खोल कर उस की चूत पर अपना लंड रगड़ा तो वो किसी मछली की तरह तड़पने लगी मे ने एक तकिया उठाया ओर उस के नीचे रख दिया ओर मे उस के उपेर झुका अपना लंड उस की चूत मे डाल दिया ओर उसे चोदने लगा दोस्तो इस बार चुदाई मैं इतना मज़ा आया की पुछो मत मैं उसे सुबह 5 बजे तक चोद्ता रहा उस के बाद वो साथ वाले कमरे मे चली गी. अब तक मे उसे 2 बार ओर चोद चुक्का हूँ उस ने मुझ से वादा किया है कि वो मेरे लिए एक मासूम सी लड़की का इंतज़ाम करे गी
तो दोस्तो इस तरह इस कहानी का भी एंड होता है हाथ को पंत से बाहर निकालो मूठ मारना ग़लत बात है
आपका दोस्त
राज शर्मा
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Reply
07-17-2017, 11:41 AM, (This post was last modified: 07-17-2017, 11:42 AM by sexstories.)
#5
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
[size=large]ब्लू फिल्म की शूटिंग

दोस्तों मैं यानि आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तों अभी तक आपने बहुत सारी
कहानियाँ पढ़ी हैं मैंने सोचा अब आप लोगों को ब्लू फ़िल्म की शूटिंग की सैर कराइ जाय इसीलिए मैं ये कहानी
लेकर आपके लिए आप उपस्थित हूँ कहानी कुछ इस तरह है
"मेडम ये राजा हैं"-----------प्रिया ने राजा को इंट्रोड्यूस किया-----मैने आपसे फोन पर इसी के बारे मे कहा था, मैं इसे आजमा चुकी हूँ.
'मेडम' ने राजा को गहरी निगाहो से देखा
"क्या काम करते हो. कहा रहते हो----फॅमिली मे कौन है तुम्हारे"---------मेडम ने स्वालो की झड़ी लगा दी
"चोरी करता हू, छ्होटी मोटी, लूटपाट, छीना छपती भी करता हूँ, धारावी मे रहता हूँ, मेरे अलावा मेरा इस दुनिया मे कोई नही है"-----राजा ने भी एक ही झटके मे मेडम को सच बता दिया
"हमम्म----प्रिया तुम कहती हो तुमने इसे आजमाया है----कैसा रहा इसका पर्फॉर्मेन्स----कितनी देर चोदता हैं----कितने तरीके आते हैं------क्मेरे के सामने, बाकी लोगो की उपस्थिति मे, चोद पाएगा, या हमारे बाकी हीरो की तरह ये भी----पोपट गिरा देगा"
"नही मेडम, ये चोदने मे बड़ा एक्सपर्ट हैं, कई तरीक़ो से चोदता हैं, मैं खुद चार बार झाड़ चुकी हू"------प्रिया ने सर्टिफाइड किया, जैसे उसको किसी ने झड़ाना बहुत बड़ी बात थी.
सोफे पर पसरी हुई, अधानंगी,अधेड़ उमर की मेडम ने अपना ग्लास एक ही झटके मे खाली किया, और राजा को और ध्यान से देखती हुई बोली,

"प्रिया क्या तुम्हे गॅरेंटी है, ये पुलिसे मिला हुआ नही हैं?"
"नही मेडम, मैं पूरे एक हफ्ते से इसके पिछे थी, मूज़े पक्का यकीन है"
"सुनो राजा, हम जो करते है गैर क़ानूनी हैं,अगर तुमने कही भी इस बारे मे बात की, तो तुम फिर किसी को नज़र नही आओगे, अगर ग़लती से पकड़े भी गये, तो भी कुच्छ बोलने का नही है, हम तुम्हे बचा लेंगे, तुम समझ रहे हो?"
"हाँ मेडम, अप निसचिंत रहे, मैं भी मुजरिम ही हू, छ्होटा,मोटा, मैं किसी से कुच्छ नही बोलूँगा, किशिभि हालत मे नही,----मुझे सिर्फ़ पैसो से मतलब है"
"वो तो तुम्हे मिल ही जाएँगे, हर शॉट के 20000 , और हर बार नयी लड़की चोदने को मिलेगी वो अलग-----------प्रिया इसका ब्लड टेस्ट करवो, एचआइवी के लिए, फिर इसे स्टूडियो ले जाओ, मैं थोड़ी देर मे वाहा पहुचती हू.

मेडम के अंदर जाते ही राजा ने प्रिया को बाँहो मे भर लिया-------उसके होंठो पर किस करने लगा-----"छ्चोड़ो, छ्चोड़ो मूज़े-----जान ले लोगे क्या---अभी अभी इतना लंबा, चुदाई का सेशन झेल चुकने के बाद अब मुझे बखस दो, पूरा बदन दर्द कर रहा है,---होठ तक दर्द कर रहे है-------स्टूडियो मे चलो. वाहा तुम्हारा कमेरे के सामने ट्राइयल लेना है,------वाहा लड़किया भी होगी----उन्ही पर लगाओ अपना घोड़ा.
राजा ने प्रिया आज़ाद कर दिया-------"स्साली नखरे दिखा रही है" वो मन ही मन कह रहा था
राजा और प्रिया स्टूडियो पहुचे, वो एक शानदार दोमंज़िल का मकान था मड़ालेंड मे,आसपास्स उचे उचे पेड़ो ने बंगल को ढक दिया था.
गेट पर एक आर्म्ड गार्ड था जो प्रिया को जानता था, उसने गेट खोल दिया और दोनो अंदर चले गये, अंदर ड्रॉयिंग रूम मे कुच्छ लड़किया, कुच्छ औरते बैठी थी, कुछ लोग लाइट, रिफ्लेक्टर्स, कमेरे अड्जस्ट कर रहे थे, शायद शूटिंग की तैय्यरी हो रही थी.

प्रिया ने राजा को एक सोफे पे बिठा दिया और वो अंदर चली गयी, राज ने पूरे कमरे मे नज़रे दौड़नी शुरू की, दो लड़किया थोड़ी डरी सहमी सी थी, तीन औरते काफ़ी खेली खाई मालूम होती थी,चालू टाइप की लगती थी , शायद रंडिया हो, एक कॉलेज स्टूडेंट टाइप की लड़की थी, वो बेहद डरी हुए दिख रही थी. क्या ये सब ब्लू फिल्म मे काम करने आई हैं, राजा सोच रहा था.

तभी बाहर से मेडम आई,सब बातचीत छ्चोड़ कर उठ खड़े हुए. दो हटटेकट्ते मुस्टंडे से लोग मेडम केपास पहुचे.

'डिसूज़ा---क्या तैय्यरी पूरी होगआई"
"एस मॅम, सब तैय्यर है"
"ये इतनी सारी लड़किया यहा क्या कर रही है"
'एन्हे काम चाहिए, ये सब कुच्छ करने के लिए तैय्यर है"
"पर एन्हे यहा लाया कौन"
"मॅम हमारे एजींटो ने भेजा है"
मेडम उन पर अपनी परखी नज़र घुमाने लगी, उन्होने उस कॉलेज गर्ल को करीब बुलाया
"क्या नाम है तुम्हारा,उमर कितनी है,अओर करती क्या हो, यहा किसने भेजा"------------मेडम ने आदत अनुसार एकदम सवालो की ज़दी लगादी
"मैं आएशा हू,उमर 21 साल,कॉलेज मे पढ़ती हू, मूज़े उस्मान यहा लाया है, अभी वो बाहर गया है, आता ही होगा"-------आएशा ने मुस्तैदी से पूरे सवालो का सही सही जवाब दिया
"मुंबई की हो या कही बाहर से?"
"'बाहर से हू, एक छ्होटे गाओं से, यहा फ़िल्मो मे किस्मत आज़माने के लिए आई हू, पैसो की तँगिकी वजह से..." आएशा ने पुच्छे गये सवाल के अलावा संभावित सवालो के भी जवाब दिए.
"हूंम्म, ठीक है, थोड़ा और पास आओ"
आएशा और करीब आ गयी, चहरे पर झिझक थी, थोड़ी हया भी.
मेडम ने सीधे उसकी चुचि यो पे हाथ चलाया, दोनो चुचियो को बारी बारी दबाके देखा, आएशा एकदम से हड़बड़ा गयी. वो पिछे हटने लगी, मेडम ने उसकी कमर मे हाथ डाल के अपने एकदम करीब खिछा, इतना की उनकी साँसे एकदुसरे टकराने लगी.

"तुम यहा ब्लू फिल्म मे काम करने आई हो, किसी टीवी सीरियल मे नही, यहा सबके सामने कपड़े उतारके चुदवाना पड़ता है, हर वो चीज़, गंदी से गंदी, करनी पड़ती है, जिसे देख कर देखने वालो के लंड खड़े हो जाए, शर्म, हया का यहा कोई काम नही है, जब कोई एक या दो जने तुम्हे हर मुमकिन तरीके से चोद रहे होंगे,तब तुम्हारे आस पास केमरा, लाइट वाले, और डाइरेक्टर्स भी खड़े होंगे, हो सकता है शूटिंग के बाद उनके खड़े लंड को भी तुम्हे ही शांत करना पड़े, वो भी फ्री मे, इसी काम के हम तुम्हे पैसे देते है, समझी..?"

मेडम के इस लंबे चौड़े भाषण के बाद पुच्छ ने के लिए आएशा के पास कुच्छ नही था. और बाकी बैठी लड़किया अपने आप ही समझ गयी थी, वैसे जब कोई लड़की ब्लू फिल्म मे काम करने का सोच लेती है, तब उसे पहले से पता होता है के उन्हे क्या करना पड़ेगा.
"मेडम एक सवाल है" आएशा ने साहस जुटा कर पुचछा
"पुछो, जो पुछ ना है अभी से पुच्छ लो, बाद मे ना नुकर नही चलेगी, बाद मे नखरे दिखाए तो मुझसे बुरा कोई नही, मैं उनका बहुत बुरा हश्र करती हू."
मेडम ने फिर धमका डाला.

"वो क्या मैं., पहचानी गयी तो बड़ी.."------आएशा डर गयी थी
"नही पहचानी जाओगी, हम तुम्हे काफ़ी हद तक बदल देंगे, तुम फ़िकरा ना करो कोई और सवाल?

किसी को कुच्छ नही पुचछा ना था, पैसो की बात पहले ही हो गयी थी, एजेंट्स केद्वारा.

राजा जब प्रिया के साथ अंदर के कमरे मे गया तो वाहा का नज़ारा देख कर हैरान हुए बिगर नही रह सका. अंदर एक विशाल बिस्तर पर एक सावली लड़की नंगी ही लेटी थी.उसके पास एक मजबूत कदकाठी वाला आदमी खड़ा था और सब उसे देख कर हस रहे थे, वो नंगा ही था, और किसियासा देख रहा था, कुच्छ कुच्छ क्रोधित भी लग रहा था. वो सावली लड़की काफ़ी सेक्सी थी, और लगता था धंधे वाली थी, उसे अपने नंगे पन की ज़रा भी शर्म नही आ रही थी.
जब प्रिया ने उसे पुचछा----'क्या हुआ क्यो हस रही हो'
तो उसने कहा--------ये जितना लंबा चौड़ा है, उतना ही फटतू है, मैं कब से इसका लंड चूस रही हू लेकिन, इसका मीटर डाउन है, इसका काँटा हिलतएच नयी,तो मैं क्या करेगी बोलो.
'साली, रंडी, तू मेरे को अकेले कमरे मे मिल, फिर मैं तेरेकू बताता हूँ क्या होता है मर्द, और कैसे चोदता है उसका लंड, साली तेरे को क्या है, तू तो टाँगे फैला के चुदायेगि, लेकिन मेरे को लंड खड़ा करना पड़ता है, और ये सब के सामने होने वाली बात नही,साली कुतिया'
' ए भदवे, साले गाली नेई देनेका मैं बोली, मैं तेरे कू बुलाने नेई आई थी साले हरामी'---------अब लड़की अभी अपनी औकात पे उतर आई

उतने मे मेडम अंदर आ आगाइइ,उसके साथ आएशा भी थी उसको देखते ही सब शांत हो गये
मेडम ने पुचछा ---'क्या हो रहा है, काम शुरू क्यू नही है'
प्रिया ने सारा किस्सा बताया, तो मेडम बोली---'इसे कुच्छ दावा पानी देना था ना'
जो कॅमरा लेकर खड़ा था वो बोला-------'मेडम सब कुच्छ करके देखे हैं, इसका खड़ा नही होता'
'क्या नाम है तुम्हारा, किसने लाया है तुम्हे यहा'------मेडम ने पुचछा
'मैं रघु हा मेडम, मेरे कू रेशमा ने यहा लाया'
'ठीक है, रघु तुम उधर बैठ जाओ, कपड़े मत पहनना-----मैं तेरा काँटा हिलता देखना चाहती हूँ'

रघु शर्मिंदा होकर एक कोने मे बैठ गया
'इस लड़की का नाम क्या है, कहा से आई है,'
'ये रानी है मेडम,कमाती पूरे से रेशमा ने ही भेजी है'

वास्तव मे मेडम के एजेंट्स हर तरफ फैले थे जिनका सिर्फ़ एक ही काम था, मेडम के लिए लड़के, लड़किया ढूँढना, जो चोदने मे माहिर हो, और बात को बड़ा कर रख सके------फिर उनका स्क्रीन टेस्ट लेने का काम,प्रिया या एक दो मॅनेजर थे वो करते थे, फिर काम के लड़के, लड़किया छत कर उनकी फिल्म बनाते, एन टाइम पर लड़को के लंड खड़े ना होना, होता ही रहता था, कमेरे के सामने, बाकी कई लोगो की मौजूदगी मे चोदना हर किसी के बस की बात नही होती, यही प्रॉब्लम आई थी रघु के साथ.

'राजा तुम चोद सकोगे,रानी को'-----मेडम ने राजा को पुचछा
राजा ने हा मे गर्दन हिला दी
'तो चलो शुरू हो जाओ

राजा ने तुरंत कपड़े उतार दिए, उसका सोया हुआ आजगर जाग रहा था, फन उठाए सामने नंगी पड़ी रानी को घूर रहा था, रानी ने जब उस खड़े हो रहे लंड को देखा, तो वो मन ही मन सहम गयी, वो तो थी ही रंडी, ऐसे कई लंड वो आराम से खा चुकी थी, लेकिन राजा के लंड की बात और थी, लंबाई मोटाई बढ़िया थी, खास बात थी उसके सूपदे मे, पके हुए टमाटर जैसा लाल, मीडियम साइज़ के आलू जितना मोटा, ऐसा सूपड़ा देख ते ही रानी की चूत पनिया गयी.

राजा रानी के पास पहुचा, उसने उसके बाजू मे बैठ कर पहले उसकी चुचि यो पर हाथफेर कर देखा, काफ़ी कसाव अभी भी बाकी था, पूरी तरह से तीली नही थी उसकी चुचिया, थोड़ी देर वो मसलता रहा, निप्पल्स को दांतो से चबाने लगा, किस करने मे उसे कोई इंटेरेस्ट नही था,-----हाथ से सहला कर उसकी चूत के गीले पन का अंदाज़ा लगाया------और सूपदे को रानी की चूत के मूह पर रखा कर एक ज़ोर का धक्का मारा-----

"उउउउउईए -----माआ----अबे साले---आराम से डाल पेलने को नही सकता क्या----चूत कू फड़ेगा किया मेरी----- रानी की मादक चीखे निकल रही थी.

लेकिन राजा को मेडम को सिर्फ़ ये बताना था की कमेरे के सामने , या एन सब लोगो की मौजूदगी मे उसे चोदने मे कोई दिक्कत नही होगी.

उसने एक ही ज़टके मे पूरा लंड, रानी की चूत मे ठोक दिया-----रानी दर्द से बिलबिला उठी----रंडी होने के बावजूद उसके लिए ये लंड झेलना मुश्किल हो रहा था.

"अबे तू सांड है क्या-----मरी री मैईईईईयय्या----ये तो पूरा बच्चेड़नी मे घुस रहा हॅयियी-----ही ही ही---साले थोडा हौले हौले नेई चोद ने को सकता किया."

"साली---रंडी--चुप कर--अभी अभी रघु को क्या कहा रही थी तू छिनाल----अब क्यू चिल्ला रही है----ले अब पूरे मर्द का लंड."

उनके इश्स अश्लील संवादो से वाहा बैठे सभी के टॅंगो के बीच हलचल हो रही थी, सबके हाथ अंदर पहुच चुके थे, मेडम तक उत्तेजित हो गयी थी.

राजा का चोदने का स्पीड अब काफ़ी बढ़ चुका था, लेकिन रानी की चूत अभी भी उसकी ताल मे ताल नही मिला पा रही थी, वो चीखे जा रही थी----

"तू साले हरामी,--अकेलेच मज़ा लूट रहेला है,------मेरे कू नेई लूट ने दे रहेला है-----आबे थोड़ा आराम से चोद मैं भी तो मज़ा लूटू, तेरे इस लंबे केले का."

रानी का पूरा शरीर हिल रहा था उसकी टाँगे, दोनो तरफ फैली हुई थी, वो राजा की पीठ पर नाख़ून गाड़ा रही थी, उसकी चुचिया हर चोट पर नाच रही थी, रानी को असल मे बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन रंडी होने के नाते, इस तरह चिल्ला चिल्ला कर वो अपने ग्राहको को खुश करती थी,

"हाए हाए---उहह-उउहह---आहाः--हूंम्म---हूंम्म---मैं आ रह्हीइ हुउऊ----और लगा साले---दे धक्का--और ज़ोर से---
उसका बदन अकड़ रा था, चूत की दीवारे लंड पे कसी जा रही थी, उसे पूरा निचोड़ ने के लिए----और अगले ही सेकेंड -----रानी की चूत राजा के लंड को नहलाने लगी.

लेकिन राजा अभी आया नही था, वो पूरी मुस्तैदी से डटा हुआ था, उसने तुरंत रानी को पलटा दिया, कमर को पकड़ कर एक झटके मे गंद को लंड की सीध मे ले आया, क्या होने वाला है इसका अंदाज़ा आते ही रानी, फिर चिल्लाने लगी----

"मेरे कू नेई माँगता तेरा पैसा, ओ मैइडं इश्स कू हटा दे रीईईईईई------ऊऊओह---निकाल साले ---निकाल मेरे कू मार डाले गा किया----अरे कोई बचाओ---मैं मर जाउन्गी रे-------

रानी चीखती रही, राजा लगातार पेले जा रहा था------और आएशा कांप रही थी-----क्या मुझ पर भी ये सांड चढ़ेगा---? उसने डर के मारे आँखे बंद कर ली.

लेकिन मेडम खुश थी----उसे अपनी ब्लू फिमो का सुपर स्टार मिल गया था.

थोड़े ही देर मे राजा ने अपने लंड को निकाल लिया----रानी को छ्चोड़ ते ही वो धाम से बिस्तर पे गिर गयी----उसमे हिलने दुलने की भी ताक़त नही रही थी.

राजा अब अपना हाफ एरेक्टेड लंड लेकर मेडम के सामने खड़ा हो गया

मेडम ने राजा के लंड को देखा, फिर मुस्कुरई, और बोली------
'"तुम तो हीरो हो----कसम से ऐसा जानदार लंड, आज से पहले कभी नही देखा-----मैने कई लड़को को ब्लू फिल्म मे चान्स दिया, लेकिन तुमरे जैसा कोई नही था"----उसने राजा के लंड को मुट्ठी मे पकड़ लिया, और होंठो से चूम लिया.
राजा फिर कपड़े पहन ने लगा, रानी अभी भी बिस्तर पर पड़ी हुई थी.

थोड़ी देर बाद, मेडम, आएशा, प्रिया और राजा हॉल मे बैठे, ड्रिंक्स ले रहे थे, सिर्फ़ आएशा के हाथ मे सॉफ़्तडरिंक था.मेडम ने आएशा से पुचछा----
"आएशा, अब बताओ, तुम्हे राजा का पर्फॉर्मेन्स कैसा लगा, क्या तुम झेल पाओगि राजा का लंड----ठीक से सोच कर जवाब देना, बाद मे नखरे नही चलेंगे"
"मैं कर लूँगी,----अगर आप पैसा कुच्छ बढ़ा दे---तो---मेरा मतलब----!"-----आएशा झिझक रही थी, हालाकी राजा और रानी की चुदाई देख कर उसकी भी पॅंटी गीली हो गई थी, लेकिन वो चाहती थी, कुच्छ ज़्यादा मिले, तो ये दर्द भी सह लेगी.

"सुन आएशा, तू क्या अपने आप को बॉलीवुड की हेरोयिन समझ रही हैं----अभी फिल्म बनानी शुरू भी नही हुई, की तुम अपने भाव बढ़ा रही हो---देख एधर ऐसा नही होता, एक से एक रंडिया, कल्लगिर्ल्स, ज़ोपड़पट्टि की ग़रीब लेकिन खूबसूरत लड़किया मिल जाती हैं, वो भी कम दामों मे-----तुझे पहले ही ज़्यादा पैसे मैं क़ुबूल किया है---अब करना है तो कर---वरना---!"-----मेडम ने अपनी बात अधूरी छ्चोड़ी.
"कोई बात नही, कोई बात नही, मैं तो यूही----बस सोच रही थी---"

"ठीक है अब सब आराम करो, दो घंटे बाद शूटिंग शुरू करेंगे----डेनी तुम लोगो को तुम्हारे सीन समझा देगा."
और मेडम उठ कर चली गयी

हॉल मे अब सिर्फ़ प्रिया, आएशा और राजा थे----बाकी स्टाफ आराम करने के लिए चला गया

'अब मई भी चालू,---मैं तो सिर्फ़ तुम्हे मेडम से मिलाने लाई थी, लेकिन तुमने तो यहा झंडा गाढ दिया----और अब तुम्हे तुम्हारी हेरोयिन भी मिल गयी है, अब मेरा यहा क्या काम---?"-----प्रिया ने हसते हुए कहा.
"तुम कहा जा रही हो, रूको"--------राजा उसके पास पहुचा, प्रिया कोअपनी बहो मे भरा, और उसे किस करने लगा-----प्रिया अपने आप को छुड़ाने का नकली प्रयास करने लगी------सच्चाई यह थी की उसे राजा का ये उतावलापन पसंद आ रहा था.
राजा ने अब उसकी चुचियो को दबाना शुरू किया, कस कस के मसल रहा था.------"अरे ये क्या कर रहे हो, छ्चोड़ो ना प्लीज़ मुझे जाना है, ज़रूरी काम हाई"-----प्रिया तड़प कर बोली
"एक बार चोदे बगैर नही जाने दूँगा"------राजा अब उसकी टी-शर्ट मे हाथ घुसने लगा.
"देखो राजा, मैं तुम्हे मना नही कर रही हू, चाहती तो मैं भी हू, लेकिन इस वक्त मुझे सच मे काम है, काम नही हुआ तो मेडम नाराज़ हो जाएगी-----प्लीज़, मुझे समझ ने की कोशिश करो"-------प्रिया के इतना कहने के बाद राजा ने उसे छ्चोड़ दिया.
"लेकिन इस खड़े लंड का क्या करू...?"----उसने गुस्से से पुचछा.
"आएशा है ना, उसे चोद डालो, उसे भी प्रॅक्टीस हो जाएगी, आख़िर उसे तुमने ही चोदना है"------प्रिया चिडने के अंदाज मे बोली.
लेकिन आएशा शर्म से पानी पानी हो गयी----वो अभी भी अपने आप कोइस माहॉल मे अड्जस्ट नही कर पा रही थी.

जब प्रिया निकल गयी, तो राजा आएशा के पास जा बैठा, उसकी जाँघो को थपथपा कर बोला-----"क्या ख़याल है आएशा"---आएशा कुच्छ नही बोली.

"तुम्हारी बात मेरे समझ के बाहर है-----तुम खुद यहा आई हो-----जानती हो ब्लू फिल्म का मतलब क्या होता है,---कैसी कैसी चीज़े करनी पड़ती है----मेडम ने तुम्हे संज़ाया भी है-----तुमने भी ज़्यादा पैसो की माँग रखी थी----मतलब तुम पूरी तैय्यारि मे हो---इस के बावजूद ये शर्म, ये ज़िज़क मेरे समझ मे नही आती"
आएशा बिना कुच्छ बात किए, उठ कर बाहर की तरफ चल दी,
राजा भी उठ कर उसके पास पहुच गया.

"राजा दरअसल बात ये है की, मुझे पैसो की सख़्त ज़रूरत है, मैं घर की बहुत ग़रीब हू, लेकिन हमेशा से मुझे चाह थी की मेरे पास ढेर सारी दौलत हो, पढ़ाई के बहाने मैं, मुंबई आई, लेकिन ख्वाब थे बॉलीवुड हेरोइन बनाने के, वो तो खैर मैं बनी नही, लेकिन लुट गयी, कई लोगो से, फ्री मे, सिर्फ़ एस उम्मीद मे की कोई रोल दिला देगा, लेकिन वैसा नही हुआ, कोई रोल नही मिला-------और कर्जे बढ़ गये, इतने की अब,जब कोई रास्ता नही बचा तो मैं यहा आई----उस्मान करके मेडम का दलाल है, वो कई दीनो से मेरे पिछे पड़ा था----बस मैं यहा आ गयी.

"देख आएशा, मुझे तुमसे हमदर्दी है, सिर्फ़ हम-----क्यू की मैं खुद कड़ाका हू, चोरी, लूटपाट मेरा पेशा था, लेकिन उसमे भी माल कम और पुलिसे का डर जाड़ा रहता था----एसलिए मैं यहा आया, ये सोच कर की फ्री मे लड़किया चोदने को मिलेगी, और रोकडा भी----अब तू मेरा कहना मान---एक बार फिर सोच ले---मेडम को नखरे पसंद नही---उसे सिर्फ़ गंदी से गंदी फिल्म चाहिए----अगर तू ये सब नही कर सकती तो अभी भी वक्त हाई, ---यहा से चली जा, और अगर रुकना हाई, तो पूरी बेशरम बन जा.

"मैं जा नही सकती, मेरे पास फूटी कौड़ी भी नही है------मैं जिंदगी बनाने की कोशिश करूँगी'"

"सिर्फ़ कोशिश करने से काम नही चले गा जानेमन----होना ही पड़ेगा---वैसे तो तू पहले भी चुद चुकी है---तो अब क्या प्राब्लम है"--------अब की बार राजा ने उसे अपने करीब घसीटा, आएशा ने कोई विरोध नही किया.

"वो बात अलग थी---बंद कमरे मे हुआ करता था, लेकिन ये केमरे के सामने, इतनी लोगो की उपस्थिति मे,इसलिए मुझे झिझक हो रही हैं"----अब वो भी राजा को लिपट गयी

राजा ने उसके तपते होंठो पर अपने होठ रख दिए, और हाथ चुचि यो पर, उसका खड़ा लंड आएशा के पेट मे चुभ रहा था, वो अपने आप को उस खड़े लंड पर दबा रही थी, राजा ने दूसरा हाथ उसकी खिली हुए गंद पर पहुचा दिया-----धीरे से उसके कान मे कहा -----"चल अंदर तुझे चोदता हू".
राजा आएशा की कमर मे हाथ डाल कर, उसे अंदर ले गया-----उस बंग्लॉ मे कई बेड रूम थे, सभी शानदार, कोई हाटेल के बेड रूम जैसा सज़ा हुआ था, तो कोई घर के, लेकिन सभी मे एक बात कॉंमान थी, हर बेड रूम मे छुपे हुए कंमेरे फिट थे. सब का कंट्रोल एक कमरे मे था, जहा पूरी रेकॉर्डिंग्स देख कर, उसे एडिट किया जाता था------क्यू की वो कॉटेज नुमा बंग्लॉ, हमेशा ही ब्लू फिल्म के स्टूडियो के रूप मे नही एस्टेमाल होता था, बल्कि कभी कभार, प्राइवेट पार्टियो को किराए से दिया जाता था, आम तौर पर, रेव पार्टिया, कॉलेज के लड़के, लड़कियो की पार्टी, जो बाद मे ग्रूप सेक्स मे बदल जाती थी, या फिर तन्हाई पसंद जोड़ो को, जो वाहा अनैतिक संबंधो को 'एंजाय' करते थे--------ऐसी रेकॉर्डिंग्स मे से अपने काम की रेकॉर्डिंग्स छांट कर उसे फिर ब्लू फिल्म के रूप मे बेचा जाता, जो विदेशो मे उची कीमत पर खरीदी जाती.

राजा एक एक बेड रूम देख रहा था, लेकिन हर बेडरूम मे उसे कोई ना कोई चोदने मे मस्त दिखाई देता,कई लड़किया, जिनकी आज शूटिंग नही थी, स्टूडियो स्टाफ की प्यास बुझा रही थी-------ये नज़ारा देख कर आएशा हैरानी से राजा को देखने लगी.

"ये सब क्या हैं राजा....?"
"आएशा डार्लिंग, ये सब तो तुम्हे भी करना पड़ेगा,-----ये सभी स्टूडियो के स्टाफ से यहीं, लड़किया उन्हे खुश कर रही हैं,-----मुझे प्रिया ने बताया था, की अपनी वास्तविक पहचान च्छुपाने के लिए, मकेउपमन से लेकर कॅमरमन, एडिटर्स तक सबको खुश रक्खती हैं ये लड़किया-----वरना कही ना कही ये लोग उनकी ओरिजनल सूरत को फिल्म मे चिपका देते हैं."-------राजा की बात सुनकर आएशा ने एक झूर झूरी ली

एक बेडरूम मिल गया, जो खाली तो नही था , लेकिन जाड़ा भीड़ भी नही थी, कॅमरा मॅन जॉनी एक लड़की को चोद रहा था, लड़की पूरी नंगी थी, दीवार से हाथ टीका कर, कुतिया बनी थी और जॉनी उसकी चुचिया पकड़ कर जम के चोद रहा था--------राजा को देख के लड़की को कोई फ़र्क नही पड़ा-----वो बदस्तूर चुदवा रही थी----सिर्फ़ जॉनी ने राजा से कहा-----

"हाई राजा----वेलकम ब्रदर-----तुम्हारे लिए ही बेड खाली रखा हैं-----ये आएशा है ना-----बढ़िया माल है----जम के चोदो, आज शाम को ईसी की शूटिंग हैं"
अपने बारे मे ऐसी बाते सुनकर वो फिर से नर्वस होने लगी-----लेकिन राजा ने उसे अपने बाहों मे भर कर उसके होंठो को चूसना शुरू किया, तो वो फिर से नॉर्मल होने लगी-----उसे पैसो की सख़्त ज़रूरत थी-----दूसरा कोई रास्ता नही था-------अब जैसे भी हो उसे ये काम करना ही था.-----वो भी राजा को रेस्पोन्से देने लगी.

थोड़ी देर बाद राजा ने उसे बेड पर बिठाया----और कहा---

"डार्लिंग मेरी ज़िप खोलो, और लंड बाहर निकालो-----" राजा जान बूझ कर ओपन बाते कर रहा था----ताकि उसे आदत पड़ जाए
आएशा ने हिचकिचाते हुए ज़िप खोली----उसकी बाजू मे ही जॉनी लड़की को चोद रहा था----ऐसे महॉल की उसने कभी कल्पना तक नही की थी------ज़िप नीचे करते ही, राजा ने उसे पॅंट और ब्रीफ दोनो को नीचे करने को कहा-------उसने ये भी किया----अब राजा का फुफ्कर्ता हुआ लंड उसकी आँखो के सामने----वो सम्मोहित सी उसे देखने लगी-----अब शर्म कम और उत्तेजना बढ़ने लगी थी

आएशा कोई कवारी तो नही थी, उसे पता था ऐसे फँफनाए लंड के साथ क्या करना हैं, उसने लंड को अपने उंगलियो से धीरे से पकड़ा, उसकी फॉरेस्किन को पिछे हटाया, अब फूला हुआ, मशरूम जैसा दिखाने वाला सूपड़ा बाहर आया, आएशा ने उसे अपने मूह के पास किया, सूंघ कर देखा, जानी पहचानी खुशबू पाते ही, उसकी चूत पासीज ने लगी-------उसने धीरे से जीभ निकाल कर सूपदे पर फेरी, वाउ इट टेस्ट सो गुड, उसने मन ही मन सोचा----अगले ही पल राजा का लंड आएशा के मूह मे था,
आएशा ने लंड चुसते चुसते ही राजा की पॅंट, ब्रीफ खींच कर उतार दी, जिसे राजा ने अपने पैरो से निकाल कर, दूसरी तरफ उच्छाल दिया, और अपना टी-शर्ट भी उतार फेका, आएशा का चूसना बदस्तूर जारी था, साथ ही साथ वो उसकी गोलियो से भी खेल रही, लंड पूरे गले के नीचे तक पहुच रहा था----और राजा की पतंग हवा मे उँची उड़ रही र्ही------मूह से आहह---आआहह---हाहहाहा जैसे कामुक सिसकारिया निकल रही थी-----काफ़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा----फिर राजा ने आएशा को रोका, और उसके कपड़े उतारने लगा, इस बार आएशा शरमाई नही, बल्कि उसकी मदद करने लगी.

"लड़की तेज़ी से सिख रही हैं भिड़ू----अच्छा हैं---लगा रह----बाद मे मैं भी नंबर लगाउन्गा"------जॉनी जो अब लड़की की पोज़िशन बदल कर उसे चोद रहा था. आएशा की 'प्रोग्रेस' देख कर बोल पड़ा.
"बाद मे क्यू जॉनी भाई अभी भी आ सकते हो, ये तो आम रास्ता हैं, एस पर चलने की किसी को मनाही नही हैं,"------राजा की बात सुनकर जॉनी ने एक ठहाका लगाया, और आएशा उसे घूर्ने लगी

'गुस्सा क्यू होती हैं डार्लिंग, ये सच तुम जितनी जल्दी स्वीकार करोगी, उतनी ही तुम्हे कम तकलीफ़ होगी'
राजा ने अब उसे बेड पर सुला दिया, और उसकी टाँगो फैला कर, उसकी चूत को खोल दिया, अपना मूह चूत के पास ले जाकर चाटने लगा------अब आएशा की हाई हाई शुरू हुई--------वो उउत्तेजन्ना को बर्दाश्त करने के लिए खुद ही अपनी चुचियाँ दबाने लगी, उसकी आँखे बंद थी, अब वासना उस पर हावी हो चुकी थी-----अचानक उसके मूह से घुटि घुटि सी चीख निकली----आअहहुउऊउ---आआओउुउउच्च्च्च-----राजा ने बिना कोई इशारा दिए अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया था.

शाम होते होते मेडम स्टूडियो मे पहुच गयी, स्टूडियो का स्टाफ शूटिंग की पूरी तैय्यारि कर चुकी थी, मेडम ने आते से ही आएशा को याद फरमाया-------
"क्या बोलती हैं आएशा, तेरी शरम कुच्छ हुई की नही, अभी मेरेको बढ़िया शॉट चाहिए, कोई लफ़दा, नखरा नही चलेगा----अच्छा शॉट दिया तो तेरे को, पैसा थोड़ा बढ़ा दूँगी, तेरी खूबसूरती, और फिगर के वास्ते, समझी---?"

"हाँ मेडम---मैं पूरी कोशिश करूँगी"------आएशा ने कहा---वैसे वो अब काफ़ी खुल चुकी थी दोपहर की चुदाई के बाद.

"अब कोई टेन्षन नही मेडम, आएशा अच्छे से "खुल" चुकी है, दोपहर मे"-----ये जॉनी था-------आएशा ने उसकी पीठ पर धौस जमाई.
आएशा का ये खुला पन देख कर मेडम भी खुश हो गयी, उसने राजा की तरफ देखा, तो राजा ने मुस्कुराके 'थम्स उप' करके दिखाया.-----मेडम समझ गयी, ज़रूर राजा ने दोपहर मे आएशा की बॅंड बजाई होगी.

"चलो, सब लोग, शुरू करते हैं, डॅनी----आएशा और राजा को शॉट समझाओ"
डॅनी ने समझाना शुरू किया-----
"एस सीन मे आएशा एक बड़े घर की, कॉलेज गोयिंग लड़की हैं,जो कॉलेज से लौटने के बाद, शवर लेने के लिए बाथरूम मे जाती है,----पूरे कपड़े उतार कर नहाती है,-----आएशा तुम्हे अपने कपड़े उतारने हाई----कमेरे की तरफ देखना नही है,----ऐसे ही लगाना चाहिए, जैसे तुम सचमुच अपने घर मे नहा रही हो----अब घर मे नौकरानी के अलावा और कोई नही है,-----राजा तुम एक चोर हो----जो की तुम सचमुच हो,----दिन मे ही खाली घर देख कर----चोरी की नियत से, घुस जाते हो-----अचानक बाथरूम से आएशा निकलती है, जो सिर्फ़ टवल लपेटे हुए है,-----उसकी सेक्सी, भारी जवानी देखा कर तुम चोरी का ख़याल छ्चोड़ कर, उसकी इज़्ज़त लूटने की कोशिश करते हो---आएशा,पहले विरोध करती है, लेकिन बाद मे मज़े लेने लगती है,----क्यो की वो बाथरूम मे फिँगुरइंग कर के गरम हुई होती है"
डॅनी ने एक ही सास मे पूरा सीन समझाया-----और मेडम की तरफ देखा, मेडम ने मंडी हिलाकर सहमति दर्शाई, ----फिर उसने आएशा और राजा की तरफ देखा, दोनो ने ही सहमति जताई-----हलकी आएशा थोड़ा अनईज़ी फील कर रही थी.

डॅनी जो इस सीन का डाइरेक्टर था, सीन समझाते समझाते ही उसका लंड पॅंट मे तनने लगा,-----उसने अपने आप पर काबू पाया, और मेक उप मॅन को ज़रूरी निर्देश देने लगा----मिसाल के तौर पर----आएशा की हेर स्टाइल, उसका लुक, कैसे बदलना है,-----राजा के लिए कुच्छ खास बदलाव लाने की ज़रूरत नही थी.
मेकप मॅन आएशा को लेकर, मेकप रूम मे गया------"आएशा अपना टॉप उतार दो"------मेकअप मॅन असलम का पहला निर्देश आया, आसपास्स कई लोग थे, जो शूटिंग की तैय्यारि मे व्यस्त थे----और आएशा का ये पहला मौका था, सबके सामने, कपड़े उतारने का-----उसने टॉप उतार दिया, और अपनी चुचियो को हाथ से ढकने लगी.

"एसकी क्या ज़रूरत है, अभी पूरा नंगा जिस्म दिखना है, क्या क्या छिपओगि,----लगता है अभी पूरी तैय्यार नही हुई----अब अगर नखरे दिखाए तो----तेरे को यहा से निकाल दूँगी----लड़कियो की कोई कमी नही है"---------मेडम की कड़क आवाज़ सुनते ही, आएशा के हाथ, अपनी चुचियो से हट गये-----वो कमर के उपर सिर्फ़ बा मे अपने उफनते जोबन समहाले हुए थी.
उसे अब एक हायर सलून जैसी चेअर पर बिठाया गया, बालो को खोल कर, हेर स्टाइलिस्ट उसके बालो पर काम करने लगी, ये 25/30 के पेटे मे रीमा नाम की लड़की थी, खुच्छ खास ना होने से कभी कभार, छ्होटे मोटे शॉट्स मे आती थी, लेकिन आम तौर पर नॅपकिन जैसे हाथ पोछने के काम मे आती थी, जिसे आते जाते कोई भी एस्टेमाल कर लेता था.

थोड़ी ही देर मे, आएशा का मेक उप पूरा हुआ, वो अब तुरंत पहचानी नही जा सकती थी, अपने आप को मिरर मे देख कर आएशा भी काफ़ी हद तक संतुष्ट हुई.---अब उसे फिर से टॉप दे दिया गया, और कमरे के बाहर से एंट्री मारने को कहा गया, जैसे कॉलेज से लौट रही हो, किताब,कापी समेत----

"ओके,---एवेरी बड़ी रेडी----लाइट, कॅमरा,----एक्शन---!"------डेनी ने ऑर्डर दिया

आएशा, दनदनाती, कमरे मे घुसी, संदेल्स एक तरफ उच्छाले, किताबें दूसरी तरफ उच्छाले, और कुच्छ देर बेड पर बैठी रही------कॅमरा चल रहा था---दो कॅमरा मॅन उसके आसपास घूम रहे थे-----लाइटिंग वाले फ्लडलाइट्स आगे पिछे कर रहे थे, डॅनी, मेडम, राजा,और बाकी कुच्छ लोग वही खड़े थे, और आएशा को दर्शाना था जैसे कमरे मे उसके अलावा कोई नही-----मुश्किल होता है

फिर वो उठी, अपने वारड्रोब मे से, गाउन निकाला,----डॅनी द्वारा पहले ही दिए गये निर्देशा नुसार, उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए, पहले टॉप उतरा, फिर जीन्स-----वो सिर्फ़ ब्रा, पॅंटी मे कयामत ढा रही थी, उसकी फिगर वाकई कमाल की थी,--36-26-38 तो होगी ही.
'कट--कट---कट---क्या कर रही हो, ये मत भूलो तुम अपने ही घर मे कपड़े उतार रही हो, और तुम्हे 'कोई भी नही देख रहा'----फिर तुम्हारे चेहरे पर ये हिचक कैसी-----मत भूलो ये कोई बाजारू, ब्लू फिल्म नही बन रही, ये विदेशो मे जाएगी----ओए वो लोग ब्लू फिल्म भी बढ़िया तरीके की चाहते है----समझी---फिर से करो"------मेडम की आवाज़ कदकते हुए हंटर जैसी तेज थी.

आएशा ने फिर वो सब रिपीट लिया, इस बार कोई ग़लती नही की----डेनी चल कर उसके पास, पहले उसके कुल्हो को थपथपाया, फिर बाँहो मे भर कर----चुचियो को दबाता बोला----''अच्छा शॉट था, लेकिन अब आगे ये भी उतारना है"----उसकी पॅंटी पर से चूत को सहलाता बोला-----आएशाने हाँ मैं सिर्फ़ गरदन हिलाई

अगला शॉट------

आएशा बाथरूम जाकर, अपनी ब्रा पॅंटी भी उतारती है, दोनो हाथ उठा कर, पहले अंगड़ाई लेती है, फिर बालो को पोनीटेल की शकला मे बाँधती है, इस क्रिया मे उसकी तनी हुए चुचिया, और उभरी हुई गंद पर कमेरे फोकस होते है, उसका हर अंग अब कमेरे मे क़ैद होरहा है

"तुम्हारे चेहरे पर, थोड़े सेक्सी एक्सप्रेशन चाहिए"----अब डॅनी का डाइरेक्षन शुरू होता है
"अपने बॉल्स से खेलो"
"निप्पल्स दबाओ---उंगलियो मे पकड़ के खीचो"
"एक हाथ पिछे गंद पर ले जाओ----थोड़ा सहलाओ, थोडा दबाओ"
"दूसरा हाथ, चूत पे ले आओ---सहलाओ---ज़ोर से---मूह से मोनिंग होना चाहिए"

इतनी कामुक सूचनाए, इतने कामुक एक्शन----आएशा की सिसकारिया अपने आप निकलने लगती हैं-------"डॅनी--इसकी चूत पे बाल रहने देना था क्या--या क्लीन शेव्ड ही अच्छी है..?"----बीच मे ही मेडम ने पुचछा-----"नही मेडम विदेशियो को क्लीन शेव्ड ही अच्छी लगती है'"-----डॅनी का जवाब.

"बढ़िया, अब शवर शुरू करो------धीरे धीरे पूरे शरीर को भीगाओ"
"कॅमरा---पानी की बूँदो का क्लोजप आअना चाहिए-----खास तौर से, निपल्स, चूत और गंद से गिरता पानी आना चाहिए"

"आएशा उंगली चूत मे डालो, शुरू मे धीरे फिर तेज फिँगुरइंग होनी चाहिए"

अब आएशा इतनी गर्म होती है की, उसे अब डॅनी के डाइरेक्षन की ज़रूरत नही रहती, वो खुद ही अपनी चूत मे तब तक उंगली करती है, जब तक वो झाड़ ना जाए

तभी उसे एक आवाज़ सुनाई देती है, वो तुरंत टवल अपने गीले जिस्म पर लपेट ती हुई, वह बाथ रूम से बाहर आती है

एक बढ़िया सेक्सी शॉट पूरा होता है

अब आगे है राजा और आएशा का, सेक्स ऑन बेड

अगला शॉट------

आएशा आवाज़ सुन कर बाहर आती है, वो देखती है एक हट्टाकट्टा नौजवान उसके कमरे मे मौजूद हैं, वो चीखने ने के लिए मूह खोलती है, तभी, उस आदमी की नज़र उस पर पड़ती है, टवल के नाम पर कलंक साबित हो रहे उस कपड़े के टुकड़े मे लिपटी उस आध नंगी जवानी को देख कर वो, उसकी तरफ दौड़ता है, आएशा के मूह से चीख निकालने से पहले ही वो उसे पकड़ लेता है,----एक हाथ से उसका मूह दबोच लेता है, तो दोसरे हाथ से कमर.

"कट---कट---कट---क्या कर रहे हो राजा, इतनी सेक्सी लड़की को कमर से पकड़ ते हो, शर्म नही आती-----उसे इस तरह पकडो, की उसका टवल छूट कर, नीचे गिर जाए, और वो पूरी तरह से नंगी हो जाए, फिर उसकी चुचियो को पकडो, कस कर, इतना कस कर की आएशा की आँखो से पानी निकलना चाहिए----हम ब्लू फिल्म बना रही हैं यार.----चलो अब फिर से पूरा आक्षन करो"-----डॅनी की डाइरेक्षन अब फिर से शुरू होती हैं.

पूरा सीन फिर से रिपीट होता है-----इस बार राजा, आएशा को नगा कर देता है, एक हाथ से मूह और एक हाथ से चुचिया पकड़ता है, एकदम कसकर.

आएशा के नंगे बदन से चिपकाने से राजा का लंड अब फिर से फंफनाने लगता है, लंड की चुभन महसूस करके अब आएशा भी मस्ताने लगती है.
"अगर ज़रा सी भी आवाज़ की तो ये मुलायम गरदन काट कर अलग कर दूँगा"-----राज
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Reply
07-17-2017, 11:42 AM,
#6
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
वो आज भी याद आती है --1

मेरा नाम राज शर्मा है. आप सब जानते ही हैं मैं सेक्सी कहानिया आप सब के लिए लेकर आता रहता हूँ . मगर दोस्तो
ये कहानी नही बल्कि मेरी ज़िंदगी की एक सच्ची घटना है, जो मैं शायद कभी ना भूल सकूँ. 11 साल का ये गोलडेन पीरियड मैं कोशिश करूँ गा कि कवर कर सकूँ. अगर किसी जगह आप को लगे कि मैं झूट बोल रहा हूँ या आप को लगे की ये एक काल्पनिक स्टोरी है, तो आप को इजाज़त है कि उसी जगह पढ़ना रोक दीजिए.
ऐक दिन फोन की बेल बजी, जब मैं ने फोन उठाया तो किसी ने
मेरी हेलो का जवाब नही दिया बल्कि दूसरी तरफ से एक सॉंग की आवाज़ मेरे कानों मैं आई "जब से हुई है तुझ से मोहब्बत, तेरे सिवा
कोई बात नही है". मैं समझ नही पाया की ये कॉन हो सकता है. या शायद किसी दोस्त ने मज़ाक़ किया हो. बात आनी जानी हो गयी. दोसरे दिन फिर यही कुछ हुआ. अब तो मैं ने सही मैं सोचना शुरू किया कि ये आख़िर कोन हो सकता है.
फिर ऐक दिन मैं अपने गाँव किसी काम से गया. वहाँ मेरे घर के सामने वाले घर से मेरे दोस्त प्रमोद की बहन राधा
मुझे ऐक अजीब सी प्यासी नज़रों से देखे जा रही
थी. मैं ने कुछ ध्यान नही दिया कि वो वैसे भी मुझ से काफ़ी बे तकल्लूफ थी, मगर घर के ओर लोगों के सामने नही. जब हम दोनो एक लम्हे को अकेले हुए तो उस ने मुस्करा मुस्करा कर अजीब सी नज़रों से मुझ को देखा ओर पूंच्छा की मैं ने सुना है कि तुम को कोई फोन पे लव सॉंग्स सुनाता है…? मुझे बहुत अजीब लगा के इस को किस ने बताया. उस के बार बार यही पून्चने पर मेरे दिल को धड़ाका सा लगा कि कहीं फोन पे लव सॉंग ये तो मुझे नही सुना रही…थी….
वैसे वो मुझसे 3 साल छोटी थी रंग गोरा फिगर मस्त था वो पास के शहर मे स्कूल मे पढ़ती थी नाम था राधा . मैं अपने बचपन की यादो मे खो गया . दोस्तो आप को ये सुन कर शायद हैरत हो, कि मैं बचपन मे राधा को घूर कर देखते हुए अक्सर मन मे ये सोचा करता था कि काश मेरी इस से दोस्ती हो जाए, ओर मे इस कमसिन जवानी रस चूस सकु . वैसे आप विश्ववश करे या ना करे लेकिन शहरो की अपेक्षा गाँव मे लड़के लड़किया 12-13 की उमर मे सेक्स के बारे मे जान जाते हैं . क्यूंकी गाँव का माहॉल थोडा खुला हुआ होता है . मज़ाक भी अक्सर द्वियार्थी भाषा मे ही चलते हैं . मैं जब गाँव मे रहता था तब मैं यही सोचता था कि अपने मुहल्ले की सभी कमसिन जवानियो का रस पी जाउ . मेरी राधा के बड़े भाई से दोस्ती थी इसलिए मैं अक्सर उसके घर जाता रहता था कि शायद उसकी नज़रे इनायत मुझ पर हो जाए मगर वो तो किसी से सीधे मुँह बात भी नही करती थी, इस लिए मैं ने कभी पहल नही की.
मगर क़िस्मत को शायद यही मंज़ूर था, और वही हुआ जो मैं चाहता था, कभी कभी ऐसा भी होता है. मैं उस समय 16 साल का था ओर गाँव मे ही रहता था ओर राधा यही कोई 12-13 साल की थी . मेरी मम्मी कुछ दीनो के लिए मामा के घर जा रही थी . पापा गुड़गाँवा मे नोकरि करते थे . इसलिए मम्मी जब जाने लगी तो उन्होने राधा की मम्मी को कहा कि राधा को कुछ दिन हमारे घर ही सोने देना . सभी बच्चो का मन लगा रहेगा
राधा की मा ने हाँ कर दी . ओर मेरी मम्मी मामा के यहाँ चली गई . घर मे मैं ओर मेरे छोटे भाई बहन ही थे . रात को राधा हमारे साथ सोने के लिए हमारे घर आ गई . तब तक सभी सो चुके थे . राधा ने कहा मे कहाँ सोऊ तो मैने कहा आज तो तुम मेरे साथ ही सो जाओ कल से तुम्हारे लिए अलग से एक बिस्तर लगा दूँगा . पहले तो राधा मेरे साथ सोने के नाम पर झिझकी पर फिर वो मेरे साथ लेट गई . हम कुछ देर आपस मे बात करते रहे . राधा हूँ हां मे जबाब देती देती सो गई . पर मुझे नींद नही आ रही थी मेरे लंड फूँकार मार रहा था . मैं कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा ओर जब मैने देखा कि राधा गहरी नींद मे सो गई है तो मैने डरते डरते अपना एक हाथ उसके सीने पर रख दिया . फिर मैने अपने हाथ को उसकी छोटी छोटी चूचियो पर घुमाने लगा . वो नींद मे थोड़ा कसमासाई तो मैने अपना हाथ रोक लिया राधा ने अंगड़ाई लेते हुए अपना एक पैर मेरे पैरो के उपर रख दिया . अब मेरी हिम्मत भी थोड़ी सी बढ़ गई थी
मैने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया ओर धीरे धीरे उसकी पीठ सहलाने लगा
मैने अपने होंठ उसके गाल पर रख दिए ओर धीरे धीरे उसके गालों को चूमने लगा
राधा अभी तक चुप चाप लेटी थी . मेरी हिमात बढ़ती जा रही थी . अब मैने अपना हाथ राधा की पीठ से हटाकर चूचियो पर रख दिया . वाह! क्या चूचिया थी उसकी. पूरे राउंड शेप मैं बूब्स के उपेर पिंक कलर के दो दाने थे. क्या खूबसूरत नज़ारा था मैने मेरी ज़िंदगी मैं पहली बार इतने अच्छे बूब्स देखे थे ऐसे बूब्स तो शायद ही किसी के होंगे. मैं तो पागल हो गया था मैं उसकी दोनो चुचियो को हाथ मे लेके दबाने लगा. क्या कसाव था उनमे. वाह! मैं तो बस उसे दबाते ही रह गया. ऐसे लग रहा था इन्हे छोड़ के कही ना जाउ. 15-20 मिनट. के बाद मैं एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत सहलाने लगा. और फिर धीरे से उसकी सलवार का नाडा खिछा ओर खोल दिया धीरे धीरे उसकी चूचियो को सहलाने लगा . दोस्तो उसकी चूचिया अभी एक छोटे नीबू के आकार की थी जो मेरी मुठ्ठी मे ठीक से भी नही आ पा रही थी . पर मुझे उसकी चूचियो पर हाथ फिराना बहुत अच्छा लग रहा था . अब मेरी हिम्मत ओर बढ़ गई थी मैने अपने पैर को राधा की जाँघो पर धीरे धीरे रगड़ना शुरू कर दिया .अब मेरे होंठ भी आवारा हो चले थे
मैने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए ओर उन्हे बड़े प्यार से चूसने लगा . दोस्तो ये पहली बार था जब मैने किसी लड़की के होंठो को चूसा था . मेरा शरीर रोमांच से भर उठा . अचानक मुझे लगा कि शायद राधा जाग चुकी थी लेकिन वह चुप चाप लेटी हुई थी . मैं समझ गया कि उसे भी मेरा चूमना ओर सहलाना अच्छा लग रह रहा है
अगर उसे बुरा लगता तो अब तक वो मुझे झिड़क चुकी होती . अब मैने उसके बदन से खुल कर खेलना शुरू कर दिया . राधा धीरे धीरे मस्ती की तरफ बढ़ रही थी . मैने उसके एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया . कुछ देर तक तो उसके हाथ मे कोई मूवमेंट नही हुई तो मैने उसके हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया . राधा ने मेरे लंड को पकड़ लिया ओर उसे दबाने लगी . मैने राधा की एक चूची को मुँह मे ले लिया ओर उसे चूसने लगा . राधा मुझसे चिपत गई शायद उसे मेरा इस तरह से चूची को चूसना बहुत अच्छा लग रहा था . दोस्तो मैं उसकी शलवार का नाडा तो पहले खोल चुका था
अब मैं बेड पे उसके उपेर लेट गया और उसके बूब्स दबाने लगा. मैने उससे कहा मेरा लंड मुँह मे लेकर टेस्ट करोगी उसने ना कहा वो बोली "मुझे मुँह मे नही लेना" मैं बोला "ठीक है तुम्हारी मर्ज़ी" और फिर एक हाथ नीचे ले जाके उसकी चूत सहलाने लगा. उसकी चड्धि गीली हो गई थी. मैने हाथ फिर उसकी चड्धि मैं डाल दिया वो सिहर गयी. मेरा एक हाथ उसकी चूत को सहलाने लगा . मैं एक उंगली उसकी चूत के छेद पे फेरने लगा वो आअहह उउउफफफफफफ्फ़ आआआहह सस्स्स्स्सिईईईईईईईई आआआहह करती रही मैने फिर वही उंगली उसकी चूत मे घुसेड़ने लगा वो उछालने लगी मैं धीरे धीरे अपनी उंगली को उसकी चूत मे अंदर बाहर करने लगा अब मेरी पूरी उंगली उसकी चूत मे चली गयी उसकी चूत काफही टाइट थी. फिर मैने मेरी उंगली अंडर ही गोल गोल घुमाने लगा .वो सिर्फ़ आहह उउउफ़फ्फ़ ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ूऊओरसईए कर रही थी. थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ उसके चड्डी से निकाला और उठ के बैठ गया. और उसकी चड्धि निकालने लगा वो शर्मा रही थी. मैने उसकी चड्धि उसके पैरो से अलग करदी और उसकी चूत देखने लगा. तभी उसने अपने दोनो पैर एक के उपेर एक रख दिए और चूत छुपाने की कोशिश करने लगी मैने उसके दोनो पैर अलग करके उसे पकड़ लिया. और मुझे उसकी चूत दिखने लगी क्या चूत थी वो . एक दम कोरी चूत. चूत पूरी तरह से सील पेक थि.उस्के उपर हल्के हल्के रोँये थे मैने फिर अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसा दी और उसके गुलाबी होंठो पर आपने होंठ रख कर किस करने लगा साथ ही साथ उंगली अंदर बाहर करने लगा. वो एक दम पागल हो गई और मेरा हाथ पकड़ के ज़ोर ज़ोर से उंगली अंदर बाहर करने लगी. थोड़ी देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा हाथ गीला कर दिया.राधा मुझसे चिपक गई ओर मुझे अपनी बाँहो मे भींच लिया . अब मेरे से नही रुका जा रहा था मने अपना अंडर-वेअर उतार दिया . मेरा लंड बेकाबू हो चुका था अब मैने अपनी पोज़ीशन ली ओर अपने लंड को उसकी चूत से रगड़ने लगा . मैने राधा के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया ओर चूसने लगा राधा पूरी तरह उत्तेजित होचुकी थी मैने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर टिकाया ओर धीरे से एक धक्का दिया . मेरा लंड चूत मे नही घुसा ओर फिसल गया
मैने दुबारा लंड को छेद पर सेट किया ओर एक जोरदार धक्का मारा अबकी बार मेरे लंड का मुँह राधा की चूत मे घुस चुका था . राधा की चीख निकल जाती अगर मैं उसके मुँह
पर अपना हाथ ना रख देता . राधा बुरी तरह से मचल रही थी उसकी आँखो से आँसू निकल रहे थे वो मुझे अपने से दूर धकेल रही थी मैने काफ़ी कोशिश की कि मैं अपना लंड पूरी तरह से अंदर कर दूं . लेकिन वो बुरी तरह से दर्द की वजह से काँप रही थी
आँखो से आँसू निकल रहे थे . मुझसे उसका दर्द नही देखा गया ओर मैं उसके उपर से हट गया . मैं उसे प्यार से सहलाने लगा . राधा अब भी रो रही थी उसने रोते हुए कहा - राज ये तुमने क्या कर दिया . मेरी इस मे बुरी तरह से मिर्ची लगा दी . अब मैं तुमसे कभी बात नही करूँगी ओर तुम्हारी मम्मी को आने दो मैं उन्हे तुम्हारी इस हरकत के बारे मे सब बता दूँगी . मैं घबरा गया . मैने उसे प्यार से चूमा ओर कहा पागल ये काम तो सभी करते हैं . कोई बचपन मे करता है कोई जवानी मे करता है . अगर तुम नही चाहोगी तो मैं तुम्हारे साथ अब ऐसा कुछ नही करूँगा . मेरे काफ़ी समझाने पर वह शांत हुई . ओर फिर वो हमारे घर सोने के लिए नही आई . जैसा कि उसने कहा वो मेरी मम्मी के आने पर सारी बात उन्हे बताएगी ऐसा उसने कुछ नही किया
पर हां उस दिन के बाद उसने मुझसे कभी ज़्यादा बात नही की . दोस्तो कुछ दीनो के बाद मे गुड़गाँवा पढ़ने केलिए अपने पापा के पास आ गया था . मैं अपनी उन सुहानी यादो से निकल कर वर्तमान मे लौट आया . मैं अपनी बचपन की इस बात पर खुद ही हंस पड़ा . लेकिन अब मैं उसे पूरी तरह से अपना बनाना चाहता था . लेकिन मेरी हिम्मत उससे कुछ कहने की नही होती थी पर उस रात मैं अपने दोस्त प्रमोद के कहने पर उस के घर रात को सो गया. मैं, उस का भाई प्रमोद ओर राधा तीनो एक ही रूम मैं सो गये.
सारी रात मैं राधा के बारे मे सोचता रहा और ठीक से ना सो सका, और शायद वो भी ना सो सकी. सुबह वो जल्दी उठ गयी और मैं अभी सोया था, कि वो आई और ये परवाह किए बेगैर की उस का भाई भी साथ ही सो रहा है, उस ने मेरे गाल पर किस किया….. मैं ख्वाब मैं था, उस के होंठो की तपिश से मेरे सारे बदन मैं हलचल सी मच गयी. क्यों कि ज़िंदगी मैं पहली बार किसी लड़की ने मुझे किस किया था. वो ये समझ रही थी कि मुझे पता नही चला है क्योकि मैं तो सोया हुआ था.
जब मैं उठा तो वो मुझ से शर्मा रही थी, सुबह उस ने किस और अब उस के शरमाने से मुझे यक़ीन हो गया कि फोन पर सॉंग्स भी वही सुनाती थी दाल मैं ओर भी कुछ काला है पर मैं ने उस से ज़ियादा बात नही कि सिर्फ़ यही कहा कि तुम ने जो सुबह किया मुझे उस का पता चल गया है. और मैं उसी दिन गुड़गाँवा वापस आ गया.
फिर ऐक दिन उस ने फोन किया, मैं ने उठाया तो मैं ने पूछा कि
किस से बात करनी है, उस ने जवाब दिया के तुम से. ओर उस ने अपने
दिल की सारी बातें मुझे बता दी, कि कब से ओर कैसे वो मुझ से
प्यार करने लगी है. अब तो उस ने फोन करने का एक चैन
बना लिया, तक़रीबन हर रोज़ वो मुझे फोन किया करती थी.
एक बार उस ने फोन पर कहा के मैं तुम से ऐक बात शेअरे करना चाहती हूँ मगर मुझे शरम आती है. मैं ने कहा बोलो. उस ने कहा तुम खुद ही बता दो कि मैं किया कहना चाहती हूँ. मैं ने कहा मुझे किया पता, मैं तुम्हारे दिल का कया जानू. उस ने कहा कि तुम तो बिल्कुल बुद्धू हो…… फिर उस ने शरमाते हुए कहा कि मैं ये बात सिर्फ़ तुम से शे-आर कर रही हूँ और किसी को मैं ये सब नही बता सकती. मैं ने विश्ववश करने का शुक्रिया अदा किया और कहा कि अब बता भी दो क्या बात है?.......
उस ने शरमाते हुए कहा कि मेरी छाती का मामला है, जो काफ़ी
छोटी हैं ओर मैं इस का एलाज़ कराना चाहती हूँ ताकि ये थोड़े
बड़े हो जाएँ. किसी लड़की के मुँह से उस की छाती की बात सुन कर
मेरे तो होश ही उड़ गये. मेरे सारे जिस्म मैं गुदगुदी सी होने
लगी. फिर उस के कहने पर मैं ने उस के लिए मेडिसिन लिए. मैं
सोच भी नही सकता था कि इतनी रिज़र्व रहने वाली लड़की मुझ से
इतनी ज़ियादा क्लोज़ हो जाए गी, कि अपने इतने सेकरीट मसले मुझ से
डिसकस करे गी. मैं ने ऐक दिन मज़ाक़ मैं उससे कहा कि तुम्हारा ये मामला दवाओ से हल नही हो गा बल्कि इस के लिए मालिश की ज़रोरत है. उस ने कहा अच्छा ऐसी कोई चीज़ है जिस की मालिश (मसाज) से मेरा ये प्राब्लम ठीक हो जाए ? मैं ने कहा हां अगर मैं अपने हाथों से मास्लिश करूँ या अपने मूँह (माउत) से तो कुछ ही दीनो मैं ये मामला ठीक हो जाए गा. वो बोहुत शरमाई और उसने हंसते हुए कहा कि तुम बोहुत खराब हो जो ऐसी बातें करते हो.

अब तो वो मुझ से अपने मोन्थलि पीरियड्स का जीकर भी करती थे. मुझे तक़रीबन फीमेल्स की सारी सेकरीट उसी से ही पता चली. धीरे धीरे हम दोनो इतने क्लोज़ हो गये कि हम हर तरह की बात एक दूसरे से शेअरए करते, हमारे बीच बातों का कोई परदा बाक़ी ना रहा. मैने उसे मेल्स के बारे मैं सब कुछ बताया ओर उस ने मुझे फीमेल्स के बारे मैं.
हम घंटों तक एक दूसरे से फोन पे बातें करते थे. जैसा की मैं ने पहले बताया कि वो स्कूल मे पढ़ती थी, क्योकि उसका स्कूल शहर मे था इस लिए वो मुझे
बहुत फ़ोन करने लगी, ओर जब मैं मना करता तो वो रोने
लग जाती कि मेरा सब कुछ तो अब तुम्हारा है, ओर अगर तुम ने मुझे
मना किया तो मेरा दिल टूट जाए गा. फिर ये तय हुआ कि एक दफ़ा
फोन मैं करूँगा ओर दोसरि दफ़ा वो करेगी.

ज़िंदगी यूँ ही चलती रही, ओर हम क़रीब से क़रीब आते गये.
मगर उस के उस पहले किस के अलावा ना कबी उस ने मुझे फिज़िकली टच किया, ओर ना ही मैं ने उस को कभी हाथ लगाया.( दोस्तो बचपन की बातो को छोड़ कर क्योंकि वो सिर्फ़ बचपना था )

काफ़ी टाइम बाद मेरे छोटे भाई की शादी मैं जब लेट नाइट मैं घर आया तो में गेट लॉक था, इस लिए मुझे गेट पर चढ़ना
पड़ा. हमारे घर मैं बिल्कुल अंधेरा था, जैसे ही मैं गेट से
कूदा राधा एक रूम से दोसरे रूम मैं जा रही थे, मैं उसे देखकर खुश हो गया मैं ने
उस को हल्की सी आवाज़ दी ओर वो घर के एक कॉर्नर मैं आ गयी.
विश्वाश कीजिए ये सब प्री-प्लन्नेड़ बिल्कुल भी नही था, सब कुछ खुद बखुद ही हो गया. सर्दियों की सर्द रात, सब लोग तक़रीबन सो गयेथे.
हम एक कॉर्नर मैं बैठ गये, ये हमारी पहली वन टू वन
मुलाकात थी. हम ने कुछ देर सरगोशियों मैं बातें की, उस
दोरान उस ने पहली मेरे मेरे कंधे (शोल्डर) पर सर रख
दिया. मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था.
फिर मैं ने उस से कहा कि कोई आ ना जाए इस लिए हम दोनो उस जगह
से उठे ओर साथ ही घर का एक स्टोर रूम था उस मे चले गये. स्टोर रूम मैं बिल्कुल अंधेरा था, लाइट तो थी मगर मैं ने इस डर से ऑन नही कि किसी को शक ना हो.
हम कुछ देर तो चुप ही खड़े रहे, फिर आहिस्ता आहिस्ता मैं उस
के क़रीब हो गया, ओर उसे अपने साथ चिपटा लिया. वो भी मेरे गले लगी.
मेरे तन बदन मैं हल चल मची हुई थी, फिर मुझ से ना रहा
गया ओर मैने उस के होंठो पर अपने होंठ रख दिए. पहले तो वो रेस्पॉन्स नही दे रही थी मगर फिर वो जो शुरू हुई, तो मुझे छोड़ ही नही रही थी. ये पहली किस तक़रीबन 5 मिनट तक जारी रही. फिर मैं ने उस से कहा कि आज के लिए ये काफ़ी है. ओर मैं जाने लगा, तो उस ने मुझे पकड़ लिया ओर जाने नही दिया, ओर उसने दुबारा मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए….. फिर मैं ने उस से जाने के लिए कहा, ओर मैं चला गया. हम ने ज़ियादा कुछ नही किया. मेरी ज़िंदगी की एक मदहोश रात बीत गयी. दो तीन दिन हम शादी के काम काज मे बहुत व्यस्त रहे . ज़्यादातर रिश्तेदार भी जा चुके थे . अपने दोस्त परमोद से कहकर राधा को मैने 5-7 दिन के लिए वही रोक लिया था .ओर मैने प्रमोद को कह दिया था कि राधा को मैं गाँव पहुँचा दूँगा .
अगले दिन डोपेहर को वो किचन मैं कुछ बना
रही थी, सब घर वाले एक रूम मैं गप शप लगा रहे थे. मैं चुपके चुपके किचन गया, वो अकेली थी, उस ने दुपट्टा उतारा हुआ था, ओर अपने काम मैं मसगूल थी. मैं ने एकदम उस को बाँहो मैं पकड़ लिया, वो पहले तो डर गयी, फिर वो भी मेरे गले लग गई.
मैं ने शरारत मैं कहा कि तुम्हारी टाँगों के बीच मेरा कुछ महसूस हो रहा है ? वो शर्मा गयी ओर मुस्कराते हुए अपना सिर हां मैं हिलाया. उसने मेरी आँखो मैं देखा ओर कहा प्लीज़ मुझे ये दिखाओ ना, मैं तुम्हारा ये देखना चाहती हू. मैने कुछ सोचा ओर फिर उससे कहा कि खुद ही देख लो. उस ने फॉरन पेंट के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया. ओर अपने मुँह पर हाथ रख कर बोली हाय मर गयी, इतना बड़ा ओर मोटा….. बचपन मे तो ये इतना बड़ा नही था . जब ये छोटा सा था तब इसने मेरा बुरा हाल कर दिया था अब तो ये बिल्कुल बर्दाश्त से बाहर होगा (वैसे मेरा नॉर्मल साइज़, 6
इंच). का था .
ये भी मेरा अगर बचपन की बात छोड़ दी जाय तो ये पहली ही बार था कि किसी लड़की ने मेरा लंड पकड़ा हो.
मेरा तो बुरा हाल हो गया. फिर उस ने मुझ से पूछे बगैर ही
मेरी पेंट की चैन खोल दी. एक बार फिर उस ने अपना मुँह मेरे सीने मैं छुपा लिया ओर कहा मेरे राज मैने तो इतने बड़े ओर मोटे का ख़याल भी नही किया था, ओर उसने डाइरेक्ट मेरे लंड को पकड़ लिया, उस के हाथो की तपिश से मेरे जिस्म मैं एक करेंट सा दौड़ गया. उस ने झुक कर मेरे लंड के सर पर अपने होंठों से प्यार किया, ओर कहा अब ये सिर्फ़ मेरा है, बचपन मे तो इसने रुला दिया था पर अब हमारी दोस्ती हो गई अब ये मेरा पक्का दोस्त है…. उस दिन मैं सारा वक़्त हवा मैं उड़ता रहा.

फिर तो ये सिलसिला चलता रहा, हम जब भी मिलते ओर एक भी मिनट
के लिए अकेले हो जाते तो वो फ़ौरन मेरा लंड पकड़ लेती ओर इतना
मसल देती कि उस मैं दर्द शुरू हो जाता. मगर मैं ने कभी भी उस के जिस्म के किसी हिस्से को हाथ नही लगाया.
मेरा बहुत दिल चाहता था कि कम से कम इस की चूचियो को हाथ
लगाउ ओर प्यार करू, मगर हिम्मत ही नही होती थी.
ओर एक दिन मैं ने हिम्मत कर ही ली, ओर उस की चुचियो को हाथो
मैं पकड़ लिया उस के मूँह से सस्स्सस्स….. की आवाज़ निकली, फिर मैं
ने उससे कहा कि तुम ने तो मेरा लंड देख लिया अब मुझे तुम्हारी
चूचिया देखनी हैं. (ये याद रहे कि हमारी ज़ियादा तर मोलक़ातें अब वॉशरूम मे होती थे, ताकि कोई हम को देख ही ना सके) पहले तो उस ने ना ना की फिर मान गयी ओर अपनी क़मीज़ उठा ली. मैं ने पहली मर्तबा किसी जवान लड़की की चूचिया देखी, मैं ने उसकी चूचियो पर हाथ फेरा,
बहुत ही नरम ओर मुलायम थी, मैं ने उस से कहा कि तुम वैसे ही कह रही थी कि ये छोटे हैं, ये तो बिल्कुल नॉर्मल हैं. तो उसने कहा कि तुम ने ओर कितनी लड़कियो की देखी हैं जो इस के बारे मैं कह रहे हो कि नॉर्मल हैं. मैं ने कहा कि जो भी है मुझे तो ये साइज़ ही अच्छा लगा है. वो मुस्कुरा कर बोली के अच्छा मैं तो तुम्हारे लिए ही कह रही थी कि शायद तुम को छोटे पसंद ना हों . अगर तुम को पसंद हैं तो मैं ने इलाज नही कराना बस ऐसे ही ठीक हैं. ओर इस के साथ ही मैं ने अपने होंठ उस की चूचियो पर रख दिए. थोड़ी देर दोनो चूचियो को चूसा, उस ने मेरी पेंट की चैन नीचे कर के मेरा लंड पकड़ हिलाने लगी.

क्रमशः..........................
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Reply
07-17-2017, 11:43 AM,
#7
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
बबिता और मैं


दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ ये कहानी मेरे और बबिता के सेक्स संबंधो की कहानी है वो मेरे घर के साथ रहती है और चुदाई से कुच्छ दिन पहले ही मैं ने इक़रार मोहब्बत किया था. वो सिर्फ़ सत्रह साल की है और बिल्कुल ही वर्जिन थी. वाइट कलर स्मार्ट लंबा क़द पतले होन्ट स्माल टिट्स (बूब) छ्होटी सी गंद टाइट फुददी बस क़ायामत का हुस्न है उस का मतलब बहुत ही क्यूट हर तरफ से.

ऐक दिन वो मेरे घर आई थी जब मैं ने उस को पहली बार देखा और देखते ही उस पर मर मिटा और रात को देर तक उस को चोदने की सोचता रहा. कुच्छ दिन ऐसा चलता रहा और काफ़ी दिनो बाद वो दोबारा मेरे घर आई और इस बार मुझ से रहा ना गया और मैं ने उस से कह दिया के आप मुझे बहुत अच्छी लग'ती हैं. मुझे आप से प्यार हो गया है.
बबिता: अच्च्छा तो कैसे प्यार हो गया और कब हुआ वैसे सब लड़के ऐक जैसे होते हैं प्यार कुच्छ दिनो बाद ख़तम, जब कोई और मिल जाए तो.
नही डियर ऐसी बात नही है रियली आइ लव यू सो मच.
अच्छा मैं सोच कर बताऊं गी.
फिर उस के बाद मेरी तड़प उस के लिए और भी बढ़ गयी और मैं रात को उस के ख्वाब देखता रहा और अचानक ऐक दिन फिर वो आई और मौका मिलते ही मैं उस के पास गया और जवाब माँगा तो उस ने इशारा कर दिया सिर हिला कर के हां और मेरी खुशी की इंतेहा ना रही. यक़ीन ही नही हो रहा था के उस ने हां कर दी.
थोरी देर बाद मौका बना और मैं उस के क़रीब जा कर खड़ा हो गया और हॅंड शेक किया उस ने फ़ौरन मेरा हाथ पकड़ा और थोरी देर बाद छुड़ा लिया. उस दिन सिर्फ़ इतना ही हुआ ऐक दो बार हाथ पकड़ा और उस से ज़ियादा कुच्छ नही कर सके और ना ही मौका था.
फिर कुच्छ ही दिन गुज़रे और वो दोबारा मेरे घर आई उस दिन संडे था और मैं संडे को देर तक सोता हूँ और वो जल्दी आ गयी और मैं सो रहा था. घर पर सिर्फ़ मोम थी और कोई नही था और मैं अपने रूम मैं सो रहा था. मोम टीवी पर जियो न्यूज़ सुन रही थी.
मैं सो रहा था और अचानक ऐक बहुत ही प्यारी आवाज़ मे मैं ने अपना नाम सुना और आँख खोली तो सामने बबिता खड़ी थी.
मैं: अर्रे आप और इतनी सुबह और मेरे रूम मैं आज सूरज कहाँ से निकला जनाब.
बबिता: मैं ने सोचा आज आप को च्छुटी है इस लिए मिल आऊँ और आप हैं के अभी तक सो रहे हैं. हमारे लिए क्या हुकुम है, हम वेट करे जनाब या चले जाएँ. क्यों के आंटी भी टीवी देख रही हैं और मैं अकेली क्या करूँ गी यहाँ.
मैं: हम जो हैं आप को कंपनी देने के लिए लकिन सिर्फ़ थोरी देर वेट करे. मैं अभी तैयार हो जाता हूँ. और इस दौरान मैं ने उस के हॅंड पर बहुत सारे किस कर लिए उस ने कुच्छ भी नही कहा ना ही मना किया बस आराम से बैठी रही मेरे सामने. थोरी देर हम बाते करते रहे उस के बाद मैं ने उस से कहा के क्या मैं आप को किस कर सकता हूँ तो उस ने कहा इतने तो कर लिए बिना इजाज़त और अब इजाज़त माँग रहे हैं वाह क्या बात है आप की.
मैं: जनाब इस बार हम आप के होन्ट पर किस करना चाहते हैं अगर माइंड ना करे और इजाज़त हो तो.
बबिता: मैं क्या कह सकती हूँ क्यों के मुझे शरम आती है आप की मेर्ज़ी है.
मैं: हेलो मेडम जब आप यहाँ आया करे उस वक़्त शरम घर पर छ्चोड़ आया करे यहाँ हमारे साथ शरम का कोई काम नही है अंडरस्टॅंड…
बबिता: ओके एज यू विश जो दिल चाहे कर ले लकिन सिर्फ़ उप्पेर तक ही रहना है नीचे नही जाना अभी.
मैं: अर्रे डरो नही हमारा हक सिर्फ़ आप के पैट (स्टमक) के उप्पेर तक है नीचे हमारा क्या काम. वैसे क्या डर लगता है आप को मुझ से.
बबिता: जी लगता तो है लकिन बहुत कम मीन 20% डर लगता है और 80% नही लगता. उस के बाद मैं उठा और बाथ गया नहा धो कर तैयार हो कर वापिस आ गया और वो मोम के साथ बैठी थी मैं जब अच्छी तरह तैयार हो गया तो टीवी लाउंज मैं आया और देखा मोम नही थी वो बाथरूम मे थी. मैं ने मौका देखते ही फ़ायडा उठाया और बबिता को इशारे से कहा के उप्पेर आ जाओ और बाहर जाने का बहाना कर के मोम से पूचछा के मैं बाहर जा रहा हूँ कोई काम है. मोम ने कहा नही कोई काम नही है और मैं खामोशी से उप्पेर चढ़ गया और थोरी देर बाद बबिता भी आ गयी. अब मोम को यही पता था के मैं बाहर गया हुआ हूँ और बबिता अपने घर चली गयी है. लकिन उन्हे क्या पता के उन का बेटा क्या गुल खिला रहा है उप्पेर.
उपर जाते ही मैं ने बबिता से कहा के आओ और मुझे गले मिलो. उस ने कहा नही मुझे शरम आती है.
मैं ने कहा देखो मैं ने पहले कहा था ना के शरम घर रख कर आया करो जब मुझ से मिलने आया करो.
तो वो उठी और नज़दीक आ गयी और उस वक़्त मेरा लंड बिल्कुल ही सख़्त हो गया था और मैं आगे हुआ और उस को गले से लगा कर उस के पूरे चेहरे पर किस्सिंग करने लगा और इस से थोरी देर बाद उस को भी मज़ा आने लगा.
मैं ने उस के कान मे कहा के बबिता क्या मैं आप के बूब्स को हाथ लगा सकता हूँ क्यों के मुझे आप के बूब बहुत अच्छे लगते हैं और मैं इन के साथ खेलना चाहता हूँ.
उस ने कहा जो दिल कहे वही करो मुझ से कुच्छ मत पुछो क्यों के मुझे शरम आती है और मैं कुच्छ नही कहूँ गी आप ने जो करना है वही करे बस.
ओके जैसे आप की मेर्ज़ी हम तो हुकुम के गुलाम हैं. उस के बाद मैं ने उस को थोरी देर खरे खरे ही किस किया और गले से लगाए रखा और ऐक हाथ उस की कमर पर फेरता रहा और दूसेरे से उस के बूब को आराम आराम से मसलता रहा ताके उस को ज़ियादा से ज़ियादा मज़ा मिले और जल्दी हॉट हो जाए और आगे कुच्छ भी केरने से मना ना करे.

फिर मैं ने उस को बेड पेर लिटा दिया और उस के साथ लेट गया और ऐक हाथ उस के चेस्ट पर रखा और बड़े प्यार से मसल्ने लगा और साथ साथ बातै भी करता रहा उस का रिक्षन देखने के लिए. अभी तक वो नॉर्मल ही थी और कुच्छ ना बोली मैं ने ये देखा और अपना हाथ उस की कमीज़ के अंदर डालने लगा तो उस ने फ़ौरन मेरा हाथ पकड़ा और मेरी तरफ देखा कर कहा.
देखो जान मुझे तुम पर यक़ीन है लकिन थोड़ा डर भी लगता है कहीं कुच्छ ग़लत ना हो जाए हम से. तुम जो चाहो करो मैं मना नही करूँ गी लकिन ऐसा कुच्छ मत करना जिस से मेरी ज़िंदगी तबाह हो जाए और मैं किसी को मूँह दिखाने के लाइक ही ना रहूं.
बबिता अगेर मुझ पर यक़ीन है तो सुनो मैं तुम्है बहुत चाहता हूँ और तुम से शादी करने की कोशिश भी करूँ गा लकिन तू किस्मत के फ़ैसले को तो मानती हो ना अगेर किस्मत मैं हुआ तो ज़रूर हो गी हमारी शादी वेर्ना नही और मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ अभी इसी वक़्त क्यों के मुझ से वेट नही होता और रही ज़िंदगी तबाहा होने वाली बात तो आज कल हर दूसरी लड़की ये सब करती है तुम कोई पहली लड़की नही हो और हम किसी को बता थोड़ा रहे हैं जो तुम्हारी ज़िंदगी तबाह हो जाए गी.
बबिता: हू तो ठीक है लकिन अगर कुच्छ गड़बड़ हो गयी तो मीन बच्चा हो गया तो कैसे च्छूपाऊँ गी. इस लिए डरती हूँ. और दर्द भी होता है उस से भी डर लगता है. क्यों के कुच्छ दिन पहले मैं अपनी कज़िन की शादी पर गयी थी उस ने सब बताया के क्या हुआ था पहली रात.
हां दर्द तो होता है लकिन फिकेर मत करो मैं आराम से करूँ गा कुच्छ भी नही हो गा और बच्चा ऐसे नही होता जब तक कम अंदर ना जाए तब तक कुच्छ नही होता और ना ही किसी को ऐसे पता चले गा.
इस के बाद वो मुस्कुरा कर आन्खै बंद कर के आराम से जैसे थी वैसे ही लेटी रही और मुझे इशारा मिला के उस की तरफ से हां है. मैं अब दिल मे बहुत खुश था.
मैं ने जल्दी से उस को किस करना शुरू कर दिया और उस की कमीज़ उप्पेर कर दी उस ने ब्लॅक ब्रा पहना हुआ था मैं ने पूछा के क्या साइज़ है ब्रा का तो वो बोली 32सी.
फिर मैं ने उस को उठाया और कमीज़ उतार दी और ब्रा मे भी अब वो आधी नंगी थी लकिन मैं कपड़ो मे ही था अभी तक. मैं ने उस के बूब्स को बारी बारी चूसना शुरू कर दिया और अपना ऐक हाथ उस की कमर पर फेरने लगा और दूसेरा उस की फुदी पर ले गया और आराम से उस की फुदी पर हाथ फेरने लगा और जब हाथ शलवार मैं डालना चाहा तो उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा.
बबिता: हाथ अंदर मत डालो मुझे बहुत शरम आ रही है क्यों के आज ही मैं ने शेव की है और कभी किसी को दिखाई भी नही इस लिए शलवार मत उतारो.
मैं: ऐसे कैसे मज़ा आएगा और कैसे चोदून्गा अगेर शलवार नही उतारी तो. फिर मैं ने उस को किस्सिंग करते करते इतना गरम कर दिया कि मैं ने उस की शलवार उतारने की कोशिश की तो उस ने मुझे रोका नही बलके खुद ही अपनी गंद उपेर उठा कर मेरी हेल्प की शलवार उतारने मैं फिर वो एक दम नंगी मेरे सामने थी मैं ने उस के जिस्म पर किस करना सूरू कर दिया वो जोश मैं आहह उउउफफफफफ्फ़ कर रही थी मुझे उस की आवाज़ सुन कर बोहत मज़ा आ रहा था फिर उस ने मुझ से कहा,
प्ल्ज़ जान जो कुच्छ भी करना आराम से करना मुझे दर्द बिल्कुल अच्च्छा नही लगता इस लिए आराम से करना और जितना हो सके मज़ा देना. फिर मैं ने एक फिंगर उस के कंट मे उप्पेर से ही फेरना शुरू कर दी और किस्सिंग भी करता रहा कभी लिप्स पर कभी बूब कभी निपल्स सक करता कभी कहीं मीन पूरे जिस्म पर किस किया और किस करते करते उस की चूत पर ज़ुबान से चाटना शुरू कर दिया. उस को बोहत मज़ा आने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी.
जान प्ल्ज़ और करो बोहत मज़ा आ रहा है मेरी चूत को और चॅटो अपनी पूरी ज़ुबान मेरी चूत मे डाल दो प्ल्ज़ बोहत मज़ा आ रहा है और थोरी देर बाद जब महसूस हुआ के वो हॉट हो रही हैं तो मैं ने अपनी फिंगर उस की फुदी मैं डाली बिल्कुल आराम से.
बबिता: ऊह जान आराम से करना मुझे बहुत डर लग रहा है लकिन मज़ा भी आ रहा है. बहुत अच्छा फील कर रही हूँ मैं. आज तक ऐसा कभी फील नही हुआ आराम से अंदर करो प्यार से बहुत ही प्यार से आअहह हां मज़ा आ आहा है ऐसे ही अफ ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ मुझ मे इतनी गर्मी क्यों है आग लगी हुई है जिस्म मे. बुझा दो इस आग को कुच्छ करो बहुत ही गेर्मी लग रही है मुझे. आहह मज़ा बहुत आ रहा है उउंम ऊहह जान आहह ऊहह अभी एक ही फिंगर ठीक है मज़ा आ रहा है….. नही दूसेरी अंदर मत करो ना ऐसे ही अच्च्छा महसूस हो रहा है आहह.
मैं: देखा बबिता कितना मज़ा है इस काम मैं और जनाब आप के कपड़े तो उतर गये हमारे कौन उतारे गा.
बबिता: जो करना है खुद करो मुझे बस मज़ा दो जितना हो सके और जल्दी करो कहीं कोई आ ना जाए मेरा पता करने और हम पकड़े ना जाएँ. जल्दी करो जान.
मैं ने अपने कपड़े उतार दिए और फिर उस के साथ लेट गया और उस को बाहों मे जाकड़ लिया और थोड़ा ज़ोर लगा कर उस को दबाया और फिर अपना काम शुरू कर दिया मीन फिंगरिंग आंड किस्सिंग आंड रब्बिंग.
बबिता: हां मज़ा आ रहा है ऊहह करते जाओ करते जाओ ऊहह उउंम्म अर्रे ये क्या सख़्त और हॉट चीज़ मुझे लग रही है टाँगो मे…
यही तो है जिस का सारा काम है जिस ने आप को और मुझ को खूब मज़ा देना है. यही तो अंदर डालूं गा तुम्हारी फुदी मैं लकिन तोड़ा इस के सर पर हाथ फेरो इस को प्यार करो उस के बाद ये तुम्है अपना काम दिखाए गा.
उस ने मेरा लंड अपने हाथ मे पकड़ा और उस को सहलाने लगी और उस को बहुत अच्च्छा फील हो रहा था ऐसा करते और करवाते हुए. वो बहुत हॉट हो गयी थी शायद अब बर्दाश्त नही कर रही थी अपने और मेरे बदन की गर्मी.
बबिता: अफ हाँ इतना मज़ा आ रहा है तुम ने पहले क्यों नही बताया था के इतना मज़ा आता है इस काम मे. मैं तो कब से प्यार करती थी तुम्है और तुम ने इतना टाइम लगा दिया कहने मे. लकिन जो हुआ अच्छा हुआ क्यों के सबर का फल मीठा होता है. सुना तो था आज देख भी रही हूँ. आज मुझे खूब मज़ा दो. मुझे प्यार करो मुझे ठंडा कर दो अब और बर्दाश्त नही हो रहा है.
मैने उस से कहा कि मेरे लंड को मुँह मैं डाल कर लॉली पोप की तरहा चूसो पहले उस ने मना किया लकिन जब मैं ने उस को कहा कि मैं ने तुम्हारी फुदी को भी चॅटा था तो वो मान गयी और उस ने मेरे लंड को किस करना शुरू कर दिया और फिर मु'ह मे ले कर चूसने लगी. मैं बता नही सक़ता मुझे कितना मज़ा आ रहा था मैं ने उस को 69 पोज़िशन मे कर दिया और उस की फुदी को सक करना शुरू कर दिया वो मेरा लंड सक कर रही थी और मैं उस की फुदी. 15 मिनट तक सक करने क बाद उस की फुदी से जूस निकलने लगा और मैं ने सारा जूस चाट चाट कर सॉफ कर दिया. उस के बाद मैं ने उस से कहा कि अब तुम लेट जाओ और उस को बेड पर लिटा कर उस की गंद के नीचे एक तकिया रख दिया जिस से उस की फुदी उपेर की तरफ उठ गयी फिर मैं ने उस की टाँगे उपेर उठा दी तो उस ने पोच्छा,
टाँगे क्यों उठा रहे हो अब क्या इरादा है ऐसे क्या हो गा.
अब चुदाई करने जा रहा हूँ और आप ने भी साथ देना है मीन पेन पर कंट्रोल करना है और चिल्लाना भी नही है मेरी खातिर बेरदाश्त कर लो थोरी देर बाद बहुत मज़ा मिले गा ओके तैयार हो करूँ अंदर.
हां मैं तैयार हूं और तुम्हारा साथ भी दूंगी तुम बेफिकेर हो कर अपना काम करो बस मुझे मज़ा दो चाहे जैसे भी और तुम भी कोशिश करना आराम से और प्यार से करने की जिस से दर्द कम और मज़ा ज़ियादा मिले ऐसा काम करना.
मैं ने उस की फुदी पर लंड रखा ठीक निशाने पर और आराम से अंदर करने लगा वो बहुत टाइट थी और उस को तकलीफ़ भी होना शुरू हो गई…
आराम से डालो आराम से हां आहिस्ता आहिस्ता प्यार से करो अंदर अफ बहुत मज़ा आ रहा है. हां थोड़ा और करो हां आराम से ओई मा जान दर्द हो रहा है लकिन तुम रूको नही बस आराम आराम से अंदर करते जाओ. मज़ा आ रहा है ऊहह म्मा आराम से हां ऐसे ऊहह करो और अंदर करो ओईईई माआअ बहुत दर्द हो रहा है आआहह उउउँ मेरे लिप्स सक करो बूब्स को रागडो मुझे प्यार भी करो जान.
अभी तक मेरा आधा लंड उस के अंदर घुसा था और अब उस को पेन भी बहुत हो रहा था इस लिए मैं ने वही तक ही अंदर रखा और आहिस्ता आहिस्ता हिलने लगा ताके उस को मज़ा ज़ियादा और दर्द कम महसूस हो. मेरा लंड अभी 2 इंच ही अंदर गया था और अंदर नही जा रहा था कोई चीज़ और अंदर जाने से रोक रही थी मैं समझ गया कि यह उस की फुदी की सील है जो लंड को और अंदर नही जाने दे रही थोड़ी देर तक मैं 2 इंच लंड ही अंदर बाहर करता रहा फिर बबिता बोली
हां अब ठीक है अब करो अंदर ऐक ही झटके से अंदर बाहर करो. उस ने सोचा पूरा अंदर जा चुक्का है इसी लिए ऐसा कहा और मैं ने भी नही बताया के अभी 2 इंच ही अंदर है और 5 इंच बाहर बस उस का यही कहना था मैं ने उस के लिप्स पर अपने लिप्स रखे और ऐक ज़ोर दार फुल पवर से झटका मारा और पूरा लंड अंदर गुम हो गया.
लंड अंदर जाते ही उस ने ऐक ज़ोर दार चीख मारी लकिन मेरे मुँह मे ही रही उस की चीख और उस की आँख से पानी निकल आया थोरी देर ऐसे ही लेटा रहा और जब देखा के अब कुच्छ नॉर्मल है तो मैं ने उस के लिप्स फ्री कर दिए और उस ने गुस्से से मेरी आँखूं मे देखा और रोने लगी. उस की फुदी से खून निकलना शुरू हो गया था.
मैं: आइ म सॉरी बबिता रो मत और तुम ने खुद ही तो कहा था के झटका मार कर अंदर बाहर करूँ और अब तुम रो रही हो.

शी: मैं ने कहा था लकिन मुझे क्या पता था अभी बाहर भी बचा है और जनाब ने भी बताने की तकलीफ़ नही महसूस की. बहुत बुरे हो तुम अब कुच्छ नही केरने दूंगी बस आज पहली और आखरी बार कर लो जितना और जैसा करना है इस के बाद कभी नही करेंगे.
लकिन ऐक बात है उस वक़्त दर्द बहुत हुआ ऐसा लगा जैसे किसी ने चाकू मार दिया हो और मेरी फुदी चीर डाली हो लकिन अब कुच्छ दर्द कम हो गया है पहले से. बहुत ज़ालिम हो तुम अब निकालो इस को बाहर थोड़ा दर्द कम होने दो उस के बाद करना अभी कुच्छ मत करो.
ठीक है लकिन अंदर ही रहने दो मैं नही हिलूं गा और जब दर्द ख़तम हो जाए गा फिर स्टार्ट करेगे.
नही इतनी देर अंदर ही रहो गे तो मैं मर जाऊं गी. बस करो जैसा करना है मैं बर्दाश्त करती हूँ. लकिन करना आराम से और करो भी जल्दी मैं ने जाना भी है.
हां ऐसे ही प्यार से करो बहुत मज़ा आ रहा है. ऊओ एस अब ठीक है अच्च्छा फील हो रहा है अब और कितनी देर करना है बस भी करो ना. मैं थक गयी हूँ 10 मिनट से मेरी टाँगे उठा कर मेरे उप्पेर चढ़े हैं जनाब कोई एहसास भी है मेरा या नही.
बस जान थोरी सी देर और ओन्ली 2 मिनट. मैं छूट'ने वाला हूँ.
ओके कर लो लकिन सिर्फ़ 2 मिनट हैं आआआअहह आराम से करो ना जान आराम से करो दर्द होता है ऊओह नूऊ मैं नाराज़ हो जाऊं गी साची कहती हूँ.
जान आख़िर मैं मत रोको मुझे मज़ा लेने दो आख़िर मे मैं ऐसे ही चोद्ता हूँ.
अच्च्छा लकिन थोड़ा सा तो आहिस्ता करो साची दर्द हो रहा है इतना कहा भी नही मानो गे आअहह. साची बहुत दर्द हो रहा है उउफफफ्फ़ मैं आज कहाँ फँस गयी. मैं अच्छी भली घर मैं बैठी थी. पता नही क्या हुआ यहाँ आ गयी तुम से चुदवाने. जान हां हां करो अब कुच्छ अच्छा लग रहा है. करो ऐसे ही करते रहो अब मुझे अच्छा लग रहा है मज़ा आ रहा है. अब हाईईइ कितना अच्छा है चुदवाना काश मैं तुम्हारी बीवी होती. उस से डेली तो करते हां करो और तेज़ और तेज़ करो ऊओ अलईइीई आहह. तुम्हारी सांस क्यों तेज़ आ रही है.
बिकॉज़ आइ एम सो नियर टू कम. बबिता दबाओ मुझे हाथ मेरी कमर पर रखो. जितना ज़ोर है दबाओ अपने सीने से लगा लो मैं आ रहा हूँ आइ एम कमिंग जान.
हां हां ज़ोर से और तेज़ अब मज़ा आ रहा है मेरे अंदर कुच्छ हो रहा है जैसे पिशाब आ रहा हो. करो करो अब मत रुकना. ऊहह कुच्छ निकल रहा है आअहह ऊओ नू क्या हो रहा है. करो रूको नही ऊहह. आइ फील सम्तिंग इन मी ऊओ तुम छूट गये ना अया मुझ मे कुच्छ गिर रहा है. बहुत मज़ा आ रहा है ऊवू चोदो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है जान आइ लव यू.
हम दोनो ऐक साथ ही फारिग हुए और ऐक दूसरे के साथ लिपट कर कुच्छ देर लेटे रहे उस के बाद दोनो उठ कर बैठ गये और थोड़ी देर बाते करते रहे और किस्सिंग भी. फिर बबिता कपड़े पहन कर चोरी से दबे पाँव वहाँ से चली गयी
उसके बाद हम काफ़ी टाइम तक सेक्स करते रहे फिर बबिता की शादी हो गई मैं फिर से अकेला रह गया किसी दूसरी बबिता के लिए कहानी कैसी लगी बताना मत भूलिएगा आपका दोस्त राज शर्मा
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Reply
07-17-2017, 11:43 AM,
#8
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
ओये बाप रे बाप क्या चुदाई करता है मैं ऋतु, 32 वर्षीया शादीशुदा औरत हूँ, और घर में मेरी एक 8 साल की बेटी रूबी, 55 साल के ससुर रामनारायण, मीना मेरी 50 साल की सास, 28 साल की तलाक़शुदा ननद, राधिका है. मेरा पति दुबई में काम करता है और तीन साल के बाद छुट्टी पर आता है वो भी एक महीने की. मेरे पति का नाम रघु है.. मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी है, मेरे बूब्स 36 इंच, हिप्स 36 इंच और कमर 30 इंच हैं, रंग गोरा. मेरे चूतर बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख ज़यादा ही है. लोग कहते हैं कि मैं अपनी मा की तरह चुड़क्कड़ हूँ. मेरी मा उमा देवी आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचाती जबकि उस की उमर 52 साल की हो चुकी है. जैसा के आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तस्सलिबक्श चुदाई नसीब नहीं हो पाती. मैं लंड को तरसती रहती हूँ, मेरी ननद राधिका का तलाक़ हो गया किओं कि उसका पति साला नमार्द था. भोसड़ी का मेरी राधिका को दोष देता रहता था कि वो बांझ है जब कि वो राधिका को अच्छी तरह से चोद नहीं सकता था. खैर हम दोनो भाबी ननद लंड की कमी के कारण एक दूसरे के साथ लेज़्बीयन संबंध बना चुकी थी. राधिका को मेरी चूत का नशा सा था.. वो जब भी मौका मिलता, मेरे कमरे में आ कर मेरी चुचि चूसने लगती, कभी चूत में उंगली करती और कभी अपनी मादक चूत को मेरे हवाले कर देती. राधिका का खिला हुआ यौवन, बड़ी बड़ी 38 इंच की चुचि, गांद भी कम से कम 38 की ही होगी. उसके चुत्तेर खूब मस्त थे. मैं अपने हाथ उसके चूतरो से दूर नहीं रख पाती. लेज़्बीयन संबंध तक तो ठीक है लेकिन जब मेरी ननद जोश में आ जाती तो उसकी कामवासना पर काबू पाना मुश्किल हो जाता और राधिका किसी भी कीमत पर लंड पाने के लिए बेताब हो जाती. एक दिन उसने मुझे पुछा कि मेरा पति (यानी कि उसका भाई) कैसी चुदाई करता है और उसका लंड कितना बड़ा है. मैने उससे बताया के उसके भैया आका लंड 9 इंच का है और ग़ज़ब का कड़क है. जब वो चोद्ता है तो चूत को तारे नज़र आने लगते हैं. "साला ऐसे पेलता है के चूत की भोसड़ी बना देगा, ऐसे चूत चूस्ता है के सारा पानी निकाल देता है, वो कहता है के अगर उससे कामवासना का बुखार चढ़ा हो तो अपनी मा या बेहन को भी चोद डाले, लेकिन मेरी बन्नो मेरी किस्मत ही ऐसी है के वो तीन साल में एक महीने के लिए ही मुझे चोद सकता है और मेरी चुदसी चूत को लंड रोज़ चाहिए, राधिका, साली तू ही कोई प्लान बना ता की हम दोनो ही रोज़ लंड के मज़े ले सकें," मैं बोली. राधिका ने कहा' भाबी, तुझे तो तीन साल में एक महीने तो लंड मिल जाता है, मुझे तो अभी तक चुदाई का असली मज़ा नहीं आया, मेरे उस नमार्द पति का तो खड़ा ही नहीं हुआ, बेह्न्चोद चूत पर रगड़ता था और झाड़ जाता था और मेरी चूत तड़प तड़प कर आग में जलती रहती, भाबी मैं क्या प्लान करूँ, यह तो तुम्हें ही कोई प्रबंध करना पड़ेगा, मेरी चूत को भी शांत करवा दो, अगर तेरा कोई यार है या कोई कज़िन है तो उस से ही चुदवा दो मुझे, देखो भाबी मेरी चूत कैसे दाहाकति है लंड के बिना,' मैने कहा चलो देखते हैं की क्या हो सकता है. अगले दिन मैं बाज़ार जा रही थी तो मैने अपने ससुर से पुछा" बाबू जी आपको क्या मंगवाना है बाज़ार से? जो चाहिए, मैं ला दूँगी, ' मेरे ससुर ने मुझे ध्यान से देखा और कहा " बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुआरे भी लेते आना," मैने पुछा" ठीक है लेकिन आपको क्या करनी है यह चीज़ें बाबू जी,' बाबू जी बोले," बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का काम करना पड़ता है ना, तेरी सासू को खुश करने के लिए यह चीज़ें चाहिए, इन से मर्दानगी बढ़ती है, ताक़त आती है बेटी,' कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब नज़रों से देखा, और मुझे लगा के वो मेरी चूचियो को घूर रहे हैं. जब मैं बाज़ार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नज़रें मेरे चूतरो का पीछा करती हुई महसूस हुई. मेरे शरीर में एक सिरहन सी दौर गयी और मेरी चूत में पानी भर गया. मैं सारी चीज़ें लेकर आई और बाबूजी की चीज़ें उनको देने गयी. जब बाबू जी ने चीज़ें पकड़ी तो मेरे हाथों से उनका हाथ अचानक ही छ्छू गया, मेरा पैर फिसल गया और मेरे ससुर ने मुझे अपनी मज़बूत बाहों में लेकर संभाल लिया. में उनकी चौड़ी छाती के साथ सॅट गयी. मेरी चुचि उनकी छाती में धस गयी और मेरे जिस्म में आग दहकने लगी. उनका हाथ बरबस ही मेरे कुल्हों पर रेंग गया और मैं शर्मा गयी. ' माफ़ करना बाबूजी मेरा पैर फिसल गया था, आप मुझे ना थाम लेते तो मैं तो गिर ही जाती.' मैने कहा. वो बोले,' बेटी मैं किस लिए हूँ, अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, मैं अपने परिवार के लिए सब कुच्छ करने को तय्यार हूँ, मुझ से कभी भी शरमाना नहीं, मेरी बेटी,' मैने गौर से देखा के उनके पाजामे में उनका लंड सलामी दे रहा था, मैं मुस्कुराइ और अपने आप से बोली, साली, तू बाहर क्या ढूड़ रही है, महा लंड तो घर में ही विराजमान हैं, यह साला ससुर मेरे उप्पेर ही नज़रें लगा कर बैठा है, और मुझे भी तो लंड चाहिए, लेकिन अब साला बूढ़ा नहीं जानता कि मैं उस के साथ चुदाई तो करूँ गी पर इसकी बेटी को भी इसके लंड से चुदवाउंगी. मैं सारी रात अपनी और राधिका की चुदाई का प्लान बनाती रही. जब मैं सारा काम ख़त्म कर के अपने कमरे में राधिका के पास जा रही थी तो बाबूजी के कमरे से आवाज़ आ रही थी,' अह्ह्ह्ह मार डाला मेरे रजाअ, आज क्या खा कर आए हो, मेरी चूत की धज़ियाँ ही उड़ा डालीं, आज तेरा लंड कुच्छ ज़यादा ही ज़ोर मार रहा है, ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत की कल्पना करके मुझे चोद रहे हो, मेरे स्वामी मैं आपके हल्लाबी लंड के सामने नहीं टिक सकती, ये मैं नहीं झेल सकती, जब कल मैं अपने मायके चली जाउन्गी तो शूकर हो गा कम से कम दो महीने तो आराम से काट लूँगी, और तुम मूठ मार मार के करना गुज़ारा, ओह्ह्ह्ह मैं झड़ी मेरी चूत का रस निकल गया, निकाल लो अपना लॉडा मेरी बुर में से मैं तो थक गयी,' बाबूजी बोले" साली मेरा तो झाड़ दे, चूस के, मूठ मार के या फिर अपनी गांद मे डाल के, मैं इस खंबे जैसे लंड को ले कर कहा जाऊ, बेह्न्चोद मेरा तो पानी निकाल दो" सासू मा बोली" अपना पानी आप ही निकाल लो मैं तो सोने लगी हूँ.' मेरा दिल किया के मैं दौड़ के बाबूजी का लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो जायूं पर एस्सा कर ना सकी. लेकिन एस्सा कुच्छ ना कर सकी और अपने कमरे जाकर सारी रात बाबूजी के लंड के सपने देखते हुए जाग कर निकाल दी सुबह जब मैं उठी तो राधिका मेरे साथ लिपटी हुई थी, उसके हाथ मेरे मम्मों पर थे जिन्हे वो दबा रही थी. मैं उठ कर बाथरूम होकर आई तो मेरी ननद अपनी चूत खुज़ला कर बोली,"भाबी अगर तुमने किसी लंड का इंतज़ाम नहीं किया तो मैं मर जायूंगी, मुझे बचा लो मेरी प्यारी भाबी," मैने मुस्कुरा कर पुछा, किस का लंड चाहिए. उसने जवाब दिया लंड किसी का भी हो, चलेगा, अब तो चूत इतनी बेसबरी हो चुकी है की अगर मेरे बाप का भी मिल जाए तो इसकी आग ठंडी करने के लिए ले लूँगी" मैने कहा" ठीक है अब मुकर मत जाना किओं कि तुझे आज बाबूजी का लंड ही मिलने वाला है, तू बस ऐसे ही करना जैसे मैं कहती हूँ," वो मान गयी. जब वो तय्यार होने चली गयी तो मैं बाबूजी की चाइ लेकर उनके रूम में चली गयी. मैने जानबूझ कर सारी का पल्लू नीचे गिरा रखा था, जिस कारण मेरे वक्ष आधे से अधिक नंगे हो रहे थे. सासू मा अपने मायके जाने के लिए तय्यार हो रही थी. मैने आगे झुक कर चाइ बाबूजी को दी और अपने कूल्हे इनके हाथ से रगड़ दिए. मैने देखा कि उनका लंड उठक बैठक करने लगा है. मैने जान बुझ कर उनसे कहा" बाबूजी, देखो मेरा हाथ दुख रहा है, क्या ये सूज गया है, देखो तो सही," इतना कह कर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया, उन्हों ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मलने लगे, मैं उनसे सॅट कर बैठ गयी. मैने नोट किया की बाबूजी मेरा हाथ सहलाने लगे और उनका लंड पाजामे के अंदर सर उठाने लगा. मैने उनको पूरी तरह उतेज़ित कर डाला. जब वो मेरे कंधे पर हाथ रखने लगे तो मैं जान बुझ कर बोली, " अब मैं चलती हूँ माजी का नाश्ता बनाना है,' मैने हाथ छुड़ाया और चली गयी लेकिन बाबूजी का बुरा हाल था, वो अपने लंड को मसल रहे थे. मैने राधिका को कहा,' तुम माजी के जाने के बाद, कमर मैं दर्द का नाटक करना, और बाबूजी को कमर पर इयोडीक्स लगाने के लिए कहना, और धीरे धीरे नीचे तक उनका हाथ ले जाना, लेकिन ये सब उस वक्त करना जब मैं माजी को बस स्टॅंड पर छोड़ने जाऊ और घर मैं कोई ना हो. देखना वो तेरे को चोदने को तय्यार हो जाएँगे, मैने उनकी चाइ में शिलाजीत मिला दी थी, आज तेरी चुदाई पक्की हो जाएगी मेरी बन्नो, तुम यह निकर और टी शर्ट पहन लो और ब्रा और पॅंटी मत पहनना, तेरा बाप आज किसी को भी चोदने को तैयार हो जाए गा, तुम उस पर अपनी जवानी का जादू चला दो मेरी रानी उसके बाद हम दोनो उसके लंड के मज़े लेंगे, वो भी चूत का भूखा है मेरी जान' वो हैरान हो कर मेरी तरफ देखने लगी. मैं फिर बाबू जी के कमरे में गयी और उनकी जांघों पर हाथ रख कर बातें करने लगी, और उनके लंड को भी च्छू लिया. वो बेचैन होने लगे और मैं मुस्कुरा कर बाहर आ गयी. मैं थोड़ी देर में वापिस आगाई और राधिका के कमरे में झाँकने लगी. राधिका ने आवाज़ लगाई" पप्पा ज़रा मेरी कमर पर बल्म लगा देना, मुझे बहुत दर्द हो रहा है,' उसने ये कहते हुए अपनी टी शर्ट उप्पेर उठा डाली और उस का गोरा पेट नंगा हो गया, और जब उसने अपनी कनीकेर्स को नीचे कर दिया तो उसकी जाँघ नज़र आने लगी. मेरी आँख ने देखा कि बाबूजी की नज़र में वासना की चमक उभर आई. उनकी आँखों में एक लाली नज़र आने लगी. वो अपनी बेटी के नज़दीक आ गये और वासनात्मक नज़रों से देखते हुए बोले" बेटी क्या हुया, दर्द कहाँ हो रहा है, और उनका हाथ अपनी बेटी की कमर पर चला गया और उसकी कमर को सहलाने लगा. मैने देखा कि अब बाबू जी नहीं बल्कि उनका लंड बोल रहा था. उनकी आवाज़ से सॉफ ज़ाहिर था के काम वासना में वो बाप बेटी के रिश्ते की पवित्रता को भूल गये थे. अब कमरे में सिर्फ़ चूत और लंड के मिलन का सीन बना हुआ था. बाबूजी के हाथ काँप रहे थे जब वो अपनी बेटी की कमर को सहला रहे थे. राधिका ने अपना सिर बाबूजी की छाती पर टीका दिया. राधिका की साँसें तेज़ हो चुकी थी. बाबू जी ने इयोडीक्स की शीशी उठाई और कमर पर लगाना शुरू कर दिया. राधिका की चुचि अब उनके शरीर से सॅट गयी थी और बाबूजी और भी उतेज़ित हाने लगे. बाबूजी ने अपना एक हाथ उसकी चुचि पर रख दिया और धीरे से दबा दिया." ऑश पापा धीरे से, मुझे बहुत घबराहट हो रही है, हाए मुझे दर्द हो रहा है, बल्म मलीए ना, पापा," राधिका बोली और अपने बाप के शरीर से चिपक गयी. बाबूजी का लंड अब बेकाबू हो चुका था. राधिका ने अपनी निकर्स को और नीचे कर दिया जिस के साथ ही उसकी जांगेः पूरी तरह नंगी हो गयी. अब उसके कूल्हे बस उसकी टी शर्ट से ही ढके हुए थे. बाबूजी ने काँपते हाथों से राधिका की कमर और जांघों पर बॉम लगाना शुरू कर दिया और राधिका और ज़ोर से अपने बाप के शरीर से चिपकती चली गयी. मैं मतर्मुग्ध हो कर कमरे के अंदर का सीन देख रही थी और मेरे जिस्म में भी कामग्नी जल रही थी. ' पापा मेरे कूल्हे भी दर्द कर रहे हैं, प्लीज़ वहाँ भी बॉम लगा दो,' बाबूजी ने बॉम लगाना शुरू कर दिया और उसकी टी शर्ट को उप्पेर उठा दिया. वो अपनी बेटी के चूतरो पर बॉम लगाने लगे. राधिका ने अपना हाथ अपने पापा की छाती पर रख दिया और अपने होठ उनके होंठों पर रख दिए, उसकी साँसें पापा की साँसों से टकरा रहीं थी. बाबूजी ने बेटी को बाहों मैं भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगे.. राधिका ने नाटक करते हुए अपने आप को छुड़ाने की झूठी सी कोशिश की लेकिन बाबूजी ने उसे और भी कस कर जाकड़ लिया और अपनी बटी को बेतहाशा चूमने लगे, उनका लंड राधिका के पेट को टच कर रहा था, बाबूजी ने उसकी चुचि कस कर दबानी शुरू कर दी और राधिका ने ड्रामा किया" पापा, यह क्या कर रहे हो, मैं आपकी बेटी हूँ, क्या यह पाप नहीं है, आप मुझे छ्चोड़ दो, हम यह सब नहीं कर सकते, पापा, मुझे छ्चोड़ दो, प्लीज़," वो भी जानती थी कि अब पापा वापिस आने के काबिल नही रहे किओं की उनका लंड अब फटने के करीब ही था. पापा ने अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर रख कर कहा" मेरी बेटी लंड और चूत का एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का रिश्ता, मेरी प्यारी बेटी, तुम भी लंड के बिना तड़प रही हो मुझे पता है और साथ ही तेरी भाबी भी चुदसी है क्योंकि के उसका पति भी उसे चोद नहीं सकता, आ जाओ मैं तेरी चूत को चोद कर मस्त कर दूँगा, बेटी मेरा लंड कैसे दाहक रहा है, तुम इसको हाथ में लेकर सहलाओ ज़रा, देखो तुम्हारी चुचि कितनी कड़ी हो गयी है, जल्दी से अपनी टी शर्ट भी उतार दो मेरा लंड तुझे चोदने को तड़प रहा है," राधिका भी मस्ती में भर उठी और अपनी टी शर्ट उतार कर पूरी तरह नंगी हो गयी और पापा के लंड को हाथ में भर के मुठियाने लगी. लंड की आँख से प्री-कम की दो बूँदें टपक पड़ी और बाबूजी चुदाई की मस्ती में आ गये और ज़ोर ज़ोर से अपनी बेटी की चुचि को मुह्न मे लेकर चूसने लगे, " बेटी तू कितनी सेक्सी हो गयी है, मेरा लंड तेरी चूत का प्यासा है, अब मुझे अपनी चूत का स्वाद दिखाओ, मेरी प्यारी बेटी और मेरे लंड को चूस कर इसका स्वाद देखो, जल्दी से मैं आज सवेरे से ही चोदने के लिए तड़प रहा हूँ, लाओ अपनी टाँगें खोल कर अपनी चूत का दीदार तो कर्वाओ," राधिका ने अपनी जांघे खोल दी और उसकी चूत मुस्कुरा उठी किॉकी वो आज पहली बार किसी असली लंड से चुदाई करने वाली थी. पापा ने अपना मुह्न उसकी चिकनी चूत में घुस्सा दिया और अपनी जीभ चूत की फांकों के अंदर डाल दी. " अहह पापा, यह क्या कर दिया मेरी चूत को, यह तो पानी छ्चोड़ने लगी है, चूस लो मेरी बुर को पापा, यह आज चुदाई के लिए तड़पति है, लायो मैं आपके लंड को चूस लेती हूँ, मुझे चोद डालो आज, चोद दो अपनी बेटी को, मेरे पापा,' इसके साथ ही राधिका ने पापा का लंड अपने मुह्न में ले लिया और लगी चूसने उनके लंड को. लंड आग की तरह दहकने लगा. बाबूजी अपने चूतर आगे पिछे करने लगे, राधिका बाबूजी के लंड को गले के भीतर तक ले गयी और करहाने लगी, उधर बाबूजी की जीभ राधिका की चूत में पूरी तरह समा चुकी थी और उसकी चूत का रस, बाबूजी के मुह्न से बहने लगा, जैसे की उनके मुह्न से लार टपक रही हो, राधिका की चूत झाड़ रही थी. तभी मैने कमरे मैं एंट्री कर दी और बोली," साले बाबूजी, इतने कामीने निकले के अपनी ही बेटी को चोदने के लिए तैयार हो गये, बेटीचोड़ साले मैं क्या मर गयी थी, मुझे कौन चोदे गा बेहन्चोद, तेरा बेटा तो बेहन्चोद मुझे छ्चोड़ कर चला गया और तू भी साले अपनी बेटी को ही चोद रहा है, मेरा क्या हो गा, " बाबूजी मुझे देख कर घबरा गये और फिर संभाल कर बोले," बेटी तू भी आ जा मेरी बेटी, मेरा लंड मेरी बहू और बेटी के लिए काफ़ी है, मैं तुम दोनो को चोद कर शांत कर दूँगा, आजा मेरी रानी बहू, अगर बेटा चला गया है तो क्या हुया, बाप तो ज़िंदा है, मेरे पास आ मैं तेरी चुचि को भी चूस्ता हूँ, आ मेरी बेटी तू भी कोई कम सेक्सी नहीं हो, तेरा जिस्म भी चुदाई की आग में जल रहा होगा, ला मेरे पास आ मैं तुझे भी तृप्त कर्दून्गा," मैने फटाफट अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और बिस्तर पर आके बाबूजी के जिस्म को चाटने लगी और राधिका की चुचि दबाने लगी. बाबूजी ने अपना हाथ मेरी गांद पर फिराना शुरू कर दिया. मैने बाबूजी का लंड हाथ में ले लिए और उससे सहलाना शुरू कर दिया. उनका लंड पूरी तरह कड़ा हो चुका था. मैने उसे चाटना शुरू कर दिया, मेरी चूत भी पनिया गयी थी. मैने कहा " आप पहले राधिका को चोद कर शांत कर दो, इसकी चूत अभी कुँवारी है, लेकिन ज़रा, प्यार से चोदना अपनी बिटिया को," ये कहते हुए मैने राधिका की टांगे चौरी कर दी और उसकी चूत पर बाबूजी का लंड टीका दिया, उनके टट्तों पर हाथ फिराया जिस कारण बाबूजी के मुह्न से आह निकल गयी, मैने उनका लंड राधिका की चूत पर रगड़ा जिस में से पहले ही पानी निकल रहा था. उसकी खुजली इतनी बढ़ गयी के वो अपने आप पर काबू ना रख सकी" पापा अब और मत तद्पाओ, मेरी चूत में आग लगी हुई है, आप का लंड रगड़ना मुझे पागल बना रहा है, पापा मेरी चूत के अंदर पेल दो अपना लोड्‍ा, पापा मेरे साथ सुहागरात माना लो, मुझे मम्मी की तरह चोद डालो मेरे प्यारे पापा, मुझे पेल दो पापा, प्लीएज, भाबी मेरी चूत में पापा का लंड पेल दो, मेरी प्यारी भाबी, उसके बाद तुम मज़े ले लेना पापा के लंड के साथ, मैं तेरी विनती करती हूँ, मेरी आग बुझा दो, प्लेआस्ीईए." बाबू जी का लंड पकड़ कर मैने राधिका की चूत के मुख पर टीकाया और कहा" बाबूजी पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की बर में, देखो कैसे तड़प रही है साली, कैसे दाहक रही है इसकी चूत, अब तो इसकी आग आपका लंड ही शत कर सकता है, उड़ा दो इसकी चूत की धज़ियाँ, पेल दो अपनी बेटी को, डाल दो अपना लंड रस इस की प्यासी चूत में, " बाबूजी ने देर करना मुनासिब नहीं समझा और धक्का मार के लंड पेल दिया, और उनका आधा लंड पहले धक्के में चूत में समा गया. राधिका चिल्लाई" पापा बहुत दर्द हो रहा है, लगता है मेरी सील टूट गयी है, बाहर निकाल लो अपना लंड, दर्द बर्दाशत नहीं हो रहा पापा, प्लीज़." लेकिन बाबूजी ने धक्के मारना जारी रखा. उनका लंड अपनी बेटी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था. राधिका की चूत से लहू बहने लगा. बाबूजी भी पुराने खिलाड़ी थे, " बेटी दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जाएगा, ऋतु, तू राधिका की चुचि चूसना शुरू कर दो और इस की चूत को भी सहलाओ, साली बहुत टाइट है इसकी चूत, लेकिन मैं आज इसे चोद कर ठंडी कर दूँगा, ले बेटी ले लो अपना पापा का लंड अपनी प्यासी बुर में और मिटा दो इसकी प्यास.' मैने अपनी जीभ से राधिका की चुचि चाटना शुरू कर दिया और अपनी उंगलिओ से उसकी चूत के आसपास का इलाक़ा उतेज़ित करना शुरू कर दिया. उसका दर्द कम हो गया और उसे मज़ा आने लगा, और वो चूतर उच्छाल कर बाबूजी के धक्कों का ज्वाब देने लगी," पापा मेरा दर्द ख़त्म हो गया है, आपके लंड से मुझे जन्नत का मज़ा आ रहा है, आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग दिखा रहा है, पेलो अपना लंड मेरी चूत के अंदर, चोद दो अपनी बेटी को, ले लो मेरी कुंवाई चूत के मज़े, ज़ोर से चोदो मुझे," मैने बाबूजी के लंड पर उंगलियाँ फेरी और उनके चूतर पर थपकी दी और कहा" बाबूजी, चोदो अपनी हरामी बेटी को साले, ज़ोर से लगा धक्के बेहन्चोद, देखता क्या है साले तुझे आज अपनी जवान और कुँवारी बेटी की चूत का मज़ा मिल रहा है, साले बन गया है तू बेटीचोड़ और थोड़ी देर में बहुचोद भी बन जाएगा, साले चोद डाल इसको, चोद डालो अपनी बेटी को, वो कब से प्यासी है लंड की, मिटा तो इसकी प्यास, छोड़ दो अपना पानी इसकी चूत मैं.' बाबूजी भी पागलों की तरह धक्के मारने लगे. कमरे में घचा घच की आवाज़ें आने लगी, राधिका के मुह्न से अहह, ओह की आवाज़ आ रही थी. बाबूजी ने अपनी बेटी के चूतरो को कस के पकड़ रखा था और उसे पेल रहे थे," अहह, बेटी मेरा भी टाइम नज़दीक आ रहा है, मैं भी झड़ने वाला हूँ, हां मैं सच में बेटीचोड़ बन गया हूँ, और मुझे ख़ुसी है के तुमने अपनी कुँवारी चूत ,मेरे लिए संभाल के रखी हुई थी, हाँ बेटी चुदवा ले मुझ से मेरी प्यारी बेटी, कसम तेरी जवानी की आज तक इतना मज़ा नहीं आया, क्या चूत है तेरी, ले लो मेरा पानी तेरी चूत में जा रहा है, मेरा पानी तेरी कोख में गिर रहा है, तेरा बाप झाड़ रहा है, मैं गय्ाआआआ," यह कहते हुए बाबूजी ने पिचकारी राधिका की चूत में छ्चोड़ दी और उनका लंड छपक की आवाज़ से चूत से बाहर निकल आया. मैने पहले उनका लंड चूस कर सॉफ किया और फिर अपनी ननद की चूत को चटा और हम दोनो ही बाबूजी की बगल में लेट गयी. थोड़ी देर बाद बाबूजी ने मेरी भी चुदाई की और ऐसी चुदाई की की मैं आज भी अपने आपको जन्नत मे महसूस करती हू समाप्त.....
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07-17-2017, 11:44 AM,
#9
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मेरी चूत की प्यास बुझाओ 



हल्लो दोस्तो कैसे है आप लोग बहुत सारे मैल मिले जिनमे मेरी कहानियों की

तारीफ थी मैं आप सबका खुल्ले दिल और खुल्ली चूत के साथ सुक्रिया अदा करती

हूँ आप सबको पता होना काहिए कि आज मैने अपनी चूत के बॉल सॉफ किए है और अब

फिर से मेरी चूत तनटना गयी है किसी कोरी कमसिन लड़की की तराह हां तो

दोस्तों अब मैं अपनी कहानी सुरू करती हूँ जिसमे एक बार फिर से अब्बू और

भाई ने मुझे चोदा उस दिन हुआ ये था कि मैं बहुत चुदासि थी और अम्मी नानी

के घर गयी हुई थी ये तो आप लोग जानते ही है कि मेरी फ्ली चुदाई भी अब्बू

ने ही की थी और फिर अम्मी ने भाई से भी चुदवाया था और अब.



वो लोग अक्सर मुझे चोदा करते थे मगर इधर बहुत दिन से अब्बू अम्मी की फैली

हुई चूत मे मस्त थे और भाई ने कोई 2सरी ग़/फ फसा ली थी और मुझपे ध्यान

देना छोड़ ही दिया था तब आख़िर अम्मी के बाहर जाते ही मैने सबसे पहले

अपनी झाँते बनाई और रात को अब्बू के रूम मे गयी अब्बू कोई मूवी देख रहे

थे और मुझे देख कर बोले बेटी क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई

तब मैने कहा आप तो अम्मी जान की चूत मे ही फसे रहते है अब आपको मेरा ज़रा

भी ख्याल नही आपने मुझे कितने दिनो से नही चोदा है तब अब्बू ने दुलार

जताते हुए कहा ऊऊओह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा आज तुझे फिर से चोद्ता हूँ

और ये कह कर उन्होने डी.वी.डी चेंज कर दी अब उसमे एक बी/फ चलने लगी जिसमे

एक 14 साल की लड़की को 5 आदमी चोद रहे थे जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ

गयी और मैने अब्बू से कहा अब्बा ये बच्ची इन 5चो को एक साथ झेल रही है और

उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी एज भी अभी ज़्यादा नही 14...15 साल

की होगी तब अब्बू बोले मेरी बच्ची ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते है

साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कैसे मज़े ले..लेकर 5.



5 लंडों का मज़ा एक साथ ले रही है जबकि इसमे एक इसका बाप और एक भाई के

अलावा 3बाहर वाले है अब ये सब देख कर भला मेरी चूत मे ख़ाज़ क्यूँ नही

उठती तब मैने अब्बू से कहा अब्बू मैं तो आप और भाई से ही चुदवा कर पनाह

माँग जाती हूँ तब अब्बू ने कहा जा बगल के रूम से आफ़ाक़ को बुला ला साला

लंड पकड़े सो रहा होगा तब मैं भाई के रूम की तरफ बड़ी और देखा तो सच मे

वो अपने लंड को हाथ मे लेकर सदका मार रहा था मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली

हाय भाय्या क्या ग़ज़ब कर रहे हो भला घर मे इतनी खूबसूरत बहन होते हुए

तुम्हे ये सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पे और मैने झट से उनका लंड

अपने कोमल हाथ मे ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी...जल्दी

हाथ आगे पीछे करने लगी और फिर झट से मूह मे लेकर चूसने लगी और तब भाई का

लंड पूरी औकात मे आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए ज़ोर ज़ोर से

धक्का मारने लगे और फिर जल्दी ही उनका पानी मेरे मूह मे गिरा जिसे मैं

छपार, छपार करते हुए चाट गयी और भाई से बोली चलो अब्बू बुला रहे है आज

फिर से तुम 2नो मुझे चोद्कर मज़ा दो और भाई को नंगा ही उनका लंड पकड़ कर

अब्बू के रूम मे ले आई और भाई को देखते ही अब्बू बोले मैने कहा था साला

मूठ मार रहा होगा तब मैने कहा अब्बू आप बहुत तजुर्बेदार है सच मे भाई

सदका मार रहे थे और फिर मैने अब्बू का लंड अपने मूह मे ले लिया और भाई

पीछे से मेरी गांद पे अपना लंड रगड़ते हुए अंदर डालने की कोसिस करने लगे

तब मैने कहा अब्बू जी मैं भी बी/फ वाली लड़की की तरह 5 जन से एक साथ ही

चुदाना चाहती हूँ तब अब्बा ने कहा बेटी तू नही झेल पाएगी एक साथ 5.को



मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासि हो ही चुकी थी मैने कहा कान खोल के सुन लो

आप 2नो मुझे 5जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है अगर कल आप लोग ने मुझे

5 जान से नही चुदवाया तो बहुत बुरा होगा तब अब्बू ने कहा अच्छा अच्छा

मेरी रानी बेटी मैं तो तेरे भले के लिए ही कह रहा था अगर तेरी चूत फट गयी

तो परेसानि तो हमी लोगों को होगी मगर जब तू नही मान रही तो मेरी बला से

अब चल आज तो हम दोनो से चुदवा ले और ये कह कर उन्होने फिर से अपना मूसद

जैसा लंड मेरे मूह मे जोरदार धक्के के साथ अंदर धकेल दिया और तभी भाई ने

पीछे से मेरी गांद फैलाकर इतनी ज़ोर से धक्का मारा की मुझे नानी याद आ

गयी उउउइई माआअ मर गयी आआहह भाई ज़रा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद

दिला रहा है तब अब्बू ने कहा बेटी चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना

ले तब मैने कहा क्यूँ तब अब्बू बोले तेरी नानी की चूत मैने मारी थी और कई

साल तक मैं उसकी चूत चोद्ता रहा था तब मेरे साथ साथ भाई का मूह भी खुला

रह गया तब भाई ने कहा अब्बू क्या आपने नानी को चोदा है तब अब्बू ने कहा

हां यार साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी

की कम उमर मे शादी हुई थी जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी

अम्मी 16 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 30 साल की थी मगर मेरे ससुर की

उमर करीब 40साल थी वो तुम्हारी नानी को खुस भी नही कर पाता था जाने भी दो

इन बातों को अभी तो फिलहाल चुदाई का मज़ा लो उसकी चुदाई के बारे मे फिर

कभी बताउन्गा और तब भाई पीछे से मेरी गांद मार रहे थे और अब्बू आगे मेरे

मूह मे अपने लंड को धक्के लगा रहे थे अब मुझे भी मस्ती आने लगी.



और मैं अपने मूह और गांद को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब

भाई झाड़ गये थे मगर अब्बू जी अभी भी नही झाडे थे और उन्होने मुझे बेड पे

खड़ा होने को कहा मैं खड़ी हो गयी और तब अब्बू ने मेरे दोनो पैर अपने

कंधे के दाए...बाए करे और मेरी चूत को मूह मे भर कर चूसने लगे मैं बुरी

तरह तप रही थी और अपने अब्बू का मूह ज़ोर... ज़ोर से अपनी चूत पे दबाने

लगी तब ही अब्बू खड़े होने की कोसिस करने लगे और मेरा बॅलेन्स बिगड़ने

लगा तब मैने घबरा कर कहा आआआअहह अब्बू क्या कर रहे है मैं गिर जाउन्गि

मगर अब्बू नही माने और वो मुझे अपने कंधे पे बैठा कर खड़े हो गये अब मैं

अपनी 2नो टांगे उनकी गर्दन मे कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके

मूह से दबाते हुए उनके सिर को भी ज़ोर. ज़ोर से दबा रही थी और भाई आँख

फाडे हुए अब्बू के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमे भी बहुत

आ रहा था इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद

ही मैं ऊऊओ ऊओह आआहह करते हुए झाड़ गयी और अब्बू का रस भी नीचे से

पिचकारी की तराह बह गया और तब अब्बू मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लिटा कर

तुरंत अपने झाडे हुए लंड को मेरे 2नो चूचियों के बीच मे रगड़ने लगे और

मैं उनके नोक की तराह लंड की टोपी को मूह मे लेने की कोसिस कर रही थी पर

अब्बू जल्दी, जल्दी आगे पीछे कर रहे थे तब मैने कहा अब्बू अपना लंड मेरे

मूह मे दीजिए आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है तब अब्बू ने अपने

लंड को 2नो चूची के बीच से मेरे मूह मे डाल दिया और मेरी चूची को दबाने

लगे और इस तराह से उनके लंड से थोड़ा सा रस.



और निकला जिसे मैं चाट गयी और फिर अब्बू ने अपना लंड मेरी गांद मे धासा

दिया और उस दिन अब्बू और भाई 2नो ने मेरी गांद ही मारी थी मेरी बुर के

साथ कोई हरकत नही की थी और फिर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गांद

एक एक बार और मारी अब मेरी गांद परपारा रही थी और सुबह अब्बू ने कहा

क्यों रानी बेटी क्या ख्याल है क्या अब भी 5 जान से चुद्वाओगि तब मैने

गुस्से से कहा साला बेटीचोड़ भोसड़ी वाले कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना

है तब अब्बू मुस्कुरा कर बोले कोई बात नही आज की रात तैयार रहना आज 5

लोगों को लेकर आउन्गा और फिर मुझे अब्बू से नानी की चुदाई की बात भी

जाननी थी आज रात मुझे 5 जान से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर

मुझे अफ़सोस है कि बहुत सारी लड़कियों को शायद आज भी कोई लंड नसीब नही

होगा और उन्हे मोमबत्ती से काम चलाना पड़ेगा क्यों कि हर लड़की मेरी तराह

बाप और भाई से नही चुदवा सकती.
समाप्त
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07-17-2017, 11:44 AM,
#10
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
कामुक-कहानियाँ

नादान चूत की चुदाई

हेलो फ्रेंड्स, आंटीस आंड स्वीट चूत की मालकिनो, अप सब को आर्नब के खड़े लंड की तरफ से मोस्ट वेलकम!! मैं आर्नब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हूँ. मैं जब क्लास 8थ मे पढ़ता था तभी से मेरे अंदर सेक्स की फीलिंग आ गयी थी. मैं आप लोगो का फालतू समय और पैसा वेस्ट ना कर के सीधे स्टोरी पर आता हूँ.

ये एक सच्ची घटना है. लेकिन इसमे नाम, प्लेस बदला हुआ है और इस घटना को हॉट और एरॉटिक स्टोरी का रूप देने के लिए कुछ बाते जोड़ी गयी हैं. लेट्स नाउ वी कम टू थे स्टोरी…

बात उस समय की है जब मैं 11थ मे पढ़ता था, मैं राज शर्मा की कहानिया बहुत पढ़ता था, और अपने लंड को मसलता रहता. और सोचता रहता कि कोई मुझसे भी चुदवा ले. लेकिन चुदाई होती कैसे है मुझे पता नही था. मैं जहाँ रहता था वहाँ ऐसे लोग भी रहते थे जिनके पास दोनो टाइम खाने को भी नही रहता.

हर दिन शाम को मेरी माताजी उनमे से कुछ बच्चो को दिन का बचा हुआ खाना खाने को देती थी. उनमे दो लड़कियाँ भी थी जो डेली खाना माँगने आ जाती थी. उनकी एज 14-15 साल थी. एक का नाम किरण था और दूसरी का नाम रीना. किरण बहुत गोरी थी जबकि रीना सावली थी. दोनो के चुचिया आपल जितनी बड़ी थी, और वो छ्होटे फ्रॉक पहनती थी, क्यूकी वैसे भी उन के पास पहन ने के लिए कपड़े नही थे.

किरण की चुचिया रीना से बड़ी थी, और उसकी जांघे छ्होटे फ्रॉक मे गोल-गोल और काफ़ी चिकनी और गोरी थी, और उसके चूतड़ भी गोल-गोल और बहुत मस्त लगते थे, कभी-कभी जब वो बैठी रहती तो उसकी छ्होटी सी चड्डी उसकी चूत पर चिपकी हुई दिख जाती थी और जब उठती थी तो उसका फ्रॉक उसके चुतड़ों की गहरहियो मे घुस जाता जिसको देखकर मैं डेली मूठ मारता था.

और रीना, वो सावली तो थी लेकिन बहुत ब्यूटिफुल और सेक्सी लगती थी. मैं जिस एज मे था उसमे वैसे तो सभी लड़कियाँ, भाभियाँ और आंटीस सेक्स बॉम्ब ही लगती है, लेकिन रीना सच मे बहुत सेक्सी थी..जब वो चलती तो उसके उसके चूतड़ जैसे डॅन्स करते थे..बहुत हॉट लगती थी. लेकिन मैं दोनो से कुछ भी कहने या करने डरता था कि वो घर पे बता देंगी.

एक बार मेरे घर के सभी लोग रिलेटिव के यहाँ शादी अटेंड करने चले गये. घर मे सिर्फ़ मैं और एक बुज़ुर्ग नौकर थे. मेरा 11थ का हाफ यियर्ली एग्ज़ॅम स्टार्ट होना था एसलिए मैं नही जा पाया. वो दोनो रोज़ की तरह मा के जाने के बाद भी खाना लेने शाम को आ गयी..लेकिन घर मे कुछ था ही नही. तो दोनो चली गयी.

थोड़ी देर बाद किरण फिर आई और बोली, मुझे भूक लगी है, मेरे घर मे कल रात से कुछ नही बना, क्यूकी उसका बाप दारू पीता था, और उसने जो भी कमाया था उसको दारू मे उड़ा दिया था. मैने कहा आज तो कुछ है नही कल सुबह आना. मैने देखा उसकी आँखो मे आँसू आ गये थे.

किरण को देखकर मुझे बहुत दया आई, और मैं उसके पास जाकर उसके आँसुओ को अपने हाथ से पोछने लगा. उसके गाल को टच करते ही मेरे अंदर सेक्स की फीलिंग होने लगी. मैने उसके गोरे और मुलायम हाथ को पकड़ा और उसको अंदर बुलाया और अपने रूम मे ले गया, और फ्रिड्ज से ब्रेड और बटर ले आया. वो उसको इस तरह खाने लगी जैसे कई दिनो की भूखी हो.

मैं उसके बगल उसके झंघो से अपना जाँघ सटा कर बैठ गया और उसके पीठ पर अपना हाथ रखकर सहलाने लगा. वो ब्रेड खाए जा रही थी. जब उसने 4 ब्रेड खा लिए तब मैने पूछा और चाहिए तो वो हां मे सर को हिलाई. तब मैं जिस हाथ से ब्रेड का पॅकेट पकड़ा था, उस हाथ को उसके गोद मे रख कर बोला आज तो किरण को मैं अपने हाथ से खिलाउँगा..मेरे हाथ से खाओगी..तो वो मुस्कुरा कर हाँ बोली. मुझे लगा आज कुछ मज़ा आ सकता है.

उसकी गोद मे मेरा जो हाथ था वो उसकी चूत के उपर था, जिसे मैं फील कर रहा था. उसकी चूत काफ़ी फूली हुई और बहुत सॉफ्ट लग रही थी. मैने ब्रेड को अपने हाथ से किरण को खिलाना शुरू किया..मैं अब उससे और चिपक गया था. एक अज़ीब सा नशा मेरे अंदर होता जा रहा था. मेरा जो हाथ उसकी गोद मे था मैने उसको उसकी चूत पर थोड़ा और दबा दिया तो वो खाते हुए मेरी तरफ देखी और उसके होंठो पर हल्की सी बट सेक्सी स्माइल थी.

मैने पुछा किरण कैसा लग रहा है, तो उसने कहा क्या?? मैने कहा अरी ब्रेड की बात कर रहा हूँ. तो वो बोली बहुत अच्छा. हम लोगो को ऐसा खाने को कहाँ मिलता है. तब मैने कहा जब तक मम्मी नही है तू रोज़ दोपहर मे आ जाया कर, मैं तुझे बहुत अच्छी-अच्छी चीज़े खाने को दूँगा. तो बोली ठीक है.

मैने देखा कि मेरा जो हाथ उसकी चूत के उपर था, वो कभी-कभी बीच मे वहाँ पर चोरी से देख लेती थी. मैने फील किया कि उसकी साँसे मेरी तरह थोड़ी ज़ोर-ज़ोर से चलने लगी थी, और उसने अपनी जाँघो को थोड़ा और फैला लिया. अब तो उसकी गोद मे रखा मेरा हाथ उसकी दोनो टाँगो के बीच उसकी चूत पर पूरी तरह से आ गया.

मेरा लंड हाफ पॅंट के अंदर जो थोड़ा सा खड़ा था वो उसकी मस्त फूली हुई चूत के एहसास से पूरा खड़ा हो गया था. मेरा डर भी उसकी इस हरकत से कम हो गया था. मैने ब्रेड का पॅकेट बेड पर रखा और उसकी चिकनी जाँघो को धीरे-धीरे सहलाने लगा, और किरण के मूह से दबी-दबी सिसकियाँ निकलने लगी.

मैने उसके फ्रॉक को थोड़ा सा हटा कर उसकी फूली हुई नमकीन चूत को उसकी पतली सी चड्डी के उपर से दबाने और सहलाने लगा, और दूसरे हाथ को आपल जैसी हार्ड चुचियो पर ले जा कर दबा दिया. किरण के मूह से कामुक सी आवाज़ आई…आआआअहह..और वो मुझसे लिपट गयी.

अब तो पूरा रास्ता क्लियर था. मैं उठा और जा कर पहले मैन गेट बंद किया. फिर किरण के पास आया तो वो मेरे बेड पर अपनी गोरी टाँगे फैला कर बैठी थी, मुझे देखते ही सेक्सी स्माइल दिया. मैने किरण को बेड पर लिटा कर उसका फ्रॉक उपर किया और उसकी मस्त छ्होटी सी चूत को उसकी चड्डी के उपर से ही सहलाने लगा और उसकी चुचियाँ जो फ्रॉक उपर करने से खुल गयी थी, क्यूकी उसने फ्रॉक के नीचे कुछ भी नही पहना था, उसको मूह मे ले कर चूसना स्टार्ट किया.

किरण…आआआहह! क्या कर रहे हो आप….. लग रहा है जैसे मेरी चूत मे बहुत सारी चईटियाँ घुस गयी हैं…ऊऊओह!!! और ज़ोर से चूसिए ना…मेरे राजा…मेरे निप्पल्स को खा जाओ ना…आआआहह..!!! बहुत अच्छा लग रहा है…और ज़ोर से दबाओ मेरी चुचियो को… आआआअहह….और जब मैने उसके निप्पल्स को एक बार ज़ोर से मसल दिया तो…आआओउऊउक्ककचह….

मैने किरण की चड्धि नीचे खींच दे..उसकी गोरी, मक्खन जैसी, फूली हुई, और बहुत पिंक चूत मेरी आँखो के सामने थी… बहुत छ्होटी सी चूत थी उसकी, लेकिन बहुत प्यारी…मैं पहली बार किसी की चूत देख रहा था..मैने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा तो उसको झटका सा लगा..वो अपने चुतड़ों को बार-बार उठा रही रही थी..उसको बहुत मज़ा आ रहा था..लेकिन सच बोलूं तो मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैने कोई खजाना पा लिया है.

मैं किरण की चूत के लिप्स को फैला कर उंगली से उसके बीच का हिस्सा सहलाने लगा तो पागल सी हो गयी… उसकी बूर पूरी तरह से भींग चुकी थी…मैने अपना भी हाफ पॅंट खोल दिया और लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथ मे पकड़ा दिया. तो किरण ने कहा मेरे राजा ये तो बहुत बड़ा है..मेरे पापा के लंड से भी..मैने पूछा तुम अपने पापा का लंड कब देखी..तो उसने बताया कि रात मे जब पापा ममी को चोद्ते हैं तब.

और वो मेरे लंड को सहलाने लगी…मेरा तो हाल दोस्तो बहुत बुरा हो गया था…मैने अब किरण की चूत पर अपना मूह लगा दिया…लेकिन मुझे कुछ अच्छा नही लगा..लेकिन राज शर्मा की सभी कहानियो मे लड़की की चूत की चुसाइ और चाटने का जो किस्सा होता थॉ वो मुझे याद आया कि लड़की की चूत चाटने और चूसने से लड़की को बहुत मज़ा आता है.

तब मैने उसकी चूत को चाटना स्टार्ट किया…स्पेशली उसकी बूर को फैला कर बीच वाला हिस्सा..अब किरण पागल होकर बोलने लगी..मेरे राजा अब मेरी बूर मे अपना लंड डाल कर चोदो ना…मुझे तो तुमसे ही अपनी बूर चुदवानी थी..आआअहह!! तभी तो मैं आज फिर से आई…चोदो ना मेरे जानू मुझे…मैने कहा मैं जैसे तेरी बूर चूस रहा हूँ तू भी मेरा लंड चूस ना..तो वो बोली हाँ क्यू नही मैं तो अपने राजा की हर बात मानूँगी..और लंड के उपर का पिंक हिस्सा अपने जीभ से चाटने लगी…आआअहह!! क्या एहसास था दोस्तो…और इधर उसकी बूर पानी पर पानी छ्चोड़े जा रही थी..नमक जैसा स्वाद..

थोड़ी देर मे ही मुझे लगा मेरा पानी गिर जाएगा और मैने उसके मूह मे ही अपना पूरा पानी गिरा दिया..और किरण वो मेरे लंड का पानी बहुत मस्त से पी रही थी…फिर मैने किरण के सारे कपड़े निकाल दिए और उसको अपनी बाँहो मे ले कर बेड पाए लेट गया..मेरा लंड जो सिकुड कर छ्होटा हो गया था..उसकी बूर से चिपका हुआ था..और मेरा हाथ उसकी गोरी , गोल और बला की खूबसूरत चुतड़ों को सहला रहा था. फिर मैने अपना हाथ उसके चुतड़ों की दरार मे डाला और एक उंगली से उसके गांद के छेद को सहलाने लगा..किरण बार-बार अपना गांद आगे पीछे कर रही थी जिस से उसकी चूत बार-बार मेरे लंड से रगड़ खा जाती..

धीरे-धीरे मेरा लंड फिर से टाइट होने लगा. मैं थोड़ा सा नीचे की तरफ सरक कर उसकी चुचियो को मूह मे लेकर चूसने लगा..और मेरे हाथ उसके गोल-गोल चुतदो पर थे..वो अब मेरा लंड अपने हाथ मे लेकर सहला रही थी. फिर मैं अपना हाथ उसकी बूर पर ले गया जो फिर से पूरी तरह गीली हो चुकी थी मैने उसके बूर को सहलाते हुए उसकी चूत मे उंगली डाली जो बहुत आराम से चली गयी..वो फिर से मादक अंदाज़ मे सिसकियाँ लेने लगी…आआआहह…जानू अब तो चोदो मुझे…मेरी बूर को फाड़ डालो ना…

अब मेरे बर्दस्त के भी बाहर होता जा रहा था..मैने उसकी टाँगो को फैला कर उसकी फूली हुई मस्त बूर पर अपना लंड रखा और ज़ोर का धक्का लगाया मेरा लंड 3 इंच उसकी बूर मे चला गया…वो अया..अया.. कर रही थी…फिर मैने एक धक्का फिर लगाया तो लंड 5 इंच घुस गया लेकिन तभी वो चिल्लाने लगी… ऊउउउउईईएईई माआ….फट गई मेरी बूर…निकालो बहुत दर्द हो रहा है…मैने कहा ठीक है बस 5 मिनट रूको फिर निकाल लेता हूँ…मैं लंड को हिलाउन्गा नही..ऐसे ही तुम्हारी बूर मे रहेगा..और मैं उसकी चुचियो को चूसने लगा…और एक हाथ उसकी बूर के पास घुसा कर सहलाने लगा.

5 मिंट भी नही हुए होंगे वो अपने चुतदो को बार - बार उठाने लगी…लौंडिया मस्ती मे आ चुकी थी..तभी मैने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक ज़ोर का धक्का दिया तो मेरा पूरा 7 इंच का लंड उसकी बूर की गहराइयों मे जा चुक्का था..मैने धीरे-धीरे उसके बूर को चोदना स्टार्ट किया…थोड़ी देर मे

वो आआआअहह….. ऊऊऊहह!!! जानू चोदो, और ज़ोर से… और वो अपने मस्त गांद को उठा-उठा कर अपनी बूर को भोसड़ा बनवाने लगी….चोदो जान…मैं पहले एक बार नानी के घर गयी थी तब मामा के लड़के ने मुझे 2 दिन चोदा था…तभी से मैं आप से चुदवाना चाहती थी…आआअहह..!! क्या मस्त लॉडा है मेरे राजा का…अंदर तक मेरी बूर की ठोकाई कर रहा है…आआहह…मेरे राजा ये क्या हो रहा है मुझे..आअहह!!! मेरी बूर मे कुछ हो रहा है…कहते हुए मुझे और ज़ोर से जाकड़ लिया और उसने ढेर सारा पानी अपनी बूर से निकाल दिया…मैं अभी भी उसको चोद रहा था..

अब लंड और भी आराम से और लपलुप उसकी बूर मे आ जा रहा रहा था..और आवाज़ भी बहुत मस्त आ रही थी…फफफफ़ूूचह….फफफफफुऊऊुउऊचह….

15 मिंट की चुदाई का बाद मेरा भी गिरने वाला था…मैने ज़ोर-ज़ोर के 15-20 स्ट्रोक्स उसकी..कमसिन बूर को दिए और उसकी बूर मे ही पूरा पानी भर दिया..और उसके उपर गिर गया…

मैं उसकी गांद भी मारना चाहता था लेकिन बहुत देर हो गयी थी..और उसकी मा उसको ढूँढ भी सकती थी. एसलिए मैने उसको दूसरे दिन दोपहर मे बुलाया. दूसरे दिन हम दोनो ने 4 बार चुदाई की और 2 बार मैने उसकी टाइट गांद भी मार कर फाड़ दी...

समाप्त!!
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